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  • अनुकंपा नियुक्ति के बाद रिश्वत का आरोप, लोकायुक्त के शिकंजे में आए उपयंत्री पर निगम करेगा कार्रवाई

    अनुकंपा नियुक्ति के बाद रिश्वत का आरोप, लोकायुक्त के शिकंजे में आए उपयंत्री पर निगम करेगा कार्रवाई


    इंदौर । इंदौर नगर निगम में रिश्वत लेते हुए लोकायुक्त पुलिस के हाथों पकड़े गए उपयंत्री हर्ष गहलोत की मुश्किलें अब और बढ़ सकतीI हैं। लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद निगम प्रशासन ने भी उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। अधिकारियों के स्तर पर उसे फील्ड से हटाने को लेकर जल्द निर्णय लिया जा सकता है। हर्ष गहलोत को बुधवार को 5 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ पकड़ा गया था। आरोप है कि उसने टैंकर के बिल का भुगतान कराने के लिए लॉग बुक का सत्यापन करने के बदले रिश्वत की मांग की थी। लोकायुक्त पुलिस ने उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की है।

    लोकायुक्त पुलिस के मुताबिक इस मामले में शिकायतकर्ता सोहेल पटेल नायता मुंडला क्षेत्र का निवासी है और पेटी कॉन्ट्रैक्टर के रूप में काम करता है। उसके टैंकर नगर निगम के काम में लगाए जाते हैं। टैंकरों के बिल का भुगतान कराने के लिए लॉग बुक का सत्यापन जरूरी था। इसी सिलसिले में वह जोन कार्यालय पहुंचा था। आरोप है कि उपयंत्री हर्ष गहलोत ने लॉग बुक का सत्यापन करने के बदले उससे 6 हजार रुपए की रिश्वत मांगी थी। बातचीत के बाद दोनों के बीच 5 हजार रुपए में सौदा तय हुआ। इसके बाद सोहेल ने लोकायुक्त पुलिस से शिकायत की। शिकायत की जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया के बाद बुधवार को जैसे ही हर्ष ने तय रकम ली लोकायुक्त की टीम ने उसे पकड़ लिया।

    इस कार्रवाई के बाद नगर निगम प्रशासन भी मामले को गंभीरता से देख रहा है। निगम के अधिकारी उपयंत्री के खिलाफ विभागीय स्तर पर कार्रवाई करने की तैयारी में हैं। उसे फील्ड की जिम्मेदारी से हटाने पर विचार किया जा रहा है। हालांकि इस संबंध में अंतिम निर्णय होना बाकी है। लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद अब विभागीय जांच और आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया पर भी नजर रहेगी।

    बताया जाता है कि हर्ष गहलोत को पिता की मौत के बाद नगर निगम में अनुकंपा नियुक्ति मिली थी। बाद में कमिश्नर के आदेश पर उसे उपयंत्री के पद पर पदस्थ किया गया। वह जोन 13 में सहायक यंत्री प्रदीप के अधीन काम कर रहा था। नौकरी मिलने के बाद उसने निगम के अलग-अलग क्षेत्रों में जिम्मेदारी संभाली थी। हाल ही में उसका तबादला कर उसे जोन 13 में पदस्थ किया गया था।

    हर्ष की पिछली पदस्थापना वार्ड 75 में थी। यहां एक पार्षद के साथ उसका विवाद होने की बात सामने आई थी। इसके बाद उसका तबादला वार्ड 74 के अंतर्गत आने वाले जोन 13 में कर दिया गया था। अब इसी जोन में रिश्वत लेने के आरोप में लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद उसका नाम फिर चर्चा में है।

    शिकायतकर्ता सोहेल पटेल अपने टैंकरों के भुगतान से जुड़ी लॉग बुक का सत्यापन कराने के लिए लंबे समय से जोन कार्यालय के चक्कर लगा रहा था। इसी काम के बदले रिश्वत मांगने का आरोप है। फिलहाल लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद निगम प्रशासन की अगली कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यदि उसे फील्ड से हटाया जाता है तो यह लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद निगम स्तर पर उठाया गया पहला बड़ा कदम होगा।

  • सिंगरौली FSTP विवाद में जांच के आश्वासन पर टिकी नजरें, निगम प्रशासन से महापौर तक जवाबदेही को लेकर चर्चा तेज

    सिंगरौली FSTP विवाद में जांच के आश्वासन पर टिकी नजरें, निगम प्रशासन से महापौर तक जवाबदेही को लेकर चर्चा तेज

    सिंगरौली । मध्यप्रदेश के सिंगरौली नगर निगम से जुड़े फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट यानी FSTP के संचालन और भुगतान प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने लगे हैं। प्लांट में लगी मशीनों की स्थिति से लेकर कार्यों की निगरानी और भुगतान के आधार तक कई बिंदुओं पर स्पष्ट जानकारी मांगी जा रही है। सरकारी धन से संचालित इस परियोजना को लेकर अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्लांट का काम निर्धारित नियमों के अनुसार हो रहा है या नहीं और इसकी वास्तविक स्थिति की पुष्टि किस स्तर पर की जाती है। मामले में जांच का आश्वासन सामने आने के बाद अब संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल और नगर निगम प्रशासन के आधिकारिक जवाब का इंतजार किया जा रहा है।

