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  • मध्यप्रदेश को मिल सकते हैं 13 नए IAS अधिकारी, दिल्ली में आज DPC बैठक, चार विवादित नामों पर टिकी नजरें

    मध्यप्रदेश को मिल सकते हैं 13 नए IAS अधिकारी, दिल्ली में आज DPC बैठक, चार विवादित नामों पर टिकी नजरें


    मध्यप्रदेश: को जल्द ही भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के 13 नए अधिकारी मिल सकते हैं। सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को दिल्ली में विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की बैठक आयोजित होनी है। इसमें राज्य प्रशासनिक सेवा के 39 अधिकारियों के नामों पर विचार किया जाएगा। वरिष्ठता और निर्धारित मूल्यांकन प्रक्रिया के आधार पर 13 अधिकारियों को आईएएस अवॉर्ड दिए जाने की संभावना है। हालांकि, प्रस्तावित सूची में शामिल चार अधिकारियों के नाम विवादों से जुड़े होने के कारण बैठक के फैसले पर सबकी नजरें टिकी हैं।

    यह बैठक मध्यप्रदेश के प्रशासनिक ढांचे के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। समिति अधिकारियों की गोपनीय रिपोर्ट, सेवा रिकॉर्ड और वरिष्ठता सहित निर्धारित मानकों के आधार पर उनके नामों का मूल्यांकन करेगी। इसके बाद तय होगा कि आईएएस अवॉर्ड के लिए किन अधिकारियों के नामों को मंजूरी मिलती है।

    इन 13 अधिकारियों के नाम सूची में शामिल
    प्रस्तावित सूची में सामान्य प्रशासन विभाग के उप सचिव जयेंद्र कुमार विजयवत का नाम शामिल है। राज्य निर्वाचन आयोग में उप सचिव मनोज मालवीय और परिवहन विभाग के उप सचिव कमल नागर भी आईएएस अवॉर्ड के दावेदारों में हैं।

    इसके अलावा शहडोल की अपर कलेक्टर मिनिषा पांडेय, भोपाल जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी इला तिवारी और इंदौर संभाग में उपायुक्त (राजस्व) सपना एम. लोवंशी का नाम भी सूची में शामिल है। बुरहानपुर की अपर कलेक्टर नीता राठौर और शाजापुर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी शैलेंद्र सिंह सोलंकी भी इस दौड़ में हैं।

    अन्य दावेदारों में भोपाल स्थित लोकायुक्त कार्यालय की उप सचिव रानी पासी, आयुष विभाग की उप सचिव रंजना देवड़ा, महिला एवं बाल विकास विभाग की उप सचिव माधवी नागेंद्र और पर्यावरण विभाग की उप सचिव वर्षा सोलंकी शामिल हैं। माध्यमिक शिक्षा मंडल की अतिरिक्त सचिव प्रियंका गोयल का नाम भी प्रस्तावित 13 अधिकारियों की सूची में है।

    चार विवादित नामों पर क्यों टिकी नजरें?
    आईएएस अवॉर्ड की प्रक्रिया में चार नामों को लेकर विवाद की चर्चा है। महीप किशोर तेजस्वी के नाम पर कांग्रेस नेता केके मिश्रा ने आपत्ति दर्ज कराई है। वहीं, आरटीआई कार्यकर्ता अजय दुबे ने सपना एम. लोवंशी के नाम पर विरोध जताया है।

    हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं है कि सामान्य प्रशासन विभाग ने इन आपत्तियों को स्वीकार किया है या नहीं। यह भी साफ नहीं है कि तेजस्वी और लोवंशी उन चार अधिकारियों में शामिल हैं या नहीं, जिनके नामों को लेकर विवाद बताया जा रहा है। इसलिए अंतिम सूची में इन अधिकारियों की स्थिति का पता बैठक के निर्णय के बाद ही चलेगा।

    चार नाम अटके तो इन अधिकारियों को मिल सकता है मौका
    यदि विवादित नामों पर सहमति नहीं बनती है या कुछ नाम चयन प्रक्रिया में आगे नहीं बढ़ पाते हैं, तो वरिष्ठता क्रम में अन्य अधिकारियों पर विचार किया जा सकता है। संभावित विकल्पों में हरदा जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी नरोत्तम प्रसाद भार्गव, मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग में अपर नियंत्रक निधि सिंह राजपूत, सामान्य प्रशासन विभाग के कार्मिक शाखा में उप सचिव निमिषा जायसवाल और उज्जैन जिला पंचायत एवं विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी संदीप कुमार सोनी के नाम शामिल हैं। हालांकि, इन अधिकारियों के चयन की संभावना भी अंतिम मूल्यांकन और उपलब्ध पदों के आधार पर तय होगी।

    चार श्रेणियों में होगा अधिकारियों का मूल्यांकन
    प्रस्तावित 39 अधिकारियों के नामों पर विचार करते समय उनकी गोपनीय चरित्रावली (CR) और वरिष्ठता को महत्व दिया जाएगा। मूल्यांकन के तहत अधिकारियों को आउटस्टैंडिंग, वेरी गुड, गुड और अनफिट जैसी श्रेणियों में रखा जा सकता है। पहले आउटस्टैंडिंग श्रेणी के अधिकारियों पर विचार होगा। इसके बाद उपलब्ध कोटे के अनुसार वेरी गुड और गुड श्रेणी के अधिकारियों के नामों पर विचार किया जाएगा।

