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  • MP में शिक्षक भर्ती के बाद अब पदस्थापना की बारी! 7 हजार वर्ग-3 शिक्षकों को मिलेगा स्कूल, वर्ग-2 की वेटिंग काउंसलिंग भी शुरू

    MP में शिक्षक भर्ती के बाद अब पदस्थापना की बारी! 7 हजार वर्ग-3 शिक्षकों को मिलेगा स्कूल, वर्ग-2 की वेटिंग काउंसलिंग भी शुरू


    भोपाल । मध्यप्रदेश में सरकारी स्कूलों में शिक्षक पदस्थापना का इंतजार कर रहे वर्ग-3 के करीब 7 हजार चयनित शिक्षकों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। लोक शिक्षण विभाग सोमवार से इन शिक्षकों की शाला आवंटन प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है। लंबे समय से पदस्थापना स्थल को लेकर बनी स्थिति और म्यूचुअल ट्रांसफर की प्रक्रिया के कारण इसमें देरी हुई थी लेकिन अब विभाग ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। शाला आवंटन के बाद चयनित शिक्षकों को संबंधित स्कूल में जॉइनिंग के लिए एक सप्ताह का समय दिया जाएगा। विभाग को उम्मीद है कि इन शिक्षकों की पदस्थापना से सरकारी स्कूलों में लंबे समय से बनी शिक्षकों की कमी को काफी हद तक दूर करने में मदद मिलेगी।

    दरअसल वर्ग-3 के चयनित शिक्षकों की पदस्थापना पहले 15 अगस्त तक पूरी करने की तैयारी थी। लेकिन चयनित अभ्यर्थियों के सामने पदस्थापना स्थल को लेकर कई तरह की दिक्कतें सामने आईं। खासतौर पर कुछ शिक्षकों को आवंटित होने वाले स्कूलों और उनकी पसंद के स्थान के बीच दूरी को लेकर स्थिति बनी। इसी दौरान विभाग ने पहली बार चयनित शिक्षकों को म्यूचुअल ट्रांसफर का विकल्प उपलब्ध कराया। इस सुविधा के तहत इच्छुक शिक्षक आपस में संपर्क कर स्थानांतरण के लिए आवेदन कर सकते थे। करीब 400 चयनित शिक्षकों ने इस सुविधा का लाभ उठाया। इसी प्रक्रिया के चलते शाला आवंटन में कुछ समय की देरी हुई लेकिन अब विभाग ने इसे आगे बढ़ाने का फैसला किया है।

    लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह के मुताबिक वर्ग-3 में करीब 7 हजार चयनित शिक्षकों की पदस्थापना की जानी है। स्कूलों का आवंटन होने के बाद शिक्षकों को संबंधित संस्था में कार्यभार ग्रहण करना होगा। इसके लिए उन्हें एक सप्ताह का समय दिया जाएगा। यानी शाला आवंटन के बाद चयनित शिक्षकों के सामने अब जॉइनिंग की प्रक्रिया पूरी करने की जिम्मेदारी होगी। विभाग की कोशिश है कि पदस्थापना की प्रक्रिया जल्द पूरी हो ताकि स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ाई जा सके और विद्यार्थियों की पढ़ाई को बेहतर तरीके से संचालित किया जा सके।

    इसी दिन वर्ग-2 के चयनित शिक्षकों के लिए भी महत्वपूर्ण प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। स्कूल शिक्षा विभाग वर्ग-2 की वेटिंग काउंसलिंग के दूसरे चरण की शुरुआत सोमवार से करेगा। इसमें प्रतीक्षा सूची में शामिल अभ्यर्थियों को उपलब्ध रिक्त पदों के आधार पर स्कूल आवंटित किए जाएंगे। इससे उन उम्मीदवारों को भी मौका मिलने की उम्मीद है जो मुख्य चयन प्रक्रिया में स्थान नहीं पा सके थे लेकिन प्रतीक्षा सूची में शामिल हैं।