    FSTP प्लांट का उद्देश्य मल-मलिन पदार्थ यानी फीकल स्लज के सुरक्षित उपचार और प्रबंधन की व्यवस्था करना है। ऐसी परियोजनाएं शहर की स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। इसलिए इनके संचालन में मशीनों की कार्यक्षमता नियमित निगरानी और निर्धारित मानकों का पालन जरूरी होता है। सिंगरौली में इसी व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। स्वतंत्र इंजीनियर भूपेश राणा और सत्य प्रकाश की भूमिका तथा जिम्मेदारियों को लेकर भी प्रश्न सामने आए हैं। वहीं अजय प्रताप सिंह की ओर से दिल्ली से मॉनिटरिंग किए जाने की चर्चा के बीच यह जानना जरूरी बताया जा रहा है कि प्लांट का भौतिक निरीक्षण कौन करता है और निरीक्षण रिपोर्ट किस आधार पर तैयार होती है। हालांकि इन सवालों और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

    मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू भुगतान प्रक्रिया है। किसी भी सरकारी परियोजना में भुगतान से पहले कार्य की स्थिति और गुणवत्ता का सत्यापन महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में यह स्पष्ट होना चाहिए कि प्लांट में मशीनों के संचालन की जांच कब और किसके द्वारा की गई। कार्यादेश की शर्तें क्या थीं और संबंधित बिलों को स्वीकृति किस आधार पर मिली। निरीक्षण रिपोर्ट और भुगतान से जुड़े दस्तावेज सामने आने पर इन सवालों के जवाब मिलने में मदद मिल सकती है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर किसी अनियमितता को प्रमाणित नहीं माना जा सकता। वास्तविक स्थिति जानने के लिए संबंधित रिकॉर्ड और जिम्मेदार अधिकारियों का पक्ष सामने आना जरूरी है।

    इस पूरे मामले में नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों के साथ निगमाध्यक्ष और महापौर की भूमिका भी चर्चा में है। सार्वजनिक धन और शहर की स्वच्छता व्यवस्था से जुड़े विषय पर नागरिकों को यह जानने की अपेक्षा रहती है कि प्रशासन ने उठे सवालों पर क्या कदम उठाए हैं। अधिकारियों या जनप्रतिनिधियों की ओर से स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आने को लेकर सवाल किए जा रहे हैं। हालांकि चुप्पी को अपने आप में किसी गड़बड़ी का प्रमाण नहीं माना जा सकता। मामले की स्थिति स्पष्ट करने के लिए आधिकारिक जानकारी और दस्तावेजों का सार्वजनिक होना अधिक महत्वपूर्ण है।

    नगर निगम अध्यक्ष देवेश पांडेय ने इस मामले की जांच कराने और संबंधित लोगों के विरुद्ध कार्रवाई का आश्वासन दिया था। अब निगाहें इस बात पर हैं कि जांच कब शुरू होती है और उसके दायरे में किन बिंदुओं को शामिल किया जाता है। मशीनों की वास्तविक स्थिति कार्यों का भौतिक सत्यापन इंजीनियरों की निरीक्षण रिपोर्ट ठेकेदार के बिल और भुगतान स्वीकृति से जुड़े रिकॉर्ड की जांच से मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकती है। जांच निष्पक्ष तरीके से पूरी होने और उसके निष्कर्ष सामने आने पर ही जिम्मेदारी तय करने का आधार बनेगा।

    फिलहाल सिंगरौली के FSTP प्लांट को लेकर तीन प्रमुख सवाल बने हुए हैं। मशीनें किस स्थिति में हैं। कार्यों की निगरानी और गुणवत्ता सत्यापन की जिम्मेदारी किसकी है। भुगतान निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार हुआ या नहीं। इन सवालों के जवाब अटकलों से नहीं बल्कि दस्तावेजों की पड़ताल और आधिकारिक पक्ष से मिलेंगे। अब नगर निगम प्रशासन की कार्रवाई और जांच के निष्कर्षों पर नजर रहेगी।

  • से पहले ग्वालियर में सफाई व्यवस्था सुधारने की तैयारी, ट्रांसफर स्टेशन देर रात तक खुलेंगे, 286 वाहनों से होगा कचरा संग्रहण

    से पहले ग्वालियर में सफाई व्यवस्था सुधारने की तैयारी, ट्रांसफर स्टेशन देर रात तक खुलेंगे, 286 वाहनों से होगा कचरा संग्रहण


    ग्वालियर । दीपावली के त्योहार पर ग्वालियर शहर में घरों और दुकानों से निकलने वाले कचरे का समय पर उठाव सुनिश्चित करने के लिए नगर निगम ने विशेष तैयारी शुरू कर दी है। त्योहार के दौरान बाजारों और रिहायशी इलाकों में कचरे की मात्रा बढ़ने की संभावना को देखते हुए कचरा ट्रांसफर स्टेशन देर रात तक चालू रखने के निर्देश दिए गए हैं। टिपर वाहनों से रात में भी कचरा उठाया जाएगा और जरूरत के अनुसार प्रत्येक वाहन के दो से तीन फेरे लगवाए जाएंगे। नगर निगम का उद्देश्य है कि त्योहार के दौरान किसी भी वार्ड में कचरा जमा न हो और शहर की सफाई व्यवस्था प्रभावित न होने पाए।

    अपर आयुक्त टी. प्रतीक राव ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और डिपो प्रभारियों के साथ सफाई व्यवस्था की समीक्षा करते हुए जरूरी निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि कचरा ट्रांसफर स्टेशन देर रात तक चालू रखे जाएं ताकि टिपर वाहनों को कचरा खाली करने के लिए इंतजार न करना पड़े। जरूरत के अनुसार अतिरिक्त ड्राइवरों की व्यवस्था भी की जाएगी। इससे रात में कचरा संग्रहण का काम जारी रखने और वाहनों के अतिरिक्त फेरे लगाने में मदद मिलने की उम्मीद है। निगम ने कचरा संग्रहण वाहनों को ग्रीन नेट से ढककर ले जाने के निर्देश भी दिए हैं।

    सफाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए नगर निगम 29 नए टिपर वाहन अपने बेड़े में शामिल करने की तैयारी कर रहा है। इन वाहनों के जुड़ने के बाद सक्रिय वाहनों की संख्या बढ़कर 286 होने की बात कही गई है। अतिरिक्त वाहनों से कचरा संग्रहण की क्षमता बढ़ सकती है और अलग-अलग वार्डों में सफाई कार्य को गति मिल सकती है। हालांकि केवल वाहनों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। इसके साथ नियमित फेरे लगाना और कचरे को समय पर ट्रांसफर स्टेशन तक पहुंचाना भी जरूरी रहेगा।

    नगर निगम ने कचरा संग्रहण में लापरवाही रोकने के लिए वाहनों के वजन की जांच करने की व्यवस्था पर भी जोर दिया है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि टिपर वाहन कम कचरा लेकर ट्रांसफर स्टेशन न पहुंचें। इसके लिए कचरा संग्रहण के बाद वाहन का वजन कराया जाएगा और ट्रांसफर स्टेशन पहुंचने पर दोबारा वजन जांचने की व्यवस्था की जाएगी। यदि दोनों वजन में अंतर पाया जाता है तो संबंधित ड्राइवर हेल्पर और स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। इस व्यवस्था का उद्देश्य कचरा संग्रहण की निगरानी करना और जिम्मेदारी तय करना है।

    दीपावली के दौरान बाजारों में खरीदारी और घरों की सफाई के कारण सामान्य दिनों की तुलना में अधिक कचरा निकल सकता है। ऐसे में समय पर कचरा नहीं उठने से सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी बढ़ने की आशंका रहती है। नगर निगम ने इसी चुनौती को देखते हुए रात में भी सफाई कार्य जारी रखने की योजना बनाई है। अतिरिक्त फेरे और देर रात तक खुले रहने वाले ट्रांसफर स्टेशन इस व्यवस्था का अहम हिस्सा होंगे।

    हालांकि शहर के कई इलाकों में पहले से कचरे के ढेर लगे होने और सड़कों पर गंदगी फैलने की शिकायतों के बीच निगम की तैयारियों की प्रभावशीलता पर भी नजर रहेगी। नई व्यवस्था की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि निर्देशों का पालन कितना नियमित रूप से होता है और प्रत्येक वार्ड में कचरे का उठाव समय पर हो पाता है या नहीं। दीपावली से पहले नगर निगम के सामने सफाई व्यवस्था सुधारने और त्योहार के दौरान शहर को साफ रखने की चुनौती है।

  • ग्वालियर में सड़क सुधार पर 108 करोड़ खर्च करने की तैयारी, पुरानी योजनाओं पर सवाल, अब गुणवत्ता की होगी असली परीक्षा

    ग्वालियर में सड़क सुधार पर 108 करोड़ खर्च करने की तैयारी, पुरानी योजनाओं पर सवाल, अब गुणवत्ता की होगी असली परीक्षा


