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  • मुंबई में बीच में रोका गया शिल्पा राव का परफॉर्मेंस, माइक बंद होने पर भावुक हुईं सिंगर….

    मुंबई में बीच में रोका गया शिल्पा राव का परफॉर्मेंस, माइक बंद होने पर भावुक हुईं सिंगर….

    नई दिल्ली । मुंबई में 24 अक्टूबर को आयोजित एक बॉलीवुड म्यूजिक प्रोजेक्ट की 10वीं वर्षगांठ के कार्यक्रम में सिंगर शिल्पा राव की परफॉर्मेंस बीच में रोक दिए जाने का मामला चर्चा में है। कार्यक्रम के दौरान उनका माइक बंद कर दिया गया और स्टेज की लाइटें भी बुझा दी गईं। बताया गया कि इस घटनाक्रम के कारण शिल्पा को अपनी प्रस्तुति पूरी करने और दर्शकों से ठीक से विदा लेने का मौका नहीं मिला। करीब 15 मिनट तक चले इस घटनाक्रम से सिंगर के साथ वहां मौजूद दर्शक भी हैरान रह गए।

    कार्यक्रम में कई कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियां दीं। हालांकि, शिल्पा राव की परफॉर्मेंस बीच में रोके जाने की घटना ने लोगों का ध्यान खींचा। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इवेंट का निर्धारित शेड्यूल देरी से चल रहा था। इसी वजह से उनकी प्रस्तुति को बीच में रोकने का फैसला लिया गया। उस समय दर्शक शिल्पा को सुनने के लिए उत्साहित थे और लगातार उनका नाम लेकर आवाज लगा रहे थे।

    बताया गया कि माइक बंद होने के बाद शिल्पा को अपने प्रशंसकों से ठीक से विदा लेने का अवसर भी नहीं मिला। इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हो गई। हालांकि, कार्यक्रम में परफॉर्मेंस रोकने के फैसले को लेकर आयोजकों की ओर से किसी आधिकारिक प्रतिक्रिया की जानकारी सामने नहीं आई है।

    इस घटनाक्रम के बाद शिल्पा राव ने इंस्टाग्राम पर एक भावुक पोस्ट साझा कर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि मुंबई में उस रात उनके दिल का एक हिस्सा टूट गया। सिंगर ने कहा कि जब किसी खूबसूरत मंच पर चल रही प्रस्तुति को इस तरह बीच में रोक दिया जाता है, तो दुख होता है। उनकी पोस्ट से कार्यक्रम के दौरान हुए अनुभव और दर्शकों के साथ उनके जुड़ाव का पता चला।

    शिल्पा ने अपनी पोस्ट में उन प्रशंसकों का भी आभार जताया, जो संगीत बंद होने के बाद भी उनका समर्थन करते रहे। उन्होंने बताया कि परफॉर्मेंस रुकने के बावजूद दर्शक उनका नाम पुकारते रहे। उनके मुताबिक, प्रशंसकों की आवाज में मौजूद प्यार ने उन्हें भावनात्मक रूप से सहारा दिया। इस घटना के दौरान संगीत भले ही रुक गया, लेकिन दर्शकों का उत्साह कम नहीं हुआ।

    सिंगर ने अपनी पोस्ट में कहा कि उस रात उनकी और दर्शकों की कहानी अधूरी रह गई। इसके साथ ही उन्होंने मुंबई लौटकर दोबारा परफॉर्म करने का वादा भी किया। शिल्पा ने यह भी स्पष्ट किया कि वह मुंबई से बहुत प्यार करती हैं और आगे भी करती रहेंगी। उनकी इस बात से संकेत मिला कि कार्यक्रम में हुए अनुभव के बावजूद शहर और वहां के प्रशंसकों के प्रति उनका लगाव बना हुआ है।

    शिल्पा राव की पोस्ट सामने आने के बाद उनके प्रशंसकों का समर्थन भी चर्चा का हिस्सा बन गया। कार्यक्रम में उनकी प्रस्तुति रोके जाने की वजह से जहां निराशा की बात सामने आई, वहीं संगीत बंद होने के बाद भी दर्शकों द्वारा उनका नाम पुकारते रहने को उन्होंने खास महत्व दिया। फिलहाल, उपलब्ध जानकारी में कार्यक्रम के शेड्यूल में देरी को परफॉर्मेंस रोकने की वजह बताया गया है। आयोजकों की ओर से इस मामले पर आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आने की जानकारी नहीं है।

  • 2014 में ही एआर रहमान को मिला था रामायण से जुड़ने का संकेत, यश ने भी सुनाया संगीत से जुड़ा खास किस्सा

    2014 में ही एआर रहमान को मिला था रामायण से जुड़ने का संकेत, यश ने भी सुनाया संगीत से जुड़ा खास किस्सा

    नई दिल्ली । संगीतकार एआर रहमान ने फिल्म रामायण से अपने जुड़ाव की एक दिलचस्प कहानी साझा की है। उन्होंने बताया कि करीब एक दशक पहले, वर्ष 2014 में सतीश नाम के एक व्यक्ति ने उन्हें ईमेल भेजकर एक सपना बताया था। उस व्यक्ति का दावा था कि उसने सपने में रहमान को महाकाव्य रामायण के लिए संगीत तैयार करते हुए देखा है। अब रहमान इस महाकाव्य पर आधारित फिल्म के संगीत से जुड़े हैं। ऐसे में वर्षों पहले मिला वह संदेश एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है।

