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  • मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जमानत अर्जियों के लिए गठित कीं सात विशेष पीठें, 6 नवंबर तक चलेगी सुनवाई

    मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जमानत अर्जियों के लिए गठित कीं सात विशेष पीठें, 6 नवंबर तक चलेगी सुनवाई


    मध्य प्रदेश:
    हाईकोर्ट की जबलपुर स्थित मुख्य पीठ ने जमानत अर्जियों की सुनवाई में तेजी लाने के लिए सात विशेष पीठों का गठन किया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य लंबित जमानत मामलों पर सुनवाई करना और उनके जल्द निराकरण की प्रक्रिया को गति देना है। हाईकोर्ट प्रशासन की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार, ये विशेष पीठें 29 अक्टूबर से 6 नवंबर 2026 तक नियमित न्यायिक कार्यवाही पूरी होने के बाद दोपहर 2:30 बजे से सुनवाई करेंगी।

    नई व्यवस्था उन वकीलों और पक्षकारों के लिए महत्वपूर्ण है, जिनकी जमानत अर्जियां निर्धारित अवधि के दौरान सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हैं। संबंधित मामलों में अब विशेष पीठों के तय कार्यक्रम के अनुसार कार्यवाही होगी। इस पहल से लंबित अर्जियों को सुनवाई के लिए अतिरिक्त अवसर मिलने की उम्मीद है। हालांकि, किसी मामले में जमानत मिलने या उसके अंतिम निराकरण का निर्णय संबंधित पीठ सुनवाई के दौरान उपलब्ध तथ्यों, दलीलों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर करेगी।

    जमानत अर्जियों की सुनवाई के लिए गठित सात एकल पीठों में न्यायमूर्ति विवेक रूसिया, न्यायमूर्ति आनंद पाठक, न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा, न्यायमूर्ति दीपक खोट, न्यायमूर्ति रामकुमार चौबे और न्यायमूर्ति बीपी शर्मा के नाम शामिल हैं। जारी जानकारी में इन विशेष सुनवाई सत्रों के लिए न्यायाधीशों को जिम्मेदारी सौंपे जाने का उल्लेख है। हालांकि, उपलब्ध विवरण में सातों पीठों के गठन के बावजूद छह न्यायाधीशों के नाम ही स्पष्ट रूप से दर्ज हैं।

    विशेष पीठों के गठन के पीछे लंबित जमानत अर्जियों पर समयबद्ध सुनवाई की आवश्यकता प्रमुख मानी जा रही है। अदालतों में विभिन्न प्रकार के मामलों के बीच जमानत अर्जियों के लिए अलग समय निर्धारित होने से संबंधित प्रकरणों को सुनने की प्रक्रिया व्यवस्थित हो सकती है। इस व्यवस्था के तहत निर्धारित अवधि में सूचीबद्ध अर्जियों पर सुनवाई की जाएगी। पक्षकारों और उनके अधिवक्ताओं को अपने मामले की सूची और निर्धारित समय के संबंध में हाईकोर्ट की आधिकारिक सूचना पर ध्यान देना होगा।

    जमानत अर्जियों के अलावा विविध अपीलों की सुनवाई के लिए भी अलग व्यवस्था की गई है। इसके तहत न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की एकल पीठ गठित की गई है, जो निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार विविध अपीलों से जुड़े मामलों की सुनवाई करेगी। इस तरह हाईकोर्ट प्रशासन ने जमानत मामलों के साथ विविध अपीलों की सुनवाई के लिए भी न्यायिक कार्यवाही को व्यवस्थित करने का कदम उठाया है।

    विशेष पीठों की यह व्यवस्था 6 नवंबर तक निर्धारित है। इस दौरान नियमित न्यायिक कार्यवाही समाप्त होने के बाद दोपहर 2:30 बजे से संबंधित मामलों की सुनवाई की जाएगी। जिन पक्षकारों की अर्जियां इस अवधि में सूचीबद्ध हैं, उनके लिए सुनवाई की तारीख और पीठ की जानकारी महत्वपूर्ण होगी। वकीलों को भी निर्धारित सूची के अनुसार तैयारी करनी होगी, ताकि अदालत के सामने आवश्यक दस्तावेज और दलीलें प्रस्तुत की जा सकें।

