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  • बारिश से पहले इंदौर में जर्जर भवनों पर चला बुलडोजर, जेल रोड का मकान ढहाया, एक मालिक को दो दिन की मोहलत

    बारिश से पहले इंदौर में जर्जर भवनों पर चला बुलडोजर, जेल रोड का मकान ढहाया, एक मालिक को दो दिन की मोहलत


    मध्य प्रदेश। मानसून के दौरान जर्जर भवनों से होने वाले संभावित हादसों को रोकने के लिए इंदौर नगर निगम ने शहरभर में विशेष अभियान शुरू कर दिया है। इसी क्रम में सोमवार को निगम की टीम ने जेल रोड स्थित एक खतरनाक मकान को मशीनों की मदद से ध्वस्त कर दिया। वहीं पास ही स्थित एक अन्य भवन की जर्जर गैलरी को हटाने के लिए मकान मालिक को दो दिन का अंतिम समय दिया गया है। इसके अलावा कुमार मोहल्ला में नगर निगम के पुराने और जर्जर क्वार्टरों को भी हटाने की कार्रवाई की गई।

    नगर निगम की कार्रवाई जोन क्रमांक-3 के अंतर्गत जेल रोड क्षेत्र में की गई, जहां लंबे समय से जर्जर हालत में खड़ा भवन लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा बना हुआ था। भवन अधिकारी पल्लवी पाल ने बताया कि नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल के निर्देश पर शहर के जर्जर भवनों का सर्वे कराया जा रहा है और जिन इमारतों से दुर्घटना की आशंका है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर हटाया जा रहा है।

    अधिकारियों के अनुसार जेल रोड स्थित भवन के समीप मेट्रो स्टेशन का निर्माण कार्य चल रहा है। निर्माण कार्य के दौरान लगातार हो रहे कंपन के कारण भवन की गैलरी हिलने लगी थी और उसके कभी भी गिरने की आशंका बनी हुई थी। इसी खतरे को देखते हुए निगम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पूरे भवन को गिरा दिया, ताकि बारिश के दौरान कोई बड़ा हादसा न हो।

    कार्रवाई के दौरान पास के एक अन्य मकान की गैलरी भी बेहद जर्जर पाई गई। भवन स्वामिनी विनोदिनी अग्रवाल मौके पर मौजूद नहीं थीं, इसलिए निगम ने उन्हें नोटिस जारी कर गैलरी हटाने के लिए दो दिन का समय दिया है। यदि निर्धारित अवधि में कार्रवाई नहीं की गई तो नगर निगम स्वयं गैलरी हटाकर खर्च की वसूली नियमानुसार करेगा।

    इसके बाद निगम का अमला कुमार मोहल्ला पहुंचा, जहां नगर निगम के पुराने और अनुपयोगी क्वार्टरों को हटाने की कार्रवाई की गई। कार्रवाई से पहले कर्मचारियों ने भवनों से सामान सुरक्षित बाहर निकलवाया और उसके बाद मशीनों की मदद से जर्जर ढांचों को तोड़ दिया गया।

    नगर निगम ने नागरिकों से भी अपील की है कि यदि उनके मकान का कोई हिस्सा कमजोर या जर्जर हो चुका है तो उसे समय रहते हटवा लें। इससे बारिश के दौरान भवन गिरने जैसी घटनाओं से बचा जा सकेगा और जनहानि की आशंका भी कम होगी। अधिकारियों का कहना है कि मानसून के पूरे मौसम में शहरभर में ऐसे जर्जर भवनों की पहचान कर कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।

  • दूषित पानी हादसे के बाद प्रशासन अलर्ट, कलेक्टर ने जलदाय व्यवस्था का किया निरीक्षण

    दूषित पानी हादसे के बाद प्रशासन अलर्ट, कलेक्टर ने जलदाय व्यवस्था का किया निरीक्षण


