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  • अनिवेशकों सावधान! कच्चे तेल के चलते 15 साल के सबसे बड़े संकट की ओर बाजार, सोना और चांदी भी डॉलर की मजबूती के आगे पस्त

    अनिवेशकों सावधान! कच्चे तेल के चलते 15 साल के सबसे बड़े संकट की ओर बाजार, सोना और चांदी भी डॉलर की मजबूती के आगे पस्त


    नई दिल्ली : पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने भारतीय निवेशकों की नींद उड़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान स्थिति निवेश के हर मोर्चे-चाहे वह शेयर बाजार हो, सोना-चांदी हो या म्यूचुअल फंड-के लिए बड़ा झटका साबित हो रही है। इस पूरे संकट की धुरी “कच्चा तेल” बना हुआ है, जिसके बेतहाशा बढ़ते दाम वैश्विक अर्थव्यवस्था के पहियों को जाम कर रहे हैं। यदि तनाव बढ़ता है और होर्मुज जलमार्ग Strait of Hormuzपर तेल की आपूर्ति 4 से 8 सप्ताह तक बाधित रहती है, तो कच्चे तेल की कीमत 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। ऐसी स्थिति में भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए शेयर बाजार में भारी गिरावट और आसमान छूती महंगाई का दोहरा संकट खड़ा होना तय है।

    बाजार विश्लेषकों के अनुसार, पिछले 15 वर्षों में भारतीय बाजार ने कई युद्ध और वैश्विक संकट देखे हैं, लेकिन यह पहली बार है जब सभी एसेट क्लास Asset Classesमें एक साथ गिरावट दर्ज की जा रही है। इसका सीधा असर विदेशी संस्थागत निवेशकों FPI के व्यवहार पर दिख रहा है, जिन्होंने इस महीने भारतीय बाजार से लगभग 52,704 करोड़ रुपये की भारी बिकवाली की है। निवेशक अब जोखिम भरे इक्विटी मार्केट से पैसा निकालकर सुरक्षित माने जाने वाले डॉलर और बॉन्ड्स की ओर रुख कर रहे हैं। गौरतलब है कि कच्चे तेल के दाम संघर्ष की शुरुआत के समय 72.48 डॉलर प्रति बैरल थे, जो मार्च तक 65% की उछाल के साथ 119 डॉलर के पार निकल गए थे, और अब एक बार फिर 100 डॉलर के ऊपर बने हुए हैं।

    इस अनिश्चितता का सबसे चौंकाने वाला असर सोने और चांदी पर पड़ा है। आम तौर पर युद्ध के समय सोने की कीमतें बढ़ती हैं, लेकिन इस बार डॉलर की मजबूती ने इसे फीका कर दिया है। फरवरी के अंत से अब तक सोना 6% और चांदी 9% तक टूट चुकी है। चूंकि कच्चे तेल का व्यापार डॉलर में होता है, तेल की कीमतें बढ़ने से डॉलर की मांग और मजबूती बढ़ जाती है, जिसका सीधा दबाव कीमती धातुओं पर पड़ता है। वहीं, म्यूचुअल फंड सेक्टर में भी घबराहट साफ देखी जा सकती है; फरवरी में जहां 65.7 लाख नए SIP खाते खुले, वहीं लगभग 49.7 लाख खाते बंद भी हो गए, जिससे ‘एसआईपी स्टॉपेज अनुपात’ बढ़कर 76% के खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है।

    हालांकि, विशेषज्ञों का एक धड़ा यह भी मानता है कि भारतीय बाजार हर बड़े झटके से उबरने का माद्दा रखता है। उदाहरण के तौर पर, 2020 के कोविड संकट के दौरान बाजार ने जितनी बड़ी गिरावट देखी थी, उसके अगले कुछ ही वर्षों में निवेशकों को 21-22% तक का शानदार रिटर्न भी दिया। फिलहाल ऑटो, बैंकिंग और कंज्यूमर सेक्टर के शेयरों पर बिकवाली का सबसे ज्यादा दबाव है, लेकिन लंबी अवधि के निवेशकों के लिए इतिहास गवाह है कि संकट के बाद बाजार हमेशा मजबूती से वापसी करता है। आगे की राह इस बात पर टिकी है कि मध्य-पूर्व का यह तनाव कितनी जल्दी शांत होता है।

  • निवेशकों का भरोसा बरकरार! फरवरी में म्यूचुअल फंड SIP इनफ्लो 29,845 करोड़ रुपये पहुंचा

