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  • शिवपुरी नगर पालिका में सात महीने से सम्मेलन नहीं, आपसी खींचतान में करोड़ों के विकास कार्य अटके

    शिवपुरी नगर पालिका में सात महीने से सम्मेलन नहीं, आपसी खींचतान में करोड़ों के विकास कार्य अटके


    शिवपुरी: शहर में नगर पालिका परिषद का सम्मेलन लंबे समय से नहीं होने के कारण विकास कार्यों की मंजूरी और प्रशासनिक फैसलों पर असर पड़ रहा है। नियमानुसार नगर पालिका का साधारण सम्मेलन प्रत्येक दो महीने में आयोजित किया जाना चाहिए, लेकिन शिवपुरी में पिछले सात महीनों से परिषद की बैठक नहीं हुई है। इस स्थिति में शहर से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव स्वीकृति के इंतजार में हैं। नगर पालिका अध्यक्ष और मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) सम्मेलन आयोजित करने के लिए एक-दूसरे को पत्र लिखने की बात कह रहे हैं, लेकिन बैठक की तारीख अब तक तय नहीं हो सकी है।

    नगर पालिका में सम्मेलन नहीं होने की प्रमुख वजह अध्यक्ष और 20 से अधिक विरोधी पार्षदों के बीच लंबे समय से चला आ रहा विवाद बताया जा रहा है। पार्षदों और अध्यक्ष के बीच कुछ मुद्दों पर करीब दो साल से मतभेद हैं। परिषद की बैठकों के दौरान विरोधी पार्षदों के हंगामे और पहले हुए बहिष्कार के कारण भी बैठक आयोजित करने को लेकर मुश्किलें सामने आती रही हैं। इसी राजनीतिक खींचतान के बीच शहर के विकास से जुड़े प्रस्ताव लंबित हैं।

    नगर पालिका के सीएमओ यशवंत राठौर जुलाई में पदस्थ हुए थे। उनके मुताबिक, परिषद सम्मेलन का एजेंडा तैयार कर लिया गया है और बैठक आयोजित करने के संबंध में अध्यक्ष को पत्र भी भेजे जा चुके हैं। उन्होंने जल्द सम्मेलन कराने की बात कही है। दूसरी ओर, नगर पालिका अध्यक्ष का कहना है कि वह सीएमओ को तीन बार पत्र लिखकर सम्मेलन आयोजित करने के लिए कह चुकी हैं। अध्यक्ष के अनुसार, एजेंडे के कुछ बिंदु भी निर्धारित किए जा चुके हैं और उनकी ओर से बैठक बुलाने में कोई बाधा नहीं है। इस तरह दोनों पक्ष सम्मेलन में देरी के लिए अलग-अलग जिम्मेदारी बता रहे हैं।

    प्रस्तावित सम्मेलन में शहर की पेयजल व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल हैं। मड़ीखेड़ा और सतनवाड़ा फिल्टर प्लांट के लिए तीन-तीन मोटरों की दरों को स्वीकृति देने का प्रस्ताव एजेंडे में रखा गया है। इनमें से एक फिल्टर प्लांट की तीन मोटरें आ चुकी हैं और अब उनके संबंध में नगर पालिका से स्वीकृति ली जानी है। इसके अतिरिक्त बस स्टैंड के संचालन के लिए ठेका देने से संबंधित प्रस्ताव भी विचार के लिए रखा गया है।

    वार्ड नंबर 29, 30 और 35 में पानी की टंकियों के निर्माण पर हुए व्यय से संबंधित प्रस्ताव भी सम्मेलन में शामिल किए जाने हैं। शहर में बाजार बैठक की वसूली, सफाई व्यवस्था बेहतर बनाने के लिए दो नई जेसीबी मशीनों की खरीद तथा दो नए डंपर और एक पोकलेन मशीन खरीदने के लिए प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति के मुद्दे भी लंबित एजेंडे का हिस्सा हैं। इन प्रस्तावों पर निर्णय होने से नगर पालिका के संसाधनों और शहर की बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

