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  • रामायणम् ट्रेलर में नहीं दिखे हनुमान, सनी देओल ने खुद बताई वजह, बोले- किरदार निभाने के लिए अभी बाकी है लंबा सफर

    रामायणम् ट्रेलर में नहीं दिखे हनुमान, सनी देओल ने खुद बताई वजह, बोले- किरदार निभाने के लिए अभी बाकी है लंबा सफर

    नई दिल्ली । बहुप्रतीक्षित फिल्म रामायणम् का ट्रेलर रिलीज होने के बाद दर्शकों के बीच इसे लेकर उत्साह बढ़ गया है। नितेश तिवारी के निर्देशन और नमित मल्होत्रा के निर्माण में बन रही इस फिल्म में भारतीय पौराणिक कथा को बड़े स्तर पर पेश करने की तैयारी की जा रही है। ट्रेलर में भगवान राम, माता सीता और रावण समेत कई प्रमुख किरदारों की झलक दिखाई गई, लेकिन राम भक्त हनुमान के किरदार में नजर आने वाले सनी देओल की अनुपस्थिति ने दर्शकों का ध्यान खींच लिया।

    ट्रेलर रिलीज होने के बाद सोशल मीडिया पर कई प्रशंसकों ने सवाल उठाया कि आखिर हनुमान के महत्वपूर्ण किरदार को दिखाया क्यों नहीं गया। फिल्म में हनुमान की भूमिका सनी देओल निभा रहे हैं, लेकिन ट्रेलर के चार मिनट से ज्यादा लंबे वीडियो में उनकी कोई झलक नहीं दिखाई गई। हालांकि इसके पीछे की वजह खुद सनी देओल पहले ही बता चुके हैं।

    ट्रेलर लॉन्च कार्यक्रम के दौरान सनी देओल ने हनुमान के किरदार को लेकर अपनी तैयारी और अनुभव के बारे में बात की थी। उन्होंने कहा था कि उन्होंने अभी तक फिल्म के लिए बहुत कम काम किया है और इस किरदार के लिए अभी काफी लंबा सफर तय करना बाकी है। अभिनेता ने यह भी कहा था कि हनुमान जी का किरदार निभाना उनके लिए सम्मान की बात है और इसे निभाना आसान नहीं होगा।

    सनी देओल ने बताया था कि हनुमान का व्यक्तित्व बेहद खास है। वह एक साथ सरल, मासूम, शक्तिशाली और समर्पित चरित्र हैं। ऐसे किरदार को पर्दे पर सही तरीके से प्रस्तुत करना बड़ी जिम्मेदारी है। अभिनेता ने इस भूमिका के अवसर के लिए आभार भी जताया था और कहा था कि यह उनके करियर का एक अलग और यादगार अनुभव हो सकता है।

    रामायणम् के ट्रेलर में भगवान राम के रूप में रणबीर कपूर, माता सीता के रूप में साई पल्लवी और रावण के रूप में यश दिखाई दिए। इसके अलावा अरुण गोविल, लारा दत्ता, रवि दुबे, रकुल प्रीत सिंह और विवेक ओबेरॉय जैसे कलाकारों की झलक भी देखने को मिली। ट्रेलर की शुरुआत रावण के प्रभावशाली किरदार से होती है, जिसमें उसकी शक्ति और साम्राज्य को दिखाया गया है।

    फिल्म की कहानी भारतीय महाकाव्य रामायण पर आधारित है, जिसे आधुनिक तकनीक और बड़े पैमाने पर प्रस्तुत करने की तैयारी है। फिल्म का संगीत एआर रहमान और हांस जिमर तैयार कर रहे हैं। रामायणम् को दो भागों में रिलीज किया जाएगा। फिल्म का पहला भाग दीपावली 2026 और दूसरा भाग दीपावली 2027 में दर्शकों के सामने आने की योजना है।

    4000 करोड़ रुपये के बड़े बजट वाली इस फिल्म को भारतीय सिनेमा की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है। निर्माताओं की कोशिश है कि फिल्म के हर किरदार को प्रभावशाली तरीके से पेश किया जाए। यही वजह है कि हनुमान जैसे महत्वपूर्ण पात्र को लेकर विशेष तैयारी की जा रही है।

