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  • 2.30 घंटे का धैर्य टेस्ट! ‘चांद मेरा दिल’ में प्यार तो है, लेकिन कहानी और लेखन ने किया निराश

    2.30 घंटे का धैर्य टेस्ट! ‘चांद मेरा दिल’ में प्यार तो है, लेकिन कहानी और लेखन ने किया निराश

    नई दिल्ली ।  ‘चांद मेरा दिल’ को सबसे खतरनाक यूजलेस फिल्म क्या बनाता है? क्या वो पिक्चर की खराब कहानी है? या उसके क्रिंज डायलॉग या फिर डायरेक्टर विवेक सोनी की ऑडेसिटी जो ये सोच रहे थे कि वो इस जमाने की सबसे बेहतरीन रोमांटिक फिल्म बना रहे हैं? इसका जवाब है- सबकुछ.
    बॉलीवुड में बीते काफी वक्त से रीमेक और सीक्वल बन रहे हैं. ऐसे में कोई नई कहानी ऑडियंस को परोसना मेकर्स के लिए शायद मुश्किल हो गया है, या फिर हमने पूरी तरह से कोशिश करना छोड़ दिया है. जो भी है…
    ओटीटी के जमाने में जनता को फिल्म देखने के लिए थिएटर तक खींचना बड़ी बात हो गई है. ऐसे में आपकी पिक्चर एकदम बेदम हो तो चीजें और खराब हो जाती हैं.कुछ कहानियां आइडिया में बहुत अच्छी लगती हैं. मगर इसका मतलब यह नहीं है कि वो पर्दे परभी उतनी ही खूबसूरत लगें, जितनी पन्ने पर लग रही थी. ‘चांद मेरा दिल’ भी कुछ ऐसी ही है. किसी नए राइटर की नई-सी किताब में अगर इस कहानी को पढ़ा होता तो 14-15 साल की बच्चियां फिर भी इसे पचा लेतीं. पर हमसे ये न हो पाई, भैया!

    क्या है फिल्म की कहानी?

