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  • MP में शिक्षक भर्ती का बड़ा प्लान, 48 हजार पदों पर होगी तैयारी, TET के बाद 30 हजार शिक्षकों को प्रमोशन से मिलेंगे नए मौके

    MP में शिक्षक भर्ती का बड़ा प्लान, 48 हजार पदों पर होगी तैयारी, TET के बाद 30 हजार शिक्षकों को प्रमोशन से मिलेंगे नए मौके


    भोपाल। मध्यप्रदेश में शिक्षकों की पदोन्नति और नई भर्ती को लेकर बड़ी तस्वीर सामने आई है। प्रदेश में 30 हजार से ज्यादा शिक्षकों के प्रमोशन की प्रक्रिया शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी TET के बाद आगे बढ़ सकती है। दिसंबर में प्रस्तावित TET का परिणाम आने के बाद स्कूल शिक्षा विभाग प्रमोशन की पहली सूची जारी करने की तैयारी कर रहा है। शिक्षकों के प्रमोशन के बाद खाली होने वाले पदों और सेवानिवृत्ति के कारण रिक्त होने वाले पदों को मिलाकर अगले चरण में करीब 48 हजार पदों पर भर्ती की स्थिति बन सकती है।
    दरअसल प्रदेश सरकार ने 30 जुलाई से सभी विभागों में प्रमोशन की प्रक्रिया शुरू की थी। कई विभागों में करीब एक लाख पदोन्नतियां हो चुकी हैं। स्कूल शिक्षा विभाग में लिपिक संवर्ग और कुछ उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों के प्रमोशन भी किए जा चुके हैं। हालांकि शिक्षक संवर्ग की पदोन्नति अभी बाकी है। विभाग की ओर से प्रमोशन के लिए पात्र शिक्षकों की सूची तैयार की जा चुकी है और अब TET के परिणाम का इंतजार किया जा रहा है।
    शिक्षकों की पदोन्नति को TET से जोड़ने के पीछे सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला दिया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार दिसंबर 2028 तक छह बार शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजित की जानी है। पहली परीक्षा दिसंबर में माध्यमिक शिक्षा मंडल के माध्यम से प्रस्तावित है। परीक्षा का परिणाम आने के बाद विभाग शिक्षक संवर्ग की पदोन्नति प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकता है।
    नई भर्ती के लिहाज से भी आने वाला समय महत्वपूर्ण हो सकता है। फिलहाल स्कूल शिक्षा विभाग में करीब 10 हजार पद खाली बताए जा रहे हैं। इसके अलावा मार्च 2027 तक करीब 8 हजार शिक्षक सेवानिवृत्त हो सकते हैं। इस तरह मौजूदा रिक्तियों और संभावित रिटायरमेंट को मिलाकर करीब 18 हजार पद खाली होने की स्थिति बन सकती है।

    इसके साथ ही 30 हजार से ज्यादा शिक्षकों के प्रमोशन होने पर उनके वर्तमान पद भी रिक्त होंगे। इन दोनों स्थितियों को जोड़ने पर करीब 48 हजार पदों पर नई भर्ती की संभावनाएं बन सकती हैं। हालांकि इन पदों में वर्ग एक वर्ग दो और वर्ग तीन के कितने पद होंगे इसकी स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। अंतिम संख्या विभाग की ओर से पदों की समीक्षा और रिक्तियों के निर्धारण के बाद सामने आएगी।
    प्रमोशन और भर्ती की यह प्रक्रिया उन युवाओं के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकती है जो शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे हैं। शिक्षकों के पदोन्नत होने के बाद उनके पुराने पद खाली होंगे और इन पदों पर नए अभ्यर्थियों की नियुक्ति का रास्ता खुल सकता है। हालांकि नई भर्ती का विज्ञापन तत्काल आने की संभावना नहीं बताई जा रही है।
    विभाग की मौजूदा तैयारी के अनुसार शिक्षक भर्ती का विज्ञापन मार्च 2028 के बाद जारी किया जा सकता है। इसके बाद परीक्षा परिणाम और नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी होने में भी समय लगेगा। ऐसे में 2026 में नई शिक्षक भर्ती का विज्ञापन आने की संभावना फिलहाल नहीं है।
    दूसरी ओर शिक्षक संगठन TET की अनिवार्यता का विरोध करते हुए जल्द प्रमोशन की मांग कर रहे हैं। स्कूल शिक्षा मंत्री और विभागीय अधिकारियों के साथ हुई चर्चाओं में भी यह मुद्दा उठाया गया है। अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा ने 27 सितंबर से प्रस्तावित आंदोलन में प्रमोशन की मांग को शामिल किया है। अब दिसंबर की TET और उसके बाद होने वाली विभागीय प्रक्रिया पर शिक्षकों और भर्ती की तैयारी कर रहे युवाओं दोनों की नजर रहेगी।
  • शिक्षा विभाग के 2000 कर्मचारियों को दो महीने से वेतन नहीं! परिवारों पर बढ़ा आर्थिक संकट अब आंदोलन की तैयारी

