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  • भोपाल में रहवासी इलाकों पर निगम का बड़ा एक्शन: रचना नगर का जूंबा डांस हाउस सील, 2 घंटे में 6 प्रतिष्ठान बंद

    भोपाल में रहवासी इलाकों पर निगम का बड़ा एक्शन: रचना नगर का जूंबा डांस हाउस सील, 2 घंटे में 6 प्रतिष्ठान बंद


    भोपाल  भोपाल में रहवासी इलाकों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ नगर निगम ने अब सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। सोमवार सुबह करीब 9 बजे से शुरू हुई इस कार्रवाई के दौरान रचना नगर में जूंबा डांस हाउस को सील कर दिया गया। इसके अलावा सर्वधर्म बी सेक्टर अरेरा कॉलोनी गौतम नगर और खानूगांव समेत कई इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियां बंद कराई गईं। करीब दो घंटे के भीतर छह प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की गई। निगम की टीमों के पहुंचने से पहले ही कुछ संचालकों ने अपने प्रतिष्ठान खुद बंद कर दिए थे। कार्रवाई के दौरान फिलहाल किसी बड़े हंगामे की सूचना नहीं है।

    रचना नगर में जूंबा डांस हाउस पर सीलिंग की कार्रवाई की गई और भवन पर निगम के आदेश से जुड़ी तख्ती लगाई गई। इसी तरह सर्वधर्म बी सेक्टर स्थित क्लियर होटल को भी बंद कराया गया। गौतम नगर में आवासीय भवन में संचालित एक होटल के संचालक ने खुद ही कमर्शियल गतिविधि बंद कर दी। खानूगांव में भी एक भवन के भीतर चल रही व्यावसायिक गतिविधि को बंद कराया गया। वहीं ई 3 अरेरा कॉलोनी में निगम की टीम ने सीलिंग की कार्रवाई शुरू की। यहां दुकानदारों ने अधिकारियों से कुछ समय की मोहलत मांगी लेकिन निगम अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि पहले ही कई दिनों की मोहलत दी जा चुकी है।

    नगर निगम की इस कार्रवाई के पीछे आवासीय भवनों में व्यावसायिक इस्तेमाल को लेकर चल रहा मामला अहम है। निगम ने 26 अगस्त तक कुल 8264 नोटिस जारी किए थे। इन नोटिसों के बाद संबंधित मामलों का परीक्षण किया गया। इसके बाद कार्रवाई का सिलसिला शुरू हुआ। इससे पहले वार्ड 58 के गौतम नगर स्थित एक रेसिडेंशियल बिल्डिंग में संचालित होटल को भी सील किया जा चुका है। रविवार को कई जगहों पर 24 घंटे के नोटिस दिए गए थे और सोमवार से सीलिंग तथा व्यावसायिक गतिविधियां बंद कराने की कार्रवाई शुरू कर दी गई।

    कार्रवाई को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के इंतजाम भी किए हैं। मिसरोद हबीबगंज रातीबड़ कोहेफिजा गोविंदपुरा ऐशबाग और कोलार थाना क्षेत्रों से पुलिस बल की तैनाती की गई है। अधिकारियों का कहना है कि अलग अलग इलाकों में नोटिस जारी करने के बाद उनके मामलों का परीक्षण किया जा रहा है और नियमों के अनुरूप आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि में सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई भी महत्वपूर्ण है। आवासीय भवनों के व्यावसायिक उपयोग और अवैध निर्माण से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त के पहले सप्ताह में सुनवाई की थी। कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार की ओर से गठित 10 सदस्यीय जांच समिति की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। साथ ही मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से दुकान संचालकों को मिले राहत आदेशों को भी निरस्त कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया था कि उसके निर्देश पर चल रही जांच में किसी तरह का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होनी है और इसी दौरान नगर निगम को अपनी कार्रवाई की रिपोर्ट भी पेश करनी है।

    दूसरी ओर रहवासी इलाकों में रहने वाले लोगों की ओर से भी व्यावसायिक गतिविधियां बंद कराने की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है। रहवासियों का कहना है कि आवासीय क्षेत्रों में कारोबार होने से शोर भीड़ और ट्रैफिक जैसी समस्याएं बढ़ती हैं। इससे सार्वजनिक शांति और सुरक्षा प्रभावित होने की आशंका रहती है। असामाजिक गतिविधियों को लेकर भी चिंता जताई गई है। इसके अलावा स्कूल जाने वाले बच्चों की सुरक्षा पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। ऐसे में निगम की मौजूदा कार्रवाई को आने वाले दिनों में और तेज किए जाने की संभावना है।

  • MP: इंदौर में लोगों की जान से खिलवाड़…. नगर निगम ने स्पीड ब्रेकर की जगह लगाए रंबल स्ट्रिप, रोज रहे हादसे

    MP: इंदौर में लोगों की जान से खिलवाड़…. नगर निगम ने स्पीड ब्रेकर की जगह लगाए रंबल स्ट्रिप, रोज रहे हादसे


