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  • MP में शिक्षक पात्रता परीक्षा का बदला पूरा सिस्टम अब ऑफलाइन होगी परीक्षा माशिमं संभालेगा जिम्मेदारी जानिए नया अपडेट

    MP में शिक्षक पात्रता परीक्षा का बदला पूरा सिस्टम अब ऑफलाइन होगी परीक्षा माशिमं संभालेगा जिम्मेदारी जानिए नया अपडेट


    भोपाल। मध्यप्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा को लेकर एक बार फिर बड़ा अपडेट सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आयोजित होने वाली इस परीक्षा के ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तारीख फिर बढ़ाई जाएगी। फिलहाल आवेदन की आखिरी तारीख 18 सितंबर निर्धारित है लेकिन अब इसे आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। आवेदन की तारीख एक सप्ताह बढ़ेगी या फिर 15 दिन तक आगे की जाएगी इसका फैसला अगले एक दो दिनों में होने की संभावना है। तारीख बढ़ने से उन शिक्षकों को राहत मिल सकती है जो अभी तक किसी वजह से अपना आवेदन नहीं कर पाए हैं।

    इस परीक्षा को लेकर एक और महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। अब शिक्षक पात्रता परीक्षा ऑनलाइन माध्यम से नहीं बल्कि पूरी तरह ऑफलाइन आयोजित की जाएगी। परीक्षा में वस्तुनिष्ठ यानी ऑब्जेक्टिव टाइप प्रश्न पूछे जाएंगे। शिक्षकों के मूल्यांकन के लिए प्रश्नपत्र आधारित परीक्षा व्यवस्था अपनाई जाएगी। परीक्षा में शामिल होने वाले शिक्षकों की संख्या के आधार पर परीक्षा केंद्रों की संख्या तय की जाएगी। यानी जितने अधिक आवेदन आएंगे उसी हिसाब से परीक्षा केंद्र बढ़ाए जा सकते हैं।

    शिक्षकों को कोशिश की जाएगी कि उनके लिए नजदीकी परीक्षा केंद्र उपलब्ध कराया जाए। हालांकि परीक्षा केंद्रों का अंतिम निर्धारण आवेदकों की संख्या के आधार पर होगा। अगर आवेदन संख्या अधिक रही तो ज्यादा केंद्र बनाए जा सकते हैं। वहीं आवेदन सीमित रहने की स्थिति में परीक्षा केंद्रों की संख्या भी उसी अनुपात में रखी जा सकती है।

    शिक्षक पात्रता परीक्षा के आयोजन की जिम्मेदारी अब माध्यमिक शिक्षा मंडल यानी माशिमं को दी गई है। सरकार की मंजूरी मिलने के बाद माशिमं ने परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी है। परीक्षा की पूरी कार्ययोजना तैयार की जाएगी और इसके बाद प्रश्नपत्रों की छपाई सहित दूसरी व्यवस्थाओं पर काम शुरू होगा। कर्मचारी चयन मंडल द्वारा अब तक वसूली गई परीक्षा फीस को माध्यमिक शिक्षा मंडल को ट्रांसफर किया जाएगा।

    दरअसल शिक्षक संगठनों की ओर से परीक्षा ऑनलाइन के बजाय ऑफलाइन कराने की मांग की गई थी। इसके बाद कर्मचारी चयन मंडल ने ऑफलाइन परीक्षा आयोजित कराने से इनकार कर दिया था। लोक शिक्षण संचालनालय के प्रस्ताव के बाद माध्यमिक शिक्षा मंडल ने परीक्षा कराने को लेकर प्रस्ताव तैयार किया जिसे शासन की मंजूरी मिल गई। इसके बाद माशिमं के परीक्षा एजेंसी बनने का रास्ता साफ हो गया।

    इस बीच अध्यापक संवर्ग के शिक्षकों के लिए TET की अनिवार्यता को लेकर भी मामला चर्चा में है। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर शिक्षकों की कठिनाइयों के निराकरण की मांग की है। उन्होंने अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा बैतूल की ओर से दिए गए ज्ञापन का उल्लेख करते हुए TET की अनिवार्यता से जुड़ी समस्याओं पर शासन स्तर पर उचित निर्णय लेने का अनुरोध किया है।

    परीक्षा को लेकर प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षकों की पात्रता परीक्षा अलग अलग होने की संभावना भी सामने आई है। ऐसे में शिक्षकों के लिए आवेदन से लेकर परीक्षा केंद्र और प्रश्नपत्र तक पूरी प्रक्रिया नए स्वरूप में होगी। फिलहाल सबसे ज्यादा नजर आवेदन की नई अंतिम तारीख पर है जिसका फैसला जल्द होने की उम्मीद है।

