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  • जहां बहता था पानी वहां बस गई कॉलोनियां नहर पर कब्जे ने खड़ा किया बड़ा सवाल

    जहां बहता था पानी वहां बस गई कॉलोनियां नहर पर कब्जे ने खड़ा किया बड़ा सवाल


    विदिशा ।
    मध्य प्रदेश के विदिशा से सामने आया एक मामला इन दिनों प्रशासनिक व्यवस्था और राजनीतिक तंत्र दोनों पर सवाल खड़े कर रहा है यहां दशकों पुरानी एक सिंचाई नहर का अस्तित्व लगभग खत्म हो चुका है और जहां कभी किसानों के खेतों तक पानी पहुंचता था वहां अब कंक्रीट की कॉलोनियां खड़ी नजर आ रही हैं इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल किसानों की चिंता बढ़ाई है बल्कि सियासत को भी गरमा दिया है

    दरअसल दौलतपुरा और मदनखेड़ा इलाके में वर्षों पहले उद्वहन सिंचाई योजना के तहत एक नहर बनाई गई थी इस योजना का उद्देश्य था कि हर खेत तक पानी पहुंचे और किसानों की फसल सुरक्षित रहे लेकिन समय के साथ इस नहर की जमीन पर धीरे धीरे कब्जे होते चले गए और अब स्थिति यह है कि नहर का नामोनिशान तक मिटता जा रहा है

    स्थानीय लोगों का कहना है कि जहां कभी पानी बहता था वहां अब पक्के निर्माण हो चुके हैं और आलीशान कॉलोनियां बस गई हैं केवल एक जर्जर ढांचा बचा है जो इस बात की गवाही देता है कि यहां कभी सिंचाई व्यवस्था मौजूद थी बाकी जमीन पूरी तरह कब्जे में जा चुकी है

    यह मामला अब राजनीतिक रंग भी ले चुका है क्योंकि यह वही क्षेत्र है जहां से केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का संबंध है कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर भाजपा पर तीखा हमला बोला है कांग्रेस प्रवक्ता आनंद जाट ने आरोप लगाया कि किसानों के हितों की बात करने वाले नेता के जिले में ही किसानों की नहर गायब हो गई और जिम्मेदारों को इसकी भनक तक नहीं लगी

    उन्होंने यह भी कहा कि भू माफियाओं ने नहर की जमीन पर कब्जा कर लिया है और भाजपा सरकार उन्हें संरक्षण दे रही है कांग्रेस ने प्रशासन से मांग की है कि तत्काल कार्रवाई कर कब्जा हटाया जाए और किसानों को उनका अधिकार वापस दिलाया जाए

    वहीं प्रशासन की ओर से कहा गया है कि यह मामला 40 से 50 साल पुराना है और पुराने दस्तावेजों को खंगालने में समय लग रहा है अधिकारियों के अनुसार जैसे जैसे रिकॉर्ड मिल रहे हैं उन्हें राजस्व विभाग को सौंपा जा रहा है ताकि आगे की कार्रवाई की जा सके

    इस बीच राजस्व विभाग ने भी सक्रियता दिखाते हुए अब तक 11 लोगों को नोटिस जारी किए हैं जिन पर नहर की जमीन पर कब्जा करने का आरोप है तहसीलदार निधि लोधी ने बताया कि जांच जारी है और जल्द ही अवैध कब्जों को हटाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी

    यह मामला केवल जमीन के कब्जे तक सीमित नहीं है बल्कि यह सवाल भी उठाता है कि सरकारी योजनाओं की निगरानी और संरक्षण कैसे किया जा रहा है यदि दशकों पुरानी एक महत्वपूर्ण सिंचाई व्यवस्था इस तरह खत्म हो सकती है तो अन्य योजनाओं की स्थिति क्या होगी

    अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या प्रशासन इस नहर को कब्जामुक्त कर पाएगा और किसानों को उनका हक वापस मिल पाएगा या यह मामला भी केवल सियासी बयानबाजी और खबरों तक ही सीमित रह जाएगा

  • IPS को धमकी मामले में सियासत गरमाई जीतू पटवारी ने पुलिस की चुप्पी पर साधा निशाना


