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  • मुरैना में फायरिंग का रहस्य खुला: स्कूटर पर लोडिंग के दौरान चली गोली

    मुरैना में फायरिंग का रहस्य खुला: स्कूटर पर लोडिंग के दौरान चली गोली


    मुरैना। मुरैना में मंगलवार सुबह हुई गोलीकांड की घटना ने शुरुआत में जहां हमले का शक पैदा किया था, वहीं पुलिस जांच में इसका एक चौंकाने वाला सच सामने आया है। अब साफ हो गया है कि यह कोई सुनियोजित हमला नहीं था, बल्कि युवकों की लापरवाही के चलते हुआ एक गंभीर हादसा था।

    गर्ल्स स्कूल रोड पर स्कूटर से जा रहे दो छात्रों पर फायरिंग की खबर मिलते ही इलाके में हड़कंप मच गया था। शुरुआती सूचना में इसे बदमाशों द्वारा किया गया हमला माना जा रहा था, लेकिन पुलिस जांच में तस्वीर पूरी तरह बदल गई।

    डीएसपी विजय भदौरिया के अनुसार, घायल छात्रों की पहचान राहुल सिकरवार (22) और निखिल तिवारी (22) के रूप में हुई है। दोनों छात्र एक ही स्कूटर पर सवार थे और रास्ते में पीछे बैठे युवक ने पिस्टल निकाल ली। बताया जा रहा है कि वह पिस्टल को लोड कर रहा था, तभी अचानक ट्रिगर दब गया और फायरिंग शुरू हो गई।

    इस दौरान एक के बाद एक गोलियां चलीं, जिससे दोनों छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए। मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार, दोनों को तीन-तीन गोलियां लगी हैं। घायलों को पहले जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें ग्वालियर रेफर कर दिया गया।

    पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत जांच शुरू की। शुरुआती बयानों और घटनास्थल की स्थिति में विरोधाभास सामने आने के बाद सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए। फुटेज देखने पर साफ हुआ कि किसी बाहरी व्यक्ति ने हमला नहीं किया था, बल्कि गोली स्कूटर पर ही गलती से चली थी।

    इस खुलासे के बाद पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि छात्रों के पास पिस्टल कहां से आई और वे उसे लेकर किस उद्देश्य से यात्रा कर रहे थे। हथियार के लाइसेंस और स्रोत को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

    घटना के बाद स्कूटर पर खून के निशान और मौके की स्थिति ने शुरुआत में इसे क्राइम केस बना दिया था, लेकिन सीसीटीवी ने पूरी सच्चाई सामने ला दी। पुलिस ने दोनों घायलों के बयान भी दर्ज कर लिए हैं और मामले की जांच आगे बढ़ा दी है।

    फिलहाल दोनों छात्र ग्वालियर में इलाजरत हैं और उनकी हालत पर डॉक्टरों की टीम नजर बनाए हुए है। यह घटना लापरवाही और अवैध हथियारों के उपयोग को लेकर एक बड़ा सवाल छोड़ गई है, जिसकी जांच पुलिस द्वारा जारी है।

  • मुरैना में भीषण गर्मी का कहर: 45 डिग्री तापमान में ट्रांसफार्मर में लगी आग, धूल डालकर बुझाई गई लपटें

    मुरैना में भीषण गर्मी का कहर: 45 डिग्री तापमान में ट्रांसफार्मर में लगी आग, धूल डालकर बुझाई गई लपटें


    मध्य प्रदेश । मुरैना शहर में सोमवार सुबह भीषण गर्मी के बीच बड़ा हादसा हो गया। गोपीनाथ की पुलिया क्षेत्र में करीब 11:30 बजे एक बिजली ट्रांसफार्मर में अचानक आग भड़क उठी। उस समय जिले में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका था, जिससे हालात और भी गंभीर हो गए।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ट्रांसफार्मर से अचानक तेज लपटें उठती देख इलाके में अफरा-तफरी मच गई और लोग घरों से बाहर निकल आए। कुछ देर तक स्थिति बेहद तनावपूर्ण रही। हालांकि, आग थोड़ी कम होने पर स्थानीय लोगों ने साहस दिखाते हुए धूल और मिट्टी डालकर आग पर काबू पाया।

