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  • शिवपुरी में करवा चौथ पर रात 8:25 बजे होगा चंद्रोदय, भद्रा और शुक्रास्त का दोष नहीं, जानें व्रत से जुड़ी खास बातें

    शिवपुरी में करवा चौथ पर रात 8:25 बजे होगा चंद्रोदय, भद्रा और शुक्रास्त का दोष नहीं, जानें व्रत से जुड़ी खास बातें


    शिवपुरी: में करवा चौथ का व्रत रखने वाली महिलाओं को इस बार चंद्रमा के दर्शन के लिए रात 8:25 बजे तक इंतजार करना पड़ सकता है। गुरुवार, 29 अक्टूबर को पर्व के अवसर पर चंद्रोदय का संभावित समय रात 8:25 बजे बताया गया है। पति की लंबी उम्र और दांपत्य जीवन में सुख-समृद्धि की कामना के साथ महिलाएं दिनभर व्रत रखेंगी। शाम को पूजा-अर्चना के बाद चंद्रमा के दर्शन कर उन्हें अर्घ्य दिया जाएगा। इसके बाद व्रत खोलने की परंपरा निभाई जाएगी।

    करवा चौथ विवाहित महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखने वाला पर्व है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति की कामना करती हैं। परंपरा के अनुसार, व्रत रखने वाली महिलाएं दिनभर निर्जला उपवास करती हैं और शाम को निर्धारित विधि से पूजा करती हैं। चंद्रमा निकलने के बाद उसके दर्शन और पूजा के साथ व्रत का पारण किया जाता है। इसी वजह से चंद्रोदय के समय को लेकर महिलाओं में खास उत्सुकता रहती है।

    इस बार पहली बार करवा चौथ का व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए भी धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, पहली बार व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए किसी विशेष धार्मिक बाधा का उल्लेख नहीं है। ऐसे में नवविवाहित महिलाएं भी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार इस पर्व की तैयारी कर सकती हैं।

    आचार्य पं. प्रमोद शास्त्री के अनुसार, करवा चौथ के दिन शुक्रास्त का दोष नहीं रहेगा। उनके मुताबिक, शुक्र का उदय 28 अक्टूबर की सुबह हो जाएगा। इसके साथ ही इस बार पर्व के दिन भद्रा भी नहीं है। इन ज्योतिषीय स्थितियों के कारण व्रत रखने वाली महिलाएं बिना इन विशेष बाधाओं की चिंता किए पूजा की तैयारी कर सकती हैं। धार्मिक मान्यताओं में इन स्थितियों को पर्व के आयोजन से जोड़कर देखा जाता है।

    इस बार करवा चौथ पर रोहिणी और मृगशिरा नक्षत्र के साथ शिव योग का संयोग भी बताया गया है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, चंद्रमा का वृषभ राशि में होना शुभ माना जाता है। इसे वैवाहिक जीवन में प्रेम, सौहार्द और आपसी तालमेल का प्रतीक माना जाता है। हालांकि, ये धारणाएं धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं।

    करवा चौथ का पर्व केवल उपवास तक सीमित नहीं है। यह पति-पत्नी के बीच प्रेम, विश्वास और समर्पण की भावना से भी जुड़ा हुआ है। महिलाएं इस दिन विशेष पूजा की तैयारी करती हैं और पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार व्रत रखती हैं। दिनभर उपवास के बाद शाम को पूजा की जाती है और चंद्रमा के निकलने का इंतजार किया जाता है।

    चंद्रमा के दर्शन होने पर महिलाएं उसे अर्घ्य देती हैं और पति के हाथों जल ग्रहण कर व्रत खोलती हैं। कई घरों में इस अवसर पर परिवार के सदस्य भी पूजा में शामिल होते हैं। छतों और खुले स्थानों पर चांद का इंतजार करते परिवारों के बीच यह परंपरा पर्व का प्रमुख हिस्सा बनी रहती है।

    करवा चौथ को बंगाल में दशरथ चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। अलग-अलग क्षेत्रों में इस पर्व से जुड़ी परंपराओं और पूजा की विधियों में कुछ अंतर हो सकता है, लेकिन पति की लंबी उम्र और दांपत्य जीवन की खुशहाली की कामना इसका प्रमुख भाव है। शिवपुरी में भी महिलाएं चंद्रोदय के संभावित समय को ध्यान में रखते हुए पूजा और व्रत की तैयारियां करेंगी।