    21 अक्टूबर को चेन्नई में आयोजित फिल्म के एल्बम लॉन्च कार्यक्रम के दौरान रहमान ने इस पुराने ईमेल का जिक्र किया। उन्होंने दर्शकों को बताया कि सतीश नाम के व्यक्ति ने उनसे संपर्क कर अपने सपने के बारे में लिखा था। रहमान ने उस संदेश को साझा करते हुए कहा कि वर्ष 2014 में उस व्यक्ति ने उनसे कहा था कि वह रामायण के लिए संगीत तैयार करेंगे।

    ईमेल में सतीश ने लिखा था कि रहमान उन्हें सुबह-सुबह सपने में दिखाई दिए थे। उन्हें विश्वास था कि उनका सपना सच होगा। संदेश में यह भी कहा गया था कि रहमान भारत और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में संगीत कार्यक्रम कर रहे हैं, जिनमें महान महाकाव्य रामायण को प्रस्तुत किया जा रहा है। उस समय भेजे गए इस संदेश में व्यक्त की गई कल्पना अब फिल्म के साथ रहमान के जुड़ने के संदर्भ में खास लग रही है।

    रामायण पर आधारित यह फिल्म दो भागों में बनाई जा रही एक लाइव-एक्शन परियोजना है। इसका नाम रामायण: राइज ऑफ ए लीजेंड बताया गया है। फिल्म में एआर रहमान ऑस्कर विजेता संगीतकार हंस जिमर के साथ मिलकर संगीत तैयार कर रहे हैं। हंस जिमर हॉलीवुड की कई बड़ी फिल्मों के संगीत के लिए पहचाने जाते हैं। दोनों संगीतकारों के साथ आने से फिल्म के संगीत को लेकर भी दर्शकों की दिलचस्पी बढ़ी है।

    कार्यक्रम में फिल्म में रावण की भूमिका निभा रहे अभिनेता यश भी मौजूद थे। उन्होंने एआर रहमान के प्रति अपना सम्मान व्यक्त करते हुए बताया कि उनके संगीत ने तमिल भाषा सीखने में मदद की। यश ने कहा कि वह रहमान के बहुत बड़े प्रशंसक हैं और उनकी फिल्म जेंटलमैन के गानों पर नृत्य किया करते थे। उन्होंने तमिल फिल्म उद्योग में रहमान के योगदान को भी महत्वपूर्ण बताया।

    यश ने कहा कि जब वह तमिल गानों को हिंदी में सुनते हैं, तो उन्हें लगता है कि उनमें कुछ कमी रह जाती है। उन्होंने खुशी जताई कि रहमान रामायण के लिए संगीत तैयार कर रहे हैं और उन्हें इस फिल्म में उनके संगीत पर अभिनय करने का अवसर मिला है।

    अभिनेता ने रावण का किरदार निभाने को लेकर भी अपनी बात रखी। उनके अनुसार, कई लोगों ने उनसे पूछा कि वह रावण की भूमिका क्यों निभाना चाहते हैं, जबकि इस पात्र को आमतौर पर नकारात्मक रूप में देखा जाता है। यश ने कहा कि कलाकार अलग-अलग किरदार निभाते हैं और हर किरदार में एक अलग तरह की ऊर्जा होती है। उन्होंने बताया कि रावण की भूमिका निभाते समय उन्होंने शिव जी का शिव तांडव गीत सुना, जिससे उन्हें ऊर्जा मिली। उन्होंने इस गीत के लिए रहमान का आभार भी जताया और कहा कि वह पहले भी शिव जी के कई गीत सुनते थे।

    फिल्म में भगवान राम की भूमिका रणबीर कपूर, सीता की भूमिका साई पल्लवी, रावण की भूमिका यश, हनुमान की भूमिका सनी देओल और लक्ष्मण की भूमिका रवि दुबे निभा रहे हैं। इनके अलावा अरुण गोविल, लारा दत्ता, रकुल प्रीत सिंह, विवेक ओबेरॉय, कुणाल कपूर और काजल अग्रवाल भी फिल्म का हिस्सा हैं। फिल्म की निर्धारित रिलीज तारीख 5 नवंबर 2026 रखी गई है, जो दिवाली के अवसर पर पड़ती है।

  • एसपी बालासुब्रमण्यम की आवाज के वो 10 यादगार गीत, जिन्होंने हिंदी सिनेमा में बनाई खास पहचान

    एसपी बालासुब्रमण्यम की आवाज के वो 10 यादगार गीत, जिन्होंने हिंदी सिनेमा में बनाई खास पहचान

    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा के महान पार्श्व गायकों में शामिल एसपी बालासुब्रमण्यम की आज छठी पुण्यतिथि है। पांच दशक से ज्यादा लंबे करियर में उन्होंने हिंदी के साथ तेलुगु, तमिल, कन्नड़ और मलयालम समेत कई भाषाओं में हजारों गीतों को अपनी आवाज दी। उनकी आवाज में भावनाओं की ऐसी विविधता थी कि रोमांटिक गीतों से लेकर भावुक और मधुर रचनाओं तक हर तरह के गाने श्रोताओं के बीच खास पहचान बना लेते थे। 25 सितंबर 2020 को उनके निधन के बाद भी उनके गीत लगातार लोगों की यादों का हिस्सा बने हुए हैं।

    4 जून 1946 को जन्मे एसपी बालासुब्रमण्यम ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी, लेकिन संगीत के प्रति उनका लगाव उन्हें गायकी की दुनिया में ले आया। उन्होंने संगीत प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना शुरू किया और 15 दिसंबर 1966 को तेलुगु फिल्म ‘श्री श्री श्री मर्यादा रामन्ना’ से बतौर पार्श्व गायक अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने दक्षिण भारतीय सिनेमा में अपनी मजबूत पहचान बनाई और आगे चलकर हिंदी फिल्मों में भी उनकी आवाज बेहद लोकप्रिय हुई।