    सनी देओल की लोकप्रियता और उनके दमदार अभिनय को देखते हुए दर्शकों को अब फिल्म में उनके हनुमान रूप की पहली झलक का इंतजार है। हालांकि ट्रेलर में उनकी अनुपस्थिति ने उत्सुकता बढ़ा दी है और आने वाले समय में उनके किरदार को लेकर और जानकारी सामने आने की उम्मीद है।

  • ‘रामायणम्’ के ट्रेलर में रणबीर कपूर, यश और साई पल्लवी समेत प्रमुख कलाकारों के किरदारों की पहली झलक सामने आई है।

    ‘रामायणम्’ के ट्रेलर में रणबीर कपूर, यश और साई पल्लवी समेत प्रमुख कलाकारों के किरदारों की पहली झलक सामने आई है।

    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा की बहुप्रतीक्षित पौराणिक फिल्म ‘रामायणम्’ का ट्रेलर हाल ही में जारी किया गया है। फिल्म की पहली झलक सामने आते ही दर्शकों के बीच इसे लेकर उत्सुकता बढ़ गई है। महाकाव्य रामायण पर आधारित इस बड़े प्रोजेक्ट में कई प्रमुख कलाकार महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आने वाले हैं। ट्रेलर में भगवान राम के किरदार में रणबीर कपूर, रावण के रूप में यश और सीता के रूप में साई पल्लवी की पहली झलक दिखाई गई है।

    फिल्म के ट्रेलर में भव्य सेट, युद्ध के दृश्य और पौराणिक वातावरण को बड़े स्तर पर प्रस्तुत किया गया है। निर्माताओं ने कहानी के प्रमुख पात्रों और उनके स्वरूप को दर्शकों के सामने पेश करने की कोशिश की है। रणबीर कपूर का राम अवतार इस ट्रेलर का मुख्य आकर्षण बना हुआ है, वहीं यश का रावण रूप भी दर्शकों का ध्यान खींच रहा है।

    ‘रामायणम्’ में रणबीर कपूर भगवान राम की भूमिका निभा रहे हैं। उनके किरदार को लेकर लंबे समय से चर्चा चल रही थी। ट्रेलर में उनके चरित्र को गंभीर और मर्यादित रूप में दिखाया गया है। वहीं दक्षिण भारतीय सिनेमा के लोकप्रिय अभिनेता यश फिल्म में रावण की भूमिका निभा रहे हैं। उनके किरदार को एक प्रभावशाली और शक्तिशाली रूप में पेश किया गया है।

    फिल्म में साई पल्लवी माता सीता की भूमिका में दिखाई देंगी। उनके किरदार की झलक भी ट्रेलर में देखने को मिली है। इसके अलावा रवि दुबे लक्ष्मण के किरदार में नजर आएंगे। लोकप्रिय अभिनेता अरुण गोविल एक बार फिर रामायण से जुड़े किरदार में दिखाई देंगे, इस बार वह राजा दशरथ की भूमिका निभा रहे हैं।

    फिल्म में रकुलप्रीत सिंह शूर्पणखा के किरदार में और विवेक ओबरॉय विद्युतजीह्व की भूमिका में नजर आएंगे। अलग-अलग कलाकारों के जुड़ने से फिल्म का स्टार कास्ट काफी मजबूत हो गया है। निर्माताओं ने पौराणिक कथा के प्रमुख पात्रों को बड़े पर्दे पर नए अंदाज में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है।

    रामायण भारतीय संस्कृति और साहित्य की सबसे महत्वपूर्ण कथाओं में से एक है। इस पर पहले भी कई फिल्में और धारावाहिक बनाए जा चुके हैं, लेकिन आधुनिक तकनीक और बड़े बजट के साथ बनाई जा रही ‘रामायणम्’ को अलग स्तर पर पेश करने की तैयारी की गई है। फिल्म में दृश्य प्रभावों और भव्य प्रस्तुति पर विशेष ध्यान दिया गया है।

    ट्रेलर रिलीज होने के बाद सोशल मीडिया पर फिल्म के किरदारों और प्रस्तुति को लेकर दर्शकों की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। खासतौर पर रणबीर कपूर और यश के लुक को लेकर चर्चा हो रही है। दर्शक अब फिल्म की रिलीज का इंतजार कर रहे हैं।

