Tag: MukeshAmbani

  • एलन मस्क ने मुकेश अंबानी को लेकर उठाया सवाल, भारत में स्टारलिंक को लाइसेंस नहीं मिलने पर राहुल गांधी ने दिया जवाब

    एलन मस्क ने मुकेश अंबानी को लेकर उठाया सवाल, भारत में स्टारलिंक को लाइसेंस नहीं मिलने पर राहुल गांधी ने दिया जवाब

    नई दिल्ली ।भारत में एलन मस्क की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारलिंक को लाइसेंस नहीं मिलने का मामला चर्चा में है। इस मुद्दे पर मस्क ने सवाल उठाते हुए भारत के बड़े कारोबारियों की भूमिका पर टिप्पणी की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पूछा कि क्या मुकेश अंबानी भारत के असली बॉस हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी और मस्क से कहा कि भारत में दूसरे व्यक्ति से मिलने तक इंतजार करें।

    एलन मस्क का आरोप है कि भारत के कुछ बड़े कारोबारी नहीं चाहते कि स्टारलिंक की सेवा देश में शुरू हो। उनके मुताबिक, ऐसा इसलिए हो सकता है ताकि बाजार में उनका दबदबा बना रहे। मस्क ने इस स्थिति को भारतीय लोगों के खिलाफ अपराध बताते हुए सवाल किया कि सभी आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन करने के बावजूद उनकी कंपनी को अब तक लाइसेंस क्यों नहीं मिला है।

    मस्क ने अपनी टिप्पणी में कहा कि स्टारलिंक को 165 से अधिक देशों में लाइसेंस मिल चुका है। उन्होंने दावा किया कि कंपनी ने भारत सरकार के सभी कानूनों और आवश्यकताओं का पालन करते हुए पांच साल बिताए हैं। इसके बावजूद भारत में सेवा शुरू करने के लिए लाइसेंस नहीं मिलने पर उन्होंने सवाल खड़े किए। इसी संदर्भ में उन्होंने मुकेश अंबानी का नाम लेते हुए पूछा कि क्या अंबानी भारत के असली बॉस हैं।

    इस टिप्पणी के बाद राहुल गांधी ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने मस्क का भारत में स्वागत करते हुए कहा कि दूसरे व्यक्ति से मिलने तक इंतजार करें। राहुल गांधी की इस टिप्पणी को मस्क के सवाल के जवाब के रूप में देखा जा रहा है। मस्क ने राहुल गांधी के संदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए उनका धन्यवाद किया और कहा कि यह स्थिति वास्तव में परेशान करने वाली है।

    स्टारलिंक को भारत में अनुमति मिलने का मुद्दा इससे पहले भी चर्चा में रहा है। मस्क पहले भी आरोप लगा चुके हैं कि देश के कुछ बड़े कारोबारी उनकी कंपनी की एंट्री में बाधा डालना चाहते हैं, ताकि मौजूदा बाजार में अपना प्रभाव बनाए रख सकें। हालांकि, केंद्र सरकार इन आरोपों को खारिज कर चुकी है। इस तरह लाइसेंस से जुड़ा विवाद केवल सेवा शुरू करने की अनुमति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बाजार में प्रतिस्पर्धा और बड़े कारोबारी समूहों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठे हैं।

    स्टारलिंक की ओर से भारत में सेवा शुरू करने की तैयारी के तहत देशभर में 20 गेटवे साइट्स बनाई गई हैं। ये जमीन पर स्थापित स्टेशन हैं, जो अंतरिक्ष में मौजूद स्टारलिंक के सैटेलाइट को धरती के मुख्य इंटरनेट नेटवर्क से जोड़ने का काम करते हैं। इन साइट्स पर सैकड़ों एंटीना लगाए गए हैं, ताकि सैटेलाइट से मिलने वाले इंटरनेट सिग्नल को नेटवर्क तक पहुंचाया जा सके और डेटा का आदान-प्रदान हो सके।

    गेटवे साइट्स और एंटीना की तैनाती के बावजूद लाइसेंस नहीं मिलने का सवाल बना हुआ है। मस्क ने इसी स्थिति को लेकर भारत में नियामकीय प्रक्रिया और बाजार की प्रतिस्पर्धा पर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, केंद्र सरकार उनके कारोबारी हितों को प्रभावित करने के आरोपों को खारिज कर चुकी है। फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, विवाद का मुख्य मुद्दा स्टारलिंक को भारत में सेवा शुरू करने के लिए लाइसेंस नहीं मिलना और इस मामले पर मस्क तथा राहुल गांधी के बीच हुई सार्वजनिक प्रतिक्रिया है।