    इंदौर।
    नगर निगम (Municipal council) द्वारा शहर के विभिन्न हिस्सों में लगाए जा रहे फोर लेयर रंबल स्ट्रिप (Four-layer rumble strip) वाहन चालकों के लिए हादसों का सबब बन रहे हैं। स्पीड ब्रेकर (Speed ​​breaker) के स्थान पर लगाई जाने वाली यह प्लास्टिक व रबर की रंबल स्ट्रिप लगने के कुछ ही दिनों बाद टूट रही हैं। शहर में अधिकांश स्थानों पर जहां इन्हें स्थापित किया गया था, वहां से ये स्ट्रिप पूरी तरह उखड़ चुकी हैं। इन स्ट्रिप को मजबूत पकड़ देने के लिए लोहे की कीलों से सड़क पर ठोका गया था। अब स्ट्रिप के टूटने और उखड़ने के बाद सड़क पर उभरी हुई नुकीली कीलें राहगीरों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रही हैं। इन उभरी कीलों के कारण आए दिन वाहनों के टायर पंक्चर हो रहे हैं। अचानक सामने दिखने वाली कीलों से बचने की कोशिश में वाहन चालक अनियंत्रित होकर एक-दूसरे से टकरा जाते हैं, जिससे गंभीर दुर्घटनाएं घटित हो रही हैं।


    प्रमुख मार्गों पर उखड़े स्पीड ब्रेकर और फैली कीलें

    एलआईजी चौराहा से लेकर कलश चौराहा तक 4 से ज्यादा स्पीड ब्रेकर बनाए गए हैं, जिनकी ऊंचाई सामान्य मानकों से काफी अधिक है। इन रबर के स्पीड ब्रेकरों को लगाते समय लोहे की कीलें ठोकी गई थीं। समय के साथ रबर के पल्ले उखड़ गए और अब केवल खतरनाक कीलें ही सड़क पर शेष बची हैं। उल्लेखनीय है कि एक पल्ले को कसने के लिए 4 से 6 कीलें ठोकी गई थीं, जो अब बाहर निकल आई हैं। इसी प्रकार पोलो ग्राउंड स्थित सांदिपनी स्कूल के सामने लगाया गया डबल स्पीड ब्रेकर भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है और उसके बीच के बॉक्स पूरी तरह उखड़ गए हैं। एमआर 4 तथा मरीमाता लिंक रोड पर 2 स्थानों पर लगाए गए रंबल स्ट्रिप लगभग पूरी तरह उखड़ चुके हैं। बाणगंगा क्षेत्र में मनोचिकित्सालय से लेकर ओवरब्रिज के बीच 2 स्थानों पर लगे रंबल स्ट्रिप का बड़ा हिस्सा टूट गया है। इसके अलावा एमटीएच कंपाउंड स्थित यातायात थाना के पास और मालवा ब्रिज से लेकर परदेशीपुरा तक 2 स्थानों पर लगाए गए स्पीड ब्रेकर भी उखड़कर जर्जर हो चुके हैं।


    आईडीए चौराहे पर रंबल स्ट्रिप टूटी और वाहन चालक परेशान

    रेसकोर्स रोड पर स्थित इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) चौराहे पर नगर निगम द्वारा फोर लेयर रंबल स्ट्रिप लगाई गई थी, जो घटिया निर्माण के कारण कुछ ही दिनों में टूटने लगी। वर्तमान में यहां की अधिकांश स्ट्रिप टूट चुकी हैं और केवल नुकीली कीलें सड़क पर बाहर निकली हुई हैं। स्थानीय वाहन चालक मुकेश बरोले ने बताया कि रंबल स्ट्रिप की इन उभरी कीलों के कारण उनकी गाड़ी का टायर 3 बार पंक्चर हो चुका है। क्षेत्रीय रहवासियों का कहना है कि इस मार्ग पर फोर लेयर रंबल स्ट्रिप की आवश्यकता ही नहीं थी। लैंटर्न चौराहे और जंजीरावाला चौराहे से आने-जाने वाले यातायात की गति को सामान्य स्पीड ब्रेकर के माध्यम से भी आसानी से नियंत्रित किया जा सकता था। रंबल स्ट्रिप पर वाहन अत्यंत धीमी गति से गुजरते हैं, फिर भी इनका इतनी जल्दी टूट जाना घटिया निर्माण गुणवत्ता की ओर सीधा इशारा करता है।


    नियमों की अनदेखी और सड़क सुरक्षा समिति के निर्णयों पर अमल नहीं

    आर्किटेक्ट अतुल शेठ के अनुसार शहर में स्पीड ब्रेकर का निर्माण करते समय किसी भी निर्धारित तकनीकी नियम व मानक का पालन नहीं किया जाता है। इसके परिणामस्वरूप न केवल आए दिन सड़क हादसे हो रहे हैं, बल्कि वाहनों के झटकों से लोगों को कमर दर्द व अन्य शारीरिक परेशानियां भी झेलनी पड़ रही हैं। अगस्त 2025 में आयोजित सड़क सुरक्षा समिति की आधिकारिक बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया था कि शहर की कॉलोनियों और मुख्य सड़कों से सभी अवैध स्पीड ब्रेकर तत्काल हटाए जाएंगे, परंतु इस निर्णय पर आज तक अमल नहीं हो सका। समिति ने यह प्रावधान भी किया था कि सड़क सुरक्षा समिति की पूर्व मंजूरी के बिना कहीं भी नया स्पीड ब्रेकर नहीं बनाया जा सकेगा और यदि कोई निर्माण होता है तो उसकी संपूर्ण राशि संबंधित निर्माण एजेंसी से वसूल की जाएगी। इस आदेश को पारित हुए 1 वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी धरातल पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है।

  • भोपाल में पानी का संकट, बड़ा तालाब की सप्लाई प्रभावित; प्रभावित क्षेत्रों के लिए टैंकर की व्यवस्था