    ‘रामायणम्’ के जरिए एक बार फिर भारतीय पौराणिक कथा को बड़े पर्दे पर नए रूप में देखने का मौका मिलेगा। फिल्म की कहानी, कलाकारों का अभिनय और भव्य निर्माण इसे साल की चर्चित फिल्मों में शामिल कर रहे हैं। अब दर्शकों की नजर फिल्म की रिलीज और इसके अंतिम प्रदर्शन पर टिकी हुई है।

  • 'श्री रामभूमि' के फर्स्ट लुक पर छिड़ी सियासी बहस, सुप्रिया श्रीनेत के सवाल पर अनुपम खेर का जवाब बना चर्चा का विषय

    'श्री रामभूमि' के फर्स्ट लुक पर छिड़ी सियासी बहस, सुप्रिया श्रीनेत के सवाल पर अनुपम खेर का जवाब बना चर्चा का विषय

    नई दिल्ली ।अभिनेता अनुपम खेर अपनी आगामी फिल्म ‘श्री रामभूमि’ को लेकर इन दिनों लगातार चर्चा में हैं। फिल्म में उनके निभाए जाने वाले किरदार का पहला लुक सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसकी व्यापक चर्चा शुरू हो गई। इसी बीच कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत द्वारा उनकी पोस्ट पर पूछे गए एक सवाल और उस पर अभिनेता के जवाब ने इस विषय को राजनीतिक और सामाजिक विमर्श का हिस्सा बना दिया है। दोनों नेताओं की पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दर्ज कराईं।

    अनुपम खेर ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया मंच पर फिल्म ‘श्री रामभूमि’ से जुड़ा अपना पहला लुक साझा करते हुए बताया कि वह इस फिल्म में श्री अशोक सिंघल की भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि यह उनके लिए केवल एक फिल्मी किरदार नहीं, बल्कि इतिहास से जुड़े एक महत्वपूर्ण व्यक्तित्व को संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ पर्दे पर प्रस्तुत करने का अवसर है। उन्होंने यह भी लिखा कि वह अपने अभिनय के माध्यम से इस भूमिका के साथ न्याय करने का पूरा प्रयास करेंगे और दर्शकों के आशीर्वाद की अपेक्षा रखते हैं।

    इसी पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने उनसे द्वापर और त्रेता युग के अंतर को लेकर सवाल पूछा। यह टिप्पणी सामने आते ही सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हो गई। इसके जवाब में अनुपम खेर ने लिखा कि उन्हें इस विषय की जानकारी नहीं है और उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि यदि सुप्रिया श्रीनेत इस विषय की अच्छी जानकार हैं तो वह उनसे सीखना चाहेंगे। उन्होंने अपने जवाब के अंत में ‘जय श्री राम’ लिखते हुए उनसे भी उसी शब्द के साथ उत्तर देने का आग्रह किया।

    दोनों नेताओं के बीच हुई इस सार्वजनिक बातचीत के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया। कुछ लोगों ने अनुपम खेर के जवाब का समर्थन किया, जबकि कुछ अन्य ने सुप्रिया श्रीनेत की टिप्पणी पर अपनी राय व्यक्त की। कई उपयोगकर्ताओं ने इस पूरे संवाद को राजनीतिक दृष्टि से देखा, वहीं कुछ ने इसे केवल सोशल मीडिया पर हुई सामान्य बहस बताया। विभिन्न विचारों के बीच यह विषय तेजी से चर्चा में बना रहा।

    फिल्म ‘श्री रामभूमि’ पहले से ही अपने विषय और कलाकारों के कारण लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है। अनुपम खेर द्वारा निभाया जा रहा किरदार राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े प्रमुख व्यक्तित्व अशोक सिंघल पर आधारित है। अभिनेता ने अपनी पोस्ट में कहा कि इस भूमिका को निभाना उनके लिए सम्मान और जिम्मेदारी दोनों है तथा वह इसे पूरी गंभीरता के साथ निभाने का प्रयास कर रहे हैं।

    हाल के दिनों में अनुपम खेर राम मंदिर से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर भी अपनी राय सार्वजनिक रूप से रखते रहे हैं। उन्होंने पहले भी राम मंदिर से संबंधित विवादों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि किसी भी प्रकार के आरोपों या विवादों का प्रभाव लोगों की धार्मिक आस्था पर नहीं पड़ना चाहिए। उनका मानना था कि किसी संस्था या स्थान की गरिमा को व्यक्तिगत आरोपों के आधार पर नहीं आंका जाना चाहिए।

