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  • रक्षाबंधन क्यों मनाते हैं? जानिए राखी से जुड़ी पौराणिक कहानियां

    रक्षाबंधन क्यों मनाते हैं? जानिए राखी से जुड़ी पौराणिक कहानियां


    उज्जैन।
    रक्षाबंधन भारत के उन त्योहारों में शामिल है, जिनका अर्थ केवल भाई की कलाई पर राखी बांधने तक सीमित नहीं है। सावन की पूर्णिमा पर मनाया जाने वाला यह पर्व भाई-बहन के स्नेह, विश्वास और एक-दूसरे के प्रति जिम्मेदारी का प्रतीक माना जाता है। समय के साथ राखी की परंपरा ने भी अलग-अलग रूप लिए और इसका अर्थ पारिवारिक रिश्ते से आगे बढ़कर सामाजिक एकता और भाईचारे तक पहुंचा।

    रक्षाबंधन का मतलब क्या है?

    ‘रक्षाबंधन’ शब्द संस्कृत के ‘रक्षा’ और ‘बंधन’ से मिलकर बना है, जिसका सामान्य अर्थ रक्षा का बंधन माना जाता है। इस दिन बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं, तिलक करती हैं, आरती उतारती हैं और उसके सुख-स्वास्थ्य की कामना करती हैं। भाई भी बहन की रक्षा और हर परिस्थिति में उसका साथ देने का संकल्प लेता है।

    हालांकि आज यह परंपरा सिर्फ सगे भाई-बहन तक सीमित नहीं है। कई जगह चचेरे-ममेरे भाई-बहन, मित्र और सामाजिक रूप से जुड़े लोग भी एक-दूसरे को राखी बांधते हैं।

    कृष्ण और द्रौपदी की कहानी

    रक्षाबंधन से जुड़ी सबसे चर्चित पौराणिक कथाओं में भगवान कृष्ण और द्रौपदी का प्रसंग शामिल है। महाभारत की प्रचलित कथा के अनुसार, एक बार कृष्ण की उंगली में चोट लगने पर खून निकल आया। द्रौपदी ने अपनी साड़ी का कपड़ा फाड़कर उनकी उंगली पर बांध दिया।

    मान्यता है कि कृष्ण ने इस स्नेह और अपनत्व को याद रखा। इसी प्रसंग को बाद में रक्षा के भाव से जोड़कर देखा गया और इसे राखी की परंपरा से संबंधित लोकप्रिय कथाओं में जगह मिली।

    राजा बलि और माता लक्ष्मी का प्रसंग

    रक्षाबंधन से जुड़ी एक अन्य कथा भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और राजा बलि की है। प्रचलित मान्यता के अनुसार, भगवान विष्णु राजा बलि की भक्ति से प्रसन्न होकर उनके राज्य की रक्षा के लिए वहां रहने लगे थे।

    माता लक्ष्मी विष्णु से अलग नहीं रहना चाहती थीं। कथा के अनुसार उन्होंने श्रावण पूर्णिमा के दिन राजा बलि की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा और उन्हें अपना भाई माना। इसके बाद बलि ने भगवान विष्णु को उनके साथ वैकुंठ लौटने की अनुमति दे दी। इस कहानी को श्रावण पूर्णिमा पर रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा से जोड़ा जाता है।

    यमराज और यमुना की कहानी

    एक अन्य लोकप्रिय कथा मृत्यु के देवता यमराज और उनकी बहन यमुना से जुड़ी है। मान्यता के अनुसार यमुना ने यमराज की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उनकी लंबी उम्र की कामना की थी।

    इसी प्रसंग के आधार पर रक्षाबंधन को भाई की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना से जोड़कर देखा जाता है।

    इंद्र की कलाई पर शुचि ने बांधा रक्षा सूत्र

    रक्षा सूत्र की शक्ति से जुड़ी एक और पौराणिक कथा देवताओं और असुरों के युद्ध की है। कहा जाता है कि युद्ध में इंद्र कमजोर पड़ रहे थे। तब उनकी पत्नी शुचि ने गुरु बृहस्पति की सलाह पर इंद्र की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा।

    इसके बाद इंद्र ने युद्ध में विजय हासिल की। इस कथा में रक्षा सूत्र को सुरक्षा, शक्ति और आत्मविश्वास के प्रतीक के तौर पर देखा जाता है।

    सिकंदर की पत्नी और राजा पुरु की कहानी कितनी प्रसिद्ध है?

