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  • मैहर में प्रशासन की बड़ी कार्रवाई: बाल विवाह रोका, परिजनों को समझाकर रुकी शादी

    मैहर में प्रशासन की बड़ी कार्रवाई: बाल विवाह रोका, परिजनों को समझाकर रुकी शादी


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के मैहर जिले के ग्राम पंचायत देवरा मोलहाई में सोमवार देर शाम प्रशासन ने एक नाबालिग की शादी को समय रहते रोक दिया। सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम तुरंत मौके पर पहुंची और स्थिति को संभालते हुए बाल विवाह की तैयारी को रुकवा दिया। यह पूरी कार्रवाई एसडीएम एसपी मिश्रा के निर्देशन में की गई। टीम की त्वरित सक्रियता के चलते एक संभावित बाल विवाह होने से पहले ही टल गया, जिससे प्रशासन की सतर्कता एक बार फिर सामने आई।

    अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंची, समझाइश से रुकी शाद
    मामले की जानकारी मिलते ही नायब तहसीलदार संजीव पांडेय, महिला एवं बाल विकास विभाग के परियोजना अधिकारी नागेंद्र तिवारी, थाना प्रभारी विजय त्रिपाठी, एसआई भाग्यचंद कुशराम सहित पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। टीम ने परिजनों से बातचीत की और उन्हें बाल विवाह से जुड़े कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि कम उम्र में विवाह न केवल कानून के खिलाफ है, बल्कि यह बालिका के स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य पर भी गंभीर प्रभाव डालता है।

    कानूनी प्रावधानों की दी जानकारी, दुष्परिणामों पर किया जागरूक
    अधिकारियों ने ग्रामीणों और परिजनों को बताया कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के तहत यह एक दंडनीय अपराध है। इसके तहत दोषियों पर कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। इसके साथ ही टीम ने बाल विवाह से होने वाले सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी दुष्परिणामों पर भी विस्तार से समझाइश दी। लगातार समझाइश के बाद परिवार ने विवाह को रोकने पर सहमति व्यक्त की।

    पंचनामा कार्रवाई पूरी, परिजनों ने मानी बा
    महिला एवं बाल विकास विभाग के परियोजना अधिकारी नागेंद्र तिवारी ने बताया कि सूचना मिलने के बाद एसडीएम से चर्चा कर संयुक्त टीम का गठन किया गया था। इसके बाद मौके पर पहुंचकर आवश्यक पंचनामा कार्रवाई भी पूरी की गई। लगातार संवाद और समझाइश के बाद परिवार ने शादी रोकने का निर्णय लिया, जिससे एक बड़ा सामाजिक और कानूनी उल्लंघन होने से बच गया।

    प्रशासन की अपील: बाल विवाह की सूचना तुरंत दे
    प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि यदि कहीं भी बाल विवाह की जानकारी मिले, तो तुरंत प्रशासन या पुलिस को सूचित करें। समय पर सूचना मिलने से ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है और बच्चों का भविष्य सुरक्षित किया जा सकता है।

    मैहर प्रशासन की यह कार्रवाई दिखाती है कि जागरूकता और त्वरित कार्रवाई से सामाजिक कुप्रथाओं को रोका जा सकता है। बाल विवाह जैसी प्रथाओं पर सख्ती से रोक लगाना ही बच्चों के सुरक्षित भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

  • बैतूल में जल संकट पर बड़ा एक्शन कलेक्टर ने बनाई 15 साल की मास्टर प्लान रणनीति

    बैतूल में जल संकट पर बड़ा एक्शन कलेक्टर ने बनाई 15 साल की मास्टर प्लान रणनीति

     
    बैतूल । मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में बढ़ते जल संकट को लेकर प्रशासन अब सक्रिय मोड में नजर आ रहा है। नवागत कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि समस्या को केवल अस्थायी उपायों से नहीं बल्कि दीर्घकालीन रणनीति के जरिए हल किया जाएगा। कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि जिले में पेयजल संकट अब एक गंभीर चुनौती बन चुका है और इसे नजरअंदाज करना संभव नहीं है।

    कलेक्टर ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में भूजल स्तर में लगातार गिरावट दर्ज की गई है जिसका सीधा असर शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता पर पड़ा है। खासकर गर्मी के मौसम में हालात और भी खराब हो जाते हैं जब कई इलाकों में पानी की भारी कमी महसूस की जाती है। इसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए अब प्रशासन 10 से 15 वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखकर ठोस और व्यापक प्रोजेक्ट तैयार करने की दिशा में काम करेगा।

    उन्होंने कहा कि केवल टैंकर या अस्थायी जल आपूर्ति जैसे उपाय समस्या का स्थायी समाधान नहीं हैं। इसके बजाय जल संरक्षण भूजल पुनर्भरण और आधुनिक जल प्रबंधन तकनीकों को अपनाना बेहद जरूरी है। आने वाले समय में ऐसे प्रोजेक्ट्स पर फोकस किया जाएगा जो न केवल वर्तमान जरूरतों को पूरा करें बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी जल संसाधनों को सुरक्षित रखें।

    कलेक्टर ने यह भी स्पष्ट किया कि योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की लापरवाही या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी या अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह संकेत प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    जल संकट से निपटने के लिए जनभागीदारी को भी अहम बताया गया है। कलेक्टर का कहना है कि केवल सरकारी प्रयासों से समस्या का समाधान संभव नहीं है बल्कि आम नागरिकों को भी जल संरक्षण के प्रति जागरूक होना होगा। वर्षा जल संचयन और पानी के विवेकपूर्ण उपयोग जैसे उपायों को अपनाकर इस संकट को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

    इस पहल के तहत जिले में विभिन्न स्तरों पर सर्वे और अध्ययन भी किए जाएंगे ताकि जल स्रोतों की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा सके। इसके आधार पर ही योजनाओं को अंतिम रूप दिया जाएगा जिससे संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित हो सके।

    बैतूल में जल संकट को लेकर उठाया गया यह कदम प्रशासन की गंभीरता को दर्शाता है। यदि योजनाएं प्रभावी तरीके से लागू होती हैं तो आने वाले वर्षों में जिले को जल संकट से बड़ी राहत मिल सकती है। फिलहाल नागरिकों को उम्मीद है कि यह पहल केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि जमीनी स्तर पर भी सकारात्मक बदलाव लेकर आएगी।