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  • भ्रष्टाचार जांच की सुस्त रफ्तार, 23 हजार से ज्यादा शिकायतों के बावजूद EOW ने सिर्फ 8 मामलों में पेश किया चालान

    भ्रष्टाचार जांच की सुस्त रफ्तार, 23 हजार से ज्यादा शिकायतों के बावजूद EOW ने सिर्फ 8 मामलों में पेश किया चालान


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार और आर्थिक अनियमितताओं की जांच के लिए जिम्मेदार आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। विधानसभा में पेश किए गए आधिकारिक आंकड़ों से पता चला है कि पिछले साढ़े छह वर्षों में ईओडब्ल्यू को 23 हजार से अधिक शिकायतें प्राप्त हुईं, लेकिन इनमें से अदालत तक केवल आठ मामलों के चालान ही पहुंच सके। यह आंकड़ा जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली और मामलों के निपटारे की रफ्तार पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

    यह जानकारी विधानसभा में कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल द्वारा पूछे गए प्रश्न के लिखित उत्तर में सामने आई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की ओर से सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा प्रस्तुत जवाब के अनुसार वर्ष 2020 से जून 2026 के बीच ईओडब्ल्यू को कुल 23 हजार 261 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से प्रारंभिक जांच के बाद केवल 3 हजार 18 मामलों को शिकायत के रूप में दर्ज किया गया, जबकि 756 आवेदनों को जांच के बाद बंद कर दिया गया।

    सबसे अधिक चर्चा इस बात की हो रही है कि इतने बड़े पैमाने पर शिकायतें मिलने के बावजूद अदालत में चालान पेश किए गए मामलों की संख्या महज आठ रही। इससे यह सवाल उठ रहे हैं कि जांच प्रक्रिया में देरी क्यों हो रही है और भ्रष्टाचार के मामलों में न्यायिक कार्रवाई इतनी धीमी क्यों है।

    आंकड़ों के अनुसार जिन मामलों में चालान पेश किए गए उनमें इंदौर नगर निगम जल कार्य घोटाला, सतना में स्वास्थ्य एवं निर्माण कार्यों में अनियमितता, भोपाल में शासकीय भूमि से जुड़े फर्जी दस्तावेजों का मामला, जबलपुर विकास प्राधिकरण में वित्तीय गड़बड़ी, ग्वालियर की गृह निर्माण सहकारी समिति में कथित धोखाधड़ी, भोपाल की सहकारी संस्था में पद के दुरुपयोग और गबन का मामला, उज्जैन में निर्माण कार्यों से जुड़ी वित्तीय अनियमितताएं तथा रीवा नगर निगम में फर्जी माप पुस्तिका के आधार पर भुगतान का मामला शामिल हैं।

    इनमें से अधिकांश मामलों में शिकायत दर्ज होने और न्यायालय में चालान पेश होने के बीच कई वर्षों का अंतर दिखाई देता है। उदाहरण के तौर पर वर्ष 2020 में दर्ज कुछ शिकायतों में चालान वर्ष 2025 में पेश किए गए। इससे जांच पूरी होने और अभियोजन की प्रक्रिया में लगने वाले लंबे समय पर भी सवाल उठ रहे हैं।

    वहीं व्यापम और भ्रष्टाचार से जुड़े एक अन्य चर्चित मामले में पूर्व विधायक पारस सकलेचा द्वारा स्वयं को फरियादी के रूप में शामिल करने का आवेदन भी ईओडब्ल्यू ने मूल शिकायत के साथ जोड़ लिया है। यह मामला फिलहाल सत्यापन और जांच की प्रक्रिया में है तथा आगे की कानूनी कार्रवाई जांच पूरी होने के बाद तय की जाएगी।

    विधानसभा में सामने आए इन आंकड़ों ने विपक्ष को सरकार पर निशाना साधने का अवसर भी दिया है। विपक्ष का कहना है कि यदि भ्रष्टाचार के मामलों में जांच और अभियोजन की गति इतनी धीमी रहेगी तो दोषियों तक समय पर कार्रवाई पहुंचाना मुश्किल होगा। वहीं सरकार का कहना है कि वित्तीय अपराधों की जांच जटिल होती है और साक्ष्य जुटाने तथा कानूनी प्रक्रिया पूरी करने में समय लगता है।

    हालांकि विधानसभा में पेश आंकड़े यह संकेत जरूर देते हैं कि बड़ी संख्या में शिकायतें मिलने के बावजूद मामलों को अंतिम मुकाम तक पहुंचाने की रफ्तार बेहद धीमी है। ऐसे में अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि सरकार जांच प्रक्रिया को तेज और अधिक प्रभावी बनाने के लिए आगे क्या कदम उठाती है।

  • मप्र विधानसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित, हंगामे के बीच पांच विधेयक पारित

    मप्र विधानसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित, हंगामे के बीच पांच विधेयक पारित


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश विधानसभा का पांच दिवसीय मानसून सत्र केवल तीन दिन चला। बुधवार को विपक्ष के हंगामे के बीच सरकार ने पांच महत्वपूर्ण विधेयक पारित करा लिए। देर शाम तक सदन चलने के बाद विधानसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई।

    मप्र विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन बुधवार को सदन के भीतर और बाहर जबरदस्त सियासी ड्रामा देखने को मिला। दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के साथ हुई मारपीट और कांग्रेस नेताओं की गिरफ्तारी के विरोध में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार समेत कांग्रेस विधायक काली पट्टी बांधकर पहुंचे। स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा न मिलने से नाराज विपक्ष के हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही 15 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी। पांच विधेयक पारित होने के बाद विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने सदन की कार्रवाई अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई।