    भोपाल में पानी का संकट, बड़ा तालाब की सप्लाई प्रभावित; प्रभावित क्षेत्रों के लिए टैंकर की व्यवस्था


    भोपाल  भोपाल के हजारों परिवारों के लिए मंगलवार का दिन पानी की परेशानी लेकर आया है। शहर के प्रमुख जल स्रोत बड़ा तालाब से होने वाली जलापूर्ति आज पूरी तरह प्रभावित रहेगी। नगर निगम ने करबला पंप हाउस और मनुआभान टेकरी स्थित जलशोधन संयंत्र पर आवश्यक मरम्मत और तकनीकी सुधार कार्य के चलते कई इलाकों में पानी की सप्लाई बंद रखने का निर्णय लिया है। अधिकारियों के अनुसार यह कार्य सुबह 9 बजे से शुरू होकर शाम 7 बजे तक चलेगा जिसके कारण दोपहर और शाम के समय होने वाला जलप्रदाय पूरी तरह प्रभावित रहेगा। निगम ने भरोसा दिलाया है कि मरम्मत कार्य पूरा होते ही बुधवार से सभी प्रभावित क्षेत्रों में नियमित रूप से जलापूर्ति बहाल कर दी जाएगी।

    नगर निगम के मुताबिक करबला पंप हाउस पर 800 एमएम व्यास की रॉ वॉटर पाइपलाइन में लीकेज को ठीक किया जाएगा जबकि मनुआभान टेकरी जलशोधन संयंत्र में जरूरी तकनीकी सुधार किए जाएंगे। इन दोनों कार्यों के कारण बड़ा तालाब से जुड़े जल वितरण नेटवर्क को कुछ समय के लिए बंद रखना जरूरी है ताकि मरम्मत सुरक्षित और प्रभावी तरीके से पूरी की जा सके। निगम का कहना है कि यह काम भविष्य में जलापूर्ति को बेहतर और बाधारहित बनाए रखने के उद्देश्य से किया जा रहा है।

    इस शटडाउन का असर करोंद सहित करीब 40 इलाकों पर पड़ेगा। जिन क्षेत्रों में आज पानी की सप्लाई नहीं होगी उनमें ब्लू मून कॉलोनी नवाब कॉलोनी प्रेम नगर सुंदर नगर प्रीत नगर शिवशक्ति नगर शिव नगर फेज 1 2 और 3 कल्याण नगर प्रताप नगर चंदन नगर रासलाखेड़ी बिहारी कॉलोनी पटेल नगर मालीखेड़ी भानपुर रोड हाउसिंग बोर्ड करोंद देवकी नगर अमन कॉलोनी कमल नगर सईद कॉलोनी पंचवटी कॉलोनी रतन कॉलोनी कृषक नगर रिंग गार्डन बृज कॉलोनी गोया कॉलोनी पूजा कॉलोनी शिवानी होम्स नवजीवन कॉलोनी छोला मंदिर सत्यज्ञान नगर शंकर नगर उड़िया बस्ती टिम्बर मार्केट नगर निगम कॉलोनी और चांदबाड़ी सहित अन्य क्षेत्र शामिल हैं। इन इलाकों के लोगों को पानी का उपयोग बेहद सोच-समझकर करने और आवश्यक जरूरतों के लिए पहले से पानी संग्रहित रखने की सलाह दी गई है।

    नगर निगम ने नागरिकों की परेशानी कम करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था भी तैयार की है। अधिकारियों का कहना है कि जिन क्षेत्रों से पानी की मांग प्राप्त होगी वहां निगम के टैंकर भेजे जाएंगे ताकि किसी भी इलाके में पेयजल संकट गहराने न पाए। नागरिक जरूरत पड़ने पर नगर निगम के संबंधित जोन कार्यालय या कंट्रोल रूम से संपर्क कर टैंकर की मांग दर्ज करा सकते हैं। निगम ने स्पष्ट किया है कि मरम्मत कार्य निर्धारित समय पर पूरा होने के बाद बुधवार से सभी प्रभावित क्षेत्रों में पहले की तरह नियमित जलापूर्ति शुरू कर दी जाएगी।

    नगर निगम ने नागरिकों से सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि यह अस्थायी असुविधा भविष्य में बेहतर जलापूर्ति व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है। इसलिए लोग धैर्य रखें और पानी का उपयोग केवल आवश्यक कार्यों के लिए करें ताकि किसी भी परिवार को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

  • अवैध बैनर-होर्डिंग पर हाई कोर्ट सख्त: शिकायत मिलते ही 24 घंटे में कार्रवाई, जिम्मेदारों पर एफआईआर के निर्देश

    अवैध बैनर-होर्डिंग पर हाई कोर्ट सख्त: शिकायत मिलते ही 24 घंटे में कार्रवाई, जिम्मेदारों पर एफआईआर के निर्देश


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश में अब अवैध राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक बैनर-होर्डिंग लगाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने इस मामले में अहम आदेश जारी करते हुए राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि शिकायत मिलने के 24 घंटे के भीतर अवैध बैनर और होर्डिंग हटाए जाएं। इतना ही नहीं, नियमों का उल्लंघन करने वाले लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाए।