    साल 1981 में रिलीज हुई फिल्म ‘एक दूजे के लिए’ से उन्होंने हिंदी सिनेमा में अपनी पहचान मजबूत की। इस फिल्म के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायक का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। इसके बाद सलमान खान की फिल्मों में उनकी आवाज ने खास लोकप्रियता हासिल की। ‘मैंने प्यार किया’, ‘हम आपके हैं कौन’, ‘साजन’ और ‘लव’ जैसी फिल्मों के गीतों ने उनकी आवाज को हिंदी दर्शकों के बीच घर-घर पहुंचाया।

    एसपी बालासुब्रमण्यम के नाम गायकी से जुड़े कई उल्लेखनीय रिकॉर्ड भी रहे। उनका करियर करीब पांच दशक तक चला और उन्होंने 16 भारतीय भाषाओं में 40 हजार से अधिक गीत रिकॉर्ड किए। एक दिन में उन्होंने कन्नड़ में 21, तमिल में 19 और हिंदी में 16 गाने रिकॉर्ड किए। उन्हें अलग-अलग भाषाओं में गायकी के लिए छह बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। सिनेमा में उनके योगदान के लिए उन्हें 2001 में पद्म श्री और 2011 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।

    उनके लोकप्रिय हिंदी गीतों में ‘आजा शाम होने आई’ खास है। इसी तरह ‘दिल दीवाना’ और ‘मेरे रंग में रंगने वाली’ जैसे गीतों ने भी उनकी आवाज को घर-घर तक पहुंचाया। इन गीतों में उनकी गायकी की सहजता और रोमांटिक अंदाज साफ नजर आता है।

    फिल्म ‘हम आपके हैं कौन’ का ‘पहला पहला प्यार है’ भी आज तक श्रोताओं के बीच लोकप्रिय है। ‘साजन’ का ‘बहुत प्यार करते हैं’ और ‘देखा है पहली बार’ उनकी यादगार प्रस्तुतियों में शामिल हैं। वहीं फिल्म ‘लव’ का ‘साथिया तूने क्या किया’ भी उनकी चर्चित प्रस्तुतियों में गिना जाता है।

    ‘एक दूजे के लिए’ का ‘हम बने तुम बने’ भी उनकी यादगार प्रस्तुतियों में शामिल है। वहीं ‘पत्थर के फूल’ का ‘कभी तू छलिया लगता है’ भी उनकी लोकप्रिय गीतों की सूची का हिस्सा रहा। इन गीतों के जरिए एसपी बालासुब्रमण्यम ने हिंदी सिनेमा के संगीत में अपनी अलग पहचान बनाई, जिसे आज भी संगीत प्रेमी याद करते हैं।

  • नवरात्रि से पहले फाल्गुनी पाठक ने पेश किया नया लगातार चलने वाला गरबा, एक घंटे तक थिरकने का तैयार किया म्यूजिकल सफर

    नवरात्रि से पहले फाल्गुनी पाठक ने पेश किया नया लगातार चलने वाला गरबा, एक घंटे तक थिरकने का तैयार किया म्यूजिकल सफर

    नई दिल्ली ।नवरात्रि का त्योहार नजदीक आते ही गरबा और डांडिया की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। इसी बीच गरबा गायिका फाल्गुनी पाठक ने इस नवरात्रि के लिए एक नई संगीत पेशकश तैयार की है। इसका नाम ‘गरबा नाइट्स विद फाल्गुनी पाठक’ है। यह एक घंटे का लगातार चलने वाला गरबा है, जिसे खास तौर पर नवरात्रि के उत्सव और गरबा आयोजनों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

    इस नई पेशकश की खासियत इसका लगातार चलने वाला म्यूजिक फॉर्मेट है। इसमें अलग-अलग गानों को इस तरह जोड़ा गया है कि एक गाना खत्म होते ही दूसरा शुरू हो जाता है। इस वजह से संगीत के बीच लंबा अंतर नहीं आता और गरबा करने का सिलसिला लगातार जारी रखा जा सकता है।

    फाल्गुनी पाठक ने अपने नए गरबा कलेक्शन को लेकर कहा कि गरबा उनके लिए हमेशा लोगों के साथ जुड़ने, जश्न मनाने और संगीत व भक्ति में पूरी तरह डूबने का माध्यम रहा है। उन्होंने बताया कि ‘गरबा नाइट्स विद फाल्गुनी पाठक’ के जरिए इस नवरात्रि के लिए एक नया म्यूजिकल सफर तैयार किया गया है।

    उन्होंने इस बात को लेकर उत्साह जताया कि लोग इन गानों को सुनें, गरबा करें और एक साथ मिलकर नवरात्रि का जश्न मनाएं। उनके मुताबिक, इन धुनों के साथ लोग अपनी यादों को भी जोड़ सकेंगे।

    फाल्गुनी पाठक ने बताया कि इस गरबा कलेक्शन को विशेष रूप से नवरात्रि और गरबा आयोजनों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसे केवल बड़े आयोजनों में ही नहीं, बल्कि दोस्तों और परिवार के साथ होने वाली छोटी-बड़ी महफिलों में भी सुना जा सकता है।

    नए गरबा कलेक्शन में गानों की प्रस्तुति को इस तरह रखा गया है कि संगीत शुरू होने के बाद डांस का सिलसिला बना रहे। गानों के बीच लगातार जुड़ाव होने के कारण इसे एक लंबे गरबा सेशन के तौर पर सुना जा सकता है। इस पेशकश का उद्देश्य नवरात्रि के दौरान होने वाले गरबा आयोजनों के माहौल में उत्साह बनाए रखना है।

