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  • मुंबई के विद्याविहार पुल के नाम पर महाराष्ट्र में सियासी घमासान, शिवसेना यूबीटी ने नाना पाटेकर तो भाजपा ने स्मित मच्छार का नाम सुझाया

    मुंबई के विद्याविहार पुल के नाम पर महाराष्ट्र में सियासी घमासान, शिवसेना यूबीटी ने नाना पाटेकर तो भाजपा ने स्मित मच्छार का नाम सुझाया


    नई दिल्ली । महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में विद्याविहार के नए ईस्ट-वेस्ट पुल के नाम को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। पुल का उद्घाटन होने से पहले ही इसे किसके नाम पर रखा जाए, इस मुद्दे पर अलग-अलग प्रस्ताव सामने आए हैं। शिवसेना (यूबीटी) इस पुल का नाम दिवंगत अभिनेता नाना पाटेकर के नाम पर रखने की मांग कर रही है, जबकि भाजपा विधायक पराग शाह ने कैप्टन स्मित मच्छार के नाम का सुझाव दिया है। दोनों नामों के पीछे अलग-अलग वजहें बताई जा रही हैं, जिससे यह मामला राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है।

    शिवसेना (यूबीटी) ने पुल पर ‘पद्मश्री नाना पाटेकर सेतु’ नाम का बैनर भी लगाया है। पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने मुंबई की मेयर ऋतु तावड़े से मुलाकात कर उन्हें एक पत्र सौंपा। इस पत्र में मांग की गई कि नए पुल का नाम नाना पाटेकर के नाम पर रखा जाए। पार्टी का मानना है कि नाना पाटेकर ने फिल्मों के अलावा सामाजिक कार्यों के जरिए भी महाराष्ट्र के लोगों के बीच विशेष पहचान बनाई थी।

    दूसरी ओर, भाजपा विधायक पराग शाह ने पुल का नाम कैप्टन स्मित मच्छार के नाम पर रखने का प्रस्ताव दिया है। मच्छार ने 30 सितंबर को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान में अपहरण की कोशिश को नाकाम करने में अहम भूमिका निभाई थी। इस घटना के दौरान गंभीर चोटों के बावजूद उन्होंने विमान की सुरक्षा से जुड़ी परिस्थितियों का सामना किया। उनके साहस और यात्रियों की सुरक्षा के लिए किए गए प्रयासों के कारण उनका नाम भी पुल के नामकरण की चर्चा में शामिल हो गया है।

    बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) में सदन के नेता गणेश खनकर ने शिवसेना (यूबीटी) पर इस मामले में राजनीतिक श्रेय लेने के लिए विवाद खड़ा करने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि नाना पाटेकर को सम्मान देने के लिए पुल के बजाय किसी थिएटर या थिएटर परिसर का नाम उनके नाम पर रखना अधिक उपयुक्त होगा। इस तरह पुल के नाम को लेकर दोनों पक्षों की राय अलग-अलग है। फिलहाल नामकरण को लेकर कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है।

    बीएमसी के अनुसार, विद्याविहार का यह पुल लगभग 650 मीटर लंबा और दो लेन वाला है। यह विद्याविहार स्टेशन के पूर्वी हिस्से में रामचंद्र चेंबूरकर मार्ग को घाटकोपर के पश्चिमी हिस्से में लाल बहादुर शास्त्री मार्ग से जोड़ता है। पुल का लगभग 100 मीटर हिस्सा रेलवे पटरियों के ऊपर बनाया गया है। इस संपर्क मार्ग से पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों के बीच आवागमन में सुविधा मिलने की उम्मीद है।

    नाना पाटेकर का जन्म महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के मुरुड-जंजीरा में हुआ था। उन्होंने अपने अभिनय के लिए तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार हासिल किए और वर्ष 2013 में पद्मश्री से सम्मानित हुए। फिल्मों के अलावा किसानों की मदद के लिए किए गए कार्यों के कारण भी उन्हें पहचान मिली। उन्होंने राज कपूर पुरस्कार के तहत मिली 10 लाख रुपये की राशि सूखा राहत के लिए दान कर दी थी। वर्ष 2015 में उन्होंने अभिनेता मकरंद अनासपुरे के साथ नाम फाउंडेशन की स्थापना की।