  • MP के 70 हजार शिक्षकों को TET से राहत दिलाने सुप्रीम कोर्ट जाएगी सरकार, स्कूल शिक्षा विभाग की नई कानूनी तैयारी

    MP के 70 हजार शिक्षकों को TET से राहत दिलाने सुप्रीम कोर्ट जाएगी सरकार, स्कूल शिक्षा विभाग की नई कानूनी तैयारी


    भोपाल । मध्यप्रदेश सरकार प्रदेश के करीब 70 हजार शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी टीईटी से राहत दिलाने के लिए एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर रही है। स्कूल शिक्षा विभाग का मानना है कि वर्ष 2005 से 2009 के बीच नियुक्त हुए शिक्षकों ने पहले ही सरकारी चयन परीक्षा पास कर अपनी नियुक्ति हासिल की थी। ऐसे में उन्हें दोबारा शिक्षक पात्रता परीक्षा देने के लिए बाध्य करना न्यायसंगत नहीं होगा। इसी आधार पर राज्य सरकार जल्द ही सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका दायर करने की तैयारी कर रही है।

    सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2025 के फैसले के बाद प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग और जनजातीय कार्य विभाग के वर्ष 1998 से 2009 के बीच नियुक्त लगभग डेढ़ लाख शिक्षकों के लिए टीईटी पास करना अनिवार्य कर दिया गया था। इसके बाद लोक शिक्षण संचालनालय ने अप्रैल में निर्देश जारी करते हुए जुलाई और अगस्त में पात्रता परीक्षा आयोजित कराने की प्रक्रिया शुरू की। अदालत ने स्पष्ट किया है कि जिन शिक्षकों की सेवा अवधि पांच वर्ष से कम बची है उन्हें परीक्षा से छूट मिलेगी जबकि अन्य सभी शिक्षकों के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य रहेगा। परीक्षा पास नहीं करने वाले शिक्षकों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि अदालत ने राहत देते हुए परीक्षा पास करने की अंतिम समय सीमा 31 अगस्त 2028 तक बढ़ा दी है।

    अब स्कूल शिक्षा विभाग का पूरा जोर वर्ष 2005 से 2009 के बीच नियुक्त हुए करीब 70 हजार शिक्षकों को राहत दिलाने पर है। विभाग का तर्क है कि इन शिक्षकों की भर्ती व्यापम के माध्यम से आयोजित प्रतियोगी परीक्षा के आधार पर हुई थी और चयन प्रक्रिया पूरी तरह सरकारी नियमों के अनुसार संपन्न हुई थी। इसलिए उन्हें दोबारा पात्रता परीक्षा देना आवश्यक नहीं माना जाना चाहिए।

    सूत्रों के अनुसार विधि विभाग और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ताओं से कानूनी सलाह लेने के बाद एक सप्ताह के भीतर नई याचिका दाखिल की जा सकती है। इसमें अदालत से अनुरोध किया जाएगा कि इन शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से छूट दी जाए क्योंकि वे पहले ही चयन प्रक्रिया पूरी कर नियमित नियुक्ति प्राप्त कर चुके हैं।

    हालांकि विभागीय अधिकारियों का यह भी मानना है कि सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने की संभावना बहुत अधिक नहीं है क्योंकि अदालत पहले ही इस विषय पर अपना स्पष्ट रुख जाहिर कर चुकी है। इसके बावजूद शिक्षकों के हितों को ध्यान में रखते हुए सरकार यह कानूनी प्रयास कर रही है। यदि अदालत राहत देती है तो पात्रता परीक्षा के दायरे में आने वाले लगभग आधे शिक्षकों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।

    गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही टीईटी को लेकर 65 से अधिक पुनर्विचार याचिकाएं खारिज कर चुका है। अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी शिक्षकों का न्यूनतम शैक्षणिक मानकों को पूरा करना आवश्यक है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि शिक्षा का अधिकार कानून और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद के मानकों के अनुसार शिक्षक पात्रता परीक्षा शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता बनाए रखने का महत्वपूर्ण माध्यम है।

    अब सभी की निगाहें राज्य सरकार की नई याचिका और सुप्रीम कोर्ट के अगले फैसले पर टिकी हैं। यदि अदालत सरकार की दलीलों से सहमत होती है तो हजारों शिक्षकों को बड़ी राहत मिल सकती है। वहीं यदि याचिका खारिज होती है तो वर्ष 2005 से 2009 के बीच नियुक्त शिक्षकों को भी निर्धारित समय सीमा के भीतर टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा।