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  • एमएसएमई को मिला बड़ा प्रोत्साहन: ढाई साल में 3723 करोड़ रुपए का इंसेंटिव, अब अगले ढाई साल में 4500 करोड़ देने का लक्ष्य

    एमएसएमई को मिला बड़ा प्रोत्साहन: ढाई साल में 3723 करोड़ रुपए का इंसेंटिव, अब अगले ढाई साल में 4500 करोड़ देने का लक्ष्य


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। भोपाल स्थित कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित ‘समृद्ध एमएसएमई-विकसित मध्यप्रदेश’ कार्यक्रम में 900 उद्योग इकाइयों को सिंगल क्लिक के माध्यम से 360 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि वितरित की गई। इसके साथ ही 31 मार्च 2026 तक लंबित सभी पात्र देनदारियों का भी निराकरण कर दिया गया। कुछ उद्योगों को विशेष सहायता के तहत मंडी शुल्क और बिजली अनुदान का लाभ भी दिया गया।

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने कहा कि राज्य सरकार उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिए प्रतिबद्ध है और आने वाले ढाई वर्षों में एमएसएमई क्षेत्र को 4500 करोड़ रुपए का इंसेंटिव उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में एमएसएमई क्षेत्र रोजगार सृजन का सबसे बड़ा आधार बनकर उभरा है और सरकार इसकी क्षमता को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में कार्य कर रही है।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में 24 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयां संचालित हो रही हैं, जिनके माध्यम से सवा करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार मिला है। इनमें 4 लाख 41 हजार से ज्यादा इकाइयों का संचालन महिलाएं कर रही हैं, जो प्रदेश में महिला उद्यमिता की बढ़ती भागीदारी का संकेत है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार लगातार नई योजनाएं और अवसर उपलब्ध करा रही है।

    कार्यक्रम में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार पिछले ढाई वर्षों के दौरान राज्य में 30 नए औद्योगिक क्षेत्रों और 14 औद्योगिक क्लस्टरों को स्वीकृति दी गई है। इसके अलावा 1063 औद्योगिक भूखंडों का आवंटन भी किया जा चुका है। राज्य सरकार का मानना है कि इन पहलों से निवेश बढ़ेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

    मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि मध्यप्रदेश स्टार्टअप इकोसिस्टम में तेजी से आगे बढ़ रहा है। वर्तमान में प्रदेश में 7400 से अधिक स्टार्टअप कार्यरत हैं, जिनमें से 3400 से अधिक का नेतृत्व महिलाएं कर रही हैं। यह संख्या कुल स्टार्टअप्स का लगभग 50 प्रतिशत है, जो महिला नेतृत्व वाले उद्यमों की मजबूत उपस्थिति को दर्शाती है।

    एमएसएमई मंत्री Chaitanya Kashyap और प्रमुख सचिव Raghvendra Singh ने बताया कि वर्तमान सरकार के पिछले ढाई वर्षों में उद्योगों को 3723 करोड़ रुपए का इंसेंटिव दिया गया है। इसके मुकाबले इससे पहले के ढाई वर्षों में यह राशि केवल 1245 करोड़ रुपए थी। यानी प्रोत्साहन राशि में लगभग तीन गुना वृद्धि दर्ज की गई है।

    मुख्यमंत्री ने वर्ष 2027 तक प्रदेश में एक करोड़ एमएसएमई इकाइयों के लक्ष्य की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य हर जिले में उद्योग और हर परिवार में रोजगार सुनिश्चित करना है। इस दिशा में अगले ढाई से तीन वर्षों में 5000 नए औद्योगिक भूखंड आवंटित किए जाएंगे। अधिकारियों के अनुसार अब तक 76 विधानसभा क्षेत्रों में एमएसएमई सेंटर स्थापित करने के लिए स्थानों का चयन भी किया जा चुका है।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सागर जिले के केसली में आयोजित लाडली बहना सम्मेलन का भी उल्लेख किया, जहां उन्होंने लाडली बहना योजना की 37वीं किस्त के रूप में 1.25 करोड़ हितग्राहियों के खातों में 1835 करोड़ रुपए की राशि हस्तांतरित की। साथ ही 190.85 करोड़ रुपए लागत के 53 विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमि-पूजन भी किया गया।

  • विकास की रफ्तार का मंत्र: MSME सेक्टर को मजबूत ट्रेड स्किल से जोड़ने की जरूरत..