    यह संस्था सूखे से प्रभावित किसानों और उनके परिवारों की मदद करती है। उसी वर्ष उन्होंने विदर्भ के 62 परिवारों और लातूर तथा उस्मानाबाद के 113 परिवारों को चेक वितरित किए थे। उन्होंने प्रादेशिक सेना में भी सेवा दी थी और 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान उनकी भूमिका का भी उल्लेख किया जाता है। 8 अक्टूबर 2026 को गोवा में 75 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया।

    कैप्टन स्मित मच्छार का परिवार मुंबई के घाटकोपर पूर्व में रहता है। वह कपड़ा कारोबारी परिवार से आते हैं और उन्होंने टेक्सटाइल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी। एक पॉडकास्ट में उन्होंने बताया था कि बचपन से पायलट बनना उनका सपना नहीं था। उन्होंने स्पाइसजेट में 11 साल काम करने के बाद वर्ष 2022 में फ्लाईदुबई में नौकरी शुरू की।

    30 सितंबर को वह उड़ान एफजेड-1073 के कप्तान थे। दुबई से तेल अवीव जा रहे इस विमान में 174 लोग सवार थे। उड़ान के दौरान उनके सह-पायलट ने उन पर कुल्हाड़ी से हमला कर दिया। गंभीर चोटों के बावजूद मच्छार ने कॉकपिट का दरवाजा खोला, जिसके बाद यात्रियों और चालक दल के सदस्यों ने हमलावर को काबू करने में मदद की।

    अब विद्याविहार पुल के नामकरण पर अंतिम फैसला संबंधित प्राधिकरणों को लेना है। नाना पाटेकर के सामाजिक योगदान और स्मित मच्छार के साहसिक कार्य, दोनों को उनके समर्थक सम्मान देने योग्य बता रहे हैं। ऐसे में देखना होगा कि मुंबई के इस नए पुल को आखिर किस नाम से पहचान मिलती है।

  • नाना पाटेकर के अंतिम संस्कार में बॉलीवुड सितारों की गैरमौजूदगी पर भड़के प्रवीण तारडे, बोले- नाना से बड़ा नहीं बॉलीवुड

    नाना पाटेकर के अंतिम संस्कार में बॉलीवुड सितारों की गैरमौजूदगी पर भड़के प्रवीण तारडे, बोले- नाना से बड़ा नहीं बॉलीवुड


    नई दिल्ली:
    नाना पाटेकर के अंतिम संस्कार में बॉलीवुड के कई कलाकारों की गैरमौजूदगी को लेकर मराठी अभिनेता और निर्देशक प्रवीण तारडे ने नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि जो लोग नाना पाटेकर को अपना दोस्त मानते थे, उन्हें उनके अंतिम संस्कार में जरूर पहुंचना चाहिए था। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिल्मी सितारों के नहीं आने से नाना पाटेकर की महानता कम नहीं होती। उनके मुताबिक, अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में किसानों का शामिल होना इस बात का प्रमाण था कि अभिनेता का जुड़ाव केवल फिल्मी दुनिया तक सीमित नहीं था।

    नाना पाटेकर का 8 अक्टूबर 2026 को गोवा में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था। उनके निधन की खबर से हिंदी और मराठी सिनेमा जगत में शोक की लहर फैल गई। उनका अंतिम संस्कार पुणे के पास स्थित उनके पैतृक गांव डोणजे में उनके फार्महाउस पर किया गया। इस दौरान परिवार के सदस्यों, राजनीतिक हस्तियों, सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों और मनोरंजन जगत की कुछ हस्तियों ने उन्हें अंतिम विदाई दी। हालांकि, बॉलीवुड के कई चर्चित कलाकारों की सीमित मौजूदगी चर्चा का विषय बन गई।

