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  • जबलपुर की महिला आरक्षक वर्षा पटेल ने माउंट एल्ब्रुस पर तिरंगा फहराकर मध्य प्रदेश पुलिस का गौरव बढ़ाया

    जबलपुर की महिला आरक्षक वर्षा पटेल ने माउंट एल्ब्रुस पर तिरंगा फहराकर मध्य प्रदेश पुलिस का गौरव बढ़ाया

    मध्य प्रदेश पुलिस में आरक्षक के पद पर कार्यरत वर्षा पटेल ने पर्वतारोहण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। जबलपुर की रहने वाली वर्षा ने 21 अगस्त 2026 को यूरोप की सर्वोच्च चोटी माउंट एल्ब्रुस के शिखर पर पहुंचकर भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा और मध्य प्रदेश पुलिस का ध्वज फहराया। उनकी इस उपलब्धि से जबलपुर के साथ-साथ मध्य प्रदेश पुलिस का भी गौरव बढ़ा है।

    माउंट एल्ब्रुस अभियान की शुरुआत 11 अगस्त को हुई थी। अभियान के दौरान पर्वतारोहियों को मौसम की चुनौती का सामना करना पड़ा। तेज हवाओं, कड़ाके की ठंड और बदलती मौसम परिस्थितियों के कारण टीम को शिखर अभियान के लिए अनुकूल समय का इंतजार करना पड़ा। मौसम में सुधार आने के बाद अंतिम चढ़ाई शुरू की गई और वर्षा पटेल ने निर्धारित लक्ष्य हासिल करते हुए चोटी पर तिरंगा फहराया।

    वर्षा पटेल का पर्वतारोहण से जुड़ा सफर उनकी खेल पृष्ठभूमि से भी जुड़ा हुआ है। जबलपुर के गढ़ा क्षेत्र से संबंध रखने वाली वर्षा को बचपन से खेल और साहसिक गतिविधियों में रुचि रही है। वह राष्ट्रीय स्तर की बेसबॉल खिलाड़ी भी रह चुकी हैं। विभिन्न प्रतियोगिताओं में उनके नाम 10 से अधिक पदक हासिल करने की जानकारी सामने आई है।

    मध्य प्रदेश पुलिस में जिम्मेदारी निभाने के साथ वर्षा ने पर्वतारोहण के अपने जुनून को भी जारी रखा। पुलिस सेवा की नियमित जिम्मेदारियों के बीच कठिन पर्वतारोहण अभियानों की तैयारी करना उनके अनुशासन और निरंतर प्रयास को दर्शाता है। माउंट एल्ब्रुस की सफलता उनके इसी अभियान का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।

    इससे पहले वर्षा पटेल ने अगस्त 2024 में ऑस्ट्रेलिया की सर्वोच्च चोटी माउंट कोजियास्को पर भारत का तिरंगा फहराया था। उस समय भी उन्होंने पर्वतारोहण के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की थी। माउंट कोजियास्को की ऊंचाई करीब 2,228 मीटर है और इसे ऑस्ट्रेलिया की सबसे ऊंची चोटी माना जाता है।

    माउंट एल्ब्रुस पर तिरंगा फहराने के बाद वर्षा पटेल का लक्ष्य अब और बड़े पर्वतारोहण अभियानों की ओर बढ़ना है। वह दुनिया के सात महाद्वीपों की सर्वोच्च चोटियों पर पहुंचकर भारत का राष्ट्रीय ध्वज फहराने वाले सात शिखर अभियान को पूरा करना चाहती हैं। माउंट एल्ब्रुस की सफलता के बाद उनकी नजर अफ्रीका की सर्वोच्च चोटी माउंट किलिमंजारो पर है।

    सात शिखर अभियान को दुनिया के प्रमुख पर्वतारोहण लक्ष्यों में गिना जाता है। इसके तहत सातों महाद्वीपों की सर्वोच्च चोटियों को फतह करने का प्रयास किया जाता है। वर्षा पटेल की मौजूदा उपलब्धि इस लंबे अभियान की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है।

    वर्षा की यात्रा यह भी दिखाती है कि पुलिस सेवा, खेल और साहसिक गतिविधियों को एक साथ आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रशिक्षण, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता जरूरी होती है। माउंट एल्ब्रुस की कठिन परिस्थितियों में हासिल की गई यह सफलता उनके पर्वतारोहण अभियान को नई दिशा देती है और आने वाले अभियानों के लिए उनके अनुभव को मजबूत करती है।

