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  • विदिशा में कचरा संकट गहराया, डंपिंग साइट तक नहीं पहुंच सके वाहन, शहर में गंदगी का खतरा बढ़ा

    विदिशा में कचरा संकट गहराया, डंपिंग साइट तक नहीं पहुंच सके वाहन, शहर में गंदगी का खतरा बढ़ा


    विदिशा  लगातार हो रही बारिश ने विदिशा शहर की सफाई व्यवस्था पर बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। जतरापुरा स्थित डंपिंग ग्राउंड तक जाने वाला मार्ग पूरी तरह कीचड़ में तब्दील हो गया है जिसके कारण नगर पालिका के कचरा वाहन वहां तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। स्थिति यह है कि शहर से रोजाना एकत्र होने वाला लगभग 35 टन कचरा नगर पालिका परिसर में ही रुका हुआ है और ट्रैक्टर ट्रॉलियां व डंपर खड़े रहने को मजबूर हैं। यदि जल्द वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई तो आने वाले दिनों में शहर में कचरे का ढेर लगने और संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ सकता है।

    नगर पालिका के सफाई कर्मचारी प्रतिदिन शहर के सभी वार्डों घरों बाजारों और सार्वजनिक स्थानों से कचरा एकत्र करते हैं। सामान्य दिनों में करीब छह ट्रैक्टर ट्रॉलियों और चार बड़े डंपरों के माध्यम से इस कचरे को जतरापुरा डंपिंग ग्राउंड तक पहुंचाया जाता है। लेकिन गुरुवार की तेज बारिश के बाद डंपिंग स्थल तक जाने वाला मार्ग पूरी तरह दलदल बन गया जिससे वाहन बीच रास्ते में फंसने लगे और कचरा ले जाना असंभव हो गया। मजबूरी में सभी वाहनों को नगर पालिका परिसर में ही खड़ा करना पड़ा।

    यह समस्या पहली बार सामने नहीं आई है। इससे पहले भी बारिश के मौसम में इसी तरह की स्थिति बन चुकी है जब डंपिंग ग्राउंड तक पहुंचने का रास्ता बंद हो गया था और कई दिनों तक कचरे से भरे वाहन नगर पालिका परिसर में खड़े रहे थे। हालांकि उस समय बारिश थमने के बाद रास्ता खुल गया था और कचरे का निस्तारण किया जा सका था। इस बार भी पूरे मार्ग में कीचड़ होने से वाहन आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं और फिलहाल कोई वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध नहीं है।

    विदिशा नगर पालिका पहले सोठिया क्षेत्र के पास कचरा डंप करती थी लेकिन ग्रामीणों के विरोध और मानव अधिकार आयोग में शिकायत के बाद वहां कचरा डालना बंद कर दिया गया। इसके बाद जतरापुरा और मिर्जापुर क्षेत्रों को अस्थायी डंपिंग स्थल के रूप में उपयोग किया जाने लगा। अब लगातार बारिश के कारण इन स्थानों तक पहुंचना भी मुश्किल हो गया है जिससे नगर पालिका के सामने कचरा प्रबंधन की गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है।

    नगर पालिका के कर्मचारियों का कहना है कि यदि रास्ता जल्द नहीं खुला तो शहर से निकलने वाले दैनिक कचरे का उठाव प्रभावित हो जाएगा। इससे सड़कों और मोहल्लों में गंदगी बढ़ेगी तथा मच्छरों और संक्रमणजनित बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है। बारिश के मौसम में स्वच्छता व्यवस्था बनाए रखना पहले से ही चुनौतीपूर्ण होता है और ऐसे में डंपिंग ग्राउंड तक पहुंच बंद होना हालात को और गंभीर बना सकता है।

    नगर पालिका में नेता प्रतिपक्ष आशीष माहेश्वरी ने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए प्रशासन से तत्काल वैकल्पिक डंपिंग व्यवस्था करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते समाधान नहीं किया गया तो शहर को गंभीर स्वच्छता और स्वास्थ्य संकट का सामना करना पड़ सकता है। वहीं नगर पालिका अधिकारियों का कहना है कि स्थायी डंपिंग ग्राउंड के लिए जिला प्रशासन से भूमि की मांग की गई है। फिलहाल दूसरी जगह तलाशने के साथ स्थायी समाधान की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं ताकि भविष्य में बारिश के दौरान ऐसी स्थिति दोबारा न बने।

  • छात्रों की सुरक्षा से समझौता नहीं देवास में फायर सेफ्टी खामियों पर कोचिंग क्लास सील नगर निगम का अभियान तेज

    छात्रों की सुरक्षा से समझौता नहीं देवास में फायर सेफ्टी खामियों पर कोचिंग क्लास सील नगर निगम का अभियान तेज