  • Jio Platforms का 3.8 अरब डॉलर का IPO 21 अक्टूबर को खुल सकता है, भारत के सबसे बड़े IPO का बन सकता है रिकॉर्ड

    Jio Platforms का 3.8 अरब डॉलर का IPO 21 अक्टूबर को खुल सकता है, भारत के सबसे बड़े IPO का बन सकता है रिकॉर्ड

    नई दिल्ली । मुकेश अंबानी की Jio Platforms करीब 3.8 अरब डॉलर का IPO लॉन्च करने की तैयारी में है। प्रस्तावित IPO 21 अक्टूबर को खुल सकता है और इसके बाद कंपनी के शेयर 28 अक्टूबर को शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की उम्मीद है। यदि IPO इसी आकार के साथ आता है तो यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा IPO बन सकता है। इससे पहले यह रिकॉर्ड Hyundai Motor India के पास है, जिसने 2024 में करीब 2.9 अरब डॉलर का IPO पेश किया था। Jio Platforms के प्रस्तावित IPO से जुटाई जाने वाली रकम का बड़ा हिस्सा कंपनी के टेलीकॉम कारोबार से जुड़े कर्ज को चुकाने में इस्तेमाल किए जाने की योजना है।

    प्रस्तावित IPO के जरिए कंपनी करीब 3.8 अरब डॉलर की रकम जुटाने की योजना बना रही है। हालांकि, इस संबंध में कंपनी की ओर से अभी कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है। IPO के बाद 28 अक्टूबर को Jio Platforms के शेयरों की शेयर बाजार में लिस्टिंग होने की उम्मीद जताई जा रही है। IPO का अंतिम आकार और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी कंपनी की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल प्रस्तावित तारीख और रकम के आधार पर यह भारतीय शेयर बाजार में एक बड़ा सार्वजनिक निर्गम माना जा रहा है।

    यदि Jio Platforms का IPO करीब 3.8 अरब डॉलर के आकार में आता है तो यह देश के अब तक के सबसे बड़े IPO का रिकॉर्ड अपने नाम कर सकता है। वर्तमान में Hyundai Motor India का करीब 2.9 अरब डॉलर का IPO इस मामले में सबसे आगे है। इसके बाद NSE का करीब 2.3 अरब डॉलर का IPO रहा है। NSE ने पिछले महीने शेयर बाजार में अपनी शुरुआत की थी। प्रस्तावित आकार के साथ Jio Platforms का IPO इन दोनों बड़े IPO से आगे निकल सकता है और भारतीय IPO बाजार में नया रिकॉर्ड बना सकता है।

    IPO से मिलने वाली रकम का बड़ा हिस्सा कंपनी के टेलीकॉम डिविजन का कर्ज चुकाने में इस्तेमाल किया जाएगा। Jio Platforms का कारोबार केवल टेलीकॉम तक सीमित नहीं है। कंपनी AI क्लाउड और एंटरप्राइज नेटवर्क जैसे क्षेत्रों में भी काम करती है। इन क्षेत्रों में विस्तार के साथ कंपनी का कारोबार टेलीकॉम से आगे बढ़ा है। IPO के जरिए जुटाई जाने वाली रकम से कर्ज का बोझ कम करने में मदद मिल सकती है। कंपनी में Meta और Google जैसे बड़े विदेशी निवेशकों की भी हिस्सेदारी है, जो इसके प्रमुख विदेशी निवेशकों में शामिल हैं।

    भारतीय IPO बाजार में आने वाले समय में कई बड़े निर्गम देखने को मिल सकते हैं। इनमें डेनमार्क की बीयर कंपनी Carlsberg का भारत कारोबार और होटल एग्रीगेटर Oyo की पैरेंट कंपनी Prism भी शामिल हैं। आंकड़ों के मुताबिक करीब 250 कंपनियां कुल 4.65 लाख करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही हैं। ऐसे में Jio Platforms का प्रस्तावित IPO भारतीय IPO बाजार के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि, 21 अक्टूबर को IPO खुलने, 28 अक्टूबर को लिस्टिंग और करीब 3.8 अरब डॉलर जुटाने से जुड़ी अंतिम जानकारी कंपनी की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी।

  • रिलायंस AGM में ऐतिहासिक घोषणा: जियो IPO लॉन्च की तैयारी पूरी, निवेशकों को मिलेगा भारत की डिजिटल ताकत में हिस्सेदारी का अवसर

    रिलायंस AGM में ऐतिहासिक घोषणा: जियो IPO लॉन्च की तैयारी पूरी, निवेशकों को मिलेगा भारत की डिजिटल ताकत में हिस्सेदारी का अवसर


