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  • मध्य प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा को लेकर हलचल तेज, 32 हजार से अधिक पदोन्नतियां अटकीं, परीक्षा केंद्रों के निर्धारण की तैयारी

    मध्य प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा को लेकर हलचल तेज, 32 हजार से अधिक पदोन्नतियां अटकीं, परीक्षा केंद्रों के निर्धारण की तैयारी


    भोपाल । मध्य प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी टीईटी को लेकर तैयारियां अब अगले चरण में पहुंच गई हैं। आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब माध्यमिक शिक्षा मंडल आवेदकों की जिला और संभागवार सूची तैयार करने की दिशा में काम करेगा। इस सूची के आधार पर यह तय किया जाएगा कि प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में कितने परीक्षा केंद्रों की जरूरत होगी और उन्हें कहां बनाया जाना उचित रहेगा। परीक्षा की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में पदस्थ शिक्षकों का ब्योरा भी अलग-अलग तैयार किया जाएगा।
    टीईटी के लिए कुल 34 हजार 200 शिक्षकों ने आवेदन किया है। जबकि प्रदेश में करीब डेढ़ लाख शिक्षकों के आवेदन करने की संभावना जताई जा रही थी। आवेदन की अंतिम तारीख दो बार बढ़ाए जाने के बावजूद आवेदकों की संख्या में अपेक्षा के मुताबिक बढ़ोतरी नहीं हुई। अब परीक्षा से जुड़ी तैयारियां इसी वास्तविक संख्या को ध्यान में रखकर की जाएंगी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक आवेदन करने वालों में लगभग 20 हजार सरकारी स्कूलों के शिक्षक हैं जबकि करीब 14 हजार शिक्षक निजी स्कूलों से जुड़े हैं।
    स्कूल शिक्षा विभाग ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सितंबर में शिक्षक पात्रता परीक्षा के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू की थी। आवेदन जमा करने की अंतिम तारीख 11 अक्टूबर निर्धारित की गई थी। प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब माध्यमिक शिक्षा मंडल को कर्मचारी चयन मंडल से सभी आवेदकों की विस्तृत सूची मिलने का इंतजार है। सूची उपलब्ध होने के बाद शिक्षकों की पदस्थापना और उनके कार्यक्षेत्र के आधार पर आंकड़े तैयार किए जाएंगे।
    जिला और संभागवार सूची तैयार होने से परीक्षा केंद्रों की योजना बनाने में मदद मिलेगी। अधिकारियों को यह जानकारी मिल सकेगी कि किस जिले में कितने शिक्षकों ने आवेदन किया है और उनमें से कितने शहरी तथा कितने ग्रामीण क्षेत्रों में पदस्थ हैं। इसके आधार पर केंद्रों की संख्या और उनकी जगह तय करने पर विचार किया जाएगा। कोशिश रहेगी कि परीक्षा की व्यवस्था आवेदकों की संख्या और क्षेत्रीय जरूरतों के अनुरूप बनाई जा सके।
    परीक्षा की तारीख और केंद्रों के निर्धारण को लेकर दशहरे के बाद अधिकारियों की बैठक प्रस्तावित है। इसमें माध्यमिक शिक्षा मंडल के सचिव बुद्धेश वैद्य और लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह सहित संबंधित अधिकारी शामिल हो सकते हैं। बैठक में आवेदकों की संख्या के साथ परीक्षा कराने के लिए जरूरी संसाधनों और व्यवस्थाओं पर चर्चा होगी। इसके बाद परीक्षा की तारीख तय करने और आधिकारिक कार्यक्रम जारी करने की दिशा में आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
    इस परीक्षा का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग के 32 हजार से अधिक पदों पर पदोन्नति की प्रक्रिया इसके इंतजार में है। परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले सरकारी शिक्षकों को रिक्त पदों की उपलब्धता और लागू नियमों के अनुसार पदोन्नति का अवसर मिल सकता है। विभागीय स्तर पर जनवरी में परिणाम आने की स्थिति में पदोन्नति प्रक्रिया आगे बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि वास्तविक समयसीमा परीक्षा के आयोजन परिणाम और उपलब्ध रिक्त पदों पर निर्भर करेगी।
    दूसरी ओर शिक्षक संगठनों का विरोध भी जारी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात के बाद अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा ने 22 दिसंबर तक अपना आंदोलन स्थगित किया है लेकिन संगठन अब भी टीईटी नहीं कराने की मांग पर कायम है। संगठन चाहता है कि विधानसभा में संकल्प पारित कर तमिलनाडु सरकार की तर्ज पर केंद्र सरकार को कानून में बदलाव का प्रस्ताव भेजा जाए। फिलहाल राज्य सरकार की ओर से इस मांग को मंजूरी नहीं मिली है। ऐसे में एक तरफ परीक्षा केंद्रों और तारीख को लेकर तैयारियां आगे बढ़ रही हैं तो दूसरी तरफ शिक्षक संगठनों की मांग के कारण यह मुद्दा लगातार चर्चा में बना हुआ है।