    भोपाल । भोपाल में बीजेपी विधायक प्रीतम सिंह लोधी द्वारा एक आईपीएस अधिकारी को कथित धमकी दिए जाने के मामले ने अब सियासी तूल पकड़ लिया है। इस घटना को लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मध्यप्रदेश पुलिस की भूमिका और कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने पुलिस तंत्र को एक खुला पत्र लिखते हुए न केवल मौजूदा व्यवस्था पर टिप्पणी की है बल्कि कानून व्यवस्था और पुलिस की निष्पक्षता को लेकर भी तीखी चिंता जताई है।

    अपने पत्र में जीतू पटवारी ने लिखा कि यह घटना केवल किसी एक व्यक्ति की भाषा या व्यवहार का मामला नहीं है, बल्कि यह उस खतरनाक माहौल का संकेत है जिसमें सत्ता का अहंकार कानून और संविधान पर भारी पड़ता दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि बार-बार ऐसे मामले सामने आते हैं जहां सत्ताधारी दल से जुड़े लोग पुलिस अधिकारियों पर दबाव बनाने या उन्हें अपमानित करने की कोशिश करते हैं, लेकिन इन घटनाओं के बाद पुलिस की प्रतिक्रिया अक्सर सीमित और संयमित रह जाती है।

    पटवारी ने पुलिस अधिकारियों से सवाल करते हुए पूछा कि आखिर कौन सी परिस्थितियां हैं जिनके कारण देश के सबसे प्रशिक्षित और अनुशासित अधिकारी भी रक्षात्मक स्थिति में नजर आते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जब अन्याय के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की जरूरत होती है तब पुलिस की आवाज कमजोर क्यों पड़ जाती है और आम नागरिकों के मामलों में वही तंत्र इतना कठोर कैसे हो जाता है।

    अपने पत्र में उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यदि पुलिस निष्पक्ष होकर और संविधान के दायरे में काम करे तो किसी भी नेता या प्रभावशाली व्यक्ति की हिम्मत नहीं होगी कि वह कानून पर दबाव डाल सके। लेकिन जब पुलिस को दबाव में काम करना पड़ता है तो उसकी स्वतंत्रता और कार्यक्षमता दोनों प्रभावित होती हैं।

    जीतू पटवारी ने IPS एसोसिएशन के पत्र का भी उल्लेख किया और कहा कि उसमें आक्रोश कम और विवशता अधिक नजर आती है। उनके अनुसार यह स्थिति केवल पुलिस के लिए नहीं बल्कि पूरे लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है क्योंकि यदि कानून लागू करने वाली संस्था ही कमजोर दिखाई देगी तो आम जनता का भरोसा व्यवस्था पर कैसे कायम रहेगा।

    हालांकि उन्होंने अपने पत्र में यह भी स्पष्ट किया कि यह आलोचना पुलिस बल के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा कि देश के लाखों पुलिसकर्मी दिन रात अपनी जान जोखिम में डालकर सेवा करते हैं और उनके साहस और मेहनत का पूरा देश सम्मान करता है। उनका संदेश उन परिस्थितियों के खिलाफ है जो पुलिस को उसकी मूल भूमिका से दूर कर रही हैं।

    पटवारी ने कहा कि पुलिस को अपने भीतर के साहस को याद रखना चाहिए और संविधान को अपना सबसे बड़ा संरक्षक मानना चाहिए न कि किसी व्यक्ति या सत्ता को। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कानून की रक्षा करने वाले ही चुप हो जाएंगे तो समाज में अन्याय को बढ़ावा मिलेगा और कानून का शासन कमजोर पड़ जाएगा।

    यह पूरा मामला अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है जहां एक तरफ कांग्रेस पुलिस की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर सवाल उठा रही है वहीं दूसरी ओर सत्ता पक्ष इसे राजनीतिक बयानबाजी बता रहा है। फिलहाल इस पत्र ने मध्यप्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में नई चर्चा जरूर छेड़ दी है।

  • शक्ति प्रदर्शन के बीच भाजपा कार्यालय की नई शुरुआत क्या इस बार खड़ी होंगी दीवारें

