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  • लाल परेड ग्राउंड पर आज सजेगा मध्यप्रदेश का गौरव, मोनाली ठाकुर की प्रस्तुति से लेकर देशज व्यंजन मेले तक होंगे खास आयोजन

    लाल परेड ग्राउंड पर आज सजेगा मध्यप्रदेश का गौरव, मोनाली ठाकुर की प्रस्तुति से लेकर देशज व्यंजन मेले तक होंगे खास आयोजन


    भोपाल । मध्यप्रदेश के 71वें स्थापना दिवस का मुख्य समारोह राजधानी भोपाल में रविवार को धूमधाम से आयोजित किया जाएगा। तीन दिन तक चलने वाले राज्यस्तरीय आयोजन का सबसे बड़ा कार्यक्रम शाम 6 बजकर 30 मिनट पर लाल परेड ग्राउंड में होगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव समारोह का शुभारंभ करेंगे। इस बार स्थापना दिवस की थीम विरासत से विकास के पथ की ओर अग्रसर प्रदेश रखी गई है। इसके माध्यम से मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक पहचान जनजातीय परंपराओं कृषि नवाचारों महिला उद्यमिता और विकास कार्यों की झलक दिखाई जाएगी। समारोह में आम नागरिक बिना किसी प्रवेश पत्र या पास के शामिल हो सकेंगे। वहीं स्कूल कॉलेज और विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों के लिए विशेष स्टूडेंट ब्लॉक बनाया गया है। विद्यार्थियों को प्रवेश के लिए अपने संस्थान का पहचान पत्र दिखाना होगा।

    स्थापना दिवस के अवसर पर सुबह 11 बजे मुख्यमंत्री लाल परेड ग्राउंड में आधुनिक कृषि प्रदर्शनी विकास दीर्घा महिला उद्यमिता मंडप और देशज व्यंजन मेले का उद्घाटन करेंगे। इन आयोजनों में प्रदेश की उपलब्धियों और स्थानीय प्रतिभाओं को मंच दिया जाएगा। आधुनिक कृषि प्रदर्शनी में उन्नत बीज जैविक इनपुट्स स्मार्ट सिंचाई और एग्री स्टार्टअप्स से जुड़े नए प्रयोग देखने को मिलेंगे। महिला उद्यमिता मंडप और किसान बाजार में स्व-सहायता समूहों के उत्पाद हस्तशिल्प और स्थानीय वस्तुओं की प्रदर्शनी तथा बिक्री होगी।

    शाम के मुख्य समारोह का सबसे बड़ा आकर्षण राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार विजेता गायिका मोनाली ठाकुर की संगीत प्रस्तुति होगी। मुंबई से आए कलाकारों के साथ वे सुगम संगीत की प्रस्तुति देंगी। मोनाली ठाकुर बॉलीवुड के कई लोकप्रिय गीतों के लिए जानी जाती हैं। फिल्म लुटेरा का सवार लूं और दम लगा के हईशा का मोह मोह के धागे उनके चर्चित गीतों में शामिल हैं। उनकी आवाज से स्थापना दिवस की शाम संगीतमय होगी। कार्यक्रम में 71 बच्चे सामूहिक रूप से राष्ट्रगीत वंदे मातरम् का गायन करेंगे। इसके बाद मध्यप्रदेश पुलिस बैंड राष्ट्रगान की प्रस्तुति देगा। समारोह का समापन आतिशबाजी के साथ होगा।

    इस अवसर पर शिक्षा और किसान कल्याण से जुड़ी योजनाओं के लाभार्थियों को भी सम्मानित किया जाएगा। मुख्यमंत्री भगवान श्रीकृष्ण मेधावी छात्रवृत्ति योजना के तहत प्रदेश के 102 मेधावी विद्यार्थियों को एक-एक लाख रुपए की छात्रवृत्ति और प्रशस्ति-पत्र प्रदान करेंगे। जिलों से चयनित विद्यार्थियों में खंडवा के छह विद्यार्थी शामिल हैं। वहीं अशोकनगर बड़वानी नर्मदापुरम सिवनी सिंगरौली और उमरिया से चार-चार विद्यार्थियों का चयन किया गया है।

