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  • टैरिफ दबाव के बीच जयशंकर का रूस दौरा अहम, लावरोव से मुलाकात में तेल व्यापार और रणनीतिक सहयोग पर चर्चा संभव

    टैरिफ दबाव के बीच जयशंकर का रूस दौरा अहम, लावरोव से मुलाकात में तेल व्यापार और रणनीतिक सहयोग पर चर्चा संभव

    नई दिल्ली । विदेश मंत्री एस. जयशंकर 23 अगस्त से दो दिन के रूस दौरे पर जा रहे हैं। उनका यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब भारत और रूस के संबंधों के साथ-साथ भारत के ऊर्जा हित भी अंतरराष्ट्रीय दबावों के बीच चर्चा में हैं। यात्रा के दौरान जयशंकर रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से मुलाकात करेंगे और दोनों देशों के बीच क्षेत्रीय तथा वैश्विक मुद्दों पर बातचीत करेंगे।

    जयशंकर व्यापार, विज्ञान, तकनीक और संस्कृति से जुड़े भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग की 27वीं बैठक की सह-अध्यक्षता भी करेंगे। इस बैठक में दोनों देशों के बीच आर्थिक और कारोबारी सहयोग को आगे बढ़ाने के साथ विभिन्न क्षेत्रों में चल रही साझेदारी की समीक्षा किए जाने की उम्मीद है।

    जयशंकर का रूस दौरा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से रूस से तेल, गैस और यूरेनियम खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की धमकी के बीच हो रहा है। ऐसे में भारत-रूस ऊर्जा कारोबार इस यात्रा के महत्वपूर्ण संदर्भों में शामिल है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है और रूस पिछले कुछ समय में उसके प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में शामिल रहा है।

    यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों की पाबंदियों और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बदलाव के बीच भारत ने रूसी तेल की खरीद जारी रखी थी। हालांकि अमेरिकी दबाव और भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता के बीच रूसी तेल आयात में बदलाव की स्थिति बनी रही। इसके बाद पश्चिम एशिया में संघर्ष बढ़ने से ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ी और भारत के लिए रूसी तेल का महत्व फिर बढ़ गया।

    जुलाई में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से अधिक पहुंचने की बात सामने आई। यह आंकड़ा बताता है कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा में रूसी आपूर्ति कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। ऐसे में जयशंकर की यात्रा के दौरान ऊर्जा सहयोग और व्यापार से जुड़े मुद्दों पर बातचीत को विशेष महत्व मिल सकता है।

    दौरे का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू रक्षा और सैन्य तकनीकी सहयोग है। भारत और रूस लंबे समय से रक्षा क्षेत्र में साझेदार रहे हैं। हाल ही में दोनों देशों के अंतर-सरकारी आयोग के सैन्य और सैन्य-तकनीकी सहयोग से जुड़े कार्य समूह की बैठक भी हुई थी। इसमें दोनों पक्षों ने सशस्त्र बलों के बीच सहयोग बढ़ाने और आगामी गतिविधियों की योजना पर चर्चा की थी।

    इस पृष्ठभूमि में जयशंकर की रूस यात्रा दोनों देशों के व्यापक रणनीतिक संबंधों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। रक्षा उपकरणों की आपूर्ति, तकनीकी सहयोग और सैन्य साझेदारी से जुड़े विषय भी द्विपक्षीय बातचीत के एजेंडे में रह सकते हैं, हालांकि किसी विशेष नई रक्षा डील की पुष्टि अभी नहीं हुई है।

    भारत और रूस के संबंध केवल रक्षा और ऊर्जा तक सीमित नहीं हैं। दोनों देश व्यापार, विज्ञान, तकनीक, संस्कृति और आर्थिक सहयोग के नए क्षेत्रों में भी साझेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। अंतर-सरकारी आयोग की बैठक इसी व्यापक सहयोग को संस्थागत स्तर पर आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण मंच है।

    रूसी नेतृत्व भी हाल के समय में भारत के आर्थिक और तकनीकी विकास की सराहना करता रहा है। ऐसे में जयशंकर की यात्रा को दोनों देशों के बीच पारंपरिक रणनीतिक संबंधों को मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा सकता है। अमेरिकी टैरिफ दबाव, ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच भारत के लिए रूस के साथ संवाद बनाए रखना महत्वपूर्ण है।