    फिल्म ‘श्री रामभूमि’ की रिलीज से पहले ही उससे जुड़े विषयों और कलाकारों को लेकर चर्चा लगातार बढ़ रही है। सोशल मीडिया पर हुई ताजा बहस ने भी फिल्म को अतिरिक्त सार्वजनिक ध्यान दिलाया है। आने वाले समय में फिल्म से जुड़े नए अपडेट और आधिकारिक घोषणाओं पर दर्शकों की नजर बनी रहेगी।

  • 'रामायण' की पहली झलक का इंतजार खत्म, 24 जुलाई को दुनिया भर में रिलीज होगा ट्रेलर, भव्य स्टारकास्ट और बड़े पैमाने पर तैयार फिल्म

    'रामायण' की पहली झलक का इंतजार खत्म, 24 जुलाई को दुनिया भर में रिलीज होगा ट्रेलर, भव्य स्टारकास्ट और बड़े पैमाने पर तैयार फिल्म


    नई दिल्ली । निर्देशक नितेश तिवारी की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘रामायण’ को लेकर दर्शकों का उत्साह लगातार बढ़ता जा रहा है। फिल्म की घोषणा के बाद से ही इसकी कहानी, कलाकारों और निर्माण स्तर को लेकर चर्चाएं बनी हुई हैं। अब दर्शकों के लंबे इंतजार पर विराम लगाते हुए मेकर्स ने फिल्म के पहले भाग के ट्रेलर की रिलीज तारीख का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। इसके अनुसार ‘रामायण पार्ट-1’ का ट्रेलर 24 जुलाई 2026 को दुनिया भर में एक साथ रिलीज किया जाएगा।

    मेकर्स ने सोशल मीडिया पर फिल्म का नया पोस्टर साझा करते हुए ट्रेलर लॉन्च की जानकारी दी। पोस्टर में भगवान राम और माता सीता के वनवास काल से पहले की झलक दिखाई गई है, जिसने दर्शकों की उत्सुकता और बढ़ा दी है। पोस्ट के साथ यह भी बताया गया कि फिल्म का ट्रेलर वैश्विक स्तर पर एक साथ रिलीज किया जाएगा, जिससे दुनिया भर के दर्शक एक ही समय पर इसकी पहली विस्तृत झलक देख सकेंगे।

    ‘रामायण’ को भारतीय सिनेमा की सबसे महत्वाकांक्षी फिल्मों में गिना जा रहा है। फिल्म दो भागों में रिलीज होगी, जिसमें पहले भाग में भगवान राम और माता सीता के जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंगों को प्रस्तुत किया जाएगा। मेकर्स का उद्देश्य इस पौराणिक कथा को आधुनिक तकनीक, भव्य विजुअल इफेक्ट्स और बड़े पैमाने के निर्माण के साथ दर्शकों के सामने पेश करना है, ताकि इसे वैश्विक स्तर पर भी नई पहचान मिल सके।

    फिल्म की स्टारकास्ट भी इसकी सबसे बड़ी खासियतों में शामिल है। भगवान राम की भूमिका में रणबीर कपूर नजर आएंगे, जबकि माता सीता का किरदार साई पल्लवी निभा रही हैं। रावण की भूमिका में अभिनेता यश दिखाई देंगे। वहीं, सनी देओल को भगवान हनुमान और रवि दुबे को लक्ष्मण की भूमिका में देखा जाएगा। अलग-अलग फिल्म उद्योगों के प्रमुख कलाकारों को एक साथ लाने की वजह से भी यह परियोजना लगातार चर्चा में बनी हुई है।

    निर्देशक नितेश तिवारी इस फिल्म को बड़े पैमाने पर तैयार कर रहे हैं। निर्माण से जुड़े दावों के अनुसार दोनों भागों पर कुल मिलाकर लगभग 4,000 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। यदि यह अनुमान सही साबित होता है तो ‘रामायण’ भारतीय सिनेमा की अब तक की सबसे महंगी फिल्म परियोजना बन सकती है। बड़े बजट के साथ-साथ फिल्म में अत्याधुनिक तकनीक, अंतरराष्ट्रीय स्तर के विजुअल इफेक्ट्स और विशाल सेटों का उपयोग किए जाने की भी जानकारी सामने आ चुकी है।

