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  • भोपाल में ईद मिलादुन्नबी के महिला अखाड़े पर विवाद तेज, शहर मुफ्ती के बयान पर विरोध; कमेटी बोली- आत्मरक्षा के हुनर को डांस न कहें

    भोपाल में ईद मिलादुन्नबी के महिला अखाड़े पर विवाद तेज, शहर मुफ्ती के बयान पर विरोध; कमेटी बोली- आत्मरक्षा के हुनर को डांस न कहें


    भोपाल । भोपाल में ईद मिलादुन्नबी के पारंपरिक जुलूस के दौरान महिला अखाड़े के प्रदर्शन को लेकर शुरू हुआ विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। 26 अगस्त को मंगलवारा चौराहे से निकले जुलूस में महिला प्रतिभागियों के तलवारबाजी और अखाड़े के करतब दिखाने का वीडियो और तस्वीरें सामने आने के बाद शहर मुफ्ती अबुल कलाम की टिप्पणी पर मुस्लिम त्योहार कमेटी ने कड़ी आपत्ति जताई है। शहर मुफ्ती ने इस प्रदर्शन को डांस बताते हुए सवाल उठाया था कि यह अखाड़ा था या डांस। उनके इसी बयान को लेकर ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी के जिला अध्यक्ष ओसाफ अली ने नाराजगी जताई और शहर मुफ्ती के इस्तीफे की मांग कर दी। विवाद के बीच हाफिज अहमद शाहमीरी खुर्रम ने भी वीडियो जारी कर शहर मुफ्ती के बयान पर सवाल खड़े किए हैं।

    दरअसल ईद मिलादुन्नबी के मौके पर निकले पारंपरिक जुलूस में महिला अखाड़े की प्रतिभागियों ने हाथों में तलवारें लेकर करतब दिखाए थे। सामने आई तस्वीरों में बुर्का पहने महिलाएं अखाड़े के प्रदर्शन में हिस्सा लेती दिखाई दे रही हैं। कुछ प्रतिभागियों के हाथों में घुमावदार तलवारें भी नजर आ रही हैं। आसपास बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे और कई लोग मोबाइल फोन से इस प्रदर्शन का वीडियो बनाते नजर आए। इसी प्रदर्शन को लेकर शहर मुफ्ती अबुल कलाम ने सवाल उठाते हुए इसे डांस बताया और जुलूस की धार्मिक गरिमा को लेकर आपत्ति जताई।

    मुस्लिम त्योहार कमेटी ने शहर मुफ्ती की इस टिप्पणी को गलत करार दिया है। जिला अध्यक्ष ओसाफ अली का कहना है कि प्रदर्शन को पूरी जानकारी लिए बिना डांस कहना उचित नहीं है। उनके मुताबिक जुलूस में शामिल बच्चियां और महिलाएं किसी मनोरंजन के लिए डांस नहीं कर रही थीं बल्कि अखाड़े की पारंपरिक कला और आत्मरक्षा से जुड़े हुनर का प्रदर्शन कर रही थीं। उनका कहना है कि ऐसे प्रदर्शन से महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ता है और इसे प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

    हाफिज अहमद शाहमीरी खुर्रम ने भी वीडियो जारी कर कहा कि शहर मुफ्ती को प्रदर्शन पर टिप्पणी करने से पहले पूरा संदर्भ समझना चाहिए था। उन्होंने दावा किया कि वीडियो को ध्यान से देखने पर साफ होता है कि बच्चियां डांस नहीं बल्कि अखाड़े के करतब और सेल्फ डिफेंस का प्रदर्शन कर रही थीं। उन्होंने धार्मिक और ऐतिहासिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए आत्मरक्षा के लिए हथियार चलाने की कला को केवल डांस के रूप में देखने पर सवाल उठाया।

    विवाद के दौरान उन्होंने शहर मुफ्ती से यह भी अपील की कि यदि किसी सामाजिक या धार्मिक गतिविधि पर प्रतिक्रिया देनी है तो सभी मामलों में समान मापदंड अपनाया जाना चाहिए। उन्होंने यूसीसी और एनआरसी जैसे मुद्दों तथा मसाजिद कमेटी से जुड़े कुछ मामलों का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि कुछ गतिविधियों पर प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी गई जबकि महिला अखाड़े के प्रदर्शन पर टिप्पणी की गई।

