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  • चीन की चंद्रमा पर आदमी उतारने की तैयारी…. 2030 से पहले भेजेगा 3 एस्ट्रोनॉट्स

    चीन की चंद्रमा पर आदमी उतारने की तैयारी…. 2030 से पहले भेजेगा 3 एस्ट्रोनॉट्स


    बीजिंग।
    चीन (China) ने चंद्रमा (Moon) पर आदमी उतारने (Astronauts) की अपनी योजना साफ कर दी है. 31 अक्टूबर 2026 को सातवें ह्यूमन स्पेस सिंपोजियम (7th Human Space Symposium) में बताया कि वह 2030 से पहले पहली बार ताइकोनॉट्स यानी एस्ट्रोनॉट्स को चंद्रमा की सतह पर भेज देगा. इसमें दो लॉन्ग मार्च-10 रॉकेट का इस्तेमाल होगा।

    एक रॉकेट लान्यू लैंडर को चंद्रमा की कक्षा में पहुंचाएगा. दूसरा रॉकेट मेंग्झोउ अंतरिक्ष यान (Mengzhou spacecraft) में तीन ताइकोनॉट्स को लेकर जाएगा. दोनों यान कक्षा में जुड़ेंगे. फिर दो अंतरिक्ष यात्री लैंडर में बैठकर चंद्रमा पर उतरेंगे. वे तीन दिन रुकेंगे और हर दिन स्पेसवॉक करेंगे।

    पूरा मिशन दो भागों में बंटा है. पहले लैंडर को भेजा जाएगा. उसके बाद चालक दल वाला यान जाएगा. दोनों के जुड़ने के बाद दो ताइकोनॉट्स नीचे उतरेंगे. तीसरा यान में ही रहेगा. तीन दिन तक वे चंद्रमा की सतह पर काम करेंगे. रोज स्पेसवॉक का मतलब है कि वे बाहर निकलकर नमूने जमा करेंगे या मशीनें लगाएंगे. यह योजना काफी सोच-समझकर बनाई गई है ताकि जोखिम कम रहे।


    अभी क्या तैयारी चल रही है

    चीन बिना चालक दल वाले कई टेस्ट कर रहा है. पूरी ड्रेस रिहर्सल भी हो रही है. यानी असली मिशन जैसा अभ्यास बिना आदमी के. ये टेस्ट सफल रहे तो ही आखिरी मिशन भेजा जाएगा. चीन सिर्फ एक बार उतरने तक सीमित नहीं रहना चाहता. आगे चलकर चंद्रमा पर रिसर्च स्टेशन बनाने की भी योजना है।

    यह योजना नासा के आर्टेमिस प्रोग्राम के साथ मेल खाती है. अमेरिका भी जल्द चंद्रमा पर वापस जाना चाहता है. चीन अपनी रफ्तार बढ़ा रहा है. दोनों देश अलग-अलग रास्ते से एक ही लक्ष्य की ओर बढ़ रहे हैं. चीन का फोकस स्वदेशी तकनीक पर है. लॉन्ग मार्च-10, लान्यू लैंडर और मेंग्झोउ यान सब स्वदेशी हैं।


    क्यों महत्वपूर्ण है यह मिशन

    चंद्रमा पर आदमी उतारना सिर्फ गर्व की बात नहीं है. इससे नई तकनीकें निकलती हैं. भविष्य में चंद्रमा से संसाधन निकालने या आगे मंगल जाने की तैयारी भी होती है. चीन पहले ही अपने अंतरिक्ष स्टेशन और रोवर मिशनों से काफी अनुभव हासिल कर चुका है. अब वह अगला बड़ा कदम उठाने जा रहा है।

    आम भाषा में कहें तो चीन कह रहा है कि 2030 से पहले उसके तीन अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा पर जाएंगे. दो रॉकेट से सब सामान और आदमी जाएंगे. तीन दिन वहां रुककर काम करेंगे. अभी टेस्ट चल रहे हैं. अगर सब ठीक रहा तो चीन भी अमेरिका की तरह चंद्रमा पर अपना झंडा गाड़ देगा।

  • कुंभ राशि में राहु-चंद्रमा की युति से बनेगा ग्रहण योग, तीन राशियों को रहना होगा सतर्क

    कुंभ राशि में राहु-चंद्रमा की युति से बनेगा ग्रहण योग, तीन राशियों को रहना होगा सतर्क

    नई दिल्ली ।ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार 23 सितंबर को चंद्रमा कुंभ राशि में प्रवेश करेगा। इस राशि में पहले से राहु की स्थिति बताई गई है। ऐसे में चंद्रमा और राहु की युति से ग्रहण योग बनने की बात कही जा रही है। ज्योतिष में राहु और चंद्रमा की युति को सामान्य तौर पर शुभ नहीं माना जाता है।

    मान्यता है कि इस तरह के ग्रह योग का प्रभाव अलग-अलग राशियों पर उनकी कुंडली में ग्रहों की स्थिति के अनुसार अलग हो सकता है। कुंभ राशि में बनने वाले इस योग के कारण कुछ राशि वालों को आर्थिक, करियर और कार्यक्षेत्र से जुड़े मामलों में अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के मुताबिक कर्क राशि के जातकों के लिए आने वाले कुछ दिन विशेष सावधानी वाले हो सकते हैं। चंद्रमा इस राशि से आठवें भाव में जाकर राहु के साथ युति बनाएगा। आठवें भाव में बनने वाली इस स्थिति को कई तरह के उतार-चढ़ाव से जोड़कर देखा जाता है।