    विकास की रफ्तार का मंत्र: MSME सेक्टर को मजबूत ट्रेड स्किल से जोड़ने की जरूरत..

    नई दिल्ली । भारत की आर्थिक दिशा और भविष्य की विकास रणनीति को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश सामने आया है, जिसमें देश के सूक्ष्म उद्यमों को विकास की रीढ़ बताया गया है। मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा कि भारत की दीर्घकालिक आर्थिक प्रगति इस बात पर निर्भर करेगी कि सूक्ष्म और लघु उद्यमों को किस हद तक सक्षम, प्रशिक्षित और प्रतिस्पर्धी बनाया जाता है।

    उन्होंने स्पष्ट किया कि आने वाले समय में केवल बड़े उद्योग ही नहीं, बल्कि छोटे स्तर के उद्यम भी वैश्विक प्रतिस्पर्धा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। दुनिया भर में कई छोटे उद्यम तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और भारत को भी इसी दिशा में अपने सूक्ष्म उद्यमों को तैयार करना होगा।

    उनके अनुसार, देश की अर्थव्यवस्था की असली ताकत जमीनी स्तर पर काम करने वाले छोटे उद्यमों में छिपी है। ये उद्यम न केवल रोजगार पैदा करते हैं, बल्कि उत्पादन और सेवा क्षेत्र को भी मजबूत आधार देते हैं। यदि इन्हें सही प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग मिले, तो ये देश की विकास दर को नई ऊंचाई तक ले जा सकते हैं।

    उन्होंने यह भी कहा कि केवल उद्यमियों को ही नहीं, बल्कि उनके कर्मचारियों को भी लगातार अपने कौशल में सुधार करना चाहिए। चाहे वह अकाउंटिंग हो, मानव संसाधन प्रबंधन हो या इन्वेंट्री से जुड़ा काम, हर क्षेत्र में दक्षता बढ़ाने की जरूरत है। इससे न केवल कार्यक्षमता में सुधार होगा बल्कि व्यवसायों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता भी बढ़ेगी।

    इस विचार को उद्योग जगत के अन्य विशेषज्ञों ने भी महत्वपूर्ण बताया है। उनका मानना है कि भारत की आर्थिक संरचना में सूक्ष्म और लघु उद्यम एक मजबूत आधार की तरह हैं, जो न केवल ग्रामीण और शहरी अर्थव्यवस्था को जोड़ते हैं बल्कि सामाजिक स्थिरता में भी अहम भूमिका निभाते हैं।

    विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि भविष्य की अर्थव्यवस्था केवल उत्पादन पर नहीं बल्कि कौशल, नवाचार और तकनीक के सही उपयोग पर निर्भर करेगी। यदि छोटे उद्यमों को सही दिशा दी जाए, तो वे बड़े उद्योगों के साथ प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम हो सकते हैं और देश की आर्थिक मजबूती को बढ़ा सकते हैं।

    सरकार की ओर से भी हाल के समय में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं, जिनमें वित्तीय सहायता और ऋण गारंटी जैसी सुविधाएं शामिल हैं। इसका उद्देश्य छोटे उद्यमों को आर्थिक जोखिम से सुरक्षित रखते हुए उन्हें विस्तार का अवसर देना है।

    कुल मिलाकर यह स्पष्ट है कि भारत की विकास यात्रा में सूक्ष्म उद्यमों की भूमिका आने वाले वर्षों में और भी महत्वपूर्ण होने वाली है। यदि इन उद्यमों को सही प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग और वित्तीय समर्थन मिलता है, तो यह क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत और स्थायी विकास की दिशा में ले जा सकता है।

  • व्यापारिक माहौल सुधरने पर बंगाल में औद्योगिक विकास की वापसी की उम्मीद तेज

    व्यापारिक माहौल सुधरने पर बंगाल में औद्योगिक विकास की वापसी की उम्मीद तेज

    नई दिल्ली ।पश्चिम बंगाल के आर्थिक भविष्य को लेकर एक बार फिर सकारात्मक उम्मीदें सामने आ रही हैं। व्यापार जगत से जुड़े प्रतिनिधियों का मानना है कि यदि राज्य में निवेश के लिए अनुकूल माहौल और स्थिर नीतिगत ढांचा तैयार किया जाए, तो बंगाल एक बार फिर देश के प्रमुख व्यापार और उद्योग केंद्रों में अपनी मजबूत स्थिति हासिल कर सकता है।

