Tag: MP Political News

  • मध्य प्रदेश की राजनीति में अजब रंग फायरिंग वाला स्वागत मंत्री का अनोखा इशारा और गड्ढों में विकास देखने वाला बयान हुआ वायरल

    मध्य प्रदेश की राजनीति में अजब रंग फायरिंग वाला स्वागत मंत्री का अनोखा इशारा और गड्ढों में विकास देखने वाला बयान हुआ वायरल


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजनीति इन दिनों सिर्फ बड़े फैसलों और चुनावी रणनीतियों को लेकर ही नहीं बल्कि नेताओं के बयानों और उनके आसपास घटने वाले रोचक घटनाक्रमों को लेकर भी चर्चा में है। कहीं एक वरिष्ठ नेता के स्वागत में हवाई फायरिंग कर दी गई तो कहीं मंत्री के हाथ के इशारे ने लोगों को चुटकी लेने का मौका दे दिया। दूसरी ओर गड्ढों से भरी सड़कों को लेकर मंत्री का ऐसा बयान सामने आया जिसने सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी। इन सब घटनाओं ने यह साबित कर दिया कि राजनीति में कभी कभी एक छोटा सा दृश्य भी बड़ी चर्चा का विषय बन जाता है।

    बुरहानपुर में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह के साथ कुछ ऐसा हुआ जिसने वहां मौजूद लोगों को भी चौंका दिया। अजय सिंह कांग्रेस नेता अजय रघुवंशी के घर पहुंचे थे और उनके स्वागत की तैयारियां चल रही थीं। इसी दौरान अचानक हवाई फायरिंग की गई। माला पहनाने के समय हुई गोली की आवाज से अजय सिंह कुछ देर के लिए सहम गए। बताया गया कि उन्होंने फायरिंग करने वाले व्यक्ति से ऐसा न करने की बात भी कही। इसके बाद जब दोबारा फायरिंग हुई तो वह फिर चौंक गए। अब इस घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तरह तरह की चर्चाएं हो रही हैं। लोग सवाल उठा रहे हैं कि स्वागत के नाम पर इस तरह की गतिविधियां कितनी उचित हैं।

    उधर जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट का एक वीडियो भी चर्चा का विषय बन गया। केन बेतवा लिंक परियोजना के विस्थापितों से बातचीत के दौरान मंत्री ने एक ग्रामीण से मुख्यमंत्री का नाम पूछा। जब ग्रामीण स्पष्ट जवाब नहीं दे सका तो मंत्री ने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव का नाम बताया और फिर अपना परिचय भी दिया। उन्होंने खुद को इंदौर से आया बताते हुए अपने विभाग के बारे में जानकारी दी और कहा कि वह जल से जुड़ा विभाग संभालते हैं। लेकिन इस दौरान उनके हाथ के हाव भाव और इशारे को लेकर लोगों ने सोशल मीडिया पर टिप्पणियां शुरू कर दीं। वीडियो के सामने आने के बाद मंत्री का यह अंदाज चर्चा में आ गया।

    दमोह जिले के पथरिया में आनंद विभाग के मंत्री लखन पटेल ने सड़कों के गड्ढों को लेकर ऐसा बयान दिया जिसने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने कहा कि आज के लोगों को सड़कों के गड्ढे दिखाई देते हैं लेकिन पुराने समय में कई जगह सड़कें ही नहीं थीं। मंत्री ने लोगों को अपने बुजुर्गों से पूछने की सलाह देते हुए कहा कि पहले सड़कें देखना भी बड़ी बात थी। उनके इस बयान पर लोग अलग अलग प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कुछ इसे पुराने और नए दौर के विकास की तुलना बता रहे हैं तो कुछ लोग इसे खराब सड़कों की समस्या से ध्यान हटाने वाला बयान मान रहे हैं।

    इसी बीच खंडवा में एक प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान भाजपा सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल का फोन कॉल भी चर्चा में रहा। प्रशासन की टीम एक शराब दुकान के अहाते पर कार्रवाई कर रही थी तभी अधिकारी के पास सांसद का फोन आया। बताया गया कि कार्रवाई रुकवाने को लेकर बातचीत हुई लेकिन अधिकारी ने आदेश का हवाला देते हुए कार्रवाई जारी रखने की बात कही और सांसद को कलेक्टर से संपर्क करने का सुझाव दिया।