    प्रवीण तारडे ने इस मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए कहा कि नाना पाटेकर का कद किसी फिल्म उद्योग या सितारों की उपस्थिति से तय नहीं होता। उन्होंने अंतिम संस्कार में पहुंचे किसानों का विशेष रूप से उल्लेख किया। उनके अनुसार, महाराष्ट्र के अलग-अलग हिस्सों से किसान नाना को अंतिम विदाई देने पहुंचे थे। तारडे ने किसानों के पसीने और मिट्टी से जुड़े जीवन का जिक्र करते हुए कहा कि उनके लिए किसानों का सम्मान फिल्मी दुनिया के बड़े नामों से भी अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने नाना के ग्रामीण जीवन और किसानों के साथ उनके संबंधों को उनकी पहचान का अहम हिस्सा बताया।

    तारडे ने कहा कि नाना पाटेकर ने खुद को केवल बॉलीवुड के अभिनेता के रूप में पेश नहीं किया। वह अपनी पहचान किसान के रूप में भी बताते थे। इसी वजह से उनके अंतिम संस्कार में किसानों की बड़ी संख्या में मौजूदगी को तारडे ने खास महत्व दिया। उन्होंने कहा कि नाना का लोगों से जुड़ाव और उनके प्रति सम्मान उनकी वास्तविक विरासत को दर्शाता है। उनके मुताबिक, अभिनेता की लोकप्रियता का आकलन केवल इस आधार पर नहीं किया जा सकता कि अंतिम संस्कार में कितने फिल्मी सितारे पहुंचे।

    हालांकि, प्रवीण तारडे ने बॉलीवुड के कुछ लोगों की गैरमौजूदगी पर शिकायत भी जताई। उन्होंने कहा कि कम से कम उन लोगों को जरूर आना चाहिए था, जिन्हें नाना अपना दोस्त मानते थे। उन्होंने जैकी श्रॉफ और सुरेश वाडकर का उल्लेख करते हुए बताया कि ये दोनों नाना को अंतिम विदाई देने पहुंचे थे। तारडे ने मुंबई में किसी कम चर्चित कलाकार के निधन पर लोगों के बड़ी संख्या में पहुंचने और नाना के अंतिम संस्कार में सीमित बॉलीवुड मौजूदगी के बीच अंतर पर भी सवाल उठाए।

    नाना पाटेकर का अभिनय करियर हिंदी और मराठी सिनेमा में लंबे समय तक प्रभावशाली रहा। फिल्मों के अलावा वह किसानों और ग्रामीण समुदायों से जुड़े सामाजिक कार्यों के लिए भी पहचाने जाते थे। उनके अंतिम संस्कार में किसानों की बड़ी मौजूदगी ने उनके इस जुड़ाव को फिर चर्चा में ला दिया। प्रवीण तारडे की नाराजगी के बावजूद उनका कहना था कि बॉलीवुड के सितारों की गैरमौजूदगी से नाना का सम्मान कम नहीं होता। उनके लिए अभिनेता को अंतिम विदाई देने पहुंचे किसान ही उनकी लोकप्रियता और लोगों के साथ उनके गहरे संबंधों की महत्वपूर्ण तस्वीर थे।

  • नाना पाटेकर ने उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था की सराहना की, बोले पुलिस की आधुनिकता से लोगों का भरोसा और सुरक्षा बढ़ी

    नाना पाटेकर ने उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था की सराहना की, बोले पुलिस की आधुनिकता से लोगों का भरोसा और सुरक्षा बढ़ी

    नई दिल्ली । प्रसिद्ध अभिनेता नाना पाटेकर ने उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था में हुए बदलाव की सराहना करते हुए कहा कि प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लोगों का भरोसा बढ़ा है। लखनऊ में उत्तर प्रदेश पुलिस के थीम गीत ‘खाकी का सितारा’ के विमोचन कार्यक्रम में उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व की भी प्रशंसा की और कहा कि इतने बड़े तथा विविधताओं वाले राज्य में प्रभावी कानून व्यवस्था बनाए रखना आसान काम नहीं है।