    विभाग की योजना वर्ग-3 के चयनित शिक्षकों की जॉइनिंग प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसी श्रेणी में वेटिंग काउंसलिंग शुरू करने की भी है। इससे रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया और आगे बढ़ेगी। यानी आने वाले समय में वर्ग-3 के चयनित अभ्यर्थियों की प्रतीक्षा सूची से भी नियुक्ति के अवसर खुल सकते हैं।

    वहीं वर्ग-1 के चयनित शिक्षकों की पदस्थापना का मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह के अनुसार इस मामले में सितंबर के पहले सप्ताह में फैसला आने की संभावना है। कोर्ट के निर्णय के बाद वर्ग-1 के चयनित शिक्षकों की रुकी हुई पदस्थापना प्रक्रिया को भी तेजी से आगे बढ़ाने की तैयारी है। ऐसे में सोमवार से शुरू होने वाली वर्ग-3 की शाला आवंटन प्रक्रिया हजारों चयनित शिक्षकों के लिए लंबे इंतजार के बाद राहत लेकर आने वाली है।

  • MP में शिक्षक भर्ती को लेकर दिग्विजय सिंह का बड़ा ऐलान, 5 सितंबर से भूख हड़ताल की चेतावनी; पदवृद्धि की मांग पर अड़े अभ्यर्थी

    MP में शिक्षक भर्ती को लेकर दिग्विजय सिंह का बड़ा ऐलान, 5 सितंबर से भूख हड़ताल की चेतावनी; पदवृद्धि की मांग पर अड़े अभ्यर्थी


    भोपालमध्य प्रदेश में शिक्षक भर्ती 2025 को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। भोपाल के नीलम पार्क में पदवृद्धि की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे अभ्यर्थियों के बीच बुधवार को पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों से मुलाकात की और उनकी मांगों को जायज बताते हुए सरकार से जल्द समाधान निकालने की मांग की। दिग्विजय सिंह ने इस दौरान सरकार को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि अगर अभ्यर्थियों की मांगों पर शिक्षक दिवस तक कोई निर्णय नहीं लिया गया तो वे खुद 24 घंटे की भूख हड़ताल पर बैठेंगे।

    दिग्विजय सिंह ने कहा कि उनके राजनीतिक जीवन में शिक्षा और स्वास्थ्य हमेशा महत्वपूर्ण विषय रहे हैं। उन्होंने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल का जिक्र करते हुए दावा किया कि उस दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा का विस्तार करने के लिए बड़ी संख्या में स्कूल खोले गए थे। उनके मुताबिक करीब 45 हजार नए स्कूल खोले गए और शिक्षकों की भर्ती का अधिकार भोपाल से स्थानीय स्तर पर दिया गया था। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना और स्थानीय स्तर पर शिक्षकों की कमी को पूरा करना था।

    पूर्व मुख्यमंत्री ने मौजूदा शिक्षक भर्ती व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था और सिलेबस में बदलाव का सीधा असर उन शिक्षकों पर पड़ रहा है जिन्होंने वर्षों तक पुराने पाठ्यक्रम के आधार पर विद्यार्थियों को पढ़ाया है। अब उन्हें नए सिलेबस के अनुसार परीक्षा देने के लिए कहा जा रहा है। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि जब शिक्षकों के पद खाली हैं तो उन रिक्त पदों पर भर्ती क्यों नहीं की जा रही है।

    दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार की प्राथमिकता शिक्षा और युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के बजाय दूसरे राजनीतिक और धार्मिक मुद्दों पर ज्यादा है। उन्होंने भाजपा और आरएसएस पर भी निशाना साधा और कई राजनीतिक आरोप लगाए। उन्होंने अपनी उम्र का जिक्र करते हुए कहा कि 80 वर्ष की उम्र में भी वे खुद को नौजवान मानते हैं और युवाओं के अधिकारों की लड़ाई में उनके साथ खड़े रहेंगे।

