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  • उज्जैन में महाकाल महोत्सवशंकर महादेवन और सोना महापात्रा देंगे प्रस्तुति

    उज्जैन में महाकाल महोत्सवशंकर महादेवन और सोना महापात्रा देंगे प्रस्तुति


    उज्जैन । उज्जैन के प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में 14 से 18 जनवरी तक पांच दिवसीय महाकाल महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। इस महोत्सव में देश-विदेश के प्रसिद्ध कलाकार शंकर महादेवन सोना महापात्रा और अन्य कई कलाकार अपनी शानदार प्रस्तुति देंगे। यह आयोजन महाकाल की महिमा को दर्शाने और लोक संस्कृति के रंगों को उजागर करने के लिए विशेष रूप से आयोजित किया जा रहा है।महोत्सव का उद्घाटन मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 14 जनवरी को शाम 7 बजे महाकाल महालोक में करेंगे। इस मौके पर प्रभारी मंत्री गौतम टेटवालसंस्कृति मंत्री धर्मेंद्र लोधीराज्यसभा सदस्य संत बालयोगी उमेशनाथसांसद अनिल फिरोजिया और निगम सभापति कलावती यादव भी मौजूद रहेंगे।

    कला और संस्कृति का संगम

    महोत्सव के दौरान शंकर महादेवन और सोना महापात्रा जैसे जानेमाने कलाकारों द्वारा संगीत और कला की शानदार प्रस्तुति दी जाएगी। इसके अलावाभोपाल के भारत भवन में महाभारत का मंचन भी होगाजो दर्शकों के लिए एक अनूठा अनुभव होगा।

    इतिहास से जुड़ा महोत्सव

    यह महोत्सव सिर्फ संगीत और कला के लिए नहींबल्कि उज्जयिनी के इतिहास से भी जुड़ा हुआ है। करीब 2100 साल पहलेसम्राट विक्रमादित्य भी शिव महोत्सव का आयोजन करते थेजो आज भी लोगों की श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक है।यह महाकाल महोत्सव उज्जैन के धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रखने का एक महत्वपूर्ण अवसर हैजो न केवल स्थानीय बल्कि देश-विदेश से आए पर्यटकों और श्रद्धालुओं को भी आकर्षित करेगा।

  • किसानों के आगे झुकी सरकार उज्जैन सिंहस्थ लैंड पूलिंग योजना पूरी तरह निरस्त 2028 कुंभ से पहले बड़ा फैसला

    किसानों के आगे झुकी सरकार उज्जैन सिंहस्थ लैंड पूलिंग योजना पूरी तरह निरस्त 2028 कुंभ से पहले बड़ा फैसला


    उज्जैन/भोपाल । मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने एक बड़ा निर्णय लेते हुए उज्जैन में आगामी सिंहस्थ कुंभ मेले के लिए लाई गई विवादास्पद लैंड पूलिंग योजना’ को आधिकारिक रूप से निरस्त कर दिया है। मंगलवार को सरकार द्वारा जारी आदेश के बाद उन हजारों किसानों ने राहत की सांस ली है जो पिछले कई महीनों से अपनी जमीन बचाने के लिए संघर्ष कर रहे थे।

    विरोध की ज्वाला और आंदोलन की चेतावनी

    इस फैसले के पीछे सबसे बड़ा कारण भारतीय किसान संघ का कड़ा रुख रहा। किसान संघ ने स्पष्ट कर दिया था कि वे किसी भी कीमत पर अपनी पुश्तैनी जमीन सरकार को स्थायी निर्माण के लिए नहीं देंगे। 18 नवंबर को हुए ‘डेरा डालो घेरा डालो’ आंदोलन के बाद सरकार ने मौखिक रूप से योजना निरस्त करने की बात कही थी लेकिन बाद में केवल संशोधन का पत्र जारी किया गया। इस वादाखिलाफी से नाराज किसानों ने 26 दिसंबर से पुनः उग्र आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी थी जिसके दबाव में अंततः सरकार को पूर्ण निरस्तीकरण का आदेश जारी करना पड़ा।

    अपनों ने भी उठाए थे सवाल

    सरकार के लिए स्थिति तब और असहज हो गई जब सत्तापक्ष के भीतर से ही विरोध के स्वर उठने लगे। उज्जैन उत्तर से भाजपा विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर साफ कहा था कि यह योजना किसान हित में नहीं है। उन्होंने यहाँ तक चेतावनी दे दी थी कि यदि योजना रद्द नहीं हुई तो वे स्वयं किसानों के साथ आंदोलन में बैठने को मजबूर होंगे। स्थानीय जनप्रतिनिधियों के इस दबाव ने सरकार को पुनर्विचार के लिए विवश किया।

    क्या थी लैंड पूलिंग योजना और क्यों था विरोध

    अगला सिंहस्थ मेला वर्ष 2028 में आयोजित होना है। इसके लिए सरकार चाहती थी कि सिंहस्थ क्षेत्र में आने वाली किसानों की निजी भूमि पर स्थायी निर्माण और बुनियादी ढांचा विकसित किया जाए। इसके लिए लैंड पूलिंग नीति लाई गई थी।

    किसानों के विरोध के मुख्य बिंदु निम्नलिखित थे

    स्थायी कब्जा बनाम अस्थायी उपयोग दशकों से परंपरा रही है कि सिंहस्थ के लिए किसान केवल 5-6 महीनों के लिए अपनी जमीन सरकार को उपयोग हेतु देते थे और मेला समाप्त होने पर जमीन वापस मिल जाती थी। लैंड पूलिंग के तहत जमीन का स्वरूप स्थायी रूप से बदल जाता। रोजी-रोटी का संकट किसानों को डर था कि स्थायी निर्माण के बाद वे खेती नहीं कर पाएंगे जिससे उनकी आजीविका छिन जाएगी।
    अधिकारों का हनन किसान अपनी जमीन पर मालिकाना हक खोने को तैयार नहीं थे।

    निष्कर्ष पुरानी परंपरा ही रहेगी बरकरार

    अब योजना निरस्त होने के बाद 2028 के सिंहस्थ मेले के लिए पुरानी व्यवस्था ही लागू रहने की संभावना है। सरकार अब किसानों से आपसी सहमति और किराए के आधार पर ही मेले के समय जमीन का उपयोग कर सकेगी। यह निर्णय न केवल किसानों की बड़ी जीत माना जा रहा है बल्कि इसे आगामी चुनावों और क्षेत्रीय संतुलन को साधने के सरकारी प्रयास के रूप में भी देखा जा रहा है।