  • Chandra Grahan 2026: 3 मार्च को दिखेगा ब्लड मून, जानिए ग्रहण से जुड़ी 15 जरूरी बातें

    Chandra Grahan 2026: 3 मार्च को दिखेगा ब्लड मून, जानिए ग्रहण से जुड़ी 15 जरूरी बातें


    नई दिल्ली । 3 मार्च 2026 को साल का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण लगेगा। यह खगोलीय घटना इसलिए खास है क्योंकि इस दौरान चंद्रमा लाल रंग का दिखाई देगा, जिसे ब्लड मून कहा जाता है। भारत में भी यह ग्रहण देखा जा सकेगा। आइए ग्रहण से जुड़े 15 महत्वपूर्ण सवालों के जवाब सरल भाषा में समझते हैं।

    चंद्र ग्रहण कब लगेगा?

    3 मार्च 2026 मंगलवार को पूर्ण चंद्र ग्रहण लगेगा। भारत में ग्रहण का समय क्या रहेगा? भारतीय समयानुसार ग्रहण दोपहर 3:20 बजे शुरू होगा और शाम 6:47 बजे समाप्त होगा। भारत में यह मुख्यतः चंद्रोदय के समय दिखाई देगा।

    क्या यह पूरे भारत में दिखेगा?

    हाँ, पूरे भारत में देखा जा सकेगा, लेकिन अधिकांश जगहों पर इसका अंतिम आंशिक चरण ही दिखाई देगा। पूर्वोत्तर राज्यों में दृश्य अधिक स्पष्ट रहेगा।

    सूतक काल कब से लगेगा?
    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चंद्र ग्रहण का सूतक काल 9 घंटे पहले शुरू होता है। यानी सुबह लगभग 6:20 बजे से सूतक मान्य होगा।

    ब्लड मून क्या होता है?

    पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है। सूर्य की सीधी रोशनी चंद्रमा तक नहीं पहुँचती, बल्कि पृथ्वी के वायुमंडल से छनकर लाल प्रकाश चंद्रमा तक जाता है। इससे चंद्रमा तांबे या लाल रंग का दिखता है इसे ही ब्लड मून कहते हैं।

    क्या चंद्र ग्रहण को नंगी आंखों से देख सकते हैं?

    हाँ, चंद्र ग्रहण को बिना किसी विशेष उपकरण के सुरक्षित रूप से देखा जा सकता है।

    क्या इसे देखने के लिए चश्मा जरूरी है?
    नहीं। सूर्य ग्रहण की तरह चंद्र ग्रहण देखने के लिए विशेष चश्मे की जरूरत नहीं होती।

    क्या गर्भवती महिलाओं को सावधानी रखनी चाहिए?
    वैज्ञानिक रूप से कोई हानिकारक प्रभाव सिद्ध नहीं है। हालांकि, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

    क्या ग्रहण के दौरान खाना खा सकते हैं?

    वैज्ञानिक दृष्टि से खाना खाने पर कोई रोक नहीं है। धार्मिक मान्यताओं में सूतक काल में भोजन न करने की परंपरा है।

    मंदिर कब बंद होंगे?
    अधिकांश मंदिर सूतक काल से ही बंद कर दिए जाते हैं और ग्रहण समाप्ति के बाद शुद्धिकरण के पश्चात खुलते हैं।

    क्या ग्रहण का असर राशियों पर पड़ता है?
    ज्योतिष के अनुसार कुछ राशियों पर प्रभाव बताया जाता है, लेकिन वैज्ञानिक रूप से इसका कोई प्रमाण नहीं है।

    ग्रहण कितनी देर का होगा?
    कुल अवधि लगभग 3 घंटे 27 मिनट की रहेगी, लेकिन भारत में पूरा चरण दिखाई नहीं देगा।

    क्या यह साल का इकलौता चंद्र ग्रहण है?
    नहीं, 2026 में अन्य ग्रहण भी लग सकते हैं, लेकिन 3 मार्च का यह पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा।

    ग्रहण क्यों लगता है?
    जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और उसकी छाया चंद्रमा पर पड़ती है, तब चंद्र ग्रहण होता है।