    इस दौरान पूर्व मंत्री पीसी शर्मा भी उनके साथ मौजूद रहे। प्रदर्शन स्थल पर महिला अभ्यर्थियों ने दिग्विजय सिंह को राखी भी बांधी। अभ्यर्थियों ने अपनी मांगों और आंदोलन की स्थिति से पूर्व मुख्यमंत्री को अवगत कराया। दिग्विजय सिंह ने उन्हें भरोसा दिलाया कि उनकी आवाज सरकार तक पहुंचाने के लिए वे प्रयास करेंगे।

    नीलम पार्क में वर्ग 2 माध्यमिक और वर्ग 3 प्राथमिक शिक्षक भर्ती 2025 में पदवृद्धि की मांग को लेकर अभ्यर्थियों का अनिश्चितकालीन धरना जारी है। एक दिन पहले आंदोलनकारी अभ्यर्थी नरेंद्र राजपूत की अचानक तबीयत बिगड़ गई थी। इसके बाद आंदोलन और तेज हो गया। अभ्यर्थियों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर अलग अलग स्तर पर आंदोलन कर रहे हैं लेकिन अब तक सरकार की ओर से ठोस समाधान नहीं निकला है।

    अभ्यर्थी 21 अगस्त को भी भोपाल में बड़ा प्रदर्शन कर चुके हैं। प्रदेशभर से आए अभ्यर्थियों ने डीपीआई कार्यालय के सामने प्रदर्शन और ज्ञापन देने के बाद रैली निकाली और नीलम पार्क पहुंचकर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया। बुधवार को इस आंदोलन का छठवां दिन रहा।

    अभ्यर्थियों का कहना है कि नवंबर 2025 से जुलाई 2026 के बीच कई चरणों में आंदोलन किए गए लेकिन पदवृद्धि की मांग पर सरकार की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। अब वे तत्काल निर्णय की मांग कर रहे हैं। वहीं दिग्विजय सिंह की 24 घंटे की भूख हड़ताल की चेतावनी के बाद शिक्षक भर्ती का मुद्दा एक बार फिर प्रदेश की सियासत में गरमाता नजर आ रहा है। अब निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं कि वह अभ्यर्थियों की मांगों पर क्या फैसला लेती है।

  • वर्ग-1 शिक्षक भर्ती में दूसरी काउंसलिंग की मांग तेज, 24 से 26 अगस्त तक अंबेडकर पार्क में धरना देंगे अभ्यर्थी

    वर्ग-1 शिक्षक भर्ती में दूसरी काउंसलिंग की मांग तेज, 24 से 26 अगस्त तक अंबेडकर पार्क में धरना देंगे अभ्यर्थी


    भोपालभोपाल में उच्च माध्यमिक शिक्षक भर्ती 2023 के अभ्यर्थियों ने दूसरी काउंसलिंग और पदवृद्धि की मांग को लेकर आंदोलन का ऐलान किया है। वेटिंग शिक्षक संघ वर्ग-1 भर्ती 2023 के बैनर तले अभ्यर्थी 24 से 26 अगस्त तक टीटी नगर स्थित अंबेडकर पार्क में तीन दिवसीय धरना देंगे। अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया शुरू हुए करीब तीन साल बीत चुके हैं, लेकिन अब तक दूसरी काउंसलिंग शुरू नहीं हो सकी है। लंबे समय से नियुक्ति का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों में इसे लेकर नाराजगी बढ़ती जा रही है।

    अभ्यर्थियों के मुताबिक उन्होंने उच्च माध्यमिक शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के तहत परीक्षा समेत चयन से जुड़े सभी चरण पूरे किए हैं। परिणाम आने और चयन प्रक्रिया आगे बढ़ने के बाद उन्हें नियुक्ति की उम्मीद थी, लेकिन दूसरी काउंसलिंग नहीं होने के कारण बड़ी संख्या में पात्र अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटका हुआ है। संघ का कहना है कि इस मुद्दे को लेकर शासन और प्रशासन को कई बार ज्ञापन दिए गए और अलग-अलग समय पर प्रदर्शन भी किए गए। हर बार आश्वासन मिलने के बावजूद अब तक ऐसा कोई ठोस फैसला नहीं हुआ है, जिससे दूसरी काउंसलिंग का रास्ता साफ हो सके।