    देवास । देवास में छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नगर निगम ने कोचिंग संस्थानों की जांच का विशेष अभियान शुरू किया है। अभियान के दौरान रामनगर चौराहे के पास स्थित डीसी कोचिंग क्लासेस में गंभीर सुरक्षा खामियां मिलने पर नगर निगम ने संस्थान को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया। कार्रवाई के बाद शहर के अन्य कोचिंग संस्थानों में भी हड़कंप की स्थिति बन गई है।

    नगर निगम की टीम ने निरीक्षण के दौरान पाया कि भवन में आपातकालीन निकास के लिए बनाई गई सीढ़ियां और रैंप बेहद खराब स्थिति में थे। ऐसी स्थिति में किसी भी आपातकाल के दौरान छात्रों के सुरक्षित बाहर निकलने में गंभीर खतरा हो सकता था। इसके अलावा कक्षाओं में भी कई आवश्यक सुरक्षा और मूलभूत व्यवस्थाओं का अभाव पाया गया।

    निरीक्षण में सबसे बड़ी लापरवाही फायर सेफ्टी को लेकर सामने आई। संस्थान में आग लगने जैसी आपात स्थिति से निपटने के लिए न तो पर्याप्त अग्निशमन उपकरण उपलब्ध थे और न ही सुरक्षा के आवश्यक इंतजाम किए गए थे। नगर निगम अधिकारियों ने इसे विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा मानते हुए कोचिंग संस्थान को सील करने की कार्रवाई की।

    कार्रवाई के दौरान नगर निगम के अधिकारी जितेंद्र सिसौदिया सहित निगम की टीम मौके पर मौजूद रही। अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा नियमों का पालन सभी शैक्षणिक संस्थानों के लिए अनिवार्य है और किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    डीसी कोचिंग क्लासेस के अलावा नगर निगम की टीम ने शहर के अन्य कोचिंग संस्थानों का भी निरीक्षण किया। इस दौरान संचालकों को भवन सुरक्षा फायर सेफ्टी और आपातकालीन निकास सहित सभी सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जिन संस्थानों में खामियां पाई जाएंगी उनके खिलाफ भी इसी प्रकार की सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    नगर निगम ने कहा कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और विद्यार्थियों की सुरक्षा के साथ किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। प्रशासन ने सभी कोचिंग संचालकों से अपील की है कि वे निर्धारित सुरक्षा मानकों को प्राथमिकता दें और समय रहते आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर लें ताकि भविष्य में किसी अप्रिय घटना से बचा जा सके।

  • इंदौर नगर निगम की अपील आज आखिरी दिन समय पर कर जमा कर पाएं विशेष छूट और बनें शहर विकास के भागीदार

    इंदौर नगर निगम की अपील आज आखिरी दिन समय पर कर जमा कर पाएं विशेष छूट और बनें शहर विकास के भागीदार


    इंदौर । इंदौर नगर निगम की ओर से वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अग्रिम संपत्तिकर और जलकर जमा करने का मंगलवार यानी 30 जून अंतिम दिन है। नगर निगम ने करदाताओं से समय रहते भुगतान करने की अपील की है ताकि वे विशेष छूट का लाभ उठा सकें। अंतिम दिन बड़ी संख्या में लोगों के आने की संभावना को देखते हुए निगम ने सभी कर संग्रह केंद्रों पर आवश्यक व्यवस्थाएं की हैं और काउंटर भी नियमित रूप से संचालित किए जा रहे हैं।

    नगर निगम के अनुसार अग्रिम कर जमा करने वाले नागरिकों को प्रोत्साहन के रूप में संपत्तिकर पर 6.25 प्रतिशत और जलकर पर 6 प्रतिशत की विशेष छूट दी जा रही है। निगम का मानना है कि इस योजना से लोगों को आर्थिक राहत मिलने के साथ नगर निगम के राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी जिससे शहर के विकास कार्यों को गति मिलेगी।

    नगर निगम ने इस वर्ष अग्रिम संपत्तिकर और जलकर संग्रह के लिए 140 करोड़ रुपये का लक्ष्य निर्धारित किया है। राजस्व प्रभारी निरंजन सिंह चौहान ने बताया कि नागरिकों की अच्छी भागीदारी को देखते हुए उम्मीद है कि तय लक्ष्य से भी अधिक कर संग्रह हो सकता है। पिछले वित्तीय वर्ष में अग्रिम कर के रूप में लगभग 103 करोड़ रुपये जमा हुए थे जबकि इस बार उससे कहीं बेहतर परिणाम मिलने की संभावना जताई जा रही है।

