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  • कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के सितारों का कमाल, राष्ट्रपति से लेकर रक्षा मंत्री तक ने दी बधाई, कहा- आपने रचा नया इतिहास

    कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के सितारों का कमाल, राष्ट्रपति से लेकर रक्षा मंत्री तक ने दी बधाई, कहा- आपने रचा नया इतिहास


    नई दिल्ली।  कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन लगातार देश का गौरव बढ़ा रहा है। सातवें दिन भारत के एथलीटों ने एक बार फिर अपनी प्रतिभा और दमदार प्रदर्शन से दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा। पुरुषों की पैरा 100 मीटर टी47 स्पर्धा में दिलीप महादु गावित ने स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया जबकि मोहम्मद बासिल ने रजत पदक अपने नाम किया। वहीं पुरुषों की लंबी कूद स्पर्धा में मुरली श्रीशंकर ने शानदार प्रदर्शन करते हुए लगातार दूसरे कॉमनवेल्थ गेम्स में रजत पदक जीतकर अपनी निरंतरता साबित की। इन ऐतिहासिक उपलब्धियों पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु सहित देश के कई वरिष्ठ नेताओं ने खिलाड़ियों को बधाई दी और उनके प्रदर्शन को भारतीय खेलों के लिए प्रेरणादायक बताया।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर दिलीप महादु गावित और मोहम्मद बासिल को बधाई देते हुए कहा कि भारतीय पैरा एथलेटिक्स ने कॉमनवेल्थ गेम्स में एक नया और यादगार अध्याय लिखा है। उन्होंने कहा कि दिलीप का स्वर्ण और बासिल का रजत पदक भारतीय पैरा एथलेटिक्स के लिए बड़ी उपलब्धि है। राष्ट्रपति ने दोनों खिलाड़ियों के दृढ़ संकल्प और उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना करते हुए विश्वास जताया कि वे भविष्य में भी देश का नाम रोशन करते रहेंगे और नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को प्रेरित करेंगे।

    राष्ट्रपति ने मुरली श्रीशंकर की भी जमकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि लगातार दूसरे कॉमनवेल्थ गेम्स में रजत पदक जीतना असाधारण उपलब्धि है। यह उनकी मेहनत निरंतरता और खेल के प्रति समर्पण का प्रमाण है। उन्होंने श्रीशंकर के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि पूरा देश उनकी सफलता पर गर्व महसूस कर रहा है।

    केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने भी तीनों खिलाड़ियों की उपलब्धियों को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि पुरुष पैरा 100 मीटर टी47 स्पर्धा में भारत का वन टू फिनिश भारतीय खेल इतिहास का गर्व का क्षण है। उन्होंने विशेष रूप से दिलीप गावित की सराहना करते हुए कहा कि वे कॉमनवेल्थ गेम्स में एथलेटिक्स का स्वर्ण जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष पैरा एथलीट बन गए हैं। यह उपलब्धि भारतीय पैरा खेलों के लिए मील का पत्थर है। वहीं उन्होंने मुरली श्रीशंकर की 8.09 मीटर की शानदार छलांग की भी प्रशंसा करते हुए इसे भारतीय एथलेटिक्स के लिए गौरवपूर्ण पल बताया।

    केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी मुरली श्रीशंकर को बधाई देते हुए कहा कि लगातार दो कॉमनवेल्थ गेम्स में रजत पदक जीतना उनकी अद्भुत निरंतरता और मानसिक मजबूती का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि गंभीर घुटने की चोट से उबरकर इतनी शानदार वापसी करना हर खिलाड़ी के लिए प्रेरणा का विषय है। उनकी सफलता देशभर के युवा खिलाड़ियों के लिए एक मिसाल है।

    दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी दिलीप महादु गावित और मोहम्मद बासिल को बधाई देते हुए कहा कि दोनों खिलाड़ियों ने भारत को ऐतिहासिक वन टू फिनिश दिलाकर देश का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि दोनों एथलीटों की यह उपलब्धि भारतीय पैरा एथलेटिक्स के स्वर्णिम भविष्य की झलक है और आने वाले वर्षों में उनसे और भी बड़ी सफलताओं की उम्मीद है।