    यह प्रक्रिया सामान्य पदोन्नति से अलग है। इसे योग्यता के आधार पर नियुक्ति की प्रक्रिया माना जाता है। इसमें अधिकारियों की पिछले पांच वर्षों की गोपनीय रिपोर्ट महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसी कारण किसी अधिकारी की वर्तमान वरिष्ठता के बावजूद उसका चयन मूल्यांकन के परिणाम पर निर्भर कर सकता है।

    अब दिल्ली में होने वाली बैठक के निर्णय से तय होगा कि मध्यप्रदेश के किन अधिकारियों को आईएएस अवॉर्ड मिलता है। साथ ही विवादित नामों की स्थिति और संभावित वैकल्पिक अधिकारियों के चयन को लेकर भी तस्वीर स्पष्ट होने की उम्मीद है।

  • मध्यप्रदेश के IAS राहुल जैन की वैश्विक मंच पर एंट्री, IMF मुख्यालय में सीनियर एडवाइजर नियुक्त

    मध्यप्रदेश के IAS राहुल जैन की वैश्विक मंच पर एंट्री, IMF मुख्यालय में सीनियर एडवाइजर नियुक्त


    भोपाल। मध्यप्रदेश कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी राहुल जैन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी जिम्मेदारी मिली है। भारत सरकार ने उन्हें अमेरिका के वाशिंगटन डीसी स्थित इंटरनेशनल मोनेटरी फंड (आईएमएफ) के कार्यालय में एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर (इंडिया) के सीनियर एडवाइजर के पद पर नियुक्त किया है। इस नियुक्ति के साथ राहुल जैन वैश्विक आर्थिक संस्थान में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रमुख अधिकारियों में शामिल हो जाएंगे। उनकी यह प्रतिनियुक्ति पदभार ग्रहण करने की तिथि से तीन वर्षों के लिए होगी।

    राहुल जैन मध्यप्रदेश कैडर के वर्ष 2005 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और वर्तमान में केंद्र सरकार के कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव के पद पर कार्यरत हैं। नई नियुक्ति के तहत उनकी मौजूदा केंद्रीय प्रतिनियुक्ति समयपूर्व समाप्त कर दी जाएगी, जिसके बाद वह वाशिंगटन डीसी में अपनी नई जिम्मेदारी संभालेंगे।

    भारत सरकार के कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार, कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) ने अखिल भारतीय सेवाओं के 11 अधिकारियों की विदेशों में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति को मंजूरी दी है। इन्हीं नियुक्तियों में राहुल जैन का नाम भी शामिल है। वह आईएमएफ में इस पद पर कार्यरत केरल कैडर के वर्ष 2000 बैच के आईएएस अधिकारी आनंद सिंह का स्थान लेंगे।

    आईएमएफ जैसी प्रतिष्ठित वैश्विक वित्तीय संस्था में सीनियर एडवाइजर की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस पद पर अधिकारी सदस्य देशों की आर्थिक नीतियों, वित्तीय सुधारों, वैश्विक आर्थिक सहयोग और रणनीतिक निर्णयों से जुड़े विषयों पर महत्वपूर्ण सलाह और समन्वय का कार्य करते हैं। ऐसे में राहुल जैन की नियुक्ति न केवल उनके प्रशासनिक अनुभव की पहचान है, बल्कि भारतीय प्रशासनिक सेवा और मध्यप्रदेश कैडर के लिए भी गौरव का विषय मानी जा रही है।

    यह लगातार दूसरा अवसर है जब मध्यप्रदेश कैडर का कोई वरिष्ठ आईएएस अधिकारी वाशिंगटन डीसी में महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी निभाएगा। इससे पहले वर्ष 2024 में 1998 बैच के आईएएस अधिकारी निकुंज श्रीवास्तव को विश्व बैंक (वर्ल्ड बैंक) में सीनियर एडवाइजर के रूप में नियुक्त किया गया था। प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारी निकुंज श्रीवास्तव वर्तमान में भी वाशिंगटन डीसी में प्रतिनियुक्ति पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

    अब राहुल जैन की नियुक्ति से मध्यप्रदेश कैडर के दो वरिष्ठ अधिकारी दुनिया की दो सबसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं विश्व बैंक और आईएमएफ में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाते नजर आएंगे। यह उपलब्धि न केवल राज्य प्रशासनिक सेवा की क्षमता को वैश्विक स्तर पर स्थापित करती है, बल्कि भारतीय प्रशासनिक अधिकारियों की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता का भी प्रमाण मानी जा रही है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि राहुल जैन का प्रशासनिक अनुभव, वित्तीय और कॉर्पोरेट मामलों की गहरी समझ तथा केंद्र सरकार में विभिन्न जिम्मेदार पदों पर किया गया कार्य उन्हें इस महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय भूमिका के लिए उपयुक्त बनाता है। उनकी नियुक्ति भारत और आईएमएफ के बीच सहयोग को और मजबूत करने के साथ-साथ वैश्विक आर्थिक मंच पर भारत की भूमिका को भी नई मजबूती दे सकती है।