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  • मुंबई मेयर की गाड़ी से हटाईं लाल-नीली फ्लैश लाइट, वीआईपी कल्चर विवाद पर BMC ने दी कार्रवाई

    मुंबई मेयर की गाड़ी से हटाईं लाल-नीली फ्लैश लाइट, वीआईपी कल्चर विवाद पर BMC ने दी कार्रवाई


    नई दिल्ली। मुंबई में हाल ही में हुए विवाद के बाद मेयर ऋतु तावड़े की आधिकारिक गाड़ी और उनके साथ चलने वाली एस्कॉर्ट वाहन से लाल-नीली फ्लैश लाइटें हटा दी गई हैं। यह मामला सबसे पहले सोशल मीडिया पर तब सुर्खियों में आया जब एक पोस्ट में सवाल उठाया गया कि क्या मेयर की गाड़ी को पुलिस जैसी फ्लैश लाइट लगाने की अनुमति है। इस विवाद के बाद आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने मेयर को पत्र लिखकर इस विषय पर आपत्ति जताई और केंद्र सरकार के नियमों के अनुसार ऐसी लाइटों का उपयोग केवल आपातकालीन सेवाओं के लिए ही किया जा सकता है, इसलिए इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए, यह स्पष्ट किया।

    विवाद का केंद्र मेयर की गाड़ी के बोनट पर लगी लाल-नीली फ्लैशिंग लाइट थी, जबकि उनके साथ चल रही एस्कॉर्ट स्कॉर्पियो वाहन में भी ऐसी लाइटें थीं। इस वाहन में मेयर के निजी सहायक और प्रोटोकॉल अधिकारी मौजूद थे। लाइटें देखकर लोगों ने यह सवाल उठाया कि क्या मेयर की गाड़ी को विशेष अधिकार दिया गया है।

    इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए मेयर ऋतु तावड़े ने कहा कि उन्हें अपनी गाड़ी पर बीकन या फ्लैश लाइट लगाने में कोई रुचि नहीं है और यह प्रशासन की गलती थी। उन्होंने बताया कि जब उन्हें आधिकारिक वाहन दिया गया, तब प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए था कि किन लाइटों का प्रयोग किया जा सकता है और किनका नहीं।

    महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी इस विवाद पर कहा कि जांच में पता चला कि लाल-नीली फ्लैश लाइट गाड़ी की छत पर नहीं बल्कि बोनट पर लगी थी। उन्होंने मेयर को दोषी नहीं ठहराया और कहा कि बिना वजह उन्हें निशाना बनाना उचित नहीं है।

    नगर निगम के अधिकारियों ने बताया कि इसी तरह की फ्लैशिंग लाइटें मेयर, डिप्टी मेयर और हाउस लीडर की गाड़ियों पर भी लगी थीं, जिन्हें शनिवार को हटा दिया गया। इस विवाद के बाद विपक्ष की नेता और पूर्व मेयर किशोरी पेडणेकर ने सवाल उठाया कि यह कदम वीआईपी कल्चर के खिलाफ है और केंद्र सरकार ने 2017 में ही सरकारी वाहनों पर लाल बत्ती और विशेष प्रतीकों का उपयोग रोक दिया था।

    2017 में केंद्र सरकार ने सरकारी वाहनों पर लाल बत्ती और वीआईपी कल्चर के प्रतीकों के उपयोग पर रोक लगाई थी। तब से मुंबई की मेयर की गाड़ी से लाल बत्ती हटा दी गई थी। इस विवाद ने शहर में फिर से चर्चा छेड़ दी है कि क्या नए नियमों का सही पालन किया जा रहा है और क्या मेयर अपने पद का अनुचित लाभ उठा रही हैं।

    कुल मिलाकर, मुंबई मेयर की गाड़ी पर लगी लाल-नीली फ्लैश लाइट हटाने के बाद विवाद समाप्त हुआ, लेकिन यह मुद्दा वीआईपी कल्चर, प्रशासनिक नियमों और पारदर्शिता पर एक बार फिर ध्यान खींचता है।

  • MC में मेयर की जंग: शिंदे गुट ने ढाई साल तक शिवसेना को मेयर पद देने का दावा, भाजपा-शिंदे में खींचतान

    MC में मेयर की जंग: शिंदे गुट ने ढाई साल तक शिवसेना को मेयर पद देने का दावा, भाजपा-शिंदे में खींचतान



    मुंबई। बीएमसी चुनावी नतीजों के बाद महाराष्ट्र की सियासत में नया उलझाव खड़ा हो गया है। भाजपा ने मुंबई में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरते हुए 89 वार्ड जीतकर पहली बार BMC मेयर के लिए मजबूत दावेदार बन गई है। लेकिन इसके बाद शिंदे गुट ने मेयर पद को लेकर नया दावा करके सियासी पेंच फंसाया है।

    सूत्रों के मुताबिक, शिंदे गुट का दावा है कि 2026 शिवसेना संस्थापक बाला साहेब ठाकरे की जन्म शताब्दी वर्ष है, इसलिए कम से कम ढाई साल शिवसेना का मेयर होना चाहिए। इसी मांग को लेकर भाजपा और शिंदे गुट के बीच खींचतान शुरू हो गई है।

    शिंदे गुट ने 29 पार्षदों को होटल में किया शिफ्ट, सुरक्षा के कड़े इंतजाम
    केंद्रीय रूप से भाजपा-शिंदे गुट की सीटों पर नजर रखने के लिए शिंदे गुट ने अपने 29 नए पार्षदों को बांद्रा के होटल ताज लैंड्स एंड में शिफ्ट कर दिया है। होटल के बाहर कड़ा पहरा भी लगाया गया है।
    यह कदम हॉर्स-ट्रेडिंग रोकने और पार्षदों को पार्टी लाइन में बनाए रखने के उद्देश्य से बताया जा रहा है।

    शिंदे गुट ने बताया है कि सभी 29 पार्षदों को बुधवार दोपहर 3 बजे तक होटल में बने रहने का निर्देश दिया गया है और इसके बाद भी उन्हें कम से कम 3 दिन होटल में ही रहना होगा।

    उद्धव गुट ने लगाया बड़ा आरोप, कहाशिंदे खुद नहीं चाहते भाजपा का मेयर बने
    इसी बीच उद्धव ठाकरे के गुट (UBT) के सांसद संजय राउत ने दावा किया कि शिंदे खुद नहीं चाहते कि BMC में भाजपा का मेयर बने, इसलिए वे अपने पार्षदों को होटल में रखे हुए हैं।
    उनका कहना है कि शिंदे गुट भाजपा को मेयर पद नहीं दिलाने की कोशिश कर रहा है।

    वहीं उद्धव गुट ने यह भी संकेत दिए कि अगर “भगवान चाहें” तो उनकी पार्टी का मेयर बन सकता है, जिससे राजनीतिक अटकलें और तेज हो गई हैं।