    करदाताओं को जागरूक करने के लिए नगर निगम ने पिछले कई दिनों से व्यापक प्रचार अभियान चलाया। शहर के विभिन्न क्षेत्रों में सूचना प्रसारित की गई और नागरिकों से समय पर कर जमा करने की अपील की गई। महापौर पुष्यमित्र भार्गव और नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल ने भी लोगों से आग्रह किया कि वे अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना अपना कर जमा करें और उपलब्ध छूट का पूरा लाभ उठाएं।

    महापौर ने कहा कि समय पर कर जमा करना केवल नागरिक जिम्मेदारी ही नहीं बल्कि शहर के विकास में सहभागिता का भी महत्वपूर्ण माध्यम है। नगर निगम को मिलने वाला राजस्व सड़क निर्माण स्वच्छता पेयजल व्यवस्था उद्यानों के विकास और अन्य बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने में उपयोग किया जाता है। इसलिए नागरिकों का सहयोग शहर की प्रगति के लिए बेहद आवश्यक है।

    नगर निगम ने करदाताओं से अपील की है कि यदि उन्होंने अभी तक अपना अग्रिम संपत्तिकर या जलकर जमा नहीं किया है तो आज ही भुगतान कर विशेष छूट का लाभ उठाएं। अंतिम तिथि के बाद यह छूट उपलब्ध नहीं होगी और सामान्य नियमों के अनुसार कर का भुगतान करना होगा।

  • भोपाल में इंजीनियरिंग की बड़ी चूक! फुटपाथ को ही रेलिंग लगाकर किया बंद, पैदल यात्रियों की बढ़ी परेशानी

    भोपाल में इंजीनियरिंग की बड़ी चूक! फुटपाथ को ही रेलिंग लगाकर किया बंद, पैदल यात्रियों की बढ़ी परेशानी


    भोपाल भोपाल में एक बार फिर खराब इंजीनियरिंग और बिना जमीनी हकीकत को समझे किए गए विकास कार्यों का मामला सामने आया है। शहर के ऐशबाग क्षेत्र में 90 डिग्री ब्रिज के बाद वार्ड क्रमांक 32 में बनाए गए फुटपाथ को इस तरह रेलिंग से घेर दिया गया है कि अब वह पैदल यात्रियों की सुविधा के बजाय उनके लिए परेशानी का कारण बन गया है। जिस फुटपाथ का निर्माण लोगों को सुरक्षित और सुगम आवागमन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया गया था, वह अब किसी बंद पिंजरे जैसा दिखाई दे रहा है।

    सड़क किनारे किए गए सौंदर्यीकरण कार्य के तहत लगभग तीन फीट ऊंची लोहे की जाली लगाई गई है। इस रेलिंग के कारण राहगीरों का सीधे फुटपाथ पर पहुंचना मुश्किल हो गया है। कुछ चुनिंदा स्थानों पर प्रवेश और निकास के लिए कट पॉइंट बनाए गए हैं, लेकिन इनमें से अधिकांश स्थानों पर ठेला संचालकों और अन्य अतिक्रमणकारियों ने कब्जा कर रखा है। परिणामस्वरूप पैदल चलने वाले लोगों को फुटपाथ का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

    कई स्थानों पर स्थिति और भी विचित्र है। फुटपाथ के एक ओर तीन फीट ऊंची लोहे की रेलिंग है, जबकि दूसरी ओर पहले से बनी पक्की दीवार मौजूद है। ऐसे में पैदल यात्री बीच में फंसकर रह जाते हैं और उन्हें सड़क पर चलने के लिए मजबूर होना पड़ता है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि सुरक्षा और सौंदर्यीकरण के नाम पर ऐसा डिजाइन तैयार किया गया है, जिसने मूल उद्देश्य को ही समाप्त कर दिया है।

    क्षेत्रवासियों ने सवाल उठाया है कि जब कोई भी सार्वजनिक परियोजना नागरिकों की सुविधा के लिए बनाई जाती है, तो उसकी डिजाइन और उपयोगिता का आकलन किए बिना मंजूरी कैसे दी जाती है। लोगों का कहना है कि बस या सार्वजनिक परिवहन से उतरने वाले यात्री सीधे फुटपाथ तक नहीं पहुंच सकते। इससे दुर्घटना की आशंका भी बढ़ जाती है। नागरिकों ने इसे सरकारी धन की बर्बादी और योजना निर्माण में गंभीर लापरवाही करार दिया है।

