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  • मध्य प्रदेश में सिंहस्थ परियोजनाओं की लेटलतीफी पर शिकायतें तेज, MPIDC की कार्यप्रणाली को लेकर उठे गंभीर सवाल

    मध्य प्रदेश में सिंहस्थ परियोजनाओं की लेटलतीफी पर शिकायतें तेज, MPIDC की कार्यप्रणाली को लेकर उठे गंभीर सवाल

    मध्य प्रदेश: में वर्ष 2028 में होने वाले सिंहस्थ की तैयारियों के बीच उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों से जुड़ी विकास परियोजनाओं में कथित प्रशासनिक देरी का मामला सामने आया है। आरोप है कि मध्य प्रदेश औद्योगिक विकास निगम से जुड़ी कुछ परियोजनाओं में टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद तकनीकी स्वीकृति, सीमांकन और भुगतान जैसी प्रक्रियाएं लंबे समय तक अटकी रहीं। इस देरी को लेकर निर्माण एजेंसियों ने उच्च स्तर पर शिकायत की है।

    बताया गया है कि नीमच के चीताखेड़ा औद्योगिक पार्क और मंदसौर के बसई औद्योगिक पार्क से संबंधित परियोजनाओं में टेंडर आवंटन के बाद भी काम आगे बढ़ाने की जरूरी प्रक्रियाओं में देरी हुई। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कई मामलों में छह महीने से एक वर्ष तक सीमांकन और अन्य स्वीकृतियां लंबित रहीं। इसके चलते निर्माण एजेंसियों के काम की गति प्रभावित हुई और साइट पर गतिविधियां रुकने की स्थिति बनी।

    मामले में विभागीय अधिकारियों की कार्यशैली को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायत में कार्यकारी निदेशक राजेश राठौर समेत संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोपों में यह भी कहा गया है कि कथित अवैध राशि या कमीशन की मांग पूरी नहीं होने के कारण कुछ फाइलों को आगे बढ़ाने में देरी की गई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी जांच के स्तर पर होना बाकी है।

    निर्माण एजेंसियों की ओर से यह मामला मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव कार्यालय तक पहुंचाया गया है। शिकायत में टेंडर आवंटन के बाद काम से जुड़ी प्रशासनिक प्रक्रियाओं को रोके जाने और रनिंग बिलों के भुगतान में देरी का मुद्दा भी उठाया गया है। एजेंसियों का कहना है कि भुगतान अटकने से उनकी कार्यशील पूंजी प्रभावित हुई और परियोजनाओं की प्रगति पर सीधा असर पड़ा।

    मामला सामने आने के बाद MPIDC के प्रबंध निदेशक चंद्रमौली शुक्ला की ओर से दो अटकी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए जाने की जानकारी सामने आई है। इससे परियोजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है, लेकिन पहले हो चुकी देरी के कारण निर्धारित समयसीमा पर सवाल बने हुए हैं।

    सिंहस्थ 2028 के लिए उज्जैन में बड़े स्तर पर बुनियादी ढांचे और औद्योगिक विकास से जुड़े काम किए जा रहे हैं। ऐसे में किसी भी परियोजना में लंबे समय तक देरी होने का असर आगे की समयसीमा पर पड़ सकता है। निर्माण कार्यों में देरी के कारण लागत बढ़ने की आशंका भी रहती है, जिसका प्रभाव अंततः परियोजना के बजट पर पड़ सकता है।

    शिकायत में पर्यावरण से जुड़े पहलुओं का भी उल्लेख किया गया है। निर्माण और पौधरोपण जैसे कार्यों के लिए उपयुक्त मौसम निकल जाने की स्थिति में संबंधित गतिविधियों की समयसीमा प्रभावित हो सकती है। मानसून के दौरान किए जाने वाले कार्यों में देरी होने पर आगे की योजना और संसाधन प्रबंधन पर भी दबाव बढ़ सकता है।

    अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल शिकायतों में लगाए गए आरोपों की जांच को लेकर है। यदि जांच में प्रशासनिक स्तर पर जानबूझकर देरी, नियमों की अनदेखी या किसी प्रकार की अनियमितता प्रमाणित होती है तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है। दूसरी ओर, यदि देरी प्रक्रिया संबंधी कारणों से हुई है तो विभाग को उसका स्पष्ट कारण सामने रखना होगा।