    मध्य प्रदेश के लिए भी यह उपलब्धि इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य पुलिस में कार्यरत एक महिला आरक्षक ने अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहण अभियान में अपनी पहचान बनाई है। तिरंगे के साथ मध्य प्रदेश पुलिस का ध्वज फहराकर वर्षा ने अपनी सेवा और अपने राज्य दोनों का प्रतिनिधित्व किया। अब उनकी अगली चुनौती माउंट किलिमंजारो और सात शिखर अभियान के अन्य पर्वतों तक पहुंचने की होगी।

  • वर्षों की मेहनत, अनुशासन और जुनून की उड़ान: तुलसी रेड्डी ने फतह की दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट

    वर्षों की मेहनत, अनुशासन और जुनून की उड़ान: तुलसी रेड्डी ने फतह की दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट


    नई दिल्ली। तेलंगाना के हैदराबाद क्षेत्र के कुतबुल्लापुर मंडल के बोवरामपेट गांव के रहने वाले पर्वतारोही तुलसी रेड्डी पालपुनूरी ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर सफलतापूर्वक पहुंचकर एक ऐसी उपलब्धि हासिल की है जिसने पूरे देश को गौरव और प्रेरणा से भर दिया है। वर्षों की कठिन ट्रेनिंग, अनुशासन और निरंतर प्रयासों के बाद मिली यह सफलता केवल एक पर्वतारोहण उपलब्धि नहीं बल्कि आत्मविश्वास, धैर्य और जीवन में बदलाव की एक जीवंत कहानी है। तुलसी रेड्डी की यह यात्रा साधारण जीवनशैली से शुरू होकर असाधारण उपलब्धि तक पहुंचने की एक प्रेरणादायक मिसाल बन गई है।

    तुलसी रेड्डी की शुरुआत किसी पेशेवर खिलाड़ी या पर्वतारोही के रूप में नहीं हुई थी, बल्कि वे सामान्य जीवन जीते हुए फिटनेस की ओर आकर्षित हुए। उन्होंने स्वास्थ्य सुधार के लिए जिम जाना शुरू किया और धीरे-धीरे यह आदत उनके जीवन का जुनून बन गई। फिटनेस के प्रति बढ़ते समर्पण ने उन्हें एंड्योरेंस स्पोर्ट्स की ओर प्रेरित किया, जहां उन्होंने लंबी दूरी की दौड़ और कठिन शारीरिक चुनौतियों को अपनाया। इसके बाद उन्होंने पर्वतारोहण की दुनिया में कदम रखा और खुद को ऊंचाइयों की कठिन परिस्थितियों के लिए तैयार करना शुरू किया। लगातार मेहनत और अभ्यास के कारण उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय स्तर के अभियानों में भाग लिया और धीरे-धीरे उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में अपनी क्षमता साबित की।

    अपने अभियान के दौरान तुलसी रेड्डी ने केवल एवरेस्ट ही नहीं बल्कि दुनिया की कई कठिन चोटियों को भी सफलतापूर्वक पार किया। इनमें यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रस, दक्षिण अमेरिका की एकोंकागुआ, अफ्रीका की किलिमंजारो और भारत तथा आसपास के उच्च पर्वतीय क्षेत्रों की कई कठिन चोटियां शामिल हैं। इन सभी अभियानों ने उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से और अधिक मजबूत बनाया। कठिन मौसम, ऑक्सीजन की कमी और जोखिम भरे रास्तों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और हर चुनौती को सीख के रूप में स्वीकार किया। एवरेस्ट अभियान के दौरान भी उन्हें कई कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उनकी तैयारी और दृढ़ संकल्प ने उन्हें सफलता की ओर अग्रसर किया।

    एवरेस्ट की चोटी पर पहुंचना उनके लिए केवल एक लक्ष्य की प्राप्ति नहीं था, बल्कि वर्षों की मेहनत, त्याग और परिवार तथा साथियों के सहयोग का परिणाम था। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार, गाइड्स और टीम को दिया जिन्होंने हर कदम पर उनका साथ निभाया। उनके परिवार ने इस उपलब्धि को गर्व और भावनात्मक क्षण बताया। तुलसी रेड्डी की यह उपलब्धि आज उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है जो जीवन में बड़े सपने देखते हैं लेकिन उन्हें पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत निरंतर हो तो कोई भी ऊंचाई असंभव नहीं होती।