    यह घटना क्यों खास है?
    पूर्ण चंद्र ग्रहण में चंद्रमा का लाल रंग में बदलना एक दुर्लभ और आकर्षक दृश्य होता है, जिसे देखने के लिए खगोल प्रेमी विशेष इंतजार करते हैं। 3 मार्च की शाम आसमान में दिखने वाला ब्लड मून विज्ञान और आस्था दोनों के लिए खास अनुभव होगा। यदि मौसम साफ रहा तो यह नजारा बेहद मनमोहक होगा।

  • माघ माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि: जानिए 11 जनवरी 2026 के शुभ और अशुभ काल

    माघ माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि: जानिए 11 जनवरी 2026 के शुभ और अशुभ काल


    नई दिल्ली । आज 11 जनवरी 2026 माघ माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि है। यह दिन रविवार के रूप में आ रहा है, जो कि विशेष महत्व रखता है। इस दिन, चित्रा नक्षत्र और स्वाति नक्षत्र का संगम हो रहा है जो कि कई प्रकार के शुभ योगों को जन्म देता है। साथ ही इस दिन सुकर्मा और धृति योग का भी निर्माण हो रहा है जो कार्यों में सफलता, समृद्धि और सौभाग्य का प्रतीक माने जाते हैं। इन योगों का प्रभाव विशेष रूप से शुभ कार्यों में देखा जा सकता है।

    शुभ काल

    अगर आप किसी विशेष काम को लेकर परेशान हैं या किसी महत्वपूर्ण कार्य की शुरुआत करना चाहते हैं, तो आज का दिन बहुत ही शुभ है। विशेष तौर पर, निम्नलिखित मुहूर्त और काल आपके लिए उत्तम साबित हो सकते हैं

    अभिजीत मुहूर्त 12:13 PM – 12:56 PM यह समय विशेष रूप से व्यापार, अध्ययन, या किसी नई योजना की शुरुआत के लिए आदर्श होता है।
    अमृत काल 11:06 AM – 12:52 PM इस दौरान किए गए कार्यों का फल अच्छे और स्थायी होते हैं। यह समय किसी भी शुभ कार्य के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।
    ब्रह्म मुहूर्त 05:38 AM – 06:26 AM यह समय आत्मिक उन्नति, ध्यान, पूजा और आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए बहुत लाभकारी होता है।

    अशुभ काल

    जहां शुभ समय का महत्व होता है, वहीं अशुभ कालों को जानना भी उतना ही आवश्यक है। अशुभ कालों में किसी भी महत्वपूर्ण काम को शुरू करने से बचना चाहिए, क्योंकि इन समयों में कार्यों में विघ्न आ सकते हैं या नकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं। आज के दिन निम्नलिखित अशुभ कालों से बचने की सलाह दी जाती है:

    राहू काल 4:34 PM – 5:55 PM इस दौरान कोई महत्वपूर्ण कार्य न करें, क्योंकि राहू काल में कार्यों में विघ्न और समस्याएं आ सकती हैं।

    यम गण्ड 12:34 PM – 1:54 PM यह समय भी शुभ नहीं होता और इसे टालना चाहिए।
    कुलिक 3:14 PM – 4:34 PM इस समय किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से बचें।
    दुर्मुहूर्त 04:29 PM – 05:12 PM इस समय में कामों में रुकावटें आ सकती हैं, इसलिए इसे भी अनदेखा करें।
    वर्ज्यम 12:28 AM – 02:16 AM यह समय रात में होता है और इसका प्रभाव विशेष रूप से रात के समय किया गया कार्य पर पड़ता है। सूर्य और चंद्रमा का समय,सूर्योदय: 7:14 AM, सूर्यास्त: 5:55 PM, चन्द्रोदय: 11 जनवरी 2026, 12:42 AM,चन्द्रास्त: 11 जनवरी 2026, 12:16 PM आज के पंचांग के अनुसार, यह दिन खासतौर पर मानसिक और शारीरिक उन्नति के लिए उपयुक्त रहेगा, बशर्ते आप शुभ कालों का लाभ उठाएं और अशुभ कालों से बचें।

  • संकष्टी चतुर्थी विघ्न विनाशन को प्रसन्न करने का अद्भुत दिन इस तरह करें पूजा

    संकष्टी चतुर्थी विघ्न विनाशन को प्रसन्न करने का अद्भुत दिन इस तरह करें पूजा


    नई दिल्ली । सनातन धर्म में माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को सकट चौथ या संकष्टी चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व विशेष रूप से भगवान गणेश की पूजा और उपवास से जुड़ा हुआ है जिसे विघ्न विनाशक और सुख-समृद्धि के दाता के रूप में पूजा जाता है। इस दिन विधि-विधान से भगवान गणेश का पूजन करने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।

