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पाटेकर की दरियादिली का भावुक किस्सा, दोस्त की फीस बढ़वाने के लिए प्रोड्यूसर्स को दो घंटे खड़ा रखा
नई दिल्ली। बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन के बाद उनसे जुड़े किस्से लगातार सामने आ रहे हैं। पर्दे पर अपने दमदार अभिनय से दर्शकों का दिल जीतने वाले नाना पाटेकर असल जिंदगी में भी अपनी बेबाकी और दरियादिली के लिए पहचाने जाते थे। उनके करीबी दोस्त और अभिनेता शिवाजी साटम ने नाना को याद करते हुए ऐसे भावुक किस्से साझा किए हैं जो उनकी शख्सियत के एक अलग पहलू को सामने लाते हैं। शिवाजी साटम के मुताबिक नाना केवल उनके दोस्त नहीं थे बल्कि जीवन के कठिन समय में एक सगे भाई की तरह उनके साथ खड़े रहे। खास तौर पर पत्नी के कैंसर से जूझने के दौरान नाना ने जिस तरह उनकी मदद की उसे याद करते हुए शिवाजी भावुक हो गए।मुंबई के प्रभादेवी स्थित पी एल देशपांडे महाराष्ट्र कला अकादमी परिसर में नाना पाटेकर की याद में आयोजित अठवणीतले नाना नाम की शोक सभा में शिवाजी साटम ने अपनी करीब 40 साल पुरानी दोस्ती के कई किस्से सुनाए। उन्होंने बताया कि नाना के साथ उनका रिश्ता बेहद खास था और हिंदी फिल्मों में काम करने का अवसर दिलाने में भी नाना की महत्वपूर्ण भूमिका रही। शिवाजी साटम ने कहा कि जब उन्होंने नाना के निधन की खबर सुनी तो उन्हें विश्वास ही नहीं हुआ। दोनों के बीच लंबे समय से गहरी दोस्ती थी और नाना ने हमेशा उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।शिवाजी साटम ने बताया कि उनकी पहली हिंदी फिल्म यशवंत में काम करने के पीछे भी नाना पाटेकर का बड़ा योगदान था। फिल्म में पुलिस अधिकारी की भूमिका के लिए निर्माताओं ने शिवाजी से संपर्क किया था लेकिन शुरुआत में वह इस किरदार को निभाने के लिए तैयार नहीं थे। जब उन्होंने मना कर दिया तो निर्माताओं ने नाना से बात की। इसके बाद नाना ने अपने खास अंदाज में दोस्त को समझाया और उन्हें फिल्म करने के लिए राजी कर लिया। शिवाजी के मुताबिक नाना चाहते थे कि उन्हें उनकी प्रतिभा के अनुरूप हिंदी सिनेमा में अवसर मिलें और वह अपनी पहचान बना सकें।दोस्ती का एक और दिलचस्प किस्सा उनकी फीस से जुड़ा है। शिवाजी साटम ने बताया कि जब नाना को पता चला कि उन्हें फिल्म के लिए कितनी रकम दी जा रही है तो वह नाराज हो गए। उनका मानना था कि शिवाजी को अपनी मेहनत के हिसाब से बेहतर पारिश्रमिक मिलना चाहिए था। नाना ने इस मामले में खुद पहल की और निर्माताओं से बात की। शिवाजी ने बताया कि उन्होंने नाना को ऐसा करने से रोकने की कोशिश की थी लेकिन वह नहीं माने। नाना ने निर्माताओं को करीब दो घंटे तक खड़ा रखा और अपने दोस्त के लिए उचित फीस की बात रखी। इस घटना से साफ होता है कि नाना अपने करीबी लोगों के हितों के लिए खुलकर आवाज उठाते थे।हालांकि नाना की दोस्ती का सबसे भावुक पहलू उस समय सामने आया जब शिवाजी साटम की पत्नी को कैंसर होने का पता चला। उस दौरान शिवाजी फिल्म गुलाम-ए-मुस्तफा की शूटिंग कर रहे थे। परिवार पर आए इस संकट के कारण उनके लिए काम और पत्नी की देखभाल के बीच संतुलन बनाना मुश्किल हो गया था। उन्होंने फिल्म छोड़ने तक का विचार कर लिया था लेकिन नाना ने उन्हें अकेला नहीं छोड़ा। उन्होंने निर्देशक पार्थो घोष और फिल्म से जुड़े लोगों से बात की ताकि शिवाजी को शूटिंग के बाद घर लौटने का पर्याप्त समय मिल सके। इसके बाद उनका शेड्यूल इस तरह तय किया गया कि वह दोपहर 12 बजे शूटिंग पर पहुंचकर रात 8 बजे तक घर जा सकें।शिवाजी साटम ने भावुक होकर कहा कि नाना ने उनके लिए जितना किया उतना शायद उनका सगा भाई भी नहीं कर पाता। उन्होंने बताया कि नाना कभी भी अचानक फोन करके उन्हें अपने फार्म पर बुला लेते थे और दोस्ती को हमेशा सहज बनाए रखते थे। शिवाजी की इन यादों से यह बात सामने आती है कि नाना पाटेकर के लिए दोस्ती केवल साथ काम करने तक सीमित नहीं थी बल्कि मुश्किल समय में जिम्मेदारी निभाने का नाम थी। यही वजह है कि उनके जाने के बाद भी उनके चाहने वाले और करीबी उन्हें केवल एक महान अभिनेता के रूप में नहीं बल्कि एक संवेदनशील और मददगार इंसान के तौर पर याद कर रहे हैं। -

नाना पाटेकर की आखिरी फिल्म को मिलेगा खास ट्रिब्यूट, अनीत पड्डा की ‘शक्ति शालिनी’ अब मार्च 2027 में हो सकती है रिलीज