    फाल्गुनी पाठक ने कहा कि इस संगीत को सुनते हुए लोग एक और राउंड के लिए गरबा मैदान में उतरने से खुद को रोक न पाएं, इसी भावना के साथ इसे तैयार किया गया है। लगातार चलने वाले इस गरबा कलेक्शन में संगीत, भक्ति और उत्सव के माहौल को एक साथ जोड़ने की कोशिश की गई है।

    इस नए कलेक्शन में फाल्गुनी पाठक की आवाज इसकी प्रमुख विशेषताओं में शामिल है। गरबा और नवरात्रि के संगीत से उनकी आवाज लंबे समय से जुड़ी रही है। इस नई पेशकश में भी उनकी गायकी को केंद्र में रखा गया है।

    म्यूजिक कंपनी की ओर से भी ‘गरबा नाइट्स विद फाल्गुनी पाठक’ को गरबा संगीत की अपनी पेशकश में एक नई कड़ी के तौर पर प्रस्तुत किया गया है। इसमें संगीत की प्रस्तुति के साथ फाल्गुनी पाठक की आवाज को शामिल किया गया है।

    नवरात्रि के दौरान गरबा और डांडिया आयोजनों में इस एक घंटे के लगातार चलने वाले कलेक्शन का इस्तेमाल किया जा सकता है। दोस्तों और परिवार के साथ होने वाली महफिलों के लिए भी इसे तैयार किया गया है। इस तरह नई पेशकश नवरात्रि के दौरान संगीत और गरबा के उत्सवी माहौल का हिस्सा बनने के लिए तैयार है।

  • कुमार सानू के 69वें जन्मदिन पर याद आए उनके सदाबहार रोमांटिक गाने, आज भी कायम है आवाज का जादू

    कुमार सानू के 69वें जन्मदिन पर याद आए उनके सदाबहार रोमांटिक गाने, आज भी कायम है आवाज का जादू

    नई दिल्ली ।कुमार सानू हिंदी फिल्म संगीत के उन लोकप्रिय गायकों में शामिल हैं, जिनकी आवाज ने 1990 के दशक के रोमांटिक गीतों को एक अलग पहचान दी। 20 अक्टूबर 1957 को कोलकाता में जन्मे कुमार सानू का वास्तविक नाम केदारनाथ भट्टाचार्य है। उनके पिता पशुपतिनाथ भट्टाचार्य भी संगीत से जुड़े हुए थे और शुरुआती संगीत शिक्षा कुमार सानू ने उन्हीं से प्राप्त की।

    प्लेबैक सिंगिंग की दुनिया में उन्होंने 1984 में फिल्म ‘ये देश’ से शुरुआत की। उनके करियर को आगे बढ़ाने में गजल गायक जगजीत सिंह की भूमिका भी बताई जाती है। 1989 में जगजीत सिंह ने उनकी मुलाकात संगीतकार जोड़ी कल्याणजी-आनंदजी से कराई। इसी दौरान केदारनाथ भट्टाचार्य को कुमार सानू नाम अपनाने की सलाह दी गई।

    इसके बाद वर्ष 1990 में आई फिल्म ‘आशिकी’ ने उनके करियर को नई ऊंचाई दी। फिल्म के संगीत ने दर्शकों के बीच खास जगह बनाई और कुमार सानू की आवाज घर-घर तक पहुंच गई। ‘धीरे-धीरे से मेरी जिंदगी में आना’, ‘अब तेरे बिन’, ‘नजर के सामने’ और ‘बस एक सनम चाहिए’ जैसे गीतों ने उनकी रोमांटिक गायकी को लोकप्रिय बनाया।

    ‘आशिकी’ के बाद 1990 के दशक में कुमार सानू ने कई चर्चित फिल्मों के लिए गीत गाए। ‘साजन’, ‘दीवाना’, ‘बाजीगर’, ‘परदेस’ और ‘1942: ए लव स्टोरी’ जैसी फिल्मों के गीतों ने उनकी लोकप्रियता को लगातार मजबूत किया।

    उनके चर्चित गीतों में ‘धीरे-धीरे से मेरी जिंदगी में आना’ आज भी विशेष रूप से याद किया जाता है। यह गीत ‘आशिकी’ में राहुल रॉय और अनु अग्रवाल पर फिल्माया गया था और फिल्म के लोकप्रिय संगीत का अहम हिस्सा रहा।

    ‘बाजीगर’ का ‘ये काली काली आंखें’ भी कुमार सानू के लोकप्रिय गीतों में शामिल है। शाहरुख खान और काजोल पर फिल्माए गए इस गाने में उनकी आवाज के साथ अनु मलिक की आवाज भी सुनाई दी थी।

    फिल्म ‘दीवाना’ का ‘सोचेंगे तुम्हें प्यार करें के नहीं’ भी 1990 के दशक में खूब लोकप्रिय हुआ। ऋषि कपूर और दिव्या भारती पर फिल्माए गए इस गीत को नदीम-श्रवण ने संगीत दिया था।

    ‘मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी’ का ‘चुरा के दिल मेरा’ कुमार सानू और अलका याग्निक की आवाज में रिकॉर्ड किया गया था। अक्षय कुमार और शिल्पा शेट्टी पर फिल्माया गया यह गीत भी लंबे समय तक लोकप्रिय रहा।

    ‘साजन’ का ‘मेरा दिल भी कितना पागल है’, ‘1942: ए लव स्टोरी’ का ‘एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा’, ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ का ‘तुझे देखा तो ये जाना सनम’ और ‘कुछ कुछ होता है’ का ‘लड़की बड़ी अंजानी है’ भी उनकी यादगार प्रस्तुतियों में गिने जाते हैं।