    इसके अलावा वर्ष 2026-27 में आयोजित होने वाले सिद्धेश्वर वाणगंगा मेले, गांधी पार्क मेले और अन्य मेलों के आयोजन पर भी परिषद में विचार किया जाना है। इन सभी प्रस्तावों पर निर्णय के लिए सम्मेलन आवश्यक है। नगर पालिका में कुछ कार्य बिना पूर्व स्वीकृति के किए जाने और बाद में उनकी मंजूरी लेने की स्थिति भी सामने आई है। इससे परिषद की नियमित बैठक और निर्धारित प्रक्रिया के पालन को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

    नगर पालिका परिषद के वर्तमान कार्यकाल में करीब दस महीने शेष बताए गए हैं। ऐसे में लंबित प्रस्तावों पर निर्णय लेने और विकास कार्यों को गति देने के लिए परिषद तथा पीआईसी की बैठकें समय पर आयोजित करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सम्मेलन में लगातार देरी जारी रहने पर शहर की पेयजल व्यवस्था, सफाई, परिवहन सुविधाओं और अन्य विकास योजनाओं से जुड़े फैसले प्रभावित हो सकते हैं। अब निगाहें इस बात पर हैं कि अध्यक्ष और सीएमओ के बीच पत्राचार के बाद परिषद की बैठक कब आयोजित होती है और लंबित प्रस्तावों पर कब निर्णय लिया जाता है।

  • शिवपुरी में एक काले कुत्ते का आतंक, 35 से ज्यादा लोगों को काटा, बच्चों समेत घायलों से भर गया जिला अस्पताल

    शिवपुरी में एक काले कुत्ते का आतंक, 35 से ज्यादा लोगों को काटा, बच्चों समेत घायलों से भर गया जिला अस्पताल

    मध्य प्रदेश: के शिवपुरी में एक आक्रामक काले कुत्ते ने कई इलाकों में दहशत फैला दी। एक ही कुत्ते ने 35 से ज्यादा लोगों को काटकर घायल कर दिया। घायलों में बच्चों समेत कई लोग शामिल हैं। घटना के बाद बड़ी संख्या में लोग उपचार के लिए जिला अस्पताल पहुंचे, जहां डॉग बाइट के मरीजों को रेबीज के इंजेक्शन लगाए गए।

    बताया गया कि कुत्ते ने अचानक राह चलते लोगों पर हमला करना शुरू कर दिया था। मनियर, गुरुद्वारा चौराहा, लुहारपुरा और पुरानी शिवपुरी के राधा रमण मंदिर क्षेत्र में उसके हमलों की जानकारी सामने आई। अचानक हुए हमलों के कारण स्थानीय लोगों में डर का माहौल बन गया और कई लोग जरूरी काम के लिए भी सतर्क होकर घरों से बाहर निकलते नजर आए।

    मनियर क्षेत्र में करीब पांच लोगों के कुत्ते के काटने की जानकारी सामने आई। घायलों में एक छह साल का बच्चा भी शामिल है। इसके अलावा गुना निवासी राजू, शांति नगर निवासी प्रमोद कुशवाह और मनियर निवासी हृदेश उपाध्याय के भी घायल होने की जानकारी सामने आई है।

    हृदेश उपाध्याय के भाई रूपेश उपाध्याय के मुताबिक, मनियर इलाके में कुत्ते ने अचानक कई लोगों को अपना शिकार बनाया। लगातार हो रहे हमलों के कारण लोगों में भय का माहौल बन गया था। स्थानीय लोगों को आशंका थी कि कुत्ता आगे भी किसी राहगीर पर हमला कर सकता है।

    कुत्ते के हमलों के बाद जिला अस्पताल में डॉग बाइट के मरीजों की संख्या अचानक बढ़ गई। रविवार सुबह तक अस्पताल में 35 नए मरीजों को रेबीज के इंजेक्शन लगाए जा चुके थे। मरीजों की संख्या बढ़ने के बाद अस्पताल प्रशासन ने मामले की जानकारी सिविल सर्जन को दी। कुछ घायलों ने जिला अस्पताल के अलावा निजी अस्पतालों में भी उपचार कराया।