    फिल्म की घोषणा के बाद से दर्शकों के बीच इसके हर अपडेट को लेकर विशेष उत्सुकता बनी हुई है। अब ट्रेलर रिलीज की तारीख सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर फिल्म को लेकर चर्चा और तेज हो गई है। फिल्म प्रेमियों को उम्मीद है कि ट्रेलर में कहानी, किरदारों के लुक और तकनीकी स्तर की पहली विस्तृत झलक देखने को मिलेगी। आने वाले दिनों में ट्रेलर रिलीज के साथ फिल्म के प्रचार अभियान को भी गति मिलने की संभावना है। ऐसे में 24 जुलाई को रिलीज होने वाला ट्रेलर इस बहुप्रतीक्षित फिल्म के प्रति दर्शकों की उम्मीदों को और स्पष्ट करेगा तथा इसकी रिलीज से पहले उत्साह को नई ऊंचाई देगा।

  • घर की सुख-समृद्धि और धन लाभ से जुड़ा है झाड़ू का नियम, शनिवार और अमावस्या के खास मुहूर्त पर पुरानी वस्तु बदलने से दूर हो सकता है बड़ा वास्तु दोष

    घर की सुख-समृद्धि और धन लाभ से जुड़ा है झाड़ू का नियम, शनिवार और अमावस्या के खास मुहूर्त पर पुरानी वस्तु बदलने से दूर हो सकता है बड़ा वास्तु दोष

    नई दिल्ली । भारतीय सनातन परंपरा और वास्तु शास्त्र के प्राचीन सिद्धांतों में घर की हर छोटी-बड़ी वस्तु का संबंध परिवार की आर्थिक और मानसिक स्थिति से जोड़ा गया है। इसी कड़ी में घर की नियमित सफाई के लिए उपयोग होने वाली झाड़ू को केवल एक साधारण वस्तु न मानकर, धन की देवी महालक्ष्मी का प्रतीक और सकारात्मक ऊर्जा का संवाहक माना गया है। वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, दैनिक जीवन में अनजाने में की जाने वाली कुछ छोटी-सी गलतियां और झाड़ू का गलत दिशा में रखरखाव घर में कंगाली और आर्थिक तंगी का एक बड़ा कारण बन सकता है।

    आधुनिक जीवनशैली में अक्सर लोग घर की सफाई करने के बाद झाड़ू को किसी भी स्थान पर रख देते हैं, अथवा बहुत अधिक घिस जाने और टूटने के बाद भी उसका निरंतर उपयोग करते रहते हैं। वास्तु विज्ञान के मुताबिक, यह आदत घर की सकारात्मकता को नष्ट करती है। जब किसी झाड़ू के बाल झड़ने लगें या उसका हैंडल टूट जाए, तो उसे तुरंत घर से हटा देना चाहिए। टूटी हुई झाड़ू से सफाई करने पर घर के भीतर वित्तीय बाधाएं उत्पन्न होने लगती हैं और संचित धन अनावश्यक कार्यों में खर्च होने लगता है।

    शास्त्रों में पुरानी झाड़ू को घर से बाहर निकालने और नई झाड़ू को घर में प्रवेश कराने के लिए भी विशेष दिन और मुहूर्त निर्धारित किए गए हैं। किसी भी दिन झाड़ू बदलना वर्जित माना गया है। इसके लिए शनिवार का दिन सबसे उत्तम और शुभ फलदायी माना जाता है। शनिवार के दिन नई झाड़ू को उपयोग में लाने से घर की संचित नकारात्मक ऊर्जा और दरिद्रता का पूरी तरह से नाश होता है। इसके अलावा, अमावस्या की तिथि, शुक्ल पक्ष की एकादशी या किसी भी शुभ नक्षत्र के दौरान नई झाड़ू खरीदना घर की बरकत को बढ़ाने में सहायक सिद्ध होता है।

