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  • अटल बिहारी वाजपेयी की आठवीं पुण्यतिथि पर राष्ट्रपति मुर्मू, उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन और पीएम मोदी ने सदैव अटल पहुंचकर श्रद्धांजलि दी

    अटल बिहारी वाजपेयी की आठवीं पुण्यतिथि पर राष्ट्रपति मुर्मू, उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन और पीएम मोदी ने सदैव अटल पहुंचकर श्रद्धांजलि दी

    नई दिल्ली । पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की आठवीं पुण्यतिथि पर रविवार को देश ने उन्हें श्रद्धापूर्वक याद किया। नई दिल्ली स्थित उनके स्मारक सदैव अटल पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने पहुंचकर पुष्प अर्पित किए और पूर्व प्रधानमंत्री को श्रद्धांजलि दी।

    श्रद्धांजलि कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री, सांसद और विभिन्न राजनीतिक दलों के कई नेता भी शामिल हुए। सभी ने वाजपेयी के सार्वजनिक जीवन, राष्ट्र के प्रति उनके योगदान और भारतीय राजनीति में उनकी विशिष्ट भूमिका को याद किया। इस अवसर पर उनके व्यक्तित्व को लोकतांत्रिक मूल्यों, प्रभावी नेतृत्व और राष्ट्रहित से जोड़कर देखा गया।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी वाजपेयी को याद करते हुए उनके नेतृत्व और विचारों को देश के लिए प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि वाजपेयी ने अपना पूरा जीवन राष्ट्र की सेवा के लिए समर्पित किया और उनके विचार तथा कार्य आज भी देशवासियों को दिशा देते हैं। वाजपेयी की पुण्यतिथि पर देशभर में उन्हें श्रद्धांजलि देने का सिलसिला जारी रहा।

    अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय राजनीति के उन नेताओं में शामिल रहे जिनकी पहचान केवल प्रधानमंत्री के रूप में नहीं, बल्कि एक प्रभावशाली वक्ता, कवि और राजनेता के तौर पर भी बनी। उनकी भाषण शैली, सरल व्यवहार और राजनीतिक संवाद का अलग अंदाज उन्हें अन्य नेताओं से अलग पहचान देता था। संसद में उनके वक्तव्यों को लंबे समय तक राजनीतिक विमर्श का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया।

    वाजपेयी तीन बार भारत के प्रधानमंत्री बने। वर्ष 1996 में उन्होंने पहली बार प्रधानमंत्री पद संभाला, लेकिन उनकी सरकार 13 दिन ही चल सकी। इसके बाद वर्ष 1998 में उन्होंने दोबारा प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली। वर्ष 1999 में तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने 2004 तक सरकार का नेतृत्व किया। इस दौरान गठबंधन सरकार को स्थिरता के साथ चलाना उनके राजनीतिक कौशल की महत्वपूर्ण मिसाल माना गया।

    उनके प्रधानमंत्री कार्यकाल में वर्ष 1998 का पोखरण परमाणु परीक्षण भारत की महत्वपूर्ण रणनीतिक घटनाओं में शामिल रहा। इस निर्णय के बाद भारत की परमाणु क्षमता को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक प्रतिक्रिया हुई। इसके साथ ही उनके कार्यकाल में बुनियादी ढांचे और सड़क संपर्क को मजबूत करने से जुड़ी कई योजनाओं को आगे बढ़ाया गया।

    स्वर्णिम चतुर्भुज योजना उनके कार्यकाल की प्रमुख विकास परियोजनाओं में रही। इसका उद्देश्य देश के प्रमुख महानगरों और महत्वपूर्ण शहरों को बेहतर सड़क नेटवर्क के माध्यम से जोड़ना था। इसके अलावा ग्रामीण सड़क संपर्क और दूरसंचार क्षेत्र में भी उनके कार्यकाल के दौरान कई महत्वपूर्ण पहल हुईं।

    अटल बिहारी वाजपेयी को वर्ष 2015 में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके लंबे सार्वजनिक जीवन और राष्ट्र के लिए किए गए योगदान के प्रति देश की मान्यता के रूप में देखा गया।

    16 अगस्त 2018 को वाजपेयी का निधन हुआ था। उनकी पुण्यतिथि पर हर वर्ष उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती है। आठवीं पुण्यतिथि के अवसर पर भी उनके स्मारक सदैव अटल पर नेताओं ने पुष्प अर्पित कर उनके योगदान को याद किया। भारतीय राजनीति में वाजपेयी की विरासत आज भी उनके नेतृत्व, भाषण कला, कविताओं और राष्ट्रसेवा से जुड़ी स्मृतियों के रूप में मौजूद है।