    न्यायमूर्ति संदीप एन. भट्ट की एकलपीठ ने यह आदेश वैध होर्डिंग पर बिना अनुमति राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक बैनर लगाए जाने से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान दिया। अदालत ने कहा कि जबलपुर हाई कोर्ट द्वारा वर्ष 2022 में दिए गए निर्देशों और 1 नवंबर 2019 के शासन परिपत्र का अक्षरशः पालन किया जाए। कोर्ट ने साफ किया कि सार्वजनिक स्थानों पर नियमों के विपरीत लगाए गए विज्ञापन और बैनर किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हैं।

    इस फैसले का प्रभाव भोपाल सहित पूरे मध्य प्रदेश में देखने को मिलेगा। भोपाल नगर निगम के अधिकारियों ने भी संकेत दिए हैं कि अदालत के आदेश के अनुरूप विशेष अभियान चलाकर अवैध राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक होर्डिंग हटाए जाएंगे। नगर निगम के अनुसार पहले चरण में सर्वे कराया जाएगा और नियमों का उल्लंघन करने वाले सभी स्ट्रक्चर चिन्हित किए जाएंगे। अयोध्या बायपास क्षेत्र में पहले ही पांच अवैध यूनिपोल हटाए जा चुके हैं। साथ ही संबंधित संस्था की बैंक गारंटी जब्त करने और बकाया शुल्क वसूलने जैसी कार्रवाई भी की गई है।

    आउटडोर मीडिया नियम-2017 के अनुसार बिना अनुमति लगाए गए फ्लेक्स, पोस्टर, कटआउट, सुरक्षा प्रमाणपत्र के बिना स्थापित विज्ञापन संरचनाएं, ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों के प्रतिबंधित दायरे में लगे होर्डिंग, ट्रैफिक संकेतों को ढंकने वाले विज्ञापन, फुटपाथ और सर्विस रोड पर लगाए गए यूनिपोल तथा निर्धारित मानकों से बड़े या असुरक्षित स्ट्रक्चर पूरी तरह अवैध माने जाते हैं।

    भोपाल में वीआईपी रोड, एमपी नगर, लिंक रोड, होशंगाबाद रोड, रायसेन रोड, अयोध्या बायपास, बैरसिया रोड, लालघाटी और गांधी नगर सहित कई प्रमुख क्षेत्रों में बड़ी संख्या में ऐसे होर्डिंग लगे होने की बात सामने आई है जो नियमों के अनुरूप नहीं हैं। अनुमान है कि शहर में लगभग 20 प्रतिशत होर्डिंग किसी न किसी रूप में नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं।

    दरअसल, यह मामला इंदौर की एक विज्ञापन कंपनी द्वारा दायर याचिका के बाद अदालत पहुंचा था। कंपनी का कहना था कि उसने नगर निगम से विधिवत अनुमति लेकर विज्ञापन संरचनाएं स्थापित की हैं, लेकिन उन पर बिना अनुमति राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक बैनर लगा दिए जाते हैं। इससे न केवल संरचनाओं को नुकसान पहुंचता है बल्कि कंपनी को आर्थिक हानि भी होती है।

    अदालत के इस आदेश के बाद उम्मीद की जा रही है कि शहरों में अवैध बैनर और होर्डिंग पर प्रभावी अंकुश लगेगा। इससे यातायात व्यवस्था बेहतर होगी, सार्वजनिक स्थानों की सुंदरता बढ़ेगी, वैध विज्ञापन एजेंसियों के हित सुरक्षित रहेंगे और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई का रास्ता भी साफ होगा

  • विदिशा में कचरा संकट गहराया, डंपिंग साइट तक नहीं पहुंच सके वाहन, शहर में गंदगी का खतरा बढ़ा

    विदिशा में कचरा संकट गहराया, डंपिंग साइट तक नहीं पहुंच सके वाहन, शहर में गंदगी का खतरा बढ़ा


    विदिशा  लगातार हो रही बारिश ने विदिशा शहर की सफाई व्यवस्था पर बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। जतरापुरा स्थित डंपिंग ग्राउंड तक जाने वाला मार्ग पूरी तरह कीचड़ में तब्दील हो गया है जिसके कारण नगर पालिका के कचरा वाहन वहां तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। स्थिति यह है कि शहर से रोजाना एकत्र होने वाला लगभग 35 टन कचरा नगर पालिका परिसर में ही रुका हुआ है और ट्रैक्टर ट्रॉलियां व डंपर खड़े रहने को मजबूर हैं। यदि जल्द वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई तो आने वाले दिनों में शहर में कचरे का ढेर लगने और संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ सकता है।

    नगर पालिका के सफाई कर्मचारी प्रतिदिन शहर के सभी वार्डों घरों बाजारों और सार्वजनिक स्थानों से कचरा एकत्र करते हैं। सामान्य दिनों में करीब छह ट्रैक्टर ट्रॉलियों और चार बड़े डंपरों के माध्यम से इस कचरे को जतरापुरा डंपिंग ग्राउंड तक पहुंचाया जाता है। लेकिन गुरुवार की तेज बारिश के बाद डंपिंग स्थल तक जाने वाला मार्ग पूरी तरह दलदल बन गया जिससे वाहन बीच रास्ते में फंसने लगे और कचरा ले जाना असंभव हो गया। मजबूरी में सभी वाहनों को नगर पालिका परिसर में ही खड़ा करना पड़ा।

