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  • भाजपा युवा मोर्चा की नियुक्तियों से संगठन में मचा घमासान, परिवारिक विवाद से लेकर निष्कासन तक के मामले आए सामने

    भाजपा युवा मोर्चा की नियुक्तियों से संगठन में मचा घमासान, परिवारिक विवाद से लेकर निष्कासन तक के मामले आए सामने


    भोपाल । मध्यप्रदेश में भारतीय जनता युवा मोर्चा के 19 जिलों के अध्यक्षों और महामंत्रियों की नियुक्तियों के बाद संगठन के भीतर विवाद गहराने लगे हैं। 29 अक्टूबर को घोषित की गई नियुक्तियों के एक-दो दिन के भीतर ही कई नवनियुक्त पदाधिकारी सवालों के घेरे में आ गए। बालाघाट में नए जिलाध्यक्ष की भाभी ने मारपीट और जान से मारने की धमकी देने के आरोप लगाते हुए पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई है। मंडला में जिलाध्यक्ष बनाए गए उत्कर्ष यादव की पत्नी ने दहेज में थार गाड़ी मांगने के लिए प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। वहीं नर्मदापुरम में छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित किए गए नेता को जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपे जाने पर सवाल उठ रहे हैं। सिवनी और इंदौर ग्रामीण में भी नियुक्तियों को लेकर असंतोष सामने आया है।

    बालाघाट में अमन गांधी को भाजयुमो जिलाध्यक्ष बनाए जाने के बाद पारिवारिक विवाद चर्चा में आ गया। नियुक्ति की घोषणा वाली रात ही विवाद सामने आया था। इसके बाद 30 अक्टूबर को उनकी भाभी पूजा गांधी ने कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि शराब के नशे में अमन गांधी उनके ससुर और परिवार के अन्य सदस्यों ने उनके और उनके पति के साथ मारपीट की। साथ ही जान से मारने की धमकी भी दी गई। पूजा गांधी ने पुलिस से खुद अपने पति और छह वर्षीय बच्चे की सुरक्षा की मांग की है। बताया गया है कि इसी परिवार के खिलाफ अगस्त में भी शिकायत दर्ज कराई गई थी। हालांकि शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच पुलिस स्तर पर की जानी है।

    मंडला में उत्कर्ष यादव की नियुक्ति भी विवादों में है। उनकी पत्नी ने आरोप लगाया है कि शादी के बाद ससुराल पक्ष की ओर से थार गाड़ी की मांग की जाने लगी और इसके लिए उन्हें प्रताड़ित किया गया। इस मामले में जून 2026 में लखनादौन थाने में उत्कर्ष यादव और उनके परिवार के तीन सदस्यों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 85 और दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। ऐसे मामले के बीच जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिलने से नियुक्ति पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

    नर्मदापुरम में कुलदीप रघुवंशी को जिलाध्यक्ष बनाए जाने पर पार्टी के पुराने फैसले की चर्चा फिर शुरू हो गई है। वर्ष 2023 में इटारसी नगर मंडल अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर हुए विवाद के दौरान कुलदीप और उनके साथियों पर मारपीट का आरोप लगा था। पुलिस में मामला दर्ज होने के बाद तत्कालीन जिला अध्यक्ष माधवदास अग्रवाल ने उन्हें छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया था। यह निष्कासन वर्ष 2029 तक बताया गया था। अब करीब साढ़े तीन साल में ही उनकी वापसी और सीधे जिलाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी मिलने पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि कुलदीप रघुवंशी का कहना है कि एक घटना में उनका नाम जुड़वा दिया गया था और डेढ़ महीने में ही वे उस मामले में दोषमुक्त हो गए थे। इसके बाद पार्टी में उनकी वापसी हुई थी।

    सिवनी में योगेश शिवहरे को जिलाध्यक्ष बनाए जाने पर संगठन के भीतर नाराजगी की बात सामने आई है। आरोप है कि जिला स्तर पर कोर ग्रुप की सहमति से तैयार पैनल को नजरअंदाज कर नियुक्ति की गई। पैनल में नाम नहीं होने के बावजूद जिम्मेदारी मिलने से कुछ युवा नेताओं में असंतोष है। वहीं इंदौर ग्रामीण में अजय सिंह पंवार की नियुक्ति को लेकर सामाजिक प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठाया गया है। लगातार तीसरी बार राजपूत समाज से अध्यक्ष बनाए जाने की चर्चा के बीच कुछ नेताओं ने आपत्ति जताई। उम्र सीमा और अलग-अलग क्षेत्रों के दावेदारों को पर्याप्त अवसर नहीं मिलने की शिकायतें भी सामने आई हैं।

    सागर में नवनियुक्त जिलाध्यक्ष जसवंत राठौर की नियुक्ति के बाद उनके परिवार से जुड़ी पुरानी आयकर विभाग की कार्रवाई भी चर्चा में है। 5 जनवरी 2025 को आयकर विभाग ने पूर्व भाजपा विधायक हरवंश सिंह राठौर के आवास सहित तीन ठिकानों पर छापेमारी की थी। यह कार्रवाई बीड़ी कारोबार संपत्तियों और वित्तीय लेन-देन की जांच से जुड़ी थी। हालांकि उपलब्ध जानकारी के मुताबिक जसवंत राठौर के खिलाफ इस कार्रवाई में सीधे तौर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई थी।

    इन घटनाओं के बाद भाजयुमो की नियुक्ति प्रक्रिया और संगठन के फैसलों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। अलग-अलग जिलों में सामने आए विवादों ने नए पदाधिकारियों के चयन और संगठन के भीतर सामाजिक तथा राजनीतिक संतुलन पर बहस तेज कर दी है। अब इन मामलों में संबंधित शिकायतों और संगठन की ओर से आने वाली प्रतिक्रिया पर सबकी नजर रहेगी।

  • भाजपा की गुटबाजी पर पटवारी का हमला, अजय सिंह बोले- समस्याओं के बावजूद भाजपा को ही वोट क्यों?

    भाजपा की गुटबाजी पर पटवारी का हमला, अजय सिंह बोले- समस्याओं के बावजूद भाजपा को ही वोट क्यों?