    सिंहस्थ 2028 मध्य प्रदेश के लिए धार्मिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टि से बड़ा आयोजन है। इसलिए इससे जुड़ी परियोजनाओं में पारदर्शिता, समयबद्धता और जवाबदेही महत्वपूर्ण है। फिलहाल शिकायतों के बाद अटकी परियोजनाओं को गति देने के प्रयास शुरू हुए हैं और आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि जांच में आरोपों को लेकर क्या तथ्य सामने आते हैं।

  • जग्गाखेड़ी औद्योगिक क्षेत्र में निवेश का नया अवसर, 8 औद्योगिक प्लॉटों की ई-बिडिंग शुरू

    जग्गाखेड़ी औद्योगिक क्षेत्र में निवेश का नया अवसर, 8 औद्योगिक प्लॉटों की ई-बिडिंग शुरू


    मध्य प्रदेश । मंदसौर जिले के जग्गाखेड़ी औद्योगिक क्षेत्र में औद्योगिक विकास को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम (एमपीआईडीसी) ने यहां आठ नए औद्योगिक प्लॉटों के आवंटन के लिए ई-बिडिंग प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस पहल को क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने, नए उद्योग स्थापित करने और रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

    जग्गाखेड़ी औद्योगिक क्षेत्र पहले से ही मंदसौर के औद्योगिक विकास का प्रमुख केंद्र बन चुका है। यहां उपलब्ध आधुनिक सुविधाओं और बेहतर आधारभूत ढांचे के कारण उद्योगपतियों की रुचि लगातार बढ़ रही है। पहले चरण में विकसित सभी औद्योगिक भूखंड आवंटित हो चुके थे, जिसके बाद नए निवेशकों की मांग को देखते हुए अनुपयोगी भूमि का विकास कर आठ नए प्लॉट तैयार किए गए हैं। इन भूखंडों के लिए ई-बिडिंग प्रक्रिया शुरू होने से उद्योग जगत में उत्साह का माहौल है।

    जानकारी के अनुसार, फेज-1 में उपलब्ध कराए गए आठ नए प्लॉटों में दो भूखंड 1469.77 वर्गमीटर क्षेत्रफल के हैं, जबकि छह भूखंड 1153.74 वर्गमीटर क्षेत्र में विकसित किए गए हैं। इन पर मुख्य रूप से लघु एवं मध्यम स्तर के उद्योग स्थापित किए जा सकेंगे। औद्योगिक विशेषज्ञों का मानना है कि इन भूखंडों की उपलब्धता से स्थानीय उद्यमियों के साथ-साथ बाहरी निवेशकों को भी व्यवसाय विस्तार का अवसर मिलेगा।

    एमपीआईडीसी द्वारा प्रदेशभर में कुल 213 औद्योगिक प्लॉटों के आवंटन के लिए ई-बिडिंग प्रक्रिया संचालित की जा रही है, जिसमें जग्गाखेड़ी औद्योगिक क्षेत्र भी शामिल है। प्रदेश सरकार की उद्योग-अनुकूल नीतियों और निवेश प्रोत्साहन कार्यक्रमों का सकारात्मक असर अब छोटे और मध्यम शहरों में भी दिखाई देने लगा है। मंदसौर जैसे कृषि प्रधान जिले में औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था के लिए शुभ संकेत माना जा रहा है।

    जग्गाखेड़ी औद्योगिक क्षेत्र की सबसे बड़ी विशेषता यहां उपलब्ध आधुनिक आधारभूत सुविधाएं हैं। बेहतर सड़क नेटवर्क, निर्बाध बिजली आपूर्ति, जल उपलब्धता और अन्य आवश्यक सुविधाओं ने इसे निवेशकों के लिए आकर्षक केंद्र बना दिया है। यही कारण है कि यहां उद्योग स्थापित करने के लिए लगातार मांग बढ़ रही है। उद्योगों के विस्तार से न केवल स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