    राखी से जुड़ी एक लोकप्रिय ऐतिहासिक कथा सिकंदर और भारतीय शासक राजा पुरु से संबंधित है। कहा जाता है कि सिकंदर की पत्नी ने राजा पुरु को राखी भेजकर उन्हें अपना भाई बनाया था। बाद में सिकंदर और पुरु के बीच युद्ध हुआ और प्रचलित कथा के अनुसार पुरु ने राखी के रिश्ते का सम्मान करते हुए सिकंदर को जीवनदान दिया।

    हालांकि इस प्रसंग को लेकर इतिहासकारों के बीच मतभेद हैं और इसे प्रमाणित ऐतिहासिक घटना की बजाय लोकप्रिय कथा के रूप में देखना अधिक उचित माना जाता है।


    रानी कर्णावती और हुमायूं की कहानी

    रक्षाबंधन से जुड़ी सबसे चर्चित ऐतिहासिक कहानियों में मेवाड़ की रानी कर्णावती और मुगल शासक हुमायूं का प्रसंग भी है। लोकप्रिय मान्यता के अनुसार, संकट के समय रानी कर्णावती ने हुमायूं को राखी भेजकर मदद मांगी थी।

    कहा जाता है कि हुमायूं ने इस रिश्ते का सम्मान किया और रानी की सहायता के लिए आगे बढ़ा। हालांकि इस कहानी के ऐतिहासिक प्रमाणों और घटनाक्रम को लेकर भी इतिहासकारों में बहस है।

    जब राखी बनी हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक

    रक्षाबंधन के इतिहास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव बंगाल विभाजन के विरोध से जुड़ा है। 1905 में ब्रिटिश सरकार द्वारा बंगाल विभाजन की घोषणा के दौरान रवींद्रनाथ टैगोर ने राखी को सामाजिक एकता और भाईचारे के प्रतीक के रूप में इस्तेमाल किया।

    टैगोर ने लोगों से एक-दूसरे की कलाई पर राखी बांधकर एकता का संदेश देने की अपील की। इस तरह राखी का अर्थ केवल भाई-बहन के रिश्ते तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सामाजिक सद्भाव और एकजुटता का प्रतीक भी बनी।

    रक्षाबंधन पर कैसे होती है पूजा और रस्म?

    रक्षाबंधन के दिन बहनें पूजा की थाली तैयार करती हैं। इसमें आमतौर पर राखी, कुमकुम, अक्षत, दीपक और मिठाई रखी जाती है। भाई को तिलक लगाने और आरती करने के बाद उसकी कलाई पर राखी बांधी जाती है। इसके बाद मिठाई खिलाई जाती है और भाई बहन को उपहार देता है।

    आजकल राखियों के स्वरूप में भी काफी बदलाव आया है। पारंपरिक धागे वाली राखियों के साथ चांदी, सोने, रुद्राक्ष, मोती और कई तरह की डिजाइन वाली राखियां बाजार में उपलब्ध होती हैं।

    देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग परंपराएं

    श्रावण पूर्णिमा का महत्व भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में अलग रूपों में दिखाई देता है।

    • नारली पूर्णिमा: महाराष्ट्र और कोंकण क्षेत्र में मछुआरा समुदाय समुद्र देवता वरुण की पूजा करता है और समुद्र में नारियल अर्पित करता है।
    • अवनि अवित्तम: दक्षिण भारत में कई ब्राह्मण समुदायों में इस दिन यज्ञोपवीत बदलने की परंपरा है। इसे उपाकर्म भी कहा जाता है।
    • कजरी पूर्णिमा: उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के कुछ क्षेत्रों में कजरी गीत, पूजा और अच्छी फसल की कामना से जुड़ी परंपराएं हैं।
    • झूलन पूर्णिमा: पश्चिम बंगाल और ओडिशा में राधा-कृष्ण को झूले पर विराजमान कर इस पर्व को मनाने की परंपरा है।

    समय के साथ बदल गया राखी का अर्थ

    रक्षाबंधन की सबसे खास बात यह है कि इसका मूल भाव रिश्ते में सुरक्षा और विश्वास है, लेकिन समय के साथ इसकी व्याख्या बदलती रही है। कभी यह भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक रहा, तो कभी सामाजिक एकता और भाईचारे का माध्यम बना।

    आज राखी को केवल भाई द्वारा बहन की रक्षा के वादे के रूप में देखने के बजाय एक-दूसरे के साथ खड़े रहने और रिश्ते की जिम्मेदारी निभाने के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है। यही बदलता अर्थ रक्षाबंधन को हर दौर में प्रासंगिक बनाए रखता है।

  • करीना कपूर खान और धनुष के साथ आने की चर्चा तेज, संजय लीला भंसाली के प्रोडक्शन की फिल्म पर निर्देशक ने दिया अहम संकेत

    करीना कपूर खान और धनुष के साथ आने की चर्चा तेज, संजय लीला भंसाली के प्रोडक्शन की फिल्म पर निर्देशक ने दिया अहम संकेत