    सदन में ये पांच बिल पारित

    – भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) संशोधन विधेयक
    – मध्य प्रदेश निजी विश्वविद्यालय स्थापना एवं संचालन (संशोधन) विधेयक-2026
    – मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज (संशोधन) विधेयक-2026
    – मध्य प्रदेश माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक- 2026
    – मध्य प्रदेश निरसन विधायक 2026

    जबलपुर स्थित मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक पर बहस के दौरान कांग्रेस विधायक लखन घनघोरिया ने सरकार के फैसले पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 15 साल पुरानी मेडिकल यूनिवर्सिटी को बांटने की कोई जरूरत नहीं है। देश के किसी बड़े राज्य में दो मेडिकल यूनिवर्सिटी नहीं हैं। उज्जैन में पर्याप्त सरकारी जमीन ही नहीं है, वहां मुख्यालय बनाने के लिए निजी जमीनें खरीदनी पड़ेंगी।

    किसानों का मुआवजा और जमीन नामांतरण का मुद्दा

    कांग्रेस विधायक विपिन जैन ने मंदसौर जिले में 15 हजार किसानों के 27.47 करोड़ रुपये के लंबित मुआवजे का मुद्दा उठाया। संतोषजनक जवाब न मिलने पर कांग्रेस विधायक सोहनलाल वाल्मीकि ने सदन से वॉकआउट किया। आदिवासियों की जमीन पर एक्शन: विधायक हीरालाल अलावा के सवाल पर राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने भरोसा दिया कि बिना अनुमति गैर-आदिवासियों के नाम की गई जमीनों के नामांतरण निरस्त कर आदिवासियों को कब्जा वापस दिलाया जाएगा।

    पंचायत और शिक्षा व्यवस्था पर फैसले

    पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल ने ऐलान किया कि जिन गांवों में पंचायत या सामुदायिक भवन नहीं हैं, वहां पहली प्राथमिकता पर निर्माण कराया जाएगा। भर्ती और पेपर लीक: उच्च शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रदेश के किसी भी विश्वविद्यालय में पेपर लीक की शिकायत नहीं है और समय पर रिजल्ट के लिए डिजिटल वैल्यूएशन शुरू किया जा रहा है।

    अनुपूरक बजट पर उमंग सिंघार बोले- एमपी डूबा, पैसा गुजरात को मिला

    अनुपूरक बजट पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि नर्मदा के पानी और बिजली पर मध्य प्रदेश का अधिकार था। सबसे अधिक इलाका भी मध्य प्रदेश का ही डूब क्षेत्र में आया, लेकिन प्रदेश को लाभ मिलने के बजाय केंद्र सरकार ने गुजरात को आर्थिक मदद दिला दी। सिंघार ने जल जीवन मिशन में करोड़ों रुपये के घोटाले का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने कभी इसकी गंभीर समीक्षा नहीं की कि आखिर प्रदेश के लोगों तक योजना का पानी क्यों नहीं पहुंचा। उन्होंने कहा कि सरकार को जवाब देना चाहिए कि योजना का लाभ आम लोगों तक क्यों नहीं पहुंच सका।

    नेता प्रतिपक्ष ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि देशभर में करीब डेढ़ लाख अभ्यर्थी लंबे समय से परेशान हैं। भर्ती से जुड़े नियम वर्षों से लंबित हैं, लेकिन सरकार ने आज तक इस मामले में गंभीरता नहीं दिखाई। उन्होंने सरकार से लंबित मामलों का जल्द समाधान करने की मांग की।

    विधानसभा में छात्रों को ‘कीड़ा’ कहे जाने के आरोपों पर विजयवर्गीय का खंडन

    विधानसभा में छात्रों को ‘कीड़ा’ कहे जाने के आरोपों पर संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सफाई देते हुए इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया। उन्होंने कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया है। विजयवर्गीय ने स्पष्ट किया कि उन्होंने छात्रों के लिए ऐसे किसी शब्द का इस्तेमाल नहीं किया और न ही उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचाने का कोई इरादा था। उन्होंने कहा कि विपक्ष तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश कर राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है। सरकार छात्रों के हितों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है और उनके सम्मान के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता।

  • मध्य प्रदेश में यूसीसी कानून को मिली मंजूरी भारी हंगामे और विपक्ष के विरोध के बीच विधानसभा से पास हुआ समान नागरिक संहिता विधेयक

    मध्य प्रदेश में यूसीसी कानून को मिली मंजूरी भारी हंगामे और विपक्ष के विरोध के बीच विधानसभा से पास हुआ समान नागरिक संहिता विधेयक


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन समान नागरिक संहिता यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड विधेयक को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने सामने आ गए। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही सरकार ने यूसीसी विधेयक चर्चा के लिए पेश किया जिसके बाद कांग्रेस ने इसका जोरदार विरोध शुरू कर दिया। विपक्ष ने विधेयक को प्रवर समिति के पास भेजने की मांग उठाई लेकिन सरकार ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। इसके बाद विधानसभा में तीखी बहस नारेबाजी और हंगामे का दौर शुरू हो गया। अंततः भाजपा सरकार ने अपने बहुमत के आधार पर यूसीसी विधेयक को पारित करा लिया।

    विधेयक पेश होते ही नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि इतने महत्वपूर्ण कानून पर व्यापक चर्चा और विशेषज्ञों की राय जरूरी है इसलिए इसे सेलेक्ट कमेटी के पास भेजा जाना चाहिए। कांग्रेस के कई विधायकों ने इस मांग का समर्थन किया लेकिन सरकार अपने फैसले पर अडिग रही। मांग खारिज होने के बाद कांग्रेस विधायक सदन के वेल में पहुंच गए और जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। सदन में बढ़ते शोरगुल और अव्यवस्था को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर को कार्यवाही पहले दस मिनट और फिर पंद्रह मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी।

    कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर भी माहौल शांत नहीं हुआ। कांग्रेस विधायक बाला बच्चन उमंग सिंघार आतिफ अकील और आरिफ मसूद ने यूसीसी को लेकर सरकार पर कई सवाल उठाए। विपक्ष का कहना था कि यह विधेयक संवैधानिक अधिकारों विशेषकर अल्पसंख्यकों के सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकारों को प्रभावित कर सकता है। कांग्रेस नेताओं ने संविधान के अनुच्छेद 29 का उल्लेख करते हुए कहा कि इस विषय पर सभी पक्षों से व्यापक संवाद होना चाहिए था। हालांकि सरकार ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए विधेयक को सामाजिक समानता और महिला सशक्तीकरण की दिशा में बड़ा कदम बताया।

    मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने सदन में अपने संबोधन के दौरान कहा कि समान नागरिक संहिता किसी विशेष वर्ग के खिलाफ नहीं बल्कि सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और समान जिम्मेदारियों की व्यवस्था सुनिश्चित करने वाला कानून है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश के 93 प्रतिशत लोगों ने इस विधेयक का समर्थन किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यूसीसी लागू होने के बाद विवाह का शासकीय पंजीयन अनिवार्य होगा और एक पति या एक पत्नी रहते हुए दूसरा विवाह करने की अनुमति नहीं होगी। उन्होंने इसे सामाजिक समरसता और समान न्याय की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया।

    मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर तुष्टीकरण और वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप भी लगाया और कहा कि यदि विपक्ष वास्तव में संविधान निर्माता डॉ भीमराव आंबेडकर के विचारों का सम्मान करता है तो उसे इस कानून का समर्थन करना चाहिए। मुख्यमंत्री के भाषण के दौरान भी कांग्रेस विधायक लगातार नारेबाजी करते रहे लेकिन सरकार ने चर्चा पूरी कराकर बहुमत के आधार पर विधेयक को पारित करा लिया।

    सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले भी कांग्रेस ने विधानसभा परिसर में यूसीसी के विरोध में सांकेतिक नाटक का मंचन किया। पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकार बेरोजगारी महंगाई किसानों और युवाओं से जुड़े मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए यूसीसी जैसे विषयों को आगे ला रही है। इसके बावजूद सरकार ने स्पष्ट किया कि यह कानून प्रदेश में समान अधिकार और समान न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित होगा।

  • एमपी में यूसीसी लागू करने की बड़ी तैयारी कैबिनेट से मिली मंजूरी अब विधानसभा में पेश होगा ऐतिहासिक विधेयक

    एमपी में यूसीसी लागू करने की बड़ी तैयारी कैबिनेट से मिली मंजूरी अब विधानसभा में पेश होगा ऐतिहासिक विधेयक


    भोपाल । मध्य प्रदेश सरकार ने समान नागरिक संहिता यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर बड़ा और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की अध्यक्षता में रविवार को आयोजित कैबिनेट बैठक में यूसीसी विधेयक 2026 के मसौदे को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी गई। इसके साथ ही राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करने की प्रक्रिया ने औपचारिक रूप से नया चरण पार कर लिया है। अब इस विधेयक को 20 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र में चर्चा और पारित कराने के लिए सदन के पटल पर रखा जाएगा।

    यदि विधानसभा से यह विधेयक पारित हो जाता है और आगे की संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होती है तो मध्य प्रदेश उन राज्यों की श्रेणी में शामिल हो जाएगा जिन्होंने समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने इस निर्णय को ऐतिहासिक बताते हुए मंत्रिमंडल के सभी सदस्यों और प्रदेशवासियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि समानता भारतीय संस्कृति और संविधान की मूल भावना का हिस्सा है और सरकार इसी विचार को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि अब विधेयक विधानसभा में प्रस्तुत किया जाएगा जहां इस पर विस्तार से चर्चा होगी। लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत सदन की मंजूरी मिलने के बाद आगे की वैधानिक कार्रवाई पूरी की जाएगी। सरकार का कहना है कि यूसीसी का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक कानून की व्यवस्था सुनिश्चित करना है।

    कैबिनेट बैठक भोपाल के समीप जगदीशपुर स्थित ऐतिहासिक चमन महल में आयोजित की गई जहां जनजातीय संस्कृति और विरासत को भी विशेष रूप से प्रदर्शित किया गया। बैठक स्थल पर जनजातीय कलाकारों ने पारंपरिक लोक कलाओं की प्रस्तुति दी जबकि सभागार में जनजातीय वीर नायकों के चित्र लगाए गए थे। मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल के सदस्य पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए इलेक्ट्रिक बसों से बैठक स्थल पहुंचे।

    बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने भोपाल के गौरवशाली इतिहास का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र राजा भोज परमार राजवंश और गोंड शासकों की समृद्ध विरासत का केंद्र रहा है। उन्होंने रानी कमलापति के साहस और त्याग को याद करते हुए कहा कि उनका संघर्ष आज भी समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है। मुख्यमंत्री ने भोपाल के ऐतिहासिक विकास में विभिन्न शासकों और संस्कृतियों के योगदान का भी उल्लेख किया।