    इन घटनाओं ने मध्य प्रदेश की राजनीति को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। नेताओं के बयान हों या सार्वजनिक कार्यक्रमों में होने वाली घटनाएं हर मामला अब तेजी से सोशल मीडिया तक पहुंच रहा है और जनता भी उस पर अपनी प्रतिक्रिया दे रही है।

  • MP News: अपनी ही सरकार पर विधायक ने उठाए सवाल, भाजपा कार्यक्रम में महिला सम्मान पर बवाल; भोपाल थाने में TI और हिंदू नेता आमने-सामने

    MP News: अपनी ही सरकार पर विधायक ने उठाए सवाल, भाजपा कार्यक्रम में महिला सम्मान पर बवाल; भोपाल थाने में TI और हिंदू नेता आमने-सामने


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों सड़क से लेकर सरकारी दफ्तर और पार्टी के कार्यक्रम तक कई ऐसे मामले सामने आ रहे हैं जो सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बन गए हैं। कहीं भाजपा विधायक अपनी ही सरकार की सड़क व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए जनता के गुस्से का डर बता रहे हैं तो कहीं भाजपा के कार्यक्रम में महिला जनप्रतिनिधियों को बैठने के लिए कुर्सी तक नहीं मिलने पर सवाल खड़े हो रहे हैं। दूसरी ओर भोपाल के एक थाने में पुलिस अधिकारी और हिंदू संगठन के नेता के बीच तीखी बहस का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस और सामाजिक संगठनों के बीच तालमेल को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है।

    जबलपुर जिले के पाटन से भाजपा विधायक अजय विश्नोई ने प्रदेश की खराब सड़कों को लेकर खुलकर अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सड़कों की हालत खराब है और इसका सीधा असर जनप्रतिनिधियों पर पड़ता है। उनका कहना है कि जब सड़कें खराब होती हैं तो परेशान जनता सबसे पहले स्थानीय विधायक से सवाल करती है। विधायक ने यह भी कहा कि सड़क चाहे लोक निर्माण विभाग की हो या प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से जुड़ी हो कई जगहों पर स्थिति खराब है। उनके बयान को अपनी ही सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने के तौर पर देखा जा रहा है।

    विधायक ने सड़क निर्माण में भ्रष्टाचार और ठेकेदारी व्यवस्था को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि ठेकेदार काम हासिल करने की प्रतिस्पर्धा में कम दर पर ठेके लेते हैं और निर्माण प्रक्रिया में अनियमितताओं के कारण सड़कों की गुणवत्ता प्रभावित होती है। खराब सड़कें केवल आवागमन की परेशानी नहीं बल्कि आम लोगों की नाराजगी का कारण भी बनती हैं। यही वजह है कि विधायक ने कहा कि जनता की नाराजगी का पहला सामना स्थानीय जनप्रतिनिधियों को करना पड़ता है।

    दूसरी तस्वीर गुना के एक भाजपा कार्यक्रम से सामने आई जहां भाजपा विधायक प्रियंका मीणा और नगर पालिका अध्यक्ष सविता गुप्ता को काफी देर तक खड़े रहना पड़ा। कार्यक्रम में मौजूद पुरुष नेताओं के लिए कुर्सियां और सोफा मौजूद थे लेकिन दोनों महिला जनप्रतिनिधियों के लिए बैठने की व्यवस्था नजर नहीं आई। आखिरकार विधायक ने खुद अपनी कुर्सी लगाई और बैठ गईं। इसके बाद अपने भाषण में उन्होंने महिला जनप्रतिनिधियों को बराबरी का सम्मान दिए जाने की बात कही। उन्होंने महिला आरक्षण और राजनीतिक भागीदारी का जिक्र करते हुए कहा कि महिलाओं को भी बराबरी के साथ बैठाने से ही वास्तविक महिला सशक्तीकरण की तस्वीर सामने आएगी।

    इस घटना के बाद भाजपा के कार्यक्रमों में महिला जनप्रतिनिधियों के सम्मान और व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठने लगे हैं। प्रियंका मीणा इससे पहले भी महिलाओं से जुड़े मुद्दे पर अपनी ही पार्टी के विधायक पन्नालाल शाक्य के साथ सार्वजनिक मंच पर बहस को लेकर चर्चा में रह चुकी हैं।

