Tag: MP Safai Karmchari Strike

  • 25 हजार वेतन और सरकारी कर्मचारी का दर्जा मांग रहे सफाईकर्मी, दीपावली पर भी कचरा नहीं उठाने की चेतावनी, MP के 374 नगर परिषदों में हड़ताल

    25 हजार वेतन और सरकारी कर्मचारी का दर्जा मांग रहे सफाईकर्मी, दीपावली पर भी कचरा नहीं उठाने की चेतावनी, MP के 374 नगर परिषदों में हड़ताल


    भोपाल । मध्य प्रदेश में दीपावली से पहले सफाई व्यवस्था पर संकट गहराने लगा है। वेतन बढ़ाने और स्थायी नौकरी सहित अपनी विभिन्न मांगों को लेकर प्रदेशभर के सफाई कर्मचारी बुधवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। राजधानी भोपाल में हड़ताल का असर सुबह से ही दिखाई देने लगा। शहर के कई गली मोहल्लों और बाजारों में कचरा नहीं उठाया गया। डोर टू डोर कचरा कलेक्शन करने वाली गाड़ियां भी सड़कों पर नहीं पहुंचीं। सफाई कर्मचारियों ने अपनी गाड़ियां कचरा ट्रांसफर स्टेशनों पर खड़ी कर काम बंद कर दिया है। कर्मचारियों का कहना है कि सरकार के साथ बातचीत के बाद ही वे हड़ताल खत्म करने को लेकर कोई फैसला लेंगे।

    अखिल भारतीय सफाई मजदूर ट्रेड यूनियन के पदाधिकारियों ने साफ कर दिया है कि यदि बुधवार को मंत्री या प्रमुख सचिव के साथ होने वाली बैठक में उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन अनिश्चितकाल के लिए जारी रहेगा। कर्मचारियों ने यहां तक चेतावनी दी है कि मांगें पूरी नहीं होने पर दीपावली के दौरान भी शहरों में कचरा नहीं उठाया जाएगा। इससे त्योहार के समय नगरीय निकायों की सफाई व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।

    यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष मगनलाल झांझोट के मुताबिक संगठन के सभी पदाधिकारियों के साथ विचार विमर्श करने के बाद हड़ताल का निर्णय लिया गया है। बुधवार को मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और प्रमुख सचिव मनोज दुबे से मुलाकात की जाएगी। यदि सरकार की ओर से मांगों को लेकर कोई ठोस आश्वासन या निर्णय मिलता है तो आगे की रणनीति तय की जाएगी। अन्यथा कर्मचारी काम पर वापस नहीं लौटेंगे। यूनियन का दावा है कि प्रदेश के 16 नगरीय निकायों और 374 नगर परिषदों के एक लाख से अधिक कर्मचारी इस आंदोलन में शामिल हैं।

    भोपाल में हड़ताल के कारण न्यू मार्केट सहित कई प्रमुख बाजारों में कचरा जमा होने लगा है। शहर की सफाई व्यवस्था काफी हद तक डोर टू डोर कचरा कलेक्शन पर निर्भर है। यहां 400 से अधिक वाहन रोजाना घरों और व्यावसायिक इलाकों से कचरा उठाते हैं। प्रत्येक वाहन प्रतिदिन दो से तीन चक्कर लगाता है। इसके बाद कचरा शहर के 17 गार्बेज ट्रांसफर स्टेशनों पर पहुंचाया जाता है। यहां से कैप्सूल टैंकरों के जरिए कचरे को आदमपुर छावनी भेजा जाता है। हड़ताल के चलते इस पूरी व्यवस्था पर असर पड़ रहा है।

    आंकड़ों के मुताबिक भोपाल से रोजाना करीब 850 टन कचरा निकलता है। ऐसे में यदि सफाई कर्मचारियों की हड़ताल लंबी खिंचती है तो शहर के रिहायशी इलाकों से लेकर बाजारों तक कचरे का ढेर लग सकता है। दीपावली नजदीक होने के कारण व्यापारिक क्षेत्रों और कॉलोनियों में सफाई व्यवस्था को लेकर लोगों की चिंता भी बढ़ सकती है।

    सफाई कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में सरकारी कर्मचारी का दर्जा देना सभी कर्मचारियों को स्थायी करना और ठेका व्यवस्था समाप्त करना शामिल है। इसके अलावा न्यूनतम वेतन 25 हजार रुपए प्रतिमाह तय करने तथा पति या पत्नी की मृत्यु होने पर अनुकंपा नियुक्ति की पात्रता देने की मांग भी की जा रही है। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से वे इन मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं निकला है।

    गौरतलब है कि हड़ताल से पहले मंगलवार को भी भोपाल में सफाई कर्मचारियों ने जोरदार प्रदर्शन किया था। अपनी मांगों को लेकर राजधानी पहुंचे कर्मचारियों ने जहांगीराबाद चौराहे पर जाम लगा दिया था। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे धरने के बाद मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपना चाहते थे लेकिन कोई जिम्मेदार अधिकारी ज्ञापन लेने नहीं पहुंचा। इससे नाराज कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री निवास का घेराव करने की रणनीति बनाई थी। पुलिस ने बेरिकेडिंग कर उन्हें रोक दिया जिसके बाद कर्मचारी करीब दो घंटे तक सड़क पर बैठे रहे। बाद में समझाइश के बाद जाम समाप्त हुआ लेकिन कर्मचारी शाहजहांनी पार्क में रात तक धरने पर डटे रहे।

    अब सभी की नजर सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच होने वाली बातचीत पर है। यदि दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बनी तो दीपावली से पहले प्रदेश के शहरों में सफाई व्यवस्था को लेकर बड़ी परेशानी खड़ी हो सकती है।