    बिजली विभाग के जानकारों का कहना है कि इन दिनों भीषण गर्मी के साथ-साथ बिजली की मांग भी काफी बढ़ गई है, जिससे ट्रांसफार्मरों पर अत्यधिक लोड पड़ रहा है। इसी ओवरलोड और तेज गर्मी के कारण ट्रांसफार्मर में तकनीकी खराबी आई और उसमें आग लग गई।

    घटना के बाद सुरक्षा के मद्देनजर पूरे इलाके की बिजली सप्लाई तुरंत बंद कर दी गई, जिससे स्थानीय लोग भीषण गर्मी में परेशान हैं। कई घरों और दुकानों में बिजली न होने से जनजीवन प्रभावित हो गया है।

    बिजली विभाग के एसई सुरेश कुमार ने बताया कि गर्मी और ओवरलोड के चलते ट्रांसफार्मर में आग लगने की संभावना है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा को देखते हुए बिजली सप्लाई रोकी गई है और मरम्मत का कार्य तेजी से किया जा रहा है। जल्द ही सप्लाई बहाल करने की कोशिश की जा रही है। फिलहाल इलाके में बिजली संकट के कारण लोग गर्मी से बेहाल हैं और राहत का इंतजार कर रहे हैं।

  • रेत माफिया का आतंक मुरैना में गश्ती दल पर हमला वन आरक्षक की मौके पर मौत

    रेत माफिया का आतंक मुरैना में गश्ती दल पर हमला वन आरक्षक की मौके पर मौत


    मुरैना । मध्य प्रदेश के मुरैना जिले से एक बेहद दर्दनाक और चौंकाने वाली घटना सामने आई है जहां अवैध रेत खनन के खिलाफ कार्रवाई करने निकली टीम पर माफिया ने जानलेवा हमला कर दिया इस हमले में एक वन आरक्षक की मौके पर ही मौत हो गई जिससे पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है

    जानकारी के मुताबिक यह घटना दिमनी थाना क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग 552 के पास की है जहां चंबल नदी के ऐसाह घाट से अवैध रेत खनन और परिवहन की शिकायतें लगातार मिल रही थीं इसी सूचना के आधार पर अंबाह रेंज की वन विभाग की टीम तड़के सुबह गश्त पर निकली थी

    गश्ती के दौरान रथोल का पुरा और रानपुर के बीच वन आरक्षक हरिकेश गुर्जर ने रेत से भरे एक ट्रैक्टर ट्रॉली को रोकने की कोशिश की लेकिन चालक ने रुकने के बजाय बेरहमी से वाहन उन पर चढ़ा दिया जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई घटना को अंजाम देने के बाद आरोपी वाहन लेकर फरार हो गया

    घटना के बाद वन विभाग की टीम ने तुरंत घायल वनकर्मी को अस्पताल पहुंचाया लेकिन तब तक उनकी जान जा चुकी थी सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया परिजन भी जिला अस्पताल पहुंचे जिससे माहौल गमगीन हो गया

    बताया जा रहा है कि हरिकेश गुर्जर हाल ही में दूसरे जिले से स्थानांतरित होकर अंबाह रेंज में पदस्थ हुए थे उनकी इस तरह की मौत ने एक बार फिर अवैध खनन के बढ़ते खतरे और उसमें शामिल माफियाओं के हौसलों को उजागर कर दिया है

    मामले पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने आरोपी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है और उसकी पहचान भी कर ली गई है सुरेन्द्र पाल सिंह डाबर ने बताया कि आरोपी की तलाश तेज कर दी गई है और जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा

    इस घटना को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं उमंग सिंघार ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े किए उन्होंने कहा कि प्रदेश में अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और कानून का डर खत्म होता जा रहा है

    यह घटना न केवल कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है बल्कि यह भी दिखाती है कि अवैध खनन का नेटवर्क कितना खतरनाक हो चुका है जब कानून की रक्षा करने वाले ही सुरक्षित नहीं हैं तो आम लोगों की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े होते हैं ऐसे में जरूरी है कि प्रशासन इस मामले में सख्त कार्रवाई करे और दोषियों को जल्द से जल्द सजा दिलाई जाए

  • मुरैना बालिका सुधार गृह से दो नाबालिग सहित तीन फरार: वार्डन पर हमला कर छीनी चाबी, CCTV फुटेज खंगाल रही पुलिस

    मुरैना बालिका सुधार गृह से दो नाबालिग सहित तीन फरार: वार्डन पर हमला कर छीनी चाबी, CCTV फुटेज खंगाल रही पुलिस

    मुरैना । मध्य प्रदेश के Morena जिले में स्थित बालिका सुधार गृह से फरार होने की एक सनसनीखेज घटना सामने आई है। Badokhar स्थित बालिका सुधार गृह से एक बालिग महिला और दो नाबालिग बालिकाएं वार्डन पर हमला कर चाबी छीनकर फरार हो गईं। घटना के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया है और पुलिस तीनों की तलाश में जुट गई है।

    मिली जानकारी के अनुसार घटना मंगलवार रात की बताई जा रही है। उस समय सुधार गृह में तैनात महिला वार्डन सो रही थी। इसी दौरान वहां रह रही एक बालिग महिला और दो नाबालिग बालिकाओं ने अचानक उस पर हमला कर दिया। बताया जा रहा है कि एक बालिका ने वार्डन की गर्दन दबा दी जबकि दूसरी ने उसके हाथ पर चोट पहुंचाई। दोनों ने मिलकर वार्डन के साथ मारपीट की और उसके पास मौजूद मुख्य गेट की चाबी छीन ली। इसके बाद तीनों ने गेट का ताला खोला और मौके से फरार हो गईं।

    वार्डन ने खुद को छुड़ाने के बाद शोर मचाया लेकिन तब तक तीनों परिसर से निकल चुकी थीं। घटना की जानकारी मिलते ही मध्य प्रदेश पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी। वार्डन की शिकायत के आधार पर स्टेशन रोड पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कर लिया गया है।

    पुलिस ने फरार बालिकाओं और महिला की तलाश के लिए आसपास के इलाकों में सर्च अभियान शुरू कर दिया है। साथ ही आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि तीनों किस दिशा में भागीं और किस रास्ते से बाहर निकलीं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही तीनों को पकड़ लिया जाएगा।

    सूत्रों के मुताबिक फरार हुई दो नाबालिग बालिकाएं महज एक दिन पहले ही सुधार गृह में लाई गई थीं। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि इतने कम समय में उन्होंने भागने की योजना कैसे बना ली। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बाहरी मदद या पहले से बनाई गई साजिश तो नहीं थी।

    घटना के बाद सुधार गृह की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। बताया जा रहा है कि इससे पहले भी मुरैना के सुधार गृहों से फरार होने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं जिससे सुरक्षा इंतजामों की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। फिलहाल पुलिस सुधार गृह में मौजूद अन्य बालिकाओं से भी पूछताछ कर रही है ताकि फरार हुई तीनों के बारे में कोई सुराग मिल सके।

    पुलिस का कहना है कि जल्द ही फरार महिला और दोनों नाबालिगों को पकड़कर पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि सुरक्षा में चूक कहां हुई और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए।

  • कृषि मंत्री के गृह जिले मुरैना में मिट्टी परीक्षण; का बड़ा खेल: 3000 फर्जी किसानों के नाम पर करोड़ों का घपला, तेलंगाना तक जुड़े तार

    कृषि मंत्री के गृह जिले मुरैना में मिट्टी परीक्षण; का बड़ा खेल: 3000 फर्जी किसानों के नाम पर करोड़ों का घपला, तेलंगाना तक जुड़े तार