    घटना की जानकारी प्रशासन तक पहुंचने के बाद नगर पालिका भी सक्रिय हो गई। नगर पालिका के सीएमओ यशवंत राठौड़ ने कुत्ते को पकड़ने के लिए टीम को मौके पर भेजा। डॉग स्क्वाड ने अलग-अलग इलाकों में उसकी तलाश शुरू की। टीम ने उन स्थानों पर भी खोजबीन की, जहां कुत्ते के हमले की जानकारी मिली थी।

    काफी तलाश के बाद नगर पालिका की टीम ने आखिरकार काले रंग के कुत्ते को पकड़ लिया। कुत्ते के पकड़े जाने की जानकारी मिलने के बाद प्रभावित इलाकों के लोगों ने राहत की सांस ली। लगातार हो रहे हमलों से परेशान लोगों को इसके बाद कुछ राहत मिली।

    एक ही कुत्ते के हमले में 35 से ज्यादा लोगों के घायल होने की घटना ने शहर में आवारा और आक्रामक कुत्तों की समस्या को लेकर चिंता बढ़ा दी है। स्थानीय लोगों ने ऐसे कुत्तों की पहचान कर उनके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की मांग की है।

    फिलहाल हमलावर कुत्ते को नगर पालिका की टीम ने पकड़ लिया है। वहीं, कुत्ते के काटने से घायल लोगों का उपचार कराया जा रहा है और उन्हें रेबीज से बचाव के लिए जरूरी इंजेक्शन दिए गए हैं। घटना के बाद प्रभावित क्षेत्रों में लोग सतर्क नजर आ रहे हैं।

  • अंधेरे से उजाले तक का सफर, शोभा सिंह पुरवा में रोड लाइट लगने पर लोगों ने जताई खुशी

    अंधेरे से उजाले तक का सफर, शोभा सिंह पुरवा में रोड लाइट लगने पर लोगों ने जताई खुशी


    उत्तरप्रदेश । चित्रकूट धाम कर्वी नगर पालिका परिषद के वार्ड संख्या 21 स्थित शास्त्री नगर की अनुसूचित जाति बस्ती शोभा सिंह पुरवा में विकास कार्यों की रफ्तार लगातार तेज होती जा रही है। लंबे समय तक मूलभूत सुविधाओं के अभाव से जूझने वाली इस बस्ती में अब विकास की नई तस्वीर दिखाई देने लगी है। हाल ही में सड़क किनारे रोड लाइटें लगाए जाने के बाद पूरा इलाका रोशनी से जगमगा उठा है। इससे न केवल वर्षों पुरानी अंधेरे की समस्या दूर हुई है, बल्कि स्थानीय लोगों में सुरक्षा और सुविधा का एहसास भी बढ़ा है। बस्तीवासियों ने इस पहल का स्वागत करते हुए इसे अपने क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक बदलाव बताया है।

    स्थानीय लोगों के अनुसार, पहले रात होते ही पूरा इलाका अंधेरे में डूब जाता था। इससे आवागमन में परेशानी होती थी और महिलाओं, बुजुर्गों तथा बच्चों को विशेष कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। अब रोड लाइटें लगने के बाद रात के समय भी गलियां रोशन रहती हैं, जिससे लोगों की आवाजाही आसान और सुरक्षित हो गई है। नागरिकों का कहना है कि लंबे समय बाद उनकी बस्ती को ऐसी सुविधा मिली है, जिसका इंतजार वर्षों से किया जा रहा था।

    वार्ड के सभासद शंकर प्रसाद यादव ने बताया कि क्षेत्र के समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए चरणबद्ध तरीके से कई जनहितकारी कार्य कराए जा रहे हैं। सबसे पहले जलभराव की समस्या से राहत दिलाने के लिए नाले का निर्माण कराया गया। इसके बाद पूरे क्षेत्र में विद्युतीकरण का कार्य पूरा कराया गया और अब रोड लाइटें लगाकर लोगों को बेहतर रोशनी की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने बताया कि लगभग 15 दिन पहले क्षेत्र में नई पेयजल पाइपलाइन भी बिछाई गई, जिससे लोगों को स्वच्छ पेयजल की सुविधा मिलने लगी है।

