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  • अंधेरे से उजाले तक का सफर, शोभा सिंह पुरवा में रोड लाइट लगने पर लोगों ने जताई खुशी

    अंधेरे से उजाले तक का सफर, शोभा सिंह पुरवा में रोड लाइट लगने पर लोगों ने जताई खुशी


    उत्तरप्रदेश । चित्रकूट धाम कर्वी नगर पालिका परिषद के वार्ड संख्या 21 स्थित शास्त्री नगर की अनुसूचित जाति बस्ती शोभा सिंह पुरवा में विकास कार्यों की रफ्तार लगातार तेज होती जा रही है। लंबे समय तक मूलभूत सुविधाओं के अभाव से जूझने वाली इस बस्ती में अब विकास की नई तस्वीर दिखाई देने लगी है। हाल ही में सड़क किनारे रोड लाइटें लगाए जाने के बाद पूरा इलाका रोशनी से जगमगा उठा है। इससे न केवल वर्षों पुरानी अंधेरे की समस्या दूर हुई है, बल्कि स्थानीय लोगों में सुरक्षा और सुविधा का एहसास भी बढ़ा है। बस्तीवासियों ने इस पहल का स्वागत करते हुए इसे अपने क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक बदलाव बताया है।

    स्थानीय लोगों के अनुसार, पहले रात होते ही पूरा इलाका अंधेरे में डूब जाता था। इससे आवागमन में परेशानी होती थी और महिलाओं, बुजुर्गों तथा बच्चों को विशेष कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। अब रोड लाइटें लगने के बाद रात के समय भी गलियां रोशन रहती हैं, जिससे लोगों की आवाजाही आसान और सुरक्षित हो गई है। नागरिकों का कहना है कि लंबे समय बाद उनकी बस्ती को ऐसी सुविधा मिली है, जिसका इंतजार वर्षों से किया जा रहा था।

    वार्ड के सभासद शंकर प्रसाद यादव ने बताया कि क्षेत्र के समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए चरणबद्ध तरीके से कई जनहितकारी कार्य कराए जा रहे हैं। सबसे पहले जलभराव की समस्या से राहत दिलाने के लिए नाले का निर्माण कराया गया। इसके बाद पूरे क्षेत्र में विद्युतीकरण का कार्य पूरा कराया गया और अब रोड लाइटें लगाकर लोगों को बेहतर रोशनी की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने बताया कि लगभग 15 दिन पहले क्षेत्र में नई पेयजल पाइपलाइन भी बिछाई गई, जिससे लोगों को स्वच्छ पेयजल की सुविधा मिलने लगी है।

    सभासद ने कहा कि उनका प्रयास केवल आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि पात्र परिवारों को सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाना भी है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना, वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन और दिव्यांग पेंशन जैसी योजनाओं से पात्र लोगों को जोड़ने का कार्य लगातार किया जा रहा है ताकि जरूरतमंद परिवारों का जीवन स्तर बेहतर हो सके।

    मोहल्ले के बुजुर्गों और स्थानीय नागरिकों ने बताया कि आजादी के बाद पहली बार उनकी बस्ती में इतने व्यापक स्तर पर विकास कार्य देखने को मिल रहे हैं। पहले जलभराव, अंधेरा और पेयजल जैसी मूलभूत समस्याएं लोगों के लिए बड़ी चुनौती थीं, लेकिन अब स्थिति तेजी से बदल रही है। सड़क पर लगी नई रोड लाइटों ने पूरे इलाके की तस्वीर बदल दी है और लोगों में विश्वास जगा है कि आने वाले समय में अन्य विकास कार्य भी पूरे होंगे।

    क्षेत्रवासियों ने नगर पालिका परिषद और जनप्रतिनिधियों का आभार व्यक्त करते हुए उम्मीद जताई कि विकास का यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। उनका कहना है कि यदि इसी तरह आधारभूत सुविधाओं का विस्तार होता रहा तो शोभा सिंह पुरवा जल्द ही शहर के विकसित मोहल्लों की श्रेणी में शामिल हो जाएगा।

  • डंपिंग यार्ड नहीं तो कचरा कहां जाए? विदिशा में नगर पालिका और रहवासियों के बीच बढ़ा विवाद

    डंपिंग यार्ड नहीं तो कचरा कहां जाए? विदिशा में नगर पालिका और रहवासियों के बीच बढ़ा विवाद


    विदिशा । विदिशा शहर में कचरा निस्तारण की समस्या अब गंभीर संकट का रूप ले चुकी है। स्थायी डंपिंग यार्ड नहीं होने के कारण नगर पालिका के सामने रोजाना शहर से निकलने वाले कचरे के निपटान की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। हालात ऐसे हैं कि जहां भी कचरा डंप करने की कोशिश की जाती है, वहां स्थानीय लोगों का विरोध शुरू हो जाता है। रविवार को भी हर्ष विहार कॉलोनी में ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जब रहवासियों ने कचरा लेकर पहुंचे नगर पालिका के वाहनों को रोक दिया और इलाके में कचरा डालने का विरोध किया।

    रहवासियों का कहना है कि कॉलोनी के पास कचरा डंप होने से पूरे क्षेत्र में तेज दुर्गंध फैल रही है। मक्खियों और मच्छरों की संख्या बढ़ने से संक्रमण और बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। लोगों का आरोप है कि बदबू के कारण घरों में रहना मुश्किल हो गया है और बच्चे, बुजुर्ग तथा मवेशी सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। उनका कहना है कि घरों में भोजन करना भी मुश्किल हो गया है। स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि विरोध करने पर नगर पालिका कर्मचारियों द्वारा एफआईआर कराने की धमकी दी जा रही है।