    ग्वालियर। ग्वालियर में बदहाल सड़कों से परेशान लोगों को राहत देने के लिए नगर निगम ने बड़ी कार्ययोजना तैयार की है। शहर के प्रमुख मार्गों का निर्माण और चौड़ीकरण करने के लिए 108 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस योजना के तहत कुल 28 सड़कों को विकसित करने की तैयारी है। हालांकि शहर में सड़क सुधार की नई योजना के बीच निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। कई इलाकों में सड़कें गहरे गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं तो कुछ स्थानों पर निर्माण के बाद सड़कें दोबारा धंसने की शिकायतें सामने आई हैं। सड़क सुधार का मामला हाईकोर्ट तक पहुंचने के बाद अब नगर निगम की कार्ययोजना और उसके क्रियान्वयन पर लोगों की नजरें टिकी हुई हैं।
    नगर निगम की प्रस्तावित योजना में शहर के कई महत्वपूर्ण मार्गों को शामिल किया गया है। इनमें एजी ऑफिस से सिल्वर एस्टेट तक का मार्ग होटल सनबीम से मानसिंह चौराहे तक की सड़क टाइगर चौक से दाने बाबा चौराहा भिंड रोड से सेंट्रल एकेडमी हजीरा चौराहे से बिरला नगर पुल और चार शहर का नाका लधेड़ी से जलालपुर तथा कम्पू थाना से गुड़ी-गुड़ी का नाका तक के मार्ग शामिल हैं। इसके अलावा माधोगंज थाना से हेमसिंह की परेड और महाराज बाड़ा से गश्त का ताजिया तक की सड़क का भी विकास किया जाना है। सहायक नगर निवेशक अमित गुप्ता के अनुसार नगर निगम आयुक्त अभिषेक चौधरी के प्रयासों से प्रदेश सरकार की द्वारका योजना के तहत इन मार्गों के विकास की कार्ययोजना तैयार की गई है। योजना का उद्देश्य शहर में आवागमन को बेहतर बनाना और लोगों को खराब सड़कों से राहत दिलाना है।
    शहर में सड़क निर्माण की जरूरत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि गोले का मंदिर चेतकपुरी शताब्दीपुरम और दीनदयाल नगर जैसे इलाकों में लोग लंबे समय से सड़क संबंधी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। कई स्थानों पर गड्ढों के कारण वाहन चालकों को परेशानी होती है वहीं वाहनों के गुजरने से उड़ने वाली धूल राहगीरों और आसपास रहने वाले लोगों के लिए मुश्किलें बढ़ाती है। सिटी सेंटर जैसे प्रमुख क्षेत्र की सड़कें भी इन समस्याओं से पूरी तरह मुक्त नहीं हैं। सड़क बनने के कुछ समय बाद ही उसके धंसने की शिकायतें निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल खड़े करती हैं। इसके अलावा लोक निर्माण विभाग और नगर निगम के बीच सड़कों की जिम्मेदारी को लेकर भी खींचतान की स्थिति सामने आती रही है।
    ग्वालियर में इससे पहले भी धूल से राहत दिलाने के लिए डस्ट फ्री रोड योजना घोषित की गई थी। इस योजना के तहत करीब 40 किलोमीटर लंबाई की 18 सड़कों को धूल मुक्त बनाने के साथ पानी का छिड़काव करने और एक लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया था। हालांकि इस योजना के परिणामों को लेकर अब भी सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में नई सड़क विकास योजना को लेकर लोगों की अपेक्षाएं बढ़ गई हैं। वहीं फूलबाग से गिरवाई तक प्रस्तावित 926 करोड़ रुपये की एलिवेटेड रोड परियोजना के निर्माण से भी शहर में धूल बढ़ने की शिकायतें सामने आई हैं।
    अब नगर निगम के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल नई सड़कें बनाना नहीं बल्कि उनकी गुणवत्ता सुनिश्चित करना भी है। सड़क निर्माण में मानकों का पालन समय पर मरम्मत और काम की नियमित निगरानी जरूरी होगी। यदि नई सड़कें कुछ ही समय में खराब होने लगती हैं तो करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद लोगों को स्थायी राहत नहीं मिल पाएगी। शहरवासियों को उम्मीद है कि 108 करोड़ रुपये की इस कार्ययोजना से आवागमन सुगम होगा और गड्ढों तथा धूल की समस्या कम होगी। अब देखना होगा कि योजना जमीन पर कितनी प्रभावी साबित होती है और ग्वालियर की सड़कों की स्थिति में वास्तव में कितना सुधार आता है।

  • शिवपुरी में सफाई व्यवस्था की खुली पोल, नालियां जाम और सीवर चैंबर उफनाए, त्योहार से पहले बढ़ी लोगों की चिंता

    शिवपुरी में सफाई व्यवस्था की खुली पोल, नालियां जाम और सीवर चैंबर उफनाए, त्योहार से पहले बढ़ी लोगों की चिंता


    शिवपुरी । मध्य प्रदेश के शिवपुरी में नवरात्र से पहले सफाई व्यवस्था को लेकर लोगों की परेशानी बढ़ गई है। शहर के कई इलाकों में नालियां जाम होने और सीवर चैंबर से गंदगी बाहर आने की शिकायतें सामने आई हैं। दुर्गा पंडालों और धार्मिक आयोजनों की तैयारियों के बीच साफ सफाई की स्थिति लोगों के लिए चिंता का विषय बन गई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर पालिका में शिकायत करने के बाद भी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। ऐसे में वार्ड 30 के लोगों को खुद ही सफाई की जिम्मेदारी उठानी पड़ी। शनिवार को कॉलोनीवासियों ने झाड़ू उठाकर नालियों से कचरा निकालना शुरू कर दिया। इस घटना ने शहर की सफाई व्यवस्था और त्योहारों से पहले की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
    जानकारी के मुताबिक कोलियों के मंदिर के पीछे स्थित नरिया क्षेत्र में लंबे समय से नालियों की सफाई नहीं हुई थी। नालियों में जमा कचरे और कीचड़ के कारण आसपास के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने इस समस्या को लेकर नगर पालिका में शिकायत भी की थी लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लगातार परेशानी झेलने के बाद लोगों ने इंतजार करने के बजाय खुद ही सफाई शुरू कर दी। कॉलोनीवासियों ने नालियों से कचरा निकाला और आसपास के क्षेत्र को साफ करने का प्रयास किया। नवरात्र जैसे धार्मिक पर्व से पहले लोगों को इस तरह सफाई करनी पड़ना व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
    शहर के माधव चौक के पास स्थित मां वैष्णो दरबार की झांकी के आसपास भी गंदगी की समस्या सामने आई है। यहां सीवर चैंबर से गंदगी बाहर आने के कारण स्थानीय लोगों और आयोजन समिति के सदस्यों की परेशानी बढ़ गई है। धार्मिक आयोजन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना रहती है। ऐसे में सीवर की गंदगी और आसपास फैला कचरा लोगों के लिए असुविधा पैदा कर सकता है। समिति के सदस्यों का कहना है कि उन्होंने इस समस्या को लेकर नगर पालिका और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग यानी पीएचई से कई बार शिकायत की है। इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो सका।
    आयोजन समिति के सदस्यों के मुताबिक उन्होंने प्रशासनिक स्तर पर भी अपनी बात पहुंचाने की कोशिश की। वे अपर कलेक्टर से भी मिले थे ताकि सीवर चैंबर की समस्या का जल्द समाधान हो सके। हालांकि उनके अनुसार अब तक राहत नहीं मिली है। समिति के सदस्यों का कहना है कि सीवर चैंबर की सफाई सामान्य झाड़ू या घरेलू उपकरणों से करना संभव नहीं है। इसके लिए संबंधित विभाग की टीम और जरूरी संसाधनों की आवश्यकता होती है। ऐसे में वे चाहते हैं कि जिम्मेदार विभाग समय रहते मौके पर पहुंचकर सफाई कराए।
    यह स्थिति तब सामने आई है जब केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने त्योहारों से पहले सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद शहर के कुछ इलाकों में नालियों और सीवर चैंबर की समस्या बने रहने से स्थानीय लोगों में नाराजगी है। लोगों की मांग है कि नगर पालिका और संबंधित विभाग केवल शिकायत मिलने के बाद ही नहीं बल्कि नियमित रूप से भी सफाई व्यवस्था की निगरानी करें।
    नवरात्र के दौरान दुर्गा पंडालों में श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ जाती है। ऐसे में साफ सफाई और सीवर व्यवस्था दुरुस्त रखना जरूरी है। शिवपुरी के लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन जल्द कार्रवाई कर जाम नालियों और सीवर चैंबर की समस्या दूर करेगा ताकि धार्मिक आयोजन स्वच्छ वातावरण में हो सकें। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग शिकायतों पर कितनी जल्दी कार्रवाई करते हैं और त्योहार से पहले लोगों को राहत मिल पाती है या नहीं।

