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  • मुरैना को मिली बिजली की नई ताकत: जौरा सब स्टेशन में लगा 50 एमवीए ट्रांसफार्मर

    मुरैना को मिली बिजली की नई ताकत: जौरा सब स्टेशन में लगा 50 एमवीए ट्रांसफार्मर


    भोपाल। मध्यप्रदेश के मुरैना जिले की विद्युत व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है। ऊर्जा मंत्रीप्रद्युम्न सिंह तोमर ने जानकारी दी कि 132 केवी जौरा सब स्टेशन की क्षमता में वृद्धि करते हुए यहां उच्च क्षमता का नया पॉवर ट्रांसफार्मर स्थापित किया गया है।

    उन्होंने बताया कि पहले यहां 20 एमवीए क्षमता का ट्रांसफार्मर स्थापित था जिसे अब बदलकर 50 एमवीए क्षमता का नया ट्रांसफार्मर लगाया गया है और इसे सफलतापूर्वक ऊर्जीकृत भी कर दिया गया है। इस बदलाव से मुरैना जिले की पारेषण प्रणाली अधिक विश्वसनीय होगी और उपभोक्ताओं को बेहतर वोल्टेज के साथ गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति मिल सकेगी।

    इस उपलब्धि पर मंत्री ने एमपी ट्रांसको के अधिकारियों और कर्मचारियों को बधाई दी और कहा कि इससे क्षेत्र के औद्योगिक, कृषि और घरेलू उपभोक्ताओं को बड़ा लाभ मिलेगा। साथ ही भविष्य में बढ़ती बिजली की मांग को भी आसानी से पूरा किया जा सकेगा।

    एमपी ट्रांसको के अधीक्षण अभियंता राजीव तोतला के अनुसार इस नए ट्रांसफार्मर के शुरू होने से जौरा, कुम्हेरी, सुमावली, सांकरा, सिटी जौरा, चिनौनी, नवोदय और बगचिनी सहित आसपास के क्षेत्रों के लगभग 18 हजार उपभोक्ता लाभान्वित होंगे।

    नए ट्रांसफार्मर की स्थापना के बाद जौरा सब स्टेशन की कुल क्षमता बढ़कर 113 एमवीए हो गई है। वहीं जिले की कुल ट्रांसफार्मेशन क्षमता भी बढ़कर 1482 एमवीए तक पहुंच गई है। इससे बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता और स्थिरता में महत्वपूर्ण सुधार होने की उम्मीद है।

    गौरतलब है कि एमपी ट्रांसको मुरैना जिले में 220 केवी के दो और 132 केवी के सात सब स्टेशनों के माध्यम से बिजली पारेषण कर रहा है। ऐसे में यह नया ट्रांसफार्मर पूरे क्षेत्र के लिए राहत और विकास का संकेत माना जा रहा है।

  • भोपाल में जायका टीम ने महावड़िया सब स्टेशन और ट्रांसमिशन लाइन का किया सूक्ष्म मूल्यांकन, बिजली आपूर्ति में सुधार

    भोपाल में जायका टीम ने महावड़िया सब स्टेशन और ट्रांसमिशन लाइन का किया सूक्ष्म मूल्यांकन, बिजली आपूर्ति में सुधार


    भोपाल । भोपाल में जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी जायका ने मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी एमपी ट्रांसको के ट्रांसमिशन नेटवर्क सुदृढ़ीकरण के तहत हुए कार्यों का विस्तृत निरीक्षण और सूक्ष्म मूल्यांकन किया। जायका की इवैल्यूएटर सुश्री हिसाए ताकाहाशी और भारतीय प्रतिनिधि श्री कुनाल गुप्ता ने भोपाल में वित्त पोषित जायका 2 परियोजनाओं के निर्माण कार्यों गुणवत्ता उपयोगिता और अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुसार क्रियान्वयन का बारीकी से परीक्षण किया।

    निरीक्षण के दौरान टीम ने सर्वप्रथम 132 केवी महावड़िया सब स्टेशन और इसके लिए निर्मित 132 केवी महावड़िया मुगलियाछाप डबल सर्किट ट्रांसमिशन लाइन का निरीक्षण किया। सुश्री ताकाहाशी ने परियोजना की प्रारंभिक योजना क्रियान्वयन प्रक्रिया स्थापित उपकरणों की गुणवत्ता लागत और रखरखाव से संबंधित जानकारी प्राप्त की। सब स्टेशन के संचालन और संधारण पदस्थ कर्मचारियों की योग्यता दैनिक कार्य आपातकालीन स्थिति से निपटने की कार्ययोजना और पर्यावरणीय प्रभावों का भी जायका टीम ने मूल्यांकन किया। निरीक्षण के उपरांत टीम ने पाया कि सब स्टेशन और ट्रांसमिशन लाइन निर्माण अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हैं और इसके क्रियान्वयन में उच्च गुणवत्ता बनी हुई है।

