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  • ग्वालियर में ट्रैफिक पर सख्ती, 315 चालान कटे, फर्जी नंबर प्लेट और मॉडिफाइड साइलेंसर पर कार्रवाई

    ग्वालियर में ट्रैफिक पर सख्ती, 315 चालान कटे, फर्जी नंबर प्लेट और मॉडिफाइड साइलेंसर पर कार्रवाई


    ग्वालियर । ग्वालियर में शुक्रवार रात पुलिस ने यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के खिलाफ दो घंटे का विशेष चेकिंग अभियान चलाया। शहर के अलग अलग इलाकों में एक साथ हुई कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 315 वाहनों के चालान काटे और करीब 1 लाख 45 हजार रुपए का जुर्माना वसूला। लगातार नियम तोड़ने वाले 61 वाहन चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस निरस्त करने के लिए यातायात पुलिस ने क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय यानी आरटीओ को पत्र भेजने की तैयारी की है। चेकिंग के दौरान कुछ वाहन चालकों ने कार्रवाई से बचने के लिए पूर्व विधायक और पुलिसकर्मियों से सिफारिश भी लगवाई लेकिन अधिकारियों ने नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई जारी रखी।

    अभियान के दौरान मॉडिफाइड साइलेंसर वाली बुलेट भी पुलिस की नजर में आई। एक युवक को जब पुलिस ने रोका तो उसने कार्रवाई से बचने के लिए पूर्व विधायक को फोन किया। इसके बावजूद पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया कि यातायात नियम तोड़ने पर निर्धारित कार्रवाई होगी और जुर्माना भरना पड़ेगा। कुछ अन्य वाहन चालकों ने अपने पुलिसकर्मी रिश्तेदारों के जरिए भी सिफारिश कराने का प्रयास किया लेकिन चेकिंग टीम ने किसी तरह की रियायत नहीं दी।

    तानसेन तिराहे पर चेकिंग के दौरान पुलिस को एक संदिग्ध मोटरसाइकिल मिली। एएसआई सुदेश भिलावी और आरक्षक राजवीर ने बाइक को रोककर प्राथमिक जांच की तो उसके चोरी की होने की जानकारी सामने आई। पुलिस अब बाइक से जुड़े दस्तावेजों और अन्य जानकारी का सत्यापन कर रही है। कानूनी कार्रवाई के लिए मोटरसाइकिल को पड़ाव थाना भेज दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद चेकिंग अभियान में केवल यातायात उल्लंघन ही नहीं बल्कि संदिग्ध वाहनों की जांच पर भी पुलिस का फोकस सामने आया।

    यातायात पुलिस ने एक ऐसी कार को भी पकड़ा जिसके चारों शीशों पर काली फिल्म लगी हुई थी। जांच के दौरान कार की आगे की नंबर प्लेट गायब मिली जबकि पीछे की नंबर प्लेट पर जानबूझकर टेप चिपकाया गया था। पुलिस ने कार को जब्त कर वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी। इसके अलावा तेज आवाज करने वाले मॉडिफाइड साइलेंसर लगी बुलेट मोटरसाइकिलों पर भी कार्रवाई की गई।

    पुलिस के मुताबिक बिना नंबर प्लेट या संदिग्ध नंबर प्लेट वाले वाहनों की जांच केवल यातायात नियमों के पालन तक सीमित नहीं है बल्कि अपराध की रोकथाम के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। चोरी और लूट जैसी घटनाओं में अपराधी पहचान छिपाने के लिए बिना नंबर प्लेट या बदली हुई नंबर प्लेट वाले वाहनों का इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसे वाहनों की जांच से पुलिस को संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने और चोरी के वाहनों को ट्रेस करने में मदद मिलती है।

    वहीं कार के शीशों पर काली फिल्म के इस्तेमाल को लेकर भी पुलिस ने सख्ती दिखाई। ऐसे वाहनों में अंदर की गतिविधियां बाहर से दिखाई नहीं देतीं जिससे सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ सकती हैं। पुलिस का कहना है कि नियमों के अनुरूप वाहन चलाने से सड़क सुरक्षा बेहतर होती है और संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी रखना भी आसान होता है।

    ग्वालियर पुलिस ने वाहन चालकों से अपील की है कि वे यातायात नियमों का पालन करें। पुलिस ने साफ संकेत दिया है कि आगे भी इस तरह के चेकिंग अभियान जारी रह सकते हैं और बार बार नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