  • यूक्रेन का रूस पर अब तक का सबसे बड़ा ड्रोन हमला, मॉस्को क्षेत्र से रोस्तोव तक कई ठिकानों पर मची तबाही

    यूक्रेन का रूस पर अब तक का सबसे बड़ा ड्रोन हमला, मॉस्को क्षेत्र से रोस्तोव तक कई ठिकानों पर मची तबाही

    नई दिल्ली । रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में रविवार 16 अगस्त को हवाई हमलों का अब तक का सबसे बड़ा दौर देखने को मिला। यूक्रेन ने रूस के कई इलाकों को निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर ड्रोन हमला किया। रूस के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि रातभर में 822 यूक्रेनी ड्रोन नष्ट किए गए। हमलों के कारण कई क्षेत्रों में आग, नुकसान और जनहानि की खबर सामने आई है।

    मॉस्को क्षेत्र में यूक्रेनी ड्रोन हमलों का बड़ा असर दिखाई दिया। पोडोल्स्क इलाके में ऑनलाइन रिटेल कंपनी वाइल्डबेरीज के एक गोदाम को निशाना बनाए जाने की जानकारी सामने आई। हमले के बाद गोदाम में भीषण आग लग गई और आसमान में धुएं का बड़ा गुबार दिखाई दिया। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, इस हमले में 83 वर्षीय एक व्यक्ति की मौत हुई, जबकि कई लोग घायल हुए।

    मॉस्को क्षेत्र के अधिकारियों ने इसे युद्ध शुरू होने के बाद क्षेत्र पर हुए सबसे बड़े यूक्रेनी ड्रोन हमलों में से एक बताया। पोडोल्स्क के अलावा आसपास के इलाकों में भी ड्रोन गतिविधियों की सूचना मिली। हमले के चलते स्थानीय स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई और प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य चलाया गया।

    यूक्रेन ने रूस के रोस्तोव क्षेत्र में मिसाइल ईंधन बनाने वाली एक सुविधा को भी निशाना बनाने का दावा किया। इस कार्रवाई को रूसी सैन्य ढांचे को प्रभावित करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि हमले से हुए नुकसान का पूरा आकलन तत्काल सामने नहीं आया। दोनों पक्षों के दावों के बीच हमले की व्यापकता और प्रभाव को लेकर स्थिति लगातार स्पष्ट हो रही है।

    दक्षिणी रूस के बेलगोरोद क्षेत्र के पास भी ड्रोन हमले की जानकारी सामने आई। एक बस को निशाना बनाए जाने के बाद एक व्यक्ति की मौत होने की बात कही गई है। इस घटना ने एक बार फिर दिखाया कि युद्ध से जुड़े हवाई हमले केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रह गए हैं और नागरिक इलाकों पर भी उनका असर पड़ रहा है।

    इस बीच रूस ने भी यूक्रेन के कई हिस्सों पर रातभर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, एक स्टील प्लांट को हुए नुकसान में दो लोगों की मौत हुई और 14 लोग घायल हुए। हमले के कारण बिजली उत्पादन और ब्लास्ट फर्नेस से जुड़े हिस्सों को नुकसान पहुंचा तथा संयंत्र की कुछ उत्पादन गतिविधियां आंशिक रूप से प्रभावित हुईं।

    कीव में भी रूसी मिसाइल हमलों के कारण कई इलाकों में आग लगने की जानकारी सामने आई। शहर के कम से कम दो जिलों में नुकसान की खबर मिली। राजधानी और आसपास के क्षेत्र में कई लोग घायल हुए, जिनमें एक बच्चा भी शामिल बताया गया। हमलों के बाद आपातकालीन सेवाओं को प्रभावित क्षेत्रों में भेजा गया।

    हाल के दिनों में दोनों देशों ने एक-दूसरे के सैन्य और आर्थिक ढांचे पर हमले तेज किए हैं। यूक्रेन रूसी तेल रिफाइनरियों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों और सैन्य उपयोग से जुड़ी सुविधाओं को निशाना बना रहा है। दूसरी ओर रूस यूक्रेन के शहरों, ऊर्जा ढांचे और बंदरगाहों पर लगातार हमले कर रहा है।