    कहानी है आरव रावत (लक्ष्य) और चांदनी प्रसाद (अनन्या पांडे) की. 21 साल की उम्र में इंजीनियरिंग कॉलेज में मिले आरव और चांदनी को एक-दूसरे से प्यार हो जाता है. मगर एक दूसरे की आंखों में खोए, मैसेज में एम्बेरेसिंग बातें करने वाले ‘आरु और चांद’ नहीं जानते कि जिंदगी में सिर्फ प्यार काफी नहीं होता. दोनों एकदम अलग परिवारों से आए हैं. चांदनी ऐसे घर में पली-बढ़ी है, जिसमें उसने अपनी मां को घरेलू हिंसा का शिकार होते देखा है. तो वहीं आरव के मां-बाप को हमेशा से अपने बच्चों से ज्यादा इमेज की चिंता रही है. अपने घरों में अनदेखे हुए और कम प्यार पाकर जिए आरव-चांदनी एक दूसरे के लिए ‘दुनिया खूबसूरत’ बना रहे हैं.
    दोनों की जिंदगी में एक क्राइसिस आता है और परिवार उनसे मुंह फेर लेता है. अब आरव और चांदनी दुनिया में एक दूसरे का सहारा हैं. उनके पास बड़ी जिम्मेदारी है, जिसके बोझ तले वो दब रहे हैं. एक दिन वो होता है, जो किसी ने नहीं सोचा और दोनों की जिंदगी बदल जाती है. इमेजिन करने में कहानी प्यारी लग रही है, है न? देखने में नहीं है! देखने में ये बॉलीवुड की बहुत ही पुराने जमाने की कहानी है, जिसमें बच्चे खुद को समझदार समझकर बड़े फैसले ले लेते हैं और फिर उन्हें समझ आता है कि अब हमारे बस की तो ये है नहीं, अब हम फंस गए. ऐसी कहानियां हम बहुत बार बॉलीवुड में बनते देख चुके हैं. अगर ये कोई शॉर्ट फिल्म भी होती तो शायद खूबसूरत लगती. मगर एक पूरी लगभग 2.30 घंटे की पिक्चर के रूप में ‘चांद मेरा दिल’, बोरिंग, प्रेडिक्टेबल और क्रिंज है.
    परफॉरमेंस
    आरव के रोल में लक्ष्य ने बढ़िया काम किया है. वो अच्छे एक्टर हैं, इस बात में कोई दोराय नहीं है. मगर ये फिल्म उनके टैलेंट के हिसाब की है ही नहीं. ‘किल’ और ‘बैड्स ऑफ बॉलीवुड’ के साथ लक्ष्य ने अपने एक्टिंग टैलेंट को साबित किया है. ‘चांद मेरा दिल’ में उनका किरदार फिर भी समझदार था. अनन्या पांडे ने भी पिक्चर में अच्छा काम किया है. मगर उनका किरदार चांदनी इतना इरिटेटिंग है कि आपका उसपर चिल्लाने का मन करता है. चांदनी इस रिश्ते में टॉक्सिक इंसान है. वो डेलुलु में जीती है और कन्फ्यूज ही रहती है. बेवकूफी भरी हरकत करती है, लेकिन अगर कोई बोल दे दो तो उसे बुरा लग जाता है. फिल्म में मनीष चौधरी और चारु शंकर संग अन्य कलाकारों ने भी काम किया है. उनका काम लिमिटेड था और सही भी रहा.
    सब्र का लेगी इम्तिहान
    डायरेक्टर विवेक सोनी और तुषार परांजपे का स्क्रीनप्ले काफी खराब और बोरिंग है. इसको और खराब बनाते हैं पिक्चर के डायलॉग. आरव और चांदनी, दोनों के ही किरदार आपको शुरुआत से पसंद नहीं आते. दोनों बेहद चीजी हरकतें करते हैं, बचपना दिखाते हैं और फिर आप सोचते हो कि अभी तो ये बच्चे हैं कोई बात नहीं. मगर इस सबका अंत कहीं नहीं होता. पिक्चर की कहानी आप बैठे-बैठे जो सोच रहे हैं वही जाती है.
    आपको ये जानने के लिए इसे देखने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी कि इसमें आखिर क्या हुआ. ‘चांद मेरा दिल’ शुरुआत से ही आपका ध्यान अपनी ओर खींचने में नाकाम होती है. इंटरवल आते-आते आप सोचने लगते हैं कि क्या इसे छोड़कर घर वापस लौट जाना चाहिए. आप खुद को इसे अंत तक देखने के लिए फोर्स करते हैं और फिर आरव और चांदनी के बीच एक बात आपकी हिट करती है. पिक्चर के अंत में आरव, चांदनी से पूछता है, ‘कहीं हम गलती तो नहीं कर रहे?’ वो कहती है, ‘अगर गलत है तो गलत सही.’ यहां थिएटर में बैठे आप सोचते हो, ‘गलती तो मैंने कर दी इस मूवी को देखने आकर.’
    ‘चांद मेरा दिल’ की अच्छी बात सिर्फ उसके गाने हैं. इस फिल्म को देखने के एक्सपीरिएंस की सबसे अच्छी बात थी चांद देखना. नहीं, फिल्म में किसी चांद को नहीं, बल्कि थिएटर से बाहर निकलकर घर आते हुए असली चांद को. वो सुंदर लग रहा था.
  • रणवीर सिंह के धुरंधर 2 ट्रेलर पर ऋतिक रोशन ने जताई तारीफ, पहले नहीं थे राजनीति से सहमत

    रणवीर सिंह के धुरंधर 2 ट्रेलर पर ऋतिक रोशन ने जताई तारीफ, पहले नहीं थे राजनीति से सहमत

    नई दिल्ली: आदित्य धर के निर्देशन में बनी फिल्म धुरंधर द रिवेंज (Dhruva Natchathiram 2 / Dhurandhar 2) का ट्रेलर 19 मार्च को रिलीज से पहले ही मेकर्स ने शेयर कर दिया है। फिल्म के ट्रेलर में रणवीर सिंह का धुआंधार एक्शन फैंस का दिल जीत रहा है और सोशल मीडिया पर इसकी खूब तारीफ हो रही है। इस लिस्ट में बॉलीवुड के सुपरस्टार ऋतिक रोशन का नाम भी शामिल हो गया है।