    सकट चौथ का महत्व

    सकट चौथ को खासतौर पर माताएं अपने पुत्रों की लंबी उम्र और कल्याण के लिए रखती हैं। यह दिन गणेश जी की कृपा प्राप्त करने और जीवन में खुशहाली लाने का प्रमुख अवसर होता है। धर्मशास्त्रों के अनुसार इस दिन उपवास करने से न केवल घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है बल्कि हर प्रकार के संकटों से मुक्ति भी मिलती है।

    तिथि और समय
    दृक पंचांग के अनुसार इस साल संकष्टी चतुर्थी 6 जनवरी 2026 को मनाई जाएगी। चतुर्थी तिथि 6 जनवरी को सुबह 8 बजकर 1 मिनट से शुरू होगी और 7 जनवरी को सुबह 6 बजकर 52 मिनट तक रहेगी। इस दिन चंद्रोदय रात 8 बजकर 54 मिनट पर होगा जो व्रत के पूर्ण होने का संकेत है।

    व्रत का तरीका

    सकट चौथ का व्रत सूर्योदय से चंद्रोदय तक रखा जाता है। कई भक्त इस दिन निर्जला उपवास रखते हैं जबकि कुछ हल्का सात्विक भोजन करते हैं। व्रत के लिए सबसे पहले प्रात काल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनने चाहिए और व्रत का संकल्प लेना चाहिए। दिनभर भगवान गणेश का स्मरण करते हुए उनका पूजन करें।

    पूजन विधि

    शाम के समय चंद्रमा के दर्शन से पहले भगवान गणेश की पूजा विधिपूर्वक करें। सबसे पहले गणेश जी का पंचामृत से स्नान कराएं फिर घी और सिंदूर का लेप लगाएं। इसके बाद जनेऊ रोली इत्र दूर्वा फूल चंदन अबीर लौंग चढ़ाकर भगवान गणेश को धूप-दीप दिखाएं।गणेश जी को तिल-गुड़ के लड्डू मोदक और तिलकुट का भोग अर्पित करें। यह भगवान गणेश को अत्यधिक प्रिय है। पूजा के बाद गणेश जी के सामने गं गण गणपतये नमः मंत्र का जाप करें और गणेश स्तोत्र या अथर्वशीर्ष का पाठ करें।

    चंद्रोदय पर अर्घ्य देना

    चंद्रमा के दर्शन के बाद चंद्रोदय के समय चंद्रमा को दूध मिश्रित जल से अर्घ्य दें। इस समय दिए गए अर्घ्य से व्रत पूरा होता है और भक्तों को संकटों से मुक्ति प्राप्त होती है। इसके बाद व्रत का पारण करें और प्रसाद ग्रहण करें।

    पूजन से लाभ
    सकट चौथ का व्रत विशेष रूप से संतान सुख और परिवार की समृद्धि के लिए रखा जाता है। साथ ही इस दिन किए गए पूजा से भगवान गणेश की कृपा से घर में शांति और सुख-समृद्धि आती है। भक्तों का मानना है कि इस दिन किए गए व्रत से हर प्रकार के संकट दूर होते हैं और जीवन में सफलता और खुशी का वास होता है।

    व्रत कथा

    सकट चौथ पर पूजा के साथ-साथ व्रत कथा पढ़ना या सुनना भी बेहद महत्वपूर्ण है। कथा में भगवान गणेश के अनेक भक्तों की श्रद्धा और उनकी आस्था के किस्से बताए जाते हैं जो संकटों से उबरकर भगवान गणेश की कृपा से जीवन में सुख-शांति लाए सकट चौथ जिसे संकष्टी चतुर्थी भी कहा जाता है भगवान गणेश की पूजा करने और उपवास रखने का एक विशेष दिन है। इस दिन व्रत और पूजा करने से न केवल जीवन के संकटों से मुक्ति मिलती है बल्कि परिवार में खुशहाली और सुख-समृद्धि भी आती है। यह पर्व विशेष रूप से माताओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है जो अपने पुत्रों की लंबी उम्र और सुख-शांति की कामना करती हैं।