    शक्ति प्रदर्शन के बीच भाजपा कार्यालय की नई शुरुआत क्या इस बार खड़ी होंगी दीवारें


    सीहोर । मध्यप्रदेश के सीहोर जिले में भारतीय जनता पार्टी ने एक बार फिर अपने नए जिला कार्यालय के निर्माण को लेकर बड़ा कदम उठाया है लेकिन इस बार के भूमिपूजन के साथ ही पुरानी यादें और अधूरे वादे भी चर्चा में आ गए हैं। स्थापना दिवस के मौके पर आयोजित इस कार्यक्रम में पार्टी ने पूरे उत्साह और शक्ति प्रदर्शन के साथ नए कार्यालय के निर्माण का शंखनाद किया हालांकि राजनीतिक गलियारों में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या इस बार यह परियोजना जमीन से उठकर वास्तव में पूरी हो पाएगी।

    इछावर रोड स्थित निर्धारित भूमि पर आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए और भूमिपूजन की औपचारिकता पूरी की। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं की मौजूदगी ने इसे एक तरह के राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन का रूप दे दिया।

    पार्टी के जिला अध्यक्ष नरेश मेवाड़ा के अनुसार प्रस्तावित कार्यालय आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा और करीब 10 हजार वर्गफीट क्षेत्र में विकसित किया जाएगा। इस भवन के निर्माण पर लगभग डेढ़ से ढाई करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। इसमें संगठन के विभिन्न पदाधिकारियों के लिए अलग अलग कक्ष मीटिंग हॉल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा और चुनावी रणनीति तैयार करने के लिए एक अत्याधुनिक वार रूम भी बनाया जाएगा। साथ ही बाहर से आने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं के ठहरने के लिए गेस्टहाउस की व्यवस्था भी की जाएगी।

    हालांकि इस पूरे प्रोजेक्ट को लेकर सबसे बड़ी चुनौती इसकी विश्वसनीयता को लेकर है क्योंकि यह पहला मौका नहीं है जब इस कार्यालय के निर्माण की घोषणा हुई हो। इससे पहले भी कई बार भूमिपूजन हो चुका है लेकिन निर्माण कार्य कभी धरातल पर नहीं उतर सका। वर्ष 2016 में पहली बार भूमि क्रय कर शिलान्यास किया गया था लेकिन इसके बाद भी योजनाएं कागजों तक ही सीमित रहीं। यही वजह है कि फिलहाल पार्टी का जिला कार्यालय किराए के भवन में संचालित हो रहा है जिससे संगठनात्मक कामकाज में अस्थिरता बनी रहती है।

    इस बार पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट लक्ष्य तय करते हुए दावा किया है कि निर्माण कार्य एक वर्ष के भीतर पूरा कर लिया जाएगा और 6 अप्रैल 2027 को इसका विधिवत लोकार्पण किया जाएगा। यह घोषणा कार्यकर्ताओं में नई उम्मीद जरूर जगाती है लेकिन पिछले अनुभवों को देखते हुए लोगों के मन में आशंका भी बनी हुई है।

    कुल मिलाकर यह परियोजना केवल एक भवन निर्माण तक सीमित नहीं है बल्कि यह संगठन की साख और भरोसे से भी जुड़ी हुई है। अब देखना यह होगा कि क्या इस बार भाजपा अपने इस लंबे समय से लंबित वादे को पूरा कर पाती है या फिर यह पहल भी पिछले प्रयासों की तरह अधूरी रह जाएगी। फिलहाल नजरें 2027 की तय समयसीमा पर टिकी हैं जो इस पूरे प्रोजेक्ट की असली परीक्षा साबित होगी।

  • दतिया विधायक की गिरफ्तारी से सियासी हलचल तेज 2015 के एफडीआर मामले में कोर्ट का फैसला कल संभव

    दतिया विधायक की गिरफ्तारी से सियासी हलचल तेज 2015 के एफडीआर मामले में कोर्ट का फैसला कल संभव