    ओसाफ अली ने शहर मुफ्ती के पद की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यह पद समाज का मार्गदर्शन करने और लोगों को जोड़ने का है। उन्होंने आरोप लगाया कि धार्मिक पद पर रहते हुए राजनीतिक बयानबाजी से बचना चाहिए। उन्होंने काज़ियात कैंपस में पूर्व में हुए कुछ कार्यक्रमों का भी जिक्र किया और दावा किया कि वहां ढोल नगाड़े बजने तथा राजनीतिक कार्यक्रमों के वीडियो सामने आए थे। उनका सवाल है कि यदि उन गतिविधियों पर आपत्ति नहीं जताई गई तो महिला अखाड़े के पारंपरिक प्रदर्शन पर सवाल क्यों उठाया गया।

    कमेटी ने साफ किया कि उसका उद्देश्य किसी धार्मिक व्यक्ति का अपमान करना नहीं है बल्कि धार्मिक पद की गरिमा और निष्पक्षता को लेकर जवाब मांगना है। ओसाफ अली ने शहर मुफ्ती अब्दुल कलाम के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि जिम्मेदारी ऐसे व्यक्ति को दी जानी चाहिए जो योग्य होने के साथ निष्पक्ष रूप से समाज का मार्गदर्शन कर सके। फिलहाल महिला अखाड़े के प्रदर्शन को लेकर शुरू हुआ यह विवाद धार्मिक परंपरा आत्मरक्षा की कला और धार्मिक नेतृत्व की भूमिका को लेकर बहस का विषय बन गया है।

  • फतवा वायरल होने पर बढ़ा विवाद, मुस्लिम त्योहार कमेटी पहुंची थाने; शहर काजी को बदनाम करने की साजिश का आरोप

    फतवा वायरल होने पर बढ़ा विवाद, मुस्लिम त्योहार कमेटी पहुंची थाने; शहर काजी को बदनाम करने की साजिश का आरोप


    नई दिल्ली। राजधानी में सोशल मीडिया पर वायरल हुए फतवे को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। मंगलवार को ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी के पदाधिकारी शाहजहांनाबाद थाने पहुंचे और थाना प्रभारी को ज्ञापन सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।

    कमेटी ने आरोप लगाया कि यह फतवा सुनियोजित तरीके से सोशल मीडिया पर वायरल कर शहर काजी की छवि धूमिल करने और शहर का माहौल बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है।कमेटी ने आरोप लगाया कि यह फतवा सुनियोजित तरीके से सोशल मीडिया पर वायरल कर शहर काजी की छवि धूमिल करने और शहर का माहौल बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है।

    जानकारी के मुताबिक, पीरगेट निवासी सैयद सोहेल अली ने 6 मार्च 2026 को दारुल इफ्ता, मसाजिद कमेटी भोपाल से एक बीमारी के आधार पर फतवा मांगा था। इसके जवाब में 10 मार्च को फतवा जारी किया गया, जिस पर मुफ्ती-ए-शहर अब्दुल कलाम, मुफ्ती रईस और मुफ्ती जसीम दाद के हस्ताक्षर हैं।

    कमेटी का कहना है कि यह फतवा मूल रूप से एक व्यक्तिगत दस्तावेज था, लेकिन पिछले एक-दो दिनों से इसे सोशल मीडिया पर वायरल किया जा रहा है, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं।

    कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहम्मद दानिश ने कहा कि “फतवा किसी व्यक्ति विशेष के लिए होता है, लेकिन उसे सार्वजनिक कर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है। यह एक साजिश हो सकती है, जिसका उद्देश्य शहर काजी को पद से हटाना है।”

    वहीं, संरक्षक शमशुल हसन ने मांग की कि फतवा लेने वाले, जारी करने वाले और उसे वायरल करने वाले—तीनों की जांच होनी चाहिए। उनका कहना है कि ईद से ठीक पहले इस तरह की घटना समाज में आक्रोश पैदा कर सकती है।

    कमेटी ने यह भी कहा कि परंपरा के अनुसार ईद पर शहर काजी ही ईदगाह में नमाज अदा कराते हैं, ऐसे में इस समय फतवा वायरल होना कई सवाल खड़े करता है और माहौल बिगड़ने की आशंका बढ़ा रहा है।

    उधर, शाहजहांनाबाद थाना प्रभारी यूपीएस चौहान ने बताया कि कमेटी की शिकायत मिल गई है और पूरे मामले की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह पता लगाया जाएगा कि फतवा सोशल मीडिया पर किसने वायरल किया।

    साथ ही पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि ईद को देखते हुए शहर में सुरक्षा और व्यवस्थाओं के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं, ताकि किसी भी तरह की अव्यवस्था न हो।