    मामले के सामने आने के बाद नगर निगम के अधिकारियों ने भी संज्ञान लिया है। निगम के कार्यपालन यंत्री (ईई) एन.के. डेहरिया ने बताया कि संबंधित इंजीनियर से जानकारी मांगी गई है कि यह कार्य किस मद और किस प्रक्रिया के तहत स्वीकृत किया गया था। उन्होंने कहा कि यदि जांच में यह पाया जाता है कि फुटपाथ के उपयोग में लोगों को दिक्कत हो रही है तो आवश्यक बदलाव किए जाएंगे। उन्होंने स्वयं स्थल निरीक्षण करने की बात भी कही है।

    वहीं वार्ड की पार्षद आरती अनेजा का कहना है कि क्षेत्र में अतिक्रमण और शराबियों के जमावड़े की समस्या को देखते हुए यह कदम उठाया गया था। ठेकेदार ने आश्वासन दिया था कि रेलिंग लगाने के बावजूद लोगों की आवाजाही प्रभावित नहीं होगी, लेकिन मौके पर पहुंचकर देखने पर स्थिति अलग मिली। पार्षद ने स्पष्ट किया कि यदि वर्तमान डिजाइन लोगों के लिए असुविधाजनक है तो इसमें बदलाव कराया जाएगा।

    यह मामला एक बार फिर इस बात को उजागर करता है कि विकास कार्यों में तकनीकी योजना और जमीनी जरूरतों के बीच तालमेल कितना जरूरी है। यदि परियोजनाएं नागरिकों की सुविधा बढ़ाने के बजाय मुश्किलें खड़ी करने लगें, तो उनकी उपयोगिता पर गंभीर सवाल उठना स्वाभाविक है।

  • जबलपुर में नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी पर ईओडब्ल्यू का शिकंजा, आय से अधिक संपत्ति मामले में घर पर छापा

    जबलपुर में नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी पर ईओडब्ल्यू का शिकंजा, आय से अधिक संपत्ति मामले में घर पर छापा


    जबलपुर जबलपुर में मंगलवार को आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) की टीम ने नगर निगम के प्रभारी सहायक स्वास्थ्य अधिकारी पोला राव के निवास पर छापामार कार्रवाई कर हड़कंप मचा दिया। आय से अधिक संपत्ति की शिकायत मिलने के बाद कोर्ट से सर्च वारंट प्राप्त कर यह कार्रवाई की गई। सुबह शुरू हुई जांच देर तक जारी रही, जिसमें अधिकारियों ने संपत्ति, बैंक खातों और निवेश से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों की पड़ताल की।

    जानकारी के अनुसार, पोला राव वर्तमान में जबलपुर नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग में प्रभारी सहायक स्वास्थ्य अधिकारी के रूप में पदस्थ हैं। मूल रूप से आंध्रप्रदेश निवासी पोला राव का निवास विजय नगर क्षेत्र स्थित मुस्कान प्लाजा में है, जहां ईओडब्ल्यू की टीम ने पहुंचकर तलाशी अभियान शुरू किया। अधिकारियों ने घर के भीतर मौजूद दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड, बीमा पॉलिसियों और अन्य वित्तीय अभिलेखों की जांच की।

    प्रारंभिक जांच में ईओडब्ल्यू को जबलपुर में पोला राव के नाम एक फ्लैट और लगभग 10 हजार वर्गफुट का प्लॉट होने की जानकारी मिली है। इसके अलावा आंध्रप्रदेश में करीब एक एकड़ कृषि भूमि से संबंधित दस्तावेज भी जांच के दौरान सामने आए हैं। अधिकारियों का मानना है कि इन संपत्तियों का वास्तविक मूल्य और उनकी खरीद के स्रोत की जांच करना आवश्यक है।

    ईओडब्ल्यू के अधिकारियों के अनुसार जांच में चार दोपहिया वाहन और एक चारपहिया वाहन की जानकारी भी मिली है, जिनकी अनुमानित कीमत 15 से 16 लाख रुपए बताई जा रही है। टीम ने इन वाहनों से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच शुरू कर दी है। साथ ही बैंक खातों में हुए लेन-देन, निवेश और बीमा योजनाओं से संबंधित अभिलेखों को भी जब्त किया गया है।

    जांच के दौरान अधिकारियों का ध्यान पोला राव के पारिवारिक संबंधों और उनसे जुड़े संपत्ति विवरणों पर भी गया है। ईओडब्ल्यू के अनुसार उनकी बहन और बहनोई भी जबलपुर में निवास करते हैं। उनके मकान और उससे संबंधित दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है। बताया जा रहा है कि संबंधित संपत्ति नजूल भूमि पर बनी हुई है, इसलिए उसके वैधानिक पहलुओं की भी पड़ताल की जा रही है।

