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  • सफलता के शिखर पर पहुंचने का गुप्त मार्ग: इन 3 रत्नों को अपनाने वाला व्यक्ति ही कहलाता है दुनिया का सबसे बड़ा भाग्यशाली

    सफलता के शिखर पर पहुंचने का गुप्त मार्ग: इन 3 रत्नों को अपनाने वाला व्यक्ति ही कहलाता है दुनिया का सबसे बड़ा भाग्यशाली


    नई दिल्ली। चाणक्य नीति जीवन दर्शन का एक ऐसा स्तंभ है जो सदियों बाद आज भी मानव समाज का मार्गदर्शन कर रहा है। आचार्य चाणक्य ने अपने नीति शास्त्र के माध्यम से मनुष्य को भौतिकता और आध्यात्मिकता के बीच का अंतर समझाया है। उनके अनुसार संसार में जिन्हें हम रत्न मानकर अत्यधिक मूल्यवान समझते हैं और सुरक्षा के घेरे में रखते हैं वे वास्तव में केवल पाषाण के टुकड़े हैं। चाणक्य का मानना है कि असली रत्न वे नहीं जो तिजोरियों में बंद हों बल्कि वे हैं जो जीवन के अस्तित्व और सामाजिक समरसता के लिए अपरिहार्य हैं। आचार्य ने पृथ्वी पर तीन रत्नों को सर्वोपरि माना है जिनमें जल अन्न और मधुर वाणी शामिल है। उनके अनुसार इन तीनों के महत्व के सामने सोना चांदी और हीरा भी तुच्छ प्रतीत होते हैं क्योंकि ये धातुएं व्यक्ति की मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करने में अक्षम हैं।

    जीवन की निरंतरता के लिए जल को प्रथम और सबसे महत्वपूर्ण रत्न माना गया है। चाणक्य कहते हैं कि मनुष्य स्वर्ण आभूषणों के बिना जीवन व्यतीत कर सकता है लेकिन जल के बिना उसका अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। जल न केवल प्यास बुझाता है बल्कि संपूर्ण प्रकृति और कृषि चक्र का आधार है। जो व्यक्ति जल की महत्ता को समझता है वही वास्तव में समझदार है। प्यास लगने पर स्वर्ण मुद्राएं गले को गीला नहीं कर सकतीं और न ही जीवन की रक्षा कर सकती हैं। इसलिए चाणक्य ने जल को किसी भी कीमती पत्थर से ऊपर रखा है क्योंकि यह प्राण रक्षक है। जल की उपलब्धता ही एक समृद्ध समाज और स्वस्थ शरीर का निर्माण करती है जिसे किसी भी भौतिक धन से खरीदा नहीं जा सकता।

    दूसरे रत्न के रूप में अन्न का स्थान आता है जिसे आचार्य चाणक्य ने अतुलनीय माना है। अन्न वह शक्ति है जो शरीर को ऊर्जा बल और बुद्धि प्रदान करती है। एक भूखे व्यक्ति के लिए सोने के भंडार का कोई मूल्य नहीं होता जब तक कि उसके पास अपनी जठराग्नि शांत करने के लिए भोजन न हो। अन्न ही वह माध्यम है जिससे संसार की समस्त व्यवस्थाएं संचालित होती हैं। चाणक्य के अनुसार जिस व्यक्ति के पास सम्मानपूर्वक अर्जित किया हुआ पर्याप्त अन्न उपलब्ध है वह विश्व का सबसे धनी व्यक्ति है। पेट की भूख केवल भोजन से ही शांत हो सकती है धन की चमक से नहीं। इसलिए अन्न को सहेजने और उसका सम्मान करने वाला व्यक्ति ही जीवन के वास्तविक सुख का अनुभव कर पाता है।

    आचार्य चाणक्य ने मधुर वाणी यानी सुभाषित को तीसरे रत्न के रूप में व्याख्यायित किया है। मधुर वाणी वह अद्वितीय धन है जो समाज में मान सम्मान और सफलता दिलाता है। कड़वे शब्द बोलने वाला व्यक्ति अपार संपत्ति के बावजूद अकेला रह जाता है जबकि मीठे और संयमित वचन बोलने वाला व्यक्ति शत्रुओं का हृदय भी जीत लेता है। मधुर वाणी बिगड़े हुए कार्यों को बनाने की क्षमता रखती है और रिश्तों में प्रेम का संचार करती है। यह एक ऐसा आभूषण है जिसे न तो कोई चुरा सकता है और न ही यह समय के साथ पुराना होता है। चाणक्य का संदेश स्पष्ट है कि मनुष्य को पत्थर के टुकड़ों को रत्न समझने की भूल नहीं करनी चाहिए बल्कि जीवन के इन तीन वास्तविक रत्नों को आत्मसात करना चाहिए।