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों के इस शानदार प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया है कि देश के एथलीट अब वैश्विक मंच पर लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं। इन खिलाड़ियों की मेहनत और उपलब्धियां न केवल भारत के लिए गर्व का विषय हैं बल्कि आने वाली पीढ़ियों को बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने की प्रेरणा भी दे रही हैं।

  • ग्लासगो में भारत का तिरंगा बुलंद गोल्ड सिल्वर की बरसात दिलीप गावित और श्रीशंकर चमके बॉक्सिंग में भी बढ़ीं पदकों की उम्मीदें

    ग्लासगो में भारत का तिरंगा बुलंद गोल्ड सिल्वर की बरसात दिलीप गावित और श्रीशंकर चमके बॉक्सिंग में भी बढ़ीं पदकों की उम्मीदें

    नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। ग्लासगो में आयोजित खेलों के सातवें दिन भारत ने एथलेटिक्स और पैरा एथलेटिक्स में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए देश का गौरव बढ़ाया। पैरा एथलीट दिलीप महादु गावित ने पुरुषों की 100 मीटर टी47 स्पर्धा में शानदार दौड़ लगाते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया। उन्होंने 10.71 सेकंड का समय निकालते हुए नया गेम्स रिकॉर्ड भी बनाया। इस ऐतिहासिक जीत के साथ वह कॉमनवेल्थ गेम्स की पैरा ट्रैक स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष एथलीट बन गए। वहीं उनके साथी मोहम्मद बासिल ने 10.83 सेकंड के साथ सिल्वर जीतकर भारत को शानदार वन टू फिनिश दिलाई।

    भारत की सफलता का सिलसिला यहीं नहीं रुका। स्टार लॉन्ग जंपर मुरली श्रीशंकर ने पुरुषों की लंबी कूद स्पर्धा में 8.09 मीटर की सर्वश्रेष्ठ छलांग लगाकर सिल्वर मेडल अपने नाम किया। यह कॉमनवेल्थ गेम्स में उनका लगातार दूसरा सिल्वर मेडल है। इससे पहले उन्होंने बर्मिंघम 2022 में भी रजत पदक जीता था। फाइनल मुकाबले में जमैका के ताजे गेल ने 8.15 मीटर की छलांग लगाकर गोल्ड हासिल किया जबकि स्कॉटलैंड के स्टीफन मैकेंजी ने ब्रॉन्ज जीता। श्रीशंकर ने पूरे मुकाबले में शानदार निरंतरता दिखाई और अंतिम प्रयास तक पदक की दौड़ में मजबूती से बने रहे।

    एथलेटिक्स के अलावा भारतीय मुक्केबाजों ने भी शानदार प्रदर्शन किया। भारतीय बॉक्सिंग दल के सभी 10 खिलाड़ियों ने अपने अपने मुकाबले जीतकर सेमीफाइनल में जगह बना ली है। कॉमनवेल्थ गेम्स के नियमों के अनुसार सेमीफाइनल में पहुंचने वाला प्रत्येक खिलाड़ी कम से कम कांस्य पदक का दावेदार बन जाता है। इस तरह भारत ने मुक्केबाजी में कम से कम 10 पदक पहले ही सुनिश्चित कर लिए हैं जो बर्मिंघम 2022 के प्रदर्शन से भी बेहतर उपलब्धि मानी जा रही है।

    इन शानदार प्रदर्शनों के बाद भारत की पदक तालिका भी मजबूत हुई है। देश के खाते में अब 15 पदक हो चुके हैं जिनमें 3 स्वर्ण 9 रजत और 3 कांस्य पदक शामिल हैं। एथलेटिक्स और पैरा एथलेटिक्स में खिलाड़ियों की निरंतर सफलता ने भारतीय दल का मनोबल और बढ़ा दिया है।

