Tag: MP Monsoon Update

  • MP Weather Update: आधा मानसून बीता फिर भी 3 इंच बारिश कम, अगले सप्ताह भारी बारिश के आसार; डैमों का जलस्तर भी बढ़ा

    MP Weather Update: आधा मानसून बीता फिर भी 3 इंच बारिश कम, अगले सप्ताह भारी बारिश के आसार; डैमों का जलस्तर भी बढ़ा


    भोपाल । मध्य प्रदेश में मानसून का आधे से ज्यादा सीजन गुजर चुका है लेकिन प्रदेश में अब तक सामान्य बारिश का आंकड़ा पूरा नहीं हो पाया है। राज्य में अब तक औसतन 24.4 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई है जबकि इस अवधि तक करीब 27.4 इंच पानी गिरना चाहिए था। इस हिसाब से प्रदेश में सामान्य कोटे की लगभग 65 प्रतिशत बारिश ही हुई है और करीब 3 इंच बारिश की कमी बनी हुई है। हालांकि मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक आने वाला सप्ताह बारिश के लिहाज से बेहतर रह सकता है। यदि अगले कुछ दिनों तक तेज बारिश का दौर जारी रहता है तो कई जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य स्तर तक पहुंच सकता है।

    अगस्त के तीसरे सप्ताह में मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में मानसून सक्रिय रहा। मानसून ट्रफ के साथ डिप्रेशन और निम्न दबाव क्षेत्र बनने से प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में अच्छी बारिश हुई। डिंडौरी और सिवनी समेत कई जिलों में भारी बारिश के कारण बाढ़ जैसे हालात बने। नर्मदा और मंदाकिनी जैसी नदियों का जलस्तर बढ़ा जबकि कई इलाकों में झरने भी तेज बहाव के साथ बहते नजर आए। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में भी प्रदेश के कई हिस्सों में तेज बारिश का दौर देखने को मिल सकता है।

    प्रदेश के संभागों की स्थिति देखें तो भोपाल शहडोल रीवा और जबलपुर संभाग की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है। इसके उलट इंदौर उज्जैन और नर्मदापुरम संभाग में बारिश की कमी चिंता का विषय बनी हुई है। पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। वहीं पूर्वी हिस्से के भी कई जिलों में कमी है लेकिन कुछ क्षेत्रों में लगातार हुई बारिश ने स्थिति में सुधार किया है।

    जिलेवार आंकड़ों पर नजर डालें तो उमरिया और डिंडौरी में अब तक 34 इंच से ज्यादा बारिश दर्ज हो चुकी है। इसके मुकाबले मुरैना प्रदेश का सबसे कम बारिश वाला जिला बना हुआ है जहां करीब 12 इंच पानी ही गिरा है। भिंड में भी लगभग 22 इंच बारिश दर्ज की गई है। दूसरी ओर अनूपपुर सतना शहडोल सीधी सिंगरौली उमरिया बड़वानी भोपाल गुना ग्वालियर खंडवा खरगोन और राजगढ़ समेत 15 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।

    मानसून की शुरुआत इस साल कुछ देरी से हुई थी। मध्य प्रदेश में मानसून 24 जून को पहुंचा था और इसके बाद करीब नौ दिनों में पूरे प्रदेश में सक्रिय हो गया। जून में बारिश की कमी करीब 30 प्रतिशत रही थी। हालांकि जुलाई की शुरुआत में बारिश ने जोर पकड़ा और आंकड़ा सामान्य से ऊपर पहुंच गया। इसके बाद कुछ समय मानसून कमजोर रहा लेकिन जुलाई के तीसरे और चौथे सप्ताह तथा अगस्त में कई दौर में अच्छी बारिश हुई।

    बारिश का सीधा असर प्रदेश के बांधों पर भी दिखाई दे रहा है। कई बड़े बांधों में जलस्तर तेजी से बढ़ा है। बरगी और जौहिला समेत कुछ बांधों के गेट खोले गए हैं। बरगी बांध के 13 गेट खुलने से निचले इलाकों में प्रशासन की निगरानी बढ़ी है। हालांकि इंदौर और उज्जैन संभाग के कुछ बांधों में अभी अपेक्षित जलभराव नहीं हुआ है।

    आने वाला सप्ताह मध्य प्रदेश के लिए बारिश के लिहाज से महत्वपूर्ण रहने वाला है। यदि मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक अच्छी बारिश होती है तो फिलहाल पीछे चल रहे जिलों के आंकड़े में सुधार हो सकता है। खासकर पश्चिमी मध्य प्रदेश के उन इलाकों को बारिश की जरूरत है जहां सामान्य से काफी कम पानी गिरा है। ऐसे में अगले कुछ दिन प्रदेश के लिए मानसून के लिहाज से राहत देने वाले साबित हो सकते हैं।

