Tag: MPElectricity

  • करंट हादसों से भड़का किसानों का गुस्सा, सीहोर से भोपाल पहुंचे ग्रामीणों ने बिजली मुख्यालय घेरा, कार्रवाई और मुआवजे की उठाई मांग

    करंट हादसों से भड़का किसानों का गुस्सा, सीहोर से भोपाल पहुंचे ग्रामीणों ने बिजली मुख्यालय घेरा, कार्रवाई और मुआवजे की उठाई मांग

    मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में करंट लगने की लगातार सामने आई घटनाओं के विरोध में किसानों और ग्रामीणों का आक्रोश राजधानी भोपाल तक पहुंच गया। जिले के कई गांवों से सैकड़ों किसान भोपाल स्थित मध्य प्रदेश विद्युत मंडल के गोविंदपुरा मुख्यालय पहुंचे और बिजली विभाग की कथित लापरवाही के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि जर्जर बिजली लाइनों और झूलते तारों की बार-बार शिकायत करने के बावजूद विभाग ने समय रहते आवश्यक सुधार नहीं किए, जिसके कारण कई गंभीर हादसे हुए। किसानों ने दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई, पीड़ित परिवारों को पर्याप्त आर्थिक सहायता और भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।

    सीहोर जिले के बड़वेली, चंदेरी, बिलकिसगंज, ढाबला, मंगरखेड़ा, पचामा, पाली, जामुनिया, रामाखेड़ी और अन्य गांवों से पहुंचे किसानों ने समाजसेवी एमएस मेवाड़ा के नेतृत्व में मुख्यालय के बाहर करीब तीन घंटे तक धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने बिजली विभाग के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कहा कि खेतों के ऊपर से गुजर रही जर्जर 11 केवी और एलटी लाइनें किसानों की जान के लिए लगातार खतरा बनी हुई हैं। उनका आरोप है कि शिकायतों के बावजूद अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था सुधारने में गंभीरता नहीं दिखाई।

    प्रदर्शन के दौरान किसानों ने बताया कि हाल के वर्षों में करंट की चपेट में आने से पांच किसान गंभीर हादसों का शिकार हुए। इनमें तीन किसानों की मौत हो चुकी है, जबकि दो किसानों के हाथ काटने पड़े। ग्रामीणों का कहना है कि इन हादसों ने प्रभावित परिवारों को आर्थिक और सामाजिक संकट में डाल दिया है। उनका आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, जिससे लोगों में नाराजगी लगातार बढ़ रही है।

    प्रदर्शनकारियों ने विद्युत मंडल के प्रबंध निदेशक ऋषि गर्ग को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई करने और पीड़ित परिवारों को नियमानुसार राहत उपलब्ध कराने की मांग की। किसानों ने यह भी कहा कि वे पहले मुख्यमंत्री कार्यालय, ऊर्जा मंत्री, जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों को कई बार ज्ञापन दे चुके हैं, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका। उनका कहना है कि यदि समय रहते बिजली लाइनों की मरम्मत और रखरखाव किया जाता तो कई लोगों की जान बचाई जा सकती थी।

    धरने के बाद प्रबंध निदेशक ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत करते हुए मामले की जांच कराने और नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया। किसानों ने हालांकि स्पष्ट किया कि केवल आश्वासन पर्याप्त नहीं होगा और यदि निर्धारित समय में कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। उनका कहना है कि प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता के साथ परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी भी दी जानी चाहिए, ताकि उनका भविष्य सुरक्षित हो सके।

    इसके बाद किसान प्रतिनिधिमंडल ने मानव अधिकार आयोग और महिला आयोग को भी ज्ञापन सौंपकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की। आयोग के अधिकारियों ने शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराने का भरोसा दिया। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई, पीड़ित परिवारों को 25 लाख रुपये का मुआवजा और अन्य मांगें पूरी नहीं हुईं तो सीहोर, भोपाल, शाजापुर और उज्जैन सहित आसपास के जिलों के किसान संयुक्त रूप से बड़ा आंदोलन शुरू करेंगे। उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली ढांचे की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।