    दिलीप गावित की ऐतिहासिक जीत और श्रीशंकर की शानदार छलांग ने यह साबित कर दिया कि भारतीय एथलेटिक्स लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। वहीं मुक्केबाजों का दमदार प्रदर्शन आने वाले दिनों में भारत के पदकों की संख्या और बढ़ाने की उम्मीद जगा रहा है। ग्लासगो से लगातार मिल रही इन सफलताओं ने भारतीय खेल प्रेमियों का उत्साह चरम पर पहुंचा दिया है और अब सभी की नजर आगामी फाइनल मुकाबलों पर टिकी हुई है जहां भारत के पास कई और पदक जीतने का सुनहरा अवसर होगा।

  • कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में लंबी कूद में चमके मुरली श्रीशंकर 8.09 मीटर की छलांग लगाकर भारत को दिलाया सिल्वर

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में लंबी कूद में चमके मुरली श्रीशंकर 8.09 मीटर की छलांग लगाकर भारत को दिलाया सिल्वर


    नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय एथलेटिक्स का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। भारत के स्टार लॉन्ग जंपर मुरली श्रीशंकर ने पुरुषों की लंबी कूद स्पर्धा में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए देश को सिल्वर मेडल दिलाया। ग्लासगो में आयोजित फाइनल मुकाबले में श्रीशंकर ने 8.09 मीटर की शानदार छलांग लगाकर दूसरा स्थान हासिल किया और एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का गौरव बढ़ाया।

    केरल के पलक्कड़ के रहने वाले 27 वर्षीय श्रीशंकर ने प्रतियोगिता की शुरुआत 8.03 मीटर की छलांग से की। इसके बाद दूसरे प्रयास में उन्होंने 8.09 मीटर की दूरी तय की जो उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन साबित हुआ। इसके बाद कुछ प्रयास फाउल रहे लेकिन उन्होंने आत्मविश्वास बनाए रखा और अंतिम दो प्रयासों में 7.94 मीटर तथा 7.97 मीटर की छलांग लगाकर अपना अभियान समाप्त किया। पूरे मुकाबले के दौरान वह पदक की दौड़ में मजबूती से बने रहे।

    यह उपलब्धि श्रीशंकर के करियर की एक और बड़ी सफलता है। इससे पहले उन्होंने 2022 के बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में भी सिल्वर मेडल जीतकर इतिहास रचा था। वह कॉमनवेल्थ गेम्स में पुरुषों की लंबी कूद में पदक जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट बने थे। अब ग्लासगो में भी उन्होंने लगातार दूसरी बार सिल्वर जीतकर अपनी प्रतिभा और निरंतरता को साबित कर दिया है।

    इस मुकाबले में जमैका के विश्व चैंपियन ताजे गेल ने 8.15 मीटर की छलांग लगाकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया जबकि स्कॉटलैंड के स्टीफन मैकेंजी ने 8.08 मीटर की छलांग के साथ ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया। मुकाबला बेहद रोमांचक रहा क्योंकि चार खिलाड़ियों ने आठ मीटर से अधिक दूरी तय की लेकिन श्रीशंकर का प्रदर्शन उन्हें दूसरे स्थान तक पहुंचाने में सफल रहा।

    भारत के लिए इस स्पर्धा में एक और एथलीट लोकेश सत्यनाथन भी उतरे थे। उन्होंने 7.97 मीटर की सर्वश्रेष्ठ छलांग लगाकर पांचवां स्थान हासिल किया। हालांकि वह पदक से चूक गए लेकिन उनका प्रदर्शन भी सराहनीय रहा और भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत छोड़ गया।

    श्रीशंकर के इस सिल्वर मेडल के साथ भारत के कुल पदकों की संख्या और बढ़ गई। एथलेटिक्स और पैरा एथलेटिक्स दोनों में भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन लगातार बेहतर होता जा रहा है। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि भारतीय खिलाड़ी अब विश्व स्तर की प्रतियोगिताओं में हर इवेंट में मजबूत चुनौती पेश कर रहे हैं।

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय दल का आत्मविश्वास लगातार बढ़ रहा है। वेटलिफ्टिंग पैरा एथलेटिक्स और अब लंबी कूद जैसे इवेंट में मिले पदकों ने देश की उम्मीदों को और मजबूत किया है। श्रीशंकर की यह सफलता आने वाले युवा खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा बनेगी और भारतीय एथलेटिक्स को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।