    ‘हम दिल दे चुके सनम’ का ‘आंखों की गुस्ताखियां’ भी कुमार सानू की लोकप्रिय गायकी का हिस्सा रहा। कविता कृष्णमूर्ति के साथ उनकी आवाज ने इस गीत को खास पहचान दी।

    कुमार सानू को संगीत के क्षेत्र में योगदान के लिए पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया। 1993 में एक ही दिन में 28 गाने रिकॉर्ड करने का रिकॉर्ड भी उनके करियर की चर्चित उपलब्धियों में शामिल है। 2015 की फिल्म ‘दम लगा के हईशा’ के ‘दर्द करारा’ से उन्होंने नई पीढ़ी के श्रोताओं के बीच भी अपनी आवाज की पहचान बनाए रखी।

  • 84 साल की उम्र में अमिताभ बच्चन ने बताई अधूरी ख्वाहिश, बोले- संगीत सीखने की इच्छा आज भी पूरी नहीं हो पाई

    84 साल की उम्र में अमिताभ बच्चन ने बताई अधूरी ख्वाहिश, बोले- संगीत सीखने की इच्छा आज भी पूरी नहीं हो पाई

    नई दिल्ली ।अमिताभ बच्चन ने अपनी जिंदगी से जुड़ी एक ऐसी अधूरी इच्छा के बारे में बताया है, जिसे लेकर उन्हें आज भी अफसोस है। अभिनय और अपनी दमदार आवाज के लिए पहचान रखने वाले अभिनेता ने बताया कि उन्हें संगीत सीखने की काफी इच्छा थी, लेकिन वह इसे कभी सीख नहीं पाए। उन्होंने यह बात क्विज रियलिटी शो ‘कौन बनेगा करोड़पति-18’ के आगामी एपिसोड के दौरान बातचीत में साझा की।

    शो में अमिताभ बच्चन की बातचीत कंटेस्टेंट कृतज्ञा नैयर के साथ हुई। कृतज्ञा ने अभिनेता से एक लोकप्रिय गेम ‘दिस और दैट’ खेलने का अनुरोध किया। उन्होंने अमिताभ बच्चन को बताया कि वह कंटेंट बनाती हैं और इस गेम के जरिए एक रील बनाना चाहती हैं, ताकि उनके फॉलोअर्स भी बढ़ सकें।

    इसी बातचीत के दौरान कृतज्ञा ने अमिताभ बच्चन से एक दिलचस्प सवाल पूछा। उन्होंने जानना चाहा कि क्या अभिनेता अपने अतीत के किसी एक दिन को दोबारा जीना पसंद करेंगे या फिर ऐसा कोई दिन जीना चाहेंगे, जो उन्होंने अब तक नहीं जिया है, लेकिन हमेशा से उसे जीने की इच्छा रही है।

    इस सवाल के जवाब में अमिताभ बच्चन ने कहा कि उनकी जिंदगी में इतनी घटनाएं हुई हैं कि यह तय करना आसान नहीं है कि वह किस दिन को दोबारा जीना चाहेंगे। इसके साथ ही उन्होंने उस दूसरी संभावना पर बात की, जिसमें ऐसा कोई दिन जीने की इच्छा शामिल है, जिसे उन्होंने अभी तक अनुभव नहीं किया।

    इसी दौरान अमिताभ बच्चन ने अपनी संगीत से जुड़ी इच्छा का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि वह संगीत सीखना चाहते थे, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। अभिनेता ने कहा कि जब वह संगीतकारों और गीतकारों को सुनते हैं तो उनके मन में यह सवाल आता है कि कोई इतना अच्छा कैसे गा सकता है। उन्होंने माना कि उन्होंने खुद कभी संगीत नहीं सीखा।

    अमिताभ बच्चन ने यह भी बताया कि उनके घर में संगीत सीखने के लिए जरूरी वाद्य यंत्र मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने संगीत सीखने के लिए घर में कई यंत्र जुटाकर रखे हुए हैं, लेकिन इसके बावजूद वह इस कला को सीख नहीं सके।

    अभिनेता ने अपने अंदाज में कहा कि इन वाद्य यंत्रों के ऊपर फूलों की माला चढ़ाकर वह इस उम्मीद में रहते हैं कि एक दिन वह संगीत सीखना शुरू करेंगे। हालांकि, वह दिन अब तक नहीं आया और संगीत सीखने की उनकी इच्छा अधूरी रह गई।

    अमिताभ बच्चन ने अपनी उम्र का जिक्र करते हुए कहा कि अब वह 84 साल के हो गए हैं और अभी तक उन्हें संगीत नहीं आया। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि इस बात का उन्हें बहुत दुख है। उनकी यह बात उनकी उस पुरानी इच्छा को सामने लाती है, जिसे वह चाहने के बावजूद पूरा नहीं कर सके।

    इस बातचीत में अमिताभ बच्चन ने यह भी दिखाया कि जिंदगी में कई उपलब्धियां हासिल करने के बावजूद कुछ व्यक्तिगत इच्छाएं ऐसी रह सकती हैं, जिन्हें पूरा करने का अवसर नहीं मिल पाता। संगीत सीखना और वाद्य यंत्र बजाना उनके लिए ऐसी ही एक अधूरी ख्वाहिश है।

  • मोहम्मद रफी की आवाज का ऐसा जादू, बिना इंटरनेट के 26 भाषाओं में गूंजे गीत और बनी विश्व पहचान

