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  • सूर्य के नक्षत्र उत्तराफाल्गुनी में चंद्रमा का प्रवेश, इन 4 राशियों पर बरसेगी सफलता, सम्मान और धन की वर्षा

    सूर्य के नक्षत्र उत्तराफाल्गुनी में चंद्रमा का प्रवेश, इन 4 राशियों पर बरसेगी सफलता, सम्मान और धन की वर्षा

    नई दिल्ली। गंगा दशहरा 2026 के पावन अवसर पर एक महत्वपूर्ण ज्योतिषीय परिवर्तन देखने को मिल रहा है, जिसने ज्योतिष प्रेमियों और राशि आधारित भविष्य में रुचि रखने वाले लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लिया है। 25 मई 2026 को चंद्रमा सूर्य के प्रभाव वाले उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में प्रवेश कर चुके हैं और यह गोचर 26 मई की सुबह तक प्रभावी रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार चंद्रमा मन, भावनाओं और निर्णय क्षमता का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र को स्थिरता, प्रतिष्ठा और सफलता से जोड़कर देखा जाता है। ऐसे में इस विशेष संयोग का असर कुछ राशियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लेकर आने वाला माना जा रहा है।

    इस नक्षत्र परिवर्तन का प्रभाव विशेष रूप से मिथुन राशि के जातकों के लिए शुभ संकेत दे रहा है। लंबे समय से नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को अच्छे अवसर मिल सकते हैं और करियर में आगे बढ़ने के रास्ते खुल सकते हैं। व्यापार से जुड़े लोगों के लिए भी समय लाभकारी माना जा रहा है, जहां नई साझेदारी या बड़ी डील सफलता का कारण बन सकती है। आर्थिक स्थिति में सुधार और रुके हुए कार्यों के पूरे होने की संभावना से मानसिक संतुष्टि बढ़ सकती है।

    कर्क राशि के जातकों के लिए भी यह गोचर राहत और सकारात्मक ऊर्जा लेकर आने वाला माना जा रहा है। परिवार में चल रही परेशानियां कम हो सकती हैं और रिश्तों में मधुरता लौटने के संकेत मिल रहे हैं। कार्यक्षेत्र में अच्छी खबर मिलने के योग बन सकते हैं। नौकरीपेशा लोगों को पदोन्नति या वेतन वृद्धि जैसी खुशखबरी मिल सकती है। व्यापारिक गतिविधियों में भी गति बढ़ने के संकेत दिखाई दे रहे हैं, जिससे आत्मविश्वास में बढ़ोतरी हो सकती है।

    सिंह राशि के लिए यह समय विशेष रूप से प्रभावशाली माना जा रहा है। नेतृत्व क्षमता और आत्मविश्वास में वृद्धि के साथ सामाजिक पहचान मजबूत हो सकती है। करियर में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं और आय के नए स्रोत बनने की संभावना भी जताई जा रही है। समाज में सम्मान बढ़ सकता है और लोग आपके विचारों को गंभीरता से सुन सकते हैं। यह समय नई शुरुआत और बड़े निर्णय लेने के लिए अनुकूल माना जा रहा है।

    वहीं धनु राशि के जातकों के लिए भी यह गोचर नई उम्मीदें लेकर आ सकता है। लंबे समय से अटके हुए कार्यों में गति आने की संभावना है और सफलता के नए मार्ग खुल सकते हैं। सरकारी कार्यों से जुड़े मामलों में राहत मिल सकती है और यदि कोई कानूनी प्रक्रिया चल रही है तो सकारात्मक संकेत मिल सकते हैं। मानसिक शांति और आत्मविश्वास बढ़ने से व्यक्ति अपने फैसले अधिक स्पष्टता के साथ ले पाएगा। ज्योतिषीय दृष्टि से देखा जाए तो गंगा दशहरा पर बना यह चंद्र गोचर कई लोगों के लिए नई ऊर्जा और नई संभावनाओं का संकेत बनकर सामने आ सकता है।

  • Astrology: इन राशियों के लोगों की रगों में बहती है कला, जन्म से ही होते हैं क्रिएटिव और टैलेंटेड

    Astrology: इन राशियों के लोगों की रगों में बहती है कला, जन्म से ही होते हैं क्रिएटिव और टैलेंटेड


    नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों और राशियों का असर केवल स्वभाव या भाग्य तक सीमित नहीं माना जाता, बल्कि यह व्यक्ति की प्रतिभा, सोच और रचनात्मक क्षमता को भी प्रभावित करता है। कहा जाता है कि कुछ लोग मेहनत से कलाकार बनते हैं, जबकि कुछ लोग जन्म से ही कला का वरदान लेकर आते हैं। उनकी सोच, कल्पनाशक्ति और सौंदर्य को देखने का नजरिया उन्हें भीड़ से अलग बना देता है।

