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  • नारद जयंती पर ‘सांस्कृतिक पुनर्जागरण और मीडिया’ का संदेश, डॉ. मयंक चतुर्वेदी ने रखा राष्ट्रीय दृष्टिकोण

    नारद जयंती पर ‘सांस्कृतिक पुनर्जागरण और मीडिया’ का संदेश, डॉ. मयंक चतुर्वेदी ने रखा राष्ट्रीय दृष्टिकोण


    करैरा । मध्य प्रदेश में शिवपुरी जिले के करैरा स्थित श्री रामराजा गार्डन में नारद जयंती के अवसर पर आयोजित भव्य समारोह में राष्ट्रीय स्तर की वैचारिक दिशा देखने को मिली। युगल किशोर शर्मा (जिला ब्यूरो प्रमुख हिन्दुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी)के संयोजन में हुए इस आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में भोपाल से पधारे प्रसिद्ध लेखक व विचारक डॉ. मयंक चतुर्वेदी (क्षेत्रीय संपादक हिन्दुस्थान समाचार न्यूज़ एजेंसी) ने अपने संबोधन से कार्यक्रम को राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य प्रदान किया। कार्यक्रम का शुभारंभ नारद जी की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। मंच पर विशिष्ट अतिथि ब्रह्मेन्द्र गुप्ता (उपयुक्त विकास), विकाश खण्ड शिक्षा अधिकारी मुकेश शर्मा, धैर्यवर्धन शर्मा (प्रवक्ता, भाजपा मध्यप्रदेश) सहित अन्य गणमान्य मौजूद रहे, अध्यक्षता समाजसेवी सुरेश बंधु ने की।

    सांस्कृतिक पुनर्जागरण पर राष्ट्रीय दृष्टि
    अपने उद्बोधन में डॉ. मयंक चतुर्वेदी ने ‘सांस्कृतिक पुनर्जागरण और मीडिया’ विषय पर विस्तार से विचार रखते हुए कहा कि भारत की संस्कृति केवल परंपरा नहीं, बल्कि ज्ञान और विज्ञान का जीवंत स्रोत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत कभी निष्क्रिय नहीं रहा, बल्कि उसने सदैव विश्व कल्याण की दिशा में मार्गदर्शन किया है। उन्होंने आदि शंकराचार्य का उदाहरण देते हुए कहा कि अल्पायु में ही उन्होंने भारत को वैचारिक रूप से एकजुट कर चार धामों की स्थापना कर सांस्कृतिक पुनर्जागरण का मार्ग प्रशस्त किया। डॉ. चतुर्वेदी ने यह भी रेखांकित किया कि भारत ने सदियों तक बाहरी आक्रमणों का सामना करते हुए अपनी सांस्कृतिक चेतना को जीवित रखा, जो आज भी समाज की मूल शक्ति है।
    विशिष्ट अतिथि ब्रह्मेन्द्र गुप्ता ने देवर्षि नारद को समाज जागरण का प्रतीक बताते हुए कहा कि संवाद और सूचना का सही उपयोग समाज को दिशा देता है। मीडिया की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में समाज की अपेक्षाएँ पत्रकारिता और न्याय व्यवस्था से जुड़ी हैं। मीडिया ही वह सेतु है जो समाज की समस्याओं और वास्तविकताओं को शासन तक पहुँचाता है, इसलिए उसकी जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। वहीं धैर्यवर्धन शर्मा ने चाणक्य और चन्द्रगुप्त मौर्य के उदाहरणों के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में विचार और नेतृत्व की भूमिका को समझाया।
    इस अवसर पर समाज में उत्कृष्ट कार्य करने वाले समाजसेवियों और संस्थाओं को सम्मानित किया गया,जिसमें मुख्य रूप से गौ सेवा,शिक्षा और साहित्य, खेल, रोजगार और समाज सेवा के क्षेत्र में सेवा प्रदान करने वाले लोगों का सम्मान किया गया। जिसे डॉ. चतुर्वेदी ने एक अनुकरणीय पहल बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं और नई पीढ़ी को प्रेरित करते हैं। कार्यक्रम का संचालन प्रसिद्ध कवि प्रमोद भारती ने किया, जबकि अंत में सुनील भार्गव ने वंदेमातरम गीत के साथ समारोह का समापन कराया।
  • आज का पंचांग: ज्येष्ठ कृष्ण प्रतिपदा और नारद जयंती, जानें शुभ-अशुभ समय का पूरा विवरण

    आज का पंचांग: ज्येष्ठ कृष्ण प्रतिपदा और नारद जयंती, जानें शुभ-अशुभ समय का पूरा विवरण

    नई दिल्ली। 2 मई 2026, शनिवार का दिन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष महत्व लिए हुए है। आज ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि का प्रभाव है, जो रात 12 बजकर 50 मिनट तक रहेगा, इसके बाद द्वितीया तिथि प्रारंभ हो जाएगी। इस दिन का सबसे बड़ा धार्मिक महत्व नारद जयंती से जुड़ा है, जिसे ज्ञान और भक्ति के प्रतीक देवर्षि नारद को समर्पित माना जाता है।