    किसानों के लिए भी इस बार स्थापना दिवस पर खास सौगात रखी गई है। किसान कल्याण स्वाभिमान पर्व क्विज के 165 विजेताओं को पुरस्कार दिए जाएंगे। इस ऑनलाइन प्रतियोगिता में प्रदेश के करीब 40 हजार किसानों ने भाग लिया था। चयनित किसानों को 55 ट्रैक्टर 55 बुलेट मोटरसाइकिल और 55 ई-स्कूटर दिए जाएंगे। प्रत्येक जिले से तीन विजेताओं का चयन किया गया है। भोपाल के विजेताओं को मुख्यमंत्री स्वयं पुरस्कार देंगे जबकि अन्य जिलों में प्रभारी मंत्री सम्मानित करेंगे।

    सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को प्रदर्शित करने के लिए भी विशेष तैयारियां की गई हैं। लाल परेड ग्राउंड में राजा भोज के भोपाल विषय पर 160 वॉटर कलर चित्रों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी। महाराजा विक्रमादित्य शोध पीठ की ओर से तैयार यह प्रदर्शनी शहर के ऐतिहासिक गौरव को सामने लाएगी। वहीं देशज व्यंजन मेले में मालवा निमाड़ बुंदेलखंड बघेलखंड और महाकौशल के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद मिलेगा। यह मेला प्रतिदिन दोपहर 12 बजे से रात 8 बजे तक चलेगा।

    मुख्य समारोह से पहले स्थापना दिवस के पूर्वरंग कार्यक्रमों के तहत भोपाल में सांस्कृतिक गौरव यात्राएं भी निकाली गईं। इनमें 400 से अधिक लोक और जनजातीय कलाकारों ने हिस्सा लिया। गोंड बैगा भील कोरकू सहरिया और भारिया जनजातियों के कलाकारों ने अपनी पारंपरिक कला का प्रदर्शन किया। करमा सैला भगोरिया मटकी घूमर भांगड़ा पंथी और लेझिम जैसे लोकनृत्यों ने शहर की सड़कों को सांस्कृतिक रंगों से भर दिया। इस तरह मध्यप्रदेश का 71वां स्थापना दिवस संस्कृति विकास किसान कल्याण और प्रतिभाओं के सम्मान का बड़ा उत्सव बनने जा रहा है।

  • मोहन कैबिनेट के एजेंडे में 21 प्रस्ताव, गेहूं निपटान से लेकर सिंचाई परियोजनाओं और संविदा नियुक्तियों पर चर्चा

    मोहन कैबिनेट के एजेंडे में 21 प्रस्ताव, गेहूं निपटान से लेकर सिंचाई परियोजनाओं और संविदा नियुक्तियों पर चर्चा


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में होने वाली कैबिनेट बैठक में चमकविहीन गेहूं के पुराने मामले सहित कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा की जाएगी। बैठक के एजेंडे में कुल 21 विषय शामिल हैं। इनमें खाद्य विभाग से जुड़े गेहूं के निराकरण के प्रस्ताव के साथ सिंचाई परियोजनाओं की निरंतरता नए जिलों में शिक्षा अधिकारियों के कार्यालयों के गठन पेंशन और चिकित्सा देयकों से जुड़े मामले भी रखे गए हैं। इसके अलावा विभिन्न सरकारी योजनाओं को जारी रखने और सेवानिवृत्त अधिकारियों को संविदा नियुक्ति देने के प्रस्तावों पर भी विचार किया जाएगा।

    छह साल पुराने गेहूं के मामले पर नजर

    कैबिनेट बैठक के प्रमुख विषयों में वर्ष 2020-21 के दौरान खरीदे गए चमकविहीन गेहूं के निराकरण का मामला शामिल है। खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की ओर से 7 लाख मीट्रिक टन चमकविहीन गेहूं के टेंडर के जरिए निराकरण की प्रक्रिया पूरी करने और 5.80 लाख मीट्रिक टन गेहूं के निराकरण को कार्योत्तर मंजूरी देने का प्रस्ताव रखा गया है। इस प्रस्ताव पर सरकार विचार करेगी। कार्योत्तर मंजूरी का अर्थ किसी कार्य या प्रक्रिया के पूरा होने के बाद उसके लिए औपचारिक स्वीकृति लेने से है। हालांकि बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलेगी या नहीं इसका फैसला कैबिनेट के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगा।