    इंदौर ।  मध्य प्रदेश की सियासत में इन दिनों नेताओं के बयानों और आपसी खींचतान को लेकर चर्चाएं तेज हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भाजपा सरकार में मंत्रियों के बीच कथित खटपट को लेकर तंज कसा है। वहीं अपनी चुनावी हार को याद करते हुए उन्होंने ऐसा बयान दिया जिस पर राजनीतिक गलियारों में चर्चा होने लगी। दूसरी ओर पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने भाजपा की लगातार चुनावी जीत पर हैरानी जताते हुए कांग्रेस नेताओं को एकजुट होने की जरूरत बताई है।

    इंदौर में भाजपा की कथित गुटबाजी पर निशाना साधते हुए जीतू पटवारी ने किसी का नाम लिए बिना कहा कि सरकार में प्रभारी मंत्री जो मुख्यमंत्री हैं और नगरीय प्रशासन मंत्री के बीच लात-घूंसे चल रहे हैं लेकिन दिखाई नहीं दे रहे। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि दोनों के बीच गाली-गलौज भी हो रही है लेकिन सिर्फ सुनाई नहीं दे रही है। पटवारी ने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि इंदौर के भाजपा विधायक उन्हें मंत्री मानने को ही तैयार नहीं हैं। पटवारी के मुताबिक आपसी अंतर्कलह में उलझी भाजपा प्रदेश का भला नहीं कर सकती क्योंकि अहंकार में डूबे नेता एक-दूसरे की टांग खींचने में लगे हैं। यह पटवारी का राजनीतिक आरोप और कटाक्ष था।

    हालांकि भाजपा पर हमला करते हुए पटवारी को अपनी चुनावी हार भी याद आ गई। वे इंदौर में संगीत के एक कार्यक्रम में पहुंचे थे। यहां बातचीत के दौरान उन्होंने अपने चुनाव प्रचार के पुराने अंदाज का जिक्र किया। पटवारी ने कहा कि साइकिल वाला भी कैसे हारता है यह उन्होंने देखा है। उन्होंने कहा कि जब कोई उन्हें याद दिलाता है कि वे साइकिल से आते थे और भाभी-भाभी कहकर लोगों से मिलते थे फिर भी चुनाव हार गए तो उन्हें अपनी हार याद आ जाती है। इस बात को कहते हुए उन्होंने फिल्मी गाने की पंक्ति भी सुनाई कि जिंदगी की यही रीत है हार के बाद ही जीत है। उनके इस बयान में चुनावी हार की टीस के साथ खुद पर किया गया हल्का व्यंग्य भी नजर आया।

    इसी बीच पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने कांग्रेस की चुनावी स्थिति और भाजपा की लगातार जीत को लेकर चिंता जाहिर की। सिंगरौली में एक पत्रकार ने उनसे सड़क बिजली बेरोजगारी और भ्रष्टाचार जैसी समस्याओं को लेकर सवाल किया था। इस पर अजय सिंह ने कहा कि प्रदेश में कई समस्याएं होने के बावजूद जब मतदान का समय आता है तो भाजपा के अलावा किसी दूसरी पार्टी को वोट क्यों नहीं मिलते यह समझ से परे है। उन्होंने इस स्थिति को कांग्रेस के लिए चिंता का विषय बताया।

    अजय सिंह इससे पहले भी पार्टी की स्थिति को लेकर चिंता जता चुके हैं। एक पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा था कि वर्ष 2028 में कांग्रेस को मध्य प्रदेश की सत्ता से बाहर रहते हुए 25 साल हो जाएंगे। अगर इस बार भी पार्टी सत्ता में नहीं पहुंची तो राजनीतिक रूप से उसकी स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है। उन्होंने कांग्रेस नेताओं से आपसी मतभेद भुलाकर एकजुट होने की अपील भी की।

    इस पूरे घटनाक्रम में एक ओर जीतू पटवारी भाजपा के भीतर कथित खींचतान को लेकर हमलावर नजर आए तो दूसरी ओर अजय सिंह ने कांग्रेस के सामने मौजूद राजनीतिक चुनौतियों की ओर ध्यान दिलाया। दोनों नेताओं के बयान प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस के बीच जारी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के साथ कांग्रेस के संगठनात्मक हालात पर भी चर्चा को सामने लाते हैं।

    रिपोर्ट के अंदरूनी हिस्से में एक आईएएस अधिकारी की पोस्टिंग को लेकर भी चर्चा की गई है। खबर के मुताबिक अधिकारी बड़े महानगरीय जिले में कलेक्टर बनने की उम्मीद लगाए हुए थे लेकिन हालिया तबादला सूची में उन्हें एक छोटे जिले की जिम्मेदारी मिली। हालांकि अधिकारी का नाम और जिले का उल्लेख नहीं किया गया है।

  • सिंधिया के अपनी तो जैसे तैसे डांस की चर्चा, विजयवर्गीय के भजन पर सियासी तंज, गड्ढों के झटकों से हिल गए BJP प्रदेश अध्यक्ष

    सिंधिया के अपनी तो जैसे तैसे डांस की चर्चा, विजयवर्गीय के भजन पर सियासी तंज, गड्ढों के झटकों से हिल गए BJP प्रदेश अध्यक्ष


    भोपाल। मध्य प्रदेश की सियासत में इन दिनों नेताओं के भाषणों के साथ उनके डांस और भजन की प्रस्तुतियां भी चर्चा का विषय बन रही हैं। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से लेकर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और पूर्व मंत्री कमल पटेल तक के वीडियो सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। वहीं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की एक रील सड़क की बदहाली को लेकर चर्चा में आ गई है। इन वीडियो में कहीं मनोरंजन नजर आ रहा है तो कहीं लोग गाने और भजन के बोल के आधार पर सियासी मायने निकाल रहे हैं।

    केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया अशोक नगर में युवाओं के साथ संवाद कार्यक्रम के दौरान एक गाने पर थिरकते नजर आए। उन्होंने अपनी तो जैसे तैसे कोई ऐसे या वैसे कट जाएगी आपका क्या होगा जनाब ए आली गाने पर डांस किया। उनकी इस प्रस्तुति की चर्चा होने लगी। लोगों ने उनके अंदाज को पसंद किया लेकिन गाने के बोल ने भी सियासी गलियारों में चुटकी लेने का मौका दे दिया। अब इस बात पर कयास लगाए जा रहे हैं कि आखिर इस गाने को लेकर लोग क्या संदेश तलाश रहे हैं। हालांकि सिंधिया की ओर से किसी खास राजनीतिक संदेश की बात सामने नहीं आई है।

    दूसरी ओर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का भजन भी चर्चा में है। एक गरबा आयोजन के दौरान वे महाकाल डमरू वाले तू न संभाले तो हमें कौन संभाले भजन गाते नजर आए। विजयवर्गीय के भजन गाने का यह पहला मौका नहीं है लेकिन इस बार इसके बोल को लेकर राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो गईं। प्रदेश की राजनीति में उनकी भूमिका और सत्ता संगठन में कथित उपेक्षा को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच लोग इसे अपने अपने अंदाज में देख रहे हैं। हालांकि इसे उनकी निजी आस्था और भक्ति की प्रस्तुति के रूप में भी देखा जा सकता है। इसी बीच उनके पुराने मित्र और पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने चुटकी लेते हुए उन्हें इंदौर के पितृ पर्वत स्थित हनुमान मंदिर में बैठने की सलाह दी। उनकी टिप्पणी ने इस पूरे मामले को और दिलचस्प बना दिया।

    पूर्व मंत्री कमल पटेल का एक वीडियो भी चर्चा में है। हरदा में आयोजित भजन संध्या के दौरान तुम अगर साथ देने का वादा करो मैं यूं ही मस्त नगमे लुटाता रहूं गाना बजा तो वे खुद को थिरकने से रोक नहीं पाए। कमल पटेल पिछला विधानसभा चुनाव हार चुके हैं और अब उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाएं होती रहती हैं। ऐसे में उनके डांस को लेकर भी लोग मजाकिया अंदाज में राजनीतिक संकेत तलाश रहे हैं। कुछ लोग इसे जनता का साथ पाने की इच्छा से जोड़कर देख रहे हैं लेकिन यह लोगों की अपनी व्याख्या है।

    इधर मध्य प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की कार में भजन सुनते हुए बनाई गई रील भी चर्चा में आ गई। वे कार में बैठकर माता के भजन सुन रहे थे। इसी दौरान वाहन सड़क पर बने गड्ढों से गुजरा तो कार हिचकोले खाने लगी और अध्यक्ष भी झटकों से हिलते नजर आए। इस वीडियो को लेकर लोगों ने सड़क की हालत पर सवाल उठाए। भले ही वीडियो बनाने का उद्देश्य भक्ति का आनंद लेना रहा हो लेकिन उसमें दिखाई देने वाले गड्ढों ने सड़क की बदहाली को भी सामने ला दिया।

    इसी राजनीतिक हलचल के बीच सरकारी विभाग में अनुकंपा नियुक्तियों को लेकर एक मामला भी सामने आया है। खबर के मुताबिक एक विभाग के सचिव स्तर के अधिकारी ने 25 लोगों की सूची तैयार कर वरिष्ठ अधिकारी को भेजी थी। जांच में पता चला कि सूची में शामिल 15 लोगों को पहले ही अनुकंपा नियुक्ति मिल चुकी थी और वे नौकरी कर रहे थे। इसके बाद वरिष्ठ अधिकारी ने सूची तैयार करने वाले अधिकारी को फटकार लगाई। अब बाकी 10 लोगों की नियुक्ति को लेकर आगे क्या निर्णय होता है इस पर नजर रहेगी। इस तरह मध्य प्रदेश में नेताओं के वीडियो से लेकर प्रशासनिक कामकाज तक कई मुद्दे चर्चा में हैं।

  • कहीं विधायक को वादा याद दिलाया तो कहीं मंच से दूरी मोदी के जन्मदिन पर भजन से लेकर भाजपा की अंदरूनी हलचल तक

    कहीं विधायक को वादा याद दिलाया तो कहीं मंच से दूरी मोदी के जन्मदिन पर भजन से लेकर भाजपा की अंदरूनी हलचल तक

    भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों छोटे छोटे घटनाक्रम भी चर्चा का विषय बन रहे हैं। देवास के सोनकच्छ में ऐसा ही एक मामला सामने आया जहां मंदिर में पूजा करने पहुंचे भाजपा विधायक राजेश सोनकर को पुजारी ने उनका पुराना वादा याद दिला दिया। पूजा-अर्चना के बाद जब विधायक मंदिर से बाहर निकले तो पुजारी ने उनसे सड़क निर्माण को लेकर सवाल कर दिया। पुजारी ने कहा कि पिछली बार जब विधायक यहां आए थे तब उन्होंने अगली बार डामर रोड से आने की बात कही थी लेकिन अब तक सड़क का निर्माण नहीं हुआ है। इस दौरान विधायक पुजारी की बात सुनते रहे। घटना का वीडियो सामने आने के बाद यह मामला चर्चा में आ गया है।

    दूसरी ओर ग्वालियर जिले के डबरा में भाजपा सांसद भारत सिंह कुशवाह द्वारा पूर्व मंत्री इमरती देवी को मंच पर बुलाए जाने के बावजूद उनके मंच पर नहीं जाने का मामला सामने आया। कार्यक्रम के दौरान सांसद ने उन्हें मंच पर आने के लिए बुलाया लेकिन इमरती देवी कार्यकर्ताओं के बीच नीचे ही बैठी रहीं। इस घटनाक्रम का वीडियो भी सामने आया है। बाद में जब उनसे मंच पर नहीं जाने को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि वहां तो मर्डर करने वाले भी बैठे हैं और ऐसे लोगों के साथ जाने का क्या मतलब है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वे किसी से नाराज नहीं हैं। उन्होंने खुद को भाजपा और ज्योतिरादित्य सिंधिया की कार्यकर्ता बताते हुए कहा कि उन्हें कार्यकर्ताओं के बीच बैठना पसंद है।

    इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के मौके पर छतरपुर में भाजपा विधायक ललिता यादव का भजन भी चर्चा में रहा। 17 सितंबर को भाजपा कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री का जन्मदिन मनाया। इसी दौरान ललिता यादव ने मोदी के नाम पर भजन गाया। उन्होंने मोदी जन्मे आधी रात सुनो री सखियां भजन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में मौजूद अन्य महिला नेताओं ने भी उनका साथ दिया। विधायक के इस भजन का वीडियो सामने आने के बाद इसकी चर्चा होने लगी।

    मध्य प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों से जुड़ी एक खबर भी चर्चा में है। एक ही विभाग के अलग अलग विंग में पदस्थ एक ही बैच के दो आईएएस अधिकारियों के बीच टेंडर की शर्तों को लेकर मतभेद की बात सामने आई है। इनमें एक महिला अधिकारी हैं। जानकारी के मुताबिक महिला अधिकारी अपनी तय की गई टेंडर शर्तों के अनुसार काम कराने के पक्ष में हैं जबकि दूसरे विंग में पदस्थ अधिकारी ने एक टेंडर की शर्तों में बदलाव कर दिया। बताया गया है कि नए पदस्थ अधिकारी के सामने टेंडर की फाइल आने के बाद उन्होंने शर्तों में बदलाव किया।

    इसके बाद महिला अधिकारी ने पत्र लिखकर टेंडर की शर्तों में बदलाव नहीं करने की बात कही। अब दोनों अधिकारियों के बीच विवाद का मुख्य मुद्दा यही बताया जा रहा है कि टेंडर की शर्तों में बदलाव करने का अधिकार किसके पास है। मामला बढ़ने के बाद यह प्रकरण वल्लभ भवन तक पहुंचने की बात सामने आई है। हालांकि इस मामले में संबंधित अधिकारियों की ओर से सार्वजनिक रूप से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आने की जानकारी इस सामग्री में नहीं है।

    इस तरह देवास में सड़क के वादे को लेकर पुजारी का सवाल हो या डबरा में मंच पर नहीं जाने का घटनाक्रम और छतरपुर में प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर भाजपा विधायक का भजन इन घटनाओं ने मध्य प्रदेश के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में अलग अलग वजहों से चर्चा पैदा की है।

  • MP में सियासी हलचल तेज: मोदी के जन्मदिन पर नारे में गलती और गुना में किसान की खरी बात ने खींचा ध्यान

    MP में सियासी हलचल तेज: मोदी के जन्मदिन पर नारे में गलती और गुना में किसान की खरी बात ने खींचा ध्यान


    भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में कई बार बड़े राजनीतिक बयान से ज्यादा छोटे घटनाक्रम चर्चा में आ जाते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर सिंगरौली में भाजपा विधायक से नारेबाजी के दौरान हुई चूक हो या इंदौर में राहुल गांधी के कार्यक्रम के मैदान का बढ़ा किराया या फिर गुना में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के सामने किसान की खाद को लेकर नाराजगी इन घटनाओं ने राजनीतिक गलियारों में अलग तरह की चर्चा पैदा कर दी है।

    सिंगरौली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम आयोजित किया था। इस दौरान देवसर से भाजपा विधायक राजेंद्र मेश्राम कार्यकर्ताओं से नारे लगवा रहे थे। उत्साह में उन्होंने नरेंद्र मोदी अमर रहे का नारा लगा दिया। लेकिन कार्यकर्ताओं की ओर से अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं आई। इसके बाद किसी ने नरेंद्र मोदी जिंदाबाद का नारा लगाया तो विधायक को अपनी गलती का एहसास हुआ। उन्होंने भी तुरंत जिंदाबाद के नारे लगाए और अपनी चूक पर मुस्कुराते नजर आए। कार्यक्रम में हुआ यह छोटा सा वाकया बाद में चर्चा का विषय बन गया।

    दूसरी ओर इंदौर में राहुल गांधी के छात्रों से जुड़े कार्यक्रम को लेकर मैदान के किराए का मुद्दा राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है। कार्यक्रम के लिए इंदौर विकास प्राधिकरण की ओर से पहले 10 लाख रुपए किराया लिया गया था। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने उस समय कहा था कि कार्यक्रम के लिए 10 लाख क्या 10 करोड़ रुपए भी मांगे जाते तो कांग्रेस उसे जुटाकर देती। अब आईडीए की ओर से मैदान के किराए के तौर पर चार लाख रुपए अतिरिक्त लिए जाने की बात सामने आई है। कांग्रेस ने इसे सरकार की ओर से की जा रही वसूली और दबाव से जोड़कर सवाल उठाए हैं। वहीं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कांग्रेस के पुराने बयान का हवाला देते हुए इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी है। इस पूरे विवाद में मैदान का किराया राजनीतिक बयानबाजी का विषय बन गया है।

    गुना में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के जनसंपर्क के दौरान किसानों ने खाद की समस्या को लेकर अपनी परेशानी बताई। एक किसान ने सिंधिया से सीधे कहा कि माला पहनाते-पहनाते जिंदगी निकल गई लेकिन खाद नहीं मिल रहा है। किसान की शिकायत सुनने के बाद सिंधिया ने मौके पर मौजूद कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल से किसानों के नाम और मोबाइल नंबर नोट करने को कहा। कलेक्टर ने जब ठीक है कहा तो सिंधिया ने दोबारा उन्हें निर्देश दिया कि सिर्फ ठीक है कहने के बजाय नाम और नंबर लिखे जाएं। उन्होंने पेन और पैड निकालकर जानकारी नोट करने को कहा। इसके बाद किसानों की जानकारी दर्ज की गई।

    इन घटनाओं के बीच मध्य प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में भी एक अधिकारी की चर्चा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के मौके पर चल रहे सेवा संकल्प अभियान में वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों की अलग-अलग जिलों में जिम्मेदारी लगाई गई है। बताया जा रहा है कि मंत्रालय में तैनात एक अधिकारी की ड्यूटी राजधानी के नजदीकी जिले में लगाई गई थी लेकिन वे अभियान से जुड़े काम के बजाय मंत्रालय में बैठक में व्यस्त रहे। हालांकि इस संबंध में अधिकारी की ओर से कोई सार्वजनिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।