  • अपनी सांस्कृतिक अनुभूतियों और प्रशिक्षण के निर्देशों का देश हित में करें उपयोग : राज्यपाल श्री पटेल

    अपनी सांस्कृतिक अनुभूतियों और प्रशिक्षण के निर्देशों का देश हित में करें उपयोग : राज्यपाल श्री पटेल

    भोपाल राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा है कि प्रशिक्षणअधिकारियों को सशस्त्र सीमा बल के लिये केवल अधिकारी नहींबल्कि एक जिम्मेदार संवेदनशील और सजग राष्ट्र-प्रहरी के रूप में तैयार करने का समन्वित प्रयास है। प्रशिक्षण व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह सभी प्रशिक्षणार्थियों को एक-दूसरे के राज्य की संस्कृति विशेषताओं और विविधताओं को समझने का अवसर प्रदान करता है। विविधता में एकता की भावना को मजबूत करता है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षु अपने राज्य की विशिष्टताओं की अनुभूतियों और प्रशिक्षण के निर्देशों का देश हित में उपयोग कर “एक भारत-श्रेष्ठ भारत” के निर्माण में योगदान दे। राज्यपाल श्री पटेल गुरूवार को सशस्त्र सीमा बल अकादमी भोपाल के प्रशिक्षु सहायक कमांडेंट्स को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने सभी प्रशिक्षणार्थियों को राष्ट्र के प्रतिष्ठित बल में चयन की बधाई और शुभकामनाएं दी। लोकभवन में आयोजित सौजन्य भेंट कार्यक्रम में राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी भी मौजूद थे।

    राज्यपाल श्री पटेल ने प्रशिक्षणार्थियों से कहा कि आप सभी उन सौभाग्यशाली लोगों में शामिल हैं जिन्हें सशस्त्र सीमा बल अकादमी भोपाल का हिस्सा बनकर माँ भारती की सेवा का अवसर मिला है। आपकी वर्दी केवल पहचान नहीं बल्कि समाज और राष्ट्र के सम्मान का प्रतीक है। इसी वर्दी के साये में देशवासी स्वयं को सुरक्षित महसूस करते हैं। आप जब अपने परिवार से दूर सीमाओं पर तैनात होकर देश की रक्षा करते हैं तभी हर देशवासी चैन और शांति की नींद सो पाता है। उन्होंने कहा कि ईमानदारी निष्पक्षता और संवेदनशीलता के साथ कर्तव्यों का पालन करने वाले अधिकारी ही समाज में विश्वास और सम्मान अर्जित करते हैं। आप सभी निष्ठा समर्पण और साहस के साथ राष्ट्र की सेवा करें। सशस्त्र सीमा बल अकादमी भोपाल की गौरवशाली परंपरा को नई ऊँचाइयों तक पहुंचाएं।

    राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि वर्तमान समय में देश के समक्ष आंतरिक सुरक्षा सीमा प्रबंधन नक्सलवाद तस्करी साइबर अपराध और असामाजिक गतिविधियाँ जैसी अनेक महत्वपूर्ण चुनौतियां है। राष्ट्र प्रहरी के रूप में आपके निर्णय और कार्य अत्यंत महत्वपूर्ण है। अपनी प्रतिभा से सीमा सुरक्षा प्रबंधन में आधुनिक तकनीक व्यावसायिक ज्ञान शारीरिक और मानसिक सक्रियता के नए मानक स्थापित करे। यह सुनिश्चित होना चाहिए कि असामाजिक और राष्ट्र-विरोधी तत्वों पर कठोरता से नियंत्रण करें। राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों का निरंतर मार्गदर्शन प्राप्त करें। उनके अनुभवों से सीखें और अपने ज्ञान को सहकर्मियों के साथ साझा भी करें।

    राज्यपाल श्री पटेल का एस.एस.बी. अकादमी भोपाल के निदेशक श्री बी.एस. जायसवाल ने पौधा भेंट कर स्वागत और स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया। एस.एस.बी. अकादमी भोपाल निदेशक श्री जायसवाल ने प्रशिक्षण कार्यक्रम की विस्तार से जानकारी दी। प्रशिक्षु अधिकारी सुश्री अनुष्का मनियारा और श्री अनुराग भार्गव ने प्रशिक्षण में अनुभवों को साझा किया। कमांडेंट प्रशिक्षण श्रीमती सुवर्णा सजवाल ने आभार व्यक्त किया। कोर्स डायरेक्टर डिप्टी कमांडेंट प्रशिक्षण श्री रोहित शर्मा ने कार्यक्रम का संचालन किया। सौजन्य भेंट कार्यक्रम में राज्यपाल के अपर सचिव श्री उमाशंकर भार्गव लोकभवन और एस.एस.बी. के अधिकारी-कर्मचारी एवं प्रशिक्षु अधिकारी उपस्थित थे।