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  • मुकेश खन्ना ने रामायण की कास्टिंग पर उठाए सवाल, प्रभास और शाहरुख खान का उदाहरण देकर निर्माताओं को दी नसीहत

    मुकेश खन्ना ने रामायण की कास्टिंग पर उठाए सवाल, प्रभास और शाहरुख खान का उदाहरण देकर निर्माताओं को दी नसीहत

    नई दिल्ली । रामायण और महाभारत जैसे पौराणिक विषयों पर फिल्में बनाने वाले निर्माताओं को कलाकारों के चयन में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। इन फिल्मों में केवल बड़े सितारों की लोकप्रियता और बॉक्स ऑफिस पर कमाई को ध्यान में रखना पर्याप्त नहीं है, बल्कि कलाकार का व्यक्तित्व, उसकी पहचान और संबंधित किरदार के साथ उसका मेल भी महत्वपूर्ण है। अभिनेता मुकेश खन्ना ने पौराणिक और ऐतिहासिक फिल्मों की कास्टिंग को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा है कि करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़े किरदारों के साथ किसी तरह का खिलवाड़ नहीं होना चाहिए।

    मुकेश खन्ना ने फिल्मों में बड़े कलाकारों को भूमिकाएं देने के मौजूदा तरीके पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि आजकल निर्माता किसी किरदार के लिए उपयुक्त अभिनेता तलाशने के बजाय ऐसे सितारों को प्राथमिकता देते हैं, जिनकी पिछली फिल्में सफल रही हों। निर्माताओं को लगता है कि किसी बड़े अभिनेता को फिल्म में शामिल करने से निवेश की गई रकम आसानी से वापस मिल जाएगी। इसी सोच के कारण कई बार किरदार की जरूरत और कलाकार की उपयुक्तता को नजरअंदाज कर दिया जाता है।

    उन्होंने फिल्म निर्माण के आर्थिक पक्ष का उदाहरण देते हुए कहा कि निर्माता लगभग 300 करोड़ रुपये की लागत निकालने की उम्मीद में बड़े सितारों को साइन करते हैं, जबकि 700 करोड़ रुपये की कमाई का लक्ष्य पूरा नहीं हो पाता। कई बार फिल्म की शूटिंग शुरू होने से पहले ही ओटीटी प्लेटफॉर्म से मिलने वाली रकम को ध्यान में रखकर अभिनेता के साथ समझौता कर लिया जाता है। लेकिन जब फिल्म बनकर सामने आती है, तब यह स्पष्ट होता है कि चुना गया कलाकार उस भूमिका के अनुरूप नहीं है।

    मुकेश खन्ना के अनुसार, कई बार अभिनेता अपने वास्तविक व्यक्तित्व और पुरानी पहचान से बाहर नहीं निकल पाता। ऐसे में दर्शकों को पर्दे पर संबंधित किरदार के बजाय उसी लोकप्रिय कलाकार की छवि दिखाई देती है। उन्होंने कास्टिंग की बदलती प्रक्रिया पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अब स्थिति ऐसी हो गई है, जिसमें अभिनेता निर्माता को चुनता है, जबकि पहले निर्माता अपनी फिल्म की जरूरत के अनुसार कलाकार का चयन करता था।

    उन्होंने सवाल उठाया कि जब छोटे कलाकारों से किसी भूमिका के लिए ऑडिशन लिया जाता है, तो बड़े सितारों के मामले में यह प्रक्रिया क्यों नहीं अपनाई जाती। उनके मुताबिक, लोकप्रियता या बाजार में किसी कलाकार की मांग से अधिक जरूरी यह देखना है कि वह संबंधित किरदार के लिए कितना उपयुक्त है। किसी भी भूमिका में कलाकार का चेहरा, व्यक्तित्व और अभिनय की क्षमता महत्वपूर्ण होनी चाहिए।

    इस संदर्भ में उन्होंने शाहरुख खान का उदाहरण देते हुए कहा कि वह शक्तिमान जैसे किरदार के लिए उपयुक्त नहीं दिखाई देते, क्योंकि उनकी अपनी एक अलग पहचान है। मुकेश खन्ना का मानना है कि किसी अभिनेता की पुरानी छवि भी नई भूमिका को प्रभावित कर सकती है। इसलिए निर्माता को कलाकार चुनते समय यह देखना चाहिए कि उसकी व्यक्तिगत पहचान नए किरदार के साथ मेल खाती है या नहीं।

    प्रभास का उल्लेख करते हुए भी मुकेश खन्ना ने कास्टिंग और किरदार के प्रस्तुतिकरण पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि कई फिल्मों में प्रभास को सही तरीके से पेश नहीं किया गया। उनके मुताबिक, कुछ भूमिकाओं में अभिनेता की अपनी छवि किरदार पर भारी पड़ गई। उन्होंने उदाहरण देते हुए प्रभास की मूंछों का जिक्र किया और कहा कि कई बार छोटी दिखने वाली चीजें भी किसी किरदार की प्रस्तुति को प्रभावित कर सकती हैं।

    मुकेश खन्ना ने विशेष रूप से रामायण, महाभारत और ऐतिहासिक घटनाओं से जुड़े विषयों पर फिल्में बनाने वालों को सतर्क रहने की सलाह दी। उनका कहना है कि इन कथाओं के पात्रों से करोड़ों लोगों की धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाएं जुड़ी हैं। इसलिए निर्माताओं को केवल बड़े सितारों, फिल्म के बजट और बॉक्स ऑफिस की संभावनाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए। कलाकारों का चयन करते समय लोगों की आस्था और भावनाओं का सम्मान भी जरूरी है।