    रणवीर सिंह ने इंस्टाग्राम पर धुरंधर द रिवेंज का ट्रेलर शेयर किया और लिखा कि यह पर्सनल है। ट्रेलर रिलीज होने के बाद कमेंट सेक्शन में ऋतिक रोशन ने हार्ट, फायर और ताली बजाने वाली इमोजी के साथ लिखा, “बहुत अच्छा।”

    ऋतिक रोशन ने इससे पहले धुरंधर का रिव्यू करते हुए कहा था कि वह फिल्म में दिखाई गई राजनीति से सहमत नहीं हैं, लेकिन फिल्म देखने का अनुभव उन्हें पसंद आया। इंस्टाग्राम स्टोरी पर उन्होंने लिखा था, मुझे सिनेमा पसंद है, मुझे ऐसे लोग पसंद हैं जो किसी भंवर में फंस जाते हैं और कहानी को कंट्रोल करने देते हैं, उन्हें घुमाते, हिलाते हैं जब तक कि जो कहना चाहते हैं वह स्क्रीन पर न आ जाए। धुरंधर इसका उदाहरण है। कहानी कहने का तरीका बहुत पसंद आया। सिनेमा के तौर पर यह कमाल है। मैं इसकी पॉलिटिक्स से सहमत नहीं हो सकता, और इस बात पर बहस कर सकता हूं कि फिल्ममेकरों को क्या जिम्मेदारियां उठानी चाहिए। फिर भी एक सिनेमा स्टूडेंट के तौर पर मुझे यह पसंद आया और इससे मैंने बहुत कुछ सीखा।

    धुरंधर पहली बार 5 दिसंबर को रिलीज हुई थी। फिल्म में रणवीर सिंह के अलावा अक्षय खन्ना, संजय दत्त, राकेश बेदी, अर्जुन रामपाल और सारा अर्जुन अहम किरदार में नजर आए थे। धुरंधर ने बॉक्स ऑफिस पर 1300 करोड़ रुपये वर्ल्डवाइड कलेक्शन हासिल किया था।

    अब धुरंधर 2 के ट्रेलर पर ऋतिक का रिएक्शन दर्शाता है कि भले ही राजनीति पर उनके विचार अलग हों, लेकिन फिल्म की कहानी और एक्शन ने उन्हें पूरी तरह इंप्रेस किया। फैंस भी इस ट्रेलर को लेकर बेहद उत्साहित हैं और सोशल मीडिया पर फिल्म की तारीफों की झड़ी लगी हुई है।

  • IMDb रेटिंग का गणित: क्यों करते हैं लोग भरोसा और कैसे रुकते हैं फर्जी वोट्स?

    IMDb रेटिंग का गणित: क्यों करते हैं लोग भरोसा और कैसे रुकते हैं फर्जी वोट्स?


    नई दिल्ली । आज के डिजिटल दौर में किसी भी फिल्म या वेब सीरीज को देखने से पहले ज्यादातर लोग सबसे पहले IMDb रेटिंग चेक करते हैं। 1 से 10 के स्केल पर दी जाने वाली यह रेटिंग दुनिया भर में भरोसे का पैमाना मानी जाती है। लेकिन सवाल उठता है यह सिर्फ साधारण औसत एवरेज है? क्या यहां फर्जी वोटिंग संभव नहीं? दरअसल IMDb का रेटिंग सिस्टम बेहद तकनीकी और फिल्टर-आधारित है जिसे छेड़छाड़ से बचाने के लिए खास तरीके से तैयार किया गया है।

    क्या होती है IMDb रेटिंग?