    देश में समान नागरिक संहिता को लेकर पहले भी कई राज्यों ने पहल की है। उत्तराखंड स्वतंत्र भारत में यूसीसी लागू करने वाला पहला राज्य बना जहां विधेयक पारित होने के बाद जनवरी 2025 से इसे लागू किया गया। इसके बाद गुजरात विधानसभा ने भी यूसीसी विधेयक पारित किया। वहीं असम विधानसभा ने भी समान नागरिक संहिता संबंधी विधेयक को मंजूरी दी है हालांकि वहां कुछ अनुसूचित जनजातियों और पारंपरिक धार्मिक प्रथाओं को इसके दायरे से बाहर रखा गया है। गोवा में लंबे समय से पुर्तगाली सिविल कोड के तहत समान नागरिक कानून की व्यवस्था लागू है।

    अब पूरे प्रदेश की निगाहें 20 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र पर टिकी हैं जहां यूसीसी विधेयक पर चर्चा होगी। सदन में पारित होने के बाद यह विधेयक आगे की संवैधानिक प्रक्रिया से गुजरेगा। सरकार इसे समानता और न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बता रही है जबकि इस पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर व्यापक चर्चा होने की संभावना भी है।

  • एमपी में यूसीसी पर कैबिनेट की मुहर के बाद विधानसभा में आएगा विधेयक, मंत्रियों के सामने होगा प्रेजेंटेशन

    एमपी में यूसीसी पर कैबिनेट की मुहर के बाद विधानसभा में आएगा विधेयक, मंत्रियों के सामने होगा प्रेजेंटेशन


    भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक को मानसून सत्र में विधानसभा में पेश करने की तैयारी में है। इससे पहले 19 जुलाई को भोपाल के निकट स्थित जगदीशपुर में आयोजित होने वाली कैबिनेट बैठक में विधेयक के प्रमुख प्रावधानों का प्रस्तुतीकरण किया जाएगा, ताकि सभी मंत्री इसके विभिन्न पहलुओं से पूरी तरह अवगत हो सकें।

    सरकार का उद्देश्य है कि विधानसभा में विधेयक पेश होने से पहले मंत्रियों की सभी जिज्ञासाओं का समाधान हो जाए और वे सदन में प्रस्तावित कानून के प्रावधानों पर तथ्यात्मक रूप से अपना पक्ष रख सकें।

    कांग्रेस के विरोध की तैयारी
    सूत्रों के अनुसार, विधानसभा के मानसून सत्र में कांग्रेस यूसीसी विधेयक का विरोध कर सकती है। इसे देखते हुए सरकार पहले ही कैबिनेट के समक्ष इसके प्रावधानों की विस्तृत जानकारी साझा करेगी, ताकि चर्चा के दौरान मंत्री प्रभावी ढंग से सरकार का पक्ष रख सकें।

    आदिवासी समुदाय रहेगा दायरे से बाहर
    प्रस्तावित यूसीसी विधेयक में आदिवासी, घुमंतु, अर्द्धघुमंतु और मतांतरित आदिवासी समुदायों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है। इसके अलावा लिव-इन रिलेशनशिप के लिए अनिवार्य पंजीयन, उत्तराधिकार से जुड़े प्रावधान और विवाह एवं विवाह विच्छेद (तलाक) के मामलों में सभी नागरिकों के लिए समान नियम लागू करने का प्रस्ताव शामिल किया गया है।

    साढ़े नौ लाख सुझावों के आधार पर तैयार हुआ मसौदा
    यूसीसी का मसौदा तैयार करने के दौरान समिति को करीब साढ़े नौ लाख सुझाव प्राप्त हुए थे। इन्हीं सुझावों और विभिन्न पक्षों पर विचार-विमर्श के बाद विधेयक को अंतिम रूप दिया गया है।

    मानसून सत्र में आएंगे 14 विधेयक
    20 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र में सरकार कुल 14 विधेयक प्रस्तुत करने की तैयारी में है। इनमें केंद्र सरकार द्वारा संशोधित श्रम कानूनों को प्रदेश में लागू करने संबंधी विधेयक, कोचिंग संस्थानों के विनियमन का कानून, फायर सेफ्टी, कॉलोनाइजर एक्ट, माल एवं सेवा कर (जीएसटी), पंचायतराज, नागरिक सुरक्षा संहिता तथा प्रथम अनुपूरक बजट से संबंधित विनियोग विधेयक समेत कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव शामिल हैं।

  • ट्रैक्टर लेकर विधानसभा पहुंचे कांग्रेस MLA, पुलिस से झूमाझटकी, 'नारी शक्ति वंदन’ पर गरमाई बहस

    ट्रैक्टर लेकर विधानसभा पहुंचे कांग्रेस MLA, पुलिस से झूमाझटकी, 'नारी शक्ति वंदन’ पर गरमाई बहस


    भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान सोमवार को ‘नारी शक्ति वंदन’ विषय पर चर्चा के बीच जमकर हंगामा देखने को मिला। सदन के भीतर तीखी बहस हुई, जबकि बाहर कांग्रेस विधायक के ट्रैक्टर लेकर पहुंचने की कोशिश ने माहौल और गरमा दिया। हंगामे के चलते कांग्रेस विधायकों ने वॉकआउट भी किया।