  • मध्य प्रदेश में बारिश का नया गणित देवास सबसे आगे आलीराजपुर सबसे पीछे जुलाई के आखिर में फिर भारी बारिश के संकेत

    मध्य प्रदेश में बारिश का नया गणित देवास सबसे आगे आलीराजपुर सबसे पीछे जुलाई के आखिर में फिर भारी बारिश के संकेत


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में मानसून ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। जुलाई के तीसरे सप्ताह में हुई तेज बारिश ने प्रदेश के कई जिलों की तस्वीर बदल दी है और सूखे जैसे हालात से काफी राहत मिली है। इस दौरान प्रदेश में औसतन 3.3 इंच वर्षा रिकॉर्ड की गई जिससे नदियों झरनों और जलाशयों में पानी की आवक बढ़ी है। हालांकि प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अब भी सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है और कई जिलों को अच्छी वर्षा का इंतजार है।

    मौसम विभाग के अनुसार इस मानसून सीजन में अब तक प्रदेश में लगभग 13 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई है जबकि सामान्य औसत 14.6 इंच माना जाता है। यानी मध्य प्रदेश में अब तक लगभग 11 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। इस बार मानसून निर्धारित समय से नौ दिन की देरी से 24 जून को प्रदेश में पहुंचा था। देरी के कारण जून महीने में बारिश का आंकड़ा काफी पीछे रहा लेकिन जुलाई के पहले सप्ताह में स्थिति तेजी से सुधरी और बारिश का आंकड़ा सामान्य के करीब पहुंच गया। दूसरे सप्ताह में मानसून कमजोर पड़ने से बारिश लगभग थम गई लेकिन तीसरे सप्ताह में जोरदार बरसात ने एक बार फिर राहत दी।

    प्रदेश के 14 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है। इनमें भोपाल इंदौर देवास सीहोर राजगढ़ हरदा बुरहानपुर मंदसौर नीमच आगर मालवा दमोह सिवनी निवाड़ी और भिंड प्रमुख हैं। सबसे अधिक बारिश देवास जिले में हुई है जहां करीब 19.3 इंच वर्षा दर्ज की गई है जो सामान्य से लगभग 54 प्रतिशत अधिक है। दूसरी ओर आलीराजपुर प्रदेश का सबसे सूखा जिला बना हुआ है जहां अब तक केवल 3.9 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई है।

    प्रदेश के 41 जिले अब भी सामान्य बारिश के आंकड़े से पीछे चल रहे हैं। इनमें जबलपुर रीवा सतना सागर कटनी मंडला छिंदवाड़ा बालाघाट शहडोल उमरिया ग्वालियर मुरैना दतिया धार उज्जैन रतलाम विदिशा रायसेन नर्मदापुरम खरगोन खंडवा और अन्य जिले शामिल हैं। इन क्षेत्रों में अच्छी बारिश की अभी भी आवश्यकता बनी हुई है ताकि खेती और जल भंडारण की स्थिति बेहतर हो सके।

    बारिश की कमी का असर प्रदेश के प्रमुख बांधों और नदियों पर भी देखने को मिला है। दूसरे सप्ताह में बारिश कमजोर रहने के कारण कई नदियों का जलस्तर घट गया था लेकिन पिछले सप्ताह हुई वर्षा से फिर जलस्तर में सुधार आने लगा है। इसके बावजूद विशेषज्ञों का मानना है कि जलाशयों को पूरी क्षमता तक भरने के लिए लगातार और व्यापक बारिश की जरूरत है।

    राजधानी भोपाल में इस सीजन में अब तक करीब 17.5 इंच बारिश दर्ज की गई है जो सामान्य से बेहतर स्थिति मानी जा रही है। इंदौर में लगभग 15 इंच वर्षा हो चुकी है जबकि उज्जैन में करीब 13 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई है। जबलपुर में 13.6 इंच वर्षा दर्ज होने के बावजूद यह सामान्य कोटे से कम है। ग्वालियर चंबल संभाग में भी पिछले दिनों बारिश की रफ्तार बढ़ी है और मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले दिनों में यहां भी अच्छी वर्षा होगी।

    मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदेश में निचले स्तर पर नमी बनी हुई है और मानसूनी सिस्टम सक्रिय है। इसी कारण जुलाई के अंतिम सप्ताह में कई जिलों में तेज और व्यापक बारिश होने की संभावना है। यदि अनुमान सही साबित होता है तो प्रदेश के अधिकांश जिलों में बारिश का घाटा काफी हद तक पूरा हो सकता है और किसानों के साथ साथ जल संसाधनों को भी बड़ी राहत मिलेगी।