    मुरैना । मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री ऐंदल सिंह कंषाना के गृह जिले मुरैना से भ्रष्टाचार का एक ऐसा चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहाँ मिट्टी परीक्षण के नाम पर कागजों में ही खेती और किसान पैदा कर दिए गए। हैरानी की बात यह है कि निजी लैबों ने अधिकारियों के साथ सांठगांठ कर मुरैना में बैठकर शहडोल, भिलाई, नागदा और यहाँ तक कि तेलंगाना के किसानों के नाम पर फर्जी ‘सॉइल हेल्थ कार्ड’ जारी कर दिए। इस बड़े फर्जीवाड़े के जरिए सरकारी खजाने को लाखों-करोड़ों की चपत लगाने की आशंका जताई जा रही है।

    निजी हाथों में कमान और शुरू हुआ भ्रष्टाचार का खेल उल्लेखनीय है कि सरकार ने पिछले वर्ष मिट्टी परीक्षण की जिम्मेदारी निजी लैबों को सौंप दी थी। इसका उद्देश्य किसानों को उनके खेत की मिट्टी की गुणवत्ता की सटीक जानकारी देना था, ताकि वे सही उर्वरकों का उपयोग कर सकें। लेकिन निजी लैब संचालकों ने इसे कमाई का जरिया बना लिया। उन्होंने न तो खेत देखे और न ही मिट्टी के नमूने लिए, बल्कि दफ्तरों में बैठकर ही किसान, खेत और फसलों का फर्जी रिकॉर्ड तैयार कर लिया।

    हजारों किलोमीटर दूर के किसानों का मुरैना में ‘परीक्षण’ जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे सरकारी सिस्टम की पोल खोलने के लिए काफी हैं। मुरैना की इन लैबों ने तीन हजार से अधिक ऐसे किसानों के सॉइल हेल्थ कार्ड जारी किए हैं, जिनका वजूद ही जिले में नहीं है। इनमें मध्य प्रदेश के अन्य जिलों जैसे शहडोल और नागदा के अलावा छत्तीसगढ़ के भिलाई और दक्षिण भारत के राज्य तेलंगाना तक के फर्जी नाम शामिल हैं। सवाल यह उठता है कि हजारों किलोमीटर दूर के खेतों की मिट्टी परीक्षण के लिए मुरैना कैसे पहुँची और अधिकारियों ने बिना भौतिक सत्यापन के भुगतान की फाइलें कैसे आगे बढ़ा दीं?

    कृषि विभाग और लैब संचालकों की मिलीभगत यह पूरा फर्जीवाड़ा कृषि विभाग के अधिकारियों और निजी लैब संचालकों की गहरी मिलीभगत का नतीजा माना जा रहा है। सरकार प्रति सॉइल हेल्थ कार्ड लैब को एक निश्चित राशि का भुगतान करती है। इसी राशि को डकारने के लिए कागजों पर फर्जी किसानों की फौज खड़ी कर दी गई। कृषि मंत्री के गृह जिले में ही इस तरह का खेल होने से विभाग में हड़कंप मच गया है। अब देखना यह है कि इस हाई-प्रोफाइल मामले में सरकार क्या कार्रवाई करती है। क्या केवल छोटी मछलियों पर गाज गिरेगी या इस सिंडिकेट को चलाने वाले बड़े अधिकारियों पर भी शिकंजा कसा जाएगा? इस खुलासे के बाद अब पूरे प्रदेश में संचालित निजी लैबों की जांच की मांग उठने लगी है।

  • पुलिस थानों की तय ‘रेट’ और अवैध वसूली का आरोप, जौरा विधायक ने प्रशासन को ठहराया जिम्मेदार

    पुलिस थानों की तय ‘रेट’ और अवैध वसूली का आरोप, जौरा विधायक ने प्रशासन को ठहराया जिम्मेदार