    ट्रैक्टर लेकर पहुंचे विधायक, पुलिस से हुई बहस
    कांग्रेस विधायक अभिजीत शाह ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर विधानसभा जाने के लिए निकले थे, लेकिन मंत्रालय के पास पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक दिया। शाह का कहना था कि उन्होंने ट्रैक्टर के लिए पास बनवाया था, जबकि पुलिस अधिकारियों ने साफ कहा कि ट्रैक्टर को अंदर ले जाने की अनुमति नहीं है। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई और स्थिति धक्का-मुक्की तक पहुंच गई। बाद में विधायक गेहूं का गठ्ठा लेकर विधानसभा पहुंचे, जो विरोध का प्रतीक बना।

    सदन में ‘नारी शक्ति वंदन’ पर तीखी बहस
    विधानसभा के अंदर ‘नारी शक्ति वंदन’ को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए। कांग्रेस विधायक राजेंद्र सिंह ने कहा कि महिला आरक्षण बिल राजनीतिक कारणों से लाया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी से मुकाबला नहीं कर पाने के कारण यह कदम उठाया गया।

    महिलाओं की उम्मीदों से खिलवाड़
    मंत्री कृष्णा गौर ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि संसद में बिल पास न होने से महिलाओं को बड़ा झटका लगा है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को उम्मीद थी कि उनकी राजनीतिक भागीदारी बढ़ेगी, लेकिन कांग्रेस और विपक्ष ने उनकी उम्मीदें तोड़ दीं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिलाओं को अधिकार देने का प्रयास किया, लेकिन विपक्ष ने इसका विरोध किया।

    परिसीमन पर विपक्ष के सवाल, वॉकआउट
    कांग्रेस विधायक नितेंद्र सिंह राठौर ने कहा कि यदि महिलाओं को अधिकार देना है तो परिसीमन का इंतजार क्यों किया जा रहा है। उन्होंने मांग की कि आरक्षण तुरंत लागू किया जाए। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया और इसे “दिखावा” बताया।

    इतिहास पर भी छिड़ी बहस
    कांग्रेस विधायक राजेन्द्र कुमार सिंह ने कहा कि पहले भी महिला आरक्षण को लेकर पहल की गई थी। इस पर संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सवाल उठाते हुए उस दावे को चुनौती दी। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच ऐतिहासिक तथ्यों को लेकर भी तीखी बहस हुई।

    महिलाओं के मुद्दे पर आरोप-प्रत्यारोप तेज
    पूर्व मंत्री अर्चना चिटनिस ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उनकी सोच महिलाओं को आगे बढ़ाने की नहीं रही। उन्होंने कहा कि महिलाएं हर तीसरी सीट पर प्रतिनिधित्व की उम्मीद कर रही थीं, लेकिन उन्हें निराशा मिली। वहीं हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि आरक्षण परिसीमन के साथ ही लागू होगा, ताकि जनसंख्या के अनुसार संतुलित प्रतिनिधित्व मिल सके। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार की योजनाओं से बेटियों की स्थिति में सुधार हुआ है और कई योजनाओं का लाभ लाखों को मिला है।

    तुरंत आरक्षण लागू करने की मांग
    कांग्रेस विधायक झूमा सोलंकी ने मांग की कि मौजूदा सीटों पर ही महिलाओं को आरक्षण दिया जाए। उन्होंने “कोटे में कोटा” की भी वकालत की, ताकि अनुसूचित जाति, जनजाति और ओबीसी वर्ग की महिलाओं को भी उचित प्रतिनिधित्व मिल सके। उन्होंने कहा कि परिसीमन और जनगणना जैसी प्रक्रियाओं के नाम पर महिलाओं को इंतजार नहीं कराया जाना चाहिए।

  • MP विधानसभा बजट सत्र: अदाणी विवाद और भागीरथपुरा मौत कांड पर हंगामा, नेता प्रतिपक्ष ने इस्तीफे की मांग की

    MP विधानसभा बजट सत्र: अदाणी विवाद और भागीरथपुरा मौत कांड पर हंगामा, नेता प्रतिपक्ष ने इस्तीफे की मांग की


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र का गुरुवार को चौथा दिन विवादों के कारण सुर्खियों में रहा। राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बीच तीखी बहस हुई। सिंघार ने आरोप लगाया कि सरकार और अदाणी के बीच समझौता हुआ है, जिसके तहत बिजली खरीद के नाम पर अगले 25 साल में 1 लाख से सवा लाख करोड़ रुपये दिए जाएंगे।

    जब सिंघार ने यह दावा किया, मंत्री विजयवर्गीय ने सबूत मांगते हुए कहा, “इसका सबूत दें।” नेता प्रतिपक्ष ने जवाब दिया कि उनके पास सबूत हैं और वे दिखा देंगे। इस दौरान दोनों के बीच तनातनी बढ़ गई और मंत्री विजयवर्गीय ने उन्हें “औकात में रहने” की चेतावनी दी। इससे सदन में हंगामा बढ़ गया और कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।

    प्रदर्शन और हंगामा
    कार्यवाही शुरू होने से पहले कांग्रेस विधायकों ने सदन के बाहर थाली बजाकर विरोध प्रदर्शन किया। उमंग सिंघार ने बजट को आम जनता के लिए निराशाजनक बताते हुए इसे “ख्याली पुलाव” करार दिया। सदन में प्रश्न पूछने के दौरान भी शोर-शराबा जारी रहा, जिसके कारण अध्यक्ष ने कार्यवाही पाँच मिनट के लिए स्थगित कर दी।

    भागीरथपुरा मौत कांड पर सवाल
    इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से हुई मौतों को लेकर भी सदन में जोरदार हंगामा हुआ। सिंघार ने संबंधित मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला, इंदौर सांसद शंकर लालवानी और महापौर पुष्यमित्र भार्गव के इस्तीफे की मांग की।