    सभासद ने कहा कि उनका प्रयास केवल आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि पात्र परिवारों को सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाना भी है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना, वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन और दिव्यांग पेंशन जैसी योजनाओं से पात्र लोगों को जोड़ने का कार्य लगातार किया जा रहा है ताकि जरूरतमंद परिवारों का जीवन स्तर बेहतर हो सके।

    मोहल्ले के बुजुर्गों और स्थानीय नागरिकों ने बताया कि आजादी के बाद पहली बार उनकी बस्ती में इतने व्यापक स्तर पर विकास कार्य देखने को मिल रहे हैं। पहले जलभराव, अंधेरा और पेयजल जैसी मूलभूत समस्याएं लोगों के लिए बड़ी चुनौती थीं, लेकिन अब स्थिति तेजी से बदल रही है। सड़क पर लगी नई रोड लाइटों ने पूरे इलाके की तस्वीर बदल दी है और लोगों में विश्वास जगा है कि आने वाले समय में अन्य विकास कार्य भी पूरे होंगे।

    क्षेत्रवासियों ने नगर पालिका परिषद और जनप्रतिनिधियों का आभार व्यक्त करते हुए उम्मीद जताई कि विकास का यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। उनका कहना है कि यदि इसी तरह आधारभूत सुविधाओं का विस्तार होता रहा तो शोभा सिंह पुरवा जल्द ही शहर के विकसित मोहल्लों की श्रेणी में शामिल हो जाएगा।

  • डंपिंग यार्ड नहीं तो कचरा कहां जाए? विदिशा में नगर पालिका और रहवासियों के बीच बढ़ा विवाद

    डंपिंग यार्ड नहीं तो कचरा कहां जाए? विदिशा में नगर पालिका और रहवासियों के बीच बढ़ा विवाद


    विदिशा । विदिशा शहर में कचरा निस्तारण की समस्या अब गंभीर संकट का रूप ले चुकी है। स्थायी डंपिंग यार्ड नहीं होने के कारण नगर पालिका के सामने रोजाना शहर से निकलने वाले कचरे के निपटान की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। हालात ऐसे हैं कि जहां भी कचरा डंप करने की कोशिश की जाती है, वहां स्थानीय लोगों का विरोध शुरू हो जाता है। रविवार को भी हर्ष विहार कॉलोनी में ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जब रहवासियों ने कचरा लेकर पहुंचे नगर पालिका के वाहनों को रोक दिया और इलाके में कचरा डालने का विरोध किया।

    रहवासियों का कहना है कि कॉलोनी के पास कचरा डंप होने से पूरे क्षेत्र में तेज दुर्गंध फैल रही है। मक्खियों और मच्छरों की संख्या बढ़ने से संक्रमण और बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। लोगों का आरोप है कि बदबू के कारण घरों में रहना मुश्किल हो गया है और बच्चे, बुजुर्ग तथा मवेशी सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। उनका कहना है कि घरों में भोजन करना भी मुश्किल हो गया है। स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि विरोध करने पर नगर पालिका कर्मचारियों द्वारा एफआईआर कराने की धमकी दी जा रही है।

    दरअसल, जिला प्रशासन ने पहले सोठिया गांव के पास डंपिंग यार्ड के लिए जमीन उपलब्ध कराई थी, लेकिन ग्रामीणों के विरोध के चलते वहां कचरा डालने की व्यवस्था बंद करनी पड़ी। इसके बाद नगर पालिका ने जतरापुरा और मिर्जापुर की खंतियों का विकल्प चुना, लेकिन लगातार बारिश के कारण वहां तक पहुंचने का रास्ता बंद हो गया। नतीजतन शहर से कचरा उठाने की व्यवस्था भी प्रभावित होने लगी और कचरे से भरे ट्रैक्टर-ट्रॉली तथा डंपर नगर पालिका परिसर में ही खड़े रहने लगे।

    इसके बाद नगर पालिका ने सुआखेड़ी, गेहूंखेड़ी और फिर डाबर रोड स्थित एक खंती में कचरा डालने का प्रयास किया, लेकिन हर स्थान पर ग्रामीणों और स्थानीय रहवासियों ने विरोध दर्ज कराया। इससे स्पष्ट हो गया कि शहर में कचरा निस्तारण की समस्या अब केवल सफाई व्यवस्था तक सीमित नहीं रही, बल्कि सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी चिंता का विषय भी बन गई है।