    मोहम्मद रफी की आवाज का ऐसा जादू, बिना इंटरनेट के 26 भाषाओं में गूंजे गीत और बनी विश्व पहचान

    नई दिल्ली । भारतीय संगीत जगत के महानतम पार्श्वगायकों में शामिल मोहम्मद रफी की आवाज का जादू आज भी करोड़ों लोगों के दिलों में कायम है। जिस दौर में न इंटरनेट था, न सोशल मीडिया और न ही डिजिटल प्लेटफॉर्म, उस समय रफी साहब की आवाज सीमाओं को पार करते हुए दुनिया के कई हिस्सों तक पहुंच चुकी थी। 1940 के दशक में अपने गायन सफर की शुरुआत करने वाले मोहम्मद रफी ने कई दशकों तक भारतीय सिनेमा को अपनी सुरीली आवाज से समृद्ध किया और हर तरह के गीतों को अपनी गायकी से यादगार बना दिया।

    मोहम्मद रफी की खासियत यह थी कि वह हर भावना को अपनी आवाज में पूरी गहराई के साथ उतार देते थे। रोमांटिक गीतों से लेकर दर्द भरे नगमों, भजनों, कव्वालियों और देशभक्ति गीतों तक उन्होंने अपनी गायकी की अलग पहचान बनाई। उनकी आवाज में ऐसी मिठास और भावनात्मक प्रभाव था कि हर उम्र के श्रोता उनसे जुड़ जाते थे। यही वजह है कि कई दशक गुजर जाने के बाद भी उनके गीतों की लोकप्रियता कम नहीं हुई है।

    रफी साहब की गायकी केवल हिंदी फिल्मों तक सीमित नहीं रही। उन्होंने अपने करियर में करीब 26 भाषाओं में गीत रिकॉर्ड किए। इनमें हिंदी, उर्दू, पंजाबी, बंगाली, मराठी, गुजराती, भोजपुरी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम और ओड़िया जैसी भारतीय भाषाओं के अलावा अंग्रेजी, फारसी, स्पेनिश, डच और क्रियोल जैसी विदेशी भाषाएं भी शामिल थीं। यह उपलब्धि उस समय और भी बड़ी मानी जाती है, जब तकनीक और संचार के साधन आज की तरह विकसित नहीं थे।

    उनकी विदेशी भाषाओं में रिकॉर्ड की गई कुछ प्रस्तुतियां हिंदी फिल्मों के लोकप्रिय गीतों की धुनों पर आधारित थीं। फिल्म ‘गुमनाम’ के चर्चित गीत ‘हम काले हैं तो क्या हुआ दिलवाले हैं’ की धुन पर उन्होंने अंग्रेजी गीत भी रिकॉर्ड किया था। इसी तरह फिल्म ‘सूरज’ के सदाबहार गीत ‘बहारों फूल बरसाओ’ की धुन पर भी उन्होंने अंग्रेजी में गीत गाया था। यह दिखाता है कि उनकी आवाज की पहुंच केवल भारतीय श्रोताओं तक नहीं थी।

    मोहम्मद रफी से जुड़ा एक दिलचस्प तथ्य यह भी है कि उन्होंने फिल्मों के अलावा विज्ञापनों के लिए भी अपनी आवाज दी थी। 1950 के दशक में उन्होंने बर्मा शेल ऑयल कंपनी के लिए एक जिंगल रिकॉर्ड किया था, जिसका इस्तेमाल रेडियो विज्ञापन के रूप में किया जाता था। उस समय रेडियो ही लोगों तक पहुंचने का सबसे बड़ा माध्यम था और रफी साहब की आवाज ने उस विज्ञापन को भी खास बना दिया था।

    इसके अलावा उन्होंने कुछ सरकारी अभियानों और अन्य विशेष परियोजनाओं के लिए भी अपनी आवाज का योगदान दिया। हालांकि, उनकी सबसे बड़ी पहचान हमेशा भारतीय फिल्मों के उन हजारों गीतों से रही, जो आज भी संगीत प्रेमियों के बीच लोकप्रिय हैं।

    मोहम्मद रफी केवल एक गायक नहीं थे, बल्कि भारतीय संगीत की ऐसी विरासत हैं, जिसने भाषा और भौगोलिक सीमाओं को पार किया। उनकी आवाज में मौजूद भावनाओं और सुरों की गहराई ने उन्हें दुनिया भर में सम्मान दिलाया। आज भी उनकी गायकी नई पीढ़ी को प्रेरित करती है और उनके गीत भारतीय संगीत इतिहास की अमूल्य धरोहर बने हुए हैं।

  • नीरज पांडे के निर्देशन में बनने वाली फिल्म में पांचवीं बार जुड़े अक्षय कुमार, आरडी बर्मन के किरदार में दिखेंगे फरहान

    नीरज पांडे के निर्देशन में बनने वाली फिल्म में पांचवीं बार जुड़े अक्षय कुमार, आरडी बर्मन के किरदार में दिखेंगे फरहान


    नई दिल्ली ।
    भारतीय सिनेमा जगत के मशहूर खिलाड़ी अभिनेता अक्षय कुमार और जाने-माने निर्देशक नीरज पांडे एक बार फिर बड़े पर्दे पर एक साथ वापसी करने जा रहे हैं। दोनों दिग्गज कलाकारों की यह जोड़ी लगभग एक दशक बाद एक बेहद खास प्रोजेक्ट के लिए हाथ मिला रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह बहुप्रतीक्षित फिल्म महान भारतीय संगीतकार आरडी बर्मन के जीवन पर आधारित एक संगीतमय बायोपिक होगी।