  • एयरफोर्स बाल भारती स्कूल पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, छात्रों से संवाद कर शिक्षा और नैतिक मूल्यों का दिया संदेश

    एयरफोर्स बाल भारती स्कूल पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, छात्रों से संवाद कर शिक्षा और नैतिक मूल्यों का दिया संदेश


    नई दिल्ली ।
    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बुधवार को नई दिल्ली के लोदी रोड स्थित एयरफोर्स बाल भारती स्कूल का दौरा किया। इस अवसर पर उन्होंने विद्यार्थियों के साथ संवाद कर उन्हें शिक्षा, अनुशासन, नैतिक मूल्यों और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी का संदेश दिया। स्कूल प्रशासन ने इस दौरे को संस्थान के इतिहास का एक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक अवसर बताया। राष्ट्रपति की मौजूदगी से विद्यार्थियों और शिक्षकों में विशेष उत्साह देखने को मिला।

    स्कूल पहुंचने पर राष्ट्रपति का स्वागत भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह और एयर फोर्स फैमिलीज वेलफेयर एसोसिएशन की अध्यक्ष सरिता सिंह ने किया। विद्यालय परिसर में उनके स्वागत के लिए विशेष तैयारियां की गई थीं। विद्यार्थियों ने पारंपरिक तरीके से उनका अभिनंदन किया और पूरे कार्यक्रम के दौरान अनुशासन तथा उत्साह का परिचय दिया।

    दौरे की शुरुआत सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से हुई, जिसमें विद्यार्थियों ने भारतीय संस्कृति, राष्ट्रीय एकता और देशभक्ति पर आधारित रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किए। विभिन्न प्रस्तुतियों में छात्रों की प्रतिभा, आत्मविश्वास और रचनात्मक क्षमता की झलक दिखाई दी। कार्यक्रम में मौजूद अतिथियों ने विद्यार्थियों के प्रदर्शन की सराहना की और उनके प्रयासों की प्रशंसा की।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों से सीधे संवाद भी किया। उन्होंने छात्रों से उनकी पढ़ाई, भविष्य की योजनाओं, रुचियों और जीवन के लक्ष्यों के बारे में जानकारी ली। बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता केवल प्रतिभा से नहीं बल्कि निरंतर मेहनत, अनुशासन और सकारात्मक सोच से हासिल होती है। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने सपनों को पूरा करने के लिए समर्पण और ईमानदारी के साथ प्रयास करने की प्रेरणा दी।

    उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल शैक्षणिक उपलब्धियां प्राप्त करना नहीं, बल्कि जिम्मेदार, संवेदनशील और जागरूक नागरिक तैयार करना भी है। राष्ट्रपति ने विद्यार्थियों से अच्छे नैतिक मूल्यों को अपनाने, समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने और देश के विकास में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया। उनके अनुसार शिक्षा और चरित्र निर्माण साथ-साथ आगे बढ़ने चाहिए, तभी व्यक्ति और राष्ट्र दोनों मजबूत बनते हैं।

    अपने दौरे के दौरान राष्ट्रपति ने स्कूल परिसर में आयोजित कला प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। प्रदर्शनी में जूनियर और सीनियर वर्ग के विद्यार्थियों द्वारा तैयार की गई चित्रकृतियों और विभिन्न रचनात्मक कलाकृतियों को प्रदर्शित किया गया था। उन्होंने छात्रों की कल्पनाशीलता, कलात्मक अभिव्यक्ति और सृजनात्मक सोच की सराहना करते हुए कहा कि कला व्यक्तित्व विकास का महत्वपूर्ण माध्यम है और शिक्षा के साथ इसका संतुलित विकास आवश्यक है।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने स्कूल के आधुनिक बुनियादी ढांचे, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने की प्रतिबद्धता और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि ऐसे शिक्षण संस्थान भविष्य के जिम्मेदार नागरिक तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विद्यालय आगे भी शिक्षा, अनुशासन और उत्कृष्टता के क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल करेगा तथा विद्यार्थियों को देश और समाज की सेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा।

  • पूर्वी यूरोप से रिश्तों को नई मजबूती देने निकलेंगी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, तीन देशों के ऐतिहासिक दौरे में व्यापार, निवेश और सहयोग पर रहेगा विशेष जोर