    वर्तमान में जग्गाखेड़ी औद्योगिक क्षेत्र के फेज-1 में विकसित 136 औद्योगिक प्लॉट पूरी तरह आवंटित हो चुके हैं। यहां संचालित 78 औद्योगिक इकाइयों के माध्यम से लगभग 700 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिल रहा है। इसके अलावा फेज-2 का विकास कार्य भी तेजी से जारी है, जहां 219 नए औद्योगिक प्लॉट विकसित किए जा रहे हैं। इससे आने वाले वर्षों में क्षेत्र के औद्योगिक परिदृश्य में और बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

    एमपीआईडीसी के अधिकारियों का मानना है कि मध्यप्रदेश तेजी से निवेशकों की पसंदीदा औद्योगिक गंतव्य के रूप में उभर रहा है। संतुलित क्षेत्रीय विकास की नीति के तहत छोटे जिलों में भी औद्योगिक निवेश को बढ़ावा दिया जा रहा है। जग्गाखेड़ी में नए भूखंडों की उपलब्धता इसी रणनीति का हिस्सा है, जो भविष्य में मंदसौर को औद्योगिक मानचित्र पर और अधिक मजबूत पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

  • जग्गाखेड़ी औद्योगिक क्षेत्र में निवेश का नया अवसर, 8 औद्योगिक प्लॉटों की ई-बिडिंग शुरू

    जग्गाखेड़ी औद्योगिक क्षेत्र में निवेश का नया अवसर, 8 औद्योगिक प्लॉटों की ई-बिडिंग शुरू


    मध्य प्रदेश । मंदसौर जिले के जग्गाखेड़ी औद्योगिक क्षेत्र में औद्योगिक विकास को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम (एमपीआईडीसी) ने यहां आठ नए औद्योगिक प्लॉटों के आवंटन के लिए ई-बिडिंग प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस पहल को क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने, नए उद्योग स्थापित करने और रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

    जग्गाखेड़ी औद्योगिक क्षेत्र पहले से ही मंदसौर के औद्योगिक विकास का प्रमुख केंद्र बन चुका है। यहां उपलब्ध आधुनिक सुविधाओं और बेहतर आधारभूत ढांचे के कारण उद्योगपतियों की रुचि लगातार बढ़ रही है। पहले चरण में विकसित सभी औद्योगिक भूखंड आवंटित हो चुके थे, जिसके बाद नए निवेशकों की मांग को देखते हुए अनुपयोगी भूमि का विकास कर आठ नए प्लॉट तैयार किए गए हैं। इन भूखंडों के लिए ई-बिडिंग प्रक्रिया शुरू होने से उद्योग जगत में उत्साह का माहौल है।

    जानकारी के अनुसार, फेज-1 में उपलब्ध कराए गए आठ नए प्लॉटों में दो भूखंड 1469.77 वर्गमीटर क्षेत्रफल के हैं, जबकि छह भूखंड 1153.74 वर्गमीटर क्षेत्र में विकसित किए गए हैं। इन पर मुख्य रूप से लघु एवं मध्यम स्तर के उद्योग स्थापित किए जा सकेंगे। औद्योगिक विशेषज्ञों का मानना है कि इन भूखंडों की उपलब्धता से स्थानीय उद्यमियों के साथ-साथ बाहरी निवेशकों को भी व्यवसाय विस्तार का अवसर मिलेगा।

    एमपीआईडीसी द्वारा प्रदेशभर में कुल 213 औद्योगिक प्लॉटों के आवंटन के लिए ई-बिडिंग प्रक्रिया संचालित की जा रही है, जिसमें जग्गाखेड़ी औद्योगिक क्षेत्र भी शामिल है। प्रदेश सरकार की उद्योग-अनुकूल नीतियों और निवेश प्रोत्साहन कार्यक्रमों का सकारात्मक असर अब छोटे और मध्यम शहरों में भी दिखाई देने लगा है। मंदसौर जैसे कृषि प्रधान जिले में औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था के लिए शुभ संकेत माना जा रहा है।

    जग्गाखेड़ी औद्योगिक क्षेत्र की सबसे बड़ी विशेषता यहां उपलब्ध आधुनिक आधारभूत सुविधाएं हैं। बेहतर सड़क नेटवर्क, निर्बाध बिजली आपूर्ति, जल उपलब्धता और अन्य आवश्यक सुविधाओं ने इसे निवेशकों के लिए आकर्षक केंद्र बना दिया है। यही कारण है कि यहां उद्योग स्थापित करने के लिए लगातार मांग बढ़ रही है। उद्योगों के विस्तार से न केवल स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