    काला सागर और डेन्यूब क्षेत्र में भी युद्ध का असर बढ़ा है। रूस ने पिछले सप्ताह रोमानियाई सीमा के पास डेन्यूब नदी पर स्थित यूक्रेन के प्रमुख अनाज निर्यात बंदरगाह को निशाना बनाया था। इस घटनाक्रम के बीच रोमानिया के ऊपर एक ड्रोन गिराए जाने की जानकारी भी सामने आई है।

    रूस और यूक्रेन के बीच बढ़ते ड्रोन और मिसाइल हमले युद्ध के और लंबा खिंचने की आशंका बढ़ा रहे हैं। दोनों पक्ष लगातार एक-दूसरे की सैन्य क्षमता और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। 16 अगस्त की घटनाओं ने इस संघर्ष में हवाई हमलों के बढ़ते पैमाने और उससे जुड़े मानवीय नुकसान को एक बार फिर सामने ला दिया है।

  • मॉस्को और रोस्तोव को बनाया निशाना, रातभर चले यूक्रेनी ड्रोन हमलों में बुजुर्ग समेत छह लोगों की जान गई

    मॉस्को और रोस्तोव को बनाया निशाना, रातभर चले यूक्रेनी ड्रोन हमलों में बुजुर्ग समेत छह लोगों की जान गई

    नई दिल्ली ।रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में रविवार को हवाई हमलों का एक बड़ा दौर देखने को मिला। यूक्रेन की ओर से रूस के कई इलाकों में रातभर बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले किए जाने की जानकारी सामने आई है। रूसी अधिकारियों के अनुसार, हवाई सुरक्षा बलों ने देश के अलग-अलग हिस्सों में 822 यूक्रेनी ड्रोन को नष्ट किया। इस हमले में कम से कम छह लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है।

    रूसी रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, हमले के दौरान करीब 600 ड्रोन मॉस्को की दिशा में बढ़ रहे थे। राजधानी और उसके आसपास के इलाकों में हवाई सुरक्षा व्यवस्था को सक्रिय किया गया। मॉस्को क्षेत्र में एक ड्रोन या उसके मलबे के एक निजी मकान से टकराने के बाद 83 वर्षीय बुजुर्ग की मौत की जानकारी सामने आई।

    हमले का असर दक्षिण-पश्चिमी रोस्तोव क्षेत्र में भी देखा गया। क्षेत्रीय प्रशासन के अनुसार, तीन कस्बों को निशाना बनाया गया और वहां पांच लोगों की मौत हुई। हमलों से कई स्थानों पर नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है। स्थानीय प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में स्थिति का आकलन शुरू किया।

    मॉस्को क्षेत्र में ड्रोन हमलों के कारण कई जगह आपातकालीन सेवाओं को सक्रिय किया गया। कुछ स्थानों पर आग लगने की सूचना भी सामने आई। हमलों के दौरान राजधानी की ओर बड़ी संख्या में ड्रोन आने के कारण हवाई सुरक्षा इकाइयों पर दबाव बढ़ा। यह हमला यूक्रेन की ओर से रूस के खिलाफ किए गए सबसे बड़े हवाई हमलों में से एक माना जा रहा है।

    मॉस्को क्षेत्र के एक औद्योगिक इलाके में स्थित एक बड़े गोदाम परिसर में भी आग लगने की जानकारी सामने आई। हमले के बाद आसपास के क्षेत्र में धुआं उठता दिखाई दिया। अधिकारियों ने प्रभावित स्थानों पर राहत और बचाव दल भेजे। नुकसान और हमले के पूरे प्रभाव का आकलन किया जा रहा है।

    यूक्रेन की ओर से रूस के भीतर लंबी दूरी तक ड्रोन और मिसाइलों के जरिए हमले तेज किए गए हैं। इन कार्रवाइयों का उद्देश्य रूसी सैन्य और औद्योगिक ढांचे पर दबाव बढ़ाना बताया जाता है। रूस लगातार ऐसे हमलों को रोकने के लिए अपनी हवाई सुरक्षा प्रणाली का इस्तेमाल कर रहा है।

    इस बड़े हमले से एक दिन पहले यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने रूस के भीतर गहरे क्षेत्र में किए गए हमलों की जानकारी दी थी। उनके अनुसार, रूस के समारा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण केंद्र को निशाना बनाया गया था। यूक्रेन ने वहां अपने निर्मित फ्लेमिंगो मिसाइल के इस्तेमाल का दावा किया था। इसके अलावा एक रूसी एयरबेस को भी निशाना बनाए जाने की जानकारी दी गई थी।