    नगर पालिका का कहना है कि डाबर रोड स्थित खंती के मालिक बंटी रघुवंशी की सहमति से वहां कचरा डाला जा रहा है। कर्मचारियों के अनुसार खंती में कचरा डालने के बाद उसे हाइड्रा मशीन से दबाकर ऊपर मिट्टी की परत डाली जा रही है, ताकि दुर्गंध और प्रदूषण न फैले। उनका दावा है कि कचरा खुले मैदान में नहीं फेंका जा रहा, बल्कि केवल खंती को भरने का काम किया जा रहा है। इसके बावजूद स्थानीय लोगों ने कचरा वाहनों को वहां तक पहुंचने नहीं दिया।

    खंती के मालिक बंटी रघुवंशी का कहना है कि बरसात के दौरान उनकी करीब एक बीघा की खंती पानी से भर जाती है, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। इसी कारण उन्होंने खंती भरवाने की अनुमति दी है। वहीं नगर पालिका का सवाल है कि जब हर स्थान पर विरोध हो रहा है, तो शहर से रोज निकलने वाले कचरे का निस्तारण आखिर कहां किया जाए। अब यह मामला केवल सफाई व्यवस्था का नहीं, बल्कि शहर के लिए स्थायी डंपिंग यार्ड विकसित करने की तत्काल आवश्यकता का संकेत बन गया है।

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  • शिवपुरी में बेखौफ गुंडागर्दी: सरकारी शौचालय बचाने गई नपा टीम पर हमला, FIR न होने से पुलिस पर सवाल

    शिवपुरी में बेखौफ गुंडागर्दी: सरकारी शौचालय बचाने गई नपा टीम पर हमला, FIR न होने से पुलिस पर सवाल


    शिवपुरी । मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाली घटना सामने आई है। देहात थाना क्षेत्र की महल सराय आदिवासी बस्ती में शासकीय शौचालय को तोड़कर अतिक्रमण किए जाने की सूचना पर पहुंची नगर पालिका टीम पर बदमाशों ने हमला कर दिया। कर्मचारियों के साथ न केवल धक्का-मुक्की की गई बल्कि जमकर मारपीट भी की गई। घटना के बाद से नगर पालिका अमले में आक्रोश है और पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

    जानकारी के अनुसार महल सराय आदिवासी बस्ती में बने सरकारी शौचालय को कुछ लोग तोड़कर उस पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे थे। शिकायत मिलने पर नपा अतिक्रमण दस्ता प्रभारी अशोक खरे अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि मौके पर कुछ लोग शासकीय संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहे थे। जब टीम ने उन्हें रोकने का प्रयास किया तो आरोपियों ने अचानक हमला कर दिया। कर्मचारियों के साथ मारपीट की गई और उन्हें मौके से खदेड़ने की कोशिश की गई।

    घटना के बाद घायल कर्मचारियों ने देहात थाना पहुंचकर लिखित शिकायत दी। पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी सामने आया है जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में स्पष्ट रूप से मारपीट और हंगामा दिखाई दे रहा है। इसके बावजूद अब तक आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज न किए जाने की बात सामने आ रही है जिससे देहात थाना पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।

    नगर पालिका कर्मचारियों का कहना है कि जब शासकीय संपत्ति को बचाने गए कर्मचारियों पर खुलेआम हमला होता है और उसके बाद भी त्वरित कार्रवाई नहीं होती तो इससे असामाजिक तत्वों के हौसले बुलंद होते हैं। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने फिलहाल केवल आवेदन लिया है लेकिन प्रकरण दर्ज करने में देरी की जा रही है।

    स्थानीय लोगों का भी कहना है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो भविष्य में ऐसी घटनाएं बढ़ सकती हैं। प्रशासन के सामने अब चुनौती यह है कि सरकारी संपत्ति की सुरक्षा और कर्मचारियों की सुरक्षा दोनों सुनिश्चित की जाएं।