    ईओडब्ल्यू के डीएसपी मनजीत सिंह ने बताया कि फिलहाल सभी दस्तावेजों का विश्लेषण किया जा रहा है। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि अधिकारी की घोषित आय और उनके नाम पर मौजूद संपत्तियों के बीच कितना अंतर है। यदि जांच में आय से अधिक संपत्ति के प्रमाण मिलते हैं तो आगे नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    गौरतलब है कि पोला राव वर्तमान में नगर निगम के कई महत्वपूर्ण वार्डों का प्रभार संभाल रहे हैं। ऐसे में उनके खिलाफ हुई यह कार्रवाई शहर में चर्चा का विषय बन गई है। देर शाम तक जारी जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि उनके पास कुल कितनी चल-अचल संपत्ति है और उसका स्रोत क्या है। फिलहाल ईओडब्ल्यू की कार्रवाई जारी है और अधिकारी पूरे मामले की बारीकी से जांच कर रहे हैं।

  • मानसून से पहले निगम का ‘ऑपरेशन डेंजर’ तेज: इंदौर में 100 से अधिक जर्जर इमारतें रडार पर, हादसे रोकने के लिए कार्रवाई शुरू

    मानसून से पहले निगम का ‘ऑपरेशन डेंजर’ तेज: इंदौर में 100 से अधिक जर्जर इमारतें रडार पर, हादसे रोकने के लिए कार्रवाई शुरू


    मध्‍य प्रदेश । मानसून के आगमन से पहले इंदौर नगर निगम ने शहरवासियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए जर्जर और खतरनाक भवनों के खिलाफ व्यापक अभियान शुरू कर दिया है। बारिश के मौसम में पुराने और कमजोर ढांचों के गिरने से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए निगम प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आ रहा है। इसी उद्देश्य से नगर निगम ने ‘ऑपरेशन डेंजर’ के तहत शहरभर में चिन्हित खतरनाक इमारतों पर कार्रवाई तेज कर दी है।

    नगर निगम अधिकारियों के अनुसार शहर के विभिन्न क्षेत्रों में सर्वेक्षण कर ऐसे भवनों की पहचान की गई है, जो अत्यधिक जर्जर स्थिति में हैं और बारिश के दौरान किसी भी समय हादसे का कारण बन सकते हैं। प्रारंभिक सर्वे में 100 से अधिक भवनों को जोखिमपूर्ण श्रेणी में रखा गया है। इन भवनों को नगर निगम की विशेष निगरानी सूची में शामिल किया गया है और संबंधित संपत्ति मालिकों को कानूनी नोटिस भी जारी किए जा चुके हैं।

    नगर निगम के अपर आयुक्त प्रखर सिंह के मुताबिक, अभियान का मुख्य उद्देश्य मानसून के दौरान नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने बताया कि जिन इमारतों की स्थिति अत्यंत खतरनाक पाई गई है, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। कई स्थानों पर निगम की टीमें मौके पर पहुंचकर जर्जर संरचनाओं को हटाने और ध्वस्त करने का कार्य कर रही हैं ताकि किसी अप्रिय घटना की संभावना को पहले ही समाप्त किया जा सके।

    अभियान के तहत शहर के अलग-अलग जोन और वार्डों में निगम की टीमें सक्रिय हैं। तकनीकी विशेषज्ञों की सहायता से भवनों की स्थिति का मूल्यांकन किया जा रहा है और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन का लक्ष्य है कि मानसून पूरी तरह सक्रिय होने से पहले सभी गंभीर रूप से खतरनाक भवनों पर आवश्यक कार्रवाई पूरी कर ली जाए।

    नगर निगम ने नागरिकों से भी सहयोग की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी क्षेत्र में कोई भवन अत्यधिक जर्जर दिखाई देता है या उसकी स्थिति लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है, तो उसकी सूचना तत्काल प्रशासन को दी जानी चाहिए। इसके अलावा जिन मकान मालिकों के भवन कमजोर या क्षतिग्रस्त स्थिति में हैं, उन्हें भी समय रहते आवश्यक मरम्मत या अन्य सुरक्षा उपाय करने की सलाह दी गई है।

    प्रशासन का मानना है कि नागरिकों की सतर्कता और प्रशासन की सक्रियता मिलकर संभावित दुर्घटनाओं को काफी हद तक रोक सकती है। इसी कारण निगम लगातार जागरूकता बढ़ाने के प्रयास भी कर रहा है ताकि लोग जोखिमपूर्ण भवनों के प्रति गंभीरता दिखाएं।

    जर्जर भवनों पर कार्रवाई के साथ-साथ नगर निगम ने मानसून से जुड़ी अन्य चुनौतियों से निपटने की तैयारियां भी तेज कर दी हैं। जलभराव वाले क्षेत्रों की निगरानी, नालों की सफाई, आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था और कंट्रोल रूम की सक्रियता बढ़ाई गई है। निगम का दावा है कि बारिश के मौसम में किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए टीमें चौबीसों घंटे तैयार रहेंगी।

