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  • SCO मंच से पीएम मोदी का बड़ा विजन: सिक्योरिटी, कनेक्टिविटी और अपॉर्च्युनिटी पर दिया जोर, आतंकवाद पर भी कड़ा संदेश

    SCO मंच से पीएम मोदी का बड़ा विजन: सिक्योरिटी, कनेक्टिविटी और अपॉर्च्युनिटी पर दिया जोर, आतंकवाद पर भी कड़ा संदेश


    नई दिल्ली । बिश्केक में आयोजित 26वें शंघाई सहयोग संगठन यानी एससीओ समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत का स्पष्ट और व्यापक विजन दुनिया के सामने रखा। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ समेत कई शीर्ष नेताओं की मौजूदगी में पीएम मोदी ने आतंकवाद वैश्विक सुरक्षा संवाद कूटनीति कनेक्टिविटी और लोगों के बीच संबंधों जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भारत की सोच रखी। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 25 वर्षों में एससीओ ने संवाद और सहयोग की मजबूत नींव तैयार की है और अब आने वाले 25 वर्षों में इस सहयोग को ठोस परिणामों में बदलने का समय आ गया है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने एससीओ को लेकर भारत की सोच के तीन प्रमुख स्तंभों सिक्योरिटी कनेक्टिविटी और अपॉर्च्युनिटी को फिर से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि अब इन विचारों को केवल विजन तक सीमित रखने के बजाय वास्तविक परिणामों में बदलना होगा और इसके लिए सबसे पहली जरूरत शांति और सुरक्षा की है। पीएम मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ बेहद कड़ा संदेश देते हुए कहा कि केवल आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई या जवाबी कार्रवाई पर्याप्त नहीं है बल्कि आतंकवाद के पूरे तंत्र को समाप्त करना जरूरी है। आतंकवाद की फंडिंग भर्ती कट्टरपंथ और आतंकियों को मिलने वाले सुरक्षित ठिकानों को खत्म किए बिना इस चुनौती का समाधान संभव नहीं है। उन्होंने साफ कहा कि इस मुद्दे पर किसी तरह के दोहरे रवैये की कोई जगह नहीं होनी चाहिए और सभी देशों को एकजुट होकर कार्रवाई करनी होगी।

    प्रधानमंत्री ने नशीले पदार्थों की तस्करी को भी क्षेत्रीय सुरक्षा और युवा पीढ़ी के लिए गंभीर खतरा बताया। उन्होंने कहा कि ड्रग ट्रैफिकिंग केवल अपराध नहीं बल्कि समाज और भविष्य के लिए बड़ा संकट है। सुरक्षा संबंधी खतरे संगठित अपराध सूचना सुरक्षा और नार्कोटिक्स जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए एससीओ के तहत बनाए जा रहे केंद्रों को उन्होंने सकारात्मक कदम बताया।

    वैश्विक संघर्षों का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने शांति के लिए संवाद और कूटनीति को सबसे प्रभावी रास्ता बताया। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संकट ने साबित किया है कि किसी एक क्षेत्र में होने वाला संघर्ष केवल उसी इलाके तक सीमित नहीं रहता बल्कि उसका असर पूरी दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा समुद्री व्यापार और सप्लाई चेन पर पड़ता है। इसका सबसे अधिक नुकसान ग्लोबल साउथ के देशों को उठाना पड़ता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि युद्ध और तनाव का समाधान युद्ध के मैदान में नहीं बल्कि बातचीत और कूटनीति के जरिए ही खोजा जाना चाहिए।

    पीएम मोदी ने साझा विकास और कनेक्टिविटी की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि भारत उन सभी प्रयासों का समर्थन करता है जो बाजारों को जोड़ते हैं व्यापार को आसान बनाते हैं और विकास के नए अवसर पैदा करते हैं। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी कनेक्टिविटी पहल में सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान होना चाहिए। उन्होंने इसे एससीओ चार्टर की मूल भावना से भी जोड़ा।

    प्रधानमंत्री ने एससीओ की सबसे बड़ी पूंजी सदस्य देशों के लोगों के बीच आपसी संबंधों को बताया। उनके अनुसार महान सभ्यताओं संस्कृतियों और विचारों का यह संगठन तभी मजबूत होगा जब इसका लाभ सीधे आम लोगों तक पहुंचे। उन्होंने युवाओं के लिए नए अवसर खोलने उद्यमियों के लिए नए बाजार तैयार करने किसानों तक आधुनिक तकनीक पहुंचाने और नागरिकों का जीवन बेहतर बनाने को सफलता की वास्तविक कसौटी बताया। पीएम मोदी ने सहयोग को केवल सरकारों तक सीमित न रखकर लोगों द्वारा संचालित बनाने की जरूरत बताई। स्टार्टअप फोरम यंग ऑथर्स कॉन्क्लेव और यंग साइंटिस्ट्स फोरम जैसे भारतीय प्रयासों का उल्लेख करते हुए उन्होंने एससीओ के भविष्य को युवा शक्ति संवाद और जनसंपर्क से जोड़ने का संदेश दिया। बिश्केक के मंच से भारत ने साफ कर दिया कि आने वाले वर्षों में उसकी प्राथमिकता सुरक्षित शांतिपूर्ण और अधिक सहयोगपूर्ण विश्व व्यवस्था बनाने की होगी।

  • महिला आरक्षण पर पीएम मोदी का बड़ा बयान, इसे बताया ऐतिहासिक और निर्णायक कदम..