नई दिल्ली । बॉलीवुड की आगामी हॉरर-कॉमेडी फिल्म शक्ति शालिनी अपनी रिलीज डेट में बदलाव को लेकर चर्चा में है। अनीत पड्डा की मुख्य भूमिका वाली इस फिल्म को पहले क्रिसमस 2026 के मौके पर सिनेमाघरों में उतारने की तैयारी थी लेकिन अब इसकी रिलीज 2027 तक टल गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक फिल्म के निर्माता दिनेश विजान और निर्देशक आदित्य सरपोतदार नई रिलीज डेट पर विचार कर रहे हैं। संभावना जताई जा रही है कि फिल्म मार्च 2027 में सिनेमाघरों में दस्तक दे सकती है। हालांकि इसकी अंतिम रिलीज डेट को लेकर आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।फिल्म की रिलीज आगे बढ़ने की एक बड़ी वजह शाहरुख खान की आगामी फिल्म किंग के साथ बॉक्स ऑफिस पर होने वाली संभावित टक्कर को बताया जा रहा है। मेकर्स नहीं चाहते कि दोनों फिल्मों की रिलीज एक ही समय पर होने से किसी फिल्म के कारोबार पर असर पड़े। इसके अलावा सैयारा की सफलता के बाद अनीत पड्डा को एक और बड़ी फिल्म में दर्शकों के सामने पेश करने की रणनीति भी इस फैसले से जुड़ी बताई जा रही है। निर्माता चाहते हैं कि शक्ति शालिनी को सिनेमाघरों में पर्याप्त जगह मिले और दर्शकों का ध्यान फिल्म की कहानी तथा इसके नए किरदार पर केंद्रित रहे।शक्ति शालिनी मैडॉक फिल्म्स के हॉरर-कॉमेडी यूनिवर्स का हिस्सा है। इस फ्रेंचाइजी में पहले स्त्री और मुंज्या जैसी फिल्मों ने दर्शकों के बीच अपनी पहचान बनाई है। ऐसे में नई फिल्म से भी काफी उम्मीदें लगाई जा रही हैं। अक्टूबर 2025 में फिल्म का टीजर जारी करते समय इसकी रिलीज क्रिसमस 2026 के लिए तय की गई थी। हालांकि पिछले कुछ महीनों से इसकी रिलीज डेट बदलने की चर्चाएं चल रही थीं। अब नाना पाटेकर के निधन के बाद इस फिल्म को लेकर दर्शकों की उत्सुकता और बढ़ गई है क्योंकि निर्देशक आदित्य सरपोतदार के मुताबिक यह दिग्गज अभिनेता की आखिरी फिल्म होगी।रिपोर्ट के अनुसार नाना पाटेकर ने मई 2026 में फिल्म की शूटिंग पूरी कर ली थी। निर्देशक आदित्य सरपोतदार ने अभिनेता के निधन पर दुख जताते हुए कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि यह फिल्म नाना पाटेकर की आखिरी फिल्म साबित होगी। उन्होंने फिल्म के साथ अभिनेता के जुड़ाव को भी याद किया। नाना पाटेकर इस फिल्म को लेकर उत्साहित थे और इसके रिलीज होने का इंतजार कर रहे थे। ऐसे में अब फिल्म उनके प्रशंसकों के लिए एक खास यादगार बन सकती है।शक्ति शालिनी में अनीत पड्डा के साथ नाना पाटेकर विशाल जेठवा विनीत कुमार सिंह और सीमा बिस्वास भी नजर आएंगे। फिल्म का निर्देशन आदित्य सरपोतदार ने किया है जबकि इसका निर्माण दिनेश विजान की मैडॉक फिल्म्स के बैनर तले हुआ है। फिल्म की कहानी और किरदारों को लेकर अभी ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है लेकिन इसे हॉरर-कॉमेडी यूनिवर्स की एक अहम कड़ी माना जा रहा है। अब दर्शकों की निगाहें इसकी नई रिलीज डेट और फिल्म से जुड़े अगले अपडेट पर टिकी हैं। नाना पाटेकर की आखिरी फिल्म होने के कारण शक्ति शालिनी उनके चाहने वालों के लिए भावनात्मक महत्व भी रखेगी। -

नाना पाटेकर के निधन से टूट गईं हेमा मालिनी, बोलीं एक हफ्ते पहले आया था फोन, उस वक्त बात नहीं कर पाने का रहेगा मलाल
नई दिल्ली । हिंदी और मराठी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन की खबर ने फिल्म इंडस्ट्री को गहरे सदमे में डाल दिया है। अपने दमदार अभिनय और अलग अंदाज के लिए पहचाने जाने वाले नाना पाटेकर के जाने से उनके प्रशंसक और फिल्मी दुनिया की कई हस्तियां भावुक हैं। इस बीच दिग्गज अभिनेत्री और सांसद हेमा मालिनी ने नाना से जुड़ी एक ऐसी याद साझा की है जिसने उनके दुख को और गहरा कर दिया। हेमा मालिनी ने बताया कि नाना पाटेकर ने निधन से करीब एक सप्ताह पहले उन्हें फोन किया था लेकिन उस समय वह यात्रा कर रही थीं और कॉल नहीं उठा सकीं। अब अभिनेता के निधन के बाद उन्हें इस बात का अफसोस है कि वह उनसे उस समय बात नहीं कर पाईं।हेमा मालिनी ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में नाना पाटेकर को याद करते हुए बताया कि कुछ दिन पहले उनकी नाना से बातचीत हुई थी। इसके बाद करीब एक सप्ताह पहले भी उनका फोन आया था लेकिन यात्रा में व्यस्त होने के कारण वह कॉल रिसीव नहीं कर सकीं। हेमा ने कहा कि जब उन्होंने नाना के निधन की खबर सुनी तो उन्हें गहरा सदमा लगा। किसी परिचित और सहकर्मी से आखिरी बार बात करने का मौका हाथ से निकल जाना अक्सर मन में कसक छोड़ जाता है। हेमा मालिनी के लिए भी यह याद अब भावुक कर देने वाली बन गई है।