    इसके साथ ही, झाड़ू को रखने के स्थान और उसकी स्थिति को लेकर भी कड़े नियम बताए गए हैं। झाड़ू को कभी भी घर के मुख्य द्वार के ठीक सामने या ऐसी जगह पर नहीं रखना चाहिए, जहां बाहर से आने वाले किसी भी अतिथि की नजर उस पर सीधे पड़े। इसे हमेशा घर के किसी छिपे हुए और सुरक्षित स्थान पर ही लिटाकर रखना चाहिए। वास्तु के नियमों के अनुसार, झाड़ू को खड़ा करके रखना एक गंभीर दोष माना जाता है, जो घर के सदस्यों के बीच वैचारिक मतभेद और तनाव को बढ़ाता है। दिशाओं के संदर्भ में, इसे रखने के लिए हमेशा दक्षिण या दक्षिण-पश्चिम दिशा यानी नैऋत्य कोण का ही चुनाव करना सबसे अधिक उपयुक्त माना गया है।

    समय चक्र के अनुसार भी सफाई व्यवस्था के कुछ नियम निर्धारित किए गए हैं, जिनका उल्लंघन आर्थिक नुकसान का कारण बनता है। भारतीय परिवारों में सूर्यास्त के बाद यानी शाम के समय घर में झाड़ू लगाना पूरी तरह से वर्जित माना गया है। ऐसी मान्यता है कि संध्याकाल के समय सफाई करने से घर में मौजूद लक्ष्मी जी का अनादर होता है और वह घर से बाहर चली जाती हैं, जिससे परिवार को धन की कमी का सामना करना पड़ता है।

    वास्तु सिद्धांतों के अनुसार, पुरानी झाड़ू का विसर्जन करते समय भी बेहद सतर्क रहने की आवश्यकता होती है। जब भी घर में नई झाड़ू लाई जाए, तो पुरानी झाड़ू को केवल शनिवार या अमावस्या के दिन ही घर की सीमा से बाहर करना चाहिए। इसे किसी सुनसान स्थान पर या किसी बड़े पेड़ के नीचे छोड़ देना चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अनुपयोगी हो चुकी पुरानी झाड़ू को भूलकर भी जलाना नहीं चाहिए, क्योंकि झाड़ू को अग्नि के हवाले करना सीधे तौर पर महालक्ष्मी के अपमान के समान माना जाता है, जिससे घर की बरकत पूरी तरह से समाप्त हो सकती है।

  • आसमान से इतिहास तक पुष्पक विमान की कहानी और रामायणम् का अनोखा विजन

    आसमान से इतिहास तक पुष्पक विमान की कहानी और रामायणम् का अनोखा विजन


    नई दिल्ली । हनुमान जयंती के अवसर पर रिलीज हुए रामायणम् के पहले टीजर ने दर्शकों के बीच जबरदस्त उत्सुकता पैदा कर दी है। फिल्म में रणबीर कपूर श्रीराम की भूमिका में नजर आ रहे हैं और टीजर में उनकी झलक के साथ साथ जिस एक तत्व ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा वह है पुष्पक विमान। यह वही दिव्य विमान है जिसका उल्लेख रामायण में मिलता है और जिसे लेकर सदियों से जिज्ञासा बनी हुई है।

    टीजर में दिखाया गया पुष्पक विमान पारंपरिक चित्रण से अलग है। इसे फूल की आकृति से प्रेरित एक जीवंत संरचना की तरह प्रस्तुत किया गया है जो इसके नाम के अर्थ से मेल खाता है। अब तक रामलीलाओं और फिल्मों में इसे सामान्य उड़ने वाले रथ या पालकी के रूप में दिखाया जाता रहा है लेकिन इस बार इसकी डिजाइन अधिक कल्पनाशील और आधुनिक विजुअल इफेक्ट्स से भरपूर नजर आती है। यही कारण है कि दर्शकों के बीच इसकी चर्चा सबसे ज्यादा हो रही है।

    पौराणिक कथाओं में पुष्पक विमान को एक अद्भुत आकाशीय वाहन बताया गया है। रावण इसका उपयोग करता था और इसी के माध्यम से वह आकाश मार्ग से यात्रा करता था। सीता हरण की कथा में भी इसका उल्लेख मिलता है। युद्ध के बाद श्रीराम इसी विमान से सीता और लक्ष्मण के साथ लंका से अयोध्या लौटे थे। कहा जाता है कि यह विमान मूल रूप से कुबेर का था जिसे रावण ने बलपूर्वक छीन लिया था।