    दतिया । मध्यप्रदेश की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई जब दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को दिल्ली में गिरफ्तार किए जाने की खबर सामने आई जानकारी के अनुसार यह कार्रवाई भ्रष्टाचार से जुड़े एक पुराने मामले में की गई है जिसमें वर्ष 2015 में भूमि विकास बैंक से एफडीआर रिलीज से संबंधित अनियमितताओं के आरोप शामिल हैं

    बताया जा रहा है कि जांच एजेंसियां लंबे समय से इस मामले की पड़ताल कर रही थीं और अब पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद विधायक को हिरासत में लिया गया है गिरफ्तारी के बाद उन्हें न्यायिक प्रक्रिया के तहत कोर्ट में पेश किया जाएगा जहां इस मामले में आगे की सुनवाई होगी सूत्रों के मुताबिक कल अदालत द्वारा सजा को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया जा सकता है जिससे इस पूरे प्रकरण पर स्थिति और स्पष्ट हो जाएगी

    यह मामला वर्ष 2015 से जुड़ा हुआ है जब भूमि विकास बैंक में एफडीआर रिलीज को लेकर कथित गड़बड़ियां सामने आई थीं आरोप है कि इस प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी करते हुए आर्थिक अनियमितताएं की गईं जिससे वित्तीय नुकसान हुआ इस प्रकरण में जांच के दौरान कई दस्तावेजों और लेनदेन की जांच की गई जिसके आधार पर अब कार्रवाई तेज की गई है

    राजनीतिक दृष्टि से यह घटनाक्रम काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे न केवल क्षेत्रीय बल्कि प्रदेश स्तर पर भी सियासी असर देखने को मिल सकता है विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों की नजरें अब कोर्ट के फैसले पर टिकी हुई हैं यदि अदालत सजा सुनाती है तो इसका सीधा असर राजनीतिक समीकरणों पर पड़ सकता है वहीं यदि राहत मिलती है तो यह मामला एक अलग मोड़ ले सकता है

    गिरफ्तारी के बाद समर्थकों और विरोधियों के बीच प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं जहां एक ओर कांग्रेस कार्यकर्ता इसे राजनीतिक दबाव की कार्रवाई बता रहे हैं वहीं दूसरी ओर विरोधी दल इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई के रूप में देख रहे हैं हालांकि आधिकारिक रूप से जांच एजेंसियों की ओर से विस्तृत बयान अभी सामने नहीं आया है

    कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले में अदालत का फैसला कई मायनों में महत्वपूर्ण होगा क्योंकि यह लंबे समय से लंबित एक वित्तीय अनियमितता के मामले को अंतिम दिशा देगा साथ ही यह भी तय करेगा कि आरोप कितने मजबूत हैं और उनके आधार पर सजा किस हद तक संभव है

    फिलहाल सभी की निगाहें कोर्ट की अगली कार्यवाही पर टिकी हुई हैं जहां इस मामले में निर्णायक स्थिति सामने आ सकती है यह घटनाक्रम न केवल एक विधायक के राजनीतिक भविष्य के लिए बल्कि प्रदेश की राजनीति के व्यापक परिदृश्य के लिए भी अहम माना जा रहा है

  • MP की राजनीति हिली! दिग्विजय सिंह के बयान से कांग्रेस नेता के राज्यसभा मार्ग पर सस्पेंस

    MP की राजनीति हिली! दिग्विजय सिंह के बयान से कांग्रेस नेता के राज्यसभा मार्ग पर सस्पेंस

    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश कांग्रेस में राज्यसभा सीट को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह का बड़ा बयान सामने आया है। यह बयान कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार द्वारा लिखे गए पत्र के संदर्भ में आया था। पत्र में आग्रह किया गया था कि आगामी राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस को अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति समुदाय से किसी नेता को उम्मीदवार बनाना चाहिए। इस मांग के सामने आने के बाद पार्टी के भीतर सियासी हलचल तेज हो गई और सवाल उठने लगा कि क्या दिग्विजय सिंह एक बार फिर राज्यसभा जाएंगे या नहीं।