    अभ्यर्थियों का सबसे बड़ा सवाल अमोल सोले प्रकरण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले से जुड़ा है। संघ का दावा है कि दूसरी काउंसलिंग को SLP डायरी नंबर 14600/2025 का हवाला देकर रोका जा रहा है। अभ्यर्थियों का कहना है कि यह मामला करीब 11 अभ्यर्थियों से संबंधित है, ऐसे में इसके कारण हजारों पात्र और प्रतीक्षारत अभ्यर्थियों का भविष्य अनिश्चितकाल तक रोकना उचित नहीं है। उनका सवाल है कि यदि मामला सीमित संख्या में अभ्यर्थियों से जुड़ा है तो बाकी पात्र अभ्यर्थियों के लिए भर्ती प्रक्रिया आगे क्यों नहीं बढ़ाई जा रही है।

    संघ ने यह भी सवाल उठाया है कि अगर यह मामला विभाग के लिए इतना महत्वपूर्ण है तो करीब डेढ़ साल के दौरान मुख्य पीठ के समक्ष इसकी प्रभावी सुनवाई सुनिश्चित क्यों नहीं हो पाई। अभ्यर्थियों का कहना है कि कई बार सुनवाई की तारीख आने से पहले ही मामला आगे बढ़ जाता है और इस वजह से दूसरी काउंसलिंग का इंतजार और लंबा होता जा रहा है। उनका कहना है कि लगातार देरी के कारण हजारों युवाओं के रोजगार और भविष्य पर असर पड़ रहा है।

    वेटिंग शिक्षक संघ ने प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की जरूरत का मुद्दा भी उठाया है। संघ के मुताबिक सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी की स्थिति लगातार बनी हुई है। दूसरी ओर पात्र और चयन प्रक्रिया से गुजर चुके अभ्यर्थी उपलब्ध हैं। ऐसे में वर्षों तक भर्ती प्रक्रिया को लंबित रखने से केवल अभ्यर्थियों को ही नुकसान नहीं हो रहा, बल्कि सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है। संघ का कहना है कि रिक्त पदों पर योग्य अभ्यर्थियों को मौका देकर शिक्षकों की जरूरत को पूरा किया जा सकता है।

    अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री मोहन यादव, स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह और डीपीआई आयुक्त अभिषेक सिंह से मामले में तत्काल निर्णय लेने की मांग की है। उनका कहना है कि जब सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की जरूरत है, योग्य अभ्यर्थी उपलब्ध हैं और दूसरी काउंसलिंग की मांग लंबे समय से की जा रही है, तो फिर फैसला लेने में इतनी देरी क्यों की जा रही है।

    वेटिंग शिक्षक संघ के अनुसार 24, 25 और 26 अगस्त को अंबेडकर पार्क, टीटी नगर में होने वाला धरना शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से किया जाएगा। संघ ने प्रशासन से तीन दिवसीय प्रदर्शन की अनुमति भी मांगी है। संगठन का कहना है कि आंदोलन के दौरान कानून-व्यवस्था और प्रशासन की ओर से निर्धारित सभी नियमों का पालन किया जाएगा। अभ्यर्थियों की मांग है कि सरकार पदवृद्धि के साथ जल्द से जल्द दूसरी काउंसलिंग शुरू करे, ताकि वर्षों से नियुक्ति की राह देख रहे पात्र शिक्षकों को रोजगार का अवसर मिल सके।

  • 4 दिन से पानी तक नहीं पिया, तबीयत बिगड़ने पर भी पीछे नहीं हटे नरेंद्र; भोपाल में 25 हजार पद बढ़ाने की मांग पर धरना

    4 दिन से पानी तक नहीं पिया, तबीयत बिगड़ने पर भी पीछे नहीं हटे नरेंद्र; भोपाल में 25 हजार पद बढ़ाने की मांग पर धरना