    प्राचीन ग्रंथों में इसकी विशेषताओं का वर्णन बेहद रोचक है। इसे मन की गति से चलने वाला बताया गया है जो आवश्यकता अनुसार आकार बदल सकता था। कुछ कथाओं में यह भी उल्लेख मिलता है कि देव शिल्पी विश्वकर्मा ने इसे बनाया था जबकि इसकी संरचना ऋषियों के ज्ञान पर आधारित थी। महर्षि भारद्वाज को विमान विद्या का ज्ञाता माना जाता है और उनके नाम से जुड़े ग्रंथों में भी विमानों के उल्लेख मिलते हैं।

    हालांकि इन सभी विवरणों को लेकर आज भी बहस जारी है कि यह वास्तविक विज्ञान था या महज कल्पना। कुछ लोग इसे प्राचीन भारत की उन्नत तकनीक का संकेत मानते हैं तो कुछ इसे काव्यात्मक अभिव्यक्ति बताते हैं। आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो ऐसे विमानों के अस्तित्व का कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला है लेकिन इन कथाओं ने कल्पना और नवाचार की सोच को जरूर प्रेरित किया है।

    रामायणम् के टीजर ने इसी रहस्य को एक नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया है। फिल्म के निर्देशक नितेश तिवारी ने तकनीक और परंपरा का मेल करते हुए पुष्पक विमान को एक नए रूप में दिखाने की कोशिश की है। यही वजह है कि यह सिर्फ एक पौराणिक वस्तु नहीं बल्कि एक सिनेमाई आकर्षण बन गया है।

    आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि फिल्म में इस दिव्य विमान को किस तरह विस्तार से दिखाया जाता है। क्या यह दर्शकों को प्राचीन विज्ञान की झलक देगा या फिर एक भव्य कल्पना के रूप में सामने आएगा। फिलहाल इतना तय है कि पुष्पक विमान ने एक बार फिर लोगों की कल्पना को पंख दे दिए हैं और इतिहास तथा मिथक के बीच की रेखा को और भी धुंधला कर दिया है।

  • सदीभर का सिनेमाई सफर कैसे रामायण ने हर दौर में जीता दर्शकों का दिल

    सदीभर का सिनेमाई सफर कैसे रामायण ने हर दौर में जीता दर्शकों का दिल


    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा के इतिहास में रामायण केवल एक कहानी नहीं बल्कि भावनाओं आस्था और सांस्कृतिक पहचान का आधार रही है यही कारण है कि सिनेमा की शुरुआत से लेकर आज के आधुनिक दौर तक यह महाकाव्य लगातार नए रूपों में दर्शकों के सामने आता रहा है और हर बार उतनी ही गहराई से लोगों के दिलों को छूता है

    इस सफर की शुरुआत साल 1917 में हुई जब दादासाहेब फाल्के ने मूक फिल्म लंका दहन बनाई उस दौर में तकनीक सीमित थी लेकिन आस्था असीम थी इस फिल्म में अण्णा सालुंके ने राम और सीता दोनों की भूमिका निभाई जो अपने आप में अनोखा प्रयोग था यह फिल्म भारतीय सिनेमा की शुरुआती सफलताओं में शामिल हुई और इसने पौराणिक कथाओं को परदे पर लाने की परंपरा शुरू की

    इसके बाद दशकों तक इस महागाथा पर फिल्में बनती रहीं राम राज्य जैसी फिल्में अपने समय की बड़ी हिट साबित हुईं जबकि संपूर्ण रामायण ने पूरी कथा को विस्तार से दिखाने की कोशिश की आगे चलकर रामायण द लीजेंड ऑफ प्रिंस रामा जैसी अंतरराष्ट्रीय स्तर की एनीमेशन फिल्म ने इस कहानी को वैश्विक पहचान दिलाई वहीं हनुमान बच्चों के बीच बेहद लोकप्रिय हुई

    अगर कुल आंकड़ों की बात करें तो मुख्य कथा पर लगभग पचास फिल्में बन चुकी हैं जबकि अलग अलग पात्रों और घटनाओं को जोड़कर यह संख्या साठ से ज्यादा हो जाती है एनीमेशन और लघु फिल्मों को मिलाकर यह आंकड़ा करीब दो सौ तक पहुंचता है जो इस बात का प्रमाण है कि हर दौर इस कथा को अपने तरीके से जीना चाहता है