  • राजबाड़ा में टला बड़ा हादसा, प्लास्टर और लोहे का स्ट्रक्चर गिरने के बाद नगर निगम ने हटाए कमजोर छज्जे

    राजबाड़ा में टला बड़ा हादसा, प्लास्टर और लोहे का स्ट्रक्चर गिरने के बाद नगर निगम ने हटाए कमजोर छज्जे


    इंदौर । इंदौर के ऐतिहासिक राजबाड़ा क्षेत्र में लोगों की सुरक्षा को देखते हुए नगर निगम ने जर्जर बिल्डिंग के छज्जों को हटाने की कार्रवाई की है। गुरुवार दोपहर नगर निगम की टीम बैंक की पुरानी बिल्डिंग के पास पहुंची और पोकलेन मशीन की मदद से बाहर की ओर निकले छज्जों को हटाया। कार्रवाई के दौरान सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए संबंधित सड़क पर कुछ समय के लिए आवाजाही बंद कर दी गई थी। नगर निगम की टीम ने पहली और दूसरी मंजिल के कमजोर हो चुके छज्जों को हटाकर संभावित हादसे का खतरा कम किया।

    बताया गया कि पिछले दिनों डोल ग्यारस के अवसर पर इस बिल्डिंग के छज्जे से प्लास्टर गिरने की घटना सामने आई थी। घटना के बाद नगर निगम ने एहतियात के तौर पर मौके पर बैरिकेडिंग करवा दी थी। इसके बाद भी बिल्डिंग के बाहरी हिस्से को लेकर खतरा बना हुआ था। दो दिन पहले भी इसी स्थान पर लोहे का एक स्ट्रक्चर गिरने की घटना सामने आई थी। राहत की बात यह रही कि दोनों घटनाओं में किसी व्यक्ति को चोट नहीं आई और बड़ा हादसा टल गया।

    बिल्डिंग के बाहर निकले छज्जे लंबे समय से बारिश और समय के असर के कारण कमजोर हो गए थे। छज्जों से प्लास्टर गिरने की शिकायत और जानकारी समय समय पर नगर निगम के सामने आती रही थी। स्थिति को देखते हुए नगर निगम ने बैंक प्रबंधन को नोटिस जारी कर जर्जर छज्जों को हटाने के निर्देश दिए थे। इसके लिए प्रबंधन को निर्धारित समय सीमा भी दी गई थी लेकिन तय अवधि में छज्जों को हटाने का काम पूरा नहीं हो सका।

    समय सीमा में काम पूरा नहीं होने के बाद नगर निगम ने खुद कार्रवाई करने का फैसला लिया। जोन 12 के बिल्डिंग ऑफिसर राहुल रघुवंशी के मुताबिक बैंक की बिल्डिंग की पहली और दूसरी मंजिल पर बाहर की तरफ निकले छज्जे बारिश और लंबे समय के कारण जर्जर हो गए थे। इन छज्जों का प्लास्टर भी कई बार गिर चुका था। लोगों की सुरक्षा को देखते हुए नगर निगम की टीम ने मौके पर पहुंचकर छज्जों को हटाने की कार्रवाई की।

    अधिकारी के मुताबिक बिल्डिंग काफी पुरानी है लेकिन इसका मुख्य ढांचा अभी भी मेंटेन है। समस्या मुख्य रूप से बाहर की ओर निकले छज्जों में थी जो समय के साथ खराब हो गए थे। इसी वजह से बैंक प्रबंधन को पहले ही नोटिस देकर छज्जों को हटाने के लिए कहा गया था। जब निर्धारित समय में कार्रवाई नहीं हुई तो नगर निगम ने अपने स्तर पर जर्जर हिस्सों को हटाया।

    राजबाड़ा क्षेत्र इंदौर के सबसे व्यस्त इलाकों में शामिल है और यहां दिनभर बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही रहती है। ऐसे में किसी जर्जर हिस्से के अचानक गिरने से गंभीर हादसा हो सकता था। नगर निगम की इस कार्रवाई का उद्देश्य ऐसे संभावित खतरे को समय रहते खत्म करना है। कार्रवाई के दौरान सड़क पर आवाजाही रोककर क्षेत्र को सुरक्षित किया गया ताकि मशीन से छज्जे हटाने के दौरान किसी राहगीर या वाहन को नुकसान न पहुंचे।