    शिक्षा विभाग के 2000 कर्मचारियों को दो महीने से वेतन नहीं! परिवारों पर बढ़ा आर्थिक संकट अब आंदोलन की तैयारी


    भोपाल। मध्यप्रदेश में शिक्षा विभाग से जुड़े करीब 1500 से 2000 कर्मचारियों के सामने वेतन को लेकर बड़ी परेशानी खड़ी हो गई है। सर्व शिक्षा अभियान के तहत प्रदेश के अलग अलग जिलों में प्रतिनियुक्ति पर काम कर रहे जनशिक्षकों बीआरसीसी और बीएसी कर्मचारियों को पिछले दो माह से वेतन नहीं मिला है। लंबे समय से भुगतान अटका होने के कारण कर्मचारियों के सामने घर का रोजमर्रा का खर्च बच्चों की पढ़ाई इलाज और दूसरी जरूरी जरूरतों को पूरा करने की चुनौती बढ़ती जा रही है। खास बात यह है कि इन कर्मचारियों की तरह ही विभागीय जिम्मेदारी संभाल रहे कुछ प्रभारी कर्मचारियों को उनके मूल विद्यालय से नियमित वेतन मिल रहा है। इसी अंतर को लेकर अब शिक्षक संगठन ने राज्य शिक्षा केंद्र का ध्यान आकर्षित किया है।

    शासकीय शिक्षक संगठन मध्यप्रदेश ने राज्य शिक्षा केंद्र के संचालक को पत्र भेजकर लंबित वेतन का तत्काल भुगतान कराने की मांग की है। संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेन्द्र कौशल का कहना है कि जनशिक्षक बीआरसीसी और बीएसी कर्मचारी लगातार अपने विभागीय दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं। इसके बावजूद दो माह से वेतन नहीं मिलना गंभीर विषय है। कर्मचारियों को अपनी जिम्मेदारियां निभाने के साथ परिवार की आर्थिक जरूरतों को भी पूरा करना होता है लेकिन वेतन अटकने से उनकी परेशानी लगातार बढ़ रही है।

    संगठन ने यह भी कहा है कि रक्षाबंधन जन्माष्टमी और 15 अगस्त जैसे महत्वपूर्ण अवसरों पर भी कर्मचारियों को वेतन नहीं मिल सका। ऐसे समय में जब परिवारों पर अतिरिक्त खर्च रहता है तब दो माह की सैलरी अटकने से आर्थिक दबाव और बढ़ गया है। कर्मचारियों के बीच इसे लेकर नाराजगी और असंतोष भी देखा जा रहा है।

    शिक्षक संगठन ने राज्य शिक्षा केंद्र से मांग की है कि प्रदेश के सभी जिलों में जनशिक्षकों बीआरसीसी और बीएसी कर्मचारियों के वेतन भुगतान की स्थिति की तत्काल समीक्षा की जाए। जहां भी भुगतान लंबित है वहां संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी कर जल्द से जल्द वेतन जारी कराया जाए। संगठन का कहना है कि नियमित सरकारी जिम्मेदारी निभाने वाले कर्मचारियों को समय पर वेतन मिलना उनका न्यायसंगत अधिकार है।

    वेतन भुगतान में देरी का असर केवल कर्मचारियों तक सीमित नहीं है बल्कि उनके परिवारों की रोजमर्रा की जरूरतों पर भी पड़ रहा है। बच्चों की स्कूल फीस पढ़ाई का खर्च दवाइयां घर का राशन और अन्य जरूरी भुगतान समय पर करना मुश्किल हो रहा है। संगठन ने विभाग से ऐसी व्यवस्था बनाने की मांग की है जिससे भविष्य में प्रतिनियुक्ति पर काम करने वाले कर्मचारियों का वेतन तकनीकी या प्रशासनिक कारणों से लंबे समय तक न अटके।

    शासकीय शिक्षक संगठन मध्यप्रदेश ने साफ किया है कि यदि लंबित दो माह का वेतन जल्द जारी नहीं किया गया तो इस मुद्दे को उच्च स्तर पर उठाया जाएगा। संगठन कर्मचारियों के हित में आगे आवश्यक कदम उठाने की बात कह रहा है। अब कर्मचारियों की नजर राज्य शिक्षा केंद्र के अगले कदम पर है और उन्हें उम्मीद है कि लंबे समय से लंबित वेतन का भुगतान जल्द किया जाएगा।