    इसी बीच भोपाल के जहांगीराबाद थाने का एक वीडियो भी चर्चा में है। यहां हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी और थाना प्रभारी राजन सिंह के बीच एक मामले को लेकर तीखी बहस हो गई। बताया गया कि हिंदू संगठन के कार्यकर्ता शिकायत पर कार्रवाई की मांग को लेकर थाने पहुंचे थे। इसी दौरान पुलिस और संगठन के प्रतिनिधियों के बीच बात बढ़ गई। मौके पर एसीपी उमेश तिवारी भी मौजूद थे और दोनों पक्षों को शांत कराने का प्रयास करते नजर आए।

    इस पूरे घटनाक्रम के वीडियो सामने आने के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली और सामाजिक संगठनों के साथ संवाद को लेकर सवाल उठ रहे हैं। तीनों घटनाओं ने मध्य प्रदेश की सियासत और प्रशासन से जुड़े अलग अलग पहलुओं को एक साथ चर्चा में ला दिया है। सड़क व्यवस्था पर विधायक की नाराजगी हो या महिला जनप्रतिनिधियों को सम्मान देने का सवाल या फिर थाने में पुलिस और संगठन के बीच तीखी बहस ये घटनाएं बताती हैं कि जनता और जनप्रतिनिधियों से जुड़े मुद्दों पर अब सार्वजनिक जवाबदेही की मांग लगातार बढ़ रही है।

  • मुरैना में ट्रेन से तोमर का भाषण और भोपाल में पटवारी का हमला, MP की राजनीति में छाया इंजन-डिब्बे वाला तंज

    मुरैना में ट्रेन से तोमर का भाषण और भोपाल में पटवारी का हमला, MP की राजनीति में छाया इंजन-डिब्बे वाला तंज


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों नेताओं के बयानों और अंदाज को लेकर खूब चर्चा हो रही है। मुरैना में विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने संत रविदास की 650वीं जयंती के कार्यक्रम में जाति व्यवस्था को लेकर नेताओं पर सीधा निशाना साधा। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बीजेपी की सरकार और संगठन के भीतर कथित खींचतान को ट्रेन के इंजन और डिब्बों की लड़ाई बताकर सियासी तंज कसा। पटवारी का यह बयान 20 अगस्त को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में दिए गए उनके हमले के दौरान सामने आया था।

    मुरैना में संत रविदास जयंती के अवसर पर आयोजित समरसता संकल्प अभियान और यात्रा कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि जाति का बंधन भगवान ने नहीं बनाया। उन्होंने कहा कि समाज में अपनी व्यवस्था के लिए लोगों ने जाति व्यवस्था बनाई थी लेकिन बाद में इसके स्वरूप को बिगाड़ने और तुष्टिकरण की राजनीति को बढ़ावा देने का काम नेताओं ने अपने स्वार्थ के लिए किया। तोमर के इस बयान को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई है। संत रविदास के विचारों में सामाजिक समरसता और समानता का संदेश प्रमुख रहा है और इसी विचार को लेकर समरसता से जुड़े कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं।

    तोमर का दूसरा अंदाज तब देखने को मिला जब उन्होंने मुरैना के कैलारस से वीरपुर के बीच हाल ही में शुरू हुई मेमू ट्रेन में आम यात्रियों के साथ सफर किया। ट्रेन के अलग अलग स्टेशनों पर रुकने के दौरान उन्होंने लोगों को संबोधित भी किया। ट्रेन के अंदर खड़े होकर माइक से संबोधन के वीडियो सामने आने के बाद इसे लेकर सोशल मीडिया पर तरह तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। राजनीतिक कार्यक्रमों में नेताओं के भाषण और जनसंपर्क के इस अंदाज को लेकर लोग अपने अपने तरीके से टिप्पणी कर रहे हैं।

    इधर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बीजेपी की सरकार पर हमला बोलते हुए ट्रेन का ही उदाहरण इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि बीजेपी एक ऐसी ट्रेन बन गई है जिसमें डिब्बे कहते हैं कि इंजन हटा दो और इंजन कहता है कि डिब्बों को बदल दूंगा। पटवारी ने आरोप लगाया कि इस कथित खींचतान के बीच सबसे ज्यादा परेशानी आम जनता को हो रही है। उनके बयान की पुष्टि हालिया मीडिया रिपोर्टों में भी हुई है।