    पूर्वी यूरोप से रिश्तों को नई मजबूती देने निकलेंगी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, तीन देशों के ऐतिहासिक दौरे में व्यापार, निवेश और सहयोग पर रहेगा विशेष जोर

    नई दिल्ली । राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 19 से 25 जुलाई 2026 तक मोल्दोवा, उत्तरी मैसेडोनिया और रोमानिया के महत्वपूर्ण राजकीय दौरे पर जाएंगी। यह यात्रा भारत की पूर्वी यूरोप के देशों के साथ बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता और बहुआयामी सहयोग को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। इस दौरान राष्ट्रपति विभिन्न देशों के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात करेंगी और राजनीतिक, आर्थिक, व्यापारिक तथा सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत बनाने पर चर्चा करेंगी।

    राष्ट्रपति अपने दौरे की शुरुआत 20 जुलाई को मोल्दोवा से करेंगी। यह किसी भारतीय राष्ट्रपति की मोल्दोवा की पहली आधिकारिक यात्रा होगी, जिससे दोनों देशों के संबंधों में एक नया अध्याय जुड़ने की उम्मीद है। यात्रा के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु मोल्दोवा की राष्ट्रपति माइया सैंडू के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता करेंगी। इसके अलावा वह वहां की संसद के अध्यक्ष इगोर ग्रोसु से मुलाकात करेंगी और भारत-मोल्दोवा संसदीय मैत्री समूह के सदस्यों से भी संवाद करेंगी। राष्ट्रपति बिजनेस फोरम को संबोधित करने के साथ भारतीय समुदाय के लोगों से भी मुलाकात करेंगी।

    भारत और मोल्दोवा के बीच कृषि, स्वास्थ्य सेवाओं, औषधि उद्योग, सूचना प्रौद्योगिकी और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। सरकार का मानना है कि यह यात्रा इन क्षेत्रों में नए समझौतों और व्यावहारिक सहयोग का मार्ग प्रशस्त कर सकती है। साथ ही दोनों देशों के बीच आर्थिक और निवेश संबंधों को भी नई मजबूती मिलने की संभावना है।

    इसके बाद राष्ट्रपति 21 और 22 जुलाई को उत्तरी मैसेडोनिया की यात्रा करेंगी। यह भी किसी भारतीय राष्ट्रपति का पहला आधिकारिक दौरा होगा। इस दौरान वह राष्ट्रपति गोरडाना सिलजानोव्स्का-दावकोवा के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगी। इसके अलावा प्रधानमंत्री ह्रिस्टिजान मिकोस्की तथा वहां की संसद के शीर्ष नेतृत्व से भी उनकी मुलाकात निर्धारित है। राष्ट्रपति उत्तरी मैसेडोनिया की संसद को संबोधित करेंगी और भारत-उत्तरी मैसेडोनिया बिजनेस फोरम में भी हिस्सा लेंगी।

    दोनों देशों के बीच कृषि, फार्मास्यूटिकल्स, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, सूचना प्रौद्योगिकी तथा आईटी आधारित सेवाओं में सहयोग बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। दोनों पक्ष आर्थिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने और निवेश के अवसरों को बढ़ावा देने के लिए भी आपसी सहयोग मजबूत करने पर विचार करेंगे।

    दौरे के अंतिम चरण में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 23 से 25 जुलाई तक रोमानिया की यात्रा करेंगी। तीन दशक से अधिक समय बाद किसी भारतीय राष्ट्रपति का यह पहला आधिकारिक दौरा होगा। इस दौरान वह रोमानिया के राष्ट्रपति निकुशोर डैन, अंतरिम प्रधानमंत्री इली बोलोजान, सीनेट के अध्यक्ष, चैंबर ऑफ डेप्युटीज के अध्यक्ष और भारत-रोमानिया संसदीय मैत्री समूह के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगी। राष्ट्रपति भारत-रोमानिया बिजनेस फोरम को संबोधित करने के साथ वहां रह रहे भारतीय समुदाय के सदस्यों से भी संवाद करेंगी।

    रोमानिया को यूरोपीय संघ में भारत का एक महत्वपूर्ण साझेदार माना जाता है। दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, ऊर्जा, शिक्षा और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ रहा है। भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते से भविष्य में आर्थिक संबंधों को और मजबूती मिलने की संभावना भी जताई जा रही है। राष्ट्रपति का यह तीन देशों का राजकीय दौरा भारत की सक्रिय कूटनीति, पूर्वी यूरोप के साथ गहरे होते संबंधों और वैश्विक स्तर पर रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।