  • इंदौर के वार्डों में खुली समस्याओं की पोल, नेता प्रतिपक्ष ने जोनल अधिकारियों को मौके पर घेरा

    इंदौर के वार्डों में खुली समस्याओं की पोल, नेता प्रतिपक्ष ने जोनल अधिकारियों को मौके पर घेरा


    इंदौर । इंदौर के कई वार्डों में लंबे समय से अलग अलग तरह की समस्याएं बनी हुई हैं। रहवासी अपनी शिकायतों को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंचते हैं लेकिन कई मामलों में समय पर समाधान नहीं हो पाता। अब इन समस्याओं की वास्तविक स्थिति जानने और उनके निराकरण की प्रक्रिया को तेज करने के लिए नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष सोनिला मिमरोट ने जोन अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत वे खुद उन वार्डों में पहुंच रही हैं जहां समस्याएं अधिक हैं। वहां वार्ड अध्यक्षों और स्थानीय लोगों से चर्चा कर मैदानी स्थिति की जानकारी ली जा रही है। इसके बाद संबंधित जोनल अधिकारियों से मुलाकात कर समस्याओं पर सीधे जवाब मांगा जा रहा है।

    अभियान की शुरुआत जोन 22 से की गई है। यहां नेता प्रतिपक्ष ने जोनल अधिकारी से मुलाकात कर वार्डों में सामने आ रही समस्याओं को लेकर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान ड्रेनेज लाइन पानी बिजली सड़क और नगर निगम की विभिन्न योजनाओं का लाभ नहीं मिलने जैसी शिकायतों को सामने रखा गया। अधिकारियों से यह जानने की कोशिश की गई कि इन समस्याओं का समाधान कब तक किया जाएगा और इसके लिए क्या कार्रवाई की जा रही है।

    सोनिला मिमरोट के अनुसार वार्डों में कई स्थानों पर अनियमितताएं देखने को मिल रही हैं। कुछ जगहों पर लोगों की शिकायतों के बावजूद सुनवाई नहीं होने की बात भी सामने आई है। ऐसे में केवल कार्यालय में बैठकर शिकायतों की जानकारी लेने के बजाय मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति समझने की जरूरत है। इसी उद्देश्य से जोन कार्यालयों तक पहुंचने का अभियान शुरू किया गया है।

    जोन 22 के अंतर्गत आने वाले कुछ वार्डों की स्थिति को लेकर भी अधिकारियों के सामने सवाल रखे गए। बताया गया कि इस क्षेत्र में दो वार्ड ऐसे हैं जो पहले ग्रामीण क्षेत्र का हिस्सा रहे हैं और बाद में शहरी क्षेत्र में शामिल हुए। इन इलाकों में अभी भी कई मूलभूत सुविधाओं का अभाव बताया जा रहा है। कुछ स्थानों पर ड्रेनेज लाइन का काम अधूरा है तो कहीं सड़क जैसी जरूरी सुविधाओं को लेकर लोग परेशान हैं। इन समस्याओं को बिंदुवार अधिकारियों के सामने रखा गया और इनके समाधान की समयसीमा को लेकर जवाब मांगा गया।

    नेता प्रतिपक्ष का कहना है कि जोन अभियान केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा। आगे भी अलग अलग वार्डों में जाकर स्थानीय लोगों और वार्ड अध्यक्षों से समस्याओं की जानकारी ली जाएगी। इसके बाद संबंधित जोनल अधिकारियों से सीधे चर्चा कर शिकायतों के निराकरण की स्थिति जानी जाएगी। इस दौरान अधिकारियों से यह भी पूछा जाएगा कि किसी समस्या के समाधान में देरी क्यों हो रही है और उसे दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

    अभियान के जरिए नगर निगम के स्तर पर वार्डों की समस्याओं को सीधे जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। अब जोन 22 के बाद अन्य जोनों में भी इसी तरह का अभियान चलाने की तैयारी है। इससे स्थानीय समस्याओं की वास्तविक स्थिति सामने आने और उनके समाधान को लेकर अधिकारियों से जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

  • इंदौर में निगम ड्राइवर ने जहर पीने से पहले बनाया VIDEO बोला पैसों के लिए चार लोग कर रहे परेशान अस्पताल में भर्ती

    इंदौर में निगम ड्राइवर ने जहर पीने से पहले बनाया VIDEO बोला पैसों के लिए चार लोग कर रहे परेशान अस्पताल में भर्ती



    इंदौर । इंदौर में नगर निगम के एक ड्राइवर ने शनिवार को जहर पीकर जान देने की कोशिश की। घटना से पहले उसने एक वीडियो बनाया जिसमें उसने उधारी और ब्याज के पैसों को लेकर चार लोगों पर परेशान करने और दबाव बनाने का आरोप लगाया है। जहर पीने के बाद हालत बिगड़ने पर परिजन धर्मेंद्र धारू को एमवाय अस्पताल लेकर पहुंचे जहां उनका इलाज चल रहा है। मामले की जानकारी मिलने के बाद संयोगितागंज पुलिस ने वीडियो और पूरे घटनाक्रम की जांच शुरू कर दी है।

    धर्मेंद्र धारू पिछले करीब 10 साल से इंदौर नगर निगम में ड्राइवर के रूप में काम कर रहे हैं। जहर पीने से पहले बनाए गए वीडियो में उन्होंने पैसों की मांग किए जाने और लगातार परेशान किए जाने की बात कही है। वीडियो में धर्मेंद्र ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों की ओर से उनसे उधारी और ब्याज की रकम को लेकर दबाव बनाया जा रहा था। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले दो दिनों से उन्हें गाड़ी नहीं दी जा रही थी और उन्हें गाड़ी से हटा दिया गया था।