    कर्क राशि वालों के खर्चों में अचानक वृद्धि होने की संभावना बताई गई है। साथ ही सामाजिक या पेशेवर स्तर पर छवि प्रभावित होने की आशंका भी जताई गई है। ऐसे में करियर से जुड़े फैसलों में जल्दबाजी से बचने और अपने काम पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी जाती है।

    कन्या राशि के जातकों के लिए ग्रहण योग छठे भाव में बनने की बात कही गई है। ज्योतिष में छठे भाव का संबंध शत्रु, रोग, प्रतिस्पर्धा और विभिन्न प्रकार की बाधाओं से माना जाता है। इसलिए इस अवधि में विरोधियों और प्रतिस्पर्धियों को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

    कार्यस्थल पर कन्या राशि वालों को अपने फैसलों और जिम्मेदारियों को लेकर सावधानी बरतनी होगी। आर्थिक मामलों में भी किसी तरह की लापरवाही से बचने की जरूरत बताई गई है। विशेष रूप से लेनदेन से जुड़े मामलों में बिना पूरी जानकारी के किसी दूसरे व्यक्ति पर भरोसा करने से बचने की सलाह दी गई है।

    मीन राशि के जातकों के लिए भी इस ग्रह स्थिति को सावधानी से जोड़कर देखा जा रहा है। बताया गया है कि ग्रहण योग मीन राशि से बारहवें भाव में बनेगा। ज्योतिषीय मान्यता में बारहवें भाव का संबंध खर्च और आर्थिक नुकसान से माना जाता है।

    इसी वजह से मीन राशि वालों को इस अवधि में अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण रखने और आर्थिक मामलों में सतर्क रहने की सलाह दी गई है। करियर के क्षेत्र में भी काम को लेकर लापरवाही से बचना जरूरी बताया गया है। कार्यक्षेत्र में छोटी-सी असावधानी भी परेशानी बढ़ा सकती है, ऐसी ज्योतिषीय मान्यता है।

    ग्रहण योग को लेकर बताई गई ये बातें ज्योतिषीय मान्यताओं और कुंडली की व्याख्या पर आधारित हैं। किसी व्यक्ति पर इसका प्रभाव उसकी व्यक्तिगत जन्मकुंडली में ग्रहों की स्थिति के अनुसार अलग-अलग माना जाता है। इसलिए केवल राशि के आधार पर किसी निश्चित घटना की भविष्यवाणी नहीं की जा सकती।

    23 सितंबर से बनने वाली राहु-चंद्रमा की युति के दौरान कर्क, कन्या और मीन राशि के जातकों को विशेष रूप से आर्थिक लेनदेन, करियर और खर्चों से जुड़े मामलों में सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

  • ट्रंप के ‘चांद हमारा है’ दावे के बीच जानिए अंतरराष्ट्रीय कानून किसी देश या व्यक्ति को चंद्रमा की जमीन क्यों नहीं देता

    ट्रंप के ‘चांद हमारा है’ दावे के बीच जानिए अंतरराष्ट्रीय कानून किसी देश या व्यक्ति को चंद्रमा की जमीन क्यों नहीं देता

    नई दिल्ली ।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चांद को लेकर दिए गए बयान के बाद एक बार फिर यह सवाल उठ रहा है कि आखिर चांद पर किसका अधिकार है। ट्रंप ने रविवार को सोशल मीडिया पर चांद की तस्वीर साझा की, जिस पर ‘चंद्रमा हमारा है’ लिखा था और अमेरिकी झंडा भी दिखाई दे रहा था। इसके साथ ही चांद की जमीन खरीदने और उसके प्रमाणपत्र देने के दावे भी चर्चा में हैं।

    चांद पर जमीन खरीदने के दावे लंबे समय से सामने आते रहे हैं। कई लोग जन्मदिन, शादी या अन्य खास मौकों पर चांद की जमीन उपहार में देने की बात कहते हैं। कुछ संस्थाएं चांद की जमीन के नाम पर प्रमाणपत्र और दस्तावेज भी बेचती हैं। हालांकि इन दस्तावेजों से चांद की जमीन पर वास्तविक कानूनी मालिकाना हक हासिल नहीं होता।

    चांद और दूसरे खगोलीय पिंडों से जुड़े अंतरराष्ट्रीय नियमों का प्रमुख आधार 1967 की अंतरिक्ष संधि है। इस संधि में भारत और अमेरिका समेत 114 देश शामिल हैं। संधि के अनुसार बाहरी अंतरिक्ष की खोज और उसका इस्तेमाल सभी देशों के लाभ और हित में होना चाहिए। चांद और दूसरे खगोलीय पिंड भी इसी व्यवस्था का हिस्सा हैं।

    संधि का अनुच्छेद 2 विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। इसके अनुसार बाहरी अंतरिक्ष, जिसमें चांद और अन्य खगोलीय पिंड शामिल हैं, किसी देश के राष्ट्रीय अधिकार क्षेत्र में नहीं आ सकते। कोई देश संप्रभुता, कब्जे या किसी अन्य तरीके से चांद के किसी हिस्से को अपना राष्ट्रीय क्षेत्र घोषित नहीं कर सकता। इसलिए किसी देश का चांद पर राष्ट्रीय स्वामित्व का दावा अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुरूप नहीं है।

    हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि देश चांद पर मिशन नहीं भेज सकते। अंतरिक्ष संधि सभी देशों को अंतरिक्ष और खगोलीय पिंडों की खोज तथा इस्तेमाल की स्वतंत्रता देती है। वैज्ञानिक अनुसंधान भी किया जा सकता है, लेकिन अंतरिक्ष गतिविधियां अंतरराष्ट्रीय शांति, सुरक्षा और सहयोग के सिद्धांतों के अनुरूप होनी चाहिए।

    चांद पर पहुंचने वाले यान और उपकरणों को लेकर भी संधि में अलग व्यवस्था है। अनुच्छेद 8 के अनुसार किसी देश के पंजीकरण में दर्ज अंतरिक्ष वस्तु पर उस देश का अधिकार और नियंत्रण बना रहता है। चांद पर उतरने के बाद भी किसी यान या उपकरण का स्वामित्व केवल इसलिए खत्म नहीं होता कि वह खगोलीय पिंड पर मौजूद है। लेकिन इससे चांद की जमीन पर उस देश का मालिकाना हक नहीं बनता।

    निजी कंपनियों के लिए भी नियम स्पष्ट हैं। अनुच्छेद 6 के तहत सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं की अंतरिक्ष गतिविधियों की अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी संबंधित देश की होती है। निजी संस्थाओं को अंतरिक्ष गतिविधियों के लिए संबंधित देश की अनुमति और लगातार निगरानी व्यवस्था के तहत काम करना होता है।

    चांद पर जमीन बेचने के दावे भी कई दशकों से होते रहे हैं। जर्मनी के नागरिक मार्टिन जुर्गेंस ने चांद को अपने परिवार की संपत्ति बताया था। बाद में अमेरिकी कारोबारी डेनिस होप ने लूनर एंबेसी नाम की संस्था के जरिए चांद की जमीन बेचने का दावा किया और लोगों को प्रमाणपत्र देने शुरू किए।

    ऐसे प्रमाणपत्र कुछ लोग मनोरंजन, कल्पना या उपहार के तौर पर खरीदते हैं। लेकिन अंतरराष्ट्रीय कानून में निजी व्यक्तियों या कंपनियों के लिए चांद की जमीन के मालिकाना हक का कोई मान्य पंजीकरण तंत्र नहीं है। इसलिए इन प्रमाणपत्रों को कानूनी संपत्ति अधिकार नहीं माना जाता।

    चांद पर गतिविधियों से होने वाले नुकसान को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय नियम मौजूद हैं। अनुच्छेद 7 के अनुसार अंतरिक्ष वस्तुओं से दूसरे देशों या उनके लोगों को नुकसान होने की स्थिति में लॉन्च करने वाले देश की अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी बन सकती है। अनुच्छेद 9 देशों को ऐसी गतिविधियों से बचने और दूसरे देशों के हितों का ध्यान रखने की बात कहता है।

    चांद तक पहुंचने में सोवियत संघ, अमेरिका, जापान, यूरोप, भारत और चीन समेत कई देशों ने महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। भारत के चंद्रयान-1 और चंद्रयान-3 जैसे मिशनों ने चंद्रमा के अध्ययन में योगदान दिया है। अमेरिका के अपोलो मिशनों ने इंसानों को चांद की सतह तक पहुंचाया, जबकि हाल के वर्षों में सरकारी और निजी मिशनों की गतिविधियां भी बढ़ी हैं।

    इसलिए चांद पर यान भेजना, वैज्ञानिक उपकरण स्थापित करना या शोध करना और चांद की जमीन का मालिक बनना अलग-अलग बातें हैं। मौजूदा अंतरराष्ट्रीय नियम किसी देश को चांद पर संप्रभुता स्थापित करने की अनुमति नहीं देते और जमीन खरीदने के प्रमाणपत्र भी वास्तविक कानूनी मालिकाना हक प्रदान नहीं करते।

  • 11 या 12 अगस्त, कब लगेगा साल का दूसरा सूर्य ग्रहण ? जानें भारत में दिखेगा या नहीं

    11 या 12 अगस्त, कब लगेगा साल का दूसरा सूर्य ग्रहण ? जानें भारत में दिखेगा या नहीं


    नई दिल्ली। वर्ष 2026 का दूसरा और पूर्ण सूर्य ग्रहण 12 अगस्त को लगेगा। यह खगोलीय घटना विज्ञान और ज्योतिष, दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस दौरान चंद्रमा पूरी तरह सूर्य को ढक लेगा, जिससे पृथ्वी के कुछ हिस्सों में दिन के समय अंधकार छा जाएगा। हालांकि, यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां सूतक काल प्रभावी नहीं माना जाएगा।

    कब लगेगा सूर्य ग्रहण?
    समय क्षेत्र (टाइम जोन) के अंतर के कारण कुछ देशों में यह ग्रहण 11 अगस्त की तारीख में दिखाई दे सकता है, लेकिन भारतीय समय (IST) के अनुसार यह 12 अगस्त 2026 को लगेगा। इसलिए भारत में इसकी मान्य तिथि 12 अगस्त ही होगी।

    सूर्य ग्रहण का समय (भारतीय समय)
    ग्रहण प्रारंभ: रात 9:04 बजे
    चरम (पीक): रात 11:17 बजे
    ग्रहण समाप्त: देर रात 1:27 बजे (13 अगस्त)

    कहां दिखाई देगा पूर्ण सूर्य ग्रहण?
    यह पूर्ण सूर्य ग्रहण मुख्य रूप से इन क्षेत्रों में दिखाई देगा—
    ग्रीनलैंड
    आइसलैंड
    स्पेन
    रूस
    अटलांटिक महासागर के कुछ हिस्से
    इसके अलावा यूरोप के अधिकांश देशों, उत्तरी अमेरिका के कुछ क्षेत्रों और उत्तर-पश्चिमी अफ्रीका में यह आंशिक सूर्य ग्रहण के रूप में देखा जा सकेगा।

    क्या भारत में दिखाई देगा?
    नहीं। यह सूर्य ग्रहण भारत में दृश्यमान नहीं होगा, क्योंकि भारतीय समय के अनुसार यह रात में घटित होगा। इसलिए देश में इसे देखा नहीं जा सकेगा।

    क्या भारत में सूतक काल लगेगा?
    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य ग्रहण से 12 घंटे पहले सूतक काल शुरू होता है। लेकिन चूंकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां सूतक काल मान्य नहीं होगा। मंदिरों के कपाट सामान्य रूप से खुले रहेंगे और पूजा-पाठ व अन्य मांगलिक कार्यों पर कोई प्रतिबंध नहीं रहेगा।

    ज्योतिषीय महत्व
    ज्योतिष के अनुसार यह ग्रहण सिंह राशि और मघा नक्षत्र में लगेगा। सिंह राशि के स्वामी स्वयं सूर्य हैं, इसलिए इस राशि के जातकों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार ग्रहण का प्रभाव वैश्विक स्तर पर मौसम, प्राकृतिक घटनाओं और राजनीतिक परिस्थितियों पर भी पड़ सकता है।

    ग्रहण के बाद क्या करें?
    – भगवान शिव या अपने इष्ट देव का स्मरण और मंत्र जाप करना शुभ माना जाता है।
    – ग्रहण समाप्त होने के बाद गेहूं, गुड़, तांबे के बर्तन या लाल वस्त्र का दान करना धार्मिक दृष्टि से लाभकारी माना जाता है।

  • 28 जुलाई का करियर राशिफल: चंद्रमा के राशि परिवर्तन से करियर और धन के नए अवसर, कई राशियों को मिलेगा लाभ

    28 जुलाई का करियर राशिफल: चंद्रमा के राशि परिवर्तन से करियर और धन के नए अवसर, कई राशियों को मिलेगा लाभ

    नई दिल्ली । 28 जुलाई का दिन ग्रह-नक्षत्रों की चाल के अनुसार करियर, व्यापार और आर्थिक मामलों में संतुलित निर्णय लेने का संकेत दे रहा है। दिन की शुरुआत में चंद्रमा धनु राशि में रहेंगे, जिससे नई योजनाओं पर काम करने का उत्साह बढ़ेगा। शाम के समय चंद्रमा मकर राशि में प्रवेश करेंगे, जिसके बाद कार्यों में अनुशासन, जिम्मेदारी और व्यावहारिक सोच का प्रभाव अधिक दिखाई देगा। सूर्य और बृहस्पति की स्थिति भी निर्णय क्षमता को मजबूत करने में सहायक मानी जा रही है, जबकि शनि धैर्य और नियमित प्रयासों का महत्व बढ़ाएंगे।

    मेष राशि के लोगों के लिए दिन आर्थिक स्थिरता का संकेत दे रहा है। पुराने वित्तीय मामलों में प्रगति हो सकती है और कार्यस्थल पर योजनाबद्ध तरीके से काम करने से लाभ मिलेगा। वृष राशि के जातकों को अपने प्रयासों का सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना है। बजट पर नियंत्रण और नियमित कार्यशैली उनके लिए लाभदायक साबित हो सकती है।

    मिथुन राशि के लोगों के लिए संवाद और संपर्क सबसे बड़ी ताकत बनेंगे। मीटिंग, इंटरव्यू और व्यावसायिक बातचीत में सफलता मिलने के योग हैं। हालांकि किसी भी वित्तीय दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने से पहले पूरी सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। कर्क राशि के लिए आय के नए अवसर बन सकते हैं और कार्यस्थल पर जिम्मेदारी निभाने की क्षमता की सराहना हो सकती है।

    सिंह राशि के जातकों को अनावश्यक खर्चों से बचने और बजट पर ध्यान देने की आवश्यकता रहेगी। व्यापार और साझेदारी से जुड़े मामलों में स्थिरता बनी रह सकती है। कन्या राशि के लिए दिन योजनाबद्ध निवेश और कार्यस्थल पर नई जिम्मेदारियों का संकेत दे रहा है। बारीकियों पर ध्यान देने से महत्वपूर्ण कार्य सफलतापूर्वक पूरे हो सकते हैं।

    तुला राशि के लोगों को आर्थिक मामलों में संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दी गई है। टीमवर्क और सहयोग के माध्यम से कार्यक्षेत्र में बेहतर परिणाम प्राप्त हो सकते हैं। वृश्चिक राशि के लिए पुराने निवेश और आर्थिक योजनाओं की समीक्षा लाभदायक रहेगी। धैर्य और संयम के साथ लिए गए निर्णय भविष्य में सकारात्मक परिणाम दे सकते हैं।

    धनु राशि के जातकों में दिन के शुरुआती हिस्से में आत्मविश्वास और नई योजनाओं पर काम करने की ऊर्जा बनी रहेगी। शाम के बाद बचत और लंबी अवधि की वित्तीय योजना पर ध्यान देना अधिक उपयोगी रहेगा। मकर राशि के लिए चंद्रमा का गोचर विशेष महत्व रखता है। कार्यस्थल पर नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं और आर्थिक अनुशासन बनाए रखने से भविष्य मजबूत होगा।

    कुंभ राशि के लोगों को नियमित आय और पुराने आर्थिक मामलों की समीक्षा पर ध्यान देना चाहिए। जल्दबाजी में बड़े खर्च से बचना बेहतर रहेगा। वहीं मीन राशि के लिए दिन पुराने निवेश, बचत और वित्तीय योजनाओं का मूल्यांकन करने के लिए अनुकूल माना गया है। कार्यक्षेत्र में जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं, लेकिन धैर्य और अनुभव के बल पर उन्हें सफलतापूर्वक पूरा किया जा सकेगा।

    ज्योतिषीय संकेतों के अनुसार 28 जुलाई का दिन अधिकांश राशियों के लिए अनुशासन, योजनाबद्ध कार्यशैली और सोच-समझकर लिए गए आर्थिक निर्णयों पर केंद्रित रहेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि जल्दबाजी से बचकर और दीर्घकालिक लक्ष्यों को ध्यान में रखकर किए गए प्रयास आने वाले समय में बेहतर परिणाम दे सकते हैं। नौकरीपेशा लोगों के साथ-साथ व्यापारियों और निवेश से जुड़े लोगों के लिए भी यह दिन संतुलित रणनीति अपनाने का संदेश देता है।

  • चंद्रमा की शुभ-अशुभ स्थिति बदल सकती है जीवन की दिशा, जानें किन योगों से मिलता है सुख और किन दोषों से बढ़ती हैं मुश्किलें

    चंद्रमा की शुभ-अशुभ स्थिति बदल सकती है जीवन की दिशा, जानें किन योगों से मिलता है सुख और किन दोषों से बढ़ती हैं मुश्किलें

    नई दिल्ली । ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन, भावनाओं, माता, मानसिक संतुलन और सुख-समृद्धि का प्रमुख कारक माना गया है। किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में चंद्रमा की स्थिति उसके स्वभाव, निर्णय क्षमता, पारिवारिक संबंधों और मानसिक स्थिति पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालती है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार यदि चंद्रमा शुभ और मजबूत स्थिति में हो तो जीवन में स्थिरता, सम्मान और खुशहाली बढ़ती है, जबकि कमजोर या पीड़ित चंद्रमा मानसिक तनाव, अस्थिरता और अनेक चुनौतियों का कारण बन सकता है।

    ज्योतिष के अनुसार वृषभ राशि में चंद्रमा उच्च का तथा कर्क राशि में स्वराशि का माना जाता है। ऐसी स्थिति में व्यक्ति का मन संतुलित रहता है और वह कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य बनाए रखने में सक्षम होता है। मजबूत चंद्रमा रचनात्मक सोच, सकारात्मक दृष्टिकोण और बेहतर निर्णय क्षमता प्रदान करने वाला माना जाता है। ऐसे लोगों को पारिवारिक सुख, सामाजिक सम्मान और आर्थिक उन्नति के अवसर भी अधिक प्राप्त होते हैं।

    मान्यता है कि यदि चंद्रमा पर बृहस्पति, शुक्र या बुध जैसे शुभ ग्रहों का प्रभाव हो तो कई शुभ योगों का निर्माण होता है। ऐसे योग व्यक्ति के व्यक्तित्व को प्रभावशाली बनाते हैं और जीवन में सफलता के अवसर बढ़ाते हैं। मजबूत चंद्रमा वाले लोगों का अपनी माता के साथ संबंध भी सामान्यतः मधुर और सहयोगपूर्ण माना जाता है।

    इसके विपरीत यदि चंद्रमा कमजोर, नीच राशि में स्थित या पाप ग्रहों से प्रभावित हो तो इसका असर व्यक्ति के मानसिक और भावनात्मक जीवन पर पड़ सकता है। वृश्चिक राशि में स्थित चंद्रमा को ज्योतिष में नीच का माना गया है। इसके अलावा राहु, केतु अथवा शनि के प्रभाव से बनने वाले कुछ दोष मानसिक अस्थिरता, चिंता और निर्णय लेने में कठिनाई का कारण माने जाते हैं।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार ऐसे लोगों में अनावश्यक भय, आत्मविश्वास की कमी, अनिद्रा, तनाव और एकाग्रता में कमी जैसी समस्याएं देखने को मिल सकती हैं। कई बार व्यक्ति छोटी-छोटी बातों को लेकर अत्यधिक चिंतित रहता है और भावनात्मक रूप से स्वयं को कमजोर महसूस करता है। हालांकि इन प्रभावों को आध्यात्मिक और धार्मिक उपायों के माध्यम से कम करने की मान्यता भी प्रचलित है।