नाना पाटेकर हिंदी और मराठी फिल्मों के उन कलाकारों में शामिल रहे जिन्होंने अपनी अभिनय क्षमता से अलग पहचान बनाई। उन्होंने अपने करियर में कई तरह के किरदार निभाए और गंभीर भूमिकाओं से लेकर प्रभावशाली संवाद अदायगी तक दर्शकों के दिलों पर छाप छोड़ी। उनका अभिनय केवल लोकप्रियता तक सीमित नहीं रहा बल्कि उन्हें फिल्म जगत में एक विशिष्ट कलाकार के रूप में सम्मान मिला। हेमा मालिनी ने भी उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि हिंदी और मराठी फिल्म इंडस्ट्री ने एक बहुत बड़े अभिनेता को खो दिया है। उनके मुताबिक नाना खुद अभिनय की एक संस्था जैसे थे।नाना पाटेकर की पहचान सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं थी। सामाजिक कार्यों में उनकी सक्रियता भी उन्हें दूसरे कलाकारों से अलग बनाती थी। खास तौर पर किसानों और जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए किए गए उनके प्रयासों की चर्चा होती रही है। नाना पाटेकर नाम फाउंडेशन के माध्यम से किसानों की सहायता और ग्रामीण क्षेत्रों में जरूरतमंद परिवारों के लिए काम करने से जुड़े रहे। हेमा मालिनी ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए उनके अभिनय के साथ समाज के लिए किए गए कामों को भी याद किया। उन्होंने कहा कि नाना ने अपनी प्रतिभा से फिल्म इंडस्ट्री में अलग मुकाम बनाया और जरूरतमंदों की मदद के लिए भी लगातार प्रयास किए।नाना पाटेकर के निधन की खबर सामने आने के बाद फिल्म जगत की कई हस्तियां उन्हें अपने तरीके से याद कर रही हैं। उनके साथ काम कर चुके कलाकारों और प्रशंसकों के लिए यह केवल एक अभिनेता को खोने का दुख नहीं बल्कि एक ऐसी शख्सियत के जाने का दर्द है जिसने अपने काम से गहरी छाप छोड़ी। हेमा मालिनी की याद ने इस दुख को एक निजी भावनात्मक पहलू भी दिया है। एक फोन कॉल जिसे उस समय सामान्य व्यस्तता के कारण नहीं उठाया जा सका अब एक अधूरी बातचीत की याद बन गया है। नाना पाटेकर का अभिनय और सामाजिक योगदान उनके प्रशंसकों के बीच लंबे समय तक याद किया जाएगा। -

नाना पाटेकर का अंतिम संस्कार देर रात क्यों हुआ? बेटे मल्हार ने बताई वजह, सुबह निधन के बाद लिया था फैसला
नई दिल्ली: हिंदी सिनेमा के अभिनेता नाना पाटेकर का 75 वर्ष की उम्र में गोवा में निधन हो गया। 8 अक्टूबर की सुबह उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद देर रात उनका अंतिम संस्कार किया गया। बेटे मल्हार पाटेकर और उनकी पत्नी ने उन्हें मुखाग्नि दी। नाना को अंतिम विदाई देने के लिए परिवार के सदस्यों के साथ उनके करीबी और फिल्म जगत से जुड़े कई लोग पहुंचे। अंतिम संस्कार देर रात किए जाने को लेकर जब मल्हार से सवाल पूछा गया, तो उन्होंने इसकी वजह बताई।मल्हार पाटेकर से पूछा गया कि अंतिम संस्कार इतनी देर रात क्यों किया गया, जबकि कई अन्य लोग और फिल्म जगत की हस्तियां भी नाना को अंतिम विदाई देने के लिए पहुंचना चाहती थीं। सवाल में यह भी कहा गया कि बॉलीवुड के कई लोग अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सके, ऐसे में उसी रात अंतिम विदाई देने की क्या जरूरत थी। इस पर मल्हार ने स्पष्ट किया कि परिवार के फैसले के पीछे ऐसी कोई खास वजह नहीं थी, जैसा सवाल में पूछा जा रहा था।
मल्हार ने बताया कि नाना पाटेकर के साथ यह घटना सुबह जल्दी हुई थी और तब तक काफी समय बीत चुका था। इसलिए परिवार ने उसी दिन अंतिम संस्कार करने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई विशेष कारण नहीं था कि अंतिम संस्कार रात में ही करना जरूरी था या अगले दिन नहीं किया जा सकता था। परिवार ने परिस्थितियों को देखते हुए उसी दिन उन्हें विदाई देने का निर्णय लिया। इस तरह मल्हार ने देर रात अंतिम संस्कार किए जाने को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब दिया।