    नगर निगम का कहना है कि सुरक्षित और व्यवस्थित शहर उपलब्ध कराना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसी दिशा में मानसून पूर्व यह विशेष अभियान चलाया जा रहा है ताकि बारिश के दौरान नागरिकों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और संभावित हादसों को समय रहते रोका जा सके।

  • पानी की समस्या पहुंची कोर्ट, प्री-मानसून तैयारियों को लेकर नगर निगम को फटकार

    पानी की समस्या पहुंची कोर्ट, प्री-मानसून तैयारियों को लेकर नगर निगम को फटकार


    मध्य प्रदेश । इंदौर में लगातार गहराते जल संकट को लेकर दायर जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है। जबलपुर स्थित Madhya Pradesh High Court की अवकाशकालीन पीठ ने नगर निगम को मानसून पूर्व जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण से जुड़े जरूरी कार्य तत्काल शुरू करने के निर्देश दिए हैं। न्यायमूर्ति Pranay Verma और Jai Kumar Pillai की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि वर्षा जल के अधिकतम उपयोग और जल स्रोतों के संरक्षण के लिए त्वरित कदम उठाए जाना आवश्यक है।

    यह जनहित याचिका Rajlakshmi Foundation की ओर से दायर की गई है। याचिका में इंदौर और आसपास के क्षेत्रों में तेजी से गिरते भूजल स्तर, सूखते तालाबों, झीलों, कुओं और बावड़ियों की स्थिति पर चिंता जताई गई है। साथ ही यह भी बताया गया कि कई पारंपरिक जल स्रोतों से जुड़े फीडर चैनल और मोहरियां अवरुद्ध हो चुकी हैं, जिससे वर्षा जल का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हो रहा है।

    याचिका में रेनवॉटर हार्वेस्टिंग नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन की कमी, शहर में बढ़ते कंक्रीटीकरण, जलाशयों में सीवेज प्रदूषण, पाइपलाइन लीकेज, परित्यक्त बोरवेल और उपचारित अपशिष्ट जल के सीमित उपयोग जैसे मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया गया। इसके अलावा ग्रामीण और पेरी-अर्बन क्षेत्रों के वाटरशेड संरक्षण और पुनर्स्थापन की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।

    विशेष रूप से असराबाद खुर्द, मिर्जापुर, रालामंडल, लिम्बोदी, बिलावली, छोटी बिलावली और पिपल्यापाला जैसे जलाशयों के वैज्ञानिक पुनर्जीवन की मांग याचिका में की गई है। इन जल स्रोतों को इंदौर की पारंपरिक जल-श्रृंखला का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया है, जो भूजल स्तर बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।

    मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इंदौर नगर निगम को निर्देश दिया कि अगले सात दिनों के भीतर सार्वजनिक सूचना जारी कर सभी सरकारी भवनों, अस्पतालों, स्कूलों, कॉलेजों, अपार्टमेंट्स, मॉल, होटल, व्यावसायिक परिसरों और अन्य संस्थानों को अपने रेनवॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की सफाई, डी-सिल्टिंग और उन्हें पूरी तरह क्रियाशील बनाने के लिए निर्देशित किया जाए।

    अदालत ने यह भी कहा कि पहली भारी मानसूनी बारिश से पहले प्राथमिकता वाले जलाशयों से जुड़े स्टॉर्म वॉटर ड्रेन्स, फीडर चैनलों, झीलों के इनलेट और आउटलेट, मोहरियों तथा रिचार्ज चैनलों की आपात सफाई कराई जाए। कोर्ट का मानना है कि यदि इन मार्गों को समय रहते साफ कर दिया जाए तो बारिश का पानी बहकर नष्ट होने के बजाय भूजल रिचार्ज और जलाशयों के पुनर्भरण में उपयोग हो सकेगा।

    जल संकट जैसे गंभीर मुद्दे पर हाईकोर्ट के हस्तक्षेप को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सभी की नजरें 8 जून को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जिसमें नगर निगम द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी अदालत के समक्ष रखी जाएगी।

  • तेज हवाओं का असर, इंदौर में व्यवस्था बहाली के लिए युद्धस्तर पर काम

    तेज हवाओं का असर, इंदौर में व्यवस्था बहाली के लिए युद्धस्तर पर काम


    मध्य प्रदेश । इंदौर में सोमवार को अचानक मौसम ने करवट ली और तेज धूलभरी आंधी ने शहर में काफी नुकसान पहुंचाया। आंधी के चलते शहर के विभिन्न हिस्सों में करीब 150 स्थानों पर पेड़ और डगाले गिरने की घटनाएं सामने आईं, जिससे कई इलाकों में यातायात और सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ।