    नई दिल्ली । भारत के कॉर्पोरेट और पूंजी बाजार जगत में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तहत रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अपनी डिजिटल इकाई जियो प्लेटफॉर्म्स के सार्वजनिक निर्गम की दिशा में बड़ा कदम बढ़ा दिया है। कंपनी की वार्षिक आम बैठक में चेयरमैन मुकेश अंबानी ने घोषणा की कि जियो प्लेटफॉर्म्स का प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम अब अगले चरण में पहुंच चुका है और इसके लिए आवश्यक दस्तावेजों को अंतिम मंजूरी प्रदान कर दी गई है। इस घोषणा के साथ ही लंबे समय से चर्चा में रहा जियो IPO अब औपचारिक रूप से बाजार की प्रक्रिया में प्रवेश करता दिखाई दे रहा है।

    मुकेश अंबानी ने बताया कि जियो प्लेटफॉर्म्स का बोर्ड ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस को स्वीकृति दे चुका है। इसके बाद नियामकीय प्रक्रिया के तहत दस्तावेज बाजार नियामक के समक्ष प्रस्तुत किए जाएंगे। इस कदम को रिलायंस समूह के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक उपलब्धि माना जा रहा है, क्योंकि इससे कंपनी के डिजिटल कारोबार के वास्तविक मूल्यांकन को बाजार के सामने प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा।

    जियो प्लेटफॉर्म्स पिछले कुछ वर्षों में भारत के डिजिटल परिवर्तन का प्रमुख चेहरा बनकर उभरा है। दूरसंचार सेवाओं से शुरुआत करने वाली कंपनी ने आज डिजिटल कनेक्टिविटी, क्लाउड सेवाओं, एंटरप्राइज सॉल्यूशंस, डिजिटल कॉमर्स और नई तकनीकों के क्षेत्र में अपनी मजबूत उपस्थिति स्थापित की है। यही वजह है कि बाजार विशेषज्ञ लंबे समय से इसके IPO का इंतजार कर रहे थे। माना जा रहा है कि सार्वजनिक सूचीबद्धता के बाद जियो देश की सबसे मूल्यवान टेक्नोलॉजी कंपनियों में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।

    कंपनी नेतृत्व का मानना है कि यह प्रस्तावित लिस्टिंग केवल पूंजी जुटाने का माध्यम नहीं होगी, बल्कि भारत की तकनीकी क्षमता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा की क्षमता को भी प्रदर्शित करेगी। जियो का सार्वजनिक निर्गम भारतीय डिजिटल अर्थव्यवस्था की बढ़ती ताकत को अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के सामने रखने का अवसर प्रदान करेगा। इससे घरेलू निवेशकों को भी देश की सबसे बड़ी डिजिटल कंपनियों में हिस्सेदारी लेने का मौका मिल सकता है।

    वार्षिक बैठक के दौरान यह भी स्पष्ट किया गया कि कंपनी की अगली पीढ़ी का नेतृत्व इस पूरी प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। आकाश अंबानी, ईशा अंबानी और अनंत अंबानी जियो के भविष्य के विकास और वैल्यू क्रिएशन रणनीतियों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रहे हैं। रिलायंस समूह आने वाले वर्षों में डिजिटल कारोबार को अपने विकास का प्रमुख इंजन मान रहा है और इसी दिशा में यह कदम बेहद अहम माना जा रहा है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, जियो IPO भारतीय शेयर बाजार के इतिहास की सबसे चर्चित और बड़ी लिस्टिंग्स में शामिल हो सकता है। डिजिटल सेवाओं की बढ़ती मांग, विशाल ग्राहक आधार और तकनीकी नवाचारों पर कंपनी का फोकस निवेशकों के लिए आकर्षण का प्रमुख कारण बन सकता है। बाजार में यह भी उम्मीद की जा रही है कि सार्वजनिक लिस्टिंग के बाद कंपनी को विस्तार योजनाओं और नई तकनीकों में निवेश के लिए अतिरिक्त वित्तीय मजबूती प्राप्त होगी।

    हाल के वर्षों में जियो ने वैश्विक स्तर पर नवाचार और बौद्धिक संपदा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। कंपनी की उपलब्धियों ने उसे अंतरराष्ट्रीय तकनीकी कंपनियों की श्रेणी में मजबूत पहचान दिलाई है। ऐसे में IPO की प्रक्रिया को जियो के विकास के अगले चरण की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।

    रिलायंस इंडस्ट्रीज की इस घोषणा ने निवेशकों, बाजार विश्लेषकों और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। अब सभी की नजर नियामकीय प्रक्रिया और आगामी सार्वजनिक निर्गम से जुड़े अगले कदमों पर टिकी हुई है, जो भारतीय पूंजी बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण अध्याय साबित हो सकते हैं।

  • अरबपतियों की दुनिया में महा-उलटफेर: मार्क जुकरबर्ग ने बेजोस को पछाड़ा, टॉप-20 से फिसले गौतम अडानी!