    धर्मेंद्र ने अपने वीडियो में चार लोगों के नाम भी लिए हैं। उन्होंने दुर्गेश शुक्ला योगेश राठौर सहायक सीएस भंवर धावरे और बंटी नाम के व्यक्ति को जिम्मेदार बताया है। बंटी के बारे में उन्होंने कहा कि वह साहब का ड्राइवर है। वीडियो में धर्मेंद्र ने दावा किया कि इन लोगों की ओर से पैसों की मांग की जा रही थी और इसी दबाव के चलते वह यह कदम उठा रहे हैं।

    वीडियो सामने आने के बाद घटना को लेकर कई सवाल खड़े हुए हैं। प्रारंभिक जानकारी में मामला उधारी और ब्याज की रकम से जुड़ा बताया जा रहा है। हालांकि धर्मेंद्र की ओर से लगाए गए आरोपों की अभी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि पैसों के लेनदेन की वास्तविक स्थिति क्या थी और निगम में गाड़ी नहीं दिए जाने का इस पूरे विवाद से क्या संबंध था। इन सभी बिंदुओं की जांच के बाद ही तस्वीर साफ हो सकेगी।

    जहर पीने के बाद धर्मेंद्र की तबीयत बिगड़ गई। परिजनों ने उन्हें तत्काल एमवाय अस्पताल पहुंचाया जहां उन्हें आईसीयू में भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। डॉक्टरों की निगरानी में उनकी स्थिति पर नजर रखी जा रही है। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने मामले को संज्ञान में लिया है।

    संयोगितागंज पुलिस वायरल वीडियो की जांच कर रही है। पुलिस धर्मेंद्र के होश में आने और बयान दर्ज होने के बाद घटना से जुड़े तथ्यों को और स्पष्ट करेगी। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि पैसों के विवाद की वास्तविक स्थिति क्या थी और वीडियो में जिन चार लोगों पर आरोप लगाए गए हैं उनकी इस मामले में क्या भूमिका है। पुलिस वीडियो के साथ अन्य उपलब्ध साक्ष्यों और संबंधित लोगों के बयान भी देखेगी।

    फिलहाल धर्मेंद्र का अस्पताल में इलाज जारी है और पुलिस जांच आगे बढ़ रही है। इस मामले में धर्मेंद्र के बयान और जांच के आधार पर ही आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।

  • गांधीनगर निकाय चुनाव से पहले कांग्रेस ने 44 प्रत्याशियों को सुरक्षित स्थान पर भेजा, बीजेपी ने उठाए सवाल

    गांधीनगर निकाय चुनाव से पहले कांग्रेस ने 44 प्रत्याशियों को सुरक्षित स्थान पर भेजा, बीजेपी ने उठाए सवाल


    नई दिल्ली। गांधीनगर नगर निगम चुनाव में नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद कांग्रेस ने अपने सभी 44 प्रत्याशियों को एक अज्ञात सुरक्षित स्थान पर भेज दिया है। पार्टी ने यह कदम संभावित पोचिंग और राजनीतिक दबाव से प्रत्याशियों को बचाने के लिए उठाया है। कांग्रेस के अनुसार, सभी उम्मीदवार 29 सितंबर तक पार्टी की निगरानी में रहेंगे, क्योंकि इसी दिन नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख है। गुजरात की राजधानी में निकाय चुनाव का प्रचार तेज होने के बीच कांग्रेस के इस कदम से चुनावी गतिविधियों में नया राजनीतिक विवाद सामने आया है।

    कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के नेताओं की ओर से उसके प्रत्याशियों और उनके परिजनों को फोन कर नामांकन वापस लेने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। पार्टी का कहना है कि प्रत्याशियों को डराने-धमकाने और उन पर अनुचित दबाव डालने की कोशिश की जा रही है। कांग्रेस के मुताबिक, संभावित राजनीतिक दबाव और प्रत्याशियों को अपने पक्ष में करने की कोशिशों से बचाने के लिए उन्हें सुरक्षित स्थान पर रखना जरूरी समझा गया। इसी वजह से नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद सभी 44 प्रत्याशियों को गुप्त स्थान पर भेजा गया है।

    दूसरी ओर, बीजेपी ने कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। बीजेपी ने कांग्रेस के इस कदम पर सवाल उठाते हुए पूछा कि अगर पार्टी को अपने ही प्रत्याशियों पर भरोसा है, तो उन्हें इस तरह सुरक्षित स्थान पर रखने की जरूरत क्यों पड़ी। बीजेपी ने कांग्रेस के दावों को स्वीकार नहीं किया और प्रत्याशियों को छिपाकर रखने के फैसले पर प्रतिक्रिया दी। इस बीच बीजेपी के सभी 44 प्रत्याशियों ने अपनी चुनावी तैयारियों को आगे बढ़ाते हुए जनसेवा का संकल्प लिया। विधानसभा परिसर के पास डॉ. बी.आर. अंबेडकर की प्रतिमा के सामने आयोजित कार्यक्रम में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और हर्ष संघवी भी मौजूद रहे। बीजेपी प्रत्याशियों ने शहर के समग्र विकास और जनहित में काम करने का वादा किया।