    जेलेंस्की ने अपने बयान में कहा था कि रूस को युद्ध की वास्तविक कीमत महसूस करनी चाहिए। उनके अनुसार, यूक्रेन की लंबी दूरी की सैन्य कार्रवाई का उद्देश्य रूस पर दबाव बढ़ाना है। इसके बाद रूस के कई हिस्सों में हुए बड़े ड्रोन हमले ने दोनों देशों के बीच संघर्ष की बढ़ती तीव्रता को सामने ला दिया है।

    इसी बीच रूस की ओर से यूक्रेन पर भी हमले जारी रहे। यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, रविवार को कीव और दूसरे इलाकों में रूसी मिसाइल और ड्रोन हमलों से नुकसान हुआ तथा कुछ लोग घायल हुए। दोनों देशों के बीच लगातार हो रहे हमलों से नागरिक क्षेत्रों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर खतरा बढ़ रहा है।

    रूस पर हुए ताजा ड्रोन हमले ने युद्ध के उस दौर को और स्पष्ट किया है जिसमें दोनों पक्ष अपने प्रतिद्वंद्वी के क्षेत्र में दूर तक हमला करने की क्षमता बढ़ा रहे हैं। 822 ड्रोन नष्ट करने का रूसी दावा इस हमले के बड़े पैमाने को दर्शाता है, जबकि छह लोगों की मौत ने इसके मानवीय प्रभाव को भी सामने रखा है। हालांकि, युद्ध के दौरान किए गए सैन्य दावों की स्वतंत्र पुष्टि अलग-अलग मामलों में सीमित रहती है।

  • मॉस्को पर यूक्रेन का बड़ा ड्रोन प्रहार, तेल रिफाइनरी को बनाया निशाना; जेलेंस्की बोले- यह जवाबी कार्रवाई है

    मॉस्को पर यूक्रेन का बड़ा ड्रोन प्रहार, तेल रिफाइनरी को बनाया निशाना; जेलेंस्की बोले- यह जवाबी कार्रवाई है

    नई दिल्ली । रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध एक बार फिर ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जहां दोनों पक्ष सीधे एक-दूसरे की रणनीतिक और आर्थिक क्षमताओं को नुकसान पहुंचाने में जुटे दिखाई दे रहे हैं। ताजा घटनाक्रम में यूक्रेन ने मॉस्को क्षेत्र पर व्यापक ड्रोन हमला कर रूस की सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती दी है। इस कार्रवाई के बाद रूस की राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा अलर्ट बढ़ा दिया गया है, जबकि कई हवाई अड्डों पर उड़ानों के संचालन को अस्थायी रूप से प्रभावित करना पड़ा।

    रिपोर्टों के अनुसार यूक्रेन द्वारा किए गए इस हमले का मुख्य लक्ष्य एक महत्वपूर्ण तेल रिफाइनरी और ऊर्जा ढांचे से जुड़े ठिकाने थे। हमले के बाद रिफाइनरी क्षेत्र से उठते धुएं और आग की तस्वीरें सामने आईं, जिन्होंने इस कार्रवाई की गंभीरता को उजागर किया। ऊर्जा क्षेत्र को निशाना बनाए जाने को युद्ध की बदलती रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, जहां सैन्य ठिकानों के साथ-साथ आर्थिक और औद्योगिक ढांचे भी संघर्ष का केंद्र बनते जा रहे हैं।

    यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने हमले के बाद जारी बयान में कहा कि यह कार्रवाई रूस द्वारा यूक्रेनी शहरों और नागरिक क्षेत्रों पर लगातार किए जा रहे हमलों का जवाब है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यूक्रेन उन संसाधनों और संरचनाओं को निशाना बना रहा है जो युद्ध संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उनके अनुसार यह रणनीति रूस की सैन्य क्षमता और आपूर्ति तंत्र को कमजोर करने के उद्देश्य से अपनाई जा रही है।