    टीवी की दुनिया में रामानंद सागर की रामायण ने इतिहास रच दिया अरुण गोविल दीपिका चिखलिया और सुनील लहरी द्वारा निभाए गए किरदार इतने लोकप्रिय हुए कि दर्शकों ने उन्हें पूजनीय मान लिया 1987 से 1988 के बीच प्रसारित इस शो के दौरान सड़कों पर सन्नाटा छा जाता था और 2020 में दोबारा प्रसारण के समय भी इसने रिकॉर्ड तोड़ दिए

    इसके बाद भी कई टीवी शोज आए जैसे सीता के राम और श्रीमद रामायण कुल मिलाकर हिंदी में कई बड़े और छोटे संस्करण बनाए जा चुके हैं जो इस कथा की निरंतर लोकप्रियता को दर्शाते हैं

    अब एक बार फिर यह महाकाव्य बड़े स्तर पर लौट रहा है निर्देशक नितेश तिवारी की नई फिल्म रामायण में रणबीर कपूर साई पल्लवी यश सनी देओल जैसे बड़े कलाकार नजर आएंगे इसे वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करने की तैयारी है और इसका पहला भाग दिवाली 2026 में रिलीज होगा

    असल में रामायण की शक्ति इसकी कालातीतता में है इसमें त्याग कर्तव्य प्रेम और धर्म जैसे जीवन के मूल मूल्य समाहित हैं यही वजह है कि तकनीक बदलती है माध्यम बदलते हैं लेकिन यह कथा हर पीढ़ी के लिए नई बनी रहती है और आगे भी यूं ही प्रेरणा देती रहेगी

  • अनोखा शिव धाम: कच्छ के कल्याणेश्वर महादेव मंदिर में सदियों से टूटे शिवलिंग की होती है पूजा

    अनोखा शिव धाम: कच्छ के कल्याणेश्वर महादेव मंदिर में सदियों से टूटे शिवलिंग की होती है पूजा


    नई दिल्ली । गुजरात के कच्छ जिला में भुज के पास स्थित माधापार गांव का कल्याणेश्वर महादेव मंदिर आस्था और रहस्य का अनोखा संगम माना जाता है। इस मंदिर की सबसे खास बात यहां स्थापित शिवलिंग है जो सदियों से टूटी अवस्था में होने के बावजूद पूरी श्रद्धा और विधि विधान से पूजित हो रहा है।

    मान्यता है कि यह शिवलिंग मंदिर निर्माण से पहले से ही इसी स्वरूप में मौजूद था। समय के साथ जहां अन्य शिवलिंगों में परिवर्तन देखने को मिलता है वहीं यहां का शिवलिंग प्रारंभ से ही खंडित अवस्था में बताया जाता है। इसके बावजूद श्रद्धालु इसे भगवान शिव का साक्षात रूप मानकर जल दूध और बेलपत्र अर्पित करते हैं।

    खंडित होने पर भी पूजनीय

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिवलिंग किसी भी अवस्था में पूजनीय होता है। यही कारण है कि यहां टूटा हुआ शिवलिंग भी उतनी ही आस्था के साथ पूजित है। जबकि अन्य देवी देवताओं की मूर्तियों के लिए खंडित होने पर पूजा के अलग नियम बताए जाते हैं।

    रहस्यमयी मान्यताएं
    मंदिर से जुड़ी कई रहस्यमयी बातें भी श्रद्धालुओं के बीच प्रचलित हैं। कहा जाता है कि शिवलिंग पर चढ़ाया गया जल या दूध कहां जाता है यह स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देता। इसके अलावा मंदिर परिसर में सांप दिखाई देने की भी स्थानीय लोगों द्वारा चर्चा की जाती है जिसे शिव की उपस्थिति का प्रतीक माना जाता है।

    पौराणिक जुड़ाव
    इस मंदिर का संबंध पौराणिक कथाओं से भी जोड़ा जाता है। मान्यता है कि पांडव ने अपने अज्ञातवास के दौरान यहां तपस्या की थी और शिवलिंग की स्थापना की थी। कुछ लोककथाओं में कर्ण और छत्रपति शिवाजी महाराज के यहां पूजा करने का भी उल्लेख मिलता है। आज भी दूर दूर से श्रद्धालु इस अद्भुत शिवधाम के दर्शन के लिए पहुंचते हैं और अपनी मनोकामनाएं लेकर भगवान शिव की शरण में आते हैं।