    सिंचाई परियोजनाओं को जारी रखने पर चर्चा

    जल संसाधन विभाग की तीन प्रमुख सिंचाई परियोजनाओं से जुड़े प्रस्ताव भी बैठक में शामिल हैं। इनमें छिंदवाड़ा सिंचाई कॉम्प्लेक्स चेटरखेड़ा वृहद सिंचाई परियोजना और पचमनगर सिंचाई कॉम्प्लेक्स शामिल हैं। इन परियोजनाओं की निरंतरता को लेकर सरकार विचार करेगी। इसके साथ पांच वर्ष की अवधि वाली एक वृहद परियोजना को आगे जारी रखने का प्रस्ताव भी एजेंडे में रखा गया है। इन प्रस्तावों का संबंध सिंचाई व्यवस्था और परियोजनाओं के काम को निरंतर आगे बढ़ाने से है।

    वन विभाग की कैम्पा निधि के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 की वार्षिक कार्ययोजना पर भी चर्चा होगी। वहीं स्कूल शिक्षा विभाग ने नवगठित जिलों निवाड़ी मऊगंज पांढुर्णा और मैहर में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय स्थापित करने के लिए नए पदों की स्वीकृति का प्रस्ताव रखा है। इससे इन जिलों में शिक्षा विभाग की प्रशासनिक व्यवस्था को व्यवस्थित करने की दिशा में कदम उठाया जा सकता है।

    पेंशन और चिकित्सा बिलों पर भी विचार

    कैबिनेट के एजेंडे में सेवानिवृत्त कर्मचारियों और अधिकारियों की पेंशन से जुड़े मामले भी शामिल हैं। किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग के प्रस्ताव में सेवानिवृत्त सहायक ग्रेड-2 मार्तंड सिंह परिहार की देय पेंशन वापस लेने का विषय रखा गया है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के तहत पूर्व सहायक यंत्रियों की पेंशन से जुड़े मामलों पर भी विचार होगा। इनमें बड़वानी जिले की जनपद पंचायत निवाली का मामला शामिल है।

    गृह विभाग के अंतर्गत पुलिस अधिकारी नीलकंठ बढ़ार की वेतनवृद्धि से जुड़े पुराने प्रकरण पर चर्चा की जाएगी। इसके अलावा छतरपुर में पदस्थ वैज्ञानिक अधिकारी रितेश चंद्र शुक्ल और दिवंगत आरक्षक 515 अभिषेक सिंह भदौरिया के निजी अस्पतालों में हुए उपचार के चिकित्सा देयकों की स्वीकृति के प्रस्ताव भी रखे गए हैं। जबलपुर के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के चिकित्सा देयकों के भुगतान का मामला भी बैठक में शामिल है।

    योजनाओं की निरंतरता और संविदा नियुक्तियां

    सामान्य प्रशासन विभाग के एजेंडे में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ यानी ईओडब्ल्यू के वेतन भत्ते प्रशासनिक भवन निर्माण और विभागीय परिसंपत्तियों के रखरखाव से जुड़ी योजना जारी रखने का प्रस्ताव है। विधि एवं विधायी कार्य विभाग की योजनाओं को 16वें केंद्रीय वित्त आयोग की अवधि यानी 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक जारी रखने पर भी विचार किया जाएगा। लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग तथा सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन विभाग की सात योजनाओं के स्वीकृत मदों को इसी अवधि तक जारी रखने का प्रस्ताव भी शामिल है।

    आनंद विभाग में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी ओमप्रकाश श्रीवास्तव को राज्य आनंद संस्थान के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के पद पर संविदा नियुक्ति देने का प्रस्ताव रखा गया है। नर्मदा घाटी विकास विभाग में शिकायत निवारण प्राधिकरण के सदस्य न्यायिक पद पर नियुक्ति और संस्कृति विभाग में सेवानिवृत्त अनुभाग अधिकारी सुरेश कुमार पाठक को संविदा नियुक्ति देने के विषय पर भी चर्चा होगी। अब इन सभी प्रस्तावों पर कैबिनेट के फैसले का इंतजार रहेगा।