    दिन की शुरुआत सूर्य उदय के साथ सुबह 5:40 बजे हुई, जबकि सूर्यास्त शाम 6:57 बजे होगा। चंद्रमा का उदय शाम 7:50 बजे के बाद होगा और इस दिन चंद्रास्त नहीं रहेगा। ग्रहों की यह स्थिति सामान्य रूप से संतुलित मानी जाती है, लेकिन कुछ समय विशेष सावधानी की आवश्यकता दर्शाते हैं।

    ज्योतिषीय गणना के अनुसार आज व्यातीपात योग का प्रभाव सुबह से लेकर रात 9:44 बजे तक रहेगा। इस योग को सामान्यतः चुनौतीपूर्ण माना जाता है, जहां बड़े निर्णयों में जल्दबाजी से बचने की सलाह दी जाती है। इसके बाद वरीयान योग प्रारंभ होगा, जो मानसिक स्थिरता और सकारात्मकता का संकेत देता है।

    दिन की शुरुआत बालव करण से हुई, जो सुबह 11:49 बजे तक प्रभावी रहेगा। इसके बाद कौलव करण शुरू होगा, जो रात तक बना रहेगा। यह समय दैनिक कार्यों के लिए सामान्य रूप से ठीक माना जाता है, लेकिन महत्वपूर्ण कार्यों में शुभ मुहूर्त देखना उचित रहता है।

    यह दिन विक्रम संवत 2083, शक संवत 1948 और गुजराती संवत 2082 के अंतर्गत आता है, जो परिवर्तन और नए आरंभ का संकेत देता है। ज्योतिष के अनुसार यह काल जीवन में नई दिशा और अवसरों का समय माना जाता है।

    धार्मिक दृष्टि से आज का दिन विशेष है क्योंकि नारद जयंती पर भक्ति और ज्ञान की साधना का महत्व बढ़ जाता है। इस दिन पूजा और ध्यान करने से मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ने की मान्यता है। साथ ही यह दिन ज्येष्ठ मास के आरंभ का भी प्रतीक है, जिसे धार्मिक कार्यों, दान और तप के लिए शुभ माना जाता है।

  • बुद्ध पूर्णिमा से शुरू हुआ पावन महीना: मई 2026 के सभी व्रत-त्योहारों की पूरी लिस्ट

    बुद्ध पूर्णिमा से शुरू हुआ पावन महीना: मई 2026 के सभी व्रत-त्योहारों की पूरी लिस्ट


    नई दिल्ली।  मई 2026 की शुरुआत आध्यात्मिक ऊर्जा और आस्था के साथ हो चुकी है। आज यानी Buddha Purnima का पावन पर्व मनाया जा रहा है, जो हिंदू और बौद्ध दोनों धर्मों में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन Gautama Buddha का जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण तीनों घटनाओं को स्मरण किया जाता है। वैशाख मास की पूर्णिमा को आने वाला यह पर्व श्रद्धा, ध्यान और दान का प्रतीक है।

    मई का महीना धार्मिक दृष्टि से बेहद खास रहने वाला है, क्योंकि इसमें कई महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार पड़ रहे हैं। महीने की शुरुआत के कुछ ही दिनों बाद 3 मई को नारद जयंती मनाई जाएगी। इस दिन देवर्षि नारद के प्राकट्य का उत्सव मनाया जाता है, जिन्हें ब्रह्मा जी का मानस पुत्र माना जाता है।

    इसके बाद 13 मई को अपरा एकादशी का व्रत रखा जाएगा। यह दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से पापों का नाश होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है।

    14 मई को गुरु प्रदोष व्रत रखा जाएगा, जो भगवान शिव की उपासना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके अगले ही दिन 16 मई को शनि जयंती और वट सावित्री व्रत एक साथ पड़ रहे हैं। शनि जयंती पर शनिदेव की पूजा का विशेष महत्व है, वहीं वट सावित्री व्रत सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए रखती हैं।

    महीने के उत्तरार्ध में 25 मई को गंगा दशहरा का पर्व मनाया जाएगा। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन मां गंगा का धरती पर अवतरण हुआ था। इस दिन गंगा स्नान और दान-पुण्य का विशेष महत्व बताया गया है।

    इसके बाद 26 मई को पद्मिनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा, जिसे कमला एकादशी भी कहा जाता है। यह व्रत विशेष रूप से पुरुषोत्तम (अधिक) मास में पड़ता है और इसका धार्मिक महत्व काफी अधिक माना जाता है।

    मई महीने के अंत में 28 मई को एक बार फिर गुरु प्रदोष व्रत आएगा, जो भगवान शिव की आराधना के लिए शुभ अवसर माना जाता है।

    कुल मिलाकर, मई 2026 आस्था, पूजा-पाठ और व्रत-त्योहारों से भरा हुआ महीना है। ऐसे में श्रद्धालु पूरे महीने धार्मिक गतिविधियों में व्यस्त रहेंगे और इन पर्वों के माध्यम से आध्यात्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करेंगे।