    मुरैना।मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में कानून-व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सियासत गरमा गई है। जौरा विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक पंकज उपाध्याय ने पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि जिले के पुलिस थाने ठेका प्रथा के आधार पर संचालित किए जा रहे हैं। उनके अनुसार, इसी वजह से इलाके में अपराध, गुंडागर्दी और अराजकता लगातार बढ़ती जा रही है।मीडिया से चर्चा के दौरान विधायक पंकज उपाध्याय ने कहा कि प्रदेश में वास्तविक पुलिसिंग कहीं नजर नहीं आ रही है। उन्होंने दावा किया कि थानों की जिम्मेदारी कानून व्यवस्था संभालने की बजाय अवैध वसूली तक सीमित रह गई है, जिससे आम जनता खुद को असुरक्षित महसूस कर रही है।

    अपराध के आधार पर तय होती है थानों कीरेट

    जौरा विधायक ने आरोप लगाया कि हर पुलिस थाने की एक तय कीमत है, जो उस क्षेत्र में चल रहे अवैध कारोबार और अपराधों पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि जिन थाना क्षेत्रों में जुआ, सट्टा या अन्य अवैध गतिविधियां अधिक होती हैं, वहां की रेट भी उसी अनुपात में ज्यादा होती है। इसी तरह अवैध रेत खनन में लगे ट्रैक्टरों और वाहनों की संख्या के आधार पर भी थानों की कीमत तय की जाती है।विधायक के अनुसार, जब कानून व्यवस्था संभालने वाले थाने इस तरह से तयशुदा रेट पर काम करेंगे, तो अपराध का बढ़ना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि इसका सीधा नुकसान आम नागरिकों को उठाना पड़ रहा है।
    बढ़ते अपराधों के लिए पुलिस जिम्मेदार
    पंकज उपाध्याय ने कहा कि जिले में गुंडागर्दी, लूट, डकैती और गोलीबारी जैसी घटनाओं में तेजी देखी जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन घटनाओं के लिए केवल निचले स्तर के पुलिसकर्मी ही नहीं, बल्कि पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भी जिम्मेदार हैं। विधायक ने कहा कि जब शीर्ष स्तर पर जवाबदेही नहीं होगी, तो व्यवस्था में सुधार की उम्मीद करना मुश्किल है।उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस थानों में जनता की शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है, जिससे लोगों का भरोसा व्यवस्था से उठता जा रहा है।

    नेताओं के हस्तक्षेप से बढ़ रही अवैध वसूली
    विधायक ने पुलिस थानों में राजनीतिक हस्तक्षेप का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि नेताओं के दबाव और संरक्षण के चलते अवैध वसूली का यह सिलसिला चल रहा है। जब तक इस तरह का हस्तक्षेप बंद नहीं होगा, तब तकतय लूट की यह व्यवस्था यूं ही चलती रहेगी।उन्होंने कहा कि आम नागरिक जब थाने जाता है, तो उसकी बात सुनी नहीं जाती, जबकि अपराधियों को संरक्षण मिलता है। यह स्थिति लोकतंत्र और कानून व्यवस्था दोनों के लिए खतरनाक है।

    कांग्रेस ने दी आंदोलन की चेतावनी
    पंकज उपाध्याय ने साफ शब्दों में कहा कि कांग्रेस पार्टी इस व्यवस्था के खिलाफ पहले भी आवाज उठाती रही है और आगे भी पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि हालात नहीं सुधरे, तो कांग्रेस सड़कों पर उतरकर व्यापक आंदोलन करेगी।उन्होंने कहा कि जनता की आवाज को गूंगे-बहरों तक पहुंचाने के लिए संघर्ष जरूरी है। कांग्रेस पार्टी आम लोगों की सुरक्षा और न्याय के लिए हर स्तर पर लड़ाई लड़ेगी।

    प्रशासन पर बढ़ता दबाव

    विधायक के इन आरोपों के बाद पुलिस प्रशासन और जिला प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है। हालांकि अभी तक प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी और प्रशासनिक हलचल तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

  • NH-44 पर बदइंतजामी का कहर: छौंदा टोल पर 5 किमी लंबा जाम, कैंसर पीड़ित मां के साथ फंसा बेटा-प्रशासन बेखबर

    NH-44 पर बदइंतजामी का कहर: छौंदा टोल पर 5 किमी लंबा जाम, कैंसर पीड़ित मां के साथ फंसा बेटा-प्रशासन बेखबर