    ज्योतिष के अनुसार शुक्र और चंद्रमा ऐसे ग्रह हैं, जो इंसान के भीतर कला, संगीत, भावनाएं और रचनात्मकता पैदा करते हैं। जिन लोगों की कुंडली में इन ग्रहों की स्थिति मजबूत होती है, वे अक्सर संगीत, लेखन, अभिनय, डिजाइनिंग, पेंटिंग या फैशन जैसे क्षेत्रों में खास पहचान बनाते हैं। खास तौर पर वृषभ, कर्क और तुला राशि के लोगों को जन्मजात कलाकार माना जाता है।

    वृषभ राशि: सुंदरता और संगीत के दीवाने
    वृषभ राशि का स्वामी शुक्र ग्रह होता है, जिसे कला, आकर्षण और विलासिता का कारक माना गया है। इस राशि के लोग स्वभाव से बेहद क्रिएटिव और सौंदर्य प्रेमी होते हैं। इन्हें संगीत, गायन, पेंटिंग और डिजाइनिंग जैसी चीजों में खास रुचि रहती है।

    इनकी आवाज में स्वाभाविक मिठास होती है, जिसकी वजह से कई लोग अच्छे गायक या संगीतकार बनते हैं। इसके अलावा रंगों और सजावट की गहरी समझ इन्हें फैशन, इंटीरियर डिजाइन और कुकिंग जैसे क्षेत्रों में भी सफलता दिलाती है। वृषभ राशि के लोग धैर्य के साथ काम करते हैं और छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देकर अपने हुनर को निखारते हैं।

    कर्क राशि: भावनाओं से जन्म लेती है इनकी कला
    कर्क राशि का स्वामी चंद्रमा है, जो मन, भावनाओं और कल्पनाओं का प्रतीक माना जाता है। इस राशि के लोग बेहद संवेदनशील और भावुक होते हैं और यही गुण उनकी सबसे बड़ी ताकत बन जाता है।

    इनकी कल्पनाशक्ति बहुत तेज होती है, इसलिए ये लेखन, कविता, अभिनय और कहानी कहने जैसी विधाओं में शानदार प्रदर्शन करते हैं। कर्क राशि के लोग दूसरों की भावनाओं को गहराई से समझते हैं, इसलिए इनके काम में एक अलग ही भावनात्मक जुड़ाव दिखाई देता है। यही कारण है कि इनके द्वारा लिखा गया शब्द या निभाया गया किरदार सीधे लोगों के दिल तक पहुंच जाता है।

    तुला राशि: स्टाइल, ग्रेस और परफेक्शन का मेल
    तुला राशि पर भी शुक्र ग्रह का प्रभाव रहता है, लेकिन यहां यह प्रभाव स्टाइल, संतुलन और खूबसूरती के रूप में दिखाई देता है। तुला राशि के लोगों का फैशन सेंस बेहद शानदार माना जाता है।

    इन्हें कपड़ों, रंगों, डिजाइन और ट्रेंड्स की अच्छी समझ होती है। यही वजह है कि ये लोग फैशन डिजाइनिंग, आर्किटेक्चर, मेकअप, स्टाइलिंग और सजावट जैसे क्षेत्रों में बड़ी सफलता हासिल कर सकते हैं। इनके काम में एक खास तरह की क्लास और रॉयल फील दिखाई देती है। तुला राशि के लोग हर चीज को परफेक्ट बनाने की कोशिश करते हैं और जब तक काम खूबसूरत न लगे, इन्हें संतुष्टि नहीं मिलती।

    ज्योतिष शास्त्र मानता है कि कला केवल सीखी नहीं जाती, कई बार यह इंसान के भीतर जन्म से मौजूद होती है। वृषभ, कर्क और तुला राशि के लोग इसी प्राकृतिक रचनात्मकता और कलात्मक सोच की वजह से भीड़ में अपनी अलग पहचान बनाने में सफल रहते हैं।

  • सीमा पर चीन की ‘साइलेंट स्ट्रैटेजी’, PoK के करीब नई काउंटी; वैश्विक तनाव के बीच बढ़ी हलचल

    सीमा पर चीन की ‘साइलेंट स्ट्रैटेजी’, PoK के करीब नई काउंटी; वैश्विक तनाव के बीच बढ़ी हलचल


    नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने जहां दुनिया का ध्यान पश्चिम एशिया की ओर खींच रखा है, वहीं इसी बीच चीन ने अपने सीमावर्ती इलाके में एक अहम प्रशासनिक कदम उठाकर नई भू-राजनीतिक चर्चा छेड़ दी है। चीन ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) और अफगानिस्तान से सटे शिनजियांग क्षेत्र में “सेनलिंग” नाम से नई काउंटी का गठन किया है।
    रिपोर्ट्स के अनुसार, यह नई प्रशासनिक इकाई काराकोरम पर्वतमाला के पास स्थित है और रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील मानी जा रही है। खासकर वाखान कॉरिडोर की निगरानी और क्षेत्र में उइगर गतिविधियों पर नियंत्रण को लेकर इसे चीन की बड़ी तैयारी के रूप में देखा जा रहा है।