    जायका टीम ने महावड़िया सब स्टेशन के आसपास के क्षेत्र के व्यापारियों से प्रत्यक्ष फीडबैक भी लिया। स्थानीय व्यापारियों ने बताया कि सब स्टेशन बनने के बाद बिजली आपूर्ति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। अब उन्हें पर्याप्त और निर्बाध बिजली मिल रही है जिससे व्यवसाय संचालन आसान हो गया है और आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति में सुधार आया है।

    उदाहरण के तौर पर डेयरी संचालक श्री दिनेश यादव ने बताया कि 2021 से पहले मंडीदीप सब स्टेशन से आने वाली लंबी लाइन के कारण बार बार ट्रिपिंग और वोल्टेज उतार चढ़ाव की समस्या रहती थी। सब स्टेशन बनने के बाद यह समस्या समाप्त हो गई है। अब वह अपने फ्रिज और रेफ्रिजरेटर बिना रुकावट चलाकर दूध और दही जैसी सामग्री लंबे समय तक सुरक्षित रख पा रहे हैं जिससे दुकान की आय बढ़ी है।

    इसी तरह श्री बाबूलाल विश्वकर्मा ने बताया कि पहले बिजली कटौती और लाइन फॉल्ट के कारण वेल्डिंग कार्य रुक जाता था जिससे कार्य अवधि कम रहती थी। अब सतत और उच्च वोल्टेज की आपूर्ति से उनका कार्य सुचारु रूप से चल रहा है और ग्राहक समय पर सेवा प्राप्त कर पा रहे हैं।स्थानीय नागरिकों ने भी बताया कि सब स्टेशन के निर्माण से पहले क्षेत्र में लंबे समय तक विद्युत व्यवधान रहता था जो अब न्यूनतम हो गया है। इससे घरेलू और व्यावसायिक गतिविधियों को स्थिरता और गति मिली है।

    जायका टीम ने इस निरीक्षण में पाया कि महावड़िया सब स्टेशन और ट्रांसमिशन लाइन न केवल तकनीकी मानकों पर खरे उतरे हैं बल्कि क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था और नागरिक जीवन पर भी सकारात्मक प्रभाव डाल रहे हैं। परियोजना के समग्र लाभों ने भोपाल क्षेत्र में बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ाई है और स्थानीय व्यवसायियों तथा उपभोक्ताओं को निरंतर लाभ पहुंचाया है।

  • मुरैना में एमपी ट्रांसको का जीवन रक्षा संकल्प 220 केवी सब स्टेशन पर सीपीआर प्रशिक्षण से सशक्त हुए कर्मचारी

    मुरैना में एमपी ट्रांसको का जीवन रक्षा संकल्प 220 केवी सब स्टेशन पर सीपीआर प्रशिक्षण से सशक्त हुए कर्मचारी


    भोपाल /मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी द्वारा प्रदेश भर में कार्यस्थलों को सुरक्षित और आपात स्थितियों के लिए तैयार बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। इसी क्रम में मुरैना स्थित 220 केवी सब स्टेशन पर सीपीआर एवं अन्य जीवन रक्षक तकनीकों पर आधारित एक व्यापक प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम रेड क्रॉस सोसायटी तथा शासकीय जिला चिकित्सालय मुरैना के सहयोग से संपन्न हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्युत तंत्र से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों को ऐसी जीवन रक्षक दक्षताओं से लैस करना है जिनसे किसी आकस्मिक परिस्थिति में तुरंत सहायता प्रदान कर किसी की जान बचाई जा सके।

    कार्यक्रम के संयोजक ग्वालियर के अधीक्षण अभियंता श्री राजीव तोतला तथा कार्यपालन अभियंता श्री सीके जैन ने इस अवसर पर कहा कि प्रशिक्षण का वास्तविक उद्देश्य केवल औपचारिकता नहीं बल्कि मानवीय संवेदनशीलता का विस्तार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि प्रशिक्षित कर्मियों में से कोई एक भी व्यक्ति अपने जीवनकाल में किसी जरूरतमंद की जान बचाने में सफल होता है तो यह प्रशिक्षण पूर्णतः सार्थक सिद्ध होगा। उनके अनुसार तकनीकी दक्षता के साथ मानवीय तत्परता का समावेश ही संस्था की वास्तविक शक्ति है।

    कार्यशाला में नियमित एवं आउटसोर्स दोनों प्रकार के कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। बड़ी संख्या में उपस्थित कर्मियों ने प्रशिक्षण को गंभीरता से ग्रहण किया और आपातकालीन स्थितियों में त्वरित निर्णय लेने की आवश्यकता को समझा। प्रशिक्षण के दौरान चिकित्सा अधिकारी डॉ अनिल व्यास और उनकी विशेषज्ञ टीम ने प्रतिभागियों को सीपीआर की संपूर्ण प्रक्रिया का चरणबद्ध अभ्यास कराया। मानव पुतलों के माध्यम से हृदय गति रुकने की स्थिति में छाती पर दाब देने की सही तकनीक श्वास प्रदान करने की विधि तथा समय प्रबंधन के महत्व को विस्तार से समझाया गया।