    इस तरह एक ही दिन में सिंगरौली से इंदौर और गुना तक सामने आए अलग-अलग घटनाक्रम ने मध्य प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में चर्चाओं को बढ़ा दिया है। कहीं नारेबाजी में हुई चूक सुर्खियां बनी तो कहीं कार्यक्रम के खर्च और किसानों की खाद समस्या ने राजनीतिक बहस को हवा दी।

  • भोपाल से सिंगरौली तक सवालों के घेरे में भाजपा नेता अतिथि विद्वानों ने शिवराज को रोका मंत्रियों से मीडिया ने पूछे तीखे सवाल

    भोपाल से सिंगरौली तक सवालों के घेरे में भाजपा नेता अतिथि विद्वानों ने शिवराज को रोका मंत्रियों से मीडिया ने पूछे तीखे सवाल


    भोपाल । मध्यप्रदेश में सेवा संकल्प अभियान को लेकर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भाजपा नेताओं को अलग अलग मुद्दों पर तीखे सवालों का सामना करना पड़ा। सिंगरौली में भाजपा विधायक रीति पाठक से यूजीसी से जुड़े सवाल पर जवाब मांगा गया तो उन्होंने इस मुद्दे पर बात करने से इनकार कर दिया और कुछ देर बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस छोड़कर चली गईं। वहीं सागर में मंत्री प्रहलाद पटेल से शराबकांड को लेकर सवाल हुआ जबकि शाजापुर में मंत्री नारायण सिंह पंवार से वंदे मातरम् को लेकर सवाल पूछा गया। इसी बीच भोपाल में अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे अतिथि विद्वानों ने केंद्रीय कृषि मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का काफिला रोककर उन्हें 11 सितंबर 2023 के आश्वासन की याद दिलाई।

    सिंगरौली में सेवा संकल्प अभियान की जानकारी देने के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई थी। इसी दौरान विधायक रीति पाठक से यूजीसी को लेकर सवाल किया गया। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक सवाल सुनने के बाद उन्होंने कहा कि प्रेस वार्ता जिस विषय पर रखी गई है उसी विषय पर बात की जाए। इसके बाद उन्होंने पत्रकारों के सवालों का जवाब दिए बिना कार्यक्रम समाप्त कर दिया और वहां से चली गईं।

    उधर भोपाल में उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार के आवास के बाहर अतिथि विद्वानों का प्रदर्शन जारी रहा। प्रदर्शन कर रहे करीब 200 अतिथि विद्वानों ने वहां से गुजर रहे शिवराज सिंह चौहान का काफिला रोक लिया। अतिथि विद्वानों ने उन्हें 11 सितंबर 2023 को भोपाल में हुई महापंचायत में किए गए आश्वासनों की याद दिलाई। उनका कहना है कि उस समय लगातार अध्यापन कर रहे अतिथि विद्वानों को बाहर नहीं किए जाने और फॉलन आउट की स्थिति से बचाने की बात कही गई थी।

    2023 की उस महापंचायत में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अतिथि विद्वानों के लिए कई घोषणाएं की थीं। इनमें फॉलन आउट अतिथि विद्वानों को रिक्त पदों पर दोबारा अवसर देने और लगातार अध्यापन कर रहे अतिथि विद्वानों को बाहर नहीं किए जाने की बात शामिल थी। इसके अलावा मासिक मानदेय और पीएससी भर्ती में आरक्षण से संबंधित घोषणाएं भी की गई थीं।

    मौजूदा प्रदर्शन में अतिथि विद्वानों की मुख्य मांग नियमितीकरण और नौकरी की स्थिरता को लेकर नीति बनाने की है। उनका कहना है कि जब तक स्थायी नीति नहीं बनती तब तक फॉलन आउट प्रक्रिया रोकी जाए। प्रदर्शनकारियों के अनुसार उच्च शिक्षा मंत्री से बातचीत के बाद भी इस मुद्दे पर तत्काल सहमति नहीं बनी।

    शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात के दौरान अतिथि विद्वानों ने अपने पुराने आश्वासनों का मुद्दा उठाया। रिपोर्टों के अनुसार चौहान ने कहा कि एक मुख्यमंत्री की घोषणा दूसरे मुख्यमंत्री को पूरी करनी चाहिए और उनकी मांग सरकार तक पहुंचाने का भरोसा दिया।

    सागर में सेवा संकल्प अभियान की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मंत्री प्रहलाद पटेल से बंडा शराबकांड को लेकर सवाल किया गया। मीडिया ने पूछा कि ऐसे मामले के बीच सेवा कार्यक्रमों का आयोजन कितना जरूरी है और इस घटना पर सरकार की प्रतिक्रिया क्या है। मंत्री ने कार्यक्रमों को सेवा से जुड़ा बताया लेकिन शराबकांड से जुड़े सवाल पर कोई विस्तृत जवाब नहीं दिया।

    शाजापुर में मंत्री नारायण सिंह पंवार से वंदे मातरम् को लेकर सवाल हुआ। मंत्री से पूछा गया कि क्या उन्हें पूरा वंदे मातरम् आता है। जवाब में उन्होंने कहा कि वे भी सीख रहे हैं और सभी को सीखते रहना चाहिए। इस दौरान प्रेस कॉन्फ्रेंस का माहौल कुछ देर के लिए सवाल जवाब पर केंद्रित हो गया।

    इस तरह सेवा संकल्प अभियान की जानकारी देने के लिए आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस और कार्यक्रमों में अभियान के साथ साथ अलग अलग मुद्दे भी सामने आए। सिंगरौली में यूजीसी का सवाल हो या सागर में शराबकांड से जुड़ा मुद्दा और भोपाल में अतिथि विद्वानों का प्रदर्शन सभी घटनाओं ने राजनीतिक और प्रशासनिक विषयों को चर्चा के केंद्र में ला दिया।

  • राहुल के कार्यक्रम से लेकर बुजुर्ग की पीठ पर पटवारी तक मध्य प्रदेश में दिनभर चर्चा में रहे सियासत और सिस्टम के ये किस्से

    राहुल के कार्यक्रम से लेकर बुजुर्ग की पीठ पर पटवारी तक मध्य प्रदेश में दिनभर चर्चा में रहे सियासत और सिस्टम के ये किस्से