    अरबपतियों की दुनिया में महा-उलटफेर: मार्क जुकरबर्ग ने बेजोस को पछाड़ा, टॉप-20 से फिसले गौतम अडानी!


    नई दिल्ली।दुनिया के सबसे अमीर शख्सियतों की संपत्ति और उनकी रैंकिंग के लिए मशहूर ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स की ताजा रिपोर्ट ने वैश्विक बाजार में हलचल पैदा कर दी है। सोमवार को आए आंकड़ों के अनुसार वैश्विक अमीरों की सूची में जबरदस्त उथल-पुथल देखने को मिली है जिसका सीधा असर अमेरिकी टेक दिग्गजों से लेकर भारतीय उद्योगपतियों तक पड़ा है। इस फेरबदल की सबसे बड़ी सुर्खी मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग रहे जिनकी संपत्ति में एक ही दिन में 5.58 अरब डॉलर का भारी इजाफा दर्ज किया गया। इस उछाल के साथ जुकरबर्ग अब 239 अरब डॉलर की कुल नेटवर्थ के साथ दुनिया के चौथे सबसे अमीर व्यक्ति बन गए हैं। उन्होंने अमेजन के संस्थापक जेफ बेजोस को पीछे छोड़ दिया है जिन्हें इस दौरान 822 मिलियन डॉलर का घाटा सहना पड़ा और वे अब पांचवें पायदान पर खिसक गए हैं।

    दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति के सिंहासन पर अब भी टेस्ला और एक्स (X) के मालिक एलन मस्क मजबूती से काबिज हैं। मस्क की दौलत में 4.35 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई है जिससे उनकी कुल संपत्ति अब 676 अरब डॉलर के पार पहुंच गई है। उनके ठीक बाद गूगल के सह-संस्थापक लैरी पेज 278 अरब डॉलर के साथ दूसरे और सर्गी ब्रिन तीसरे स्थान पर मौजूद हैं। हालांकि संपत्ति में सबसे बड़ी छलांग ओरेकल के लैरी एलिसन ने लगाई जिनकी दौलत में 14.5 अरब डॉलर का अविश्वसनीय इजाफा हुआ लेकिन रैंकिंग के गणित के कारण वे फिलहाल छठे स्थान पर ही बने हुए हैं। टेक सेक्टर के अन्य दिग्गजों की बात करें तो एनवीडिया के सीईओ जेनसेन हुआंग की किस्मत भी चमकी है और वे अब 157 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ दुनिया के आठवें सबसे अमीर व्यक्ति बन गए हैं।

    भारतीय संदर्भ में देखें तो यह रिपोर्ट गौतम अडानी के लिए किसी झटके से कम नहीं है। अडानी ग्रुप के चेयरमैन की संपत्ति में हालांकि 370 मिलियन डॉलर की मामूली वृद्धि हुई लेकिन वैश्विक प्रतिस्पर्धा और अन्य अरबपतियों की तेज रफ्तार के कारण वे टॉप-20 की प्रतिष्ठित सूची से बाहर हो गए हैं। अब 86 अरब डॉलर की नेटवर्थ के साथ अडानी 21वें स्थान पर पहुंच गए हैं। इसके उलट रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी के लिए सोमवार का दिन राहत लेकर आया। अंबानी की संपत्ति में 595 मिलियन डॉलर की बढ़ोतरी दर्ज की गई जिससे उनकी कुल नेटवर्थ अब 99 अरब डॉलर हो गई है और वे रैंकिंग में सुधार करते हुए 18वें स्थान पर पहुंच गए हैं।

    यह ताजा बदलाव स्पष्ट करता है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार की अस्थिरता किस तरह पलक झपकते ही अरबपतियों की किस्मत पलट देती है। जहां एक ओर अमेरिकी टेक कंपनियां एआई (AI) और डिजिटल विज्ञापनों के बूते अपनी तिजोरियां भर रही हैं वहीं भारतीय बाजारों में जारी उतार-चढ़ाव ने घरेलू दिग्गजों की रैंकिंग को प्रभावित किया है। वॉल्टन परिवार जैसे दिग्गजों को भी इस बार नुकसान उठाना पड़ा है फिर भी वे टॉप-10 में अपनी जगह बचाने में सफल रहे। ब्लूमबर्ग की यह सूची दर्शाती है कि आने वाले समय में तकनीक और ऊर्जा क्षेत्र के बीच की यह जंग और भी दिलचस्प होने वाली है।