    डॉ व्यास ने बताया कि दुर्घटना या अचानक हृदयाघात की स्थिति में प्रारंभिक कुछ मिनट अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। यदि सही तरीके से और सही समय पर सीपीआर दिया जाए तो व्यक्ति के जीवित बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। प्रशिक्षण के दौरान प्रत्येक प्रतिभागी को विशेषज्ञों की निगरानी में स्वयं अभ्यास करने का अवसर दिया गया ताकि वे केवल सैद्धांतिक जानकारी तक सीमित न रहें बल्कि व्यावहारिक दक्षता भी अर्जित करें।

    कार्यक्रम में सुरक्षा संस्कृति को मजबूत बनाने पर विशेष बल दिया गया। विद्युत उपकेंद्रों और ट्रांसमिशन लाइन में कार्यरत कर्मचारियों को अक्सर जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में कार्य करना पड़ता है। ऐसे में प्राथमिक उपचार और जीवन रक्षक तकनीकों का ज्ञान उनके लिए अनिवार्य हो जाता है। यह पहल न केवल कर्मचारियों के आत्मविश्वास को बढ़ाती है बल्कि कार्यस्थल को अधिक सुरक्षित और उत्तरदायी बनाती है।

    मुरैना में आयोजित यह प्रशिक्षण शिविर प्रदेश स्तर पर चल रहे व्यापक अभियान का हिस्सा है जिसके अंतर्गत सभी जिला मुख्यालयों पर स्थित ट्रांसमिशन इकाइयों में इसी प्रकार की कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं। इस प्रयास से स्पष्ट है कि कंपनी केवल विद्युत आपूर्ति तक सीमित नहीं रहना चाहती बल्कि सामाजिक दायित्वों के निर्वहन में भी अग्रणी भूमिका निभा रही है। जीवन की रक्षा से बड़ा कोई कर्तव्य नहीं और इसी भावना के साथ यह अभियान निरंतर आगे बढ़ रहा है।

  • एम.पी. ट्रांसको की नई डिजिटल पहल: पेंशनर्स को वेबसाइट पर उपलब्ध होगी पेंशन स्लिप

    एम.पी. ट्रांसको की नई डिजिटल पहल: पेंशनर्स को वेबसाइट पर उपलब्ध होगी पेंशन स्लिप

    मध्यप्रदेश। पावर ट्रांसमिशन कंपनीएम.पी. ट्रांसको ने अपने पेंशनर्स की सुविधा को ध्यान में रखते हुए एक और महत्वपूर्ण डिजिटल पहल की है। कंपनी की आईटी सेल एवं पेंशन विभाग की संयुक्त टीम के प्रयासों से अब एम.पी. ट्रांसको के तकरीबन 4500 पेंशनर्स, चाहे वो किसी भी बैंक से पेंशन प्राप्त करते हों, कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से अपनी पेंशन स्लिप ऑनलाइन प्राप्त कर सकेंगे।

    एम.पी. ट्रांसको के मुख्य वित्तीय अधिकारी श्री मुकुल मेहरोत्रा ने बताया कि अब तक केवल यूनियन बैंक से पेंशन प्राप्त करने वाले पेंशनर्स को ही वेबसाइट पर पेंशन स्लिप उपलब्ध कराने की सुविधा थी। लेकिन अब भारतीय स्टेट बैंक सहित अन्य बैंकों से पेंशन लेने वाले पेंशनर्स के लिए भी यह व्यवस्था सफलतापूर्वक विकसित कर ली गई है।

    ऐसे प्राप्त करें स्लिप

    कंपनी की वेबसाइट पर उपलब्ध पेंशन पोर्टल में पेंशन स्लिप प्राप्त करें नामक विकल्प जोड़ा गया है। इसके माध्यम से पेंशनर अपने न्यूमेरिक पीपीओ नंबरबैंक खाता संख्या तथा माह का चयन कर आसानी से पेंशन स्लिप ऑनलाइन प्राप्त कर सकते हैं। वर्तमान में दिसंबर 2025 से संबंधित पेंशन स्लिप उपलब्ध कराई गई हैं, शीध्र ही वर्ष 2025 से पूर्व अवधि की पेंशन स्लिप भी वेबसाइट पर उपलब्ध करवा दी जायेगी।

  • एम.पी. ट्रांसको की 2025 में ऐतिहासिक उपलब्धियां: ऊर्जा मंत्री तोमर ने साझा की रिपोर्ट