    डिप्टी सीएम व स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने बताया कि 21 से 29 दिसंबर के बीच डायरिया फैलने के बाद स्थिति गंभीर हुई और 22 मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपए की राहत दी गई। सिंघार ने मृतकों की संख्या 35 बताते हुए सभी को मुआवजा देने और मंत्रियों की जिम्मेदारी तय करने की मांग की।

    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि सरकार ने मामले को गंभीरता से लिया और एक आईएएस अधिकारी को निलंबित किया। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के राहत कार्यों का भी उल्लेख किया गया। डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा ने भी सरकार का पक्ष रखा, लेकिन इस्तीफे की मांग और विवाद के बीच सदन में हंगामा जारी रहा।

    MP विधानसभा बजट सत्र में अदाणी बिजली सौदे और भागीरथपुरा मौत कांड को लेकर विपक्ष और सरकार के बीच तीखी बहस हुई। नेता प्रतिपक्ष ने मंत्री इस्तीफे की मांग की, जबकि सरकार ने राहत कार्य और कार्रवाई का हवाला दिया। विवाद के बीच सदन की कार्यवाही कई बार बाधित रही।

  • एमपी विधानसभा बजट सत्र की शुरुआत हंगामेदार, विपक्ष ने राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान किया हंगामा

    एमपी विधानसभा बजट सत्र की शुरुआत हंगामेदार, विपक्ष ने राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान किया हंगामा


    भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा का बजट सत्र सोमवार से हंगामेदार रहा। सत्र की शुरुआत में संपूर्ण छह छंदों में “वंदे मातरम्” का गायन हुआ, इसके बाद राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने अपना अभिभाषण प्रस्तुत किया। अभिभाषण के दौरान विपक्ष ने हंगामा किया, जिससे कार्यवाही अगले दिन तक स्थगित कर दी गई।
    राज्यपाल ने अपने संबोधन में सरकार की विकास उपलब्धियों, जनकल्याणकारी योजनाओं और संकल्प पत्र 2023 में किए गए वादों के तहत अब तक हुए कार्यों तथा आगामी लक्ष्यों की जानकारी दी। साथ ही सदन में विभिन्न हस्तियों और नेताओं के निधन पर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। संसद भवन पहुंचने पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने राज्यपाल का स्वागत किया।

    अभिभाषण और हंगामा
    राज्यपाल ने अपने भाषण में देश की वर्तमान स्थिति को “अमृत काल” बताया और उद्योगों के अनुकूल वातावरण, भोपाल में हुई ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट, वर्ष 2047 तक मध्यप्रदेश की 2 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य, 2026 को कृषि वर्ष के रूप में मनाने, पीएम जनमन योजना के तहत 1.35 लाख आवास निर्माण, उज्जैन में शिप्रा नदी को प्रदूषण मुक्त करने और नई शिक्षा नीति के तहत किए गए कार्यों का उल्लेख किया।

    इसी दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि नल-जल योजना और इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों का मुद्दा अभिभाषण में शामिल नहीं किया गया। इसके बाद विपक्ष ने नारेबाजी शुरू कर दी। हंगामे के बीच राज्यपाल ने अपना अभिभाषण जारी रखा।

    राज्यपाल के सदन से जाने के बाद कार्यवाही पुनः शुरू हुई, जहां विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि जो हिस्सा पढ़ा नहीं जा सका, उसे पढ़ा हुआ माना जाएगा। इसके बाद सदन की कार्यवाही अगले दिन तक स्थगित कर दी गई।

    सत्र का विस्तृत कार्यक्रम
    बजट सत्र 16 फरवरी से 6 मार्च तक चलेगा। पहले दिन राज्यपाल का अभिभाषण हुआ। इस सत्र में कुल 3478 प्रश्न, 236 ध्यानाकर्षण, 10 स्थगन प्रस्ताव, 41 अशासकीय संकल्प और शून्यकाल में 83 सवाल विधानसभा में प्रस्तुत किए जाएंगे।

  • मप्र विधानसभाः अनुपूरक बजट पर तीखी बहस, कांग्रेस ने जनविरोधी और भाजपा ने बताया विकासोन्मुखी

    मप्र विधानसभाः अनुपूरक बजट पर तीखी बहस, कांग्रेस ने जनविरोधी और भाजपा ने बताया विकासोन्मुखी


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन गुरुवार को उप मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा द्वारा प्रस्तुत दूसरे अनुपूरक बजट की मांगें प्रस्तुत किए जाने के बाद सदन में सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। विधानसभा अध्यक्ष ने चर्चा शुरू कराई, जिसमें भाजपा और कांग्रेस दोनों पक्षों के विधायकों ने अपनी-अपनी बात मजबूती से रखी। कांग्रेस ने जहां अनुपूरक बजट को जनविरोधी करार दिया, तो वहीं भाजपा ने इसे विकासोन्मुखी बताया। शाम साढ़े सात बजे कार्यवाही स्थगित कर इसे शुक्रवार सुबह 11 बजे तक के लिए टाल दिया गया।