  • NH-44 पर बदइंतजामी का कहर: छौंदा टोल पर 5 किमी लंबा जाम, कैंसर पीड़ित मां के साथ फंसा बेटा-प्रशासन बेखबर

    NH-44 पर बदइंतजामी का कहर: छौंदा टोल पर 5 किमी लंबा जाम, कैंसर पीड़ित मां के साथ फंसा बेटा-प्रशासन बेखबर


    मध्य प्रदेश / मुरैना  के मुरैना जिले में नेशनल हाईवे-44 पर स्थित छौंदा टोल प्लाजा इन दिनों अव्यवस्था और लापरवाही की पहचान बन चुका है। यहां लगने वाला रोज़ाना जाम अब केवल ट्रैफिक समस्या नहीं रहा बल्कि यह मानव संवेदना और प्रशासनिक जिम्मेदारी पर भी सवाल खड़े कर रहा है। शुक्रवार शाम हालात इतने बिगड़े कि हाईवे पर 4 से 5 किलोमीटर लंबा महाजाम लग गया जो करुआ गांव तक फैल गया। हाईवे होने के कारण चंद मिनटों में ही वाहनों की लंबी कतार लग गई। जाम में आम वाहन ही नहीं बल्कि एंबुलेंस मरीजों की गाड़ियां और बुजुर्ग यात्री भी फंसे रहे। कई घंटे बीतने के बावजूद जाम खुलवाने की कोई ठोस व्यवस्था नजर नहीं आई।

    कैंसर पीड़ित मां की हालत बिगड़ी
    इस जाम की सबसे दर्दनाक तस्वीर तब सामने आई जब मुरैना निवासी अरविंद सिंह अपनी कैंसर पीड़ित मां उर्मिला के साथ फंस गए। अरविंद ने बताया कि उनकी मां की हाल ही में 14 घंटे लंबी सर्जरी कीमोथेरेपी और रेडिएशन हुआ है। वे ग्वालियर से नियमित चेकअप कराकर लौट रहे थे तभी शाम के समय छौंदा टोल पर जाम में फंस गए। अरविंद के मुताबिक “जाम करुआ गांव के विक्टर स्कूल तक था। घंटों खड़े रहने से मां की तबीयत बिगड़ने लगी। उन्हें लगातार उल्टियां होने लगीं लेकिन न टोल प्रबंधन ने मदद की और न ही कोई प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचा।
    परिजनों ने कई बार मदद की गुहार लगाई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

    1 दिसंबर से नई कंपनी बढ़ी अव्यवस्था

    गौरतलब है कि 1 दिसंबर से छौंदा टोल प्लाजा का संचालन शिवा कॉर्पोरेशन कंपनी के पास है। इससे पहले यह टोल पथ इंडिया द्वारा संचालित किया जा रहा था। नई कंपनी के टेकओवर के बाद से ही यहां अव्यवस्था बढ़ गई है।स्थानीय लोगों और यात्रियों का कहना है कि शाम होते ही यहां जाम लगना आम हो गया है। टोल बूथ पर स्टाफ की कमीतकनीकी खामियां और सुस्त प्रबंधन इसकी बड़ी वजह मानी जा रही हैं।

    टोल मैनेजर का गैर-जिम्मेदाराना बयान

    जब इस अव्यवस्था पर टोल मैनेजर अनुराग तोमर से सवाल किया गया तो उन्होंने हैरान करने वाला जवाब दिया। उन्होंने कहाजाम लगता है तो हम ही खुलवाते हैं। अभी नया चार्ज संभाला है सिस्टम में थोड़ी समस्या है ठीक करवा रहे हैं। इस बयान से साफ है कि यात्रियों की परेशानी को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।

    पुलिस और प्रशासन की प्रतिक्रिया

    सिविल लाइन थाना प्रभारी से संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।हालांकि मामले की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ASP सुरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि छौंदा टोल पर जाम की लगातार शिकायतें मिल रही हैं।उन्होंने चेतावनी दी-टोल प्रबंधन को निर्देश दिए गए हैं कि जाम की स्थिति नहीं बननी चाहिए। अगर सुधार नहीं हुआ तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।छौंदा टोल पर लग रहा जाम सिर्फ ट्रैफिक की समस्या नहीं बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का आईना है। जब मरीज और एंबुलेंस तक फंसे रहें तो यह सिस्टम की विफलता मानी जाएगी।