    महिला आरक्षण पर पीएम मोदी का बड़ा बयान, इसे बताया ऐतिहासिक और निर्णायक कदम..

    नई दिल्ली:लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का एक महत्वपूर्ण और निर्णायक क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह अवसर केवल एक विधायी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि देश की आधी आबादी को नीति निर्माण में समान भागीदारी देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। उनके अनुसार ऐसे मौके बार-बार नहीं आते और इन्हें देश के भविष्य को मजबूत करने के लिए पूरी गंभीरता से लेना चाहिए।

    प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की लोकतांत्रिक परंपरा अत्यंत प्राचीन और समृद्ध रही है, और समय समय पर इसमें नए आयाम जुड़ते रहे हैं। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण जैसा निर्णय देश की शासन व्यवस्था को और अधिक संवेदनशील और समावेशी बनाने में मदद करेगा। उनके अनुसार जब निर्णय लेने की प्रक्रिया में समाज के सभी वर्गों की भागीदारी होती है, तो नीतियां अधिक संतुलित और प्रभावी बनती हैं।

    उन्होंने विकसित भारत के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि देश तेजी से आगे बढ़ रहा है और इस यात्रा में महिलाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री ने कहा कि विकास केवल आर्थिक प्रगति या बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सामाजिक भागीदारी और समान अवसर भी शामिल हैं।

    अपने संबोधन में उन्होंने यह भी कहा कि पिछले वर्षों में महिला आरक्षण को लेकर कई बार चर्चा हुई है और अलग अलग समय पर इसके विरोध के स्वर भी सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता अपने मत और निर्णय के माध्यम से जवाब देती है और समय के साथ समाज की सोच भी बदलती है। उनके अनुसार महिलाओं की भागीदारी को लेकर देश में लगातार सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि यह विधेयक केवल एक कानून नहीं बल्कि एक ऐसी शुरुआत है जो देश की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा परिवर्तन ला सकती है। उन्होंने कहा कि इससे आने वाले समय में महिलाओं की भूमिका और अधिक मजबूत होगी और शासन व्यवस्था में नई ऊर्जा का संचार होगा।

  • विकसित भारत के निर्माण में महिलाओं की पूर्ण भागीदारी को सुनिश्चित करने पर विशेष जोर..

    विकसित भारत के निर्माण में महिलाओं की पूर्ण भागीदारी को सुनिश्चित करने पर विशेष जोर..


    नई दिल्ली:विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने के लिए मातृशक्ति की भागीदारी को अनिवार्य बताते हुए Narendra Modi ने महिला आरक्षण विधेयक को लेकर देशवासियों को संबोधित किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि भारत को वर्ष 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाना है तो महिलाओं को उनके पूर्ण सामर्थ के साथ राष्ट्रीय विकास की मुख्यधारा में शामिल करना होगा।

    अपने संदेश में प्रधानमंत्री ने माताओं, बहनों और बेटियों से सीधे संवाद करते हुए कहा कि भारत ने आजादी के 100 वर्ष पूरे होने तक विकसित राष्ट्र बनने का संकल्प लिया है। उन्होंने अपने लंबे प्रशासनिक अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी भी राष्ट्र की प्रगति तब तक अधूरी रहती है जब तक उसकी आधी आबादी को समान अवसर और प्रतिनिधित्व नहीं मिलता। उन्होंने जोर देकर कहा कि महिलाओं की सक्रिय भागीदारी ही इस लक्ष्य को वास्तविक रूप दे सकती है।

    प्रधानमंत्री ने हाल ही में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम का उल्लेख करते हुए बताया कि यह विधेयक देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को अधिक समावेशी और सशक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने कहा कि सभी राजनीतिक दलों ने इस विषय पर सहमति दिखाई है और व्यापक स्तर पर सकारात्मक माहौल बनता हुआ दिखाई दे रहा है। उनका मानना है कि वर्ष 2029 के चुनावों तक लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया जाना चाहिए, जिससे नीति निर्माण में उनकी भागीदारी बढ़ेगी।

    उन्होंने यह भी बताया कि पिछले कुछ समय से विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ इस मुद्दे पर निरंतर संवाद जारी है और अधिकांश दलों ने इसका समर्थन किया है। इस सहयोगात्मक दृष्टिकोण को लोकतंत्र की मजबूती का संकेत बताते हुए उन्होंने कहा कि जब सभी दल एकजुट होकर किसी महत्वपूर्ण सामाजिक परिवर्तन के लिए आगे आते हैं तो उसका प्रभाव व्यापक और स्थायी होता है।

    देशवासियों से अपील करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस विषय पर जनजागरूकता बढ़ाना बेहद आवश्यक है। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि वे इस मुद्दे पर विचार करें, चर्चा करें और समाज में सकारात्मक माहौल बनाने में अपनी भूमिका निभाएं। उन्होंने राजनीतिक दलों को भी प्रेरित करने की बात कही ताकि वे पूरे उत्साह के साथ संसद में इस विधेयक को पारित कराने की दिशा में आगे बढ़ें।

    प्रधानमंत्री ने अपने विचारों में यह भी स्पष्ट किया कि महिलाओं के लिए विधायी संस्थाओं में आरक्षण केवल एक नीति नहीं, बल्कि समय की आवश्यकता है। उनका मानना है कि इससे लोकतंत्र अधिक जीवंत, सहभागी और संतुलित बनेगा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि इस दिशा में किसी भी प्रकार की देरी देश के समग्र विकास के लिए बाधक सिद्ध हो सकती है।

  • शहीद दिवस पर Narendra Modi का भावपूर्ण नमन अमर बलिदान की गाथा से गूंजा देश

    शहीद दिवस पर Narendra Modi का भावपूर्ण नमन अमर बलिदान की गाथा से गूंजा देश

    नई दिल्ली: शहीद दिवस के अवसर पर पूरे देश ने एक बार फिर अपने उन अमर वीर सपूतों को याद किया जिनके साहस और बलिदान ने भारत की स्वतंत्रता की नींव को मजबूत किया प्रधानमंत्री Narendra Modi ने इस मौके पर महान क्रांतिकारी Bhagat Singh Rajguru और Sukhdev Thapar को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका बलिदान राष्ट्र की सामूहिक चेतना में सदैव जीवित रहेगा

    प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में इन क्रांतिकारियों के अद्वितीय साहस और राष्ट्र के प्रति उनके अटूट समर्पण को याद किया उन्होंने कहा कि बहुत कम उम्र में ही इन वीरों ने देश के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया और यह साबित कर दिया कि सच्ची देशभक्ति किसी भी भय से ऊपर होती है औपनिवेशिक शासन के कठोर अत्याचारों के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य से कभी समझौता नहीं किया और निर्भीकता के साथ बलिदान का मार्ग अपनाया

    उन्होंने यह भी कहा कि इन क्रांतिकारियों के आदर्श आज भी देश के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं न्याय के प्रति उनकी निष्ठा देशभक्ति की भावना और अन्याय के खिलाफ उनका प्रतिरोध हर भारतीय के दिल में एक नई ऊर्जा का संचार करता है उनके विचार केवल इतिहास के पन्नों तक सीमित नहीं हैं बल्कि वर्तमान और भविष्य को दिशा देने वाले प्रकाश स्तंभ हैं

    प्रधानमंत्री द्वारा साझा किए गए संदेश में यह भी रेखांकित किया गया कि आज भी इन अमर शहीदों की गाथाएं देश के हर नागरिक को प्रेरित करती हैं बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक हर कोई उनके साहस और त्याग को याद करता है यह प्रेरणा ही है जो देश को आगे बढ़ने की शक्ति देती है और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने की भावना को मजबूत करती है

    भारतीय परंपरा और आध्यात्मिक विचारों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि जो लोग राष्ट्र के लिए अपने प्राणों का बलिदान देते हैं वे अमर हो जाते हैं उनका अस्तित्व समय और परिस्थितियों से परे चला जाता है और वे आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन जाते हैं उनका जीवन एक ऐसी सुगंध की तरह है जो पीढ़ी दर पीढ़ी फैलती रहती है और समाज को जागरूक और सशक्त बनाती है

    हर वर्ष 23 मार्च को मनाया जाने वाला शहीद दिवस हमें उस ऐतिहासिक क्षण की याद दिलाता है जब इन तीनों महान क्रांतिकारियों को अंग्रेजी हुकूमत द्वारा फांसी दी गई थी यह दिन केवल शोक का नहीं बल्कि गर्व और संकल्प का भी प्रतीक है यह हमें याद दिलाता है कि स्वतंत्रता की कीमत क्या होती है और इसे बनाए रखने के लिए हमें किस प्रकार समर्पित रहना चाहिए

    आज का भारत इन वीरों के सपनों को साकार करने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है और उनका बलिदान हर नागरिक के लिए एक प्रेरणा स्रोत बना हुआ है शहीद दिवस केवल एक स्मरण नहीं बल्कि एक संकल्प है कि हम उनके आदर्शों पर चलकर एक मजबूत समृद्ध और आत्मनिर्भर राष्ट्र का निर्माण करेंगे

  • PM मोदी का विनिर्माताओं से आव्‍हान, कहा- भारत के लिए खुले हैं अवसरों के द्वार, क्वालिटी को बनाएं महामंत्र

    PM मोदी का विनिर्माताओं से आव्‍हान, कहा- भारत के लिए खुले हैं अवसरों के द्वार, क्वालिटी को बनाएं महामंत्र

    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने भारतीय उद्योग जगत से ‘गुणवत्ता’ को अपना महामंत्र बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में दुनिया विनिर्माण के क्षेत्र में विश्वसनीय और मजबूत भागीदारों की तलाश कर रही है, और यह भारत के लिए एक बड़ा अवसर है। उन्होंने कहा कि हाल में विभिन्न देशों के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) से भारतीय उद्यमियों और निर्यातकों के लिए अवसरों के नए द्वार खुले हैं, लेकिन इनका लाभ तभी उठाया जा सकता है जब भारतीय उत्पाद गुणवत्ता के उच्चतम मानकों पर खरे उतरें।

    प्रधानमंत्री मंगलवार को बजट 2026-27 पर आयोजित दूसरे वेबिनार का उद्घाटन कर रहे थे। इस दिनभर चलने वाले वेबिनार का विषय “आर्थिक वृद्धि को निरंतर संभालना और सशक्त करना” रखा गया है, जिसमें चार अलग-अलग सत्र आयोजित किए जा रहे हैं।

    एफटीए से खुले नए अवसर, आत्मविश्वास से बढ़ें उद्योग
    प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने कई देशों के साथ एफटीए किए हैं और इससे देश के लिए बड़े अवसर पैदा हुए हैं। ऐसे में उद्योग जगत की जिम्मेदारी है कि वह गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता न करे। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “आपका एक ही महामंत्र होना चाहिए—क्वालिटी, क्वालिटी और अधिक क्वालिटी।”

    उन्होंने उद्योगों से अपील की कि वे इन अवसरों का लाभ उठाने के लिए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें, नई प्रौद्योगिकियों को अपनाएं और अनुसंधान एवं विकास पर खर्च बढ़ाएं। उनका कहना था कि अनुसंधान पर कंजूसी करने के बजाय निवेश बढ़ाना समय की मांग है।

    विश्वस्तरीय से भी बेहतर उत्पाद देने की जरूरत
    प्रधानमंत्री ने भारतीय विनिर्माताओं से विश्वस्तर से भी बेहतर गुणवत्ता के उत्पाद प्रस्तुत करने का आह्वान करते हुए कहा कि गुणवत्ता पर सबसे अधिक समय, साधन और बुद्धि खर्च की जानी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि उद्योग जगत विश्व बाजार की जरूरतों का गहन अध्ययन और विश्लेषण करे तथा उसी अनुरूप अपनी विनिर्माण क्षमता विकसित करे।

    उन्होंने कहा कि आज वैश्विक अर्थव्यवस्था में बड़ा परिवर्तन हो रहा है और बाजार अब केवल लागत को नहीं देखते, बल्कि टिकाऊ और स्वस्थ उपायों को भी महत्व देते हैं। भारत इस बदलते परिदृश्य में एक विश्वसनीय विनिर्माण केंद्र के रूप में उभर सकता है।

    वेबिनार में चार अहम सत्र
    इस वेबिनार में चार प्रमुख सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। पहला सत्र विनिर्माण और उद्योगों के स्तर को उन्नत करने तथा रणनीतिक क्षेत्रों पर केंद्रित है। दूसरा सत्र सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों के लिए ऋण और बाजार सुविधाओं पर आधारित है। तीसरा सत्र नगरों के आर्थिक इलाकों की योजना से जुड़ा है, जबकि चौथा सत्र अवसंरचना विकास, लॉजिस्टिक्स और किराया जैसे विषयों पर केंद्रित है। उद्घाटन सत्र में प्रधानमंत्री ने बजट में सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्यमों, अवसंरचना, बायोफार्म, मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स तथा कार्बन कैप्चर एवं स्टोरेज के विकास के लिए की गई पहलों का विशेष उल्लेख किया।

    विकसित भारत के लिए साझेदारी जरूरी
    प्रधानमंत्री ने विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों, उद्योग जगत और संस्थानों के बीच पूर्ण तालमेल पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह लक्ष्य केवल साझेदारी के माध्यम से ही हासिल किया जा सकता है और सभी हितधारकों को मिलकर काम करना होगा।