    जब आप गूगल पर किसी फिल्म के नाम के साथ IMDb लिखते हैं तो एक पेज खुलता है जिसमें फिल्म की जानकारी के साथ ऊपर रेटिंग दिखाई देती है। यह रेटिंग केवल कुल वोट्स का सीधा औसत नहीं होती। इसके पीछे एक वेटेड एवरेज फॉर्मूला काम करता है जो हर वोट को अलग-अलग वजन वेटेज देता है। यही वजह है कि IMDb की रेटिंग फिल्मों के साथ-साथ वेब सीरीज और टीवी शोज के लिए भी भरोसेमंद मानी जाती है।

    वेटेड एवरेज सिस्टम कैसे काम करता है?
    IMDb पर करोड़ों यूजर्स फिल्में रेट करते हैं लेकिन हर यूजर के वोट की वैल्यू समान नहीं होती। प्लेटफॉर्म ऐसे यूजर्स को ज्यादा महत्व देता है जो लंबे समय से सक्रिय हैं नियमित रूप से रेटिंग देते हैं और जिनकी गतिविधि सामान्य और विश्वसनीय मानी जाती है। इसके विपरीत नए या संदिग्ध अकाउंट से दिए गए वोट्स का असर कम होता है। यानी अगर कोई व्यक्ति सिर्फ किसी खास फिल्म को प्रमोट करने या बदनाम करने के लिए नया अकाउंट बनाकर 10/10 या 1/10 की बाढ़ ला दे तो उसका प्रभाव सीमित रहेगा। यही वेटेड एवरेज मॉडल IMDb की विश्वसनीयता की सबसे बड़ी वजह है।

    फर्जी वोट्स और स्पैम को कैसे फिल्टर किया जाता है?

    अक्सर बड़ी फिल्मों के रिलीज होते ही रेटिंग बमबारी देखी जाती है या तो फिल्म को जानबूझकर कम रेटिंग दी जाती है या फिर 10/10 देकर हाइप बनाने की कोशिश की जाती है। IMDb का एल्गोरिद्म ऐसे असामान्य पैटर्न यानी आउटलायर्स को पहचान लेता है। अगर सिस्टम को लगता है कि कोई रेटिंग अस्वाभाविक है या किसी अभियान का हिस्सा है तो उस वोट का असर अंतिम स्कोर पर बहुत कम कर दिया जाता है। इस तरह स्पैम और फर्जीवाड़े को काफी हद तक रोका जाता है जिससे रेटिंग अपेक्षाकृत संतुलित बनी रहती है।

    टॉप 250 फिल्मों की लिस्ट कैसे बनती है?

    IMDb की प्रसिद्ध टॉप 250 सूची के लिए अलग और ज्यादा सख्त फॉर्मूला अपनाया जाता है जिसे बेयसियन एस्टीमेट कहा जाता है। इसमें केवल नियमित और भरोसेमंद वोटर्स के वोट गिने जाते हैं। साथ ही किसी फिल्म को सूची में शामिल होने के लिए न्यूनतम वोटों की सीमा पार करनी होती है। इसी कारण कई बार हजारों वोट मिलने के बाद भी किसी फिल्म की रैंकिंग बदल जाती है या वह सूची से बाहर हो जाती है। यह सिस्टम सुनिश्चित करता है कि केवल स्थिर और व्यापक रूप से सराही गई फिल्में ही शीर्ष सूची में जगह बना सकें।

    क्यों माना जाता है भरोसेमंद?

    हालांकि कोई भी सिस्टम पूरी तरह त्रुटिरहित नहीं हो सकता लेकिन एडवांस एल्गोरिद्म वेटेड वोटिंग और स्पैम फिल्टरिंग के कारण IMDb रेटिंग अपेक्षाकृत विश्वसनीय मानी जाती है। यही वजह है कि दुनिया भर के सिनेप्रेमी किसी फिल्म की गुणवत्ता का पहला अंदाजा IMDb स्कोर से ही लगाते हैं।

  • Kis Kisko Pyaar Karoon 2 X Review दर्शकों ने कहा 'फुल ऑन कपिल शर्मा शो'फिल्म को मिला मिला-जुला रिस्पॉन्स

    Kis Kisko Pyaar Karoon 2 X Review दर्शकों ने कहा 'फुल ऑन कपिल शर्मा शो'फिल्म को मिला मिला-जुला रिस्पॉन्स