    व्यापारिक समुदाय का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में राज्य के औद्योगिक ढांचे को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। इनमें निवेश में गिरावट, छोटे उद्योगों पर दबाव, और कारोबारियों के पलायन जैसी स्थितियां प्रमुख रही हैं। इसके कारण राज्य के एमएसएमई सेक्टर और पारंपरिक उद्योगों पर सीधा असर पड़ा है।

    कई व्यापारिक प्रतिनिधियों का मानना है कि एक समय पश्चिम बंगाल देश के औद्योगिक विकास में अग्रणी राज्यों में शामिल था, लेकिन समय के साथ प्रतिस्पर्धा बढ़ने और नीतिगत स्थिरता की कमी के कारण यह गति धीमी हो गई। परिणामस्वरूप कई छोटे और मध्यम उद्योग या तो बंद हो गए या बेहतर अवसरों की तलाश में अन्य राज्यों में स्थानांतरित हो गए।

    अब व्यापारिक जगत को उम्मीद है कि यदि राज्य में उद्योगों के लिए सरल नियम, निवेशकों के लिए भरोसेमंद माहौल और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता लाई जाती है, तो स्थिति में तेजी से सुधार हो सकता है। खासकर यह माना जा रहा है कि छोटे और मध्यम उद्योगों को यदि उचित सहयोग दिया जाए तो वे फिर से राज्य की आर्थिक रीढ़ बन सकते हैं।

    पारंपरिक उद्योगों जैसे चाय, जूट, हथकरघा, चमड़ा और मिठाई व्यवसाय को बंगाल की पहचान माना जाता है। लेकिन बढ़ती लागत, जटिल नियमों और सीमित सहायता के कारण इन क्षेत्रों को भी दबाव का सामना करना पड़ा है। व्यापारिक वर्ग का कहना है कि यदि इन उद्योगों के लिए विशेष नीतिगत समर्थन दिया जाए, तो बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर दोबारा पैदा हो सकते हैं।

    इसके साथ ही यह भी सुझाव दिया जा रहा है कि राज्य में निवेश को आकर्षित करने के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत करना बेहद जरूरी है। बेहतर सड़क, परिवहन और लॉजिस्टिक्स सुविधाएं औद्योगिक विकास को नई गति दे सकती हैं। साथ ही औद्योगिक गलियारों के विस्तार से बड़े स्तर पर निवेश आकर्षित किया जा सकता है।

    व्यापार जगत यह भी मानता है कि यदि राज्य में केंद्र की विभिन्न विकास योजनाओं की भावना के अनुरूप नीतियां लागू की जाएं, तो बंगाल एक बार फिर निवेशकों की पसंदीदा जगह बन सकता है। इससे न केवल उद्योगों का विस्तार होगा, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

    कुल मिलाकर, व्यापारिक प्रतिनिधियों का मानना है कि यदि सही दिशा में नीतिगत सुधार किए जाएं और निवेश के लिए स्थिर वातावरण बनाया जाए, तो पश्चिम बंगाल में एक नया औद्योगिक दौर शुरू हो सकता है, जिससे राज्य की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिल सकती है।

  • ईरान संकट के बीच MSME को री-फाइनेंस का प्रस्ताव… CII ने पेश किया 20 सूत्रीय एजेंडा

    ईरान संकट के बीच MSME को री-फाइनेंस का प्रस्ताव… CII ने पेश किया 20 सूत्रीय एजेंडा


    नई दिल्ली।
    ईरान संकट (Iran Crisis) का भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) से लेकर आम आदमी तक पर पड़ने वाले असर को कम करने के लिए उद्योग निकाय भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) (Industry body Confederation of Indian Industry – CII) ने रविवार को एक 20 सूत्रीय एजेंडा पेश किया। इसमें आरबीआई की ओर से सूक्ष्म, लघु एवं मझौले उद्यमों (एमएसएमई-MSME) और अन्य प्रभावित क्षेत्रों के लिए एक विशेष पुनर्वित्त (री-फाइनेंस) खिड़की स्थापित करना भी शामिल है। इससे बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) को उत्पादक क्षेत्रों को उचित लागत पर कर्ज देना जारी रखने में मदद मिलेगी।

    उद्योग निकाय ने सुझाव दिया कि वित्त मंत्रालय कोविड महामारी के दौरान लागू की गई योजना की तर्ज पर एक समयबद्ध संघर्ष से जुड़ी आपातकालीन ऋण सुविधा गारंटी योजना (सीएल-ईसीएलजीएस) शुरू कर सकता है। इसकी मदद से एमएसएमई, निर्यातकों और गैस पर निर्भर क्षेत्रों को सरकारी गारंटी के जरिये कार्यशील पूंजी दी जा सकेगी।


    सीआईआई के एजेंडे में क्या-क्या?