    सीमावर्ती इलाकों पर लगातार फोकस
    चीन पिछले एक साल में शिनजियांग में “हेआन” और “हेकांग” के बाद यह तीसरी नई काउंटी बना चुका है। विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम सीमा क्षेत्रों में प्रशासनिक पकड़ मजबूत करने और सुरक्षा तंत्र को स्थानीय स्तर पर सुदृढ़ करने की दीर्घकालिक नीति का हिस्सा है।

    भारत की आपत्ति बरकरार
    भारत ने इस तरह के बदलावों पर पहले भी कड़ा विरोध दर्ज कराया है। भारत का कहना है कि इन नई इकाइयों के कुछ हिस्से उसके केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में आते हैं।

    विशेष रूप से अक्साई चिन को लेकर भारत ने अपनी संप्रभुता दोहराते हुए चीन के कदमों को अस्वीकार्य बताया है।

    काशगर से जुड़ा प्रशासनिक नियंत्रण
    नई काउंटी को काशगर प्रशासन के तहत रखा जाएगा, जो ऐतिहासिक रूप से सिल्क रूट का प्रमुख केंद्र रहा है। यही क्षेत्र चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) का शुरुआती बिंदु भी है, जिससे इसकी रणनीतिक अहमियत और बढ़ जाती है।

    सुरक्षा और रणनीति का मिश्रण
    विशेषज्ञों के मुताबिक, यह कदम केवल प्रशासनिक पुनर्गठन नहीं, बल्कि सीमा क्षेत्रों में सुरक्षा और निगरानी मजबूत करने की व्यापक रणनीति है। वाखान कॉरिडोर—करीब 74 किलोमीटर लंबा यह क्षेत्र—चीन के लिए संवेदनशील इसलिए भी है क्योंकि यह ताजिकिस्तान और PoK के बीच स्थित है।

    चीन को आशंका रही है कि ईस्ट तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट से जुड़े उइगर लड़ाके इस रास्ते का इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसे में नई काउंटी के जरिए स्थानीय प्रशासन, खुफिया निगरानी और सुरक्षा तंत्र को और मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।

    आगे क्या?
    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की चेतावनियों के बावजूद चीन के इस कदम से क्षेत्रीय तनाव और बढ़ सकता है। आने वाले समय में यह मुद्दा कूटनीतिक और सामरिक स्तर पर और अहम हो सकता है, जिस पर पूरी दुनिया की नजर बनी रहेगी।

  • Eid 2026: भारत में ईद-उल-फितर 21 मार्च को, पूरे 30 रोजे रखे गए

    Eid 2026: भारत में ईद-उल-फितर 21 मार्च को, पूरे 30 रोजे रखे गए


    नई दिल्ली। भारत में ईद उल फितर 2026 की तारीख तय हो गई है। इस बार रमजान के पूरे 30 रोजे रखे गए हैं। 20 मार्च को 30वां रोजा रखा गया और अगले दिन यानी 21 मार्च शनिवार को देशभर में ईद मनाई जाएगी। यह घोषणा धार्मिक कमेटी और जामा मस्जिद दिल्ली के नायब इमाम सैयद उसामा शाबान बुखारी ने की।

    भारत में ईद की तारीख चांद दिखने पर निर्भर करती है। इस बार 19 मार्च को शव्वाल का चांद नजर नहीं आया जिससे रमजान का आखिरी रोजा बढ़ गया। इसके बाद 20 मार्च को चांद देखने के बाद ईद 21 मार्च को मनाने का फैसला लिया गया। वहीं सऊदी अरब में 20 मार्च को ही ईद उल फितर मनाई जा रही है।

    ईद उल फितर का महत्व 

    ईद उल फितर इस्लाम धर्म का एक प्रमुख त्योहार है। इसका मतलब है रोजा खोलने का त्योहार । यह रमजान के पूरे महीने रोजे रखने के बाद मनाया जाता है और अल्लाह का धन्यवाद अदा करने का अवसर होता है। यह पर्व खुशियों और भाईचारे का प्रतीक है।

    इतिहास में ईद उल फितर की शुरुआत 624 ईस्वी में पैगंबर हजरत मुहम्मद ने मदीना में की थी। हिजरत के बाद मुसलमानों ने पहला रमजान पूरा किया और तब ईद उल फितर और ईद उल अजहा दो पर्व तय किए गए। इस बार के ईद समारोह के लिए तैयारियां जोरों पर हैं। मस्जिदों और सार्वजनिक स्थानों पर नमाज़ की व्यवस्था की जा रही है। लोग अपने घरों में भी सजावट और ईद की मिठाइयों की तैयारी में जुटे हैं।