  • MP में शिक्षक भर्ती के बाद अब पदस्थापना की बारी! 7 हजार वर्ग-3 शिक्षकों को मिलेगा स्कूल, वर्ग-2 की वेटिंग काउंसलिंग भी शुरू

    MP में शिक्षक भर्ती के बाद अब पदस्थापना की बारी! 7 हजार वर्ग-3 शिक्षकों को मिलेगा स्कूल, वर्ग-2 की वेटिंग काउंसलिंग भी शुरू


    भोपाल । मध्यप्रदेश में सरकारी स्कूलों में शिक्षक पदस्थापना का इंतजार कर रहे वर्ग-3 के करीब 7 हजार चयनित शिक्षकों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। लोक शिक्षण विभाग सोमवार से इन शिक्षकों की शाला आवंटन प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है। लंबे समय से पदस्थापना स्थल को लेकर बनी स्थिति और म्यूचुअल ट्रांसफर की प्रक्रिया के कारण इसमें देरी हुई थी लेकिन अब विभाग ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। शाला आवंटन के बाद चयनित शिक्षकों को संबंधित स्कूल में जॉइनिंग के लिए एक सप्ताह का समय दिया जाएगा। विभाग को उम्मीद है कि इन शिक्षकों की पदस्थापना से सरकारी स्कूलों में लंबे समय से बनी शिक्षकों की कमी को काफी हद तक दूर करने में मदद मिलेगी।

    दरअसल वर्ग-3 के चयनित शिक्षकों की पदस्थापना पहले 15 अगस्त तक पूरी करने की तैयारी थी। लेकिन चयनित अभ्यर्थियों के सामने पदस्थापना स्थल को लेकर कई तरह की दिक्कतें सामने आईं। खासतौर पर कुछ शिक्षकों को आवंटित होने वाले स्कूलों और उनकी पसंद के स्थान के बीच दूरी को लेकर स्थिति बनी। इसी दौरान विभाग ने पहली बार चयनित शिक्षकों को म्यूचुअल ट्रांसफर का विकल्प उपलब्ध कराया। इस सुविधा के तहत इच्छुक शिक्षक आपस में संपर्क कर स्थानांतरण के लिए आवेदन कर सकते थे। करीब 400 चयनित शिक्षकों ने इस सुविधा का लाभ उठाया। इसी प्रक्रिया के चलते शाला आवंटन में कुछ समय की देरी हुई लेकिन अब विभाग ने इसे आगे बढ़ाने का फैसला किया है।

    लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह के मुताबिक वर्ग-3 में करीब 7 हजार चयनित शिक्षकों की पदस्थापना की जानी है। स्कूलों का आवंटन होने के बाद शिक्षकों को संबंधित संस्था में कार्यभार ग्रहण करना होगा। इसके लिए उन्हें एक सप्ताह का समय दिया जाएगा। यानी शाला आवंटन के बाद चयनित शिक्षकों के सामने अब जॉइनिंग की प्रक्रिया पूरी करने की जिम्मेदारी होगी। विभाग की कोशिश है कि पदस्थापना की प्रक्रिया जल्द पूरी हो ताकि स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ाई जा सके और विद्यार्थियों की पढ़ाई को बेहतर तरीके से संचालित किया जा सके।

    इसी दिन वर्ग-2 के चयनित शिक्षकों के लिए भी महत्वपूर्ण प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। स्कूल शिक्षा विभाग वर्ग-2 की वेटिंग काउंसलिंग के दूसरे चरण की शुरुआत सोमवार से करेगा। इसमें प्रतीक्षा सूची में शामिल अभ्यर्थियों को उपलब्ध रिक्त पदों के आधार पर स्कूल आवंटित किए जाएंगे। इससे उन उम्मीदवारों को भी मौका मिलने की उम्मीद है जो मुख्य चयन प्रक्रिया में स्थान नहीं पा सके थे लेकिन प्रतीक्षा सूची में शामिल हैं।

    विभाग की योजना वर्ग-3 के चयनित शिक्षकों की जॉइनिंग प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसी श्रेणी में वेटिंग काउंसलिंग शुरू करने की भी है। इससे रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया और आगे बढ़ेगी। यानी आने वाले समय में वर्ग-3 के चयनित अभ्यर्थियों की प्रतीक्षा सूची से भी नियुक्ति के अवसर खुल सकते हैं।