    नई दिल्ली। भोपाल में वर्ग-2 माध्यमिक और वर्ग-3 प्राथमिक शिक्षक भर्ती 2025 में पदवृद्धि की मांग को लेकर चल रहा अभ्यर्थियों का आंदोलन अब गंभीर स्थिति में पहुंच गया है। नीलम पार्क में 21 अगस्त से जारी अनिश्चितकालीन धरने के बीच ब्यावरा निवासी अभ्यर्थी नरेंद्र राजपूत पिछले चार दिनों से निर्जल अनशन पर बैठे हैं। सोमवार रात करीब 3 बजे अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। उन्हें चक्कर आने और कमजोरी की शिकायत हुई, जिसके बाद धरना स्थल पर मौजूद अभ्यर्थियों ने प्रशासन को इसकी सूचना दी। आंदोलनकारियों के मुताबिक पुलिस और प्रशासन की ओर से उन्हें अस्पताल ले जाने की कोशिश की गई, लेकिन नरेंद्र ने अस्पताल जाने से इनकार कर दिया।

    नरेंद्र राजपूत का कहना है कि जब तक सरकार शिक्षक भर्ती में पदवृद्धि को लेकर कोई ठोस आदेश जारी नहीं करती, तब तक वह धरना स्थल से नहीं हटेंगे। उन्होंने मांग की है कि यदि प्रशासन उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंतित है तो धरना स्थल पर ही डॉक्टरों की टीम भेजकर स्वास्थ्य जांच कराई जाए। आंदोलनकारियों का कहना है कि लगातार चार दिन तक भोजन और पानी नहीं लेने के कारण नरेंद्र की हालत कमजोर हो रही है और ऐसे में प्रशासन को तत्काल स्वास्थ्य व्यवस्था उपलब्ध करानी चाहिए।

    शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थी लंबे समय से वर्ग-2 और वर्ग-3 में पद बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि शिक्षा विभाग में बड़ी संख्या में पद रिक्त हैं, लेकिन भर्ती प्रक्रिया में पर्याप्त पद शामिल नहीं किए गए। इसके चलते पात्रता और चयन परीक्षा में अच्छे अंक हासिल करने के बावजूद कई अभ्यर्थी नियुक्ति से वंचित रह गए हैं। आंदोलनकारी अब सरकार से पदों की संख्या बढ़ाने के साथ बढ़े हुए पदों पर दूसरी काउंसलिंग कराने की मांग कर रहे हैं।

    अभ्यर्थियों की मांग है कि वर्ग-2 में प्रत्येक विषय के 3 हजार अतिरिक्त पद बढ़ाए जाएं, जबकि वर्ग-3 में कुल 25 हजार पद किए जाएं। उनका कहना है कि रिक्त पदों को भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने से बड़ी संख्या में योग्य अभ्यर्थियों को नियुक्ति का अवसर मिल सकता है। इसी मांग को लेकर प्रदेशभर के अभ्यर्थी भोपाल में जुटे हैं और अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं।

    इस आंदोलन में महिला अभ्यर्थियों की भी बड़ी भागीदारी है। कई महिलाएं अपने छोटे बच्चों के साथ नीलम पार्क में धरने पर बैठी हैं। इंदौर की दीप्ति सिंह ठाकुर अपनी 5 और 8 साल की बेटियों के साथ आंदोलन में शामिल हैं। वहीं सरोज कुशवाहा अपने छोटे बेटे माधव के साथ धरना स्थल पर मौजूद हैं। महिला अभ्यर्थियों का कहना है कि बच्चों के साथ पार्क में रहना बेहद मुश्किल हो रहा है। मच्छरों की समस्या, पानी और वॉशरूम की परेशानी के अलावा छोटे तालाब के पास होने के कारण बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी रहती है। इसके बावजूद वे अपनी मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कह रही हैं।

    पदवृद्धि की मांग को लेकर प्रदेशभर से अभ्यर्थी 21 अगस्त को भोपाल पहुंचे थे। डीपीआई के सामने प्रदर्शन और ज्ञापन देने के बाद अभ्यर्थियों ने रैली निकाली और नीलम पार्क पहुंचकर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया। आंदोलनकारियों का कहना है कि नवंबर 2025 से जुलाई 2026 के बीच भी कई चरणों में भोपाल में प्रदर्शन और धरने किए जा चुके हैं, लेकिन उनकी मांग पर अब तक ठोस निर्णय नहीं हुआ।