    जैसे ही सूचना नगर निगम को मिली, टीमों को तुरंत मौके पर भेजा गया और पेड़ों व डगालों को हटाने का काम शुरू किया गया। मंगलवार को भी शहर के कई हिस्सों में सफाई और मलबा हटाने का कार्य लगातार जारी रहा।

    निगम की टीमें अलर्ट मोड पर, 24 घंटे निगरानी
    नगर निगम ने स्थिति को देखते हुए अपनी सभी टीमों को अलर्ट मोड पर रख दिया है। अधिकारियों के अनुसार अब दिन या रात किसी भी समय सूचना मिलने पर टीम तुरंत कार्रवाई के लिए तैयार रहेगी।

    उद्यान विभाग के अधिकारी शांतिलाल यादव ने बताया कि आंधी के कारण बड़ी संख्या में पेड़ और डगाले गिरे, जिनमें से कई को सोमवार को ही हटाकर सड़क किनारे कर दिया गया था, जबकि बाकी को मंगलवार को भी हटाया जा रहा है।

    वाहनों को नुकसान, लेकिन जनहानि नहीं
    प्रशासन के अनुसार आंधी के कारण कुछ स्थानों पर खड़े वाहनों को नुकसान पहुंचा है, हालांकि राहत की बात यह है कि किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई है। नगर निगम की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में लगातार काम कर रही हैं ताकि जल्द से जल्द यातायात और सामान्य स्थिति बहाल की जा सके।

    तेज हवाओं के बाद सतर्कता बढ़
    मौसम विभाग की चेतावनियों को देखते हुए नगर निगम ने भी सतर्कता बढ़ा दी है। अधिकारियों ने बताया कि भविष्य में किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए टीमें तैयार रखी गई हैं और निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया गया है।

  • बकरीद को लेकर सख्त हुए नियम, फ्लैट के अंदर कुर्बानी पर पूरी तरह रोक, नगर निगम और RWA ने तय किए कड़े दिशा-निर्देश

    बकरीद को लेकर सख्त हुए नियम, फ्लैट के अंदर कुर्बानी पर पूरी तरह रोक, नगर निगम और RWA ने तय किए कड़े दिशा-निर्देश

    नई दिल्ली । बकरीद के मौके पर देश के कई हिस्सों में कुर्बानी को लेकर हाउसिंग सोसायटी और नगर निगम स्तर पर सख्त नियम और दिशा-निर्देश लागू किए गए हैं। मुंबई, दिल्ली और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में हाल के दिनों में सोसायटी परिसरों में कुर्बानी को लेकर विवाद की स्थिति सामने आने के बाद प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी स्थिति में फ्लैट के अंदर पशु की कुर्बानी की अनुमति नहीं दी जा सकती। नियमों के अनुसार घनी आबादी वाले आवासीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य, सफाई और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह प्रतिबंध लागू किया गया है।

    प्रशासनिक दिशा-निर्देशों के अनुसार फ्लैट या अपार्टमेंट के अंदर किसी भी प्रकार की कुर्बानी करना पूरी तरह प्रतिबंधित है। नगर निगम और न्यायिक प्रावधानों के मुताबिक छोटे बंद स्थानों में इस प्रकार की गतिविधियों से स्वच्छता और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। इसके साथ ही बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भी इस तरह की अनुमति नहीं दी जाती है।

    यदि किसी सोसायटी में सामूहिक रूप से कुर्बानी की व्यवस्था की जाती है तो इसके लिए सख्त प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है। इसके तहत संबंधित हाउसिंग सोसायटी या आरडब्ल्यूए को नगर निगम और स्थानीय प्रशासन से अनुमति प्राप्त करनी होती है। साथ ही यह सुनिश्चित करना होता है कि परिसर के आसपास किसी भी धार्मिक स्थल या सार्वजनिक मार्ग के निकट यह गतिविधि न की जाए, जिससे किसी भी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो।

    नियमों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी भी आवासीय सोसायटी के भीतर खुले स्थान या कॉमन एरिया में भी बिना अनुमति कुर्बानी नहीं की जा सकती। यदि किसी क्षेत्र में पहले से ही निर्धारित बूचड़खाना या अधिकृत सुविधा उपलब्ध है, तो उसी का उपयोग करना आवश्यक है। इससे न केवल नियमों का पालन सुनिश्चित होता है, बल्कि भीड़भाड़ वाले इलाकों में अनावश्यक तनाव की स्थिति भी नहीं बनती।

