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  • रतलाम में प्रशासनिक दबाव ने ली जान? 4 दिन में 3 नोटिस और छुट्टी से इनकार, पटवारी रविशंकर के सुसाइड नोट ने खोली व्यवस्था की पोल

    रतलाम में प्रशासनिक दबाव ने ली जान? 4 दिन में 3 नोटिस और छुट्टी से इनकार, पटवारी रविशंकर के सुसाइड नोट ने खोली व्यवस्था की पोल


    रतलाम । मध्य प्रदेश के रतलाम जिले से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने उत्सव के माहौल को पल भर में चीख-पुकार और मातम में बदल दिया। आलोट तहसील में पदस्थ पटवारी “रविशंकर खराड़ी” ने अपने घर की तीसरी मंजिल पर साफे से फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। यह घटना उस वक्त और भी मार्मिक हो गई जब पता चला कि महज एक दिन पहले ही रविशंकर अपने छोटे भाई की शादी के जश्न में डूबे थे और बारात में जमकर डांस कर रहे थे। लेकिन उस मुस्कान के पीछे “प्रशासनिक प्रताड़ना” का जो दर्द छिपा था, उसका अंदाजा शायद ही किसी को रहा होगा।

    पुलिस की शुरुआती जांच में घटनास्थल से तीन मोबाइल फोन और एक “ओरिजिनल सुसाइड नोट” बरामद हुआ है, जिसने जिले के प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा दिया है। सुसाइड नोट में रविशंकर ने स्पष्ट रूप से नायब तहसीलदार “सविता राठौर” पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मृतक पटवारी ने लिखा कि उन पर न केवल काम का अनुचित दबाव बनाया जा रहा था, बल्कि उन्हें “गलत काम” करने के लिए भी मजबूर किया गया। सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह था कि छोटे भाई की शादी जैसे महत्वपूर्ण पारिवारिक आयोजन के लिए भी उन्हें छुट्टी नहीं दी गई और उन्हें बार-बार नोटिस देकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया।

    घटना की पृष्ठभूमि को खंगालने पर पता चलता है कि अप्रैल माह के दौरान रविशंकर को महज 4 दिनों के भीतर “तीन कारण बताओ नोटिस” थमाए गए थे। ये नोटिस 6 अप्रैल, 8 अप्रैल और 9 अप्रैल को जारी किए गए थे, जिनमें जमीन नामांतरण और सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों जैसे मामलों में लापरवाही का हवाला दिया गया था। सुसाइड से कुछ घंटे पहले रविशंकर ने पटवारी संघ के व्हाट्सएप ग्रुप में एक भावुक मैसेज भी किया था, जिसमें उन्होंने पूछा था, “मेरे साथ कितने पटवारी मेरा सपोर्ट करेंगे?” इसके बाद उन्होंने तहसील अध्यक्ष को अपना सुसाइड नोट भेजा और फिर कभी किसी का फोन नहीं उठाया।

    रविशंकर के परिवार की कहानी भी कम दुखद नहीं है। उनके पिता रकमेश्वर खराड़ी भी पटवारी थे, जिनकी दिसंबर 2023 में “हार्ट अटैक” से मौत हो गई थी। पिता की मृत्यु के बाद ही रविशंकर को “अनुकंपा नियुक्ति” मिली थी। अभी उन्हें नौकरी ज्वाइन किए महज चार महीने ही हुए थे। रविशंकर की एक 4 साल की छोटी बेटी है और उनकी पत्नी वर्तमान में “प्रेग्नेंट” हैं। घर की पूरी जिम्मेदारी रविशंकर के कंधों पर थी, लेकिन अधिकारियों के कथित उत्पीड़न ने उन्हें इस कदर तोड़ दिया कि उन्होंने अपनी और अपने अजन्मे बच्चे की परवाह किए बिना यह आत्मघाती कदम उठा लिया।