  • शिक्षा विभाग के 2000 कर्मचारियों को दो महीने से वेतन नहीं! परिवारों पर बढ़ा आर्थिक संकट अब आंदोलन की तैयारी

    शिक्षा विभाग के 2000 कर्मचारियों को दो महीने से वेतन नहीं! परिवारों पर बढ़ा आर्थिक संकट अब आंदोलन की तैयारी


    भोपाल। मध्यप्रदेश में शिक्षा विभाग से जुड़े करीब 1500 से 2000 कर्मचारियों के सामने वेतन को लेकर बड़ी परेशानी खड़ी हो गई है। सर्व शिक्षा अभियान के तहत प्रदेश के अलग अलग जिलों में प्रतिनियुक्ति पर काम कर रहे जनशिक्षकों बीआरसीसी और बीएसी कर्मचारियों को पिछले दो माह से वेतन नहीं मिला है। लंबे समय से भुगतान अटका होने के कारण कर्मचारियों के सामने घर का रोजमर्रा का खर्च बच्चों की पढ़ाई इलाज और दूसरी जरूरी जरूरतों को पूरा करने की चुनौती बढ़ती जा रही है। खास बात यह है कि इन कर्मचारियों की तरह ही विभागीय जिम्मेदारी संभाल रहे कुछ प्रभारी कर्मचारियों को उनके मूल विद्यालय से नियमित वेतन मिल रहा है। इसी अंतर को लेकर अब शिक्षक संगठन ने राज्य शिक्षा केंद्र का ध्यान आकर्षित किया है।

    शासकीय शिक्षक संगठन मध्यप्रदेश ने राज्य शिक्षा केंद्र के संचालक को पत्र भेजकर लंबित वेतन का तत्काल भुगतान कराने की मांग की है। संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेन्द्र कौशल का कहना है कि जनशिक्षक बीआरसीसी और बीएसी कर्मचारी लगातार अपने विभागीय दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं। इसके बावजूद दो माह से वेतन नहीं मिलना गंभीर विषय है। कर्मचारियों को अपनी जिम्मेदारियां निभाने के साथ परिवार की आर्थिक जरूरतों को भी पूरा करना होता है लेकिन वेतन अटकने से उनकी परेशानी लगातार बढ़ रही है।

    संगठन ने यह भी कहा है कि रक्षाबंधन जन्माष्टमी और 15 अगस्त जैसे महत्वपूर्ण अवसरों पर भी कर्मचारियों को वेतन नहीं मिल सका। ऐसे समय में जब परिवारों पर अतिरिक्त खर्च रहता है तब दो माह की सैलरी अटकने से आर्थिक दबाव और बढ़ गया है। कर्मचारियों के बीच इसे लेकर नाराजगी और असंतोष भी देखा जा रहा है।

    शिक्षक संगठन ने राज्य शिक्षा केंद्र से मांग की है कि प्रदेश के सभी जिलों में जनशिक्षकों बीआरसीसी और बीएसी कर्मचारियों के वेतन भुगतान की स्थिति की तत्काल समीक्षा की जाए। जहां भी भुगतान लंबित है वहां संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी कर जल्द से जल्द वेतन जारी कराया जाए। संगठन का कहना है कि नियमित सरकारी जिम्मेदारी निभाने वाले कर्मचारियों को समय पर वेतन मिलना उनका न्यायसंगत अधिकार है।