    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेत्री करीना कपूर खान और दक्षिण भारतीय अभिनेता धनुष को लेकर इन दिनों एक नई फिल्म की चर्चा तेज हो गई है। खबरों के मुताबिक दोनों कलाकार संजय लीला भंसाली के प्रोडक्शन में बनने वाली एक पौराणिक जंगल एडवेंचर फिल्म का हिस्सा हो सकते हैं। हालांकि अभी दोनों कलाकारों की आधिकारिक कास्टिंग की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन फिल्म के निर्देशक पीएस मित्रन ने करीना और धनुष के साथ बातचीत चलने की पुष्टि की है।

    पीएस मित्रन के अनुसार फिल्म के लिए करीना कपूर खान और धनुष से बातचीत की जा रही है। कलाकारों की उपलब्ध तारीखों और अन्य जरूरी औपचारिकताओं पर चर्चा चल रही है। निर्देशक ने उम्मीद जताई है कि बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ेगी। उनके इस बयान के बाद फिल्म में दोनों कलाकारों के पहली बार साथ नजर आने की संभावनाओं को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है।

    बताया जा रहा है कि यह प्रोजेक्ट बड़े स्तर पर तैयार किया जा रहा है और फिलहाल इसकी पटकथा पर काम जारी है। कहानी को अंतिम रूप देने से पहले स्क्रिप्ट में कई स्तरों पर बदलाव किए जाने की बात सामने आई है। फिल्म की तैयारी को देखते हुए नवंबर 2026 के आसपास प्री-प्रोडक्शन शुरू होने और जनवरी 2027 में मुख्य शूटिंग शुरू किए जाने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि इन तारीखों को अभी अंतिम कार्यक्रम नहीं माना जा सकता।

    यदि यह परियोजना तय योजना के अनुसार आगे बढ़ती है, तो पीएस मित्रन के लिए भी यह हिंदी सिनेमा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। वह इससे पहले दक्षिण भारतीय सिनेमा में अपने काम के लिए पहचान बना चुके हैं। ऐसे में हिंदी फिल्म उद्योग में उनका निर्देशन और भंसाली के प्रोडक्शन का जुड़ाव इस परियोजना को लेकर अतिरिक्त चर्चा पैदा कर रहा है।

    करीना कपूर खान और धनुष की संभावित जोड़ी भी फिल्म की सबसे दिलचस्प बातों में शामिल है। दोनों कलाकारों ने अलग-अलग भाषाओं और शैलियों की फिल्मों में अपनी अभिनय क्षमता साबित की है, लेकिन दोनों को अब तक किसी फिल्म में एक साथ नहीं देखा गया है। इसलिए अगर यह कास्टिंग अंतिम रूप लेती है, तो दर्शकों के लिए यह एक नई ऑन-स्क्रीन जोड़ी होगी।

    इस परियोजना की चर्चा इसलिए भी खास है क्योंकि इसका संबंध करीना और संजय लीला भंसाली के पुराने विवाद से जोड़ा जा रहा है। वर्ष 2002 में भंसाली की फिल्म देवदास के लिए करीना को पारो की भूमिका के लिए संपर्क किए जाने और स्क्रीन टेस्ट देने की बात सामने आई थी। बाद में यह भूमिका ऐश्वर्या राय बच्चन ने निभाई थी। उस समय करीना ने इस घटनाक्रम पर अपनी नाराजगी जाहिर की थी, जबकि भंसाली ने स्पष्ट किया था कि स्क्रीन टेस्ट का अर्थ फिल्म में भूमिका पक्की होना नहीं था।

    करीना और भंसाली की संभावित नई फिल्म को लेकर इसलिए यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या वर्षों पुराना मतभेद अब पीछे छूट चुका है। हालांकि इस बारे में दोनों की ओर से किसी नए आधिकारिक बयान की पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि करीना और धनुष से बातचीत जारी है और फिल्म की स्क्रिप्ट तथा कास्टिंग को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। ऐसे में आने वाले समय में कलाकारों और शूटिंग से जुड़ी आधिकारिक घोषणा पर सभी की नजर रहेगी।

  • राजामौली की 'वाराणसी' में दिखेगा राम-कुंभकर्ण का महायुद्ध, लेखक विजयेंद्र प्रसाद ने दिए 30 मिनट के रोंगटे खड़े कर देने वाले सीक्वेंस के संकेत

    राजामौली की 'वाराणसी' में दिखेगा राम-कुंभकर्ण का महायुद्ध, लेखक विजयेंद्र प्रसाद ने दिए 30 मिनट के रोंगटे खड़े कर देने वाले सीक्वेंस के संकेत