  • अमित शाह के दौरे से पहले भोपाल में हलचल तेज, CM ने ली तैयारियों की जानकारी, पदोन्नति पर भी चर्चा

    अमित शाह के दौरे से पहले भोपाल में हलचल तेज, CM ने ली तैयारियों की जानकारी, पदोन्नति पर भी चर्चा


    भोपाल ।  केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के मध्यप्रदेश दौरे को लेकर भोपाल में तैयारियां तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को मंत्रालय में अधिकारियों के साथ बैठक कर अमित शाह के प्रस्तावित कार्यक्रमों की तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में दौरे से जुड़े इंतजामों के साथ ही सरकार के विभिन्न विभागों से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने सामान्य प्रशासन विभाग समेत अन्य विभागों के अधिकारियों से पदोन्नति और अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े मामलों में संभावित बदलावों को लेकर जानकारी ली।

    मुख्यमंत्री ने आने वाले समय में फिर से शुरू की जाने वाली पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर अधिकारियों के साथ विस्तार से चर्चा की। सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों ने पदोन्नति से संबंधित प्रस्तावित सुझावों और प्रक्रिया में किए जाने वाले संभावित बदलावों की जानकारी मुख्यमंत्री को दी। बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि विभागीय स्तर पर लंबित मामलों को किस तरह आगे बढ़ाया जाए और संबंधित प्रक्रिया को व्यवस्थित तरीके से पूरा किया जाए।

    बैठक में उपमुख्यमंत्री एवं लोक स्वास्थ्य तथा चिकित्सा शिक्षा मंत्री राजेंद्र शुक्ल और स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह समेत अन्य मंत्री भी मौजूद रहे। मंत्रियों ने अपने अपने विभागों से संबंधित विषयों की जानकारी मुख्यमंत्री के सामने रखी। विभागीय योजनाओं की प्रगति और आने वाले कार्यक्रमों को लेकर भी चर्चा की गई। पशुपालन विभाग से जुड़े मामलों को भी बैठक में विशेष रूप से शामिल किया गया क्योंकि अमित शाह के भोपाल प्रवास के दौरान इस विभाग से संबंधित योजनाओं का शुभारंभ प्रस्तावित है।

    अमित शाह मध्यप्रदेश के दो दिवसीय दौरे पर आने वाले हैं। उनके कार्यक्रम में भोपाल सहकारी दुग्ध संघ परिसर में तैयार किए गए फर्मेंटेड प्रोडक्ट डेयरी प्लांट का शुभारंभ प्रमुख कार्यक्रमों में शामिल है। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार 3 अक्टूबर को इस संयंत्र का उद्घाटन किया जाएगा। इस प्लांट को मध्यप्रदेश में दुग्ध प्रसंस्करण और मूल्यवर्धित दुग्ध उत्पादों के उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण परियोजना के तौर पर तैयार किया गया है।

    फर्मेंटेड प्रोडक्ट डेयरी प्लांट की कुल परियोजना लागत 16.80 करोड़ रुपए बताई गई है। इसमें भारत सरकार की ओर से 6 करोड़ रुपए का अनुदान दिया गया है जबकि भोपाल सहकारी दुग्ध संघ ने 10.80 करोड़ रुपए का अंशदान किया है। प्लांट की दूध प्रसंस्करण क्षमता करीब 40 हजार लीटर प्रतिदिन है। इसके जरिए दूध से जुड़े मूल्यवर्धित उत्पादों के उत्पादन और प्रसंस्करण को बढ़ाने की योजना है।

    अमित शाह के दौरे को लेकर सरकार और प्रशासन की तैयारियां लगातार आगे बढ़ रही हैं। मुख्यमंत्री की बैठक में कार्यक्रमों से जुड़े विभागों को लेकर अलग अलग स्तर पर चर्चा हुई। साथ ही शासन के स्तर पर चल रही पदोन्नति और अनुकंपा नियुक्ति से जुड़ी प्रक्रिया भी बैठक के प्रमुख विषयों में रही। ऐसे में एक ही बैठक में प्रशासनिक मामलों और केंद्रीय मंत्री के प्रस्तावित कार्यक्रमों की तैयारियों पर चर्चा हुई।