    साथ ही, एमएसएमई के लिए तीन महीने तक ऋण स्थगन जैसे उपाय भी किए जा सकते हैं। सीआईआई ने अपने एजेंडे में कहा, बढ़ती वैश्विक अनिश्चितता के दौरान प्राथमिक बाजारों में विदेशी पूंजी प्रवाह बनाए रखने के लिए वित्त मंत्रालय विदेशी निवेशकों को दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर (एलटीसीजी) से अस्थायी छूट दे सकता है। इसके लिए पात्र होल्डिंग अवधि को दो से बढ़ाकर तीन साल किया जा सकता है।

    यह नपातुला प्रोत्साहन स्थिरता का संकेत देगा और धैर्यवान पूंजी को प्रोत्साहित करेगा। साथ ही, किसी भी तरह की उथल-पुथल के कारण पैदा होने वाली सुरक्षित ठिकाने की ओर भागने की भावना को कम करने में भी मदद करेगा। भारतीय उद्योग परिसंघ ने कहा, प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (पीएसएल) मानदंडों पर पुनर्विचार किया जा सकता है, ताकि बैंक बाहरी व्यवधानों के दौरान क्षेत्र विशिष्ट तनाव के प्रति अधिक लचीले ढंग से प्रतिक्रिया दे सकें। अन्य सुझावों में बिजली शुल्कों में अस्थायी राहत, नकद ऋण सीमा में 20 फीसदी तक की वृद्धि और लोन प्रोसेसिंग शुल्क में छूट शामिल है। सीआईआई ने लंबित जीएसटी रिफंड और शुल्क वापसी दावों को तेजी से निपटाने का भी आग्रह किया।


    सभी भारतीय नाविक सुरक्षित

    अभी 17 भारतीय जहाज और 460 नाविक पश्चिमी फारस की खाड़ी में मौजूद हैं। इनमें सवार सभी नाविक सुरक्षित हैं। 1,479 से अधिक नाविक सुरक्षित वापस लाए गए हैं। 345 भारतीय मछुआरे ईरान से सुरक्षित लौट कर शनिवार को चेन्नई पहुंच गए। उड़ान सेवाएं धीरे-धीरे सामान्य हो रही हैं। 28 फरवरी से अब तक 7,02,000 से अधिक यात्री भारत लौट चुके हैं।

  • मप्र विधानसभा में ₹19,287 करोड़ का तीसरा अनुपूरक बजट पेश, राजस्व और पूंजीगत मद में बड़ा प्रावधान

    मप्र विधानसभा में ₹19,287 करोड़ का तीसरा अनुपूरक बजट पेश, राजस्व और पूंजीगत मद में बड़ा प्रावधान


    भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा में बजट सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को उप मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने वित्तीय वर्ष 2024-25 का तीसरा अनुपूरक बजट पेश किया। यह अनुपूरक बजट 19,287 करोड़ 32 लाख रुपये का है। इसके साथ ही आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 भी सदन के पटल पर रखा गया। प्रस्तुत अनुपूरक बजट में राजस्व मद में 8,934.03 करोड़ रुपये और पूंजीगत मद में 10,353.29 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

    प्रमुख विभागों को आवंटन

    सामान्य प्रशासन विभाग ₹100 करोड़

    राजस्व विभाग ₹100 करोड़

    वन विभाग ₹161 करोड़

    औद्योगिक नीति एवं निवेश संवर्धन विभाग ₹1,250 करोड़

    वित्त विभाग ₹1,650 करोड़

    वाणिज्यिक कर विभाग ₹1,388 करोड़

    खनिज विभाग माइनिंग फंड ₹321 करोड़

    रक्षित निधि अंतरण योजना ₹140 करोड़

    ऊर्जा विभाग ₹2,630 करोड़

    श्रम विभाग ₹615 करोड़

    नगरीय विकास एवं आवास विभाग ₹2,569 करोड़ स्थानीय निकाय  ₹248 करोड़  मिलियन शहर

    नर्मदा घाटी विकास विभाग ₹4,700 करोड़

    जल संसाधन विभाग ₹300 करोड़

    लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ₹300 करोड़

    तकनीकी शिक्षा विभाग ₹720 करोड़

    एमएसएमई विभाग ₹213 करोड़

    सरकार के अनुसार यह अनुपूरक बजट विकास योजनाओं, अधोसंरचना विस्तार और विभिन्न विभागों की अतिरिक्त वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए लाया गया है।

  • जयपुर इंडिया स्टोन मार्ट 2026 में मध्यप्रदेश की दमदार उपस्थिति 9 एमएसएमई इकाइयों ने स्टोन उद्योग में दिखाई ताकत

    जयपुर इंडिया स्टोन मार्ट 2026 में मध्यप्रदेश की दमदार उपस्थिति 9 एमएसएमई इकाइयों ने स्टोन उद्योग में दिखाई ताकत


    भोपाल। मध्यप्रदेश की स्टोन आधारित एमएसएमई इकाइयों ने जयपुर में आयोजित इंडिया स्टोन मार्ट 2026 में प्रभावशाली सहभागिता दर्ज कर प्रदेश का नाम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया है। 5 से 8 फरवरी तक आयोजित इस प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी में देश और विदेश से बड़ी संख्या में उद्योग प्रतिनिधि व्यापारी और क्रेता शामिल हुए। इस मंच पर मध्यप्रदेश की कुल 9 स्टोन आधारित इकाइयों ने अपने उत्पादों और नवाचार क्षमता का प्रदर्शन किया।

    ग्वालियर से 6 इकाइयों ने भागीदारी की जिनमें तंवर स्टोन इंडस्ट्रीज जैन स्टोन इंडस्ट्रीज के आर स्टोन इंडस्ट्रीज महाकाय इंडस्ट्रीज अभ्युदय इंटरप्राइजेज और श्री साईं राम स्टोन शामिल हैं। कटनी से एमके ग्रेनाइट एंड मार्बल कंपनी और श्री राम मार्बल्स ने प्रतिनिधित्व किया जबकि इंदौर से द राईट एंगल्स ने प्रदर्शनी में हिस्सा लिया। इन सभी इकाइयों को मध्यप्रदेश शासन के एमएसएमई विभाग द्वारा विभागीय सहयोग प्रदान किया गया। चयनित उद्यमों को निःशुल्क स्टॉल उपलब्ध कराए गए और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित की गईं ताकि वे अपने उत्पादों को बेहतर ढंग से प्रस्तुत कर सकें।

    इकाइयों का चयन मुख्यालय स्तर पर एमएसएमई विभाग के माध्यम से किया गया। चयन के लिए उत्पादों की गुणवत्ता नवाचार क्षमता बाजार संभावनाएं और वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना में शामिल होना प्रमुख आधार रहे। स्टोन इंडस्ट्रीज के उत्पादों की विविधता और उनकी वैश्विक मांग को ध्यान में रखते हुए इन इकाइयों को मंच प्रदान किया गया।

    प्रदर्शनी के दौरान उद्यमियों ने ग्रेनाइट मार्बल और अन्य प्राकृतिक पत्थरों से बने उत्पादों का प्रभावी प्रदर्शन किया। देश विदेश से आए व्यापारिक प्रतिनिधियों और क्रेताओं के साथ सार्थक व्यावसायिक संवाद स्थापित किए गए। इस सहभागिता से मध्यप्रदेश की विशाल स्टोन धरोहर और उत्पादन क्षमता का परिचय व्यापक स्तर पर हुआ। कई आगंतुकों ने प्रदेश के उत्पादों की गुणवत्ता और डिजाइन की सराहना की।

    यह पहल केवल प्रदर्शन तक सीमित नहीं रही बल्कि स्थानीय एमएसएमई इकाइयों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हुई। इससे निर्यात संभावनाओं के विस्तार के साथ साथ नए व्यापारिक समझौतों की राह भी खुली है। साथ ही महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने और छोटे उद्योगों को सशक्त बनाने की दिशा में भी यह प्रयास अहम माना जा रहा है।

    माना जा रहा है कि एमएसएमई विभाग की यह पहल प्रदेश में उद्यमिता को नई गति देगी। स्टोन उद्योग मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इस तरह के अंतरराष्ट्रीय मंच पर भागीदारी से रोजगार सृजन और आर्थिक विकास को मजबूती मिलेगी। जयपुर में आयोजित इंडिया स्टोन मार्ट में प्रदेश की सक्रिय भागीदारी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मध्यप्रदेश का स्टोन उद्योग वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार है और आने वाले समय में निर्यात के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू सकता है।