    गुरुवार को सदन में दूसरे अनुपूरक बजट की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक बाला बच्चन ने कहा कि अनुपूरक बजट में पूंजीगत व्यय कम है जिससे रोजगार में कमी आएगी और टैक्स कलेक्शन कम होगा, इससे पता चलता है कि यह प्रदेश के हित में नहीं है। दूसरा अनुपूरक बजट 13155 करोड़ का है। सदन में पिछली बैठक में कहा गया था कि कांग्रेस विधायकों के क्षेत्र में 5 करोड़ रुपए विकास कार्य के लिए दिए जाएंगे लेकिन आज तक नहीं दिया गया। सरकार भेदभाव कर रही है। इसके पहले कभी ऐसा नहीं हुआ। विधायकों के ई-ऑफिस के लिए 5-5 लाख रुपये देने की बात कही गई थी। कांग्रेस के कई विधायकों को यह सुविधा नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि किसानों का ध्यान नहीं रखा जा रहा है इसलिए किसान आंदोलन करने को मजबूर हैं। खल घाट में हुए आंदोलन में 700 किसानों पर अज्ञात के नाम पर केस दर्ज कर दिया गया।

    अनुपूरक बजट पर बोलते हुए कांग्रेस विधायक भंवर सिंह शेखावत ने कहा कि सरकार पहले यह तो बताए कि जब से यह सरकार बनी है, तब से अब तक कितना कर्जा लिया। इसका क्या उपयोग हो रहा है। मध्य प्रदेश पर 4.50 लाख करोड़ से अधिक कर्ज है। हर साल जो कर्ज लिया गया है, उस पर ब्याज कितना दे रहे हैं। यह जनता को बताएं। मतदाता की जेब में पैसे डालो, वोट लेकर 5 साल राज करो… इस फार्मूले पर सरकार काम कर रही है।

    शेखावत ने कहा कि मैं बहनों के पैसे मिलने खिलाफ नहीं हूं। उनके विकास के खिलाफ भी नहीं हूं, लेकिन सबसे अहम सवाल है कि यह जो कर्ज लिया जा रहा है… चुकेगा कैसे? जनता पर जो बोझ बढ़ा रहा, वह कैसे खत्म होगा? इंदौर में 800 करोड़ रुपए बिना किसी काम के निकल गया और दिखावे के तौर पर एक इंजीनियर पर कार्रवाई हो गई। शेखावत ने इंदौर की खान नदी की शुद्धीकरण पर भी सवाल उठाए, जिसमें लगातार पैसा खर्च हो रहा, लेकिन नदी साफ नहीं हो रही। उन्होंने कहा कि किसान को खाद नहीं मिल रही है। वह लाइन में लग रहा, डंडे खा रहा है।

    कांग्रेस विधायक राजेंद्र कुमार सिंह ने प्रदेश में खाद संकट का मामला उठाते हुए कहा कि किसानों को खाद नहीं मिलता। 24 घंटे लाइन लगने के बाद टोकन मिलता है, उसके बाद फिर खाद मिलने की तारीख दी जाती है। सरकार किसानों को खाद नहीं दे पा रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में विकास कार्यों के नाम पर भेदभाव हो रहा है। बीजेपी के विधायकों से 15 करोड़ रुपये के विकास कार्य के प्रस्ताव लिए जा रहे हैं, जबकि कांग्रेस के विधायकों को अनदेखा किया जा रहा है।

    इस पर विधायक सीता शरण शर्मा ने कहा कि ऐसी कोई बात नहीं है। प्रस्ताव दिए जाते हैं, उसके परीक्षण होते हैं, उसके आधार पर राशि जारी होती है। इस पर राजेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि कांग्रेस के विधायकों के साथ भी ऐसा क्यों नहीं होता है कि उनसे भी प्रस्ताव लेकर विकास कार्य करने का मौका दिया जाए। विधायक राजेंद्र कुमार सिंह ने विधायकों के वेतन बढ़ाने का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार ने 1 लाख 60 हजार रुपये वेतन बढ़ाने की तैयारी की थी, लेकिन इससे भी रोक दिया गया है। अभी 1 लाख 10 हजार रुपये मिल रहा है। वेतन नहीं भी बढ़ेगा तो भी कांग्रेस विधायक काम करते रहेंगे।

    राजेंद्र कुमार सिंह ने अमरपाटन की 6 पंचायतों को रीवा जिले में शामिल करने का विरोध किया और कहा कि मैहर में बन रहे कलेक्ट्रेट भवन को मैहर से दूर कटनी रोड पर बनाया जा रहा है, जबकि इसे मैहर और अमरपाटन के बीच बनाया जाना चाहिए। विधायक राजेंद्र कुमार सिंह ने मार्कंडेय घाट पर एक ब्रिज बनाने की मांग की।

    कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने अनुपूरक बजट पर कहा कि वैसे तो अल्पसंख्यकों के लिए अल्पसंख्यक विभाग में बजट का प्रावधान नहीं है, लेकिन अब हमें भी इसकी आदत हो गई है। जो भी व्यवस्था रहेगी, उसके हिसाब से चलते रहेंगे, लेकिन सरकर को इस ओर ध्यान देना चाहिए, ताकि विकास कार्य कराए जा सकें। उन्होंने कहा कि भोपाल शहर में विकास के काम में तेजी लाना चाहिए।

    कांग्रेस विधायक फुंदेलाल मार्को ने छात्रावास में बच्चों को महुआ खिलाए जाने का विरोध करते हुए कहा– यह बच्चे अपने घर पर भी महुआ खा रहे थे और जब यहां छात्रावास में पहुंचे हैं तो वहां भी चने के साथ महुआ खिलाया जा रहा है। धीरे-धीरे महुआ पीने की आदत डाल दी जाएगी। वे सरकार से मांग करते हैं कि बच्चों के मन में यह भावना खत्म करें कि आदिवासी हैं और उन्हें महुआ पीना पड़ेगा, महुआ ही खाना पड़ेगा। उन्होंने संभागों के लिए नियुक्त किए गए अपर मुख्य सचिवों के साथ विधायकों के संवाद पर भी जोर दिया।

    मार्को ने देश भर में 3000 से अधिक रजिस्टर्ड बूचड़खाने बंद करने की मांग करते हुए कहा कि अगर आप इसे बंद नहीं कर सकते हैं तो दिखावा मत कीजिए। मार्को ने कहा कि जहां गोमाता का वध किया जाता है। ऐसे बूचड़खाने को बंद करने का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजना चाहिए। यह तय है कि इसका सारे देश में विरोध होगा। सरकार अगर गंभीर है तो दिखावा न करें।

    नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि बजट में किसानों, युवाओं और एमएसएमई सेक्टर के लिए कोई ठोस प्रावधान नहीं है। धान और मक्का के लिए एसएसपी और समर्थन मूल्य का उल्लेख नहीं होना गंभीर लापरवाही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता की जेब की चोरी कर रही है और किसानों की समस्याओं से मुंह मोड़ रही है।

    अनुपूरक बजट का बचाव करते हुए भाजपा विधायक ओमप्रकाश सखलेचा ने कहा कि सरकार का फोकस लाड़ली बहना, आवास, किसान, सिंचाई और उद्योगों पर है। उन्होंने बताया कि रोजगार के लिए 2 लाख 27 करोड़ से अधिक का प्रावधान किया गया है तथा भावांतर के लिए 500 करोड़ रखे गए हैं।

    होशंगाबाद से भाजपा विधायक डॉ. सीताशरण शर्मा ने कहा कि भाजपा सरकार ने जो वादे किए, वे पूरे किए हैं। कर्जा कोई नया मुद्दा नहीं है, लेकिन हमारी सरकार ने कर्ज लेकर विकास भी किया है। सदन में दोनों पक्षों की तीखी बहस के बीच अनुपूरक बजट पर चर्चा शुक्रवार को भी जारी रहेगी। सरकार ने वर्ष 2025-26 के लिए द्वितीय अनुपूरक बजट 13,476 करोड़ रुपये का पेश किया है।

  • मप्र विधानसभा में द्वितीय अनुपूरक बजट पेश, 13476.94 करोड़ रुपये का प्रावधान

    मप्र विधानसभा में द्वितीय अनुपूरक बजट पेश, 13476.94 करोड़ रुपये का प्रावधान


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को राज्य सरकार द्वारा सदन में वित्त वर्ष 2025–26 के लिए द्वितीय अनुपूरक अनुमान पेश किया है। इस पर गुरुवार, चार दिसंबर को 3:30 घंटे चर्चा होगी। वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा द्वारा पेश किए गए दूसरे अनुपूरक बजट में कुल 13476 करोड़ 94 लाख रुपये का प्रावधान रखा गया है। इसमें राजस्व मद में 8,448.57 करोड़ और पूंजीगत मद में 5,028.37 करोड़ शामिल हैं। सरकार ने इस अनुपूरक बजट में ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण, बुनियादी ढांचा, जल संसाधन और औद्योगिक निवेश जैसे अहम क्षेत्रों पर विशेष जोर दिया है।

    दूसरे अनुपूरक बजट में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ग्रामीण विकास विभाग को 4,000 करोड़ रुपये का प्रावधान दिया गया है। पंचायत विभाग को पंद्रहवें वित्त आयोग की अनुशंसाओं के अनुसार 1,633 करोड़ रुपये के अनुदान का प्रावधान किया गया है। महिला एवं बाल विकास विभाग की मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना 2023 के लिए राजस्व मद में 1,794 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

    खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के अंतर्गत उत्पादन संस्थाओं को ऋण सहायता हेतु 2,000 करोड़ रुपये की पूंजीगत राशि का प्रावधान किया गया। इसी तरह, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग को भूमि अधिग्रहण, सर्वे, डिमार्केशन और सेवा शुल्क हेतु 650 करोड़ रुपये दिए गए हैं।

    नर्मदा घाटी एवं जल संसाधन परियोजनाओं में बड़ा निवेश
    नर्मदा घाटी विकास विभाग के लिए सरदार सरोवर डूब प्रभावित क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण और अन्य कार्यों के लिए 600 करोड़ रुपये, बरगी नहर विस्तार योजना के लिए 200 करोड़ रुपये, इंदिरा सागर परियोजना (एमसीएडी) के लिए 94 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। जल संसाधन विभाग को भी बांध व संबंधित कार्यों के लिए 300 करोड़ रुपये तथा बहुती फिल्टर संयंत्र-2 फेज-2 के लिए 63 रुपये करोड़ आवंटित हुए हैं। किसान कल्याण और कृषि विकास विभाग के अंतर्गत भावांतर/लेट रेट योजना पर 500 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

    शहरी विकास एवं अमृत मिशन में अमृत 2.0 मिशन के तहत अटल मिशन फॉर रीजुवेनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन के लिए 150 करोड़, मिलियन प्लस शहरों के लिए 115 करोड़, एक लाख से कम आबादी वाले शहरों के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। लोक निर्माण विभाग को भूमि अधिग्रहण मुआवजे के लिए 300 करोड़ रुपये दिए गए हैं। इसके अलावा शिक्षा विभाग में पीएम जनमन (समग्र शिक्षा) हेतु 122 करोड़, जबकि धरती आबा जनजातीय ग्राम उन्नयन अभियान के लिए 108 करोड़ रुपये का प्रावधान शामिल है।