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  • सुरों के सफर में अचानक खामोश हुई धड़कनें: बॉलीवुड के वो 8 दिग्गज गायक जिन्हें दिल का दौरा देकर छीन ले गई मौत

    सुरों के सफर में अचानक खामोश हुई धड़कनें: बॉलीवुड के वो 8 दिग्गज गायक जिन्हें दिल का दौरा देकर छीन ले गई मौत


    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा की स्वर्णिम यात्रा में संगीत वह रूह है जिसने फिल्मों को अमर बनाया है। लेकिन इस रूह को अपनी आवाज देने वाले कई ऐसे फनकार रहे हैं, जिनका अंतिम सफर बेहद अप्रत्याशित और दुखद रहा। हिंदी फिल्म जगत के इतिहास पर नजर डालें तो एक विचलित करने वाला तथ्य सामने आता है कि हमारे कई सबसे चहेते गायकों का निधन अचानक दिल का दौरा पड़ने से हुआ। इन कलाकारों ने अपनी गायकी से करोड़ों लोगों के दिलों को धड़कना सिखाया, लेकिन अफसोस कि नियति ने उनके अपने ही दिल पर ऐसा प्रहार किया कि संगीत की महफिलें हमेशा के लिए सूनी हो गईं। यह लेख उन 8 महान विभूतियों को समर्पित है जिनकी दुनिया एक झटके में खत्म हो गई, मगर उनके गीत आज भी अमरता की श्रेणी में गिने जाते हैं।

    आधुनिक दौर के सबसे लोकप्रिय गायकों में शुमार केके का जाना संगीत प्रेमियों के लिए किसी बुरे सपने जैसा था। वह अपनी ऊर्जा और मंच पर अपनी जीवंत प्रस्तुति के लिए जाने जाते थे। एक लाइव कॉन्सर्ट के दौरान जब वे अपने प्रशंसकों को झूमने पर मजबूर कर रहे थे, तभी उनकी तबीयत बिगड़ी। किसी को अंदाजा नहीं था कि मंच से उतरने के बाद वे वापस कभी नहीं लौटेंगे। अस्पताल ले जाने के दौरान हुई उनकी मृत्यु ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया। इसी तरह, संगीतकार और गायक वाजिद खान के मामले में भी दिल का दौरा ही मौत की अंतिम वजह बना। हालांकि वे पहले से अस्वस्थ चल रहे थे, लेकिन अंततः उनके दिल ने साथ छोड़ दिया। उनके चले जाने से संगीत की एक प्रसिद्ध जोड़ी हमेशा के लिए टूट गई, जिसने बॉलीवुड को अनगिनत हिट गाने दिए थे।

    पुराने दौर की बात करें तो किशोर कुमार और मोहम्मद रफी जैसे दिग्गजों का जाना भारतीय संस्कृति की एक अपूरणीय क्षति थी। किशोर कुमार, जो अपनी हरफनमौला शख्सियत के लिए मशहूर थे, ने अपने घर पर अंतिम सांस ली। उनके निधन से ठीक एक दिन पहले उन्होंने एक भविष्य के प्रोजेक्ट के लिए गाना रिकॉर्ड किया था, जो बताता है कि वे अंत तक अपने काम के प्रति समर्पित थे। वहीं, मोहम्मद रफी साहब का जाना तो जैसे संगीत के एक युग का सूर्यास्त था। उन्हें जब दिल का दौरा पड़ा, तो वे अपने परिवार के बीच थे। डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बाद भी उन्हें नहीं बचाया जा सका। इसी कड़ी में गायक मुकेश का नाम आता है, जिन्हें ‘राज कपूर की आवाज’ कहा जाता था। अमेरिका के एक दौरे पर जब वे पूरी दुनिया को भारतीय संगीत का जादू दिखा रहे थे, तभी हार्ट अटैक ने उनकी जीवनलीला समाप्त कर दी।