    दिग्विजय सिंह ने स्पष्ट किया, “यह मेरे हाथ में नहीं है। पार्टी का फैसला जो भी होगा, वह सर्वमान्य होगा। इतना जरूर मैं कह सकता हूं कि मैं अपनी राज्यसभा सीट खाली कर रहा हूं।” उनके इस बयान को कांग्रेस के भीतर बड़ा राजनीतिक संकेत माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इस बार दिग्विजय सिंह राज्यसभा के लिए नहीं जाएंगे, जिससे मध्य प्रदेश की सियासत में नए समीकरण बन सकते हैं।

    दिग्विजय सिंह का वर्तमान कार्यकाल इस वर्ष जून में समाप्त हो रहा है। राज्य में कुल तीन राज्यसभा सीटों पर चुनाव होने हैं। कांग्रेस के पास 64, बीएपी के पास 1 और भारतीय जनता पार्टी के पास 165 विधायक हैं। इस हिसाब से राजनीतिक समीकरण, दलों की ताकत और उम्मीदवारों का चयन सभी के लिए महत्वपूर्ण बना हुआ है।

    राज्यसभा सीटों की इस लड़ाई में अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति समुदाय से उम्मीदवार का चयन पार्टी की छवि और स्थानीय समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है। दिग्विजय सिंह के फैसले के बाद अब कांग्रेस के नेताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच सस्पेंस और रणनीति का माहौल है। राजनीतिक विश्लेषक इसे मध्य प्रदेश की सियासत में एक नया मोड़ भी मान रहे हैं, क्योंकि राज्यसभा चुनाव हमेशा पार्टी की भीतरी ताकत और प्रभाव को दिखाने का मौका होते हैं।

    इस घटना ने साफ कर दिया है कि कांग्रेस राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन में सामुदायिक समीकरणों और अनुभव को ध्यान में रखते हुए रणनीति बना रही है। दिग्विजय सिंह का यह कदम पार्टी के भीतर नए नेताओं के लिए अवसर और सियासी समीकरणों में बदलाव ला सकता है। इस पूरे घटनाक्रम ने मध्य प्रदेश की सियासत को रोचक और रणनीतिक मोड़ दे दिया है, और अब सबकी निगाहें आगामी राज्यसभा चुनाव पर टिकी हुई हैं।

  • लॉ एंड ऑर्डर से लेकर रोजगार तक CM मोहन यादव का बड़ा बयान: कहा-मंत्री का भाई भी नहीं बचा मार्गदर्शन मिला तो मंत्रिमंडल बदलेगा

    लॉ एंड ऑर्डर से लेकर रोजगार तक CM मोहन यादव का बड़ा बयान: कहा-मंत्री का भाई भी नहीं बचा मार्गदर्शन मिला तो मंत्रिमंडल बदलेगा


    भोपाल /मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कार्यकाल को 13 दिसंबर को दो साल पूरे हो रहे हैं। इस अवसर पर उन्होंने एक चर्चित अखबार के साथ से विशेष बातचीत में अपने दो साल के कार्यकाल की उपलब्धियों चुनौतियों और आने वाले तीन सालों के रोडमैप को विस्तार से रखा। बातचीत में लॉ एंड ऑर्डर नक्सलवाद रोजगार निवेश कृषि संकट मेट्रो प्रोजेक्ट और मंत्रिमंडल फेरबदल जैसे अहम मुद्दे केंद्र में रहे।

    कानून से ऊपर कोई नहीं मंत्री का भाई भी गिरफ्तार हुआa
    लॉ एंड ऑर्डर पर पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि उनकी सरकार में कानून सबके लिए समान है।उन्होंने कहा अगर कोई गलत करेगा तो वह बचेगा नहीं। मंत्री का भाई भी कानून से ऊपर नहीं है उसे भी गिरफ्तार किया गया है। यही सुशासन है। CM के इस बयान को सख्त प्रशासनिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

    नक्सलवाद पर बड़ी उपलब्धि
    मुख्यमंत्री ने नक्सलवाद के खिलाफ कार्रवाई को अपनी सरकार की बड़ी उपलब्धियों में गिनाया।उन्होंने कहा कि मंडला बालाघाट और डिंडौरी जैसे जिलों से नक्सलवाद लगभग खत्म हो चुका है।बीते एक साल में 10 नक्सलियों को ढेर किया गया और कई बार नक्सलियों ने सरेंडर किया। CM ने पूर्व कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले नक्सली खुलेआम हिंसा करते थे लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं।

