Tag: Namaz Controversy

  • झांसी दौरे पर कारागार मंत्री दारा सिंह चौहान का बयान: नमाज और पूजा के लिए स्थान निर्धारित, जेल सुधार पर दिया जोर

    झांसी दौरे पर कारागार मंत्री दारा सिंह चौहान का बयान: नमाज और पूजा के लिए स्थान निर्धारित, जेल सुधार पर दिया जोर


    झांसी । झांसी में प्रदेश सरकार के कारागार मंत्री दारा सिंह चौहान ने अपने दौरे के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सड़क पर नमाज को लेकर दिए गए बयान का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि नमाज हो या पूजा, सभी धार्मिक कार्यों के लिए स्थान निर्धारित हैं और इन्हें केवल तय स्थानों पर ही किया जाना चाहिए।

    मंत्री दारा सिंह चौहान सर्किट हाउस करीब एक घंटे की देरी से पहुंचे। उन्होंने देरी का कारण बताते हुए कहा कि वे कानपुर देहात में एक स्कूल बस हादसे में राहत और बचाव कार्य में शामिल थे, जिसकी वजह से उनका कार्यक्रम प्रभावित हुआ। झांसी पहुंचने पर उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया, जहां जेल अधीक्षक समेत अन्य अधिकारियों ने उनका स्वागत किया।

    मीडिया से बातचीत के दौरान कारागार मंत्री ने कहा कि प्रदेश की भाजपा सरकार जेल प्रशासन को सिर्फ बंदियों को रखने तक सीमित नहीं मानती, बल्कि उनका नैतिक और सामाजिक सुधार भी सुनिश्चित कर रही है। उन्होंने कहा कि जेलों में बंदियों के पुनर्वास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है ताकि वे रिहाई के बाद समाज में सम्मानपूर्वक जीवन शुरू कर सकें।

    प्रदेश की जेलों में ओवरक्राउडिंग के सवाल पर दारा सिंह चौहान ने कहा कि यह समस्या पहले की तुलना में काफी कम हुई है और सरकार लगातार नई जेलों के निर्माण पर काम कर रही है। उन्होंने दावा किया कि आने वाले समय में यह समस्या पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा कि धार्मिक ग्रंथों में भी पूजा और नमाज के लिए निश्चित स्थानों का उल्लेख है, इसलिए इसे लेकर जो कहा गया है वह सही है। वहीं, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के बयान पर पूछे गए सवाल पर उन्होंने अनभिज्ञता जताई।

  • इलाहाबाद हाईकोर्ट की संभल प्रशासन को कड़ी फटकार: हालात नहीं संभल रहे, तो इस्तीफा दें SP और DM

    इलाहाबाद हाईकोर्ट की संभल प्रशासन को कड़ी फटकार: हालात नहीं संभल रहे, तो इस्तीफा दें SP और DM


    नई दिल्ली: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संभल जिले में रमजान के पवित्र महीने के दौरान नमाजियों की संख्या सीमित करने के जिला प्रशासन के फैसले पर सख्त नाराजगी जाहिर की है। न्यायालय ने कड़े शब्दों में टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि पुलिस अधीक्षक SP और जिलाधिकारी DM को लगता है कि वे कानून के शासन को प्रभावी ढंग से लागू करने में सक्षम नहीं हैं, तो उन्हें या तो अपने पदों से इस्तीफा दे देना चाहिए या फिर तुरंत तबादले की मांग करनी चाहिए। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन और न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन की खंडपीठ ने मुनाजिर खान द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह तल्ख टिप्पणी की।

    मामले की जड़ गाटा संख्या-291 पर स्थित एक स्थल है, जिसे याचिकाकर्ता ने मस्जिद बताते हुए वहां नमाज अदा करने की अनुमति मांगी थी। याचिका में दलील दी गई थी कि स्थानीय प्रशासन ने कानून-व्यवस्था और सुरक्षा का हवाला देते हुए नमाजियों की संख्या को केवल 20 तक सीमित कर दिया है, जो धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन है। दूसरी ओर, राज्य सरकार ने अदालत में तर्क दिया कि रिकॉर्ड के अनुसार संबंधित भूमि निजी व्यक्तियों के नाम दर्ज है और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह प्रतिबंधात्मक सीमा तय की गई थी।

    हालांकि, हाईकोर्ट ने सरकार की इन दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि प्रत्येक समुदाय को अपने निर्धारित पूजा स्थलों पर शांतिपूर्वक इबादत और पूजा-अर्चना करने का संवैधानिक अधिकार है। न्यायालय ने जोर देकर कहा कि राज्य का प्राथमिक कर्तव्य कानून का शासन स्थापित करना है, न कि अधिकारों को सीमित करना। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने याचिकाकर्ता को संबंधित स्थल की तस्वीरें और राजस्व अभिलेख प्रस्तुत करने के लिए समय दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई अब 16 मार्च को होगी और अदालत ने इसे ताजा मामलों की सूची में शीर्ष 10 में शामिल करने का निर्देश दिया है।