    हाईकोर्ट प्रशासन की इस पहल से लंबित जमानत अर्जियों के निपटारे की प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि, वास्तविक प्रगति इस बात पर निर्भर करेगी कि निर्धारित अवधि में कितने मामलों की सुनवाई पूरी होती है और उनमें क्या आदेश पारित किए जाते हैं। फिलहाल, जबलपुर मुख्य पीठ में 29 अक्टूबर से 6 नवंबर तक चलने वाले विशेष सुनवाई कार्यक्रम पर संबंधित पक्षकारों और अधिवक्ताओं की नजर रहेगी।

  • एमएससी नर्सिंग प्रवेश में हाई कोर्ट सख्त, काउंसिल के अधिवक्ता को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश

    एमएससी नर्सिंग प्रवेश में हाई कोर्ट सख्त, काउंसिल के अधिवक्ता को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश


    भोपाल। मध्य प्रदेश में एमएससी नर्सिंग प्रवेश प्रक्रिया को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। याचिकाकर्ता एनएसयूआइ उपाध्यक्ष रवि परमार एवं अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने मध्य प्रदेश नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल के अधिवक्ता को 15 दिसंबर 2025 को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है।
    हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी
    सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता अभिषेक पांडेय ने न्यायालय को बताया कि काउंसिल ने एमएससी नर्सिंग और पोस्ट-बीएससी काउंसलिंग की समय-सारणी जारी की है, लेकिन काउंसिल की वेबसाइट पूरी तरह से कार्यशील नहीं है। इसका सीधा असर हजारों छात्रों पर पड़ा है, जो प्रवेश प्रक्रिया में भाग लेने में असमर्थ हो रहे हैं। हाईकोर्ट ने इस मामले में काउंसिल की लापरवाही पर कड़ा सवाल उठाया और आदेश दिया कि अधिकारी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर छात्र हितों और प्रवेश प्रक्रिया की स्थिति की व्याख्या करें।

    वेबसाइट और तकनीकी खामियां

    याचिकाकर्ताओं के अनुसार, काउंसिल की वेबसाइट में लगातार तकनीकी खामियां हैं। कई छात्र पंजीकरण या आवेदन फॉर्म भरने में असफल हो रहे हैं। समय पर प्रवेश न मिलने की स्थिति में छात्रों की पढ़ाई और करियर प्रभावित होने की आशंका है। वर्तमान में कई छात्र इस समस्या के कारण परीक्षा और काउंसलिंग की तारीखों को लेकर असमंजस में हैं। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी तकनीकी लापरवाही के कारण छात्रों के अधिकार प्रभावित नहीं होने चाहिए।

    काउंसिल की जिम्मेदारी

    हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रेशन काउंसिल को चेतावनी दी कि छात्रों के प्रवेश और करियर से जुड़ी प्रक्रिया में किसी भी तरह की अनियमितता या विलंब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अदालत ने निर्देश दिया कि अधिवक्ता को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर वेबसाइट की स्थिति और प्रवेश प्रक्रिया की व्याख्या करनी होगी। इस कदम से यह संदेश गया है कि छात्रों के अधिकारों की सुरक्षा सर्वोपरि है और सरकारी संस्थानों की जिम्मेदारी है कि डिजिटल और प्रशासनिक प्रक्रियाएं समय पर और सुचारु रूप से पूरी हों।

    छात्रों की बढ़ती परेशानियां
    एमएससी नर्सिंग में दाखिले की प्रक्रिया पर तकनीकी और प्रशासनिक समस्याओं के कारण छात्रों में चिंता और असमंजस बढ़ गया है। कई छात्र बार-बार वेबसाइट पर लॉग इन करने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन लगातार त्रुटि संदेश और फॉर्म अपलोड न होने की समस्याएं उन्हें बाधित कर रही हैं।हाईकोर्ट की सख्ती के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि काउंसिल जल्द ही वेबसाइट और प्रवेश प्रक्रिया को सुचारु बनाएगी। इससे छात्रों का समय बचेगा और वे बिना बाधा के काउंसलिंग में भाग ले सकेंगे। 

    आगे की प्रक्रिया
    15 दिसंबर 2025 को अधिवक्ता की व्यक्तिगत पेशी के बाद अदालत स्थिति का व्यापक आकलन करेगी और आवश्यक निर्देश जारी कर सकती है। यह सुनवाई मध्य प्रदेश में नर्सिंग प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।