    दूसरी ओर रूस ने दावा किया है कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने बड़ी संख्या में ड्रोन को मार गिराया और संभावित नुकसान को सीमित करने में सफलता हासिल की। हालांकि राजधानी क्षेत्र तक ड्रोन पहुंचने की घटनाओं ने रूस की सुरक्षा तैयारियों और हवाई रक्षा तंत्र को लेकर नए सवाल भी खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि राजधानी के आसपास बार-बार हो रहे ड्रोन हमले इस संघर्ष के नए स्वरूप को दर्शाते हैं।

    युद्ध के मौजूदा चरण में ऊर्जा अवसंरचना विशेष रूप से निशाने पर है। तेल रिफाइनरी, ईंधन भंडारण केंद्र, बिजली संयंत्र और परिवहन नेटवर्क दोनों पक्षों के लिए रणनीतिक महत्व रखते हैं। इन पर हमले का उद्देश्य केवल तत्काल नुकसान पहुंचाना नहीं बल्कि विरोधी पक्ष की आपूर्ति श्रृंखला, सैन्य लॉजिस्टिक्स और आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित करना भी होता है। यही कारण है कि हाल के महीनों में इस प्रकार के हमलों में तेजी देखी गई है।

    जेलेंस्की ने यह भी संकेत दिया कि यूक्रेनी बलों ने रूस के अन्य क्षेत्रों और कब्जे वाले इलाकों में स्थित सैन्य प्रतिष्ठानों को भी निशाना बनाया है। इससे स्पष्ट है कि यूक्रेन अब युद्ध को केवल अपनी सीमाओं तक सीमित रखने के बजाय रूस के भीतर मौजूद रणनीतिक परिसंपत्तियों तक पहुंचाने की क्षमता प्रदर्शित कर रहा है। यह घटनाक्रम संघर्ष की तीव्रता को और बढ़ा सकता है।

    विश्लेषकों का मानना है कि दोनों देशों के बीच चल रहा यह संघर्ष फिलहाल समाप्ति की ओर जाता नहीं दिख रहा है। इसके विपरीत, ऊर्जा ढांचे और महत्वपूर्ण आर्थिक परिसंपत्तियों पर बढ़ते हमले संकेत दे रहे हैं कि आने वाले समय में युद्ध और अधिक जटिल तथा व्यापक रूप ले सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी इस स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है, क्योंकि इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है।

    फिलहाल मॉस्को सहित रूस के कई क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर दी गई है। वहीं यूक्रेन ने संकेत दिया है कि वह अपने खिलाफ हो रहे हमलों का जवाब देने की रणनीति जारी रखेगा। ऐसे में युद्ध का अगला चरण दोनों देशों के लिए और अधिक चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।

  • पुतिन की सुरक्षा पर हाईटेक पहरा, एआई ट्रैकिंग की आशंका के बीच बढ़ाई गई गोपनीयता

    पुतिन की सुरक्षा पर हाईटेक पहरा, एआई ट्रैकिंग की आशंका के बीच बढ़ाई गई गोपनीयता

    नई दिल्ली । आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल निगरानी तकनीकों के तेजी से बढ़ते प्रभाव के बीच रूस ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की सुरक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव किए हैं। आधुनिक तकनीक के माध्यम से संभावित ट्रैकिंग, निगरानी और सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए क्रेमलिन ने कई अतिरिक्त सावधानियां लागू की हैं। इन कदमों को वैश्विक स्तर पर बदलते सुरक्षा परिदृश्य और हाईटेक खतरों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    रूस की सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि वर्तमान समय में एआई आधारित विश्लेषण प्रणालियां विशाल मात्रा में उपलब्ध डिजिटल डेटा का बेहद कम समय में अध्ययन कर सकती हैं। सीसीटीवी फुटेज, सार्वजनिक गतिविधियों, यात्रा पैटर्न और अन्य डिजिटल संकेतों के आधार पर किसी भी महत्वपूर्ण व्यक्ति की गतिविधियों का आकलन करना पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान हो गया है। इसी कारण सुरक्षा व्यवस्था में तकनीकी जोखिमों को विशेष महत्व दिया जा रहा है।

    जानकारों के अनुसार राष्ट्रपति से जुड़े कई संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी प्रणालियों की समीक्षा की गई है। कुछ स्थानों पर डिजिटल नेटवर्क को सीमित करने तथा सुरक्षा ढांचे को बाहरी हस्तक्षेप से सुरक्षित रखने के लिए अतिरिक्त उपाय अपनाए गए हैं। उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी प्रकार की साइबर घुसपैठ या डेटा विश्लेषण के माध्यम से संवेदनशील जानकारी तक पहुंच न बनाई जा सके।