नाना पाटेकर को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। उनके अंतिम सफर के दौरान ‘नाना साहेब अमर रहें’ के नारे भी सुनाई दिए। अंतिम संस्कार में अभिनेता जैकी श्रॉफ, फिल्म निर्देशक अनिल शर्मा, प्रवीण तरड़े, ‘क्रांतिवीर’ के निर्देशक मेहुल कुमार, लेखक किरण और महेश मांजरेकर की पत्नी मेधा मांजरेकर सहित कई लोग शामिल हुए। नाना के चाहने वाले और करीबी भी उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचे। उनके निधन से फिल्म जगत में शोक का माहौल रहा।
नाना पाटेकर की तबीयत गोवा स्थित उनके फ्लैट में बिगड़ी थी। जानकारी के मुताबिक, उन्हें सीने में तेज दर्द हुआ था। इसके बाद उनके बेटे मल्हार के अनुसार, घर पर मेडिकल टीम बुलाई गई। टीम जब पहुंची, तब नाना बेहोशी की हालत में थे। उन्हें बचाने की कोशिश की गई और फिर तुरंत मणिपाल अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल में डॉक्टरों ने उनकी जान बचाने के लिए प्रयास जारी रखे।
अस्पताल में डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक सीपीआर देकर नाना पाटेकर को बचाने की कोशिश की, लेकिन उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ। इसके बाद सुबह 5 बजकर 20 मिनट पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। 75 वर्ष की उम्र में उनके निधन के बाद परिवार ने उसी दिन अंतिम संस्कार करने का फैसला लिया। मल्हार के बयान के अनुसार, सुबह घटना होने और काफी समय बीत जाने के कारण परिवार ने देर रात अंतिम विदाई दी। अंतिम संस्कार में मौजूद लोगों ने नाना को श्रद्धांजलि दी और उन्हें याद किया।
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नाना पाटेकर का देर रात क्यों हुआ अंतिम संस्कार? बेटे मल्हार ने बताई वजह, 75 साल की उम्र में हुआ निधन
नई दिल्ली: हिंदी और मराठी सिनेमा के अभिनेता नाना पाटेकर का 75 साल की उम्र में निधन हो गया। गोवा में उनके निधन के बाद गुरुवार, 8 अक्टूबर की देर रात उनका अंतिम संस्कार किया गया। बेटे मल्हार पाटेकर और पत्नी ने उन्हें मुखाग्नि दी। नाना पाटेकर के अंतिम दर्शन और विदाई के लिए उनके परिवार के सदस्यों, करीबी लोगों और फिल्म जगत से जुड़े कई कलाकारों ने पहुंचकर श्रद्धांजलि दी। हालांकि, देर रात अंतिम संस्कार किए जाने को लेकर सवाल भी उठे। इस पर उनके बेटे मल्हार ने स्पष्ट किया कि परिवार ने किसी विशेष वजह से अंतिम संस्कार में देरी नहीं की थी। उन्होंने बताया कि नाना पाटेकर के निधन की घटना सुबह जल्दी हुई थी और तब तक काफी समय बीत चुका था। इसी कारण परिवार ने उसी दिन अंतिम संस्कार करने का फैसला लिया।नाना पाटेकर के अंतिम संस्कार के बाद उनके बेटे मल्हार से पूछा गया कि जब फिल्म जगत के कई लोग और अन्य परिचित उन्हें अंतिम विदाई देना चाहते थे, तो अंतिम संस्कार इतनी देर रात क्यों किया गया। सवाल में यह भी कहा गया कि देर होने के कारण फिल्म उद्योग से जुड़े कई लोग अंतिम दर्शन के लिए नहीं पहुंच सके। इस पर मल्हार ने कहा कि ऐसी कोई विशेष बात नहीं थी कि अंतिम संस्कार देर रात ही करना जरूरी था। उन्होंने बताया कि परिवार के सामने ऐसा कोई कारण नहीं था कि अंतिम संस्कार अगले दिन किया जाता। चूंकि घटना सुबह जल्दी हुई थी और तब तक काफी समय बीत चुका था, इसलिए परिवार ने उसी दिन अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया। उनके बयान से स्पष्ट हुआ कि अंतिम विदाई का समय परिवार के फैसले के अनुसार तय किया गया था।
नाना पाटेकर को अंतिम विदाई राजकीय सम्मान के साथ दी गई। उनके अंतिम सफर के दौरान मौजूद लोगों ने श्रद्धांजलि दी और ‘नाना साहेब अमर रहें’ के नारे भी सुनाई दिए। उनके निधन से फिल्म जगत में शोक का माहौल रहा। अंतिम संस्कार में अभिनेता जैकी श्रॉफ, फिल्म निर्देशक अनिल शर्मा, प्रवीण तरड़े, फिल्म ‘क्रांतिवीर’ के निर्देशक मेहुल कुमार, ‘नटसम्राट’ के लेखक किरण और महेश मांजरेकर की पत्नी मेधा मांजरेकर सहित कई लोग पहुंचे। इन लोगों ने नाना पाटेकर को अंतिम विदाई दी। उनके लंबे फिल्मी करियर और अभिनय के कारण उन्हें जानने वाले लोगों के लिए उनका निधन एक बड़ी क्षति है। अंतिम संस्कार में शामिल लोगों ने परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।
