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  • 19 फरवरी महाकाल भस्म आरती: त्रिपुंड-त्रिनेत्र और ॐ के साथ बाबा महाकाल का दिव्य श्रृंगार

    19 फरवरी महाकाल भस्म आरती: त्रिपुंड-त्रिनेत्र और ॐ के साथ बाबा महाकाल का दिव्य श्रृंगार


    उज्जैन । विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि गुरुवार को सुबह 4 बजे कपाट खोले गए और भस्म आरती का आयोजन धूमधाम से संपन्न हुआ। इस अवसर पर बाबा महाकाल का दिव्य श्रृंगार विशेष विधि-विधान के साथ किया गया। मंदिर के गर्भगृह में पुजारियों ने सभी देवी-देवताओं का पूजन और जलाभिषेक के बाद पंचामृत दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से भगवान का अभिषेक किया।

    भगवान महाकाल का भांग और चंदन से राजा स्वरूप में श्रृंगार किया गया। भस्म अर्पण से पहले प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम का जल अर्पित किया गया और मंत्रोच्चार के साथ भगवान का ध्यान किया गया। कपूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को कपड़े से ढांककर भस्म रमाई गई। इसके साथ ही शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुण्डमाल, रुद्राक्ष की माला और पुष्पों की माला अर्पित की गई, जिससे बाबा महाकाल का अलंकरण और भी भव्य और मनोहारी दिखाई दिया।

    सुबह-सुबह सैकड़ों श्रद्धालु भस्म आरती में शामिल हुए। उन्होंने नंदी महाराज के दर्शन किए और उनके कान के समीप अपनी मनोकामनाएं पूरी होने का आशीर्वाद मांगा। श्रद्धालु बाबा महाकाल की जयकारे लगाते रहे, जिससे पूरा मंदिर जयकारों की गूंज से गुंजायमान हो उठा।

    मंदिर परिसर में भक्तों की भीड़ सुबह से ही रही और हर कोई भक्ति और श्रद्धा भाव से बाबा महाकाल के दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त कर रहा था। भस्म आरती के दौरान मंदिर में शांतिपूर्ण वातावरण, मंत्रोच्चार और दिव्य गंध ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक आनंद से भर दिया।

  • देश का अनोखा मंदिर, जहां शिव नहीं बल्कि नंदी के नाम से होती है पूजा, रहस्य से भरा है यह धाम

    देश का अनोखा मंदिर, जहां शिव नहीं बल्कि नंदी के नाम से होती है पूजा, रहस्य से भरा है यह धाम


    नई दिल्ली । भारत में भगवान शिव के असंख्य मंदिर हैं, लेकिन कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में स्थित एक ऐसा अनोखा मंदिर भी है, जो शिव के नाम से नहीं बल्कि उनके प्रिय भक्त, वाहन और गण नंदी के नाम से जाना जाता है। शिव और नंदी को एक-दूसरे के बिना अधूरा माना जाता है, लेकिन श्री दक्षिणामुख नंदी तीर्थ कल्याणी क्षेत्र देश का ऐसा दुर्लभ स्थल है, जहां नंदी स्वयं शिवलिंग का लगातार अभिषेक करते दिखाई देते हैं। यही कारण है कि यह मंदिर श्रद्धा के साथ-साथ अपने रहस्य के कारण भी भक्तों और पर्यटकों के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

    यह पवित्र मंदिर बेंगलुरु के मल्लेश्वरम लेआउट क्षेत्र में स्थित है और इसे नंदीश्वर तीर्थ, बसवा तीर्थ या स्थानीय भाषा में मल्लेश्वरम नंदी गुड़ी भी कहा जाता है। करीब 400 साल पुराने इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां नंदी की विशाल मूर्ति के मुख से लगातार जलधारा बहती रहती है, जो सीधे शिवलिंग का अभिषेक करती है। आश्चर्य की बात यह है कि आज तक कोई यह पता नहीं लगा सका है कि यह जलधारा आखिर कहां से आती है। वैज्ञानिक और धार्मिक दोनों ही दृष्टि से यह मंदिर एक रहस्य बना हुआ है।

    इतिहास की बात करें तो इस मंदिर का दोबारा प्रकट होना भी किसी चमत्कार से कम नहीं माना जाता। वर्ष 1997 में जब इस क्षेत्र में जमीन की खुदाई का काम चल रहा था, तब यह प्राचीन मंदिर फिर से सामने आया। अन्य दक्षिण भारतीय मंदिरों की तरह यहां कोई भव्य गोपुरम नहीं है और आकार में भी यह मंदिर अपेक्षाकृत छोटा है, लेकिन इसकी आध्यात्मिक महत्ता और रहस्यमयी स्वरूप इसे विशिष्ट बनाता है। नंदी के मुख से निरंतर होते शिवाभिषेक को देखकर भक्तों की आस्था और भी गहरी हो जाती है।

    इस मंदिर की स्थापना को लेकर एक लोकप्रिय दंतकथा भी प्रचलित है। कहा जाता है कि प्राचीन काल में इस क्षेत्र में मूंगफली की खेती हुआ करती थी। किसानों को बार-बार एक बड़ी समस्या का सामना करना पड़ता था। हर पूर्णिमा की रात एक सांड खेतों में घुस आता और पूरी फसल को नष्ट कर देता। परेशान होकर एक रात सभी किसानों ने उस सांड को पकड़ने का फैसला किया। वे उसका पीछा करते हुए एक पहाड़ी तक पहुंचे, लेकिन वहां पहुंचते ही सांड अचानक गायब हो गया। उसकी जगह उन्हें नंदी की एक मूर्ति दिखाई दी, जिसे कन्नड़ भाषा में बसवा कहा जाता है।

    किसानों ने इसे भगवान शिव के गण नंदी का संकेत मानते हुए उनके क्रोध को शांत करने के लिए उसी स्थान पर मंदिर का निर्माण करवा दिया। मान्यता है कि मंदिर बनने के बाद सांड ने खेतों को नुकसान पहुंचाना बंद कर दिया। तभी से यहां हर साल उत्सव मनाया जाता है और किसान अपनी फसल का पहला हिस्सा नंदी को अर्पित करते हैं। बताया जाता है कि मंदिर में स्थापित नंदी की मूर्ति दुनिया की सबसे बड़ी नंदी मूर्तियों में से एक है। आज यह मंदिर न सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि अपनी अनोखी परंपरा और रहस्यमयी जलधारा के कारण देश के सबसे विशिष्ट और चमत्कारी मंदिरों में गिना जाता है।