    राष्ट्रपति की सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य सहयोगियों के लिए भी नए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। सुरक्षा कारणों से उनके आवागमन, संचार माध्यमों और डिजिटल उपकरणों के उपयोग को लेकर अधिक सतर्कता बरती जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि किसी भी उच्च पदस्थ व्यक्ति की जानकारी तक पहुंच उसके आसपास मौजूद लोगों के माध्यम से भी संभव हो सकती है, इसलिए संपूर्ण सुरक्षा श्रृंखला को मजबूत करना आवश्यक है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक सुरक्षा चुनौतियां अब केवल पारंपरिक खतरों तक सीमित नहीं रह गई हैं। पहले जहां सुरक्षा का केंद्र भौतिक हमलों, जासूसी गतिविधियों या सैन्य जोखिमों पर होता था, वहीं अब डेटा, एल्गोरिदम और डिजिटल विश्लेषण भी सुरक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। एआई आधारित प्रणालियां सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सूचनाओं को जोड़कर व्यवहारिक पैटर्न और संभावित गतिविधियों का अनुमान लगाने में सक्षम होती जा रही हैं।

    हाल के वर्षों में दुनिया के कई देशों ने साइबर सुरक्षा और डिजिटल गोपनीयता को राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रमुख स्तंभों में शामिल किया है। रूस भी इसी दिशा में अपने सुरक्षा ढांचे को लगातार अपडेट कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में उच्च पदस्थ नेताओं की सुरक्षा केवल हथियारबंद सुरक्षा कर्मियों या सुरक्षित परिसरों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि डिजिटल डेटा की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण होगी।

    तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार एआई, सैटेलाइट निगरानी, ड्रोन तकनीक और साइबर इंटेलिजेंस ने सुरक्षा की परिभाषा को पूरी तरह बदल दिया है। ऐसे में विश्व की प्रमुख शक्तियां अपने नेतृत्व, सैन्य प्रतिष्ठानों और संवेदनशील ढांचों की सुरक्षा के लिए नई रणनीतियां विकसित कर रही हैं। रूस द्वारा उठाए गए हालिया कदम इसी व्यापक वैश्विक प्रवृत्ति का हिस्सा माने जा रहे हैं।

  • ग्लोबल फाइनेंस में डॉलर की बादशाहत को झटका, पुतिन का दावा- ब्रिक्स देशों की बढ़ती ताकत के आगे पस्त हो रहा पश्चिमी देशों का दबदबा

    ग्लोबल फाइनेंस में डॉलर की बादशाहत को झटका, पुतिन का दावा- ब्रिक्स देशों की बढ़ती ताकत के आगे पस्त हो रहा पश्चिमी देशों का दबदबा

    नई दिल्ली । वैश्विक वित्तीय और व्यापारिक व्यवस्था में अमेरिकी डॉलर के वर्चस्व को लेकर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक बड़ा और तीखा बयान जारी किया है। सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम (SPIEF) के मुख्य सत्र को संबोधित करते हुए रूसी राष्ट्रपति ने दावा किया है कि दुनिया भर में अब डॉलर और यूरो जैसी पारंपरिक पश्चिमी मुद्राओं के प्रति अविश्वास तेजी से बढ़ रहा है। पश्चिमी देशों द्वारा लगाए जा रहे एकतरफा प्रतिबंधों, आर्थिक नाकेबंदी और अन्य देशों की वैध संपत्तियों को फ्रीज करने की नीतियों के कारण दुनिया भर की उभरती अर्थव्यवस्थाएं, विशेषकर ब्रिक्स (BRICS) गठबंधन के सदस्य देश अब अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं की ओर रुख कर रहे हैं।