नाना पाटेकर का निधन गोवा स्थित उनके फ्लैट में सीने में तेज दर्द होने के बाद हुआ। जानकारी के मुताबिक, उनकी तबीयत बिगड़ने पर घर पर मेडिकल टीम पहुंची। उस समय वह बेहोशी की हालत में मिले। उन्हें बचाने के लिए चिकित्सकीय प्रयास किए गए और इसके बाद तुरंत मणिपाल अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल में डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की कोशिश जारी रखी। बताया गया कि डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक सीपीआर दिया, लेकिन उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ। इसके बाद सुबह 5 बजकर 20 मिनट पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। नाना पाटेकर 75 वर्ष के थे। उनके निधन के बाद परिवार ने उसी दिन अंतिम संस्कार करने का फैसला किया और देर रात उन्हें अंतिम विदाई दी गई। उनके बेटे मल्हार ने अंतिम संस्कार के समय को लेकर उठे सवालों पर परिवार का पक्ष स्पष्ट किया।
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नाना पाटेकर की मौत के मामले में अप्राकृतिक डेथ का केस दर्ज… पणजी पुलिस ने शुरू की जांच
पणजी। पणजी पुलिस (Panaji Police) ने दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर (Nana Patekar) की मौत के मामले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 194 के तहत अप्राकृतिक मौत (Unnatural death- UD) का मामला दर्ज किया है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, 76 वर्षीय अभिनेता को गोवा (Goa) के डोना पाउला (Dona Paula) स्थित ओशन पार्क में उनके आवास से मणिपाल अस्पताल, बम्बोलिम के इमरजेंसी वार्ड में लाया गया था, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। मामले की आगे की जांच पुलिस सब-इंस्पेक्टर (PSI) नितिन नाइक के नेतृत्व में की जा रही है।
राजकीय सम्मान के साथ हुआ नाना पाटेकर का अंतिम संस्कार
नाना पाटेकर का गुरुवार रात पुणे के डोंजे स्थित उनके फार्महाउस में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। उनके निधन की खबर गुरुवार सुबह सामने आई थी। इसके बाद से ही फिल्म जगत से लेकर आम लोगों तक, हर कोई उन्हें याद कर श्रद्धांजलि दे रहा है। नाना पाटेकर ने अपने अभिनय और बेबाक अंदाज से लोगों के दिलों में खास जगह बनाई थी, जिसे उनके जाने के बाद भी भुला पाना आसान नहीं होगा।
‘नाना साहेब कभी हमसे दूर नहीं हो सकते’
अंतिम संस्कार के बाद नाना पाटेकर के बेटे मल्हार पाटेकर ने मीडिया से बात की। इस दौरान उन्होंने अपने पिता को याद करते हुए कहा कि नाना साहेब जैसे लोग कभी सच में दुनिया से विदा नहीं होते। उनके काम और उपलब्धियों ने उन्हें अमर बना दिया है। नाना साहेब जैसे इंसान हमें कभी छोड़कर नहीं जाते। उनकी उपलब्धियों ने उन्हें अमर बना दिया है। दूसरी बात, उनका हमेशा मानना था कि पूरी दुनिया में लोगों को एक साथ आना चाहिए और सही रास्ते पर चलना चाहिए। तीसरी बात, नाना साहेब ने जो सोच और सपना हमारे लिए छोड़ा है, उसे आगे बढ़ाना ही हमारे आने वाले जीवन की दिशा तय करेगा। मल्हार के इन शब्दों से साफ था कि परिवार के लिए नाना पाटेकर सिर्फ एक पिता ही नहीं, बल्कि एक ऐसी शख्सियत थे, जिनकी सोच और सीख आने वाले समय में भी उनका मार्गदर्शन करती रहेगी।
शाहरुख खान ने पुरानी तस्वीर साझा कर किया याद
नाना पाटेकर के निधन की खबर सामने आने के बाद बॉलीवुड के किंग खान यानी शाहरुख खान ने भी उन्हें भावुक अंदाज में श्रद्धांजलि दी। शाहरुख ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर नाना के साथ अपनी एक पुरानी तस्वीर साझा की और उन्हें अपना गुरु, शिक्षक, आलोचक और दोस्त बताया। शाहरुख ने नाना के साथ अपनी पहली मुलाकात का किस्सा भी साझा किया। उन्होंने बताया कि नाना के सामने वह इतने प्रभावित और असहज हो गए थे कि अपने बालों से खेलने लगे। यह देखकर नाना ने उनका हाथ झटक दिया और कहा, ‘हीरो की तरह बाल मत बना… तू एक्टर है।’शाहरुख के मुताबिक, नाना पाटेकर का अंदाज बाकी लोगों से बिल्कुल अलग था। वह किसी की झूठी तारीफ नहीं करते थे और न ही वही कहते थे, जो सामने वाला सुनना चाहता था। वह हमेशा वही बात कहते थे, जिसकी किसी को सच में जरूरत होती थी।
‘पहले डांटते थे, फिर उसी में प्यार जता देते थे’