    नाना पाटेकर ने कहा कि करीब 25 करोड़ की आबादी वाले उत्तर प्रदेश में केवल पुलिस बल की संख्या बढ़ाने से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत नहीं हो सकती। इसके लिए स्पष्ट नीति, मजबूत नेतृत्व और निर्णय लेने की दृढ़ इच्छाशक्ति भी जरूरी है। उनके मुताबिक कानून व्यवस्था को शासन की प्राथमिकताओं में शामिल किए जाने के सकारात्मक परिणाम अब प्रदेश में दिखाई दे रहे हैं।

    अभिनेता ने कहा कि उन्होंने पिछले कई दशकों के दौरान उत्तर प्रदेश को बदलते हुए देखा है। उनके अनुसार प्रदेश में कानून व्यवस्था को लेकर लोगों के विश्वास में वृद्धि हुई है। प्रशासनिक स्तर पर भी बदलाव दिखाई देता है और सरकार के कामकाज में निर्णय लेने की स्पष्टता नजर आती है।

    नाना पाटेकर ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बधाई देते हुए कहा कि पुलिस को आधुनिक संसाधन और नई तकनीक उपलब्ध कराने के साथ उसके आत्मविश्वास को मजबूत करना भी महत्वपूर्ण है। उनका कहना था कि आधुनिक तकनीक से लैस पुलिस बदलती परिस्थितियों में अपराध से निपटने में अधिक सक्षम हो सकती है।

    उन्होंने पुलिस और नागरिकों की संयुक्त भूमिका पर भी जोर दिया। नाना पाटेकर ने कहा कि पुलिस जितनी आधुनिक और सक्षम होगी, नागरिकों की सुरक्षा उतनी बेहतर होगी। वहीं जागरूक नागरिक अपराधियों के लिए चुनौतियां बढ़ा सकते हैं। उन्होंने खासतौर पर साइबर अपराध के बढ़ते मामलों को गंभीर चुनौती बताया।

    अभिनेता ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर होने वाली ठगी को लेकर लोगों को सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति खुद को पुलिस, केंद्रीय जांच एजेंसी या किसी अन्य सरकारी अधिकारी के रूप में पेश करके फोन अथवा वीडियो कॉल पर डराने की कोशिश करे और पैसे की मांग करे, तो लोगों को सावधान हो जाना चाहिए।

    नाना पाटेकर ने कहा कि साइबर अपराधियों की सबसे बड़ी ताकत केवल तकनीक नहीं, बल्कि लोगों के मन में पैदा किया गया डर है। इसी डर का फायदा उठाकर ठग लोगों से उनकी मेहनत की कमाई हासिल करने का प्रयास करते हैं। इसलिए किसी भी संदिग्ध कॉल या वीडियो बातचीत में दबाव में आकर आर्थिक लेनदेन नहीं करना चाहिए।

    उन्होंने उत्तर प्रदेश पुलिस की ओर से डिजिटल अरेस्ट के खिलाफ जागरूकता फैलाने के लिए तैयार की गई फिल्म की भी सराहना की। उनका कहना था कि अगर कलाकारों की भागीदारी से किसी परिवार की जीवनभर की कमाई बचाई जा सके या किसी बुजुर्ग को साइबर ठगी का शिकार होने से रोका जा सके, तो यह समाज के लिए महत्वपूर्ण योगदान होगा।

    नाना पाटेकर ने उत्तर प्रदेश पुलिस के अधिकारियों और जवानों की जिम्मेदारियों का उल्लेख करते हुए कहा कि पुलिसकर्मियों को वास्तविक परिस्थितियों में तत्काल निर्णय लेना पड़ता है। उनके पास फिल्मों की तरह गलती सुधारने या दोबारा प्रयास करने का अवसर नहीं होता। कठिन परिस्थितियों में सही निर्णय लेना उनकी बड़ी जिम्मेदारी है।

    उन्होंने उम्मीद जताई कि उत्तर प्रदेश पुलिस आगे भी जनता के विश्वास को मजबूत बनाए रखेगी और प्रदेश को सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रहेगी। उनके बयान के दौरान कानून व्यवस्था के साथ साइबर सुरक्षा और नागरिक जागरूकता को भी प्रमुख मुद्दे के रूप में सामने रखा गया।