    अब नरेंद्र राजपूत की तबीयत बिगड़ने के बाद आंदोलन को लेकर प्रशासन के सामने चुनौती बढ़ गई है। अभ्यर्थियों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप कर पदवृद्धि पर निर्णय लेने की मांग की है। उनका कहना है कि वे किसी आश्वासन के बजाय लिखित आदेश चाहते हैं, ताकि बढ़े हुए पदों पर दूसरी काउंसलिंग शुरू हो सके और शिक्षक भर्ती में चयन से वंचित योग्य अभ्यर्थियों को भी नियुक्ति का अवसर मिल सके।

  • MP में शिक्षक भर्ती को मिली रफ्तार, 12 मई से शुरू होगी चॉइस फिलिंग

    MP में शिक्षक भर्ती को मिली रफ्तार, 12 मई से शुरू होगी चॉइस फिलिंग


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में शिक्षक भर्ती का लंबा इंतजार आखिरकार खत्म हो गया है। भोपाल में लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) कार्यालय के सामने हुए प्रदर्शन के बाद राज्य सरकार ने 4000 माध्यमिक और प्राथमिक शिक्षकों के नियुक्ति आदेश जारी कर दिए हैं। अब चयनित अभ्यर्थियों को 12 मई से 18 मई 2026 के बीच ऑनलाइन माध्यम से स्कूलों का चयन (चॉइस फिलिंग) करना होगा।

    उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने जानकारी दी कि पूरी भर्ती प्रक्रिया पारदर्शिता और नियमों के अनुसार की जा रही है। सरकार का उद्देश्य योग्य अभ्यर्थियों को समय पर नियुक्ति देना है। वहीं स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने भी कहा कि यह प्रक्रिया पूरी तरह निर्धारित नियमों के तहत संचालित हो रही है और किसी तरह की अनियमितता की गुंजाइश नहीं है।

    यह भर्ती प्रक्रिया वर्ष 2022 में शुरू हुई थी। इसके बाद 2023 में पात्रता परीक्षा आयोजित की गई और अप्रैल 2025 में चयन परीक्षा ली गई। लंबे इंतजार के बाद सितंबर 2025 में परिणाम घोषित किया गया। हालांकि करीब 10,700 अभ्यर्थियों की चयन सूची जारी होने के बावजूद पिछले नौ महीनों से नियुक्ति प्रक्रिया अटकी हुई थी, जिससे उम्मीदवारों में नाराजगी बढ़ रही थी।

    भोपाल में हाल ही में हुए प्रदर्शन के बाद सरकार ने प्रक्रिया को तेज करते हुए नियुक्ति आदेश जारी किए। इसके बाद अब चयनित अभ्यर्थियों को ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से स्कूलों का चयन करना होगा। उन्हें अपने संबंधित जिले या संभाग के सभी स्कूलों को प्राथमिकता क्रम में भरना अनिवार्य किया गया है।

    विभाग ने स्पष्ट किया है कि चॉइस फिलिंग केवल तभी पूरी मानी जाएगी जब पोर्टल शुल्क जमा कर दिया जाएगा। यदि कोई अभ्यर्थी निर्धारित समय सीमा में स्कूल विकल्प नहीं भरता है, तो उसे बची हुई रिक्तियों के आधार पर स्कूल आवंटित किया जाएगा, जिससे मनचाहा स्कूल मिलने की संभावना कम हो जाएगी।

    इसके अलावा, दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया भी चल रही है। सभी चयनित अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की जांच के बाद ही उनकी अंतिम पात्रता तय होगी और उसके आधार पर नियुक्ति प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा।