शाहरुख खान ने अपने पोस्ट में लिखा कि नाना पाटेकर सीधे मुंह पर बात कहने वाले इंसान थे। उनका स्वभाव थोड़ा सख्त और बेबाक था, लेकिन उनकी मुस्कान बेहद खूबसूरत थी। प्यार जताने का उनका तरीका भी कुछ अलग ही था। शाहरुख ने लिखा, ‘वह हमेशा अपने प्यार का इजहार अजीब तरीके से करते थे। पहले आप पर चिल्लाते थे और फिर तीसरी या चौथी बार बेइज्जती करने के बीच आपको एहसास होता था कि असल में वह आपको गले लगा रहे हैं। उन्होंने आगे बताया कि नाना उनसे बहुत प्यार करते थे और वह भी नाना को उतना ही चाहते थे। नाना उनके गुरु, शिक्षक, आलोचक और दोस्त थे। इसके साथ ही वह कैरम खेलने में भी माहिर थे। शाहरुख ने मजाकिया अंदाज में याद किया कि नाना बार-बार कैरम के खेल में उन्हें और अपने आसपास मौजूद बाकी लोगों को हरा देते थे और अपनी जीत का पूरा मजा लेते थे।
साथ में और वक्त बिताना चाहते थे शाहरुख
नाना पाटेकर को याद करते हुए शाहरुख खान ने इस बात का अफसोस भी जताया कि उन्हें साथ में वक्त बिताने के और मौके नहीं मिले। उन्होंने कहा कि काश, दोनों के बीच कुछ और बातचीत होती, कुछ और बहसें होतीं, साथ बैठकर चाय पीने और कैरम खेलने के कुछ और मौके मिलते। शाहरुख ने अपने पोस्ट में लिखा, ‘नाना, आपकी तीव्रता, आपकी हंसी, आपका पागलपन और आपका प्यार हमेशा हमारे साथ रहेगा। बस यही अफसोस है कि काश हमारे पास और वक्त होता, ताकि कुछ और बातें कर पाते, एक और बहस होती, एक और कप चाय साथ पीते और कैरम का एक और खेल खेलते।’ उन्होंने आगे कहा कि नाना के जाने से सिर्फ सिनेमा की दुनिया में ही नहीं, बल्कि भारत और पूरी दुनिया के लोगों के दिलों में भी एक खालीपन आ गया है। शाहरुख ने लिखा कि वह नाना को बहुत याद करेंगे और उनके शब्दों को जिंदगी के आखिरी पल तक अपने दिल में संजोकर रखेंगे।
नाना की वह सीख, जिसे हमेशा याद रखेंगे शाहरुख
शाहरुख खान ने अपने भावुक संदेश में नाना पाटेकर की एक ऐसी सीख का भी जिक्र किया, जो उनके दिल में हमेशा के लिए बस गई। नाना ने उनसे कहा था, ‘हीरो बनने के चक्कर में एक्टर मत खोना।’ इस छोटी-सी बात में अभिनय की दुनिया के लिए एक बड़ी सीख छिपी है। इसका मतलब है कि पर्दे पर हीरो बनने और बड़ी छवि बनाने की कोशिश में अपने अभिनय की असली पहचान को कभी नहीं खोना चाहिए। शाहरुख ने इस सीख को याद करते हुए बताया कि नाना की बातें आज भी उनके लिए उतनी ही मायने रखती हैं। उन्होंने अपने पोस्ट के आखिर में लिखा, ‘नाना, आपकी आत्मा को शांति मिले। अल्लाह आप पर अपनी रहमत बरसाए। स्वर्ग को आपके आने से और खूबसूरती मिलेगी। आप एक शानदार अभिनेता और कैरम के बेजोड़ खिलाड़ी थे। आपसे प्यार है और आपकी बहुत याद आएगी। बहुत जल्दी चले गए, मेरे हीरो एक्टर! रेस्ट इन पीस।’ अपने संदेश के अंत में शाहरुख ने एक बार फिर नाना के प्रति अपना प्यार जताया और कहा कि वह उनकी सीख को हमेशा अपने दिल में रखेंगे।
पत्नी नीलकांति और बेटे मल्हार को पीछे छोड़ गए नाना
नाना पाटेकर अपने पीछे पत्नी नीलकांति पाटेकर और बेटे मल्हार पाटेकर को छोड़ गए हैं। उनके निधन से फिल्म जगत ने एक ऐसे कलाकार को खो दिया, जो अपनी दमदार अदाकारी, बेबाक बातचीत और अलग अंदाज के लिए पहचाने जाते थे। शाहरुख खान की भावुक श्रद्धांजलि से भी यही जाहिर हुआ कि नाना का रिश्ता उनके लिए सिर्फ फिल्मी दुनिया तक सीमित नहीं था, बल्कि उसमें अपनापन, दोस्ती और जिंदगी भर साथ रहने वाली सीख भी शामिल थी। नाना पाटेकर की यादें, उनके निभाए किरदार और उनकी कही बातें उनके चाहने वालों के बीच हमेशा जिंदा रहेंगी। -

नाना पाटेकर ने सालों पहले कर ली थी अंतिम संस्कार की तैयारी, 12 मन सूखी लकड़ी को बताया था अपनी ‘फाइनल प्रॉपर्टी’
नई दिल्ली: दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का गुरुवार सुबह गोवा स्थित उनके घर पर निधन हो गया। वह 75 वर्ष के थे। उनके निधन की खबर से फिल्म जगत और उनके प्रशंसकों में शोक की लहर है। नाना पाटेकर के निधन के बाद उनके वर्षों पुराने एक बयान की चर्चा भी हो रही है, जिसमें उन्होंने अपने अंतिम संस्कार को लेकर अपनी इच्छा के बारे में बताया था। उन्होंने कहा था कि उन्हें पता है कि एक दिन उन्हें दुनिया से जाना है और उनके अंतिम संस्कार के लिए 12 मन लकड़ी पर्याप्त होगी। अभिनेता ने इसे अपनी आखिरी संपत्ति तक बताया था।नाना पाटेकर ने सितंबर 2023 में एक इंटरव्यू के दौरान मौत और अंतिम संस्कार को लेकर खुलकर बात की थी। उन्होंने कहा था कि वह मौत में विश्वास रखते हैं और जानते हैं कि एक दिन उन्हें जाना ही होगा। अपने अंतिम संस्कार के बारे में उन्होंने बेहद साधारण अंदाज में कहा था कि उन्हें 12 मन लकड़ी की जरूरत पड़ेगी। उन्होंने कहा था कि यही उनकी ‘फाइनल प्रॉपर्टी’ है और इसके साथ ही वह दुनिया से चले जाएंगे। उनके इस बयान से यह स्पष्ट था कि वह जीवन के अंतिम पड़ाव को लेकर व्यावहारिक सोच रखते थे।