  • Hidden Peaks Of India: माउंट एवरेस्ट तो सब जानते हैं, लेकिन देखने लायक हैं भारत की इन 3 चोट‍ियों के व्‍यूज

    Hidden Peaks Of India: माउंट एवरेस्ट तो सब जानते हैं, लेकिन देखने लायक हैं भारत की इन 3 चोट‍ियों के व्‍यूज

    नई दिल्ली । घूमने फ‍िरने का शौक भला क‍िसे नहीं होता है। हर कोई जैसे ही मौका पाता है, वो बैग उठाकर न‍िकल पड़ता है। क‍िसी को पहाड़ों पर जाना पसंद होता है तो कोई बीच पर सुकून भरे पल ब‍िताने जाता है। घूमने से मन को शांत‍ि म‍िलती है। हमारे यहां भारत में ऐसी कई जगहें हैं जहां का नजारा देखने लायक होता है। वहीं ज‍िन लोगों को एडवेंचर पसंद होता है, वो ट्रेक‍िंग जरूर करते हैं।

    जब भी बात भारत की सबसे खूबसूरत चोट‍ियों की बात आती है तो लोगों के मन में केवल उत्तराखंड और ह‍िमाचल प्रदेश का ही ख्‍याल आता है। ये दोनों राज्‍य वाकई में बहुत खूबसूरत हैं, लेक‍िन हम आपको कुछ ऐसी चोटि‍यों के बारे में बता रहे हैं जहां की ट्रेक‍िंगआपको एक बार जरूर करनी चाह‍िए। ऐसा कहा जाता है क‍ि अगर जीते जी आपको स्‍वर्ग के दर्शन करने हैं तो यहां जरूर जाएं। आइए जानते हैं-

    कलसूबाई पीक, महाराष्‍ट्र

    महाराष्‍ट्र की खूबसूरती से तो हम सभी वाक‍िफ हैं। नास‍िक ज‍िले में स्‍थ‍ित कलसूबाई पीक दुन‍िया के सबसे खूबसूरत पीक में से एक है। ये लगभग 5400 फीट की ऊंचाई पर स्‍थ‍ित है। इसकी ट्रेक‍िंग बरी के बेस गांव से शुरू होती है, जहां जाने के ल‍िए लोहे की सीढ़‍ियां, एडवेंचर ट्रे‍क करके पहुंचा जा सकता है। जब आप इसकी पीक पर पहुंचेंगी तो वहां पर आपको द‍िल थाम देने वाले नजारे देखने को मि‍लेंगे। यहां जाने में आपको भले ही कठ‍िनाइयों का सामना करना पड़े, लेक‍िन यहां की खूबसूरती आपका मन मोह लेगी।

    नेत्रावती पीक, कर्नाटक

    ये पीक भी कर्नाटक राज्‍य की सबसे खूबसूरत चोटी है। चोटी तक पहुंचने के ल‍िए आपको लगभग 6 कि‍लोमीटर की ट्रेक‍िंग करनी पड़ेगी। इस दौरान आपको पहाड़ाें पर हरे भरे नजारे देखने को म‍िलेंगे। जब आप इसके टॉप पर पहुंचेंगी तो आपको खूबसूरत नजारे देखने को म‍िलेंगे।

    कुलकुमलाई पीक, तम‍िलनाडु 
    ये पीक भले ही तम‍िलनाडु में है, लेक‍िन इसकी ट्रेक‍िंग की शुरुआत इडुक्‍क‍ि ज‍िले से होती है। यहां का सानराइज देखने लायक होता है। ऐसे में अगर आप सूर्योदय का खूबसूरत नजारा देखना चाहती हैं तो सुबह 3 बजे आपको न‍िकलना पड़ेगा।

    तो अगर आप भी एडवेंचर लवर हैं, तो भारत के ये Hidden Peaks आपको जरूर एक्‍सप्‍लोर करने चाह‍िए। यहां की खूबसूरती आपका मन मोह लेगी। साथ ही अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।