    अब अमित शाह के दौरे से जुड़े कार्यक्रमों को अंतिम रूप देने के साथ ही संबंधित विभागों की जिम्मेदारियां तय करने पर फोकस है। वहीं पदोन्नति प्रक्रिया में प्रस्तावित बदलावों को लेकर सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से दिए गए सुझावों पर आगे की कार्रवाई को लेकर भी नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में इन मामलों से जुड़े फैसलों और कार्यक्रमों की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

  • अचानक खरीदी केंद्र पहुंचे सीएम मोहन यादव ,व्यवस्थाओं की हकीकत जानी किसानों संग चाय पर चर्चा

    अचानक खरीदी केंद्र पहुंचे सीएम मोहन यादव ,व्यवस्थाओं की हकीकत जानी किसानों संग चाय पर चर्चा

    भोपाल/खरगोन । मध्यप्रदेश में किसान कल्याण को लेकर सरकार की सक्रियता एक बार फिर देखने को मिली जब Mohan Yadav ने अपने ही बयान को अगले ही दिन जमीन पर उतार दिया। 29 अप्रैल को उन्होंने कहा था कि वे किसी भी गेहूं उपार्जन केंद्र का आकस्मिक निरीक्षण कर सकते हैं और 30 अप्रैल की सुबह उन्होंने इसे सच कर दिखाया। मुख्यमंत्री अचानक Khargone जिले के कतरगांव स्थित खरीदी केंद्र पहुंच गए जहां उन्होंने व्यवस्थाओं का बारीकी से जायजा लिया और किसानों से सीधे संवाद किया

    निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने न केवल उपार्जन की प्रक्रिया को देखा बल्कि किसानों के साथ बैठकर चाय भी पी और उनकी समस्याएं सुनीं। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो और सभी व्यवस्थाएं सुचारू रूप से संचालित हों। यह दौरा केवल औपचारिकता नहीं था बल्कि जमीनी हकीकत को समझने और सुधार की दिशा तय करने का प्रयास था

    दरअसल मुख्यमंत्री इससे एक दिन पहले महेश्वर में रात्रि विश्राम पर थे और वहीं से उन्होंने संकेत दिए थे कि वे कभी भी निरीक्षण कर सकते हैं। उनके इस कदम ने यह साफ कर दिया कि सरकार केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं है बल्कि क्रियान्वयन पर भी उतना ही जोर दे रही है। प्रदेश सरकार ने उपार्जन केंद्रों पर किसानों की सुविधा के लिए छाया बैठने की व्यवस्था और अन्य जरूरी संसाधन उपलब्ध कराए हैं ताकि किसानों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े

    सरकार ने गेहूं खरीदी प्रक्रिया को और अधिक सुगम बनाने के लिए कई अहम बदलाव भी किए हैं। तौल में देरी से बचने के लिए उपार्जन केंद्रों पर तौल कांटों की संख्या बढ़ाकर छह कर दी गई है और जरूरत के अनुसार इसे और बढ़ाया जा रहा है। इसके अलावा चमक विहीन गेहूं की स्वीकार्यता सीमा को बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया गया है जिससे अधिक किसानों को राहत मिल सके। सूकड़े दानों की सीमा 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत और क्षतिग्रस्त दानों की सीमा को भी बढ़ाकर 6 प्रतिशत किया गया है

    खरीदी केंद्रों पर बारदाना तौल कांटे हम्माल तुलावटी सिलाई मशीन कंप्यूटर और इंटरनेट कनेक्शन जैसी सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके साथ ही गुणवत्ता परीक्षण उपकरण और साफ सफाई के लिए पंखा और छन्ना जैसी व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित की गई हैं ताकि किसानों की उपज का सही मूल्य मिल सके

    यदि आंकड़ों पर नजर डालें तो इस वर्ष गेहूं उपार्जन को लेकर किसानों की भागीदारी भी बढ़ी है। अब तक प्रदेश में 9.83 लाख किसानों ने 60.84 लाख मीट्रिक टन गेहूं बेचने के लिए स्लॉट बुक किए हैं जबकि 5 लाख से अधिक किसानों से 22.70 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी की जा चुकी है। पिछले वर्ष जहां 77 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया था वहीं इस बार सरकार ने 100 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य रखा है

    मुख्यमंत्री का यह औचक दौरा यह संदेश देता है कि सरकार किसानों के हितों को लेकर गंभीर है और हर स्तर पर निगरानी रख रही है ताकि योजनाओं का लाभ सही समय पर और सही तरीके से किसानों तक पहुंच सके

  • MP में तबादलों का रास्ता साफ मई जून में खुलेगा ट्रांसफर विंडो नई नीति तैयार

    MP में तबादलों का रास्ता साफ मई जून में खुलेगा ट्रांसफर विंडो नई नीति तैयार

    भोपाल । मध्यप्रदेश में सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादलों पर लगे प्रतिबंध के जल्द हटने की संभावना ने प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज कर दी है लंबे समय से ट्रांसफर का इंतजार कर रहे कर्मचारियों के लिए यह खबर राहत भरी मानी जा रही है जानकारी के अनुसार राज्य सरकार मई और जून के बीच एक महीने के लिए तबादलों पर लगा बैन हटाने की तैयारी कर रही है इसके लिए सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा नई तबादला नीति को अंतिम रूप देने का काम तेजी से किया जा रहा है

    सूत्रों के मुताबिक प्रस्तावित तबादला नीति को लेकर जल्द ही कैबिनेट बैठक में प्रस्तुतीकरण किया जा सकता है इस नई नीति के तहत तबादलों की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने की कोशिश की जा रही है खास बात यह है कि इस बार ट्रांसफर आदेश पूरी तरह ऑनलाइन जारी किए जाएंगे जिससे प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और अनावश्यक दबाव या हस्तक्षेप को कम किया जा सकेगा

    नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक संवर्ग में अधिकतम 20 प्रतिशत तक ही तबादले किए जा सकेंगे जिससे बड़े पैमाने पर होने वाले बदलावों को नियंत्रित रखा जा सके वहीं जिलों में होने वाले तबादलों के लिए संबंधित प्रभारी मंत्री की मंजूरी अनिवार्य होगी इसके अलावा विधायकों की अनुशंसाओं को भी प्राथमिकता दिए जाने की संभावना जताई जा रही है जिससे राजनीतिक और प्रशासनिक समन्वय बनाए रखने की कोशिश की जाएगी

    वरिष्ठ अधिकारियों के तबादलों को लेकर भी स्पष्ट दिशा निर्देश तय किए जा रहे हैं फर्स्ट क्लास अधिकारियों के तबादले केवल मुख्यमंत्री की मंजूरी से ही हो सकेंगे जबकि अन्य संवर्ग के कर्मचारियों और अधिकारियों के तबादले संबंधित विभागीय मंत्री की स्वीकृति से किए जाएंगे इस व्यवस्था से उच्च स्तर पर निगरानी सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है

    इस बार तबादला नीति में एक महत्वपूर्ण बिंदु यह भी शामिल किया गया है कि ऐसे अधिकारी और कर्मचारी जो लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ हैं उन्हें प्राथमिकता के आधार पर स्थानांतरित किया जाएगा विशेष रूप से वे अधिकारी जो तीन साल या उससे अधिक समय से एक ही जगह पर कार्यरत हैं उन्हें हटाने की प्रक्रिया पहले शुरू की जाएगी इससे प्रशासनिक व्यवस्था में नई ऊर्जा और निष्पक्षता लाने की उम्मीद जताई जा रही है

    राज्य सरकार का मानना है कि समय समय पर तबादले होने से न केवल कार्यप्रणाली में सुधार आता है बल्कि जवाबदेही भी बढ़ती है इसी को ध्यान में रखते हुए इस बार की नीति को अधिक संतुलित और प्रभावी बनाने की कोशिश की जा रही है ताकि कर्मचारियों की अपेक्षाओं और प्रशासनिक आवश्यकताओं के बीच संतुलन स्थापित किया जा सके

    फिलहाल सभी की नजरें आगामी कैबिनेट बैठक पर टिकी हैं जहां इस नई तबादला नीति को अंतिम मंजूरी मिल सकती है यदि सब कुछ तय योजना के अनुसार हुआ तो आने वाले महीनों में मध्यप्रदेश में एक बार फिर तबादलों का दौर शुरू हो जाएगा और लंबे समय से एक ही जगह पर जमे अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां मिलेंगी