    वेतन भुगतान में देरी का असर केवल कर्मचारियों तक सीमित नहीं है बल्कि उनके परिवारों की रोजमर्रा की जरूरतों पर भी पड़ रहा है। बच्चों की स्कूल फीस पढ़ाई का खर्च दवाइयां घर का राशन और अन्य जरूरी भुगतान समय पर करना मुश्किल हो रहा है। संगठन ने विभाग से ऐसी व्यवस्था बनाने की मांग की है जिससे भविष्य में प्रतिनियुक्ति पर काम करने वाले कर्मचारियों का वेतन तकनीकी या प्रशासनिक कारणों से लंबे समय तक न अटके।

    शासकीय शिक्षक संगठन मध्यप्रदेश ने साफ किया है कि यदि लंबित दो माह का वेतन जल्द जारी नहीं किया गया तो इस मुद्दे को उच्च स्तर पर उठाया जाएगा। संगठन कर्मचारियों के हित में आगे आवश्यक कदम उठाने की बात कह रहा है। अब कर्मचारियों की नजर राज्य शिक्षा केंद्र के अगले कदम पर है और उन्हें उम्मीद है कि लंबे समय से लंबित वेतन का भुगतान जल्द किया जाएगा।

  • वर्ग-1 शिक्षक भर्ती में दूसरी काउंसलिंग की मांग तेज, 24 से 26 अगस्त तक अंबेडकर पार्क में धरना देंगे अभ्यर्थी

    वर्ग-1 शिक्षक भर्ती में दूसरी काउंसलिंग की मांग तेज, 24 से 26 अगस्त तक अंबेडकर पार्क में धरना देंगे अभ्यर्थी


    भोपाल। भोपाल में उच्च माध्यमिक शिक्षक भर्ती 2023 के अभ्यर्थियों ने दूसरी काउंसलिंग और पदवृद्धि की मांग को लेकर आंदोलन का ऐलान किया है। वेटिंग शिक्षक संघ वर्ग-1 भर्ती 2023 के बैनर तले अभ्यर्थी 24 से 26 अगस्त तक टीटी नगर स्थित अंबेडकर पार्क में तीन दिवसीय धरना देंगे। अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया शुरू हुए करीब तीन साल बीत चुके हैं, लेकिन अब तक दूसरी काउंसलिंग शुरू नहीं हो सकी है। लंबे समय से नियुक्ति का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों में इसे लेकर नाराजगी बढ़ती जा रही है।

    अभ्यर्थियों के मुताबिक उन्होंने उच्च माध्यमिक शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के तहत परीक्षा समेत चयन से जुड़े सभी चरण पूरे किए हैं। परिणाम आने और चयन प्रक्रिया आगे बढ़ने के बाद उन्हें नियुक्ति की उम्मीद थी, लेकिन दूसरी काउंसलिंग नहीं होने के कारण बड़ी संख्या में पात्र अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटका हुआ है। संघ का कहना है कि इस मुद्दे को लेकर शासन और प्रशासन को कई बार ज्ञापन दिए गए और अलग-अलग समय पर प्रदर्शन भी किए गए। हर बार आश्वासन मिलने के बावजूद अब तक ऐसा कोई ठोस फैसला नहीं हुआ है, जिससे दूसरी काउंसलिंग का रास्ता साफ हो सके।

    अभ्यर्थियों का सबसे बड़ा सवाल अमोल सोले प्रकरण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले से जुड़ा है। संघ का दावा है कि दूसरी काउंसलिंग को SLP डायरी नंबर 14600/2025 का हवाला देकर रोका जा रहा है। अभ्यर्थियों का कहना है कि यह मामला करीब 11 अभ्यर्थियों से संबंधित है, ऐसे में इसके कारण हजारों पात्र और प्रतीक्षारत अभ्यर्थियों का भविष्य अनिश्चितकाल तक रोकना उचित नहीं है। उनका सवाल है कि यदि मामला सीमित संख्या में अभ्यर्थियों से जुड़ा है तो बाकी पात्र अभ्यर्थियों के लिए भर्ती प्रक्रिया आगे क्यों नहीं बढ़ाई जा रही है।

    संघ ने यह भी सवाल उठाया है कि अगर यह मामला विभाग के लिए इतना महत्वपूर्ण है तो करीब डेढ़ साल के दौरान मुख्य पीठ के समक्ष इसकी प्रभावी सुनवाई सुनिश्चित क्यों नहीं हो पाई। अभ्यर्थियों का कहना है कि कई बार सुनवाई की तारीख आने से पहले ही मामला आगे बढ़ जाता है और इस वजह से दूसरी काउंसलिंग का इंतजार और लंबा होता जा रहा है। उनका कहना है कि लगातार देरी के कारण हजारों युवाओं के रोजगार और भविष्य पर असर पड़ रहा है।

    वेटिंग शिक्षक संघ ने प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की जरूरत का मुद्दा भी उठाया है। संघ के मुताबिक सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी की स्थिति लगातार बनी हुई है। दूसरी ओर पात्र और चयन प्रक्रिया से गुजर चुके अभ्यर्थी उपलब्ध हैं। ऐसे में वर्षों तक भर्ती प्रक्रिया को लंबित रखने से केवल अभ्यर्थियों को ही नुकसान नहीं हो रहा, बल्कि सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है। संघ का कहना है कि रिक्त पदों पर योग्य अभ्यर्थियों को मौका देकर शिक्षकों की जरूरत को पूरा किया जा सकता है।

    अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री मोहन यादव, स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह और डीपीआई आयुक्त अभिषेक सिंह से मामले में तत्काल निर्णय लेने की मांग की है। उनका कहना है कि जब सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की जरूरत है, योग्य अभ्यर्थी उपलब्ध हैं और दूसरी काउंसलिंग की मांग लंबे समय से की जा रही है, तो फिर फैसला लेने में इतनी देरी क्यों की जा रही है।

    वेटिंग शिक्षक संघ के अनुसार 24, 25 और 26 अगस्त को अंबेडकर पार्क, टीटी नगर में होने वाला धरना शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से किया जाएगा। संघ ने प्रशासन से तीन दिवसीय प्रदर्शन की अनुमति भी मांगी है। संगठन का कहना है कि आंदोलन के दौरान कानून-व्यवस्था और प्रशासन की ओर से निर्धारित सभी नियमों का पालन किया जाएगा। अभ्यर्थियों की मांग है कि सरकार पदवृद्धि के साथ जल्द से जल्द दूसरी काउंसलिंग शुरू करे, ताकि वर्षों से नियुक्ति की राह देख रहे पात्र शिक्षकों को रोजगार का अवसर मिल सके।

  • 4 दिन से पानी तक नहीं पिया, तबीयत बिगड़ने पर भी पीछे नहीं हटे नरेंद्र; भोपाल में 25 हजार पद बढ़ाने की मांग पर धरना

    4 दिन से पानी तक नहीं पिया, तबीयत बिगड़ने पर भी पीछे नहीं हटे नरेंद्र; भोपाल में 25 हजार पद बढ़ाने की मांग पर धरना


    नई दिल्ली। भोपाल में वर्ग-2 माध्यमिक और वर्ग-3 प्राथमिक शिक्षक भर्ती 2025 में पदवृद्धि की मांग को लेकर चल रहा अभ्यर्थियों का आंदोलन अब गंभीर स्थिति में पहुंच गया है। नीलम पार्क में 21 अगस्त से जारी अनिश्चितकालीन धरने के बीच ब्यावरा निवासी अभ्यर्थी नरेंद्र राजपूत पिछले चार दिनों से निर्जल अनशन पर बैठे हैं। सोमवार रात करीब 3 बजे अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। उन्हें चक्कर आने और कमजोरी की शिकायत हुई, जिसके बाद धरना स्थल पर मौजूद अभ्यर्थियों ने प्रशासन को इसकी सूचना दी। आंदोलनकारियों के मुताबिक पुलिस और प्रशासन की ओर से उन्हें अस्पताल ले जाने की कोशिश की गई, लेकिन नरेंद्र ने अस्पताल जाने से इनकार कर दिया।

    नरेंद्र राजपूत का कहना है कि जब तक सरकार शिक्षक भर्ती में पदवृद्धि को लेकर कोई ठोस आदेश जारी नहीं करती, तब तक वह धरना स्थल से नहीं हटेंगे। उन्होंने मांग की है कि यदि प्रशासन उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंतित है तो धरना स्थल पर ही डॉक्टरों की टीम भेजकर स्वास्थ्य जांच कराई जाए। आंदोलनकारियों का कहना है कि लगातार चार दिन तक भोजन और पानी नहीं लेने के कारण नरेंद्र की हालत कमजोर हो रही है और ऐसे में प्रशासन को तत्काल स्वास्थ्य व्यवस्था उपलब्ध करानी चाहिए।

    शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थी लंबे समय से वर्ग-2 और वर्ग-3 में पद बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि शिक्षा विभाग में बड़ी संख्या में पद रिक्त हैं, लेकिन भर्ती प्रक्रिया में पर्याप्त पद शामिल नहीं किए गए। इसके चलते पात्रता और चयन परीक्षा में अच्छे अंक हासिल करने के बावजूद कई अभ्यर्थी नियुक्ति से वंचित रह गए हैं। आंदोलनकारी अब सरकार से पदों की संख्या बढ़ाने के साथ बढ़े हुए पदों पर दूसरी काउंसलिंग कराने की मांग कर रहे हैं।

    अभ्यर्थियों की मांग है कि वर्ग-2 में प्रत्येक विषय के 3 हजार अतिरिक्त पद बढ़ाए जाएं, जबकि वर्ग-3 में कुल 25 हजार पद किए जाएं। उनका कहना है कि रिक्त पदों को भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने से बड़ी संख्या में योग्य अभ्यर्थियों को नियुक्ति का अवसर मिल सकता है। इसी मांग को लेकर प्रदेशभर के अभ्यर्थी भोपाल में जुटे हैं और अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं।

    इस आंदोलन में महिला अभ्यर्थियों की भी बड़ी भागीदारी है। कई महिलाएं अपने छोटे बच्चों के साथ नीलम पार्क में धरने पर बैठी हैं। इंदौर की दीप्ति सिंह ठाकुर अपनी 5 और 8 साल की बेटियों के साथ आंदोलन में शामिल हैं। वहीं सरोज कुशवाहा अपने छोटे बेटे माधव के साथ धरना स्थल पर मौजूद हैं। महिला अभ्यर्थियों का कहना है कि बच्चों के साथ पार्क में रहना बेहद मुश्किल हो रहा है। मच्छरों की समस्या, पानी और वॉशरूम की परेशानी के अलावा छोटे तालाब के पास होने के कारण बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी रहती है। इसके बावजूद वे अपनी मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कह रही हैं।

    पदवृद्धि की मांग को लेकर प्रदेशभर से अभ्यर्थी 21 अगस्त को भोपाल पहुंचे थे। डीपीआई के सामने प्रदर्शन और ज्ञापन देने के बाद अभ्यर्थियों ने रैली निकाली और नीलम पार्क पहुंचकर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया। आंदोलनकारियों का कहना है कि नवंबर 2025 से जुलाई 2026 के बीच भी कई चरणों में भोपाल में प्रदर्शन और धरने किए जा चुके हैं, लेकिन उनकी मांग पर अब तक ठोस निर्णय नहीं हुआ।

    अब नरेंद्र राजपूत की तबीयत बिगड़ने के बाद आंदोलन को लेकर प्रशासन के सामने चुनौती बढ़ गई है। अभ्यर्थियों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप कर पदवृद्धि पर निर्णय लेने की मांग की है। उनका कहना है कि वे किसी आश्वासन के बजाय लिखित आदेश चाहते हैं, ताकि बढ़े हुए पदों पर दूसरी काउंसलिंग शुरू हो सके और शिक्षक भर्ती में चयन से वंचित योग्य अभ्यर्थियों को भी नियुक्ति का अवसर मिल सके।

  • मध्यप्रदेश में RTE प्रवेश 2026–27 की प्रक्रिया घोषित, ऑनलाइन आवेदन और लॉटरी से मिलेगा निजी स्कूलों में निशुल्क दाखिला