    पटवारी ने आरोप लगाया कि बीजेपी के बड़े नेता मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के खिलाफ दिल्ली तक जा रहे हैं जबकि दूसरी तरफ मुख्यमंत्री मंत्रिमंडल में बदलाव की बात कर रहे हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने इसी राजनीतिक स्थिति को इंजन और डिब्बों के बीच चल रही लड़ाई बताया। यह बयान विपक्ष की ओर से बीजेपी सरकार पर किया गया राजनीतिक हमला है और इसे इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

    पटवारी ने सरकार को घेरते हुए शिक्षा व्यवस्था और महंगाई जैसे मुद्दे भी उठाए। उन्होंने स्कूलों की स्थिति को लेकर कांग्रेस के जरिए जमीनी अभियान चलाने की बात कही और सरकार से शिक्षा व्यवस्था पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों और सांची दूध के दामों को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा।

    इस पूरे घटनाक्रम में दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर सामाजिक समरसता और जातिगत भेदभाव के मुद्दे पर नेताओं की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं तो दूसरी तरफ कांग्रेस बीजेपी की अंदरूनी राजनीति पर ट्रेन के इंजन और डिब्बों का रूपक इस्तेमाल कर रही है। दोनों बयानों ने मध्य प्रदेश की सियासत में एक बार फिर राजनीतिक बयानबाजी को तेज कर दिया है। अब इन मुद्दों पर आने वाली प्रतिक्रियाएं प्रदेश की राजनीतिक बहस को और गर्म कर सकती हैं।

  • MP की राजनीति में एक दिन के कई रंग: शिवलिंग लेकर दिखे सीएम तो जीप में ज्यादा भीड़ पड़ी भारी बच्चों ने पूछे विकास के सवाल

    MP की राजनीति में एक दिन के कई रंग: शिवलिंग लेकर दिखे सीएम तो जीप में ज्यादा भीड़ पड़ी भारी बच्चों ने पूछे विकास के सवाल


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजनीति में मंगलवार का दिन कई दिलचस्प घटनाओं का गवाह बना। कहीं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मंच पर शिवलिंग को कंधे पर उठाते नजर आए तो कहीं इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने मुख्यमंत्री की तुलना भगवान द्वारिकाधीश से कर दी। देवास में कांग्रेस की तिरंगा यात्रा के दौरान नेताओं की भीड़ एक खुली जीप पर भारी पड़ गई और कुछ नेता नीचे जा गिरे। वहीं छतरपुर में बच्चों ने मंत्री दिलीप अहिरवार का काफिला रोककर अपने स्कूल और सड़क से जुड़ी समस्याएं सामने रख दीं। इन घटनाओं के वीडियो और तस्वीरें सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में भी इनकी खूब चर्चा हो रही है।

    इंदौर में एक कार्यक्रम के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को शिवलिंग भेंट किया। शिवलिंग हाथ में लेते ही मुख्यमंत्री ने उसे अपने कंधे पर उठा लिया। उनका यह अंदाज फिल्म बाहुबली के चर्चित दृश्य की याद दिलाता नजर आया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने इस पल का वीडियो बनाया जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगा। इसके बाद इस दृश्य को लेकर राजनीतिक चर्चाओं का दौर भी शुरू हो गया।

    इसी कार्यक्रम में इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने मुख्यमंत्री को लेकर अपने संबोधन में भगवान द्वारिकाधीश का संदर्भ दिया। उन्होंने चंदन नगर में सड़क निर्माण से जुड़ी मांग रखते हुए मुख्यमंत्री से समस्या के समाधान की अपील की। संबोधन के दौरान महापौर से एक और दिलचस्प गलती हो गई। वे मंत्री तुलसी सिलावट का नाम लेना चाह रहे थे लेकिन जुबान फिसलने के कारण उन्होंने कैलाश विजयवर्गीय को जल संसाधन मंत्री बता दिया। मुख्यमंत्री के इशारे के बाद महापौर ने तुरंत अपनी गलती सुधार ली।