    विभाग ने अभ्यर्थियों को सलाह दी है कि वे नियमित रूप से एमपी ऑनलाइन के आधिकारिक पोर्टल पर नजर बनाए रखें, क्योंकि सभी महत्वपूर्ण अपडेट और निर्देश वहीं जारी किए जाएंगे। विशेष पदों जैसे संगीत, नृत्य और खेल विषयों के लिए अलग से सूची जारी की जाएगी।

    सरकार का कहना है कि यह भर्ती प्रक्रिया राज्य में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और जल्द ही सभी चयनित अभ्यर्थियों को अंतिम नियुक्ति आदेश भी जारी कर दिए जाएंगे।

  • रिक्त पदों पर भर्ती की मांग को लेकर चयनित शिक्षक अभ्यर्थियों का अर्धनग्न प्रदर्शन जारी

    रिक्त पदों पर भर्ती की मांग को लेकर चयनित शिक्षक अभ्यर्थियों का अर्धनग्न प्रदर्शन जारी


    भोपाल /मध्यप्रदेश में चयनित शिक्षक अभ्यर्थियों का विरोध प्रदर्शन लगातार तेज होता जा रहा है राजधानी भोपाल में दूसरे दिन भी चयनित अभ्यर्थी भूख हड़ताल पर डटे रहे और सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए मुंडन कराकर विरोध दर्ज कराया भावी शिक्षकों का कहना है कि वे चयनित होने के बावजूद नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे हैं जबकि प्रदेश में हजारों शिक्षक पद आज भी खाली पड़े हैं

    सोमवार को अभ्यर्थियों ने पैदल मार्च निकालते हुए लोक शिक्षण संचालनालय का घेराव किया था इसके बाद मंगलवार को आंदोलन और उग्र रूप में सामने आया जब भूख हड़ताल पर बैठे अभ्यर्थियों ने मुंडन कराकर अपना आक्रोश जताया कई अभ्यर्थी अर्धनग्न अवस्था में प्रदर्शन करते नजर आए उनका कहना है कि यह आंदोलन सम्मान और रोजगार के लिए हैप्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का आरोप है कि प्रदेश में हजारों शिक्षक पद रिक्त होने के बावजूद सरकार द्वारा भर्ती प्रक्रिया में सीटों की संख्या कम कर दी गई है उनका कहना है कि शिक्षक भर्ती परीक्षाएं ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रही हैं वर्तमान में केवल 13 हजार पदों पर भर्ती निकाली गई है जबकि आवश्यकता कहीं अधिक है

    अभ्यर्थियों के अनुसार माध्यमिक शिक्षकों के करीब 10 हजार पद रिक्त हैं जबकि प्राथमिक शिक्षकों के लगभग 3 हजार पद खाली हैं इसके बावजूद सरकार ने केवल सीमित संख्या में ही भर्ती प्रक्रिया शुरू की है चयनित अभ्यर्थियों का कहना है कि वे लंबे समय से तैयारी कर रहे हैं परीक्षा उत्तीर्ण कर चुके हैं फिर भी नियुक्ति नहीं मिलने से उनका भविष्य अंधकार में है

    प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों की मुख्य मांग है कि शिक्षक भर्ती की संख्या बढ़ाकर कम से कम 25 हजार पदों पर नियुक्ति की जाए इसके साथ ही भर्ती प्रक्रिया का दूसरा चरण भी जल्द शुरू किया जाए ताकि रिक्त पदों को भरा जा सके उनका कहना है कि स्कूलों में शिक्षकों की कमी से छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और इसका सीधा असर शिक्षा व्यवस्था पर पड़ रहा है

    भूख हड़ताल पर बैठे अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा उन्होंने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ नौकरी की नहीं बल्कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की है

    राजधानी भोपाल में चल रहे इस प्रदर्शन ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं लेकिन अभी तक सरकार की ओर से कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं मिला हैचयनित शिक्षक अभ्यर्थियों का यह आंदोलन अब प्रदेश स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है मुंडन और अर्धनग्न प्रदर्शन के जरिए उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की है कि वे अपने हक के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं जब तक रिक्त पदों पर भर्ती नहीं होती और नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं की जाती तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा