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  • मूंग खरीदी विवाद ने बढ़ाई सियासी हलचल किसानों ने पूछा मुख्यमंत्री रहते बढ़ा कोटा अब कृषि मंत्री बनकर क्यों नहीं मिली राहत

    मूंग खरीदी विवाद ने बढ़ाई सियासी हलचल किसानों ने पूछा मुख्यमंत्री रहते बढ़ा कोटा अब कृषि मंत्री बनकर क्यों नहीं मिली राहत


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में मूंग खरीदी को लेकर किसानों का आंदोलन भले ही फिलहाल समाप्त हो गया हो लेकिन इसके बाद राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर सवालों का सिलसिला तेज हो गया है। प्रदेश के किसान अब यह जानना चाहते हैं कि जब केंद्र और राज्य दोनों जगह भारतीय जनता पार्टी की सरकार है और केंद्रीय कृषि मंत्री भी मध्य प्रदेश से ही आते हैं तो फिर समर्थन मूल्य पर मूंग खरीदी का कोटा बढ़ाने में देरी क्यों हुई। किसानों का कहना है कि इसी मुद्दे को लेकर उन्हें तीन दिन तक राजधानी भोपाल में आंदोलन करना पड़ा जबकि समय रहते फैसला लिया जाता तो इस स्थिति से बचा जा सकता था।

    दरअसल मध्य प्रदेश सरकार ने केंद्र से समर्थन मूल्य पर मूंग खरीदी का कोटा 4.54 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 8.06 लाख मीट्रिक टन करने का अनुरोध किया था। हालांकि केंद्र से अतिरिक्त कोटे की मंजूरी नहीं मिली। इसके बाद प्रदेश सरकार ने अपने स्तर पर पात्र किसानों से 60 प्रतिशत तक मूंग खरीदी करने का निर्णय लिया और आंदोलन समाप्त कराने की कोशिश की।

    किसान संगठनों का आरोप है कि पहले भी ऐसे हालात बनते रहे हैं लेकिन उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान केंद्र से बातचीत कर प्रदेश के लिए खरीदी का कोटा बढ़वाने में सफल रहते थे। इस बार ऐसा नहीं होने से किसानों में नाराजगी बढ़ी है। किसान स्वराज संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि प्रदेश में बड़े पैमाने पर मूंग उत्पादन होता है लेकिन खरीदी की सीमा तय होने के कारण किसानों को अपनी उपज का बड़ा हिस्सा खुले बाजार में कम कीमत पर बेचना पड़ता है जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।

    भारतीय किसान यूनियन के नेताओं ने भी केंद्र और राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत बताते हुए कहा कि राजनीतिक मतभेदों का असर किसानों पर नहीं पड़ना चाहिए। उनका कहना है कि यदि समय रहते समाधान निकाल लिया जाता तो किसानों को आंदोलन करने की आवश्यकता नहीं पड़ती। किसान संगठनों ने यह भी कहा कि सरकारों को राजनीतिक विवादों से ऊपर उठकर किसानों के हित में निर्णय लेने चाहिए।

    किसानों की नाराजगी के पीछे आर्थिक कारण भी हैं। इस वर्ष मूंग का न्यूनतम समर्थन मूल्य 8768 रुपए प्रति क्विंटल तय किया गया है जबकि खुले बाजार में किसानों को लगभग 5500 रुपए प्रति क्विंटल का भाव मिल रहा है। शुरुआत में प्रति एकड़ केवल 1.20 क्विंटल मूंग ही समर्थन मूल्य पर खरीदी जा रही थी जबकि शेष उपज बाजार में कम दाम पर बेचनी पड़ रही थी। इससे प्रति एकड़ किसानों की आय में हजारों रुपए का अंतर आ रहा था और बड़े किसानों को लाखों रुपए तक का नुकसान होने की आशंका थी।

    इस पूरे विवाद के बीच केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश सरकार को भेजे अपने पत्र में स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री आशा योजना के नियमों के अनुसार केंद्र अधिकतम 25 प्रतिशत उत्पादन ही समर्थन मूल्य पर खरीद सकता है। इसी आधार पर मध्य प्रदेश के लिए 4 लाख 54 हजार 580 मीट्रिक टन मूंग खरीदी की स्वीकृति दी गई है। उन्होंने यह भी बताया कि देशभर में स्वीकृत कुल खरीदी का लगभग 87 प्रतिशत हिस्सा अकेले मध्य प्रदेश को दिया गया है जो किसी भी राज्य के मुकाबले सबसे अधिक है।

    हालांकि प्रदेश सरकार का तर्क है कि मध्य प्रदेश देश में सबसे अधिक मूंग उत्पादन और खरीदी करने वाला राज्य है इसलिए अन्य राज्यों में उपयोग नहीं हो रहे कोटे का हिस्सा मध्य प्रदेश को दिया जाना चाहिए ताकि अधिक से अधिक किसानों को समर्थन मूल्य का लाभ मिल सके। फिलहाल सरकार द्वारा 60 प्रतिशत खरीदी की घोषणा के बाद आंदोलन थम गया है लेकिन किसानों का कहना है कि जब तक पूरी उपज समर्थन मूल्य पर खरीदी नहीं जाएगी तब तक यह मुद्दा पूरी तरह समाप्त नहीं माना जाएगा।

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    MadhyaPradesh, MoongProcurement, FarmersProtest, ShivrajSinghChouhan, MSP मध्य प्रदेश में मूंग खरीदी को लेकर किसानों का आंदोलन भले ही फिलहाल समाप्त हो गया हो लेकिन इसके बाद राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर सवालों का सिलसिला तेज हो गया है। प्रदेश के किसान अब यह जानना चाहते हैं कि जब केंद्र और राज्य दोनों जगह भारतीय जनता पार्टी की सरकार है और केंद्रीय कृषि मंत्री भी मध्य प्रदेश से ही आते हैं तो फिर समर्थन मूल्य पर मूंग खरीदी का कोटा बढ़ाने में देरी क्यों हुई। किसानों का कहना है कि इसी मुद्दे को लेकर उन्हें तीन दिन तक राजधानी भोपाल में आंदोलन करना पड़ा जबकि समय रहते फैसला लिया जाता तो इस स्थिति से बचा जा सकता था।

    दरअसल मध्य प्रदेश सरकार ने केंद्र से समर्थन मूल्य पर मूंग खरीदी का कोटा 4.54 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 8.06 लाख मीट्रिक टन करने का अनुरोध किया था। हालांकि केंद्र से अतिरिक्त कोटे की मंजूरी नहीं मिली। इसके बाद प्रदेश सरकार ने अपने स्तर पर पात्र किसानों से 60 प्रतिशत तक मूंग खरीदी करने का निर्णय लिया और आंदोलन समाप्त कराने की कोशिश की।

    किसान संगठनों का आरोप है कि पहले भी ऐसे हालात बनते रहे हैं लेकिन उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान केंद्र से बातचीत कर प्रदेश के लिए खरीदी का कोटा बढ़वाने में सफल रहते थे। इस बार ऐसा नहीं होने से किसानों में नाराजगी बढ़ी है। किसान स्वराज संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि प्रदेश में बड़े पैमाने पर मूंग उत्पादन होता है लेकिन खरीदी की सीमा तय होने के कारण किसानों को अपनी उपज का बड़ा हिस्सा खुले बाजार में कम कीमत पर बेचना पड़ता है जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।

    भारतीय किसान यूनियन के नेताओं ने भी केंद्र और राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत बताते हुए कहा कि राजनीतिक मतभेदों का असर किसानों पर नहीं पड़ना चाहिए। उनका कहना है कि यदि समय रहते समाधान निकाल लिया जाता तो किसानों को आंदोलन करने की आवश्यकता नहीं पड़ती। किसान संगठनों ने यह भी कहा कि सरकारों को राजनीतिक विवादों से ऊपर उठकर किसानों के हित में निर्णय लेने चाहिए।

    किसानों की नाराजगी के पीछे आर्थिक कारण भी हैं। इस वर्ष मूंग का न्यूनतम समर्थन मूल्य 8768 रुपए प्रति क्विंटल तय किया गया है जबकि खुले बाजार में किसानों को लगभग 5500 रुपए प्रति क्विंटल का भाव मिल रहा है। शुरुआत में प्रति एकड़ केवल 1.20 क्विंटल मूंग ही समर्थन मूल्य पर खरीदी जा रही थी जबकि शेष उपज बाजार में कम दाम पर बेचनी पड़ रही थी। इससे प्रति एकड़ किसानों की आय में हजारों रुपए का अंतर आ रहा था और बड़े किसानों को लाखों रुपए तक का नुकसान होने की आशंका थी।

    इस पूरे विवाद के बीच केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश सरकार को भेजे अपने पत्र में स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री आशा योजना के नियमों के अनुसार केंद्र अधिकतम 25 प्रतिशत उत्पादन ही समर्थन मूल्य पर खरीद सकता है। इसी आधार पर मध्य प्रदेश के लिए 4 लाख 54 हजार 580 मीट्रिक टन मूंग खरीदी की स्वीकृति दी गई है। उन्होंने यह भी बताया कि देशभर में स्वीकृत कुल खरीदी का लगभग 87 प्रतिशत हिस्सा अकेले मध्य प्रदेश को दिया गया है जो किसी भी राज्य के मुकाबले सबसे अधिक है।

    हालांकि प्रदेश सरकार का तर्क है कि मध्य प्रदेश देश में सबसे अधिक मूंग उत्पादन और खरीदी करने वाला राज्य है इसलिए अन्य राज्यों में उपयोग नहीं हो रहे कोटे का हिस्सा मध्य प्रदेश को दिया जाना चाहिए ताकि अधिक से अधिक किसानों को समर्थन मूल्य का लाभ मिल सके। फिलहाल सरकार द्वारा 60 प्रतिशत खरीदी की घोषणा के बाद आंदोलन थम गया है लेकिन किसानों का कहना है कि जब तक पूरी उपज समर्थन मूल्य पर खरीदी नहीं जाएगी तब तक यह मुद्दा पूरी तरह समाप्त नहीं माना जाएगा।