    उधर देवास के कांटाफोड़ में कांग्रेस की तिरंगा यात्रा के दौरान एक अलग ही तस्वीर सामने आई। यात्रा में शामिल होने के लिए एक खुली जीप में कई कांग्रेस नेता सवार हो गए। बताया गया कि जीप में 10 से ज्यादा लोग मौजूद थे। पीछे अधिक वजन होने के कारण जीप का अगला हिस्सा ऊपर उठ गया और पीछे बैठे कुछ नेता नीचे जा गिरे। इस दौरान पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा कांग्रेस जिला अध्यक्ष मनीष चौधरी और पूर्व विधायक विपिन वानखेड़े समेत कई नेता जीप में मौजूद थे। हादसे में एक महिला कांग्रेस नेता के घायल होने की बात सामने आई है जिन्हें उपचार के दौरान टांके लगाए गए।

    इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर कांग्रेस के सबका साथ जैसे राजनीतिक नारों को लेकर भी चुटकी ली गई। हालांकि रैली के दौरान वाहन पर क्षमता से अधिक लोगों के सवार होने की स्थिति सुरक्षा को लेकर सवाल जरूर खड़े करती है।

    छतरपुर के बसराही गांव में मंत्री दिलीप अहिरवार का काफिला बच्चों ने रोक लिया। मंत्री चंदला विधानसभा क्षेत्र से गुजर रहे थे तभी बच्चों ने रास्ते में आकर उनसे अपने स्कूल और गांव की समस्याओं के बारे में बात की। बच्चों ने स्कूल तक खराब सड़क स्कूल की बाउंड्री वॉल और बिजली से जुड़ी परेशानियां बताईं। मंत्री ने वाहन से उतरकर बच्चों की बातें सुनीं और समस्याओं के समाधान का भरोसा दिया।

    यह घटना इस मायने में भी खास रही कि बच्चों ने बिना किसी झिझक के सीधे मंत्री के सामने अपनी समस्याएं रखीं। गांव की बुनियादी सुविधाओं से जुड़े सवालों को लेकर बच्चों की सक्रियता ने लोगों का ध्यान खींचा है। अब देखना होगा कि बच्चों की ओर से बताई गई समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासन कितनी तेजी से कदम उठाता है।

    इन घटनाओं के बीच प्रशासनिक गलियारों से जुड़ी एक चर्चा भी सामने आई है। राजधानी में हाल ही में पदस्थ हुए एक आईएएस अधिकारी को सरकारी बंगला आवंटित होने और उसमें उनकी पसंद के अनुसार रेनोवेशन शुरू होने की बात कही जा रही है। इसी बीच अधिकारी की कटारा हिल्स इलाके में एक निजी बंगले में रुचि की चर्चा भी प्रशासनिक हलकों में है। हालांकि इस मामले से जुड़े दावों की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।

    कुल मिलाकर मध्य प्रदेश की सियासत और प्रशासन से जुड़ी इन घटनाओं ने एक ही दिन में कई रंग दिखा दिए। मुख्यमंत्री का शिवलिंग उठाने वाला अंदाज हो या महापौर की जुबान फिसलने का मामला कांग्रेस नेताओं का जीप से गिरना हो या बच्चों का मंत्री का काफिला रोककर अपनी बात कहना इन सभी घटनाओं ने लोगों का ध्यान खींचा है।

  • नामांतरण मामलों की जानकारी न मिलने पर भड़के विधायक, प्रशासन पर लगाया लापरवाही का आरोप

    नामांतरण मामलों की जानकारी न मिलने पर भड़के विधायक, प्रशासन पर लगाया लापरवाही का आरोप


    नई दिल्ली ।  मध्य प्रदेश के रतलाम जिले की सैलाना विधानसभा से विधायक Kamleshwar Dodiyar ने नगर परिषद सैलाना के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए 14 मई से धरने पर बैठने की चेतावनी दी है। विधायक का आरोप है कि नगर परिषद द्वारा जनहित से जुड़े नामांतरण प्रकरणों की जानकारी समय पर उपलब्ध नहीं कराई जा रही है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था और जनप्रतिनिधि के अधिकारों का उल्लंघन है।

