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  • सतना में खसरा का प्रकोप: 15 से अधिक बच्चे संक्रमित, स्वास्थ्यकर्मियों से मांगा जवाब

    सतना में खसरा का प्रकोप: 15 से अधिक बच्चे संक्रमित, स्वास्थ्यकर्मियों से मांगा जवाब


    नई दिल्ली । सतना जिले के नागौद विकासखंड के ग्राम गिंजारा में मीजल्स (खसरा) संक्रमण के कई मामले सामने आने के बावजूद समय पर इसकी सूचना उच्च अधिकारियों तक नहीं पहुंचाने पर स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है।

    मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. मनोज शुक्ला ने उपस्वास्थ्य केंद्र बसुधा की आशा सुपरवाइजर महेश्वरी सिंह, आशा कार्यकर्ता विमला पारासर और एएनएम प्रभा बागरी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। तीनों से तीन दिन के भीतर जवाब मांगा गया है।

    जानकारी के अनुसार, 25 अप्रैल को गिंजारा गांव में एक बच्चे में बुखार और शरीर पर दाने के लक्षण पाए गए थे। बच्चे को सिविल अस्पताल नागौद में भर्ती कराया गया था, जहां मीजल्स की जांच की गई। बाद में विभागीय समीक्षा और आईडीएसपी पोर्टल की रिपोर्ट से पता चला कि मई महीने में गांव में 15 से अधिक बच्चे इस संक्रमण की चपेट में आ चुके थे।

    स्वास्थ्य विभाग ने नोटिस में स्पष्ट कहा है कि यह एक अत्यंत संक्रामक बीमारी है, जो खांसने, छींकने और संक्रमित व्यक्ति के संपर्क से तेजी से फैलती है। ऐसे मामलों में तत्काल सूचना और सक्रिय निगरानी अनिवार्य होती है, लेकिन संबंधित कर्मचारियों ने समय पर रिपोर्टिंग नहीं की।

    विभाग का कहना है कि न केवल सूचना देने में देरी हुई, बल्कि क्षेत्र में संक्रमण नियंत्रण और निगरानी व्यवस्था भी कमजोर पाई गई। आईडीएसपी और आईएचआईपी पोर्टल पर भी मामलों की एंट्री समय पर नहीं की गई।

    सीएमएचओ ने चेतावनी दी है कि यदि तीन दिन के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया, तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

    यह मामला अब जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था और संक्रामक रोगों की रिपोर्टिंग प्रणाली की गंभीरता पर सवाल खड़े कर रहा है।

  • स्वास्थ्य सेवाओं में 'सुपरफास्ट' बदलाव: डिप्टी सीएम ने दिए विशेषज्ञों की भर्ती और नए मेडिकल कॉलेजों के समय पर संचालन के निर्देश

    स्वास्थ्य सेवाओं में 'सुपरफास्ट' बदलाव: डिप्टी सीएम ने दिए विशेषज्ञों की भर्ती और नए मेडिकल कॉलेजों के समय पर संचालन के निर्देश

    भोपाल। मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को सुधारने के लिए उप मुख्यमंत्री श्री राजेंद्र शुक्ल ने मंत्रालय में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की हाई-प्रोफाइल समीक्षा बैठक की। बैठक में उन्होंने स्पष्ट किया कि मेडिकल ऑफिसर और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी को दूर करना सरकार की शीर्ष प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि लोक सेवा आयोग और कर्मचारी चयन मंडल के माध्यम से चल रही भर्ती प्रक्रियाओं की हर स्तर पर नियमित समीक्षा की जाए ताकि मैनपावर की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।

    विशेषज्ञों की कमी होगी दूर डिप्टी सीएम ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को फर्स्ट रेफरल यूनिट’ के रूप में सशक्त बनाने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि 1377 विशेषज्ञ चिकित्सकों की भर्ती प्रक्रिया में से 500 विशेषज्ञों की सूची प्राप्त हो चुकी है, जिनकी नियुक्ति शीघ्र करने के निर्देश दिए गए हैं। इसका सीधा लाभ मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने में मिलेगा। साथ ही, नर्सिंग शिक्षकों की भर्ती में आ रही प्रक्रियात्मक बाधाओं को दूर करने के लिए भर्ती नियमों में आवश्यक संशोधन करने के निर्देश भी सामान्य प्रशासन विभाग को भेजे गए हैं।

    कैंसर उपचार और बुनियादी ढांचे का विस्तार प्रदेश के मरीजों को इलाज के लिए बाहर न भटकना पड़े, इसके लिए ग्वालियर, जबलपुर, रीवा और सागर मेडिकल कॉलेजों में उन्नत कैंसर उपचार सुविधाओं के विस्तार के निर्देश दिए गए हैं। श्री शुक्ल ने कहा कि अधोसंरचना विकास और अत्याधुनिक उपकरणों की उपलब्धता समय-सीमा में सुनिश्चित की जाए।

    तीन नए मेडिकल कॉलेजों का आगाज उप मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि बुधनी, छतरपुर और दमोह में निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेजों का संचालन आगामी शैक्षणिक सत्र से प्रस्तावित है। इसके लिए नेशनल मेडिकल कमीशन के मापदंडों के अनुसार फर्नीचर उपकरण और शैक्षणिक मैनपावर की भर्ती का कार्य पूर्ति चरण में है। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि विभागीय उदासीनता के कारण किसी भी निर्माण कार्य में देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बैठक में सीएम-डे केयर योजना और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के उन्नयन के लिए बजट उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ-साथ वरिष्ठ अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से कार्य पूर्ण करने की जिम्मेदारी सौंपी गई।