    यह समस्या पहली बार सामने नहीं आई है। इससे पहले भी बारिश के मौसम में इसी तरह की स्थिति बन चुकी है जब डंपिंग ग्राउंड तक पहुंचने का रास्ता बंद हो गया था और कई दिनों तक कचरे से भरे वाहन नगर पालिका परिसर में खड़े रहे थे। हालांकि उस समय बारिश थमने के बाद रास्ता खुल गया था और कचरे का निस्तारण किया जा सका था। इस बार भी पूरे मार्ग में कीचड़ होने से वाहन आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं और फिलहाल कोई वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध नहीं है।

    विदिशा नगर पालिका पहले सोठिया क्षेत्र के पास कचरा डंप करती थी लेकिन ग्रामीणों के विरोध और मानव अधिकार आयोग में शिकायत के बाद वहां कचरा डालना बंद कर दिया गया। इसके बाद जतरापुरा और मिर्जापुर क्षेत्रों को अस्थायी डंपिंग स्थल के रूप में उपयोग किया जाने लगा। अब लगातार बारिश के कारण इन स्थानों तक पहुंचना भी मुश्किल हो गया है जिससे नगर पालिका के सामने कचरा प्रबंधन की गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है।

    नगर पालिका के कर्मचारियों का कहना है कि यदि रास्ता जल्द नहीं खुला तो शहर से निकलने वाले दैनिक कचरे का उठाव प्रभावित हो जाएगा। इससे सड़कों और मोहल्लों में गंदगी बढ़ेगी तथा मच्छरों और संक्रमणजनित बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है। बारिश के मौसम में स्वच्छता व्यवस्था बनाए रखना पहले से ही चुनौतीपूर्ण होता है और ऐसे में डंपिंग ग्राउंड तक पहुंच बंद होना हालात को और गंभीर बना सकता है।

    नगर पालिका में नेता प्रतिपक्ष आशीष माहेश्वरी ने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए प्रशासन से तत्काल वैकल्पिक डंपिंग व्यवस्था करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते समाधान नहीं किया गया तो शहर को गंभीर स्वच्छता और स्वास्थ्य संकट का सामना करना पड़ सकता है। वहीं नगर पालिका अधिकारियों का कहना है कि स्थायी डंपिंग ग्राउंड के लिए जिला प्रशासन से भूमि की मांग की गई है। फिलहाल दूसरी जगह तलाशने के साथ स्थायी समाधान की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं ताकि भविष्य में बारिश के दौरान ऐसी स्थिति दोबारा न बने।

  • छात्रों की सुरक्षा से समझौता नहीं देवास में फायर सेफ्टी खामियों पर कोचिंग क्लास सील नगर निगम का अभियान तेज

    छात्रों की सुरक्षा से समझौता नहीं देवास में फायर सेफ्टी खामियों पर कोचिंग क्लास सील नगर निगम का अभियान तेज


    देवास । देवास में छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नगर निगम ने कोचिंग संस्थानों की जांच का विशेष अभियान शुरू किया है। अभियान के दौरान रामनगर चौराहे के पास स्थित डीसी कोचिंग क्लासेस में गंभीर सुरक्षा खामियां मिलने पर नगर निगम ने संस्थान को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया। कार्रवाई के बाद शहर के अन्य कोचिंग संस्थानों में भी हड़कंप की स्थिति बन गई है।

    नगर निगम की टीम ने निरीक्षण के दौरान पाया कि भवन में आपातकालीन निकास के लिए बनाई गई सीढ़ियां और रैंप बेहद खराब स्थिति में थे। ऐसी स्थिति में किसी भी आपातकाल के दौरान छात्रों के सुरक्षित बाहर निकलने में गंभीर खतरा हो सकता था। इसके अलावा कक्षाओं में भी कई आवश्यक सुरक्षा और मूलभूत व्यवस्थाओं का अभाव पाया गया।

    निरीक्षण में सबसे बड़ी लापरवाही फायर सेफ्टी को लेकर सामने आई। संस्थान में आग लगने जैसी आपात स्थिति से निपटने के लिए न तो पर्याप्त अग्निशमन उपकरण उपलब्ध थे और न ही सुरक्षा के आवश्यक इंतजाम किए गए थे। नगर निगम अधिकारियों ने इसे विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा मानते हुए कोचिंग संस्थान को सील करने की कार्रवाई की।

    कार्रवाई के दौरान नगर निगम के अधिकारी जितेंद्र सिसौदिया सहित निगम की टीम मौके पर मौजूद रही। अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा नियमों का पालन सभी शैक्षणिक संस्थानों के लिए अनिवार्य है और किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    डीसी कोचिंग क्लासेस के अलावा नगर निगम की टीम ने शहर के अन्य कोचिंग संस्थानों का भी निरीक्षण किया। इस दौरान संचालकों को भवन सुरक्षा फायर सेफ्टी और आपातकालीन निकास सहित सभी सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जिन संस्थानों में खामियां पाई जाएंगी उनके खिलाफ भी इसी प्रकार की सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    नगर निगम ने कहा कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और विद्यार्थियों की सुरक्षा के साथ किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। प्रशासन ने सभी कोचिंग संचालकों से अपील की है कि वे निर्धारित सुरक्षा मानकों को प्राथमिकता दें और समय रहते आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर लें ताकि भविष्य में किसी अप्रिय घटना से बचा जा सके।

  • इंदौर नगर निगम की अपील आज आखिरी दिन समय पर कर जमा कर पाएं विशेष छूट और बनें शहर विकास के भागीदार

    इंदौर नगर निगम की अपील आज आखिरी दिन समय पर कर जमा कर पाएं विशेष छूट और बनें शहर विकास के भागीदार


    इंदौर । इंदौर नगर निगम की ओर से वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अग्रिम संपत्तिकर और जलकर जमा करने का मंगलवार यानी 30 जून अंतिम दिन है। नगर निगम ने करदाताओं से समय रहते भुगतान करने की अपील की है ताकि वे विशेष छूट का लाभ उठा सकें। अंतिम दिन बड़ी संख्या में लोगों के आने की संभावना को देखते हुए निगम ने सभी कर संग्रह केंद्रों पर आवश्यक व्यवस्थाएं की हैं और काउंटर भी नियमित रूप से संचालित किए जा रहे हैं।

    नगर निगम के अनुसार अग्रिम कर जमा करने वाले नागरिकों को प्रोत्साहन के रूप में संपत्तिकर पर 6.25 प्रतिशत और जलकर पर 6 प्रतिशत की विशेष छूट दी जा रही है। निगम का मानना है कि इस योजना से लोगों को आर्थिक राहत मिलने के साथ नगर निगम के राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी जिससे शहर के विकास कार्यों को गति मिलेगी।

    नगर निगम ने इस वर्ष अग्रिम संपत्तिकर और जलकर संग्रह के लिए 140 करोड़ रुपये का लक्ष्य निर्धारित किया है। राजस्व प्रभारी निरंजन सिंह चौहान ने बताया कि नागरिकों की अच्छी भागीदारी को देखते हुए उम्मीद है कि तय लक्ष्य से भी अधिक कर संग्रह हो सकता है। पिछले वित्तीय वर्ष में अग्रिम कर के रूप में लगभग 103 करोड़ रुपये जमा हुए थे जबकि इस बार उससे कहीं बेहतर परिणाम मिलने की संभावना जताई जा रही है।

    करदाताओं को जागरूक करने के लिए नगर निगम ने पिछले कई दिनों से व्यापक प्रचार अभियान चलाया। शहर के विभिन्न क्षेत्रों में सूचना प्रसारित की गई और नागरिकों से समय पर कर जमा करने की अपील की गई। महापौर पुष्यमित्र भार्गव और नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल ने भी लोगों से आग्रह किया कि वे अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना अपना कर जमा करें और उपलब्ध छूट का पूरा लाभ उठाएं।

    महापौर ने कहा कि समय पर कर जमा करना केवल नागरिक जिम्मेदारी ही नहीं बल्कि शहर के विकास में सहभागिता का भी महत्वपूर्ण माध्यम है। नगर निगम को मिलने वाला राजस्व सड़क निर्माण स्वच्छता पेयजल व्यवस्था उद्यानों के विकास और अन्य बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने में उपयोग किया जाता है। इसलिए नागरिकों का सहयोग शहर की प्रगति के लिए बेहद आवश्यक है।

    नगर निगम ने करदाताओं से अपील की है कि यदि उन्होंने अभी तक अपना अग्रिम संपत्तिकर या जलकर जमा नहीं किया है तो आज ही भुगतान कर विशेष छूट का लाभ उठाएं। अंतिम तिथि के बाद यह छूट उपलब्ध नहीं होगी और सामान्य नियमों के अनुसार कर का भुगतान करना होगा।

  • भोपाल में इंजीनियरिंग की बड़ी चूक! फुटपाथ को ही रेलिंग लगाकर किया बंद, पैदल यात्रियों की बढ़ी परेशानी

    भोपाल में इंजीनियरिंग की बड़ी चूक! फुटपाथ को ही रेलिंग लगाकर किया बंद, पैदल यात्रियों की बढ़ी परेशानी


    भोपाल भोपाल में एक बार फिर खराब इंजीनियरिंग और बिना जमीनी हकीकत को समझे किए गए विकास कार्यों का मामला सामने आया है। शहर के ऐशबाग क्षेत्र में 90 डिग्री ब्रिज के बाद वार्ड क्रमांक 32 में बनाए गए फुटपाथ को इस तरह रेलिंग से घेर दिया गया है कि अब वह पैदल यात्रियों की सुविधा के बजाय उनके लिए परेशानी का कारण बन गया है। जिस फुटपाथ का निर्माण लोगों को सुरक्षित और सुगम आवागमन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया गया था, वह अब किसी बंद पिंजरे जैसा दिखाई दे रहा है।

    सड़क किनारे किए गए सौंदर्यीकरण कार्य के तहत लगभग तीन फीट ऊंची लोहे की जाली लगाई गई है। इस रेलिंग के कारण राहगीरों का सीधे फुटपाथ पर पहुंचना मुश्किल हो गया है। कुछ चुनिंदा स्थानों पर प्रवेश और निकास के लिए कट पॉइंट बनाए गए हैं, लेकिन इनमें से अधिकांश स्थानों पर ठेला संचालकों और अन्य अतिक्रमणकारियों ने कब्जा कर रखा है। परिणामस्वरूप पैदल चलने वाले लोगों को फुटपाथ का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

    कई स्थानों पर स्थिति और भी विचित्र है। फुटपाथ के एक ओर तीन फीट ऊंची लोहे की रेलिंग है, जबकि दूसरी ओर पहले से बनी पक्की दीवार मौजूद है। ऐसे में पैदल यात्री बीच में फंसकर रह जाते हैं और उन्हें सड़क पर चलने के लिए मजबूर होना पड़ता है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि सुरक्षा और सौंदर्यीकरण के नाम पर ऐसा डिजाइन तैयार किया गया है, जिसने मूल उद्देश्य को ही समाप्त कर दिया है।

    क्षेत्रवासियों ने सवाल उठाया है कि जब कोई भी सार्वजनिक परियोजना नागरिकों की सुविधा के लिए बनाई जाती है, तो उसकी डिजाइन और उपयोगिता का आकलन किए बिना मंजूरी कैसे दी जाती है। लोगों का कहना है कि बस या सार्वजनिक परिवहन से उतरने वाले यात्री सीधे फुटपाथ तक नहीं पहुंच सकते। इससे दुर्घटना की आशंका भी बढ़ जाती है। नागरिकों ने इसे सरकारी धन की बर्बादी और योजना निर्माण में गंभीर लापरवाही करार दिया है।

    मामले के सामने आने के बाद नगर निगम के अधिकारियों ने भी संज्ञान लिया है। निगम के कार्यपालन यंत्री (ईई) एन.के. डेहरिया ने बताया कि संबंधित इंजीनियर से जानकारी मांगी गई है कि यह कार्य किस मद और किस प्रक्रिया के तहत स्वीकृत किया गया था। उन्होंने कहा कि यदि जांच में यह पाया जाता है कि फुटपाथ के उपयोग में लोगों को दिक्कत हो रही है तो आवश्यक बदलाव किए जाएंगे। उन्होंने स्वयं स्थल निरीक्षण करने की बात भी कही है।

    वहीं वार्ड की पार्षद आरती अनेजा का कहना है कि क्षेत्र में अतिक्रमण और शराबियों के जमावड़े की समस्या को देखते हुए यह कदम उठाया गया था। ठेकेदार ने आश्वासन दिया था कि रेलिंग लगाने के बावजूद लोगों की आवाजाही प्रभावित नहीं होगी, लेकिन मौके पर पहुंचकर देखने पर स्थिति अलग मिली। पार्षद ने स्पष्ट किया कि यदि वर्तमान डिजाइन लोगों के लिए असुविधाजनक है तो इसमें बदलाव कराया जाएगा।

    यह मामला एक बार फिर इस बात को उजागर करता है कि विकास कार्यों में तकनीकी योजना और जमीनी जरूरतों के बीच तालमेल कितना जरूरी है। यदि परियोजनाएं नागरिकों की सुविधा बढ़ाने के बजाय मुश्किलें खड़ी करने लगें, तो उनकी उपयोगिता पर गंभीर सवाल उठना स्वाभाविक है।

  • जबलपुर में नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी पर ईओडब्ल्यू का शिकंजा, आय से अधिक संपत्ति मामले में घर पर छापा

    जबलपुर में नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी पर ईओडब्ल्यू का शिकंजा, आय से अधिक संपत्ति मामले में घर पर छापा


    जबलपुर जबलपुर में मंगलवार को आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) की टीम ने नगर निगम के प्रभारी सहायक स्वास्थ्य अधिकारी पोला राव के निवास पर छापामार कार्रवाई कर हड़कंप मचा दिया। आय से अधिक संपत्ति की शिकायत मिलने के बाद कोर्ट से सर्च वारंट प्राप्त कर यह कार्रवाई की गई। सुबह शुरू हुई जांच देर तक जारी रही, जिसमें अधिकारियों ने संपत्ति, बैंक खातों और निवेश से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों की पड़ताल की।

    जानकारी के अनुसार, पोला राव वर्तमान में जबलपुर नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग में प्रभारी सहायक स्वास्थ्य अधिकारी के रूप में पदस्थ हैं। मूल रूप से आंध्रप्रदेश निवासी पोला राव का निवास विजय नगर क्षेत्र स्थित मुस्कान प्लाजा में है, जहां ईओडब्ल्यू की टीम ने पहुंचकर तलाशी अभियान शुरू किया। अधिकारियों ने घर के भीतर मौजूद दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड, बीमा पॉलिसियों और अन्य वित्तीय अभिलेखों की जांच की।

    प्रारंभिक जांच में ईओडब्ल्यू को जबलपुर में पोला राव के नाम एक फ्लैट और लगभग 10 हजार वर्गफुट का प्लॉट होने की जानकारी मिली है। इसके अलावा आंध्रप्रदेश में करीब एक एकड़ कृषि भूमि से संबंधित दस्तावेज भी जांच के दौरान सामने आए हैं। अधिकारियों का मानना है कि इन संपत्तियों का वास्तविक मूल्य और उनकी खरीद के स्रोत की जांच करना आवश्यक है।

    ईओडब्ल्यू के अधिकारियों के अनुसार जांच में चार दोपहिया वाहन और एक चारपहिया वाहन की जानकारी भी मिली है, जिनकी अनुमानित कीमत 15 से 16 लाख रुपए बताई जा रही है। टीम ने इन वाहनों से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच शुरू कर दी है। साथ ही बैंक खातों में हुए लेन-देन, निवेश और बीमा योजनाओं से संबंधित अभिलेखों को भी जब्त किया गया है।

    जांच के दौरान अधिकारियों का ध्यान पोला राव के पारिवारिक संबंधों और उनसे जुड़े संपत्ति विवरणों पर भी गया है। ईओडब्ल्यू के अनुसार उनकी बहन और बहनोई भी जबलपुर में निवास करते हैं। उनके मकान और उससे संबंधित दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है। बताया जा रहा है कि संबंधित संपत्ति नजूल भूमि पर बनी हुई है, इसलिए उसके वैधानिक पहलुओं की भी पड़ताल की जा रही है।

    ईओडब्ल्यू के डीएसपी मनजीत सिंह ने बताया कि फिलहाल सभी दस्तावेजों का विश्लेषण किया जा रहा है। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि अधिकारी की घोषित आय और उनके नाम पर मौजूद संपत्तियों के बीच कितना अंतर है। यदि जांच में आय से अधिक संपत्ति के प्रमाण मिलते हैं तो आगे नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    गौरतलब है कि पोला राव वर्तमान में नगर निगम के कई महत्वपूर्ण वार्डों का प्रभार संभाल रहे हैं। ऐसे में उनके खिलाफ हुई यह कार्रवाई शहर में चर्चा का विषय बन गई है। देर शाम तक जारी जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि उनके पास कुल कितनी चल-अचल संपत्ति है और उसका स्रोत क्या है। फिलहाल ईओडब्ल्यू की कार्रवाई जारी है और अधिकारी पूरे मामले की बारीकी से जांच कर रहे हैं।

  • मानसून से पहले निगम का ‘ऑपरेशन डेंजर’ तेज: इंदौर में 100 से अधिक जर्जर इमारतें रडार पर, हादसे रोकने के लिए कार्रवाई शुरू

    मानसून से पहले निगम का ‘ऑपरेशन डेंजर’ तेज: इंदौर में 100 से अधिक जर्जर इमारतें रडार पर, हादसे रोकने के लिए कार्रवाई शुरू


    मध्‍य प्रदेश । मानसून के आगमन से पहले इंदौर नगर निगम ने शहरवासियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए जर्जर और खतरनाक भवनों के खिलाफ व्यापक अभियान शुरू कर दिया है। बारिश के मौसम में पुराने और कमजोर ढांचों के गिरने से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए निगम प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आ रहा है। इसी उद्देश्य से नगर निगम ने ‘ऑपरेशन डेंजर’ के तहत शहरभर में चिन्हित खतरनाक इमारतों पर कार्रवाई तेज कर दी है।

    नगर निगम अधिकारियों के अनुसार शहर के विभिन्न क्षेत्रों में सर्वेक्षण कर ऐसे भवनों की पहचान की गई है, जो अत्यधिक जर्जर स्थिति में हैं और बारिश के दौरान किसी भी समय हादसे का कारण बन सकते हैं। प्रारंभिक सर्वे में 100 से अधिक भवनों को जोखिमपूर्ण श्रेणी में रखा गया है। इन भवनों को नगर निगम की विशेष निगरानी सूची में शामिल किया गया है और संबंधित संपत्ति मालिकों को कानूनी नोटिस भी जारी किए जा चुके हैं।

    नगर निगम के अपर आयुक्त प्रखर सिंह के मुताबिक, अभियान का मुख्य उद्देश्य मानसून के दौरान नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने बताया कि जिन इमारतों की स्थिति अत्यंत खतरनाक पाई गई है, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। कई स्थानों पर निगम की टीमें मौके पर पहुंचकर जर्जर संरचनाओं को हटाने और ध्वस्त करने का कार्य कर रही हैं ताकि किसी अप्रिय घटना की संभावना को पहले ही समाप्त किया जा सके।

    अभियान के तहत शहर के अलग-अलग जोन और वार्डों में निगम की टीमें सक्रिय हैं। तकनीकी विशेषज्ञों की सहायता से भवनों की स्थिति का मूल्यांकन किया जा रहा है और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन का लक्ष्य है कि मानसून पूरी तरह सक्रिय होने से पहले सभी गंभीर रूप से खतरनाक भवनों पर आवश्यक कार्रवाई पूरी कर ली जाए।

    नगर निगम ने नागरिकों से भी सहयोग की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी क्षेत्र में कोई भवन अत्यधिक जर्जर दिखाई देता है या उसकी स्थिति लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है, तो उसकी सूचना तत्काल प्रशासन को दी जानी चाहिए। इसके अलावा जिन मकान मालिकों के भवन कमजोर या क्षतिग्रस्त स्थिति में हैं, उन्हें भी समय रहते आवश्यक मरम्मत या अन्य सुरक्षा उपाय करने की सलाह दी गई है।

    प्रशासन का मानना है कि नागरिकों की सतर्कता और प्रशासन की सक्रियता मिलकर संभावित दुर्घटनाओं को काफी हद तक रोक सकती है। इसी कारण निगम लगातार जागरूकता बढ़ाने के प्रयास भी कर रहा है ताकि लोग जोखिमपूर्ण भवनों के प्रति गंभीरता दिखाएं।

    जर्जर भवनों पर कार्रवाई के साथ-साथ नगर निगम ने मानसून से जुड़ी अन्य चुनौतियों से निपटने की तैयारियां भी तेज कर दी हैं। जलभराव वाले क्षेत्रों की निगरानी, नालों की सफाई, आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था और कंट्रोल रूम की सक्रियता बढ़ाई गई है। निगम का दावा है कि बारिश के मौसम में किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए टीमें चौबीसों घंटे तैयार रहेंगी।

    नगर निगम का कहना है कि सुरक्षित और व्यवस्थित शहर उपलब्ध कराना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसी दिशा में मानसून पूर्व यह विशेष अभियान चलाया जा रहा है ताकि बारिश के दौरान नागरिकों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और संभावित हादसों को समय रहते रोका जा सके।