    विधायक डोडियार ने बताया कि उन्होंने 28 अप्रैल 2026 को पत्र क्रमांक 244/VIP/2026 के माध्यम से मुख्य नगरपालिका अधिकारी से नामांतरण मामलों की विस्तृत जानकारी मांगी थी। इसमें यह पूछा गया था कि 26 मार्च 2026 तक कितने नामांतरण प्रकरण प्राप्त हुए, उनमें से कितने स्वीकृत और कितने अस्वीकृत किए गए।

    इसके अलावा उन्होंने स्वीकृत और अस्वीकृत मामलों की अलग-अलग सूची, आवेदकों के नाम, संपत्ति का विवरण, खसरा नंबर, वार्ड नंबर और स्वीकृति तिथि जैसी विस्तृत जानकारी भी मांगी थी। साथ ही यह भी स्पष्ट करने को कहा गया था कि स्वीकृत सभी प्रकरण नगरीय सीमा क्षेत्र में आते हैं या नहीं।

    विधायक का कहना है कि इतने महत्वपूर्ण जनहित के मुद्दे पर नगर परिषद द्वारा निर्धारित समय सीमा में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई, जिससे क्षेत्र के लोगों में असंतोष बढ़ रहा है। नागरिकों की लगातार शिकायतें भी सामने आ रही हैं कि नामांतरण मामलों में अनावश्यक देरी की जा रही है।

    इसी लापरवाही के विरोध में विधायक ने 14 मई से नगर परिषद के खिलाफ अनिश्चितकालीन धरने की घोषणा की है। उन्होंने इसकी सूचना सैलाना एसडीएम और थाना प्रभारी को भी दे दी है तथा धरने के दौरान सुरक्षा और आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने की मांग की है। यह मामला अब प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच टकराव का रूप लेता दिख रहा है, जिस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

  • दलित आदिवासी और OBC के मुद्दे पर सरकार घिरी UCC पर नेता प्रतिपक्ष का बड़ा बयान

    दलित आदिवासी और OBC के मुद्दे पर सरकार घिरी UCC पर नेता प्रतिपक्ष का बड़ा बयान

    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर सियासी माहौल गर्माता जा रहा है सरकार जहां इस कानून को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है वहीं विपक्ष ने इस पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार की मंशा और प्रक्रिया दोनों पर सवाल उठाते हुए इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया है

    उमंग सिंघार ने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि UCC को सर्वसम्मति से लागू किया जाएगा या इसे जबरन थोपा जाएगा उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार संविधान और लोकतंत्र की भावना के विपरीत काम कर रही है सिंघार ने खास तौर पर दलित और आदिवासी समुदायों को लेकर चिंता जताई और पूछा कि क्या इन वर्गों को UCC के दायरे में शामिल किया जाएगा या नहीं

    उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि सात सदस्यों की कमेटी आखिर कैसे तय करेगी कि किन लोगों को इस कानून में शामिल किया जाना चाहिए और किन्हें नहीं उनके अनुसार इतने महत्वपूर्ण विषय पर निर्णय लेने से पहले प्रदेश की जनता से व्यापक राय लेना जरूरी है उन्होंने सरकार से अपील की कि वह इस मुद्दे पर पारदर्शिता बरते और जनता के साथ संवाद स्थापित करे

    इस दौरान सिंघार ने असलम चमड़ा मामले को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा उन्होंने आरोप लगाया कि असलम हो या अन्य आरोपी उन्हें सत्ता पक्ष का संरक्षण मिल रहा है उन्होंने कहा कि इन मामलों में नगर निगम और विभागीय स्तर पर कनेक्शन सामने आ रहे हैं लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है

    नेता प्रतिपक्ष ने यह भी कहा कि विपक्ष ने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए मुद्दों को उठाया लेकिन सत्ता पक्ष ने आरोपियों को बचाने का काम किया उन्होंने सरकार से जवाब मांगा कि आखिर इन मामलों में सख्त कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही

    इसके अलावा सिंघार ने OBC आरक्षण के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा उन्होंने कहा कि सरकार इस विषय पर गंभीर नहीं है और केवल राजनीतिक लाभ के लिए OBC वर्ग का इस्तेमाल कर रही है उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बार बार मामले को कोर्ट के पाले में डाल रही है और खुद जिम्मेदारी लेने से बच रही है

