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  • MSME सेक्टर को बड़ा बूस्ट: FTA से वैश्विक बाजार में बढ़ेगी भारतीय उद्योगों की पकड़

    MSME सेक्टर को बड़ा बूस्ट: FTA से वैश्विक बाजार में बढ़ेगी भारतीय उद्योगों की पकड़


    नई दिल्ली। भारत के लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) सेक्टर के लिए हाल के मुक्त व्यापार समझौता (FTA) किसी बड़े अवसर से कम नहीं हैं। खगेन मुर्मू ने गुरुवार को कहा कि सरकार की एफटीए नीति और डिजिटलीकरण पर बढ़ता फोकस छोटे उद्योगों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा बना रहा है। एसोचैम द्वारा आयोजित ‘ग्लोबल एसएमई कॉन्क्लेव’ में उन्होंने इसे एमएसएमई सेक्टर के लिए “गेमचेंजर” बताया।

    एमएसएमई-ऑस्ट्रेलिया जैसे व्यवसायों से खुला निर्यात का रास्ता

    मुर्मू ने विदेशों पर संयुक्त अरब अमीरात और ऑस्ट्रेलिया के साथ हुए एफटीए और यूरोपीय संघ के साथ खोए व्यवसायों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन व्यवसायों के जरिए भारतीय उत्पादों को शून्य या बहुत कम टैरिफ पर विदेशी बाजारों तक पहुंच मिल रही है।

    इसका सीधा फायदा वस्त्र, हस्तशिल्प और इंजीनियरिंग जैसे सेक्टर को मिल रहा है, जहां भारतीय उत्पाद अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में ज्यादा प्रतिस्पर्धा बन रहे हैं।

    निर्यात में एमएसएमई की बड़ी गतिविधियां

    भारत के कुल निर्यात में एमएसएमई सेक्टर का योगदान लगभग 45-48 प्रतिशत है। यह आंकड़ा बताता है कि छोटे उद्योग देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। मुर्मु ने जोर देकर कहा कि अब समय आ गया है कि ये उद्यम केवल घरेलू बाजार तक सीमित न रहें, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा बनें।

    डिजिटलीकरण बना विकास का नया इंजन

    विशेषज्ञों के अनुसार, MSME सेक्टर के अगले विकास चरण में डिजिटलीकरण एक्टिव भूमिका निभाएगा। पद्मा जायसवाल ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन सेवाएं भारतीय MSME के ​​लिए 500 अरब डॉलर तक के नए बाजार अवसर खोल सकती हैं।

    उन्होंने यह भी बताया कि भारत के निर्यात और GDP में डिजिटल सेवाओं का योगदान करीब 25 प्रतिशत तक पहुंच चुका है।

    GeM और डिजिटल प्लेटफॉर्म से सीधा बाजार कनेक्शन

    सरकार के गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस और उद्यम पोर्टल जैसे प्लेटफॉर्म छोटे उद्योगों को सीधे मनरेगा से जोड़ने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। इससे बिचौलियों की भूमिका कम हो रही है और छोटे उद्योगों को बेहतर कीमत और बाजार मिल रहा है।

    हालांकि, विश्लेषकों ने यह भी माना कि इन प्लेटफॉर्म के बारे में जागरूकता और कौशल विकास बढ़ाने की जरूरत है, ताकि ज्यादा से ज्यादा छोटे उद्योग इसका लाभ उठा सकें।

    वैश्विक सप्लायर बनने की दिशा में भारत

    सम्मेलन में यह स्पष्ट किया गया कि भारत का लक्ष्य अब केवल उत्पादन करना नहीं, बल्कि वैश्विक उपलब्धता चेन में मजबूत स्थान बनाना है। एफटीए और डिजिटल एकीकरण के माध्यम से एमएसएमई सेक्टर तेजी से इस दिशा में आगे बढ़ रहा है।

  • रोजगार की रीढ़ बना MSME, देश के लिए सबसे शक्तिशाली मंच: जीतन राम मांझी

    रोजगार की रीढ़ बना MSME, देश के लिए सबसे शक्तिशाली मंच: जीतन राम मांझी

    नई दिल्ली। केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि एमएसएमई रोजगार पैदा करने का सबसे मजबूत और प्रभावी मंच हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत को समृद्ध राष्ट्र बनाना है तो एमएसएमई सेक्टर को और मजबूती देनी होगी। मांझी गणतंत्र दिवस परेड 2026 देखने के लिए आमंत्रित एमएसएमई लाभार्थियों से बातचीत कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि एमएसएमई देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और करोड़ों लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं।

    कृषि के बाद अर्थव्यवस्था में सबसे बड़ा योगदान

    मंत्री ने बताया कि एमएसएमई न सिर्फ रोजगार देता है, बल्कि देश की समृद्धि को भी मजबूत करता है। उन्होंने कहा, “कृषि के बाद एमएसएमई क्षेत्र का ही आर्थिक विकास में सबसे बड़ा योगदान है। यह सेक्टर छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में भी अवसर पैदा करता है, जिससे संतुलित विकास संभव हो पाता है।” मांझी ने एमएसएमई की भूमिका को अहम और निर्णायक बताते हुए इसे आत्मनिर्भर भारत का मजबूत आधार करार दिया।

    गणतंत्र दिवस परेड में विशेष अतिथि बने कारीगर

    इस अवसर पर रक्षा मंत्रालय की ओर से एमएसएमई से जुड़े लाभार्थियों को विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया। इनमें पीएम विश्वकर्मा योजना के 100 लाभार्थी, खादी विकास योजना के तहत प्रशिक्षित 199 कारीगर, सेल्फ रिलायंट इंडिया (एसआरआई) फंड के 50 लाभार्थी और महिला कॉयर योजना की 50 उत्कृष्ट महिला कारीगर अपने जीवनसाथियों के साथ शामिल रहीं। यह आयोजन कारीगरों और उद्यमियों के सम्मान का प्रतीक बना।

    ‘मिनी इंडिया’ जैसा दृश्य: शोभा करंदलाजे

    एमएसएमई राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने लाभार्थियों को संबोधित करते हुए कहा, “आप सभी को देखकर ऐसा लग रहा है जैसे मैं एक ‘मिनी इंडिया’ देख रही हूं।” उन्होंने कहा कि सभी अलग-अलग क्षेत्रों और पृष्ठभूमि से आए हैं, लेकिन देश की प्रगति के लिए एकजुट हैं। करंदलाजे ने प्रधानमंत्री का आभार जताते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में सरकार लगातार ऐसी योजनाएं बना रही है, जिनसे प्रशिक्षण, कौशल विकास और रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं।

    मेहनत से आगे बढ़ रहा देश: सचिव

    एमएसएमई मंत्रालय के सचिव एस.सी.एल. दास ने कहा कि देश की प्रगति आप सभी की मेहनत का नतीजा है। उन्होंने विविधता में एकता को भारत की सबसे बड़ी ताकत बताया और भरोसा दिलाया कि एमएसएमई मंत्रालय लगातार लाभार्थियों से जुड़ा रहेगा, ताकि और लोग आगे बढ़ सकें।

    पीएम विश्वकर्मा और एसआरआई फंड की अहम भूमिका

    पीएम विश्वकर्मा योजना 18 पारंपरिक कार्यों से जुड़े कारीगरों और शिल्पकारों को प्रशिक्षण, टूलकिट, वित्तीय सहायता और बाजार से जोड़ने का काम कर रही है। वहीं, सेल्फ रिलायंट इंडिया (एसआरआई) फंड एमएसएमई को मजबूत कर आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में एक अहम सरकारी पहल साबित हो रहा है।