  • मूंग खरीदी को लेकर किसानों का शक्ति प्रदर्शन भोपाल की सड़कें हुईं जाम सरकार ने 60 प्रतिशत खरीदी का किया ऐलान

    मूंग खरीदी को लेकर किसानों का शक्ति प्रदर्शन भोपाल की सड़कें हुईं जाम सरकार ने 60 प्रतिशत खरीदी का किया ऐलान


    भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल बुधवार को किसानों के बड़े आंदोलन का केंद्र बनी रही। मूंग की शत प्रतिशत समर्थन मूल्य पर खरीदी और खाद वितरण में लागू ई टोकन व्यवस्था समाप्त करने जैसी मांगों को लेकर नर्मदापुरम संभाग से पैदल पहुंचे हजारों किसान राजधानी की सड़कों पर डटे रहे। आंदोलन के कारण शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई और कई प्रमुख मार्गों पर लंबा जाम लग गया। दिनभर चले प्रदर्शन और सरकार के साथ बातचीत के बाद देर रात सरकार ने किसानों की प्रमुख मांगों पर सहमति जताई जिसके बाद आंदोलन धीरे धीरे समाप्त होने लगा और किसानों ने सड़कें खाली करना शुरू कर दीं।

    किसानों का कहना था कि मूंग की पूरी फसल समर्थन मूल्य पर खरीदी जाए ताकि उन्हें बाजार में कम कीमत पर उपज बेचने की मजबूरी न हो। इसके अलावा खाद वितरण में लागू ई टोकन व्यवस्था को भी समाप्त करने की मांग उठाई गई। किसानों का आरोप था कि मौजूदा व्यवस्था के कारण समय पर खाद नहीं मिल पाती जिससे खेती प्रभावित होती है और उन्हें अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

    आंदोलन के दौरान किसानों ने राजधानी के कई प्रमुख मार्गों पर डेरा डाल दिया। बाणगंगा चौराहे समेत कई स्थानों पर किसान देर रात तक जमे रहे। सरकार की ओर से मांगें स्वीकार करने की घोषणा के बाद भी प्रदर्शनकारी तत्काल हटने को तैयार नहीं हुए और लिखित आश्वासन मिलने के बाद ही वापस लौटने की प्रक्रिया शुरू की।

    प्रदर्शन के दौरान किसानों और पुलिस के बीच धक्का मुक्की की स्थिति भी बनी। कुछ किसानों के कपड़े फट गए और माहौल तनावपूर्ण हो गया। प्रदर्शनकारी पहले केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के आवास पहुंचे जहां उन्होंने जोरदार नारेबाजी की। इसके बाद उनका जत्था मुख्यमंत्री निवास की ओर बढ़ा। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए रोशनपुरा चौराहे से मुख्यमंत्री निवास तक भारी पुलिस बल तैनात किया गया। कई स्थानों पर बसों और डंपरों से बैरिकेडिंग कर रास्ते बंद किए गए ताकि प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका जा सके।

    आंदोलन के दौरान किसानों ने विरोध दर्ज कराने के लिए अलग अलग तरीके अपनाए। कुछ किसानों ने अर्धनग्न होकर प्रदर्शन किया जबकि कई प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर ही दाल बाटी बनाकर भोजन तैयार किया। किसानों के समर्थन में बड़ी संख्या में युवा भी पहुंचे जिन्होंने सरकार को सद्बुद्धि देने की कामना करते हुए हवन किया। इस पूरे घटनाक्रम ने राजधानी का सामान्य जनजीवन प्रभावित कर दिया और लोगों को घंटों ट्रैफिक जाम का सामना करना पड़ा।

    सरकार ने देर रात जारी बयान में किसानों की कई मांगें स्वीकार करने की घोषणा की। कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना ने बताया कि प्रदेश सरकार अब 60 प्रतिशत तक मूंग खरीदी करेगी। नर्मदापुरम सीहोर और हरदा जैसे प्रमुख उत्पादक जिलों में लगभग तीन क्विंटल प्रति एकड़ मूंग खरीदी जाएगी। इसके साथ ही स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि बढ़ाकर 10 अगस्त कर दी गई है जबकि समर्थन मूल्य पर मूंग खरीदी की अंतिम तिथि 20 अगस्त निर्धारित की गई है। सरकार ने किसानों से आंदोलन समाप्त कर अपने घर लौटने की अपील भी की।

    सरकार की घोषणा के बाद अधिकांश किसानों ने देर रात वापस लौटना शुरू कर दिया और राजधानी की सड़कों पर यातायात धीरे धीरे सामान्य होने लगा। हालांकि किसान संगठनों ने स्पष्ट किया है कि यदि घोषित फैसलों का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हुआ तो भविष्य में आंदोलन फिर से तेज किया जाएगा।