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  • शबाना आजमी बोलीं- मुस्लिम हूं, लेकिन नमाज नहीं पढ़ती, धर्म और नास्तिकता पर जावेद अख्तर से होती है बहस

    शबाना आजमी बोलीं- मुस्लिम हूं, लेकिन नमाज नहीं पढ़ती, धर्म और नास्तिकता पर जावेद अख्तर से होती है बहस

    नई दिल्ली । अभिनेत्री शबाना आजमी ने धर्म, धार्मिक मान्यताओं और नास्तिकता को लेकर अपने विचार साझा किए हैं। उन्होंने कहा कि वह मुस्लिम हैं, लेकिन नमाज नहीं पढ़तीं और धर्म के साथ उनका कोई खास जुड़ाव नहीं है। शबाना ने अपने पति और मशहूर गीतकार-लेखक जावेद अख्तर की नास्तिक सोच पर भी बात की। उनके मुताबिक, दोनों के बीच धर्म और धार्मिक अभिव्यक्ति को लेकर बातचीत होती रहती है।

    शबाना का कहना है कि अगर किसी व्यक्ति को धर्म का पालन करने या प्रार्थना करने से सुकून मिलता है, तो उसे ऐसा करने की आजादी होनी चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि धर्म किसी व्यक्ति का निजी मामला है और सरकार को इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। अपने विचार रखते हुए अभिनेत्री ने परिवार में मिले संस्कारों, बचपन के माहौल और धार्मिक परंपराओं के प्रति अपने नजरिये के बारे में भी बताया।

    शबाना ने एक बातचीत के दौरान अपने बचपन और परिवार में धर्म की भूमिका का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उनके पिता और मशहूर शायर कैफी आजमी नास्तिक थे, जबकि उनकी मां शौकत आजमी कुछ धार्मिक परंपराओं का पालन करती थीं। हालांकि, उनकी मां भी इन परंपराओं को लेकर बहुत अधिक गंभीर नहीं रहती थीं। शबाना के अनुसार, उनके घर में धार्मिक रीति-रिवाजों को जीवन का अनिवार्य हिस्सा नहीं बनाया गया था।

    यही वजह रही कि बचपन से ही धर्म और भगवान को लेकर उनके मन में कोई विशेष जिज्ञासा नहीं रही। अभिनेत्री ने बताया कि वह कभी-कभी बातचीत के दौरान माशाल्लाह और इंशाल्लाह जैसे शब्दों का इस्तेमाल करती हैं। उनके लिए ये शब्द उनकी भाषा और बोलचाल का हिस्सा हैं। हालांकि, उनके पति जावेद अख्तर इन शब्दों के इस्तेमाल पर सवाल उठाते हैं और उनसे पूछते हैं कि वह ऐसा क्यों कहती हैं। शबाना के मुताबिक, वह इन शब्दों को किसी धार्मिक मान्यता के कारण नहीं, बल्कि अपनी भाषा की सहज अभिव्यक्ति के रूप में इस्तेमाल करती हैं।

    जावेद अख्तर की नास्तिक सोच के बारे में बात करते हुए शबाना ने उन्हें कट्टर नास्तिक बताया। उन्होंने कहा कि वह कई बार जावेद से पूछती हैं कि वह अपने धार्मिक विचारों को इतनी मुखरता से क्यों व्यक्त करते हैं। शबाना का मानना है कि यदि किसी व्यक्ति को धर्म का पालन करने से मानसिक सुकून मिलता है, तो उसे अपनी मान्यताओं के अनुसार जीवन जीने देना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने की जरूरत क्यों होनी चाहिए।

    शबाना के अनुसार, इस पर जावेद अख्तर का जवाब होता है कि धार्मिक लोग भी उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचाते हैं। जावेद का तर्क है कि नास्तिक होने के नाते उन्हें भी बुरा महसूस करने का अधिकार है। इस तरह दोनों के बीच धर्म और नास्तिकता को लेकर अलग-अलग नजरिये सामने आते हैं। शबाना ने बातचीत में इन मतभेदों का उल्लेख करते हुए बताया कि धार्मिक विश्वासों के प्रति सम्मान और अपनी बात रखने की स्वतंत्रता, दोनों महत्वपूर्ण विषय हैं।

    अपने धार्मिक जुड़ाव के बारे में शबाना ने स्पष्ट कहा कि वह मुस्लिम हैं और उन्हें ईद, उर्दू भाषा तथा खान-पान पसंद है। इसके बावजूद वह नमाज नहीं पढ़तीं और धर्म को अपने जीवन का विशेष हिस्सा नहीं मानतीं। उन्होंने यह भी कहा कि धार्मिक परंपराओं का पालन नहीं करने का अर्थ यह नहीं है कि वह दूसरों की आस्था को नहीं समझतीं। अभिनेत्री के अनुसार, धर्म हर व्यक्ति का निजी मामला है। यदि किसी को प्रार्थना करने या धार्मिक गतिविधियों में हिस्सा लेने से खुशी और सुकून मिलता है, तो इसमें उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।