    सफाई व्यवस्था को लेकर भी प्रशासन ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। कुर्बानी के बाद किसी भी प्रकार के अवशेष या खून को खुले नालों या सार्वजनिक स्थानों में बहाने की अनुमति नहीं है। सभी अपशिष्ट पदार्थों को सुरक्षित तरीके से पैक कर नगर निगम की निर्धारित गाड़ियों या डंपिंग साइट तक पहुंचाना अनिवार्य किया गया है। नियमों का उल्लंघन करने पर संबंधित व्यक्ति या संस्था के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

    हाउसिंग सोसायटी स्तर पर भी आरडब्ल्यूए को यह अधिकार दिया गया है कि वे अपने परिसर में किसी भी धार्मिक या विशेष आयोजन के लिए नियम तय कर सकते हैं। यदि किसी सोसायटी में पशु लाने या अस्थायी ढांचा बनाने पर रोक है, तो सभी निवासियों को उसका पालन करना होगा। यह व्यवस्था सामुदायिक शांति और आपसी सौहार्द बनाए रखने के उद्देश्य से लागू की गई है।

    देश के विभिन्न हिस्सों में इस मुद्दे को लेकर समय-समय पर विवाद देखने को मिले हैं, जहां अलग-अलग समुदायों के बीच समझ और नियमों के पालन को लेकर मतभेद सामने आए हैं। प्रशासन का कहना है कि सभी नागरिकों को कानून और स्थानीय नियमों का सम्मान करते हुए धार्मिक गतिविधियां करनी चाहिए ताकि सामाजिक सौहार्द बना रहे।

    इस प्रकार बकरीद के अवसर पर कुर्बानी को लेकर लागू किए गए ये नियम सार्वजनिक व्यवस्था, स्वास्थ्य और शांति बनाए रखने के उद्देश्य से बनाए गए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि तय दिशा-निर्देशों का पालन न करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

  • ग्वालियर में सनसनी: पानी की टंकी में मरा सांप मिलने से 19 हजार लोगों की सुरक्षा पर चिंता

    ग्वालियर में सनसनी: पानी की टंकी में मरा सांप मिलने से 19 हजार लोगों की सुरक्षा पर चिंता


    नई दिल्ली। ग्वालियर में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वार्ड क्रमांक 10 के घासमंडी मिर्जापुर मस्जिद इलाके में स्थित पानी की टंकी में मरा हुआ सांप मिलने से पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। यह वही टंकी है जिससे करीब 19 हजार लोगों को पेयजल की सप्लाई होती है।
    स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस टंकी की लंबे समय से सफाई नहीं की गई थी, जिसके कारण अंदर गंदगी जमा हो गई और अंततः मरा हुआ सांप पानी में पाया गया। हैरान करने वाली बात यह है कि लोग कई दिनों से इसी पानी का उपयोग कर रहे थे, जिससे उनके स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा पैदा होने की आशंका जताई जा रही है।
    वीडियो सामने आने के बाद बढ़ा विवाद
    इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसमें एक युवक लकड़ी की मदद से टंकी के अंदर से मरा हुआ सांप बाहर निकालता दिखाई दे रहा है। बताया जा रहा है कि यह घटना शनिवार की है, लेकिन इसका वीडियो रविवार को सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया।
    वीडियो वायरल होते ही स्थानीय लोगों में गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने नगर निगम प्रशासन के खिलाफ लापरवाही के आरोप लगाए।
    नगर निगम पर गंभीर सवाल
    रहवासियों का कहना है कि उन्होंने कई बार टंकी की सफाई और पानी की गुणवत्ता को लेकर शिकायत की थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। लोगों का आरोप है कि निगम की लापरवाही के कारण वे दूषित पानी पीने को मजबूर थे, जिससे बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
    हालांकि इस मामले पर अभी तक नगर निगम की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जिससे लोगों की नाराजगी और बढ़ गई है।
    स्थानीय प्रतिनिधियों को भी नहीं जानकारी
    वार्ड क्रमांक 10 के पार्षद शकील मंसूरी ने बताया कि उन्हें इस घटना की जानकारी नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में उन पर हमला हुआ था और वे फिलहाल अस्पताल में भर्ती हैं। इसलिए वे क्षेत्र की स्थिति पर पूरी तरह अपडेट नहीं हैं।
    पहले भी सामने आ चुकी हैं ऐसी लापरवाहियां
    यह पहली बार नहीं है जब ग्वालियर में पानी की टंकी को लेकर सवाल उठे हों। दो महीने पहले भी मानपुर क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनी टंकी में पांच मरी हुई छिपकलियां मिलने का मामला सामने आया था, जिससे हजारों लोग प्रभावित हुए थे।
    लोगों की मांग: जिम्मेदारों पर हो कार्रवाई
    घटना के बाद क्षेत्रीय लोगों ने टंकी की तुरंत सफाई, पानी की जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।