    इस महत्वपूर्ण आर्थिक सत्र के दौरान, जिसकी कमान भारतीय मीडिया जगत से जुड़ी वरिष्ठ पत्रकार के हाथों में थी, राष्ट्रपति पुतिन ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की बदलती दिशा का विस्तृत खाका पेश किया। उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों की वित्तीय नीतियां बेहद अदूरदर्शी और राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं, जो मध्य पूर्व से लेकर यूरोप तक अस्थिरता पैदा कर रही हैं। यूक्रेन विवाद के बाद रूस के राष्ट्रीय आरक्षित कोष (रिजर्व फंड) को फ्रीज किए जाने की कार्रवाई को उन्होंने खुले तौर पर एक अंतरराष्ट्रीय ‘चोरी’ करार दिया। पुतिन ने चेतावनी दी कि इस कदम ने वैश्विक बैंकिंग और भुगतान प्रणालियों की निष्पक्षता पर एक ऐसा दाग लगा दिया है जिसे मिटाना अब मुमकिन नहीं है।

    रूसी राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि दुनिया का हर संप्रभु राष्ट्र अब यह भली-भांति समझ चुका है कि यदि वे पश्चिमी देशों के भू-राजनीतिक हितों के आड़े आते हैं, तो पलक झपकते ही उनकी भी अंतरराष्ट्रीय संपत्तियां जब्त की जा सकती हैं और उन्हें वैश्विक भुगतान नेटवर्क से बाहर किया जा सकता है। इसी डर और असुरक्षा के माहौल ने वैकल्पिक वित्तीय प्रणालियों के विकास को गति दी है। वर्तमान में विभिन्न देश आपस में व्यापारिक लेन-देन के लिए अपनी स्थानीय मुद्राओं का उपयोग बढ़ा रहे हैं। इसके साथ ही सेंट्रल बैंकों की डिजिटल करेंसी (CBDC) और डिजिटल वित्तीय संपत्तियों की भूमिका अंतरराष्ट्रीय व्यापार में तेजी से मुख्यधारा का हिस्सा बनती जा रही है।

    रूस की अपनी आर्थिक स्थिति का उदाहरण देते हुए पुतिन ने बताया कि आज उनका देश अपने प्रमुख अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ रूबल और अन्य राष्ट्रीय मुद्राओं में रिकॉर्ड स्तर पर व्यापार कर रहा है। रूस के कुल निर्यात व्यापार का लगभग 65 प्रतिशत हिस्सा अब सीधे तौर पर उनकी अपनी मुद्रा रूबल में निष्पादित हो रहा है, जिसने देश की अर्थव्यवस्था को पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद स्थिरता प्रदान की है। उन्होंने आंकड़ों के जरिए यह साबित करने का प्रयास किया कि विकसित देशों का समूह यानी जी7 (G7) अब ब्रिक्स देशों के आर्थिक उभार के सामने लगातार अपनी चमक खोता जा रहा है।

    आर्थिक विकास के वैश्विक आंकड़ों को साझा करते हुए रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि पिछले पांच वर्षों के दौरान वैश्विक जीडीपी विकास में अकेले ब्रिक्स देशों का योगदान 49 प्रतिशत रहा है, जबकि इसके मुकाबले जी7 देशों की हिस्सेदारी मात्र 18 फीसदी पर सिमट कर रह गई है। क्रय शक्ति समता (PPP) के आधार पर देखें तो वैश्विक अर्थव्यवस्था में ब्रिक्स की हिस्सेदारी अब बढ़कर 40 प्रतिशत हो चुकी है, जबकि जी7 देश अब 20 प्रतिशत से भी नीचे खिसक गए हैं। पुतिन ने अनुमान जताया कि आने वाले वर्षों में ब्रिक्स देशों की आर्थिक विकास दर चार प्रतिशत से अधिक रहेगी, जबकि पश्चिमी अर्थव्यवस्थाएं बमुश्किल एक प्रतिशत की दर से आगे बढ़ पाएंगी।

    अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों के संबंध में बात करते हुए पुतिन ने कहा कि वैश्विक व्यापार और लॉजिस्टिक्स का केंद्र अब पूरी तरह से पूर्व और दक्षिण की ओर स्थानांतरित हो रहा है। ‘नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर’ और ‘ट्रांस-आर्कटिक ट्रांसपोर्टेशन रूट’ जैसे नए व्यापारिक रास्ते अब पश्चिमी नियंत्रण वाले पारंपरिक जलमार्गों और हब को पूरी तरह से दरकिनार कर रहे हैं। उन्होंने विश्व व्यापार संगठन (WTO) पर भी दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया और कहा कि जब तक पश्चिमी देशों को इन वैश्विक संस्थाओं से लाभ मिल रहा था, तब तक उन्होंने नियमों की दुहाई दी, लेकिन जैसे ही उन्हें कड़ी प्रतिस्पर्धा मिलने लगी, वे खुद ही इन नियमों से पीछे हट गए हैं।