  • मध्यप्रदेश में निगम मंडलों पर बड़ा फैसला, नाम तय दिल्ली से मिली हरी झंडी ,जल्द जारी होगी सूची

    मध्यप्रदेश में निगम मंडलों पर बड़ा फैसला, नाम तय दिल्ली से मिली हरी झंडी ,जल्द जारी होगी सूची


    भोपाल । मध्यप्रदेश की सियासत में इन दिनों एक बार फिर हलचल तेज हो गई है जहां निगम मंडलों और विभिन्न प्राधिकरणों में नियुक्तियों को लेकर तस्वीर लगभग साफ होती नजर आ रही है। लंबे समय से लंबित इस प्रक्रिया को अब अंतिम रूप दे दिया गया है और सूत्रों के अनुसार संभावित नामों की सूची को दिल्ली से हरी झंडी भी मिल चुकी है। ऐसे में अब जल्द ही आधिकारिक सूची जारी होने की संभावना जताई जा रही है जिससे कई नेताओं को बड़ी जिम्मेदारियां मिल सकती हैं।

    राजनीतिक और संगठनात्मक संतुलन साधने के लिहाज से इन नियुक्तियों को बेहद अहम माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व ने सामाजिक समीकरणों और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए नामों का चयन किया है। संभावित सूची के अनुसार अनुसूचित जाति आयोग के लिए कैलाश जाटव का नाम सामने आ रहा है जबकि अनुसूचित जनजाति आयोग की जिम्मेदारी भगत सिंह नेताम को दी जा सकती है। वहीं युवा आयोग के लिए प्रवीण शर्मा का नाम चर्चा में है जो युवा वर्ग को साधने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

    इसी तरह लघु उद्योग निगम के लिए विनोद गोटिया का नाम आगे चल रहा है हालांकि उनकी रुचि पर्यटन विकास निगम में बताई जा रही है। मध्यप्रदेश वेयर हाउसिंग कार्पोरेशन के लिए संजय नगाइच का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। क्षेत्रीय विकास को गति देने के उद्देश्य से कटनी विकास प्राधिकरण में शशांक श्रीवास्तव और ओरछा विकास प्राधिकरण में अखिलेश अयाची को जिम्मेदारी मिल सकती है। इसके अलावा वित्त विकास निगम के लिए दीपक सक्सेना और कोल विकास प्राधिकरण के लिए रामलाल रौतेल के नाम पर भी सहमति बनने की बात कही जा रही है।

    इन संभावित नियुक्तियों के अलावा कई वरिष्ठ नेताओं को भी जिम्मेदारी मिलने की चर्चा है। भोपाल से जुड़े कई पूर्व मंत्रियों के नाम इस सूची में शामिल बताए जा रहे हैं जिनमें लालसिंह आर्य अरविंद भदौरिया रामनिवास रावत उमाशंकर गुप्ता कमल पटेल रामपाल सिंह और इमरती देवी जैसे अनुभवी चेहरे शामिल हैं। इसके साथ ही अंचल सोनकर संजय शुक्ला अलकेश आर्य और कलसिंह भाबर को भी अवसर मिलने की संभावना जताई जा रही है।

    वहीं विधायकों और पूर्व विधायकों को भी इस बार नजरअंदाज नहीं किया जा रहा है। अजय बिश्नोई शैलेंद्र जैन प्रदीप लारिया ध्रुव नारायण सिंह अभिलाष पांडे और आशीष शर्मा जैसे नाम भी चर्चा में हैं जिन्हें विभिन्न निगम मंडलों या प्राधिकरणों में जिम्मेदारी दी जा सकती है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन नियुक्तियों के जरिए पार्टी एक ओर जहां संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रही है वहीं दूसरी ओर असंतुष्ट नेताओं को साधने की रणनीति भी साफ नजर आ रही है। अब सभी की नजर आधिकारिक सूची पर टिकी है जो किसी भी वक्त जारी हो सकती है और प्रदेश की राजनीति में नए समीकरणों को जन्म दे सकती है।