    भोपाल।  मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों सियासी बयानबाजी के साथ नेताओं और सरकारी अमले से जुड़े कई दिलचस्प मामले भी चर्चा में हैं। इंदौर में राहुल गांधी के प्रस्तावित छात्रों की गूंज कार्यक्रम को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं का उत्साह देखने लायक रहा। कार्यक्रम के लिए रजिस्ट्रेशन का आंकड़ा डेढ़ लाख के पार पहुंचने के बाद कांग्रेस ने जमकर जश्न मनाया। शहर में राहुल गांधी का बड़ा कटआउट लगाया गया और आतिशबाजी के साथ ढोल नगाड़े बजाए गए। कार्यकर्ताओं ने एक दूसरे को मिठाई खिलाकर अपनी खुशी का इजहार किया।

    कांग्रेस इस कार्यक्रम को युवाओं से जोड़ने की कोशिश में जुटी है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी से लेकर पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह तक युवाओं के बीच पहुंचकर संवाद कर रहे हैं। पार्टी की कोशिश है कि राहुल गांधी के कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवाओं की भागीदारी हो। हालांकि कार्यक्रम को लेकर अभी अनुमति का पेंच बना हुआ है। यही वजह है कि कार्यक्रम आखिर किस स्थान पर होगा इसे लेकर भी स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है।

    इस बीच भाजपा की ओर से राहुल गांधी के कार्यक्रम को लेकर तंज भी सामने आया है। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने राहुल गांधी को भाजपा का स्टार प्रचारक बताया। उनका कहना है कि राहुल गांधी जहां भी जाते हैं वहां अप्रत्यक्ष रूप से भाजपा को राजनीतिक फायदा मिलता है। इस बयान के बाद कार्यक्रम को लेकर सियासी चर्चाएं और तेज हो गई हैं।

    उधर आलीराजपुर में मंत्री नागर सिंह चौहान का अलग अंदाज देखने को मिला। स्कूली बच्चों की रैली देखकर उन्होंने अपना काफिला रुकवा दिया। बच्चों से बातचीत की और उनके साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं। मंत्री ने बच्चों से यह भी पूछा कि वे उन्हें पहचानते हैं या नहीं। हालांकि बताया गया कि बच्चों में कुछ ही मंत्री को पहचान सके। इस पूरे घटनाक्रम को मंत्री की लोकप्रियता के अनौपचारिक टेस्ट के तौर पर देखा गया।

    सीधी से सामने आया एक वीडियो सरकारी कर्मचारियों की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर रहा है। वायरल वीडियो में पटवारी नीलेश नामदेव एक बुजुर्ग की पीठ पर बैठकर पानी से भरा नाला पार करते नजर आ रहे हैं। बताया गया कि पटवारी गांव में सर्वे के काम से पहुंचे थे। वीडियो करीब एक साल पुराना बताया जा रहा है लेकिन अब सामने आने के बाद प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए पटवारी को निलंबित कर दिया है। घटना ने सरकारी अमले के आम लोगों के प्रति व्यवहार को लेकर बहस छेड़ दी है।

    इसी बीच सत्ता के गलियारों से जुड़ी एक चर्चा भी सामने आई है। बताया जा रहा है कि एक आईएएस अधिकारी मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान प्रोटोकॉल का हवाला देकर बार बार स्टेट हैंगर पहुंच रहे थे। चर्चा है कि मुख्यमंत्री ने अपने ओएसडी से इस पर सवाल किया और कहा कि जरूरत होने पर अधिकारी को खुद बुलाया जाएगा। यह संदेश संबंधित अधिकारी तक पहुंचने की बात कही जा रही है। हालांकि इस तरह की अंदरूनी चर्चाओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

    कुल मिलाकर राहुल गांधी के कार्यक्रम को लेकर कांग्रेस का उत्साह भाजपा का तंज मंत्रियों के बदले अंदाज और सरकारी अमले से जुड़े विवादों ने मध्य प्रदेश की सियासत और प्रशासनिक हलकों में चर्चाओं का माहौल गर्म कर दिया है।

  • मध्य प्रदेश की राजनीति में अजब रंग फायरिंग वाला स्वागत मंत्री का अनोखा इशारा और गड्ढों में विकास देखने वाला बयान हुआ वायरल

    मध्य प्रदेश की राजनीति में अजब रंग फायरिंग वाला स्वागत मंत्री का अनोखा इशारा और गड्ढों में विकास देखने वाला बयान हुआ वायरल


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजनीति इन दिनों सिर्फ बड़े फैसलों और चुनावी रणनीतियों को लेकर ही नहीं बल्कि नेताओं के बयानों और उनके आसपास घटने वाले रोचक घटनाक्रमों को लेकर भी चर्चा में है। कहीं एक वरिष्ठ नेता के स्वागत में हवाई फायरिंग कर दी गई तो कहीं मंत्री के हाथ के इशारे ने लोगों को चुटकी लेने का मौका दे दिया। दूसरी ओर गड्ढों से भरी सड़कों को लेकर मंत्री का ऐसा बयान सामने आया जिसने सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी। इन सब घटनाओं ने यह साबित कर दिया कि राजनीति में कभी कभी एक छोटा सा दृश्य भी बड़ी चर्चा का विषय बन जाता है।

    बुरहानपुर में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह के साथ कुछ ऐसा हुआ जिसने वहां मौजूद लोगों को भी चौंका दिया। अजय सिंह कांग्रेस नेता अजय रघुवंशी के घर पहुंचे थे और उनके स्वागत की तैयारियां चल रही थीं। इसी दौरान अचानक हवाई फायरिंग की गई। माला पहनाने के समय हुई गोली की आवाज से अजय सिंह कुछ देर के लिए सहम गए। बताया गया कि उन्होंने फायरिंग करने वाले व्यक्ति से ऐसा न करने की बात भी कही। इसके बाद जब दोबारा फायरिंग हुई तो वह फिर चौंक गए। अब इस घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तरह तरह की चर्चाएं हो रही हैं। लोग सवाल उठा रहे हैं कि स्वागत के नाम पर इस तरह की गतिविधियां कितनी उचित हैं।