    नई दिल्ली ।
    कॉमेडियन और अभिनेता कपिल शर्मा की फिल्म किस किसको प्यार करूं 2 आखिरकार सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। इस फिल्म का प्रीमियर लंबे समय से चर्चा में थाऔर अब जब यह सिनेमाघरों में पहुंची हैदर्शकों ने अपनी राय साझा करनी शुरू कर दी है। कपिल शर्मा के साथ इस फिल्म में हीरा वरीनात्रिधा चौधरीपारुल गुलाटीआयशा खानऔर मनजोत सिंह जैसे कलाकार मुख्य भूमिका में हैं। फिल्म का निर्देशन एक बार फिर से कॉमेडी और ड्रामा से भरपूर हैजो दर्शकों को एक हल्के-फुल्के मनोरंजन का वादा करता है।

    फिल्म की कहानी

    किस किसको प्यार करूं 2 2015 में आई कपिल शर्मा की फिल्म किस किसको प्यार करूं का सीक्वल हैहालांकि दोनों फिल्मों के बीच कोई खास लिंक नहीं है। फिल्म की कहानी मोहन कपिल शर्मा के इर्द-गिर्द घूमती हैजो एक हिंदू लड़का है और अपनी मुस्लिम गर्लफ्रेंड सानिया हीरा वरीना से शादी करता है। लेकिन कहानी में कई ट्विस्ट्स आते हैंजिसके कारण मोहन को तीन और शादियां करनी पड़ती हैंऔर वो भी अलग-अलग धर्म की लड़कियों से। इस तरह फिल्म में ड्रामारोमांस और कॉमेडी का अच्छा मिश्रण देखने को मिलता है।

    सकारात्मक रिव्यू
    एक यूजर ने फिल्म को 5 में से 3 स्टार देते हुए लिखा KKPK2 शुरू से अंत तक पूरी तरह से कपिल शर्मा का शो है। कपिल शर्मा ने अपनी खास कॉमेडी शैली और एक्टिंग से फिल्म को अपने कंधों पर संभाला है। मनजोत सिंह ने भी कुछ शानदार संवाद बोले हैं जो फिल्म के मनोरंजन को और बढ़ाते हैं। दूसरे यूजर ने फिल्म को 5 में से 4 स्टार देते हुए कहा”यह फिल्म 2 घंटे 22 मिनट की पूरी तरह से मनोरंजक फिल्म है। इसमें कॉमेडी और मस्ती से भरी हुई है। पूरी कास्ट लाजवाब है और निर्देशन भी शानदार है।”

    नकारात्मक रिव्यू

    हालांकिकुछ दर्शकों ने इसे बोरिंग बताया। एक यूजर ने टिप्पणी की”फिल्म में कोई नई बात नहीं है। पुराने स्टीरियोटाइप और बेहतरीन कॉमेडी की कमी महसूस हुई। फिल्म को ज्यादा रोमांचक बनाने के बजाय इसे अधिक ड्रामा में घसीट लिया गया।

    फिल्म का अंदाज

    कुछ दर्शकों ने इसे कपिल शर्मा के शो जैसा अनुभव बतायाजिसमें हर संवाद और हर सीन में उनकी कॉमेडी स्टाइल देखने को मिलती है। कपिल के फैंस के लिए यह फिल्म एक अच्छे कॉमेडी अनुभव की तरह हो सकती हैलेकिन कुछ दर्शकों के लिए यह फिल्म सिर्फ सामान्य मनोरंजन से ज्यादा कुछ नहीं है।

    किस किसको प्यार करूं 2 को दर्शकों से मिला-जुला रिस्पॉन्स मिल रहा है। अगर आप कपिल शर्मा के फैन हैं और उनकी कॉमेडी स्टाइल को पसंद करते हैंतो यह फिल्म आपको जरूर पसंद आएगी। लेकिन यदि आप कुछ नया और गहरा देखना चाहते हैंतो शायद यह फिल्म आपकी उम्मीदों पर खरा नहीं उतरेगी। हालांकियह एक हल्की-फुल्की मनोरंजन फिल्म हैजो कुछ दर्शकों को मनोरंजन का अच्छा अनुभव दे सकती है।