    वहीं वर्ग-1 के चयनित शिक्षकों की पदस्थापना का मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह के अनुसार इस मामले में सितंबर के पहले सप्ताह में फैसला आने की संभावना है। कोर्ट के निर्णय के बाद वर्ग-1 के चयनित शिक्षकों की रुकी हुई पदस्थापना प्रक्रिया को भी तेजी से आगे बढ़ाने की तैयारी है। ऐसे में सोमवार से शुरू होने वाली वर्ग-3 की शाला आवंटन प्रक्रिया हजारों चयनित शिक्षकों के लिए लंबे इंतजार के बाद राहत लेकर आने वाली है।

  • RTE 2026-27: प्राइवेट स्कूलों में फ्री एडमिशन का मौका, 13 मार्च से शुरू होंगे आवेदन

    RTE 2026-27: प्राइवेट स्कूलों में फ्री एडमिशन का मौका, 13 मार्च से शुरू होंगे आवेदन


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए बड़े निजी स्कूलों में पढ़ने का सपना अब साकार हो सकता है। शिक्षा का अधिकार RTE अधिनियम के तहत सत्र 2026-27 के लिए निजी स्कूलों में निःशुल्क प्रवेश की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन 13 मार्च 2026 से शुरू होंगे, जबकि आवेदन की अंतिम तिथि 28 मार्च 2026 तय की गई है। इच्छुक अभिभावक आधिकारिक पोर्टल www.rteportal.mp.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकेंगे।

    आरटीई के तहत मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों में प्रवेश के लिए सीटों का आवंटन ऑनलाइन लॉटरी प्रणाली के माध्यम से किया जाएगा। यह लॉटरी 2 अप्रैल 2026 को निकाली जाएगी। जिन विद्यार्थियों का चयन होगा, उन्हें संबंधित निजी स्कूलों में निःशुल्क प्रवेश दिया जाएगा।

    शिक्षा विभाग द्वारा जारी समय-सारिणी के अनुसार निःशुल्क प्रवेश के लिए मान्यता प्राप्त अशासकीय स्कूलों और उनमें उपलब्ध सीटों की जानकारी 9 मार्च 2026 से आरटीई पोर्टल पर प्रदर्शित की जाएगी। इसके बाद वंचित समूह और कमजोर वर्ग के अभिभावक 13 मार्च से 28 मार्च के बीच ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। आवेदन करते समय पात्रता से संबंधित किसी एक आवश्यक दस्तावेज को अपलोड करना अनिवार्य होगा।

    ऑनलाइन आवेदन के बाद अभिभावकों को दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया भी पूरी करनी होगी। 14 मार्च से 30 मार्च 2026 के बीच संबंधित संकुल केंद्र वाले स्कूल में अधिकृत सत्यापन अधिकारी के माध्यम से दस्तावेजों का सत्यापन कराया जाएगा। इस दौरान आवेदक अपनी कैटेगरी और निवास प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज मूल प्रमाण पत्र के आधार पर सत्यापित करवा सकेंगे।

    शिक्षा विभाग का कहना है कि लॉटरी से पहले दस्तावेजों का सत्यापन होने से बाद में स्कूल आवंटन के समय किसी प्रकार की त्रुटि या दस्तावेजों की कमी के कारण प्रवेश निरस्त होने की समस्या नहीं आएगी। इसके साथ ही आवेदन के दौरान अभिभावकों को त्रुटि सुधार का भी मौका दिया जाएगा।

    यदि किसी अभिभावक को ऑनलाइन आवेदन करने में समस्या आती है, तो वह अपने क्षेत्र के विकासखंड के बीआरसी कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं। वहीं 2 अप्रैल को लॉटरी के माध्यम से छात्रों को स्कूल आवंटित किए जाएंगे। आवंटन की जानकारी आवेदक को उनके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर एसएमएस के माध्यम से भी भेजी जाएगी। इसके अलावा लॉटरी की सूची आरटीई पोर्टल पर भी उपलब्ध रहेगी।

    आयु सीमा की बात करें तो नर्सरी, केजी-1 और केजी-2 कक्षाओं में प्रवेश के लिए न्यूनतम आयु 3 वर्ष से 4 वर्ष 6 माह तक तय की गई है। वहीं कक्षा 1 में प्रवेश के लिए बच्चे की आयु 6 वर्ष से अधिक और 7 वर्ष 6 माह तक होनी चाहिए। नर्सरी, केजी-1 और केजी-2 के लिए आयु की गणना 31 जुलाई 2026 की स्थिति में की जाएगी, जबकि कक्षा 1 के लिए आयु की गणना 30 सितंबर 2026 के आधार पर होगी। सरकार की इस योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है, ताकि वे भी बड़े निजी स्कूलों में पढ़कर बेहतर भविष्य बना सकें।