    दिल्ली से सरकार चलने के आरोपों पर पलटवार

    विपक्ष के इस आरोप पर कि मध्य प्रदेश सरकार दिल्ली से चलाई जा रही है मुख्यमंत्री ने कहा-हमें गर्व है कि प्रधानमंत्री गृह मंत्री और पार्टी नेतृत्व का मार्गदर्शन मिलता है। केंद्र और राज्य के अच्छे संबंधों से ही विकास तेज होता है।रोजगार पर फोकस: 60 हजार से ज्यादा नौकरियां रोजगार को बड़ी चुनौती मानते हुए CM ने बताया कि बीते दो सालों में 60 हजार से अधिक सरकारी पदों पर नियुक्तियां दी गई हैं।उन्होंने कहा- बिजली विभाग में 50 हजार पद, स्वास्थ्य विभाग में 42 हजार पद,पुलिस विभाग में 22500 से अधिक पद,मंजूर किए गए हैं। भविष्य में एक परीक्षा-एक भर्ती सिस्टम लागू करने की भी योजना है।

    पेपर लीक पर सख्ती
    भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक के सवाल पर CM ने कहा कि उनकी सरकार के कार्यकाल में कोई बड़ा पेपर लीक नहीं हुआ। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पारदर्शी और समयबद्ध परीक्षाएं सरकार की प्राथमिकता हैं।

    निवेश और इंडस्ट्रियल ग्रोथ
    CM ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि निवेश सिर्फ कागजों में नहीं जमीन पर उतर रहा है।उन्होंने बताया कि 6 लाख करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू हो चुका है जिससे लाखों लोगों को रोजगार मिला है।सागर में खाद कारखाने और 30 हजार करोड़ के नए इंडस्ट्रियल पार्क का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि विकास अब हर क्षेत्र में दिख रहा है।

    कृषि और खाद संकट पर जवाब
    कृषि आधारित वर्ष की घोषणा को लेकर CM ने कहा कि प्रदेश में खाद की कोई कमी नहीं है।उन्होंने माना कि कहीं-कहीं वितरण में दिक्कत आती है लेकिन अब SMS और होम डिलीवरी सिस्टम पर काम किया जा रहा है।

    भोपाल मेट्रो और मास्टर प्लान
    भोपाल मेट्रो को लेकर CM ने कहा कि प्रधानमंत्री वीडियो संदेश के जरिए जुड़ेंगे और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर की मौजूदगी में लोकार्पण होगा।भोपाल मास्टर प्लान पर उन्होंने कहा-25 साल का बैकलॉग है दो साल में सब नहीं होगा लेकिन समाधान जरूर निकलेगा।

    मंत्रिमंडल विस्तार पर क्या बोले?
    मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल के सवाल पर CM ने साफ कहा-जैसा पार्टी के पार्लियामेंट्री बोर्ड प्रधानमंत्री और राष्ट्रीय नेतृत्व का मार्गदर्शन मिलेगा वैसा ही करेंगे।

    सादगी का संदेश: सामूहिक विवाह में बेटे की शादी
    CM ने अपने छोटे बेटे की शादी सामूहिक विवाह सम्मेलन में करने के फैसले को सामाजिक संदेश बताया।उन्होंने कहा-दिखावे की शादी समाज पर बोझ डालती है। बड़े लोग फिजूलखर्ची करेंगे तो गरीब कर्ज लेगा।उन्होंने अंतिम संस्कार और विवाह में अनावश्यक खर्च से बचने की अपील भी की। डॉ. मोहन यादव के इंटरव्यू से साफ है कि सरकार सख्त प्रशासन तेज विकास और सामाजिक सादगी को अपनी पहचान बनाना चाहती है। अब देखना यह होगा कि अगले तीन सालों में ये दावे जमीन पर कितने असरदार साबित होते हैं।