    इस महत्वाकांक्षी फिल्म में बहुमुखी प्रतिभा के धनी अभिनेता और निर्देशक फरहान अख्तर, आरडी बर्मन की मुख्य भूमिका निभाते हुए नजर आएंगे। वहीं, अक्षय कुमार इस फिल्म में एक विशेष और महत्वपूर्ण अतिथि भूमिका (कैमियो) में दिखाई देंगे। यद्यपि फिल्म में अक्षय की भूमिका समय के हिसाब से छोटी होगी, लेकिन कहानी और पटकथा के मोड़ को देखते हुए उनके चरित्र का विशेष महत्व बताया जा रहा है।

    अक्षय कुमार और नीरज पांडे की जोड़ी ने इससे पहले कई सफल और चर्चित फिल्मों में एक साथ काम किया है। यही कारण है कि निर्देशक के केवल एक प्रस्ताव पर ही अभिनेता ने इस विशेष भूमिका को स्वीकार कर लिया। इस बायोपिक का निर्माण नीरज पांडे के साथ फरहान अख्तर की निर्माण संस्था मिलकर कर रही है। वर्तमान में फिल्म अपने प्री-प्रोडक्शन चरण में है और संगीत निर्माण पर जोर-शोर से काम चल रहा है, ताकि कालजयी संगीतमय धुनों को नए रूप में पेश किया जा सके।

    फिल्म की मुख्य फोटोग्राफी और शूटिंग आगामी सितंबर माह से शुरू होने की संभावना है। वहीं, अक्षय कुमार के काम की बात करें तो वे हाल ही में कई बड़े सिनेमा प्रोजेक्ट्स से जुड़े रहे हैं। उनकी आगामी फिल्मों में हॉरर-कॉमेडी और एक्शन से भरपूर फिल्में शामिल हैं, जिनमें वे अपने पुराने सह-कलाकारों के साथ फिर से स्क्रीन शेयर करते दिखेंगे।

    सिनेमा प्रेमियों के लिए यह खबर काफी उत्साहजनक है, क्योंकि नीरज पांडे और अक्षय कुमार के पुराने रिकॉर्ड को देखते हुए इस नई संगीतमय यात्रा से भी बड़ी उम्मीदें लगाई जा रही हैं। आरडी बर्मन के दौर और उनके संगीतमय सफर को बड़े पर्दे पर देखना हिंदी फिल्म दर्शकों के लिए एक बेहद यादगार अनुभव साबित हो सकता है।

  • सुरों के सफर में अचानक खामोश हुई धड़कनें: बॉलीवुड के वो 8 दिग्गज गायक जिन्हें दिल का दौरा देकर छीन ले गई मौत

    सुरों के सफर में अचानक खामोश हुई धड़कनें: बॉलीवुड के वो 8 दिग्गज गायक जिन्हें दिल का दौरा देकर छीन ले गई मौत


    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा की स्वर्णिम यात्रा में संगीत वह रूह है जिसने फिल्मों को अमर बनाया है। लेकिन इस रूह को अपनी आवाज देने वाले कई ऐसे फनकार रहे हैं, जिनका अंतिम सफर बेहद अप्रत्याशित और दुखद रहा। हिंदी फिल्म जगत के इतिहास पर नजर डालें तो एक विचलित करने वाला तथ्य सामने आता है कि हमारे कई सबसे चहेते गायकों का निधन अचानक दिल का दौरा पड़ने से हुआ। इन कलाकारों ने अपनी गायकी से करोड़ों लोगों के दिलों को धड़कना सिखाया, लेकिन अफसोस कि नियति ने उनके अपने ही दिल पर ऐसा प्रहार किया कि संगीत की महफिलें हमेशा के लिए सूनी हो गईं। यह लेख उन 8 महान विभूतियों को समर्पित है जिनकी दुनिया एक झटके में खत्म हो गई, मगर उनके गीत आज भी अमरता की श्रेणी में गिने जाते हैं।

    आधुनिक दौर के सबसे लोकप्रिय गायकों में शुमार केके का जाना संगीत प्रेमियों के लिए किसी बुरे सपने जैसा था। वह अपनी ऊर्जा और मंच पर अपनी जीवंत प्रस्तुति के लिए जाने जाते थे। एक लाइव कॉन्सर्ट के दौरान जब वे अपने प्रशंसकों को झूमने पर मजबूर कर रहे थे, तभी उनकी तबीयत बिगड़ी। किसी को अंदाजा नहीं था कि मंच से उतरने के बाद वे वापस कभी नहीं लौटेंगे। अस्पताल ले जाने के दौरान हुई उनकी मृत्यु ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया। इसी तरह, संगीतकार और गायक वाजिद खान के मामले में भी दिल का दौरा ही मौत की अंतिम वजह बना। हालांकि वे पहले से अस्वस्थ चल रहे थे, लेकिन अंततः उनके दिल ने साथ छोड़ दिया। उनके चले जाने से संगीत की एक प्रसिद्ध जोड़ी हमेशा के लिए टूट गई, जिसने बॉलीवुड को अनगिनत हिट गाने दिए थे।

    पुराने दौर की बात करें तो किशोर कुमार और मोहम्मद रफी जैसे दिग्गजों का जाना भारतीय संस्कृति की एक अपूरणीय क्षति थी। किशोर कुमार, जो अपनी हरफनमौला शख्सियत के लिए मशहूर थे, ने अपने घर पर अंतिम सांस ली। उनके निधन से ठीक एक दिन पहले उन्होंने एक भविष्य के प्रोजेक्ट के लिए गाना रिकॉर्ड किया था, जो बताता है कि वे अंत तक अपने काम के प्रति समर्पित थे। वहीं, मोहम्मद रफी साहब का जाना तो जैसे संगीत के एक युग का सूर्यास्त था। उन्हें जब दिल का दौरा पड़ा, तो वे अपने परिवार के बीच थे। डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बाद भी उन्हें नहीं बचाया जा सका। इसी कड़ी में गायक मुकेश का नाम आता है, जिन्हें ‘राज कपूर की आवाज’ कहा जाता था। अमेरिका के एक दौरे पर जब वे पूरी दुनिया को भारतीय संगीत का जादू दिखा रहे थे, तभी हार्ट अटैक ने उनकी जीवनलीला समाप्त कर दी।