    वर्तमान में जग्गाखेड़ी औद्योगिक क्षेत्र के फेज-1 में विकसित 136 औद्योगिक प्लॉट पूरी तरह आवंटित हो चुके हैं। यहां संचालित 78 औद्योगिक इकाइयों के माध्यम से लगभग 700 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिल रहा है। इसके अलावा फेज-2 का विकास कार्य भी तेजी से जारी है, जहां 219 नए औद्योगिक प्लॉट विकसित किए जा रहे हैं। इससे आने वाले वर्षों में क्षेत्र के औद्योगिक परिदृश्य में और बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

    एमपीआईडीसी के अधिकारियों का मानना है कि मध्यप्रदेश तेजी से निवेशकों की पसंदीदा औद्योगिक गंतव्य के रूप में उभर रहा है। संतुलित क्षेत्रीय विकास की नीति के तहत छोटे जिलों में भी औद्योगिक निवेश को बढ़ावा दिया जा रहा है। जग्गाखेड़ी में नए भूखंडों की उपलब्धता इसी रणनीति का हिस्सा है, जो भविष्य में मंदसौर को औद्योगिक मानचित्र पर और अधिक मजबूत पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

  • गुढ़ इंडस्ट्रियल एरिया के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता, 16 करोड़ की जल प्रदाय योजना जल्द पूरी करने के निर्देश

    गुढ़ इंडस्ट्रियल एरिया के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता, 16 करोड़ की जल प्रदाय योजना जल्द पूरी करने के निर्देश


    भोपाल । उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में रीवा जिले के गुढ़ स्थित इंडस्ट्रियल एरिया में चल रहे विकास कार्यों की समीक्षा की और इस क्षेत्र के औद्योगिक एवं आर्थिक सशक्तिकरण के महत्व पर जोर दिया। बैठक में उन्होंने नगर परिषद गुढ़ और औद्योगिक क्षेत्र गुढ़ में चल रही महत्वाकांक्षी जल प्रदाय योजना को शीघ्र क्रियान्वित करने के निर्देश दिए। यह परियोजना 16 करोड़ की लागत से बनाई जा रही है, लेकिन अब तक केवल 7 करोड़ का कार्य ही पूरा हो सका है। उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कहा कि इस योजना को जल्द पूरा किया जाए ताकि नगर परिषद को 5 एमएलडी और औद्योगिक क्षेत्र को 5 एमएलडी जल उपलब्ध हो सके। प्रोजेक्ट के पूरा होने से गुढ़ क्षेत्र की जल प्रदाय व्यवस्था मजबूत होगी और औद्योगिक क्षेत्र के विकास को भी बल मिलेगा।

    उप मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी औद्योगिक क्षेत्र के समुचित विकास के लिए बिजली, पानी, सड़क और ड्रेनेज जैसी मूलभूत सेवाओं का सुदृढ़ होना अनिवार्य है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि गुढ़ इंडस्ट्रियल एरिया के विकास कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए और बिजली, सड़क, जल एवं अन्य आवश्यक सेवाओं के विस्तार के लिए तत्काल और प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। साथ ही उन्होंने उच्च अधिकारियों को नियमित समीक्षा करने और किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त न करने का निर्देश दिया।

    उप मुख्यमंत्री ने कहा कि गुढ़ इंडस्ट्रियल एरिया का समग्र विकास न केवल रीवा जिले की औद्योगिक पहचान को मजबूत करेगा, बल्कि इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। उद्योगों की स्थापना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों प्रकार के रोजगार बढ़ेंगे, जिससे क्षेत्र की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय से काम करने का निर्देश भी दिया, ताकि विकास कार्यों में तेजी आए और समय पर लक्ष्य हासिल हो सके।

    बैठक में मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम एमपीआईडीसी के प्रबंध संचालक श्री चंद्रमौली शुक्ला सहित विभागीय वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। उप मुख्यमंत्री ने इस क्षेत्र के विकास को लेकर स्पष्ट संदेश दिया कि गुढ़ इंडस्ट्रियल एरिया में कार्यों की गति बढ़ानी होगी और योजनाओं को समय पर पूर्ण करना अनिवार्य है।