    उधर जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट का एक वीडियो भी चर्चा का विषय बन गया। केन बेतवा लिंक परियोजना के विस्थापितों से बातचीत के दौरान मंत्री ने एक ग्रामीण से मुख्यमंत्री का नाम पूछा। जब ग्रामीण स्पष्ट जवाब नहीं दे सका तो मंत्री ने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव का नाम बताया और फिर अपना परिचय भी दिया। उन्होंने खुद को इंदौर से आया बताते हुए अपने विभाग के बारे में जानकारी दी और कहा कि वह जल से जुड़ा विभाग संभालते हैं। लेकिन इस दौरान उनके हाथ के हाव भाव और इशारे को लेकर लोगों ने सोशल मीडिया पर टिप्पणियां शुरू कर दीं। वीडियो के सामने आने के बाद मंत्री का यह अंदाज चर्चा में आ गया।

    दमोह जिले के पथरिया में आनंद विभाग के मंत्री लखन पटेल ने सड़कों के गड्ढों को लेकर ऐसा बयान दिया जिसने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने कहा कि आज के लोगों को सड़कों के गड्ढे दिखाई देते हैं लेकिन पुराने समय में कई जगह सड़कें ही नहीं थीं। मंत्री ने लोगों को अपने बुजुर्गों से पूछने की सलाह देते हुए कहा कि पहले सड़कें देखना भी बड़ी बात थी। उनके इस बयान पर लोग अलग अलग प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कुछ इसे पुराने और नए दौर के विकास की तुलना बता रहे हैं तो कुछ लोग इसे खराब सड़कों की समस्या से ध्यान हटाने वाला बयान मान रहे हैं।

    इसी बीच खंडवा में एक प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान भाजपा सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल का फोन कॉल भी चर्चा में रहा। प्रशासन की टीम एक शराब दुकान के अहाते पर कार्रवाई कर रही थी तभी अधिकारी के पास सांसद का फोन आया। बताया गया कि कार्रवाई रुकवाने को लेकर बातचीत हुई लेकिन अधिकारी ने आदेश का हवाला देते हुए कार्रवाई जारी रखने की बात कही और सांसद को कलेक्टर से संपर्क करने का सुझाव दिया।

    इन घटनाओं ने मध्य प्रदेश की राजनीति को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। नेताओं के बयान हों या सार्वजनिक कार्यक्रमों में होने वाली घटनाएं हर मामला अब तेजी से सोशल मीडिया तक पहुंच रहा है और जनता भी उस पर अपनी प्रतिक्रिया दे रही है।

  • MP News: अपनी ही सरकार पर विधायक ने उठाए सवाल, भाजपा कार्यक्रम में महिला सम्मान पर बवाल; भोपाल थाने में TI और हिंदू नेता आमने-सामने

    MP News: अपनी ही सरकार पर विधायक ने उठाए सवाल, भाजपा कार्यक्रम में महिला सम्मान पर बवाल; भोपाल थाने में TI और हिंदू नेता आमने-सामने


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों सड़क से लेकर सरकारी दफ्तर और पार्टी के कार्यक्रम तक कई ऐसे मामले सामने आ रहे हैं जो सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बन गए हैं। कहीं भाजपा विधायक अपनी ही सरकार की सड़क व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए जनता के गुस्से का डर बता रहे हैं तो कहीं भाजपा के कार्यक्रम में महिला जनप्रतिनिधियों को बैठने के लिए कुर्सी तक नहीं मिलने पर सवाल खड़े हो रहे हैं। दूसरी ओर भोपाल के एक थाने में पुलिस अधिकारी और हिंदू संगठन के नेता के बीच तीखी बहस का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस और सामाजिक संगठनों के बीच तालमेल को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है।

    जबलपुर जिले के पाटन से भाजपा विधायक अजय विश्नोई ने प्रदेश की खराब सड़कों को लेकर खुलकर अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सड़कों की हालत खराब है और इसका सीधा असर जनप्रतिनिधियों पर पड़ता है। उनका कहना है कि जब सड़कें खराब होती हैं तो परेशान जनता सबसे पहले स्थानीय विधायक से सवाल करती है। विधायक ने यह भी कहा कि सड़क चाहे लोक निर्माण विभाग की हो या प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से जुड़ी हो कई जगहों पर स्थिति खराब है। उनके बयान को अपनी ही सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने के तौर पर देखा जा रहा है।

    विधायक ने सड़क निर्माण में भ्रष्टाचार और ठेकेदारी व्यवस्था को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि ठेकेदार काम हासिल करने की प्रतिस्पर्धा में कम दर पर ठेके लेते हैं और निर्माण प्रक्रिया में अनियमितताओं के कारण सड़कों की गुणवत्ता प्रभावित होती है। खराब सड़कें केवल आवागमन की परेशानी नहीं बल्कि आम लोगों की नाराजगी का कारण भी बनती हैं। यही वजह है कि विधायक ने कहा कि जनता की नाराजगी का पहला सामना स्थानीय जनप्रतिनिधियों को करना पड़ता है।

    दूसरी तस्वीर गुना के एक भाजपा कार्यक्रम से सामने आई जहां भाजपा विधायक प्रियंका मीणा और नगर पालिका अध्यक्ष सविता गुप्ता को काफी देर तक खड़े रहना पड़ा। कार्यक्रम में मौजूद पुरुष नेताओं के लिए कुर्सियां और सोफा मौजूद थे लेकिन दोनों महिला जनप्रतिनिधियों के लिए बैठने की व्यवस्था नजर नहीं आई। आखिरकार विधायक ने खुद अपनी कुर्सी लगाई और बैठ गईं। इसके बाद अपने भाषण में उन्होंने महिला जनप्रतिनिधियों को बराबरी का सम्मान दिए जाने की बात कही। उन्होंने महिला आरक्षण और राजनीतिक भागीदारी का जिक्र करते हुए कहा कि महिलाओं को भी बराबरी के साथ बैठाने से ही वास्तविक महिला सशक्तीकरण की तस्वीर सामने आएगी।