    निवेशकों का भरोसा बरकरार! फरवरी में म्यूचुअल फंड SIP इनफ्लो 29,845 करोड़ रुपये पहुंचा


    नई दिल्ली। म्यूचुअल फंड में निवेश का लोकप्रिय माध्यम बन चुके SIP (सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) के जरिए फरवरी 2026 में 29,845 करोड़ रुपये का निवेश आया। यह आंकड़ा जनवरी 2026 के 31,002 करोड़ रुपये से थोड़ा कम रहा। यह जानकारी Association of Mutual Funds in India (AMFI) द्वारा मंगलवार को जारी किए गए आंकड़ों से सामने आई है।

    हालांकि, सालाना आधार पर निवेश में मजबूत बढ़त देखने को मिली है। फरवरी 2025 में SIP इनफ्लो 25,999 करोड़ रुपये था, जबकि इस साल यह बढ़कर 29,845 करोड़ रुपये हो गया। यानी एक साल में करीब 15 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो म्यूचुअल फंड में बढ़ते निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है।

    इक्विटी फंड में भी बढ़ा निवेश
    इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेशकों की दिलचस्पी लगातार बनी हुई है। फरवरी में नेट इक्विटी इनफ्लो बढ़कर 25,977.91 करोड़ रुपये हो गया, जो जनवरी में 24,028.59 करोड़ रुपये था। यह संकेत देता है कि बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेशक इक्विटी फंड में निवेश जारी रखे हुए हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि लंबी अवधि के निवेश के लिए SIP और इक्विटी फंड को निवेशक बेहतर विकल्प मान रहे हैं। यही कारण है कि बाजार में अस्थिरता के बावजूद निवेश की रफ्तार बनी हुई है।

    फ्लेक्सी कैप फंड में सबसे ज्यादा निवेश
    फरवरी में सबसे अधिक निवेश Flexi Cap Funds में देखा गया। इस श्रेणी में 6,924.65 करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो दर्ज किया गया। हालांकि यह आंकड़ा जनवरी के 7,672.36 करोड़ रुपये से थोड़ा कम रहा।

    वहीं Multi Cap Funds में फरवरी के दौरान 1,933.53 करोड़ रुपये का निवेश आया, जो जनवरी के 1,995.23 करोड़ रुपये से थोड़ा कम है।

    इसके अलावा Large Cap Funds में निवेश बढ़कर 2,111.68 करोड़ रुपये हो गया, जबकि जनवरी में यह 2,004.98 करोड़ रुपये था।

    मिडकैप और स्मॉलकैप फंड में भी निवेशकों की दिलचस्पी
    मिडकैप और स्मॉलकैप फंड में भी निवेशकों की रुचि बनी रही। फरवरी में Mid Cap Funds में 4,002.99 करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो दर्ज किया गया। वहीं Small Cap Funds में निवेश बढ़कर 3,881.06 करोड़ रुपये हो गया, जो जनवरी में 2,942.11 करोड़ रुपये था।

    इसके अलावा Sectoral and Thematic Funds में भी निवेश बढ़कर 2,987.29 करोड़ रुपये हो गया, जो जनवरी के 1,042.56 करोड़ रुपये से काफी ज्यादा है।

    म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का AUM भी बढ़ा
    फरवरी के अंत तक म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का इक्विटी एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) बढ़कर 35,39,475.91 करोड़ रुपये हो गया। जनवरी में यह 34,86,777.63 करोड़ रुपये था।

    अगर डेट फंड को मिलाकर देखा जाए तो कुल AUM (Assets Under Management) फरवरी के अंत तक 82,02,956.35 करोड़ रुपये पहुंच गया। वहीं पूरे फरवरी महीने में औसत AUM 83,42,616.57 करोड़ रुपये रहा।

    इसके मुकाबले जनवरी के अंत में कुल AUM 81,01,305.58 करोड़ रुपये था और पूरे महीने का औसत AUM 82,01,174.62 करोड़ रुपये रहा था।

    SIP के जरिए निवेश का ट्रेंड लगातार मजबूत
    विशेषज्ञों के मुताबिक SIP के जरिए निवेश का ट्रेंड लगातार मजबूत हो रहा है। छोटे निवेशकों से लेकर बड़े निवेशक तक नियमित निवेश के इस तरीके को अपनाते जा रहे हैं।

    बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद SIP निवेशकों को लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न देने का भरोसा देता है। यही वजह है कि हर महीने म्यूचुअल फंड उद्योग में SIP के जरिए बड़ी मात्रा में निवेश आता रहा है और भविष्य में भी इसके और बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। 📊