    सिंघार ने यह भी कहा कि सरकार अपने लोगों को लाभ पहुंचाने में ज्यादा रुचि दिखा रही है जबकि आम जनता के मुद्दों को नजरअंदाज किया जा रहा है उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर कब तक OBC आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर निर्णय टलता रहेगा

    कुल मिलाकर UCC OBC आरक्षण और अन्य मामलों को लेकर मध्य प्रदेश में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है जहां एक ओर सरकार इसे सुधार की दिशा में कदम बता रही है वहीं विपक्ष इसे जनता के हितों के खिलाफ बताते हुए लगातार हमलावर बना हुआ है आने वाले समय में यह मुद्दा और अधिक तूल पकड़ सकता है और प्रदेश की राजनीति को प्रभावित कर सकता है

  • नर्मदापुरम में क्रेडिट की सियासत शिवराज के स्वागत में दिखीं सांसद लेकिन पोस्ट से गायब हुआ नाम

    नर्मदापुरम में क्रेडिट की सियासत शिवराज के स्वागत में दिखीं सांसद लेकिन पोस्ट से गायब हुआ नाम

    नर्मदापुरम । मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम में एक साधारण सा स्वागत कार्यक्रम अचानक सियासी चर्चा का केंद्र बन गया जब केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के दौरे के दौरान हुई एक छोटी सी सोशल मीडिया गतिविधि ने बड़े सवाल खड़े कर दिए इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि राजनीति में हर तस्वीर और हर शब्द के अपने मायने होते हैं

    मंगलवार रात करीब 10 बजकर 10 मिनट पर शिवराज सिंह चौहान का काफिला भाजपा सांसद दर्शन सिंह चौधरी के जनता कार्यालय पहुंचा जहां उनका भव्य स्वागत किया गया ढोल नगाड़ों और आतिशबाजी के बीच उन्हें पारंपरिक तरीके से हल भेंट किया गया कार्यक्रम छोटा था और शिवराज सिंह करीब 10 मिनट रुककर आगे बढ़ गए लेकिन इसके बाद जो हुआ उसने पूरे मामले को चर्चा में ला दिया

    कार्यक्रम के बाद सांसद दर्शन सिंह चौधरी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर स्वागत की तस्वीरें साझा कीं इन तस्वीरों में क्षेत्र के कई प्रमुख नेता और कार्यकर्ता नजर आए पोस्ट में विधायकों और जिला अध्यक्ष का नाम विस्तार से लिखा गया लेकिन हैरानी की बात यह रही कि राज्यसभा सांसद माया नारोलिया का नाम पूरी तरह से गायब था

    दिलचस्प पहलू यह है कि जिन तस्वीरों को पोस्ट किया गया उनमें माया नारोलिया स्पष्ट रूप से सामने की पंक्ति में खड़ी दिखाई दे रही हैं वह विधायक के ठीक बगल में मुस्कुराती नजर आती हैं यानी उनकी मौजूदगी किसी से छिपी नहीं थी इसके बावजूद पोस्ट में उनका नाम शामिल न होना कई सवाल खड़े कर रहा है

    इस पूरे घटनाक्रम के बाद स्थानीय राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है लोग यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि यह महज एक मानवीय भूल है या फिर इसके पीछे कोई सियासी रणनीति या आंतरिक खींचतान छिपी हुई है कई लोग इसे भाजपा के भीतर चल रही क्रेडिट की राजनीति से जोड़कर देख रहे हैं जहां बड़े नेताओं के कार्यक्रमों में अपने योगदान को प्रमुखता देने की होड़ रहती है

    राजनीति में क्रेडिट लेना और देना दोनों ही अहम माना जाता है ऐसे में किसी वरिष्ठ नेता का नाम नजरअंदाज करना सामान्य बात नहीं मानी जाती खासकर तब जब वह कार्यक्रम में प्रमुख रूप से मौजूद हों यही वजह है कि इस छोटी सी चूक ने बड़ा रूप ले लिया है और सोशल मीडिया पर लोग इस पर तरह तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं

    हालांकि इस मामले पर अभी तक किसी भी नेता की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है लेकिन जिस तरह से यह मुद्दा चर्चा में आया है उससे साफ है कि आने वाले दिनों में यह सियासी समीकरणों पर असर डाल सकता है

    यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि आज के दौर में सोशल मीडिया केवल जानकारी साझा करने का माध्यम नहीं बल्कि राजनीति का एक महत्वपूर्ण मंच बन चुका है जहां एक छोटी सी पोस्ट भी बड़े राजनीतिक संदेश दे सकती है और कभी कभी अनजाने में ही विवाद का कारण बन जाती है

  • महिला आरक्षण पर कांग्रेस का बड़ा फैसला नेताओं की पत्नियों को नहीं मिलेगा टिकट

    महिला आरक्षण पर कांग्रेस का बड़ा फैसला नेताओं की पत्नियों को नहीं मिलेगा टिकट

    भोपाल । भोपाल में आयोजित महिला कांग्रेस की अहम बैठक में महिला आरक्षण को लेकर एक बड़ा और संकेतात्मक फैसला सामने आया है जिसने प्रदेश की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है सूत्रों के अनुसार बैठक में इस बात पर गंभीर चर्चा हुई कि यदि किसी विधानसभा या लोकसभा सीट को महिलाओं के लिए आरक्षित किया जाता है तो वहां पुरुष नेताओं की पत्नियों या पारिवारिक सदस्यों को टिकट नहीं दिया जाएगा बल्कि पार्टी की सक्रिय और जमीनी महिला कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दी जाएगी

    यह बैठक प्रदेश कांग्रेस कमेटी कार्यालय में आयोजित हुई जहां महिला सशक्तिकरण और संगठन को मजबूत करने के उद्देश्य से कई मुद्दों पर विचार विमर्श किया गया इस दौरान यह बात प्रमुख रूप से सामने आई कि महिला आरक्षण का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा जब उन महिलाओं को आगे बढ़ने का अवसर दिया जाए जो लंबे समय से संगठन के लिए काम कर रही हैं और जमीनी स्तर पर सक्रिय भूमिका निभा रही हैं

    बैठक में मौजूद नेताओं ने यह भी कहा कि अब समय आ गया है कि राजनीति में परिवारवाद की परंपरा को सीमित किया जाए खासकर उन परिस्थितियों में जहां महिलाओं के लिए सीट आरक्षित की जाती है वहां केवल पारिवारिक आधार पर टिकट देना महिला नेतृत्व के वास्तविक विकास में बाधा बन सकता है यही कारण है कि पार्टी के भीतर इस सोच को आगे बढ़ाया जा रहा है कि टिकट वितरण में पारदर्शिता और योग्यता को प्राथमिकता दी जाए

    सूत्रों के मुताबिक इस प्रस्ताव को पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी के समक्ष रखने की तैयारी की जा रही है जहां इसे औपचारिक मंजूरी मिल सकती है यदि यह प्रस्ताव पारित होता है तो यह न केवल मध्यप्रदेश बल्कि पूरे देश में कांग्रेस के लिए एक सकारात्मक संदेश के रूप में देखा जाएगा क्योंकि इससे यह संकेत जाएगा कि पार्टी महिला सशक्तिकरण को केवल नारे तक सीमित नहीं रखना चाहती बल्कि उसे व्यवहार में भी लागू करना चाहती है

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह का कदम पार्टी के भीतर नई ऊर्जा का संचार कर सकता है और उन महिला कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहित करेगा जो वर्षों से संगठन में सक्रिय रहते हुए भी अवसर की प्रतीक्षा कर रही हैं इससे पार्टी की छवि में भी सुधार हो सकता है और युवा तथा महिला मतदाताओं के बीच विश्वास बढ़ सकता है

    हालांकि इस प्रस्ताव को लेकर अंतिम निर्णय अभी बाकी है लेकिन जिस तरह से इसे लेकर चर्चा हुई है उससे साफ संकेत मिलते हैं कि कांग्रेस अब संगठनात्मक ढांचे में बदलाव और सुधार की दिशा में आगे बढ़ रही है आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह प्रस्ताव किस रूप में लागू होता है और इसका राजनीतिक परिदृश्य पर क्या प्रभाव पड़ता है

    कुल मिलाकर भोपाल में हुई इस बैठक ने यह स्पष्ट कर दिया है कि महिला आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस केवल औपचारिकता निभाने के बजाय ठोस और प्रभावी कदम उठाने की दिशा में सोच रही है जो आने वाले चुनावों में पार्टी की रणनीति का अहम हिस्सा बन सकता है