    मन्ना डे, महेंद्र कपूर और हेमंत कुमार जैसे शास्त्रीय और गंभीर गायकी के स्तंभों का अंत भी हृदय गति रुकने से हुआ। मन्ना डे ने दशकों तक अपनी आवाज से संगीत के विभिन्न रंगों को संवारा, लेकिन लंबी उम्र के पड़ाव पर दिल के दौरे ने उन्हें मौन कर दिया। महेंद्र कपूर, जिन्होंने अपनी दमदार आवाज से देशभक्ति के गीतों को नई ऊंचाई दी, वे भी किडनी और हृदय संबंधी समस्याओं के चलते शांत हो गए। हेमंत कुमार, जो अपनी जादुई और रूहानी आवाज के लिए जाने जाते थे, उनका सफर भी 69 वर्ष की आयु में दिल का दौरा पड़ने से थम गया। इन सभी कलाकारों में एक बात समान थी कि भले ही मौत ने उनके शारीरिक अस्तित्व को मिटा दिया हो, लेकिन जब तक दुनिया में संगीत रहेगा, इन 8 गायकों की आवाज हवाओं में गूंजती रहेगी। इनकी मौत ने हमें यह सिखाया कि जीवन क्षणभंगुर है, लेकिन कला अमर होती है।

  • अरिजीत सिंह: सादगी से स्टारडम तक का सफर, रोमांटिक आवाज ने बनाया करोड़ों का दिलबर

    अरिजीत सिंह: सादगी से स्टारडम तक का सफर, रोमांटिक आवाज ने बनाया करोड़ों का दिलबर


    नई दिल्ली।बॉलीवुड में कई बेहतरीन आवाजें रही हैं, लेकिन कुछ ही ऐसी होती हैं जो सीधे दिल तक उतर जाती हैं। ऐसी ही एक आवाज है अरिजीत सिंह की, जिन्होंने अपनी गायकी से लोगों के दिलों में खास जगह बना ली है। उनकी आवाज में भावनाओं की गहराई, सादगी और दर्द का ऐसा मेल है जो हर गाने को यादगार बना देता है।

    अरिजीत सिंह का जन्म 25 अप्रैल 1987 को पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हुआ था। बचपन से ही उनका जुड़ाव संगीत से रहा, क्योंकि उनके परिवार में भी संगीत का माहौल था। दादी और मां गीत गाती थीं और मामा तबला बजाते थे, जिससे उनका झुकाव धीरे-धीरे संगीत की ओर बढ़ता गया। उन्होंने कम उम्र से ही शास्त्रीय संगीत की ट्रेनिंग शुरू कर दी थी, जिसने उनकी गायकी की नींव मजबूत कर दी।

    अपने करियर की शुरुआत में उन्हें ज्यादा पहचान नहीं मिली और उन्हें कई संघर्षों का सामना करना पड़ा। उन्होंने एक रियलिटी शो के जरिए अपनी शुरुआत की, लेकिन वहां से बड़ी सफलता नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने लगातार मेहनत जारी रखी और छोटे प्रोजेक्ट्स के जरिए खुद को साबित करते रहे। उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब फिल्म ‘आशिकी 2’ का गाना ‘तुम ही हो’ रिलीज हुआ। इस गाने ने उन्हें रातों-रात स्टार बना दिया और यहीं से उनका सफर नई ऊंचाइयों पर पहुंच गया।

    इसके बाद उन्होंने लगातार हिट गाने दिए और बॉलीवुड में अपनी एक अलग पहचान बनाई। “चन्ना मेरेया”, “केसरिया”, और “अपना बना ले” जैसे गानों ने उन्हें हर घर में लोकप्रिय बना दिया। अब तक वे 400 से अधिक गाने गा चुके हैं और हर तरह के संगीत में अपनी छाप छोड़ चुके हैं। उनकी खासियत यह है कि वे हर गाने को सिर्फ गाते नहीं, बल्कि उसमें भावनाएं भर देते हैं, जिससे श्रोता उससे गहराई से जुड़ जाते हैं।

    इतनी बड़ी सफलता के बावजूद उनकी जीवनशैली बेहद साधारण है। वे लाइमलाइट से दूर रहना पसंद करते हैं और आम लोगों की तरह जीवन जीते हैं। वे सोशल मीडिया और मीडिया की चकाचौंध से दूर रहते हैं और अपने काम पर ज्यादा ध्यान देते हैं। यही सादगी उन्हें बाकी कलाकारों से अलग बनाती है।

    हाल के समय में उन्होंने अपने करियर को लेकर एक बड़ा फैसला लिया, जिसमें उन्होंने पार्श्व गायन से दूरी बनाने की बात कही, लेकिन उन्होंने यह भी साफ किया कि वे संगीत से पूरी तरह दूर नहीं हुए हैं। वे आगे भी अपने फैंस के लिए संगीत से जुड़े रहेंगे। उनकी यह यात्रा इस बात का प्रमाण है कि सच्ची लगन और मेहनत से कोई भी व्यक्ति संगीत की दुनिया में अमिट पहचान बना सकता है।