    एम.पी. ट्रांसको की 2025 में ऐतिहासिक उपलब्धियां: ऊर्जा मंत्री तोमर ने साझा की रिपोर्ट

    नई दिल्ली। वर्ष 2025 में ऊर्जा क्षेत्र में एम.पी. पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एम.पी. ट्रांसको) ने अनेक ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की है। एम.पी. ट्रांसको ने कैलेंडर वर्ष 2025 में प्रदेश के ट्रांसमिशन नेटवर्क पारेषण प्रणाली के अधोसंरचना के सुदृढ़ीकरण विस्तारीकरण एवं विश्वसनीयता में महत्वपूर्ण कार्य किया है। विशेष रूप से 220 के.व्ही. ट्रांसमिशन लाइनों की ड्रोन पेट्रोलिंग में मिली सफलता के बाद अब प्रदेश में 400 के.व्ही. एवं 132 के.व्ही. के 23000 ट्रांसमिशन टावरों की ड्रोन पेट्रोलिंग भी की जा रही है। मध्यप्रदेश देश के उन राज्यों में अग्रणी है जो ट्रांसमिशन टावरों की पेट्रोलिंग ड्रोन के माध्यम से प्रारंभ करा रहे हैं।

    ट्रांसफार्मेशन केपेसिटी हुई 82985 एम.व्ही.ए.

    मध्यप्रदेश में इस वर्ष एम.पी. ट्रांसको ने अपने नेटवर्क में 2211 एम.व्ही.ए. क्षमता की अतिरिक्त वृद्धि की जिससे प्रदेश में कुल ट्रांसफार्मेशन क्षमता बढ़कर 82985 एम.व्ही.ए. की हो गई है। इस वर्ष 33 नये पावर ट्रांसफार्मर स्थापित कर ऊर्जीकृत किये गये जिससे एम.पी. ट्रांसको के ऊर्जीकृत पावर ट्रांसफार्मर की संख्या बढकर 1036 हो गई है।

    724 सर्किट कि.मी. ट्रांसमिशन लाइनों का हुआ निर्माण

    इस वर्ष कंपनी ट्रांसमिशन लाइनों की लंबाई बढ़कर 42857 सर्किट कि.मी. की हो गई है जो प्रदेश के 417 अति उच्चदाब सबस्टेशनों में विद्युत पारेषण करती है। इस वर्ष प्रदेश में 724 सर्किट कि.मी. ट्रांसमिशन लाइनों का निर्माण कर ऊर्जीकृत किया गया।

    पहली बार 19849 मेगावाट की डिमांड को किया हैंडल

    एम.पी. ट्रांसको के सिस्टम ने प्रदेश में पहली बार 19849 मेगावाट विद्युत डिमांड बिना किसी व्यवधान के हैंडल करने में सफलता प्राप्त की। वर्ष के अंतिम दिन 31 दिसम्बर 2025 को प्रदेश में आज तक की अधिकतम 19849 मेगावाट डिमांड दर्ज की गई।

    ट्रांसमिशन सिस्टम में नई टेक्नोलॉजी का हुआ समावेश

    एम.पी. पावर ट्रांसमिशन कंपनी ने प्रदेश के अपने ट्रांसमिशन सिस्टम में नई तकनीकों का समावेश किया है। मुख्यालय जबलपुर में स्वदेशी तकनीक से निर्मित स्काडा सिस्टम को अपग्रेड किया गया है। इसके अलावा मेट्रो इंदौर के लिये कम्पोजिट ट्रांसमिशन लाइन का निर्माण भी किया गया है। प्रदेश के पुराने तीन 132 के.व्ही. सबस्टेशन को रिमोट से संचालित करने के कार्य का पहला चरण पूरा कर लिया गया है।

    मध्यप्रदेश को मिला प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पावर लाइन ट्रांसटेक इंडिया अवॉर्ड

    दिसम्बर माह में मध्यप्रदेश ने विद्युत ट्रांसमिशन के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। एम.पी. ट्रांसको को वेस्टर्न रीजन में सबसे कम ट्रांसमिशन लॉस दर्ज करने के लिए प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पावर लाइन ट्रांसटेक इंडिया अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है।

    प्रोटेक्शन सेल हुआ 100 प्रतिशत डिजीटल

    भारत सरकार के डिजीटल इंडिया विजन के तहत कंपनी के प्रोटेक्शन सेल ने इस वर्ष पूरी तरह डिजीटल स्वरूप ले लिया है प्रदेश में 42857 सर्किट कि.मी. ट्रांसमिशन लाइनों 417 एक्स्ट्रा हाईटेंशन सबस्टेशन के 1000 से अधिक पावर ट्रांसफार्मर की हर पल निगरानी एवं सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले प्रोटेक्शन सेल का समूचा कार्य पूर्णतः डिजीटल हो रहा है।