    दरअसल, जिला प्रशासन ने पहले सोठिया गांव के पास डंपिंग यार्ड के लिए जमीन उपलब्ध कराई थी, लेकिन ग्रामीणों के विरोध के चलते वहां कचरा डालने की व्यवस्था बंद करनी पड़ी। इसके बाद नगर पालिका ने जतरापुरा और मिर्जापुर की खंतियों का विकल्प चुना, लेकिन लगातार बारिश के कारण वहां तक पहुंचने का रास्ता बंद हो गया। नतीजतन शहर से कचरा उठाने की व्यवस्था भी प्रभावित होने लगी और कचरे से भरे ट्रैक्टर-ट्रॉली तथा डंपर नगर पालिका परिसर में ही खड़े रहने लगे।

    इसके बाद नगर पालिका ने सुआखेड़ी, गेहूंखेड़ी और फिर डाबर रोड स्थित एक खंती में कचरा डालने का प्रयास किया, लेकिन हर स्थान पर ग्रामीणों और स्थानीय रहवासियों ने विरोध दर्ज कराया। इससे स्पष्ट हो गया कि शहर में कचरा निस्तारण की समस्या अब केवल सफाई व्यवस्था तक सीमित नहीं रही, बल्कि सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी चिंता का विषय भी बन गई है।

    नगर पालिका का कहना है कि डाबर रोड स्थित खंती के मालिक बंटी रघुवंशी की सहमति से वहां कचरा डाला जा रहा है। कर्मचारियों के अनुसार खंती में कचरा डालने के बाद उसे हाइड्रा मशीन से दबाकर ऊपर मिट्टी की परत डाली जा रही है, ताकि दुर्गंध और प्रदूषण न फैले। उनका दावा है कि कचरा खुले मैदान में नहीं फेंका जा रहा, बल्कि केवल खंती को भरने का काम किया जा रहा है। इसके बावजूद स्थानीय लोगों ने कचरा वाहनों को वहां तक पहुंचने नहीं दिया।

    खंती के मालिक बंटी रघुवंशी का कहना है कि बरसात के दौरान उनकी करीब एक बीघा की खंती पानी से भर जाती है, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। इसी कारण उन्होंने खंती भरवाने की अनुमति दी है। वहीं नगर पालिका का सवाल है कि जब हर स्थान पर विरोध हो रहा है, तो शहर से रोज निकलने वाले कचरे का निस्तारण आखिर कहां किया जाए। अब यह मामला केवल सफाई व्यवस्था का नहीं, बल्कि शहर के लिए स्थायी डंपिंग यार्ड विकसित करने की तत्काल आवश्यकता का संकेत बन गया है।

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  • शिवपुरी में बेखौफ गुंडागर्दी: सरकारी शौचालय बचाने गई नपा टीम पर हमला, FIR न होने से पुलिस पर सवाल

    शिवपुरी में बेखौफ गुंडागर्दी: सरकारी शौचालय बचाने गई नपा टीम पर हमला, FIR न होने से पुलिस पर सवाल


    शिवपुरी । मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाली घटना सामने आई है। देहात थाना क्षेत्र की महल सराय आदिवासी बस्ती में शासकीय शौचालय को तोड़कर अतिक्रमण किए जाने की सूचना पर पहुंची नगर पालिका टीम पर बदमाशों ने हमला कर दिया। कर्मचारियों के साथ न केवल धक्का-मुक्की की गई बल्कि जमकर मारपीट भी की गई। घटना के बाद से नगर पालिका अमले में आक्रोश है और पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

    जानकारी के अनुसार महल सराय आदिवासी बस्ती में बने सरकारी शौचालय को कुछ लोग तोड़कर उस पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे थे। शिकायत मिलने पर नपा अतिक्रमण दस्ता प्रभारी अशोक खरे अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि मौके पर कुछ लोग शासकीय संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहे थे। जब टीम ने उन्हें रोकने का प्रयास किया तो आरोपियों ने अचानक हमला कर दिया। कर्मचारियों के साथ मारपीट की गई और उन्हें मौके से खदेड़ने की कोशिश की गई।

    घटना के बाद घायल कर्मचारियों ने देहात थाना पहुंचकर लिखित शिकायत दी। पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी सामने आया है जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में स्पष्ट रूप से मारपीट और हंगामा दिखाई दे रहा है। इसके बावजूद अब तक आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज न किए जाने की बात सामने आ रही है जिससे देहात थाना पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।

    नगर पालिका कर्मचारियों का कहना है कि जब शासकीय संपत्ति को बचाने गए कर्मचारियों पर खुलेआम हमला होता है और उसके बाद भी त्वरित कार्रवाई नहीं होती तो इससे असामाजिक तत्वों के हौसले बुलंद होते हैं। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने फिलहाल केवल आवेदन लिया है लेकिन प्रकरण दर्ज करने में देरी की जा रही है।

    स्थानीय लोगों का भी कहना है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो भविष्य में ऐसी घटनाएं बढ़ सकती हैं। प्रशासन के सामने अब चुनौती यह है कि सरकारी संपत्ति की सुरक्षा और कर्मचारियों की सुरक्षा दोनों सुनिश्चित की जाएं।