    चंद्रमा को मजबूत करने के लिए भगवान शिव की नियमित आराधना को विशेष महत्व दिया गया है। शिवलिंग पर जल या दूध अर्पित करना मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। इसके साथ ही माता का सम्मान करना, उनका आशीर्वाद लेना तथा परिवार के प्रति जिम्मेदार व्यवहार रखना भी शुभ फलदायी माना जाता है।

    सोमवार के दिन व्रत रखना, सफेद वस्तुओं जैसे दूध, चावल, चीनी या सफेद वस्त्रों का दान करना भी चंद्र दोष की शांति के लिए उपयोगी माना जाता है। इसके अलावा जल का सम्मान करना और अनावश्यक रूप से पानी की बर्बादी से बचना भी शुभ माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार नियमित सकारात्मक सोच, संयमित जीवनशैली और आध्यात्मिक अभ्यास से भी मानसिक संतुलन मजबूत किया जा सकता है।

    ज्योतिष विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पूरी जन्म कुंडली का समग्र विश्लेषण आवश्यक होता है। केवल चंद्रमा की स्थिति के आधार पर जीवन के सभी परिणाम निर्धारित नहीं किए जा सकते। इसलिए यदि किसी व्यक्ति को अपनी कुंडली में चंद्रमा की स्थिति या उससे जुड़े प्रभावों को लेकर संदेह हो तो अनुभवी ज्योतिष विशेषज्ञ से परामर्श लेकर ही उचित मार्गदर्शन प्राप्त करना बेहतर माना जाता है।

  • सूर्य के नक्षत्र उत्तराफाल्गुनी में चंद्रमा का प्रवेश, इन 4 राशियों पर बरसेगी सफलता, सम्मान और धन की वर्षा

    सूर्य के नक्षत्र उत्तराफाल्गुनी में चंद्रमा का प्रवेश, इन 4 राशियों पर बरसेगी सफलता, सम्मान और धन की वर्षा

    नई दिल्ली। गंगा दशहरा 2026 के पावन अवसर पर एक महत्वपूर्ण ज्योतिषीय परिवर्तन देखने को मिल रहा है, जिसने ज्योतिष प्रेमियों और राशि आधारित भविष्य में रुचि रखने वाले लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लिया है। 25 मई 2026 को चंद्रमा सूर्य के प्रभाव वाले उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में प्रवेश कर चुके हैं और यह गोचर 26 मई की सुबह तक प्रभावी रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार चंद्रमा मन, भावनाओं और निर्णय क्षमता का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र को स्थिरता, प्रतिष्ठा और सफलता से जोड़कर देखा जाता है। ऐसे में इस विशेष संयोग का असर कुछ राशियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लेकर आने वाला माना जा रहा है।

    इस नक्षत्र परिवर्तन का प्रभाव विशेष रूप से मिथुन राशि के जातकों के लिए शुभ संकेत दे रहा है। लंबे समय से नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को अच्छे अवसर मिल सकते हैं और करियर में आगे बढ़ने के रास्ते खुल सकते हैं। व्यापार से जुड़े लोगों के लिए भी समय लाभकारी माना जा रहा है, जहां नई साझेदारी या बड़ी डील सफलता का कारण बन सकती है। आर्थिक स्थिति में सुधार और रुके हुए कार्यों के पूरे होने की संभावना से मानसिक संतुष्टि बढ़ सकती है।

    कर्क राशि के जातकों के लिए भी यह गोचर राहत और सकारात्मक ऊर्जा लेकर आने वाला माना जा रहा है। परिवार में चल रही परेशानियां कम हो सकती हैं और रिश्तों में मधुरता लौटने के संकेत मिल रहे हैं। कार्यक्षेत्र में अच्छी खबर मिलने के योग बन सकते हैं। नौकरीपेशा लोगों को पदोन्नति या वेतन वृद्धि जैसी खुशखबरी मिल सकती है। व्यापारिक गतिविधियों में भी गति बढ़ने के संकेत दिखाई दे रहे हैं, जिससे आत्मविश्वास में बढ़ोतरी हो सकती है।

    सिंह राशि के लिए यह समय विशेष रूप से प्रभावशाली माना जा रहा है। नेतृत्व क्षमता और आत्मविश्वास में वृद्धि के साथ सामाजिक पहचान मजबूत हो सकती है। करियर में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं और आय के नए स्रोत बनने की संभावना भी जताई जा रही है। समाज में सम्मान बढ़ सकता है और लोग आपके विचारों को गंभीरता से सुन सकते हैं। यह समय नई शुरुआत और बड़े निर्णय लेने के लिए अनुकूल माना जा रहा है।

    वहीं धनु राशि के जातकों के लिए भी यह गोचर नई उम्मीदें लेकर आ सकता है। लंबे समय से अटके हुए कार्यों में गति आने की संभावना है और सफलता के नए मार्ग खुल सकते हैं। सरकारी कार्यों से जुड़े मामलों में राहत मिल सकती है और यदि कोई कानूनी प्रक्रिया चल रही है तो सकारात्मक संकेत मिल सकते हैं। मानसिक शांति और आत्मविश्वास बढ़ने से व्यक्ति अपने फैसले अधिक स्पष्टता के साथ ले पाएगा। ज्योतिषीय दृष्टि से देखा जाए तो गंगा दशहरा पर बना यह चंद्र गोचर कई लोगों के लिए नई ऊर्जा और नई संभावनाओं का संकेत बनकर सामने आ सकता है।