  • रूस-पाकिस्तान की बढ़ती दोस्ती से बढ़ी भारत की चिंता! सस्ते तेल से लेकर सैन्य सहयोग तक गहराते रिश्ते

    रूस-पाकिस्तान की बढ़ती दोस्ती से बढ़ी भारत की चिंता! सस्ते तेल से लेकर सैन्य सहयोग तक गहराते रिश्ते




    नई दिल्ली। पाकिस्तान और रूस के बीच तेजी से बढ़ती नजदीकियों ने दक्षिण एशिया की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। ऊर्जा संकट, तेल व्यापार और सैन्य सहयोग को लेकर दोनों देशों के रिश्ते लगातार मजबूत होते दिखाई दे रहे हैं। रूस में पाकिस्तान के राजदूत Faisal Niaz Tirmizi ने संकेत दिए हैं कि पाकिस्तान एक बार फिर रूस से बड़े पैमाने पर तेल आयात बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। इस बयान के बाद क्षेत्रीय रणनीतिक समीकरणों को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

    रूस की सरकारी समाचार एजेंसी TASS की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने होर्मुज जलडमरूमध्य संकट और वैश्विक ऊर्जा अस्थिरता के बीच रूसी तेल आयात बढ़ाने की योजना पर काम शुरू किया है। पाकिस्तान लंबे समय से आर्थिक संकट, विदेशी मुद्रा भंडार की कमी और बढ़ती महंगाई से जूझ रहा है। ऐसे में सस्ता रूसी तेल इस्लामाबाद के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।

    दरअसल, पाकिस्तान ने पहली बार रूस से सस्ते तेल खरीदने की पहल तत्कालीन प्रधानमंत्री Imran Khan के कार्यकाल में की थी। इमरान खान की मॉस्को यात्रा के बाद दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग को लेकर बातचीत तेज हुई थी। इसके बाद अप्रैल 2023 में पाकिस्तान ने रूस को रियायती दरों पर कच्चे तेल का पहला आधिकारिक ऑर्डर दिया। जून 2023 में रूसी कच्चे तेल की पहली खेप कराची बंदरगाह पहुंची थी, जिसमें करीब 45 हजार मीट्रिक टन यूराल क्रूड शामिल था। खास बात यह रही कि पाकिस्तान ने इस तेल का भुगतान अमेरिकी डॉलर की बजाय चीनी युआन में किया था।

    हालांकि बाद में पाकिस्तान ने रूसी तेल आयात धीमा कर दिया था। इसकी बड़ी वजह रूसी क्रूड का भारी होना और खाड़ी देशों की तुलना में ट्रांसपोर्ट लागत ज्यादा होना बताया गया। लेकिन अब वैश्विक ऊर्जा संकट और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान फिर से रूस की ओर झुकता दिखाई दे रहा है।

    सिर्फ ऊर्जा क्षेत्र ही नहीं, बल्कि रक्षा और सैन्य सहयोग में भी रूस और पाकिस्तान के संबंध मजबूत हो रहे हैं। दोनों देशों के बीच नियमित सैन्य अभ्यास और सुरक्षा सहयोग पहले से जारी हैं। यही कारण है कि रूस-पाकिस्तान की बढ़ती नजदीकियों को भारत के लिए रणनीतिक नजरिए से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि रूस पारंपरिक रूप से भारत का करीबी सहयोगी रहा है, लेकिन बदलती वैश्विक राजनीति में मॉस्को अब दक्षिण एशिया में अपने विकल्प भी मजबूत करना चाहता है। वहीं पाकिस्तान अपनी कमजोर अर्थव्यवस्था और ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए रूस के साथ रिश्ते गहरे करने में जुटा है।

    हालांकि भारत और रूस के बीच रक्षा, ऊर्जा और रणनीतिक साझेदारी अब भी बेहद मजबूत मानी जाती है, लेकिन पाकिस्तान और रूस के बढ़ते संपर्कों ने क्षेत्रीय राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा जरूर तेज कर दी है।