    गांधीनगर नगर निगम चुनाव में कुल 11 वार्डों की 44 सीटों पर मुकाबला होना है। बीजेपी और कांग्रेस की ओर से दाखिल किए गए सभी नामांकन वैध पाए गए हैं, जबकि आम आदमी पार्टी का एक पर्चा रद्द हुआ है। 29 सितंबर को नाम वापसी की समयसीमा समाप्त होने के बाद चुनावी तस्वीर साफ हो जाएगी। इसके बाद 11 अक्टूबर को मतदान कराया जाएगा और 13 अक्टूबर को मतगणना होगी।

  • 190 प्रतिष्ठान बंद कराने का दावा और जमीनी हकीकत कुछ और: भोपाल की सीलिंग कार्रवाई में खुली दुकानों ने खड़े किए कई सवाल

    190 प्रतिष्ठान बंद कराने का दावा और जमीनी हकीकत कुछ और: भोपाल की सीलिंग कार्रवाई में खुली दुकानों ने खड़े किए कई सवाल


    भोपाल । भोपाल में आवासीय क्षेत्रों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ नगर निगम की कार्रवाई लगातार चर्चा में बनी हुई है। नगर निगम जहां बड़ी संख्या में प्रतिष्ठानों को नोटिस देकर कमर्शियल गतिविधियां बंद कराने का दावा कर रहा है वहीं जमीनी तस्वीर कुछ अलग ही दिखाई दे रही है। शहर के पॉश इलाके अरेरा कॉलोनी समेत कई स्थानों पर ऐसे मामले सामने आए हैं जहां एक ही बिल्डिंग में कुछ दुकानों के बाहर व्यावसायिक गतिविधियां बंद करने का पोस्टर लगा हुआ है जबकि ठीक बगल की दुकानें खुली मिलीं। इस स्थिति ने नगर निगम की कार्रवाई की निष्पक्षता और प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    नगर निगम का दावा है कि अब तक करीब 190 प्रतिष्ठानों ने स्वेच्छा से अपनी व्यावसायिक गतिविधियां बंद कर दी हैं। बंद किए गए प्रतिष्ठानों के बाहर यह सूचना भी लगाई गई है कि नगर निगम के आदेश के अनुसार भवन में कमर्शियल गतिविधियां बंद कर दी गई हैं। हालांकि कई जगह इस दावे और वास्तविक स्थिति में अंतर दिखाई दिया। अरेरा कॉलोनी में एक तीन मंजिला भवन के ग्राउंड फ्लोर पर दो दुकानों के शटर बंद मिले और उन पर बंदी का पोस्टर लगा था लेकिन उसी के पास एक अन्य दुकान खुली हुई दिखाई दी। इसी तरह एक टेलरिंग शॉप के बाहर कारोबार बंद करने का बैनर लगा था लेकिन भवन का गेट खुला मिला जिससे कार्रवाई को लेकर सवाल उठे।

    एक अन्य मामला पहले होटल के रूप में संचालित भवन का है जिसे कार्रवाई के बाद बंद कराया गया। इसके बाद वहां निज निवास का बोर्ड लगा दिया गया। हालांकि स्थानीय स्तर पर यह भी सवाल उठ रहे हैं कि कार्रवाई के बाद संबंधित भवनों की वास्तविक स्थिति की निगरानी कितनी प्रभावी ढंग से की जा रही है। यही वजह है कि नगर निगम की सीलिंग और नोटिस कार्रवाई अब व्यापारियों के साथ-साथ आम लोगों के बीच भी बहस का विषय बन गई है।

    शहर के 10 नंबर मार्केट में भी कार्रवाई को लेकर भेदभाव के आरोप सामने आए हैं। कुछ प्रतिष्ठानों को नोटिस देकर बंद कराया गया जबकि आसपास कई अन्य व्यावसायिक गतिविधियां चलती दिखाई दीं। सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाने वाले पक्ष का कहना है कि कार्रवाई छोटे कारोबारियों तक सीमित दिखाई दे रही है जबकि बड़े प्रतिष्ठानों के खिलाफ समान स्तर पर कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी साक्ष्यों के साथ अपनी बात रखने की तैयारी की जा रही है।

    कार्रवाई के विरोध में व्यापारियों का गुस्सा भी लगातार बढ़ रहा है। बीते दिनों सीलिंग कार्रवाई के विरोध में हजारों व्यापारियों ने प्रदर्शन किया और कई दुकानों को बंद रखा गया। विरोध प्रदर्शन के दौरान शहर के प्रमुख इलाकों में यातायात भी प्रभावित हुआ। इसके बाद कोलार रोड क्षेत्र में भी व्यापारी संगठनों के आह्वान पर बाजार बंद रखा गया। व्यापारियों का कहना है कि अचानक की जा रही कार्रवाई से उनका कारोबार और रोजी रोजगार प्रभावित हो रहा है।

    दरअसल यह पूरा मामला आवासीय भवनों के व्यावसायिक उपयोग और अवैध निर्माण से जुड़ा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के बाद नगर निगम पर कार्रवाई की रिपोर्ट प्रस्तुत करने का दबाव है। इसी कारण शहर में नोटिस और सीलिंग की प्रक्रिया तेज की गई है। रहवासियों का कहना है कि आवासीय क्षेत्रों में बढ़ती कमर्शियल गतिविधियों से ट्रैफिक शोर भीड़ और सुरक्षा संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि नगर निगम की कार्रवाई सभी प्रतिष्ठानों पर समान रूप से होगी या फिर बंदी के पोस्टर और खुली दुकानों का विरोधाभास इस पूरे अभियान पर सवाल खड़े करता रहेगा।