    इस घटना के बाद आक्रोशित परिजनों और पटवारी संघ ने मेडिकल कॉलेज में करीब “7 घंटे तक धरना” दिया। सैलाना विधायक कमलेश्वर डोडियार भी इस प्रदर्शन में शामिल हुए और नायब तहसीलदार के खिलाफ “हत्या का केस” दर्ज करने की मांग की। मामले की गंभीरता और बढ़ते जन आक्रोश को देखते हुए कलेक्टर ने तत्काल कार्रवाई करते हुए नायब तहसीलदार सविता राठौर को “निलंबित” कर दिया है। फिलहाल पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है और मृतक के पास से मिले डिजिटल सबूतों और रिकॉर्डिंग्स को खंगाला जा रहा है ताकि इस सुसाइड मिस्ट्री की पूरी सच्चाई सामने आ सके।

  • भोपाल में प्रोफेसर की खुदकुशी: 'बीमारी से तंग आ गया हूं…' सुसाइड नोट लिख फंदे पर झूले शैलेंद्र, पत्नी भी लड़ रही कैंसर से जंग

    भोपाल में प्रोफेसर की खुदकुशी: 'बीमारी से तंग आ गया हूं…' सुसाइड नोट लिख फंदे पर झूले शैलेंद्र, पत्नी भी लड़ रही कैंसर से जंग


    भोपाल। राजधानी के रातीबड़ इलाके में एक निजी कॉलेज के प्रोफेसर द्वारा सुसाइड करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। मंगलवार और बुधवार की दरमियानी रात 32 वर्षीय प्रोफेसर शैलेंद्र सिंह ठाकुर ने अपने किराए के कमरे में फांसी लगाकर जीवनलीला समाप्त कर ली। बुधवार सुबह जब परिजनों ने उन्हें फंदे पर लटका देखा तो इलाके में हड़कंप मच गया। पुलिस को मौके से एक भावुक सुसाइड नोट भी मिला है जिसमें मृतक ने अपनी बीमारी और मानसिक पीड़ा का जिक्र किया है।

    मूल रूप से सीहोर जिले के आष्टा गोपालपुर के रहने वाले शैलेंद्र पिछले 6 महीनों से भोपाल की गोल्डन सिटी में किराए से रह रहे थे और रातीबड़ के ही एक प्राइवेट कॉलेज में अध्यापन कार्य कर रहे थे। पुलिस के अनुसार शैलेंद्र के कमरे से मिले सुसाइड नोट में लिखा है मैं अपनी बीमारी से बहुत तंग आ चुका हूं… इसलिए अब जीना नहीं चाहता। मैं आप सभी से बहुत प्यार करता हूं कृपया अपना ध्यान रखें और स्वस्थ रहें।

    हैरानी की बात यह है कि परिजनों ने शैलेंद्र को किसी भी तरह की ‘गंभीर’ बीमारी होने से इनकार किया है। भाई के मुताबिक शैलेंद्र अक्सर मामूली मौसमी बीमारियों जैसे सर्दी-जुकाम और उसके बाद होने वाली शारीरिक कमजोरी से परेशान रहते थे। हालांकि पुलिस जांच में एक और दुखद पहलू सामने आया है। बताया जा रहा है कि शैलेंद्र की पत्नी ‘बच्चेदानी के कैंसर’ से जूझ रही हैं और पिछले एक साल से उनका इलाज चल रहा है। वर्तमान में पत्नी अपने मायके में रहकर उपचार करा रही हैं जिसे लेकर शैलेंद्र काफी समय से गहरे तनाव में थे।

    जांच अधिकारी SI गब्बर सिंह ने बताया कि पुलिस ने मर्ग कायम कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस अब इस मामले की जांच मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक परिस्थितियों के नजरिए से भी कर रही है। यह घटना दर्शाती है कि कभी-कभी छोटी दिखने वाली शारीरिक समस्याएं और अपनों की बीमारी का बोझ एक व्यक्ति को भीतर से कितना कमजोर कर सकता है।