अभिनेता ने यह भी बताया था कि उन्होंने अपने अंतिम संस्कार के लिए 12 मन लकड़ी पहले से ही जमा करके रखी है। उन्होंने खास तौर पर इच्छा जताई थी कि उनके अंतिम संस्कार में सूखी लकड़ी का इस्तेमाल किया जाए। उनका कहना था कि जो लकड़ी उन्होंने जमा कर रखी है, वह सूखी है और उसी से उनका अंतिम संस्कार किया जाए। उन्होंने साफ तौर पर कहा था कि गीली लकड़ी का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। नाना पाटेकर की यह बात उनके सहज और अलग अंदाज को भी दिखाती है, जिसमें उन्होंने गंभीर विषय को भी अपने खास हास्य के साथ सामने रखा था।
सूखी लकड़ी के इस्तेमाल को लेकर नाना पाटेकर ने मजाकिया अंदाज में इसकी वजह भी बताई थी। उन्होंने कहा था कि अगर गीली लकड़ी का इस्तेमाल किया गया तो आंखों में आंसू आ सकते हैं। ऐसे में मरते समय यह गलतफहमी हो सकती है कि लोग उनके लिए रो रहे हैं। उन्होंने कहा था कि कम से कम मरते समय ऐसी गलतफहमी नहीं होनी चाहिए। उनके इस बयान में मौत जैसे गंभीर विषय के बीच उनका चिर-परिचित हास्य नजर आया था।
नाना पाटेकर के आखिरी समय की बात करें तो गुरुवार सुबह गोवा में उनके घर पर अचानक तबीयत बिगड़ गई थी। मणिपाल हॉस्पिटल के डॉ. शेखर सालकर के अनुसार, रात करीब 2:30 बजे नाना पाटेकर ने एक दोस्त से कहा था कि उन्हें अच्छा महसूस नहीं हो रहा है और सीने के बाईं ओर दर्द हो रहा है। इसके बाद उनका दोस्त डोना पाउला स्थित घर पहुंचा, जहां उन्हें तकलीफ में पाया गया। इसके बाद केयरटेकर को बुलाया गया और एम्बुलेंस भी बुलाई गई।
नाना पाटेकर को सुबह करीब 4:20 बजे मणिपाल हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की कोशिश की। हालांकि, सुबह करीब 5:20 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। उनकी मौत कार्डियक अरेस्ट की वजह से होने की बात सामने आई है। मौत की सही वजह का पता लगाने के लिए पोस्टमार्टम किया जाएगा। अभिनेता के निधन के बाद उनके पुराने बयान में कही गई अंतिम संस्कार की इच्छा भी चर्चा में आ गई है।
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नाना पाटेकर का गुस्सा पड़ा भारी, रोने के लिए ग्लिसरीन नहीं दी और जड़ दिया थप्पड़, एक्ट्रेस ने भी नहीं किया बर्दाश्त
नई दिल्ली। नाना पाटेकर हिंदी सिनेमा के उन कलाकारों में गिने जाते हैं जिनकी दमदार और इंटेंस एक्टिंग ने दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी है। फिल्मों में उनके किरदार अक्सर बेहद आक्रामक और भावनात्मक नजर आते रहे हैं। उनके गुस्सैल स्वभाव को लेकर भी कई किस्से समय समय पर सामने आते रहे हैं। ऐसा ही एक चौंकाने वाला किस्सा साल 1997 में रिलीज हुई फिल्म यशवंत से जुड़ा है। इस फिल्म की शूटिंग के दौरान नाना पाटेकर ने एक सीन में अपनी को स्टार मधु को कथित तौर पर सच में थप्पड़ मार दिया था। खास बात यह रही कि इसके बाद मधु ने भी बिना देर किए उन्हें पलटकर थप्पड़ मार दिया था।फिल्म यशवंत में नाना पाटेकर और मधु ने पति पत्नी का किरदार निभाया था। फिल्म का निर्देशन अनिल मट्टू ने किया था। हाल ही में एक इंटरव्यू में मधु ने इस पुराने किस्से को याद किया और बताया कि उस सीन में उन्हें रोना था। आमतौर पर फिल्मों में कलाकारों की आंखों में आंसू लाने के लिए ग्लिसरीन का इस्तेमाल किया जाता है। मधु भी इसी तरीके का इस्तेमाल करना चाहती थीं लेकिन नाना पाटेकर ने उन्हें ग्लिसरीन लगाने से रोक दिया।
मधु के मुताबिक नाना चाहते थे कि वह आंसुओं के लिए किसी कृत्रिम तरीके का सहारा न लें बल्कि किरदार की भावनाओं को भीतर से महसूस करें। उन्होंने मधु से कहा कि उन्हें स्थिति को महसूस करना चाहिए ताकि आंखों से आंसू अपने आप निकलें। लेकिन मधु उस समय ऐसा नहीं कर पा रही थीं। इसी दौरान नाना ने उन्हें अचानक असली थप्पड़ मार दिया। थप्पड़ इतना जोरदार था कि मधु की आंखों से सच में आंसू निकल आए।
इस घटना ने मधु को बुरी तरह चौंका दिया क्योंकि रिहर्सल के दौरान ऐसा कुछ नहीं हुआ था। वह इसके लिए बिल्कुल तैयार नहीं थीं। अचानक थप्पड़ पड़ने के बाद उन्हें गुस्सा आ गया। मधु ने बताया कि उनका स्वभाव भी काफी गुस्सैल है इसलिए उन्होंने नाना पाटेकर को तुरंत पलटकर थप्पड़ मार दिया। सेट पर हुआ यह वाकया उनके लिए काफी हैरान करने वाला था लेकिन बाद में उन्होंने नाना के व्यवहार को लेकर एक अहम बात भी स्पष्ट की।