    मध्य प्रदेश / मुरैना  के मुरैना जिले में नेशनल हाईवे-44 पर स्थित छौंदा टोल प्लाजा इन दिनों अव्यवस्था और लापरवाही की पहचान बन चुका है। यहां लगने वाला रोज़ाना जाम अब केवल ट्रैफिक समस्या नहीं रहा बल्कि यह मानव संवेदना और प्रशासनिक जिम्मेदारी पर भी सवाल खड़े कर रहा है। शुक्रवार शाम हालात इतने बिगड़े कि हाईवे पर 4 से 5 किलोमीटर लंबा महाजाम लग गया जो करुआ गांव तक फैल गया। हाईवे होने के कारण चंद मिनटों में ही वाहनों की लंबी कतार लग गई। जाम में आम वाहन ही नहीं बल्कि एंबुलेंस मरीजों की गाड़ियां और बुजुर्ग यात्री भी फंसे रहे। कई घंटे बीतने के बावजूद जाम खुलवाने की कोई ठोस व्यवस्था नजर नहीं आई।

    कैंसर पीड़ित मां की हालत बिगड़ी
    इस जाम की सबसे दर्दनाक तस्वीर तब सामने आई जब मुरैना निवासी अरविंद सिंह अपनी कैंसर पीड़ित मां उर्मिला के साथ फंस गए। अरविंद ने बताया कि उनकी मां की हाल ही में 14 घंटे लंबी सर्जरी कीमोथेरेपी और रेडिएशन हुआ है। वे ग्वालियर से नियमित चेकअप कराकर लौट रहे थे तभी शाम के समय छौंदा टोल पर जाम में फंस गए। अरविंद के मुताबिक “जाम करुआ गांव के विक्टर स्कूल तक था। घंटों खड़े रहने से मां की तबीयत बिगड़ने लगी। उन्हें लगातार उल्टियां होने लगीं लेकिन न टोल प्रबंधन ने मदद की और न ही कोई प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचा।
    परिजनों ने कई बार मदद की गुहार लगाई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

    1 दिसंबर से नई कंपनी बढ़ी अव्यवस्था

    गौरतलब है कि 1 दिसंबर से छौंदा टोल प्लाजा का संचालन शिवा कॉर्पोरेशन कंपनी के पास है। इससे पहले यह टोल पथ इंडिया द्वारा संचालित किया जा रहा था। नई कंपनी के टेकओवर के बाद से ही यहां अव्यवस्था बढ़ गई है।स्थानीय लोगों और यात्रियों का कहना है कि शाम होते ही यहां जाम लगना आम हो गया है। टोल बूथ पर स्टाफ की कमीतकनीकी खामियां और सुस्त प्रबंधन इसकी बड़ी वजह मानी जा रही हैं।

    टोल मैनेजर का गैर-जिम्मेदाराना बयान

    जब इस अव्यवस्था पर टोल मैनेजर अनुराग तोमर से सवाल किया गया तो उन्होंने हैरान करने वाला जवाब दिया। उन्होंने कहाजाम लगता है तो हम ही खुलवाते हैं। अभी नया चार्ज संभाला है सिस्टम में थोड़ी समस्या है ठीक करवा रहे हैं। इस बयान से साफ है कि यात्रियों की परेशानी को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।

    पुलिस और प्रशासन की प्रतिक्रिया

    सिविल लाइन थाना प्रभारी से संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।हालांकि मामले की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ASP सुरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि छौंदा टोल पर जाम की लगातार शिकायतें मिल रही हैं।उन्होंने चेतावनी दी-टोल प्रबंधन को निर्देश दिए गए हैं कि जाम की स्थिति नहीं बननी चाहिए। अगर सुधार नहीं हुआ तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।छौंदा टोल पर लग रहा जाम सिर्फ ट्रैफिक की समस्या नहीं बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का आईना है। जब मरीज और एंबुलेंस तक फंसे रहें तो यह सिस्टम की विफलता मानी जाएगी।