    इसी आधार पर उन्होंने कहा कि सरकार को लोगों के व्यक्तिगत धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। शबाना के बयान में अपनी धार्मिक पहचान और व्यक्तिगत जीवनशैली के बीच अंतर स्पष्ट दिखाई देता है। उन्होंने अपने और जावेद अख्तर के विचारों का उल्लेख करते हुए बताया कि धार्मिक आस्था रखने और नास्तिक होने वाले लोगों, दोनों की भावनाओं को समझना जरूरी है। उनके विचारों का मुख्य आधार यह है कि व्यक्ति को अपनी मान्यताओं के अनुसार जीवन जीने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए और दूसरों की पसंद का भी सम्मान किया जाना चाहिए।

  • मुरादाबाद सर्किट हाउस में नमाज पढ़ने के मामले में सपा विधायक के चाचा पर मुकदमा दर्ज, वीडियो वायरल

    मुरादाबाद सर्किट हाउस में नमाज पढ़ने के मामले में सपा विधायक के चाचा पर मुकदमा दर्ज, वीडियो वायरल

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में सर्किट हाउस परिसर में नमाज पढ़ने से जुड़े मामले में समाजवादी पार्टी के नेता मोहम्मद उस्मान के खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है। मोहम्मद उस्मान बिलारी से सपा विधायक मोहम्मद फहीम के चाचा बताए जा रहे हैं और पार्टी में जिला उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालते हैं। मामला सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो के सामने आने के बाद पुलिस तक पहुंचा।

    वायरल वीडियो में मोहम्मद उस्मान के सर्किट हाउस परिसर में सड़क पर नमाज पढ़ने का दावा किया जा रहा है। आरोप है कि इस दौरान सड़क पर वाहन खड़ा किया गया था, जिससे वहां से आने-जाने वाले लोगों को परेशानी हुई। वीडियो सामने आने के बाद मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा शुरू हुई और पुलिस से कार्रवाई की मांग की गई।

    पुलिस के अनुसार, सर्किट हाउस के प्रभारी अवर अभियंता अनिल कुमार की ओर से दी गई शिकायत के आधार पर मझोला थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि शिकायत में सामने आए तथ्यों के आधार पर कार्रवाई शुरू की गई है। पुलिस अब पूरे मामले की जांच कर रही है और वायरल वीडियो से जुड़े तथ्यों की भी पड़ताल की जा रही है।

    मुरादाबाद के पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, कुछ हिंदू संगठन के लोगों ने भी इस मामले में पुलिस अधिकारियों से मुलाकात कर कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद शिकायत और उपलब्ध जानकारी के आधार पर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। पुलिस का कहना है कि मामले में जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    यह मामला उस समय सामने आया जब सर्किट हाउस में समाजवादी पार्टी के नेताओं की राजनीतिक गतिविधियां चल रही थीं। जानकारी के मुताबिक, विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव गुरुवार को एमएलसी चुनाव से संबंधित कार्यक्रम के लिए सर्किट हाउस पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने सपा नेताओं के साथ चुनाव को लेकर बैठक भी की थी।

    बताया गया कि लाल बिहारी यादव शुक्रवार को सर्किट हाउस से रवाना हो गए थे। इसके बाद नमाज से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने लगा। वीडियो वायरल होने के बाद मामले ने राजनीतिक और स्थानीय स्तर पर ध्यान खींचा। हालांकि वीडियो में दिखाई दे रही घटना के सभी पहलुओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

    पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि घटना किस समय हुई, उस दौरान वहां यातायात और आवाजाही की वास्तविक स्थिति क्या थी तथा वीडियो में दिखाई दे रहे व्यक्ति और घटनास्थल से जुड़े अन्य तथ्यों की पुष्टि कैसे होती है। जांच में शिकायत, वीडियो और मौके से संबंधित जानकारी को आधार बनाया जा रहा है।

    सर्किट हाउस सरकारी उपयोग का महत्वपूर्ण परिसर होता है, जहां अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और अन्य विशिष्ट लोगों की आवाजाही रहती है। ऐसे स्थान पर किसी गतिविधि से यातायात या आम लोगों की आवाजाही प्रभावित होने की शिकायत मिलने पर प्रशासन और पुलिस द्वारा संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई की जाती है।

    मामले में पुलिस की ओर से मुकदमा दर्ज किए जाने के बाद अब जांच आगे बढ़ रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आवश्यक कानूनी कदम उठाए जाएंगे। वहीं सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को लेकर भी लोगों से बिना पुष्टि के किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचने की अपील की जा सकती है, क्योंकि वीडियो के आधार पर घटना के पूरे संदर्भ का निर्धारण हमेशा संभव नहीं होता।

    फिलहाल मोहम्मद उस्मान के खिलाफ मझोला थाने में दर्ज मामले को लेकर पुलिस जांच कर रही है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि और घटना की परिस्थितियों को स्पष्ट करने के लिए पुलिस उपलब्ध साक्ष्यों की जांच में जुटी है।