मधु के अनुसार नाना पाटेकर उनके साथ सामान्य तौर पर रूड नहीं थे। उनका मानना था कि नाना तभी सख्ती दिखाते थे जब उन्हें लगता था कि सामने वाला कलाकार अपनी क्षमता के मुताबिक बेहतर प्रदर्शन कर सकता है। वह अभिनय को लेकर बेहद गंभीर रहते थे और अपने को स्टार से भी पूरी तरह भावनात्मक प्रदर्शन की उम्मीद करते थे।
आज इतने वर्षों बाद यह किस्सा फिर चर्चा में है क्योंकि यह नाना पाटेकर की अभिनय शैली और सेट पर उनके काम करने के तरीके की एक अलग तस्वीर सामने लाता है। हालांकि किसी कलाकार को बिना पूर्व जानकारी के थप्पड़ मारना निश्चित तौर पर असहज स्थिति पैदा कर सकता है। मधु के मुताबिक उस समय उन्हें गुस्सा जरूर आया था लेकिन उन्होंने नाना के साथ काम करने के अनुभव को केवल इस एक घटना तक सीमित नहीं माना। यही वजह है कि फिल्म यशवंत से जुड़ा यह किस्सा आज भी बॉलीवुड के चर्चित शूटिंग किस्सों में याद किया जाता है।
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नाना पाटेकर और मनीषा कोइराला के रिश्ते का सच, अग्नि साक्षी के राइटर ने बताया दोनों के बीच कैसी थी नजदीकी
नई दिल्ली। 90 के दशक में बॉलीवुड की कई जोड़ियां अपने काम के साथ साथ निजी रिश्तों को लेकर भी सुर्खियों में रही थीं। इन्हीं में अभिनेता नाना पाटेकर और अभिनेत्री मनीषा कोइराला का नाम भी अक्सर चर्चा में आता था। दोनों ने फिल्म अग्नि साक्षी में साथ काम किया था और इसी दौरान उनकी नजदीकियों को लेकर तरह तरह की चर्चाएं सामने आने लगी थीं। लंबे समय तक दोनों के कथित अफेयर की खबरें फिल्मी गलियारों में चर्चा का विषय बनी रहीं। हालांकि इन चर्चाओं की कभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई। अब अग्नि साक्षी के लेखक रणबीर पुष्प के पुराने बयान ने एक बार फिर इस किस्से को चर्चा में ला दिया है।रणबीर पुष्प ने नाना पाटेकर और मनीषा कोइराला के साथ काम करने के अपने अनुभव को साझा करते हुए बताया था कि दोनों के बीच अच्छी दोस्ती थी। सेट पर दोनों की आपसी समझ भी काफी मजबूत थी। वे अपने किरदारों और दृश्यों को लेकर आपस में चर्चा करते थे और उनकी यह समझ पर्दे पर भी दिखाई देती थी। रणबीर के मुताबिक उन्होंने दोनों को करीब जरूर देखा लेकिन उनके रिश्ते को उन्होंने कभी रोमांटिक नजरिए से नहीं देखा था।
जब रणबीर से सीधे पूछा गया कि क्या नाना पाटेकर और मनीषा कोइराला के बीच दोस्ती से आगे भी कोई रिश्ता था तो उन्होंने साफ तौर पर कहा कि उन्हें ऐसा कभी महसूस नहीं हुआ। उन्होंने माना कि दोनों के बीच करीबी और गहरी समझ थी लेकिन इसे प्यार या रोमांस कहना उनके लिए सही नहीं था। रणबीर ने बताया कि दोनों कलाकार साथ काम करते समय अपने सीन को लेकर बातचीत करते थे और इसी वजह से उनकी स्क्रीन केमिस्ट्री भी काफी प्रभावी नजर आती थी।
रणबीर ने यह भी बताया कि उस समय बाद में अखबारों और मीडिया में नाना और मनीषा के रिश्ते को लेकर कई तरह की बातें सामने आई थीं। उन्होंने उन खबरों को पढ़ा भी था लेकिन अपने अनुभव के आधार पर उन्होंने कभी दोनों के रिश्ते को उस नजरिए से नहीं देखा। उनका कहना था कि सेट पर उनका मुख्य ध्यान अपने काम पर रहता था। वह काम से जुड़े मामलों पर ध्यान देते थे और कलाकारों के निजी रिश्तों को लेकर ज्यादा गौर नहीं करते थे।
फिल्म अग्नि साक्षी साल 1996 में रिलीज हुई थी। पार्थो घोष के निर्देशन में बनी इस साइकोलॉजिकल थ्रिलर में नाना पाटेकर मनीषा कोइराला और जैकी श्रॉफ प्रमुख भूमिकाओं में नजर आए थे। फिल्म में नाना और मनीषा की जोड़ी को दर्शकों ने देखा और इसी दौरान दोनों की ऑफस्क्रीन बॉन्डिंग को लेकर भी चर्चाएं तेज हुई थीं। वर्षों बाद भी दोनों के कथित रिश्ते का किस्सा बॉलीवुड की चर्चित कहानियों में शामिल रहा है।
हालांकि रणबीर पुष्प का बयान यह साफ करता है कि उन्होंने दोनों के बीच मजबूत दोस्ती और अच्छी अंडरस्टैंडिंग जरूर देखी थी लेकिन उनके सामने ऐसा कोई अनुभव नहीं आया जिससे वह इसे रोमांटिक रिश्ता मान सकें। ऐसे में नाना पाटेकर और मनीषा कोइराला के बीच प्रेम संबंध की पुरानी चर्चाएं आज भी अफवाहों और अटकलों तक ही सीमित नजर आती हैं।