    नई दिल्ली । इंदौर में दूषित पेयजल से हुई गंभीर घटनाओं के बाद जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। शहर में कहीं भी पीने के पानी में गंदगी की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। शनिवार को कलेक्टर ऋतुराज सिंह, नगर निगम आयुक्त दलीप कुमार और नगर निगम सभापति रवि जैन ने शहर के वार्ड क्रमांक 44 और 45 के अंतर्गत आने वाले नागदा और पालनगर क्षेत्रों का दौरा कर जलदाय व्यवस्था का गहन निरीक्षण किया।निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने क्षेत्र की पानी की टंकियों, सप्लाई लाइनों और नल कनेक्शनों की स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान कई स्थानों पर गंभीर खामियां सामने आईं। कुछ नल कनेक्शन नालियों के बेहद पास पाए गए, वहीं कई जगह नलों में टोटियां तक नहीं लगी थीं, जिससे गंदा पानी पाइपलाइन में जाने का खतरा बना हुआ था। अधिकारियों ने मौके पर ही नगर निगम की टीम को तत्काल टोटियां लगाने और कनेक्शन दुरुस्त करने के निर्देश दिए।

    मुख्यमंत्री के निर्देश पर किया गया निरीक्षण

    कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने बताया कि यह निरीक्षण मुख्यमंत्री के निर्देश पर किया गया है। दूषित पानी से हुई मौतों को प्रशासन बेहद गंभीरता से ले रहा है और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि जनता को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।निरीक्षण के दौरान पानी की हार्डनेस की भी जांच की गई और विभिन्न स्थानों से पानी के सैंपल लिए गए। अधिकारियों ने यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि सभी सैंपल्स की लैब में समयबद्ध जांच हो और रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक सुधार किए जाएं।

    नालियों के पास पाइपलाइन बनी खतरे की वजह

    स्थानीय रहवासियों ने अधिकारियों को बताया कि गणेश मंदिर जाने वाले मार्ग पर नाली का गंदा पानी अक्सर सड़क पर बहता रहता है। चूंकि अधिकांश पानी की लाइनें और नल कनेक्शन नालियों के पास हैं, ऐसे में सीवेज का पानी पीने की सप्लाई में मिलने का खतरा बना रहता है। निरीक्षण के दौरान एक खुली टोटी भी मिली, जिससे दूषित पानी सीधे पाइपलाइन में जा रहा था। इस पर निगम अधिकारियों को तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

    टंकियों की सफाई और क्लोरीनेशन के आदेश

    कलेक्टर ने बताया कि शहर की सभी पानी की टंकियों की साफ-सफाई का काम एक दिन पहले ही शुरू कर दिया गया है। साथ ही सात दिनों के भीतर पूरे शहर में पानी की व्यापक टेस्टिंग कराने के निर्देश दिए गए हैं। नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों को सभी वार्डों में टंकियों की गहन सफाई, क्लोरीनेशन और नियमित निगरानी सुनिश्चित करने को कहा गया है।उन्होंने स्पष्ट किया कि जहां-जहां पानी की सप्लाई में गंदगी मिलने की आशंका है, वहां संबंधित प्वाइंट्स को अस्थायी रूप से बंद किया जाएगा। इसके अलावा सीवरेज लाइनों में लीकेज की जांच कर कहीं भी पानी और सीवर की मिक्सिंग पाए जाने पर तत्काल सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    सभापति ने बताई निरीक्षण की स्थिति

    नगर निगम सभापति रवि जैन ने बताया कि वार्ड क्रमांक 44 और 45 में कई जगह नाली और पानी की लाइनें साथ-साथ चल रही हैं। कुछ स्थानों पर लीकेज भी सामने आए हैं। निरीक्षण के दौरान गणेश मंदिर पहुंच मार्ग पर नाली का पानी ऊपर आता हुआ पाया गया, जो बेहद चिंताजनक है। इन सभी बिंदुओं पर निगम की टीम को तुरंत सुधार कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं।उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के आदेशानुसार अब सभी वार्डों में नियमित और सतत निरीक्षण किया जाएगा, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही न हो।

    नागरिकों से की गई अपील

    प्रशासन की ओर से आम नागरिकों से भी अपील की गई है कि यदि कहीं भी पीने के पानी में गंदगी, बदबू या रंग बदलने जैसी समस्या नजर आए, तो तुरंत नगर निगम या संबंधित वार्ड कार्यालय को इसकी सूचना दें। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि शिकायत मिलते ही तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
    दूषित पानी की घटना के बाद प्रशासन की इस सक्रियता को शहरवासियों के लिए राहत भरा कदम माना जा रहा है, हालांकि लोग चाहते हैं कि यह सतर्कता सिर्फ निरीक्षण तक सीमित न रहे, बल्कि स्थायी समाधान भी सुनिश्चित किया जाए।