  • Astrology: इन राशियों के लोगों की रगों में बहती है कला, जन्म से ही होते हैं क्रिएटिव और टैलेंटेड

    Astrology: इन राशियों के लोगों की रगों में बहती है कला, जन्म से ही होते हैं क्रिएटिव और टैलेंटेड


    नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों और राशियों का असर केवल स्वभाव या भाग्य तक सीमित नहीं माना जाता, बल्कि यह व्यक्ति की प्रतिभा, सोच और रचनात्मक क्षमता को भी प्रभावित करता है। कहा जाता है कि कुछ लोग मेहनत से कलाकार बनते हैं, जबकि कुछ लोग जन्म से ही कला का वरदान लेकर आते हैं। उनकी सोच, कल्पनाशक्ति और सौंदर्य को देखने का नजरिया उन्हें भीड़ से अलग बना देता है।

    ज्योतिष के अनुसार शुक्र और चंद्रमा ऐसे ग्रह हैं, जो इंसान के भीतर कला, संगीत, भावनाएं और रचनात्मकता पैदा करते हैं। जिन लोगों की कुंडली में इन ग्रहों की स्थिति मजबूत होती है, वे अक्सर संगीत, लेखन, अभिनय, डिजाइनिंग, पेंटिंग या फैशन जैसे क्षेत्रों में खास पहचान बनाते हैं। खास तौर पर वृषभ, कर्क और तुला राशि के लोगों को जन्मजात कलाकार माना जाता है।

    वृषभ राशि: सुंदरता और संगीत के दीवाने
    वृषभ राशि का स्वामी शुक्र ग्रह होता है, जिसे कला, आकर्षण और विलासिता का कारक माना गया है। इस राशि के लोग स्वभाव से बेहद क्रिएटिव और सौंदर्य प्रेमी होते हैं। इन्हें संगीत, गायन, पेंटिंग और डिजाइनिंग जैसी चीजों में खास रुचि रहती है।

    इनकी आवाज में स्वाभाविक मिठास होती है, जिसकी वजह से कई लोग अच्छे गायक या संगीतकार बनते हैं। इसके अलावा रंगों और सजावट की गहरी समझ इन्हें फैशन, इंटीरियर डिजाइन और कुकिंग जैसे क्षेत्रों में भी सफलता दिलाती है। वृषभ राशि के लोग धैर्य के साथ काम करते हैं और छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देकर अपने हुनर को निखारते हैं।

    कर्क राशि: भावनाओं से जन्म लेती है इनकी कला
    कर्क राशि का स्वामी चंद्रमा है, जो मन, भावनाओं और कल्पनाओं का प्रतीक माना जाता है। इस राशि के लोग बेहद संवेदनशील और भावुक होते हैं और यही गुण उनकी सबसे बड़ी ताकत बन जाता है।

    इनकी कल्पनाशक्ति बहुत तेज होती है, इसलिए ये लेखन, कविता, अभिनय और कहानी कहने जैसी विधाओं में शानदार प्रदर्शन करते हैं। कर्क राशि के लोग दूसरों की भावनाओं को गहराई से समझते हैं, इसलिए इनके काम में एक अलग ही भावनात्मक जुड़ाव दिखाई देता है। यही कारण है कि इनके द्वारा लिखा गया शब्द या निभाया गया किरदार सीधे लोगों के दिल तक पहुंच जाता है।

    तुला राशि: स्टाइल, ग्रेस और परफेक्शन का मेल
    तुला राशि पर भी शुक्र ग्रह का प्रभाव रहता है, लेकिन यहां यह प्रभाव स्टाइल, संतुलन और खूबसूरती के रूप में दिखाई देता है। तुला राशि के लोगों का फैशन सेंस बेहद शानदार माना जाता है।

    इन्हें कपड़ों, रंगों, डिजाइन और ट्रेंड्स की अच्छी समझ होती है। यही वजह है कि ये लोग फैशन डिजाइनिंग, आर्किटेक्चर, मेकअप, स्टाइलिंग और सजावट जैसे क्षेत्रों में बड़ी सफलता हासिल कर सकते हैं। इनके काम में एक खास तरह की क्लास और रॉयल फील दिखाई देती है। तुला राशि के लोग हर चीज को परफेक्ट बनाने की कोशिश करते हैं और जब तक काम खूबसूरत न लगे, इन्हें संतुष्टि नहीं मिलती।

    ज्योतिष शास्त्र मानता है कि कला केवल सीखी नहीं जाती, कई बार यह इंसान के भीतर जन्म से मौजूद होती है। वृषभ, कर्क और तुला राशि के लोग इसी प्राकृतिक रचनात्मकता और कलात्मक सोच की वजह से भीड़ में अपनी अलग पहचान बनाने में सफल रहते हैं।

  • सीमा पर चीन की ‘साइलेंट स्ट्रैटेजी’, PoK के करीब नई काउंटी; वैश्विक तनाव के बीच बढ़ी हलचल

    सीमा पर चीन की ‘साइलेंट स्ट्रैटेजी’, PoK के करीब नई काउंटी; वैश्विक तनाव के बीच बढ़ी हलचल


    नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने जहां दुनिया का ध्यान पश्चिम एशिया की ओर खींच रखा है, वहीं इसी बीच चीन ने अपने सीमावर्ती इलाके में एक अहम प्रशासनिक कदम उठाकर नई भू-राजनीतिक चर्चा छेड़ दी है। चीन ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) और अफगानिस्तान से सटे शिनजियांग क्षेत्र में “सेनलिंग” नाम से नई काउंटी का गठन किया है।
    रिपोर्ट्स के अनुसार, यह नई प्रशासनिक इकाई काराकोरम पर्वतमाला के पास स्थित है और रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील मानी जा रही है। खासकर वाखान कॉरिडोर की निगरानी और क्षेत्र में उइगर गतिविधियों पर नियंत्रण को लेकर इसे चीन की बड़ी तैयारी के रूप में देखा जा रहा है।

    सीमावर्ती इलाकों पर लगातार फोकस
    चीन पिछले एक साल में शिनजियांग में “हेआन” और “हेकांग” के बाद यह तीसरी नई काउंटी बना चुका है। विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम सीमा क्षेत्रों में प्रशासनिक पकड़ मजबूत करने और सुरक्षा तंत्र को स्थानीय स्तर पर सुदृढ़ करने की दीर्घकालिक नीति का हिस्सा है।

    भारत की आपत्ति बरकरार
    भारत ने इस तरह के बदलावों पर पहले भी कड़ा विरोध दर्ज कराया है। भारत का कहना है कि इन नई इकाइयों के कुछ हिस्से उसके केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में आते हैं।

    विशेष रूप से अक्साई चिन को लेकर भारत ने अपनी संप्रभुता दोहराते हुए चीन के कदमों को अस्वीकार्य बताया है।

    काशगर से जुड़ा प्रशासनिक नियंत्रण
    नई काउंटी को काशगर प्रशासन के तहत रखा जाएगा, जो ऐतिहासिक रूप से सिल्क रूट का प्रमुख केंद्र रहा है। यही क्षेत्र चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) का शुरुआती बिंदु भी है, जिससे इसकी रणनीतिक अहमियत और बढ़ जाती है।

    सुरक्षा और रणनीति का मिश्रण
    विशेषज्ञों के मुताबिक, यह कदम केवल प्रशासनिक पुनर्गठन नहीं, बल्कि सीमा क्षेत्रों में सुरक्षा और निगरानी मजबूत करने की व्यापक रणनीति है। वाखान कॉरिडोर—करीब 74 किलोमीटर लंबा यह क्षेत्र—चीन के लिए संवेदनशील इसलिए भी है क्योंकि यह ताजिकिस्तान और PoK के बीच स्थित है।

    चीन को आशंका रही है कि ईस्ट तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट से जुड़े उइगर लड़ाके इस रास्ते का इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसे में नई काउंटी के जरिए स्थानीय प्रशासन, खुफिया निगरानी और सुरक्षा तंत्र को और मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।

    आगे क्या?
    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की चेतावनियों के बावजूद चीन के इस कदम से क्षेत्रीय तनाव और बढ़ सकता है। आने वाले समय में यह मुद्दा कूटनीतिक और सामरिक स्तर पर और अहम हो सकता है, जिस पर पूरी दुनिया की नजर बनी रहेगी।

  • Eid 2026: भारत में ईद-उल-फितर 21 मार्च को, पूरे 30 रोजे रखे गए

    Eid 2026: भारत में ईद-उल-फितर 21 मार्च को, पूरे 30 रोजे रखे गए


    नई दिल्ली। भारत में ईद उल फितर 2026 की तारीख तय हो गई है। इस बार रमजान के पूरे 30 रोजे रखे गए हैं। 20 मार्च को 30वां रोजा रखा गया और अगले दिन यानी 21 मार्च शनिवार को देशभर में ईद मनाई जाएगी। यह घोषणा धार्मिक कमेटी और जामा मस्जिद दिल्ली के नायब इमाम सैयद उसामा शाबान बुखारी ने की।

    भारत में ईद की तारीख चांद दिखने पर निर्भर करती है। इस बार 19 मार्च को शव्वाल का चांद नजर नहीं आया जिससे रमजान का आखिरी रोजा बढ़ गया। इसके बाद 20 मार्च को चांद देखने के बाद ईद 21 मार्च को मनाने का फैसला लिया गया। वहीं सऊदी अरब में 20 मार्च को ही ईद उल फितर मनाई जा रही है।

    ईद उल फितर का महत्व 

    ईद उल फितर इस्लाम धर्म का एक प्रमुख त्योहार है। इसका मतलब है रोजा खोलने का त्योहार । यह रमजान के पूरे महीने रोजे रखने के बाद मनाया जाता है और अल्लाह का धन्यवाद अदा करने का अवसर होता है। यह पर्व खुशियों और भाईचारे का प्रतीक है।

    इतिहास में ईद उल फितर की शुरुआत 624 ईस्वी में पैगंबर हजरत मुहम्मद ने मदीना में की थी। हिजरत के बाद मुसलमानों ने पहला रमजान पूरा किया और तब ईद उल फितर और ईद उल अजहा दो पर्व तय किए गए। इस बार के ईद समारोह के लिए तैयारियां जोरों पर हैं। मस्जिदों और सार्वजनिक स्थानों पर नमाज़ की व्यवस्था की जा रही है। लोग अपने घरों में भी सजावट और ईद की मिठाइयों की तैयारी में जुटे हैं।