    मन्ना डे, महेंद्र कपूर और हेमंत कुमार जैसे शास्त्रीय और गंभीर गायकी के स्तंभों का अंत भी हृदय गति रुकने से हुआ। मन्ना डे ने दशकों तक अपनी आवाज से संगीत के विभिन्न रंगों को संवारा, लेकिन लंबी उम्र के पड़ाव पर दिल के दौरे ने उन्हें मौन कर दिया। महेंद्र कपूर, जिन्होंने अपनी दमदार आवाज से देशभक्ति के गीतों को नई ऊंचाई दी, वे भी किडनी और हृदय संबंधी समस्याओं के चलते शांत हो गए। हेमंत कुमार, जो अपनी जादुई और रूहानी आवाज के लिए जाने जाते थे, उनका सफर भी 69 वर्ष की आयु में दिल का दौरा पड़ने से थम गया। इन सभी कलाकारों में एक बात समान थी कि भले ही मौत ने उनके शारीरिक अस्तित्व को मिटा दिया हो, लेकिन जब तक दुनिया में संगीत रहेगा, इन 8 गायकों की आवाज हवाओं में गूंजती रहेगी। इनकी मौत ने हमें यह सिखाया कि जीवन क्षणभंगुर है, लेकिन कला अमर होती है।

  • अरिजीत सिंह: सादगी से स्टारडम तक का सफर, रोमांटिक आवाज ने बनाया करोड़ों का दिलबर

    अरिजीत सिंह: सादगी से स्टारडम तक का सफर, रोमांटिक आवाज ने बनाया करोड़ों का दिलबर


    नई दिल्ली।बॉलीवुड में कई बेहतरीन आवाजें रही हैं, लेकिन कुछ ही ऐसी होती हैं जो सीधे दिल तक उतर जाती हैं। ऐसी ही एक आवाज है अरिजीत सिंह की, जिन्होंने अपनी गायकी से लोगों के दिलों में खास जगह बना ली है। उनकी आवाज में भावनाओं की गहराई, सादगी और दर्द का ऐसा मेल है जो हर गाने को यादगार बना देता है।

    अरिजीत सिंह का जन्म 25 अप्रैल 1987 को पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हुआ था। बचपन से ही उनका जुड़ाव संगीत से रहा, क्योंकि उनके परिवार में भी संगीत का माहौल था। दादी और मां गीत गाती थीं और मामा तबला बजाते थे, जिससे उनका झुकाव धीरे-धीरे संगीत की ओर बढ़ता गया। उन्होंने कम उम्र से ही शास्त्रीय संगीत की ट्रेनिंग शुरू कर दी थी, जिसने उनकी गायकी की नींव मजबूत कर दी।

    अपने करियर की शुरुआत में उन्हें ज्यादा पहचान नहीं मिली और उन्हें कई संघर्षों का सामना करना पड़ा। उन्होंने एक रियलिटी शो के जरिए अपनी शुरुआत की, लेकिन वहां से बड़ी सफलता नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने लगातार मेहनत जारी रखी और छोटे प्रोजेक्ट्स के जरिए खुद को साबित करते रहे। उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब फिल्म ‘आशिकी 2’ का गाना ‘तुम ही हो’ रिलीज हुआ। इस गाने ने उन्हें रातों-रात स्टार बना दिया और यहीं से उनका सफर नई ऊंचाइयों पर पहुंच गया।

    इसके बाद उन्होंने लगातार हिट गाने दिए और बॉलीवुड में अपनी एक अलग पहचान बनाई। “चन्ना मेरेया”, “केसरिया”, और “अपना बना ले” जैसे गानों ने उन्हें हर घर में लोकप्रिय बना दिया। अब तक वे 400 से अधिक गाने गा चुके हैं और हर तरह के संगीत में अपनी छाप छोड़ चुके हैं। उनकी खासियत यह है कि वे हर गाने को सिर्फ गाते नहीं, बल्कि उसमें भावनाएं भर देते हैं, जिससे श्रोता उससे गहराई से जुड़ जाते हैं।

    इतनी बड़ी सफलता के बावजूद उनकी जीवनशैली बेहद साधारण है। वे लाइमलाइट से दूर रहना पसंद करते हैं और आम लोगों की तरह जीवन जीते हैं। वे सोशल मीडिया और मीडिया की चकाचौंध से दूर रहते हैं और अपने काम पर ज्यादा ध्यान देते हैं। यही सादगी उन्हें बाकी कलाकारों से अलग बनाती है।

    हाल के समय में उन्होंने अपने करियर को लेकर एक बड़ा फैसला लिया, जिसमें उन्होंने पार्श्व गायन से दूरी बनाने की बात कही, लेकिन उन्होंने यह भी साफ किया कि वे संगीत से पूरी तरह दूर नहीं हुए हैं। वे आगे भी अपने फैंस के लिए संगीत से जुड़े रहेंगे। उनकी यह यात्रा इस बात का प्रमाण है कि सच्ची लगन और मेहनत से कोई भी व्यक्ति संगीत की दुनिया में अमिट पहचान बना सकता है।