    नई दिल्ली ।
    भारतीय सिनेमा जगत में अपनी भव्य और रिकॉर्डतोड़ फिल्मों के लिए मशहूर निर्देशक एसएस राजामौली की आगामी फिल्म ‘वाराणसी’ इन दिनों लगातार चर्चा का केंद्र बनी हुई है। पिछले साल हैदराबाद में इस फिल्म का पहला टीजर रिलीज होने के बाद से ही दर्शक इसके हर एक दृश्य को बारीकी से समझने का प्रयास कर रहे हैं। अब इस फिल्म को लेकर एक बेहद बड़ा और चौंकाने वाला अपडेट सामने आया है, जिसने सिनेमा प्रेमियों के बीच उत्सुकता को कई गुना बढ़ा दिया है। फिल्म के लेखक और राजामौली के पिता के. विजयेंद्र प्रसाद ने फिल्म के एक बेहद महत्वपूर्ण और भव्य एक्शन सीक्वेंस का हिंट दिया है।

    एक विशेष कार्यक्रम के दौरान जब विजयेंद्र प्रसाद से पूछा गया कि वह इस फिल्म के किस खास दृश्य के बारे में दर्शकों को थोड़ा संकेत देना चाहेंगे, तो उन्होंने सीधे तौर पर राम और कुंभकर्ण के बीच होने वाले महायुद्ध का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि फिल्म में यह युद्ध का सीक्वेंस लगभग 30 मिनट लंबा होने वाला है। लेखक के अनुसार, यह आधा घंटा दर्शकों को पूरी तरह से मंत्रमुग्ध कर देगा और उनके रोंगटे खड़े कर देगा। इस खुलासे के बाद से ही सोशल मीडिया पर इस बात को लेकर कयासबाजी शुरू हो गई है कि आखिर फिल्म में कुंभकर्ण का ताकतवर किरदार कौन सा अभिनेता निभाने जा रहा है, जिसमें अभिनेता पृथ्वीराज के नाम की चर्चा सबसे आगे है।

    विजयेंद्र प्रसाद ने फिल्म के टीजर का संदर्भ देते हुए कहा कि दर्शकों ने पहले ही इसकी एक छोटी सी झलक देखी है, जिसमें राम और कुंभकर्ण के आमने-सामने होने के साथ-साथ हनुमान जी की पूंछ और उस पर एक रथ दिखाई दे रहा है। जब उनसे यह जानने का प्रयास किया गया कि क्या इस फिल्म की कहानी में अलग-अलग टाइम जोन्स या समय काल का कोई कॉन्सेप्ट शामिल है, तो उन्होंने इस पर अधिक जानकारी देने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि फिल्म की गोपनीयता बनाए रखने के लिए फिलहाल इस विषय पर अधिक बात करना सही नहीं होगा, जिससे साफ है कि मेकर्स दर्शकों के लिए पर्दे पर बड़ा सरप्राइज प्लान कर रहे हैं।

    इस बीच निर्देशक एसएस राजामौली ने भी फिल्म के मुख्य अभिनेता महेश बाबू के लुक को लेकर अपनी भावनाएं साझा की हैं। राजामौली ने बताया कि जब पहले दिन महेश बाबू भगवान राम के लुक में फोटोशूट के लिए सेट पर आए, तो उनका वह रूप देखकर खुद निर्देशक के भी रोंगटे खड़े हो गए थे। उन्होंने कहा कि महेश बाबू के व्यक्तित्व में भगवान कृष्ण का आकर्षण और भगवान राम की असीम शांति एक साथ दिखाई देती है, जो इस किरदार के लिए पूरी तरह न्याय करती है। राजामौली ने उस लुक की तस्वीर को कुछ समय के लिए अपने फोन का वॉलपेपर भी बनाया था ताकि वे इसे बार-बार देख सकें, लेकिन बाद में गोपनीयता के कारण हटा दिया।

    ‘आरआरआर’ जैसी फिल्म से वैश्विक स्तर पर देश को ऑस्कर दिलाने वाले राजामौली इस बार ‘वाराणसी’ के जरिए तकनीकी और कहानी के स्तर पर एक नया कीर्तिमान स्थापित करने की तैयारी में हैं। फिल्म में पहली बार कुछ ऐसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है जो भारतीय सिनेमा में पहले कभी नहीं देखी गईं। प्रियंका चोपड़ा और महेश बाबू स्टारर इस फिल्म की रिलीज डेट की घोषणा के बाद से ही ट्रेड एनालिस्ट्स इसे आने वाले समय की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर मान रहे हैं। विजयेंद्र प्रसाद और राजामौली की यह जोड़ी एक बार फिर इतिहास दोहराने के लिए पूरी तरह तैयार है।