    इस घटना के बाद भाजपा के कार्यक्रमों में महिला जनप्रतिनिधियों के सम्मान और व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठने लगे हैं। प्रियंका मीणा इससे पहले भी महिलाओं से जुड़े मुद्दे पर अपनी ही पार्टी के विधायक पन्नालाल शाक्य के साथ सार्वजनिक मंच पर बहस को लेकर चर्चा में रह चुकी हैं।

    इसी बीच भोपाल के जहांगीराबाद थाने का एक वीडियो भी चर्चा में है। यहां हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी और थाना प्रभारी राजन सिंह के बीच एक मामले को लेकर तीखी बहस हो गई। बताया गया कि हिंदू संगठन के कार्यकर्ता शिकायत पर कार्रवाई की मांग को लेकर थाने पहुंचे थे। इसी दौरान पुलिस और संगठन के प्रतिनिधियों के बीच बात बढ़ गई। मौके पर एसीपी उमेश तिवारी भी मौजूद थे और दोनों पक्षों को शांत कराने का प्रयास करते नजर आए।

    इस पूरे घटनाक्रम के वीडियो सामने आने के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली और सामाजिक संगठनों के साथ संवाद को लेकर सवाल उठ रहे हैं। तीनों घटनाओं ने मध्य प्रदेश की सियासत और प्रशासन से जुड़े अलग अलग पहलुओं को एक साथ चर्चा में ला दिया है। सड़क व्यवस्था पर विधायक की नाराजगी हो या महिला जनप्रतिनिधियों को सम्मान देने का सवाल या फिर थाने में पुलिस और संगठन के बीच तीखी बहस ये घटनाएं बताती हैं कि जनता और जनप्रतिनिधियों से जुड़े मुद्दों पर अब सार्वजनिक जवाबदेही की मांग लगातार बढ़ रही है।

  • मुरैना में ट्रेन से तोमर का भाषण और भोपाल में पटवारी का हमला, MP की राजनीति में छाया इंजन-डिब्बे वाला तंज

    मुरैना में ट्रेन से तोमर का भाषण और भोपाल में पटवारी का हमला, MP की राजनीति में छाया इंजन-डिब्बे वाला तंज


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों नेताओं के बयानों और अंदाज को लेकर खूब चर्चा हो रही है। मुरैना में विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने संत रविदास की 650वीं जयंती के कार्यक्रम में जाति व्यवस्था को लेकर नेताओं पर सीधा निशाना साधा। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बीजेपी की सरकार और संगठन के भीतर कथित खींचतान को ट्रेन के इंजन और डिब्बों की लड़ाई बताकर सियासी तंज कसा। पटवारी का यह बयान 20 अगस्त को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में दिए गए उनके हमले के दौरान सामने आया था।

    मुरैना में संत रविदास जयंती के अवसर पर आयोजित समरसता संकल्प अभियान और यात्रा कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि जाति का बंधन भगवान ने नहीं बनाया। उन्होंने कहा कि समाज में अपनी व्यवस्था के लिए लोगों ने जाति व्यवस्था बनाई थी लेकिन बाद में इसके स्वरूप को बिगाड़ने और तुष्टिकरण की राजनीति को बढ़ावा देने का काम नेताओं ने अपने स्वार्थ के लिए किया। तोमर के इस बयान को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई है। संत रविदास के विचारों में सामाजिक समरसता और समानता का संदेश प्रमुख रहा है और इसी विचार को लेकर समरसता से जुड़े कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं।

    तोमर का दूसरा अंदाज तब देखने को मिला जब उन्होंने मुरैना के कैलारस से वीरपुर के बीच हाल ही में शुरू हुई मेमू ट्रेन में आम यात्रियों के साथ सफर किया। ट्रेन के अलग अलग स्टेशनों पर रुकने के दौरान उन्होंने लोगों को संबोधित भी किया। ट्रेन के अंदर खड़े होकर माइक से संबोधन के वीडियो सामने आने के बाद इसे लेकर सोशल मीडिया पर तरह तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। राजनीतिक कार्यक्रमों में नेताओं के भाषण और जनसंपर्क के इस अंदाज को लेकर लोग अपने अपने तरीके से टिप्पणी कर रहे हैं।

    इधर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बीजेपी की सरकार पर हमला बोलते हुए ट्रेन का ही उदाहरण इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि बीजेपी एक ऐसी ट्रेन बन गई है जिसमें डिब्बे कहते हैं कि इंजन हटा दो और इंजन कहता है कि डिब्बों को बदल दूंगा। पटवारी ने आरोप लगाया कि इस कथित खींचतान के बीच सबसे ज्यादा परेशानी आम जनता को हो रही है। उनके बयान की पुष्टि हालिया मीडिया रिपोर्टों में भी हुई है।

    पटवारी ने आरोप लगाया कि बीजेपी के बड़े नेता मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के खिलाफ दिल्ली तक जा रहे हैं जबकि दूसरी तरफ मुख्यमंत्री मंत्रिमंडल में बदलाव की बात कर रहे हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने इसी राजनीतिक स्थिति को इंजन और डिब्बों के बीच चल रही लड़ाई बताया। यह बयान विपक्ष की ओर से बीजेपी सरकार पर किया गया राजनीतिक हमला है और इसे इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

    पटवारी ने सरकार को घेरते हुए शिक्षा व्यवस्था और महंगाई जैसे मुद्दे भी उठाए। उन्होंने स्कूलों की स्थिति को लेकर कांग्रेस के जरिए जमीनी अभियान चलाने की बात कही और सरकार से शिक्षा व्यवस्था पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों और सांची दूध के दामों को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा।

    इस पूरे घटनाक्रम में दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर सामाजिक समरसता और जातिगत भेदभाव के मुद्दे पर नेताओं की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं तो दूसरी तरफ कांग्रेस बीजेपी की अंदरूनी राजनीति पर ट्रेन के इंजन और डिब्बों का रूपक इस्तेमाल कर रही है। दोनों बयानों ने मध्य प्रदेश की सियासत में एक बार फिर राजनीतिक बयानबाजी को तेज कर दिया है। अब इन मुद्दों पर आने वाली प्रतिक्रियाएं प्रदेश की राजनीतिक बहस को और गर्म कर सकती हैं।