  • नए साल में MP के बिजली उपभोक्ताओं को लग सकता है बड़ा झटकाबिजली दरों में 10% तक बढ़ोतरी की योजना

    नए साल में MP के बिजली उपभोक्ताओं को लग सकता है बड़ा झटकाबिजली दरों में 10% तक बढ़ोतरी की योजना

    जबलपुर। मध्यप्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के लिए नया वित्तीय वर्ष 2026-27 महंगा साबित हो सकता है। बिजली कंपनियों ने राज्य विद्युत नियामक आयोग को बिजली दरों में 10 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया हैजिसे मंजूरी मिलने पर उपभोक्ताओं को बिजली के बिलों में बढ़ोतरी का सामना करना पड़ सकता है। पावर मैनेजमेंट कंपनी ने विद्युत नियामक आयोग के पास टैरिफ पिटिशन दाखिल की हैजो अब सुनवाई के बाद तय करेगा कि दरों में कितनी वृद्धि की जाएगी।

    पावर कंपनी ने प्रस्ताव में करीब 42,000 करोड़ रुपये का घाटा बताया है और इस घाटे को कम करने के लिए दरों में वृद्धि की योजना बनाई है। विद्युत आयोग को यह पिटिशन 15 दिसंबर तक सार्वजनिक करने की संभावना हैऔर इसके बाद आम जनता से आपत्ति भी ली जाएगी। यदि इस पर कोई आपत्ति नहीं आतीतो आयोग इसकी मंजूरी दे सकता है।

    घाटे का आंकड़ा

    पावर मैनेजमेंट कंपनी के सीजीएम रेवेन्यु शैलेंद्र सक्सेना ने पुष्टि की कि आयोग को पिटिशन दी गई हैलेकिन उन्होंने फिलहाल यह खुलासा नहीं किया कि बढ़ोतरी का प्रस्ताव कितना प्रतिशत हो सकता है। हालांकिएक अधिकारी ने बताया कि प्रस्ताव में मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी करीब 18,712 करोड़ रुपये के घाटे में हैपूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी 16,378 करोड़ रुपये और पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी 7,285 करोड़ रुपये के घाटे में चल रही हैं। इन घाटों को पूरा करने के लिए बिजली दरों में बढ़ोतरी की योजना बनाई जा रही है।

    सम्भावित प्रभाव

    अगर यह प्रस्ताव लागू होता हैतो यह मध्यप्रदेश के लाखों बिजली उपभोक्ताओं के लिए भारी पड़ सकता है। खासतौर पर वे उपभोक्ता जो घरेलू उपयोग के लिए बिजली का खर्च उठाते हैंउन्हें इसके असर से जूझना पड़ेगा। इस प्रस्ताव से पहले ही बिजली दरों में मामूली वृद्धि हो चुकी हैऔर अब अगर दरें और बढ़ती हैं तो उपभोक्ताओं पर वित्तीय बोझ और बढ़ जाएगा।

    इसके बावजूदबिजली कंपनियों का कहना है कि बढ़ोतरी का मुख्य उद्देश्य कंपनियों के घाटे को कम करना और वित्तीय स्थिति को स्थिर बनाना है। हालांकिइससे जुड़ी असंतोष की स्थिति भी बन सकती हैऔर उपभोक्ताओं को इस बारे में अपनी आपत्तियां उठाने का मौका मिलेगा।

    मध्यप्रदेश में बिजली दरों में बढ़ोतरी की यह योजना कई उपभोक्ताओं के लिए नई चुनौतियां ला सकती है। खासकर सर्दियों के मौसम में जहां पहले से ही अन्य खर्चे बढ़ जाते हैंऐसे में बिजली दरों में वृद्धि के फैसले से आम लोगों के बजट पर और असर पड़ सकता है। फिलहालसभी की निगाहें इस पिटिशन पर हैंऔर यह देखना होगा कि आयोग इसके बाद क्या निर्णय लेता है।