    मध्यप्रदेश में RTE प्रवेश 2026–27 की प्रक्रिया घोषित, ऑनलाइन आवेदन और लॉटरी से मिलेगा निजी स्कूलों में निशुल्क दाखिला

    मध्यप्रदेश में शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत सत्र 2026–27 के लिए निजी स्कूलों में निशुल्क प्रवेश की प्रक्रिया 13 मार्च 2026 से शुरू होने जा रही है। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और वंचित समूह के बच्चों को बेहतर शिक्षा का अवसर देने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने पूरी समय सारिणी जारी कर दी है। ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 28 मार्च 2026 निर्धारित की गई है और इच्छुक अभिभावक आरटीई पोर्टल www.rteportal.mp.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकेंगे।

    राज्य शिक्षा केन्द्र के संचालक हरजिंदर सिंह के अनुसार इस वर्ष भी चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी तरीके से ऑनलाइन लॉटरी के माध्यम से की जाएगी। 2 अप्रैल 2026 को लॉटरी निकाली जाएगी और उसी के आधार पर छात्रों को निजी विद्यालयों में सीट आवंटित की जाएगी। लॉटरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद आवेदकों को उनके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर एसएमएस के जरिए सूचना भेजी जाएगी। साथ ही चयन सूची पोर्टल पर भी उपलब्ध रहेगी।

    समय सारिणी के अनुसार 9 मार्च 2026 से मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों और उनमें उपलब्ध सीटों की जानकारी पोर्टल पर प्रदर्शित कर दी जाएगी। इससे अभिभावकों को यह स्पष्ट हो सकेगा कि किस स्कूल में कितनी सीटें उपलब्ध हैं। आवेदन करते समय पात्रता से संबंधित कोई एक आवश्यक दस्तावेज अपलोड करना अनिवार्य होगा।

    आवेदन प्रक्रिया के दौरान 13 से 28 मार्च के बीच त्रुटि सुधार का अवसर भी दिया जाएगा ताकि अभिभावक किसी गलती को समय रहते ठीक कर सकें। इसके अलावा 14 मार्च से 30 मार्च 2026 के बीच दस्तावेजों का सत्यापन संबंधित संकुल केन्द्र वाले स्कूल में अधिकृत अधिकारी से कराना होगा। आवेदक जिस श्रेणी या निवास क्षेत्र के आधार पर प्रवेश चाहते हैं उससे संबंधित मूल प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर सत्यापन कराना अनिवार्य रहेगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि लॉटरी से पहले दस्तावेज सत्यापन हो जाने से बाद में प्रवेश निरस्त होने की संभावना काफी कम हो जाएगी।

    यदि किसी अभिभावक को ऑनलाइन आवेदन में कोई कठिनाई आती है तो वे अपने विकासखंड के बीआरसी कार्यालय सर्व शिक्षा अभियान के जिला परियोजना कार्यालय विकासखंड स्रोत केन्द्र या जनशिक्षा केन्द्र कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे आवेदन प्रक्रिया में अभिभावकों की हर संभव सहायता सुनिश्चित करें।

    प्रवेश के लिए आयु सीमा भी तय कर दी गई है। नर्सरी केजी 1 और केजी 2 के लिए बच्चे की आयु 3 वर्ष से 4 वर्ष 6 माह के बीच होनी चाहिए। कक्षा 1 में प्रवेश के लिए आयु 6 वर्ष से 7 वर्ष 6 माह तक निर्धारित की गई है। नर्सरी और केजी कक्षाओं के लिए आयु की गणना 31 जुलाई 2026 की स्थिति में तथा कक्षा 1 के लिए 30 सितंबर 2026 की स्थिति में की जाएगी।

    आरटीई के तहत यह प्रक्रिया उन परिवारों के लिए सुनहरा अवसर है जो अपने बच्चों को निजी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दिलाना चाहते हैं लेकिन आर्थिक कारणों से ऐसा नहीं कर पाते। समय सीमा का ध्यान रखते हुए अभिभावकों को तय तिथियों के भीतर आवेदन और दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी ताकि बच्चों का भविष्य सुरक्षित और उज्जवल बन सके।